>
Title : Need to streamline the reservation of seats in Panchayats elections in Jharkhand.
श्री सुनील कुमार महतो (जमशेदपुर) :अध्यक्ष महोदय, झारखंड में आदिवासी एवं गैर आदिवासी के बीच दरार पैदा करने के लिए वर्तमान झारखंड सरकार ने झारखंड के पंचायत चुनाव में एकपक्षीय आरक्षण व्यवस्था लागू कर दी है जिसके कारण आज झारखंड में आदिवासी एवं गैर आदिवासी के बीच तनाव है, जो कभी भी अशांति का कारण बन सकता है। झारखंड में ४५५८ पंचायत क्षेत्रों का चुनाव हो रहा है जिसमें से राज्य सरकार ने २०२६ पंचायतों को आदिवासी के लिए आरक्षित कर दिया है। झारखंड सरकार ने पंचायतों के चुनाव में एक पक्षीय निर्णय लेकर कई पंचायत क्षेत्रों को आदिवासी के लिए आरक्षित कर दिया है। इन क्षेत्रों में आदिवासी बहुत ही कम मात्रा में हैं। वहां महिलाओं के आरक्षण में भी पक्षपात किया गया है। जहां आदिवासी लोगों के लिए आरक्षित है वहां पर महिलाओं को आरक्षण नहीं किया गया है और जहां पर अनारक्षित क्षेत्र है वहां पर महिलाओं को आरक्षण दिया गया है। इस आरक्षण नीति में हरिजनों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। जहां पर ७० प्रतिशत से ज्यादा हरिजन हैं वहां भी हरिजन के लिए आरक्षित नहीं किया गया है। इस प्रकार से झारखंड में पंचायत का जो चुनाव होने जा रहा है, उनमें काफी विसंगतियां हैं। वहां सभी वर्गों को ठीक प्रकार से प्रतनधित्व नहीं दिया गया है जिसके कारण समाज में काफी असंतोष है। पंचायतों के चुनाव में जो पक्षपात अपनाया गया है, जो आरक्षण पद्धति अपनाई गयी है उससे कई जन आन्दोलन हो रहे हैं, झारखंड बंद हो रहा है।
अध्यक्ष महोदय, सबसे दुखदायी बात है कि प्रधान मंत्री, मुख्य मंत्री, जैसा ही मुखिया का पद एकल पद है और उस पद का आरक्षण नहीं होना चाहिए । आज हम लोग सोचते हैं कि मुखिया पर ही गांव के विकास की मुख्य जिम्मेदारी है और मुखिया का पद भी आरक्षण कर राज्य सरकार गांव में सत्ता का विकेन्द्रीकरण करना चाहती है। अगर हम इस पद का रिजर्वेशन कर दें तो निश्चित रूप से ये आंदोलन होगा। आज झारखंड बंद हो रहा है, जाम हो रहा है।…( व्यवधान) समाज को आपस में तोड़कर विकास नहीं किया जा सकता बल्कि समाज को जोड़कर विकास किया जा सकता है। आज झारखंड में आदिवासी और गैर आदिवासी को आपस में लड़ा दिया गया है। वहां मात्र २४ परसेंट आदिवासी हैं जबकि ७६ परसेंट गैर आदिवासी हैं। आज ७६ परसेंट लोगों को इस रिजर्वेशन से वंचित कर दिया गया है। इस कारण झारखंड में आग लगी हुई है।
हमारी आपसे मांग है कि वर्तमान सरकार इसमें हस्तक्षेप करे और ऐसे चुनाव पर रोक लगाई जाय्ो[r21] ।
MR. SPEAKER: Shri Varkala Radhakrishnan.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : आपने बहुत अच्छा बोला।
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : अध्यक्ष महोदय, प्रधान मंत्री जी इसे बदल सकते हैं। कोई रूल अमेंड कर दें, नहीं तो वहां दिक्कत हो जाएगी।
अध्यक्ष महोदय : ठीक है, इन्होंने सवाल उठाया है, आप लोग मदद करते हैं। ठीक है।
श्री जुएल ओराम (सुन्दरगढ़) : अध्यक्ष जी, मुझे भी बोलने का अवसर दीजिए।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप एसोशिएट कर लीजिए।
श्री जुएल ओराम : एसोशिएट नहीं, आप मुझे मौका दीजिए।
अध्यक्ष महोदय : आपका तो कोई नोटिस नहीं है।ऐसे नहीं देंगे।
श्री जुएल ओराम : आपको तो कुछ पता नहीं है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : हमें कुछ पता नहीं है, आपको तो रूल बुक का भी पता नहीं है।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Not to be recorded. Only what Shri Varkala Radhakrishnan says will be recorded.
(Interruptions)* …
श्री चन्द्र शेखर दूबे (धनबाद) : अध्यक्ष जी, मेरा भी नोटिस है। कानून क्या एकतरफा बन गया है?…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप क्या बात कर रहे हैं ?
श्री चन्द्र शेखर दूबे :सर, हमने भी नोटिस दिया है।
* Not Recorded.
अध्यक्ष महोदय : नोटिस दिया है तो क्या हो गया ?
श्री चन्द्र शेखर दूबे :सर, जो अभी झारखंड के बारे में कहा गया है,…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : रिकार्ड नहीं हो रहा है। आप एसोशिएट करना चाहते हैं तो आपका नाम रिकार्ड हो जाएगा।
श्री चन्द्र शेखर दूबे : सर, हमने भी नोटिस दिया है।
MR. SPEAKER: Very well, let me come to the next subject. I will come to the next subject. Almost 50 hon. Members have been called today. Even then everybody is threatening me.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : पचास लोगों ने नोटिस दिया है। This is the response that I am getting.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Varkala Radhakrishnan, you speak and please be brief. I have to be angry.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nobody thinks of this House, the image of this House outside.
… (Interruptions)
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN (CHIRAYINKIL): I take this opportunity to highlight an important issue so long as the State of Kerala is concerned. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Merely harassing the Chair does not help.