Title: Need for early settlement of ownership rights of properties in Jammu and Kashmir.
वैद्य विष्णु दत्त शर्मा
(जम्मू) : अध्यक्ष महोदय, केन्द्र की सरकार यह मानती है कि जम्मू-कश्मीर स्टेट की अब कोई समस्या नहीं, यह भारत का अभिन्न अंग है और इस विषय का प्रस्ताव राज्य विधान सभा में भी पास हो चुका है। १९४७ में देश विभाजन के पश्चात पाकिस्तान चले गए लोगों की सम्पत्ति को संभालने तथा व्यवस्था के लिए प्रत्येक प्रान्त में कस्टोडियन डिपार्टमैंट (विभाग) बने थे। कुछ वर्षों बाद पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आए लोगों को जमीन और मकान एलाट करके सभी को पूर्ण स्वामित्व के अधिकार देकर आबाद कर दिया गया और यह विभाग लगभग सभी प्रान्तों में समाप्त हो गया। किन्तु ५३ वर्ष बीत जाने के पश्चात भी जम्मू और कश्मीर से पाकिस्तान चले गये लोगों की सम्पत्ति उन्हीं के नाम सुरक्षित है और कस्टोडियन विभाग मौजूद है। यह विभाग किस आशा में रखा गया है। पाकिस्तान या कश्मीर स्टेट के उस भाग से जिस पर पाकिस्तान ने अनाधिकार कब्जा कर रखा है, से आये विस्थापितों को उन सम्पत्तियों को अलाट करके स्वामित्व के अधिकार दिये जाएं और कस्टोडियन विभाग समाप्त कर दिया जाए।