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Title : Need to include Bhojpuri language in the Eighth Schedule to the Constitution.
योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): विश्व की सबसे बड़ी बोली भोजपुरी लगभग 70 हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में 16 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश तथा झारखण्ड में इसका प्रयोग व्यापक है। नेपाल के तराई क्षेत्र, मारीशस, फिजी, ट्रिनिडाड, थाईलैण्ड, हालैण्ड, मलेशिया तथा सिंगापुर सहित27 देशों में भी इसका व्यापक आधार है। ऋग्वेद में महर्िा विश्वमित्र द्वारा “भोज” शब्द जिससे भोजपुरी बनी, का उल्लेख तो है ही, महाभारत सहित विभिन्न धर्म-ग्रन्थों से होते हुए मालवा के राजा भोज, उज्जैन के भोज, गुर्जर प्रतिहार भोज, काशी तथा डुगराँव के भोज राजाओं का इतिहास भोजपुरी की व्यापकता, विशालता और प्राचीनता का गवाह है।
संत साहित्यकारों गुरू गोरखनाथ जी, चौरंगीनाथ जी, योगीराज भतृहरि, कबीरदास, कमलदास, धरमदास, पलटूदास, भीखा साहेब जैसे सैंकड़ों सन्त साहित्यकारों, विचारकों और चिन्तकों ने अपनी लोक कथाओं, गीतों, लोकगाथाओं और लोकोक्तियों से भोजपुरी की पीढ़ी दर पीढ़ी एक कंठ से दूसरे कंठ तक पहुंचाया। महापंडित राहुल सांकृत्यायन, डॉ भगवतशरण उपाध्याय और चतुरी चाचा जैसे रचनाकारों ने भोजपुरी गद्य साहित्य को नयी ऊंचाईयाँ प्रदान की।
महोदया, जैसा कि विदित है भारतीय संविधान के मूल रूप में 14 भाााएं ही आठवीं सूची में थी। बाद में इसमें संशोधन कर सिन्धी, कोंकड़ी, नेपाली, मैनपुरी, मैथिली, डोगरी, संथाली और बोडो को भी शमिल कर लिया गया। भोजपुरी संस्कृति इन सभी भाााओं का आदर करते हुए यह जानना चाहती है कि जिस वजह से इन बोलियों को इस सूची में शामिल किया गया उनमें से क्या कोई एक भी तत्व ऐसा है जिसे भोजपुरी पूरी न करता हो स्वाधीनता आन्दोलन में भोजपुरिया क्षेत्र के राजा और रचनाकर सभी अंग्रेजों को भगाने के लिए कृतसंकल्प थे। वीर कुँवर सिंह, शहीद बन्धू सिंह, चित्तू पाण्डेय, मंगल पाण्डेय जहां अपने पराक्रम से तो फिरंगियाँ, चरखवा, बरोहिया आदि भोजपुरी साहित्यकार अपनी रचनाओं में देशप्रेम की लौ जला रहे थे।
महोदया, हम 16 करोड़ लोगों की भावनाओं को समझते हुए भोजपुरी का तत्काल आठवीं सूची में शामिल किया जाये।