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Title : Need to bring a comprehensive legislation banning cow slaughter in the country.
योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर) : महोदया, अपनी सरलता और उपयोगिता के कारण गोवंश की महत्ता प्राय: सभी सभ्य देशों में न्यूनाधिक रूप से विद्यमान है। भारत जैसे धर्म-परायण एवं कृषि प्रधान देश में तो जननी और जन्मभूमि के समान लोक वंदनीय माता के रूप में गौ और गोवंश की महत्ता अनादिकाल से लौकिक और पारलौकिक सभी द्ृष्टियों से सुप्रतिष्ठित है, जिसकी झलक धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चारों पुरुषार्थों में सेवा से सफलता देने वाली गौ की विशेषताओं में देखी जा सकती है। यह कितनी विडम्बनापूर्ण बात है कि राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर और गांधी के देश में प्रतदिन २९,५०० से अधिक गोवंश वभिन्न बूचड़खानों में या कसाइयों के हाथों अथवा अन्य स्थानों में मौत के घाट उतार दिये जाते हैं।
भारतीय जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड ने भारतीय नस्ल की गोवंश के सम्बन्ध में जो आंकड़े दिये हैं, वे गोवंश के निरन्तर ह्रसमान दुखद स्थिति की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करते हैं। भारतीय गोवंश की २२ प्रजातियों में से ६ प्रजातियां समाप्त हो चुकी हैं और तीन प्रजातियां समाप्ति की ओर हैं। १९५१ में जहां १००० व्यक्तियों पर गोवंश का अनुपात ४२६ था, वहीं १९९१ तक पहुंचते-पहुंचते यह संख्या मात्र २१६ रह गई है। गौ एवं गोवंश की महत्ता को ध्यान में रखकर अक्टूबर, २००५ में देश के माननीय उच्चतम न्यायालय ने गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने का समर्थन किया था।
अत: मेरा देश के इस सर्वोच्च सदन के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री जी से अनुरोध है कि देश की संसद सम्पूर्ण गोवंश की हत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने वाले सार्वदेशिक प्रभाव वाला कानून बनाये।