12.13 hrs.
Title: Regarding alleged claim by China on some parts of Indian territory (Ladakh and Uttaranchal).
(मछलीशहर): अध्यक्ष महोदय, देश इस समय बहुत ही खतरे में पड़ गया है। एक तरफ पाकिस्तानी घुसपैठिए आ रहे हैं।…( व्यवधान)
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN (CHIRAYINKIL): Sir, I have given a notice…… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : अब मैंने उनको बुला लिया है। Let him complete.
…( व्यवधान)SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : Sir, I have given a notice on a very important matter of national importance…… (Interruptions)
श्री चन्द्रनाथ सिंह : हमारा विषय भी बहुत महत्वपूर्ण है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Radhakrishnan, I have received your notice.
श्री चन्द्रनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, बंगलादेश जैसे छोटे से देश ने हमारे बारह बी.एस.एफ. के जवानों को निर्दयतापूर्वक मार दिया। इस सरकार ने पत्र लिखा लेकिन आज तक कुछ नहीं कर पाई। देहात में हम लोगों की भाषा में एक कहावत है – कमज़ोर की महरारू सबकी भौजाई। जो कमज़ोर होता है, उस पर सब चढ़ाई कर लेते हैं।…( व्यवधान)
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल (कानपुर) : अध्यक्ष महोदय, आपने समझा है कि इन्होंने क्या कहा है।…( व्यवधान)
श्री चन्द्रनाथ सिंह : इसको मैं समझाता हूं। जो कमज़ोर होता है, उस पर सब चढ़ाई कर लेते हैं। इस समय जो केन्द्र सरकार बैठी हुई है, वह इतनी कमज़ोर है कि न तो इसकी विदेश नीति ठीक चल रही है, न गृह नीति सुद्ृढ़ चल रही है। एक तरफ पाकिस्तान हमारे ऊपर कब्जा कर रहा है, दूसरी तरफ बंगलादेश आंख दिखा रहा है। एक सबसे बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है। आज राष्ट्रीय सहारा अखबार के मुख्य पृष्ठ पर निकला है कि चीन भारतीय सीमा पर घुसपैठ कर रहा है। मैं आपके माध्यम से आगाह करना चाहता हूं कि अगर यह सोई हुई सरकार नहीं जागी तो निश्चित रूप से चीन हमारे ऊपर दावा ठोक रहा है। हमारी लद्दाख सीमा पर, उत्तरांचल सीमा पर ३८५ वर्ग किलोमीटर पर आज चीन दावा ठोक रहा है। अभी हाल में चीन के अधिकारियों और भारत के अधिकारियों की बातचीत हुई और हमारी अंतर्राष्ट्रीय सीमा का जो नक्शा पेश किया गया है, चीन ने उसे लेने से इंकार कर दिया और कहा है कि हम नक्शा बनाएंगे। हमारे लद्दाख में स्थित फागुन चौकी पर इस वर्ष ४४ बार चीनी सैनिक घुसे।
यह सरकार अभी तक इस बात को गम्भीरता से नहीं ले सकी है। वहां थाकुंग चौकी के पास पेगोंग झील है, चीन ने उस झील पर कब्जा कर लिया है और उसके सैनिक आकर घुस गये हैं और यह सरकार कुछ नहीं कर पाई है। उत्तरांचल में बाराहोती इलाके में ३७८ किलोमीटर भूभाग पर चीन अपना दावा ठोक रहा है कि यह हमारा इलाका है। धीरे-धीरे हमारे देश में चीन घुसता चला आ रहा है और भारत सरकार इसे गम्भीरता से नहीं ले रही है। रिमखिम चौकी पर चीन ने छ: बार प्रवेश किया है, वहां चीनी सीमा में घुसे हुए हैं। हम समझते हैं कि हमारे सैनिकों पर रक्षा मंत्री का या भारत सरकार का दबाव होगा कि आप मत बोलिये, इसलिए धीरे-धीरे वे अपना कब्जा हमारे क्षेत्र में बढ़ाते चले जा रहे हैं। हमारे नक्शे को वे तैयार कर रहे हैं, जो चीन ने नक्शा तैयार किया है, उसमें ट्रेक जोन, बर्तसा, हॉट स्िंप्रग, चुसुल, थाकुंग, दुंगटी, डेमचाक, चूमर, छोजन, रिमखिम और फोबरंग आदि शामिल हैं। इन सब चौकियों पर वे अपना कब्जा दिखा रहे हैं। इस देश में बैठे हुए सत्ता के लोगों के लिए यह कितने शर्म की बात है कि हमारी सीमा पर चीन अपना दावा ठोक रहा है और भारत सरकार उस पर कुछ नहीं कर रही।…( व्यवधान) मैं एक अन्तिम बात कहकर एक मिनट में खत्म कर रहा हूं।
मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं, सरकार आज ही इसका जवाब दे। मैं समझता हूं कि यह सरकार इतनी कमजोर है, इतनी निकम्मी सरकार है कि यह हमारे देश को बर्बाद कर देगी। एक तरफ विदेशी व्यापारी हमारे देश में घुसकर कब्जा कर रहे हैं, दूसरी तरफ हमारी सीमा को खतरा है। यह सरकार अगर रह गई तो हिन्दुस्तान कई टुकड़ों में बंट जाएगा। एक तरफ पाकिस्तान है, एक तरफ चीन है और एक तरफ बंगलादेश है, लेकिन आज तक यह सरकार कोई जवाब नहीं दे सकी है। इसका बड़ा उदाहरण यह है कि यह सरकार सोती रही और ३०० किलोमीटर तक कारगिल तक पाकिस्तान घुस गया और सरकार ने दो साल बाद उस पर ध्यान दिया। अगर चीन के मामले में सरकार ध्यान नहीं देगी तो हमारी तमाम सीमाओं पर विदेशी घुस जाएंगे। यह हमारे लिए बड़े शर्म की बात है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : जो भी इनके साथ एसोसिएट करेंगे, उनका नोटिस होना चाहिए।
(गोरखपुर) : महोदय, आज जो समाचार-पत्रों में आया है, राष्ट्रीय सहारा में जो कुछ छपा है, निश्चय ही यह गम्भीर मामला है। हम सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हैं कि समाचार-पत्र में जो छपा है कि लद्दाख और उत्तरांचल के कुछ भूभाग पर चीन ने अपना दावा दर्शाया है, इसमें कितनी सच्चाई है ? क्या पुन: कारगिल जैसी घटना की पुनरावृत्ति होने का प्रयास तो नहीं है। क्या चीन अपनी साम्राज्यवादी विस्तार की नीति पर कार्य नही कर रहा है, उसको दोहराने का प्रयास तो नहीं कर रहा है। इसलिए आवश्यक है कि इस मुद्दे को गम्भीरता से लिया जाये और चीन की विस्तारवादी नीति पर अंकुश लगाया जाये। उत्तरांचल और लद्दाख के भूभाग पर चीन ने अपना कब्जा दिखाने का जो प्रयास किया है, उसे रोकने का प्रयास किया जाये।…( व्यवधान)
श्री चन्द्रनाथ सिंह : महन्त जी को हमारा समर्थन करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
(खजुराहो): अध्यक्ष जी, जो मुद्दा यहां उठाया गया, उससे सम्बन्धित भावनाओं को सरकार तक पहुंचा दिया जाये। मैं स्वयं भी इस पर चिन्तित हूं। सवाल यह है कि हमारे एक मित्र राष्ट्र से सम्बन्धित यह एक ऐसी सूचना है, जो स्वभावगत तरीके से बहुत संवेदनशील है। मैं समझता हूं कि इस पर हमें बहुत गम्भीरता से, बहुत जिम्मेदारी से कोई बात कहनी या सुननी चाहिए। यह बेहतर होता कि सरकार इस मामले में विजीलेंट होती और वह इसे ऑथेण्टिकेट करती, जो भी हम कह रहे हैं। एक समाचार-पत्र की कटिंग में जो समाचार आया है, उसके आधार पर कह रहे हैं। यह कोई ऑथेण्टिक विषय वस्तु नहीं है कि वास्तव में ऐसा हुआ है कि नहीं हुआ है। हमें इस मामले में थोड़ा सा सोचकर, थोड़ी गम्भीरता से विचार करना होगा। इसका इम्प्लीकेशन फॉरेन पॉलिसी में हो सकता है, इसलिए मेरा आपसे निवेदन है कि इस मामले को सरकार गम्भीरता से देखे और अगर यह सूचना ऑथेण्टिक है तो उसके ऊपर स्टेटमेंट दे।
…( व्यवधान)
(वैशाली): जो विषय उठाया गया है, सरकार इस पर स्थिति स्पष्ट करे। इसके मायने सरकार का कोई ध्यान नहीं है, कोई सुन नहीं रहा है, इस पर कौन जवाब देगा, कोई नोटिस नहीं लेता। सरकार सीरियस नहीं है, लापरवाह है तो लोग कैसे भरोसा करें कि सीमा पर भी ये मुस्तैद हैं, लापरवाह नहीं हैं।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री (डॉ. सत्यनारायण जटिया) : माननीय अध्यक्ष जी, यह विषय मैंने नोट कर लिया है। मैं सम्बन्धित मंत्री को इसके बारे में जानकारी दूंगा।
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