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Title: Need to give the status of a ‘Revenue Village’ to ‘Tanda Bastis’ of Banjara Samaj.
श्री हरिभाऊ राठौड़ (यवतमाल) : उपाध्यक्ष महोदय, पूरे देश में बंजारा समाज बसा है। जहां बंजारा समाज की बस्ती होती है, उसको तांडा, नगला या डेरा कहा जाता है। यह मुख्य गांव से एक, दो या तीन किलोमीटर के अन्दर से होते हैं। ये जो बस्तियां हैं, इन बस्तियों को अलग रेवेन्यू विलेज का दर्जा नहीं दिया गया। आज तक बहुत सारी बस्तियां हैं और ये मुख्य गांव की घट ग्राम पंचायत के नाम से जोड़ा जाता है। इससे क्या होता है कि जब भी कोई स्कीम गांव में जाता है तो वह गांव में ही रह जाता है। इन तांडा, नगला और डेरों में वह नहीं जाती हैं, इससे इन लोगों का विकास रुक गया है। जहां पारदी समाज है, आपने सुना होगा कि जिनको बेड़ा कहा जाता है। हमारे यहां कोलाम समाज है, उसको बोड़ कहा जाता है, गोंडवाना कहा जाता है, जब भी बिजली, रोड, पानी, स्कूल आदि सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं तो ये सारी सुविधाएं गांवों में चली जाती हैं। पहले तो सरपंच उनका ही होता है, इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक टांडा डवलपमेंट स्कीम बनाई है।[i75] टांडा सुधार योजना के तहत बजट में प्रावधान भी किया है, इससे उनका विकास हो रहा है। मेरी मांग है कि जैसे महाराष्ट्र सरकार ने किया है, यदि केन्द्र सरकार भी इसे करेगी तो यह पूरे देश में लागू हो जाएगा। आपके माध्यम से वित्त आयोग से मेरा निवेदन है कि इसके बारे में प्रावधान जरूर करें।
दूसरी बात, महाराष्ट्र सरकार ने पांच सौ लोगों की बस्तियों को अलग से रेवेन्यू दर्जा दिया है। हमने जब उत्तर प्रदेश सरकार से इस तरह की मांग की तो मुलायम सिंह जी ने अपने उत्तर में लिखा कि हम किसी जाति विशेष को अलग से रेवेन्यू दर्जा नहीं दे सकते। यह सोचने वाली बात है कि जैसे सिक्खों की बस्ती है, क्या हम उसको अलग रेवेन्यू दर्जा नहीं दे सकते हैं। यह किसी जाति का नाम नहीं है। यह किसी भी जाति का एक ग्रुप हो सकता है, जिसे गांव कहा जाता है। मैं चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश सरकार को आपके माध्यम से एक निर्देश जाना चाहिए कि ऐसा क्यों नहीं हो सकता है, किसी भी जाति विशेष को रेवेन्यूका दर्जा देना चाहिए। माननीय अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने इसी समाज के लिए नेशनल
डिनोटिफाइड एण्ड नोमेडिक ट्राइब कमीशन बनाया था, लेकिन कांग्रेस की सरकार ने इसे दबा दिया है। मेरी यह मांग है कि इसे फिर से उजागर किया जाए। धन्यवाद।