Judgements

Regarding End Use Monitoring Arrangements Signed Between India And … on 21 July, 2009

Lok Sabha Debates
Regarding End Use Monitoring Arrangements Signed Between India And … on 21 July, 2009


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12.03 hrs.

Title : Regarding end use monitoring arrangements signed between India and USA.

MR. DEPUTY SPEAKER: Now, the House will take up urgent matters of public importance.

            Shri Yashwant Sinha.

श्री यशवंत सिन्हा (हज़ारीबाग): डिप्टी स्पीकर साहब, मैं एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा सदन के सामने रखना चाहता हूं। अमरीका के विदेश मंत्री का भारत दौरा अभी-अभी समाप्त हुआ है। उस दौरे के दरम्यान भारत और अमरीका के बीच में कई समझौते हुए हैं, जिन पर कल दोनों देशों के विदेश-मंत्रियों ने हस्ताक्षर किये हैं। उसमें एक समझौता है जिसे“एंड यूज मॉनिटरिंग एग्रीमेंट”  कहते हैं। इसकी पृष्ठभूमि यह है कि अमरीकी सरकार ने ऐसे आइटम्स की एक लिस्ट बनाई है जिसका उपयोग दोनों तरफ हो सकता है, डय़ूल उपयोग हो सकता है – सामरिक क्षेत्र में भी उपयोग हो सकता है, सिविल क्षेत्र में भी उपयोग हो सकता है। उनके देश का कानून है कि अगर वे डय़ूल यूज आइटम्स का किसी भी देश को एक्सपोर्ट करते हैं तो वहां पर जाकर, स्पॉट पर,वे उसका वैरीफिकेशन करेंगे कि डय़ूल यूज आइटम्स का सिविलियन यूज हो रहा है या सामरिक यूज हो रहा है।

      इसके लिए अपने देश के कानून को लागू करने के लिए जब वे दूसरे देशों के साथ समझौता करते हैं, तो एंड-यूज मोनिटरिंग एग्रीमेंट उनके साथ करते हैं, ताकि उनको यह अधिकार रहे कि उस देश में जा कर ऐसे उपकरणों का, टेक्नोलोजी का सत्यापन कर सकें कि वह देश उसका उपयोग कैसे कर रहा है। इस प्रकार का एक समझौता भारत सरकार ने अमरीका के साथ कल किया है। इसमें सबसे चिंता की बात यह है कि वह स्पाट पर जा कर फिजिकल वेरीफिकेशन करेंगे। मीडिया के माध्यम से हमें पता चला है कि भारत सरकार ने कहा है कि समय और स्थान हम तय करेंगे। अब समय के लिए तो हम समझ सकते हैं कि दोनों देशों की सुविधा के अनुसार तय किया जाएगा, लेकिन स्थान के बारे में भारत सरकार का कहना है कि अगर हवाई जहाज का इंस्पेक्शन होना है, तो हम एयरफोर्स बेस पर इंस्पेक्शन न करा कर, किसी सिविलियन बेस पर इंस्पेक्शन करा लेते हैं। मेरा सवाल है कि जो कारखाना बना है, जो फिक्स्ड एसेट है, जिसे आप उठा कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं ले जाएंगे, उस पर कैसे वैरीफिकेशन होगा? वहां आन दि स्पाट ही इंस्पेक्शन हो सकता है। इसमें सबसे चिंता का विषय यह है कि तीसरे मुल्कों से भी हम जो सामान मंगाते हैं, उसमें अगर अमरीकी डय़ुअल यूज आइटम लगा हुआ है, तो उसका भी इंस्पेक्शन करने का अधिकार अमरीका ले लेता है कि हमने रूस से मंगाया, हमने ब्राजील से मंगाया, फ्रांस से मंगाया। वे कहेंगे कि हम इनका भी इंस्पेक्शन करेंगे कि इनका सही इस्तेमाल हो रहा है या गलत इस्तेमाल हो रहा है। अमरीका में जो नए-नए शब्द इज़ाद होते हैं, उसमें एक शब्द फायरवाल है कि मिलिट्री यूज़ और नोन मिलिट्री यूज में यानी सिविलियन यूज़ में फायरवाल क्रियेट होना चाहिए। उस तरह का फायरवाल हमने क्रियेट किया या नहीं, इसकी भी जांच अमरीकी करेंगे।

      यह क्यों किया गया, क्योंकि अमरीका की रुचि जागी है भारत को डिफेंस इक्विपमेंट्स सप्लाई करने की। अभी सरकार के पास साढ़े दस बिलियन अमरीकी डालर के फाइटर प्लेन्स खरीदने का प्रस्ताव है। अमरीका इन्हें बेचने में रुचि रखता है। इसमें अमरीका की गरज़ है। मैं कहना चाहता हूं कि इसमें भारत की गरज़ नहीं है। इस कारण हम मजबूती के साथ भारत की तरफ से बातचीत करके समझौता कर सकते थे और अमरीका जो नाजायज मांग हम पर रख रहा है, उसे हम नकार सकते थे। लेकिन हमने ऐसा नहीं किया और उनकी बात मान ली। मैं सदन को आपके माध्यम से याद दिलाना चाहता हूं कि एक समय आया था, जब स्पेस में जाने के लिए हमें क्रायोजेनिक इंजन की आवश्यकता थी, जब हमें वैदर तथा दूसरे कामों के लिए सुपर कम्प्यूटर्स की आवश्यकता थी, अमरीका ने न केवल अपने यहां से उसका आयात मना कर दिया, बल्कि रूस पर भी दबाव डाला कि आप क्रायोजेनिक रोकेट टेक्नोलोजी भारत को नहीं देंगे। हमें वह टेक्नोलोजी नहीं मिली। मैं भारत के वैज्ञानिकों को बधाई देना चाहता हूं, उनका नमन करना चाहता हूं कि चाहे वह क्रायोजेनिक इंजन हो, चाहे सुपर कम्प्यूटर हो, हमारे वैज्ञानिकों ने ये चीजें भारत में बनाईं। हमें किसी दूसरे देश पर इनके आयात करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। आज कौन सी मजबूरी है कि हम इस बात को मान गए कि अमरीका के इंस्पेक्टर्स आएं और हमारी जितनी सामरिक फैसिलिटीज़ हैं, उनमें घूमें, उनका सत्यापन करें। मैं सरकार से मांग करता हूं कि यह जो एंड-यूज़ एग्रीमेंट हुआ है, टेक्नोलोजी वेरीफिकेशन एग्रीमेंट हुआ है, उसके बारे में सरकार सदन को विश्वास में ले और पूरी तरह से बताए कि क्या हुआ है। उस टैक्स्ट को सदन की टेबल पर रखा जाए, ताकि हम लोग उसका अध्ययन कर सकें और सरकार ने अगर गलती की है, तो मैं सरकार से निवेदन करूंगा कि वह इस एग्रीमैंट को रेक्टीफाई न करे, इसे अंजाम में न लाए। धन्यवाद।

SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA):  Sir, this agreement which was signed yesterday is a very serious issue. I associate myself with what Shri Yashwant Sinha has said and also I demand that the Government should lay on the Table of the House the text of the agreement; and that the Government should also clarify how such an agreement was signed by our representative.

 

उपाध्यक्ष महोदय : आपने जो अपना नोटिस दिया है, उसमें बोलिए। यह तो हो गया।

SHRI BASU DEB ACHARIA :  There should be a discussion in the House; it seems that the agreement is against the interests of our country; that agreement should be nullified. … (Interruptions)

उपाध्यक्ष महोदय : आपका विचार इस पर आ गया है। आप अपने विषय पर बोलिए।

SHRI GURUDAS DASGUPTA (GHATAL): I fully associate with the issue. This is a Himalayan blunder committed by the Government. It is surrender of India’s sovereignty. … (Interruptions)

उपाध्यक्ष महोदय :जो जो माननीय सदस्य इससे एशोसिएट करना चाहते हैं, वे अपने नाम दे दें।

SHRI GURUDAS DASGUPTA : We want a statement from the Government immediately. … (Interruptions)

SHRI BASU DEB ACHARIA :  The Government should make a statement here before the House rises for the day. … (Interruptions)

श्रीमती सुषमा स्वराज (विदिशा): उपाध्यक्ष जी, संसदीय कार्य मंत्री यहां बैठे हैं। इसलिए मैं यह चाहूंगी क्योंकि यहां रक्षा मंत्री नहीं हैं, विदेश मंत्री यहां नहीं हैं, प्रधान मंत्री भी नहीं हैं। लीडर ऑफ दि हाउस आ गये हैं, इसलिए या तो नेता सदन बोलें नहीं तो संसदीय कार्य मंत्री हमें बताएं कि इस पर जवाब आज कब आएगा? जवाब आज ही चाहिए। कितने बजे बोलेंगे? बता दें। संसदीय कार्य मंत्री रैस्पांड करें।…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी): उपाध्यक्ष महोदय, कल भी हमने इस सवाल को उठाया था। मुझे खुशी है कि यशवंत सिन्हा जी ने आज इसे और भी गंभीरता से लिया है। एंड-यूज मोनीटरिंग का जो यहां एग्रीमेंट हुआ है, यह केवल सदन तक नहीं है। सदन तो पूरे देश का एक दर्पण है। पूरी जनता में भी यह मामला चला गया है। आम लोग इस बात को पूछते हैं कि आखिर हिन्दुस्तान हर बात में आत्मसमर्पण कर रहा है चाहे वह अमेरिका के सामने हो या कोई भी हो। जब यह बता दिया गया है कि हमारा देश कई मामलों में आत्मनिर्भर है और यहां के वैज्ञानिकों को अवसर दिया जाए। यह बात मैंने उस दिन भी कही थी और आज भी कह रहा हूं। हिन्दुस्तान के वैज्ञानिक और शिक्षाविद दुनिया में किसी से पीछे नहीं हैं लेकिन उनको अवसर नहीं दिया जा रहा है। विदेशों पर विश्वास किया जा रहा है। पता नहीं विदेशी वैज्ञानिक और चीजें क्यों पसंद आ रही हैं?हमारा हिन्दुस्तान किसी से पीछे नहीं है। आप देख रहे हैं कि हथियारों के मामले में मिसाइल भी हमारे देश के ही वैज्ञानिक और राष्ट्रपति पद पर पहुंचने वाले व्यक्ति ने ही बनायी है। इसी तरह से वैज्ञानिकों को अवसर नहीं दिया जा रहा है। इसलिए हम इतना जरूर कहेंगे कि माननीय नेता सदन ने कल कहा था कि हम इसी सत्र में इसे पेश करेंगे और बहस भी कराएंगे। इसलिए हमारी अपील है कि आज ही बहस हो जानी चाहिए। इस मामले पर तत्काल बहस हो जानी चाहिए। यह बहुत ही महत्वपूर्ण मामला है। देश के हितों के खिलाफ काम हो रहा है और देश के हितों के खिलाफ किसी बात को हम लोग पसन्द नहीं कर सकते हैं। इसलिए हम चाहते हैं कि आज ही इस पर बहस होनी चाहिए।…( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय :मुलायम सिंह जी, आपका हो गया। आप बैठ जाइए।

श्री शरद यादव (मधेपुरा): उपाध्यक्ष महोदय, मैं यशवंत जी का और सभी सदन के लोगों की जो भावना है, उसके साथ कहना चाहूंगा कि सरकार चाहे वह बाहर समझौता कर रही है और चाहे वह भीतर समझौता कर रही है, विदेश मंत्री फॉरेन सैक्रेटरी हिलेरी क्लिटन यहां आई हुई हैं, सदन चल रहा है और यशवंत सिन्हा जी ने एंड-यूज मोनीटरिंग का जो मामला उठाया, सारे सदन की चिंता उनके साथ है। इधर से माननीय सदस्य ने और भाई मुलायम सिंह जी ने अभी ठीक कहा। इस पर सरकार बयान देने का काम तत्काल करे। यह चिंता बढ़ती जा रही है। भारत जो इतना बड़ा देश है, उसकी जो विदेश नीति है, वह एक तरफ झुकती जा रही है और इतनी झुक रही है कि हर सवाल पर हम हर तरह से झुक रहे हैं और ऐसा लग रहा है अमरीका की जो ताकत है, उसके सामने हम अपने राष्ट्रीय हितों का पूरी तरह से समर्पण कर रहे हैं।

      हम समर्पण कर रहे हैं। प्रणब बाबू यहां हैं। सारे देश के विपक्ष ने चिंता व्यक्त की है, चाहे यह हमारी तरफ से हो, वामपंथी दल की तरफ से हो या और साथियों की तरफ से हो। कुछ मामले ऐसे होते हैं जिनसे देश का मान-सम्मान और सुरक्षा जुड़ी होती है। हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बीच जो समझौता हुआ है और जो लगातार बयान आ रहे हैं, इन सब चीजों से पूरा सदन और पूरा देश चिंतित है। सरकार को खुद ही, अपने आप ही, इस सवाल के बारे में तत्काल बयान देकर सारी स्थिति को पूरी तरह से पारदर्शी बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।

      मैं आपके माध्यम से निवेदन करूंगा कि अभी तत्काल आपको जरूर इस बारे में कुछ कहना चाहिए क्योंकि जिस तरह से इन्होंने बात कही है वह चिंता का विषय है। इस चिंता को आप अकेले अपनी मत मानिए, यह देश की चिंता है। हमने 60 वर्ष से अपनी तरह की हैसियत दुनिया में बनाई है और यह पूरी तरह से हिल रही है, एक पक्ष में जा रही है। मैं नेता सदन से कहूंगा कि वे इस बारे में तत्काल बयान दें।

SHRI B. MAHTAB (CUTTACK): Mr. Deputy Speaker, Sir, the apprehension that has been expressed in this House by a number of Leaders from different Parties, the apprehension that is also being reflected in the Media is a cause of concern and this cause of concern can only be mitigated if the Prime Minister or the Government comes out with a Statement today in this House.  The cause of concern is not only for the ‘end-use’ and the term that has been used as the ‘fire ball’ by the United States of America but I would say the cause of concern is when the House is in Session and such type of Agreement is being done, the House is not taken into confidence.  We are raising it today after the signatures of both the parties have been done.  I would request the Government not to indulge in such activities and I would also fully associate by the concern that has been raised by Shri Yashwant Sinha.

श्री लालू प्रसाद (सारण): माननीय सभापति महोदय, यह सवाल किसी पार्टी का नहीं है, यह सवाल देश का है। देश की अखंडता, सुरक्षा और स्वाभिमान का सवाल है। इस बारे में सभी पार्टी के नेताओं ने आशंका ही नहीं की बल्कि पूरी जिम्मेदारी के साथ अपनी बात को रखा है। मैं इससे अपने को संबद्ध करते हुए आपको और सदन को याद दिलाना चाहता हूं कि सद्दाम हुसैन के पास, इराक के पास कोई खतरनाक हथियार नहीं थे, कैमिकल भी नहीं था। हिन्दुस्तान ही नहीं दुनिया की सबसे बड़ी पंचायत, यूएनओ, के लोग जांच करने आए। सुरक्षा परिषद आई, सब चीजों की जांच की लेकिन कुछ नहीं मिला लेकिन सद्दाम हुसैन को फांसी दे दी गई, देश को दखल कर दिया। देश की सुरक्षा से जुड़ा इतना बड़ा सवाल है इसलिए सरकार को बिना विलंब किए हुए सदन के माध्यम से पूरे देश को आज ही बता देना चाहिए। हम जो भी सामान खरीदेंगे उसकी जांच करने अमरीका के इंस्पेक्टर आएंगे। वे हमारे हथियारों का लेखाजोखा देखेंगे और देखेंगे कि कहां से क्या-क्या किया गया। वे ही सब हिसाब-किताब लेंगे। यह बड़ी खतरनाक बात है। हमारी सरकार से अपेक्षा है कि तत्काल आज ही सफाई दे देनी चाहिए ताकि देश को पता चल जाए क्योंकि यह मामूली सवाल नहीं है।

      महोदय, मैं उस समय केरल में था, जब सद्दाम हुसैन को फांसी दी जा रही थी। हमने दिन भर भोजन नहीं किया था। उसी दिन दुनिया को यह चेतावनी मिल गई थी कि जो भी अमरीका के खिलाफ बोलेगा उसका यही हश्र होगा। इसके लिए बकरीद का दिन चुना गया था। हम अपना स्वाभिमान और प्रतिष्ठा कहां गंवाने जा रहे हैं?

अगर हमने दस्तखत किये हैं तो बिना छिपाये हुए बात को साफ-साफ आज ही सदन के सामने रख देना चाहिए, ताकि फिर हम लोग सब उस पर विचार कर सकें।

DR. M. THAMBIDURAI (KARUR): Hon. Deputy-Speaker, Sir, our Party, AIADMK is also concerned about the agreement that has been signed by the Government.  When the Session is there, all the Members of this House, and the whole nation is interested to know what is happening in regard to this.  Therefore, I would request that the Government must lay on the Table of the House the agreement which has been signed.  The Government must not succumb to the pressure of any foreign country.  Therefore, I would request that immediately the Government must come forward to lay the statement on the Table of the House.

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Gurudas Dasgupta to speak.

… (Interruptions)

SHRI GURUDAS DASGUPTA : He did not call me.  I made a comment… (Interruptions).  Sir, it is unbelievable that a great country like India should bow down to the pressure of America.  It is incredible;  it is outrageous and it is a surrender of Indian sovereignty… (Interruptions)

उपाध्यक्ष महोदय : आप बोल चुके हैं, दोबारा मत बोलिये। आप पहले बोल चुके हैं।

…( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : श्री नागेश्वर राव, आप बोलिये।

…( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : आपका नाम नहीं बुलाया गया है। आपकी बात रिकार्ड में नहीं जा रही है। हमने आपको नहीं बुलाया है, आपकी बात रिकार्ड में नहीं जा रही है।

…( व्यवधान) *

श्री नामा नागेश्वर राव (खम्माम): उपाध्यक्ष महोदय, जो इश्यु अभी सदन में आया है, हम तेलुगु देशम पार्टी की तरफ से अपने आपको उससे पूरी तरह एसोसिएट करते हैं। हर बार जब सदन का सत्र चल रहा होता है, तभी यह सरकार ऐसा करती है। इससे पहले भी जब सरकार ने पैट्रोल के रेट्स बढ़ाये तो हाउस चल रहा था। अभी सरकार ने जो एग्रीमैन्ट किया है, यह हाउस के चलते हुए किया है और हाउस को अंधेरे में रखकर किया है। इसलिए सदन में जो इश्यु आया है, हम उससे अपने आपको फुल्ली एसोसिएट कर रहे हैं।

 

* Not recorded

THE MINISTER OF FINANCE (SHRI PRANAB MUKHERJEE): As some hon. Members and leaders of various groups have expressed their concerns about the agreement between the Government of India and the USA on three issues, I would like to assure the House that before the rising of the House, this day, the Government will make a statement… (Interruptions)

श्री शरद यादव: आज ही क्यों नहीं करेंगे?…( व्यवधान)

SHRI PRANAB MUKHERJEE:  I have said that before the rising of the House the Government will make a statement… (Interruptions)