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Title: Need to inform the House regarding Supreme Court or High Court judgements prevailed in the case of Dr. U. N. Biswas, Joint Director CBI pertaining to the inquiry into the incident relating to the seeking of the aid of Army for execution of warrant of Shri Laloo Prasad.
श्री मदन लाल खुराना: अध्यक्ष जी, सरकार द्वारा कलकत्ता हाई कोर्ट के अप्रैल २९, १९९८ के निर्णय के संदर्भ में की जाने वाली कार्यवाही का विषय कल इस सदन में कई बार उठा था। डा. यू.एन.विश्वास, संयुकत निदेशक, सी.बी.आई., कलकत्ता ने यह अपील सैण्ट्रल एडमनिस्ट्रेटिव टि्रब्यूनल के आदेश के विरुद्ध दायर की थी। सरकार द्वारा कल सदन को बताया गया था, इसमें कानूनी राय लेकर सदन को आज सूचित किया जायेगा। डा. विश्वास के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई कवैश करने से सम्बन्िधत कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्णय के बारे में कानूनी राय उपलब्ध होना बाकी है। नियमानुसार उच्चतम न्यायालय में अपील कराने की कार्रवाई अगस्त १२, १९९८ तक की जा सकती है। सरकार इस मामले में कानूनी राय उपलब्ध होते ही जल्दी से जल्दी निर्णय लेगी।
… (´ªÉ´ÉvÉÉxÉ)”>
श्री जी.एम. बनातवाला (पोन्नानी) : यह मसले को टालमटोल करने की बातें हैं। यह कोई तरीका नहीं है। इनको अपील के अन्दर जाना चाहिए। अपील फाइल की जानी चाहिए। इस मसले को सिर्फ टाला जा रहा है।
… (´ªÉ´ÉvÉÉxÉ) डा. शकील अहमद : यह उचित नहीं है। इनको अपील में जाना जरूरी है।
… (व्यवधान) सभापति महोदय : शान्ित से सुन लें। कृपा करके आसन लीजिए। सब लोग एक साथ बोलेंगे तो उसका कोई मतलब नहीं है। कृपा करके आसन ग्रहण कीजिए और बातों को सुन लीजिए।
… (व्यवधान)”>
श्री मोहम्मद अली अशरफ फातमी : सभापति जी, कल सरकार ने वायदा किया था कि हम २४ घंटे के अन्दर इस मामले की जानकारी हासिल करके सदन के सामने आकर बताने का काम करेंगे और आगे की कार्रवाई करेंगे। आगे की कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामला तो वहीं का वहीं रुका रह गया।
… (´ªÉ´ÉvÉÉxÉ) श्री मदन लाल खुराना : हमने जो आश्वासन दिया था, उसे हमने पूरा कर दिया।
… (व्यवधान) श्री मोहम्मद अली अशरफ फातमी : हम यह जानना चाहते हैं कि सरकार की इच्छा कया है। सरकार सुप्रीम कोर्ट जाना चाहती है या नहीं जाना चाहती है?
… (´ªÉ´ÉvÉÉxÉ)
“>श्री लालू प्रसाद : महोदय, मंत्री जी ने कल सदन को आश्वस्त किया था कि हम लीगल जानकारी प्राप्त करके कल सदन को बताने की स्िथति में होंगे। लेकिन ये आज वहीं पर कायम हैं जो इन्होंने कल कहा था। महोदय, ये देश के सिस्टम का और सभी की प्रतिष्ठा का सवाल है। मैं किसी व्यकित के खिलाफ नहीं हूं, हमारा किसी से कोई मतलब नहीं है। मामला आर्मी काल करने का है, यह एक संवैधानिक सवाल है। फर्मली मैं इसमें पार्टी नहीं हूं, यह भी सही है। इसमें आर्मी पार्टी है, सी.बी.आई. पार्टी है और उसके अधिकारी पार्टी हैं। इनके द्वारा कल दिए गए आश्वासन से बात बढ़ी थी, लेकिन हमें अंदेशा है कि कहीं न कहीं राय लेने के बहाने सरकार लीपापोती करके गलत काम करने वाले लोगों को प्रोटेकट करना चाहती है। मैं इस बयान से संतुष्ट नहीं हूं इसलिए मैं वाकआऊट करता हूं।
14.12 hrs.
(Shri Lalu Prasad Yadav and some other Hon’ble
Members then left the House)”>
श्री मुलायम सिंह यादव सम्भल): सभापति जी, मैं एक बात कहकर अपनी बात समाप्त करूंगा। यह सीधे टालमटोल वाला जवाब है। कानूनी राय किस से लेंगे और कैसे लेंगे, ये इस तरह से टालमटोल करके अपील में नहीं जाना चाहते। आपके वधि सचिव हैं, सरकारी वकील भी हैं, सब कुछ है। एक घंटे के अंदर कल ही राय ले सकते थे कि अपील के लिए सुप्रीम कोर्ट में जाना है या नहीं, इतना ही सरकार को बताना था। ये टालमटोल जवाब देकर सदन का समय ले रहे हैं। हम भी इस बयान से संतुष्ट नहीं हैं इसलिए हम लोग भी वाकआऊट करते हैं।
14.13 hrs.
(Shri Mulayam Singh Yadav and some other Hon’ble Members the
then left the House.) प्रो.जोगेन्द्र कवाडे (चिमूर) : हम भी सदन से वाकआऊट करते हैं।
14.13 hrs.
(Prof. Jogindra Kawade and Shri Ramdas Athawale then left the House)
“>PROF. P.J. KURIEN (MAVELIKARA): This is a very important issue. We have to say something about this. Yesterday the hon. Minister gave an assurance. (Interruptions)
It is a serious matter. I want to put across our view also on this because the Government has yesterday assured that they would take legal opinion and make a statement here. But today it seems the Government is evading this issue. It is not an individual’s matter. It is a question of a civil servant calling the Army for any purpose, whatever may be whether right or wrong. A civil servant has no right to do that. It is a breach on the Constitution. It should not be taken lightly. It is not a question of an individual matter, whether an MP or an officer. I am sorry to say that the Government is taking it in a very light way.
l4.l4 hrs (Shri K. Yerrannaidu in the Chair)
I would like to know one more thing. Can the Government, at least by tomorrow give an assurance to this House because tomorrow the House is going to adjourn? Hon. Minister, can you give an assurance in this matter?”>
श्री सत्यपाल जैन : सभापति महोदय, कल जो मामला उठा था, उसमें दो इश्यू अलग-अलग हैं। पहला तो यह है कि आर्मी बुलाई जाए या नहीं बुलाई जाए, यह इश्यू अलग है, इसका केस से ताल्लुक नहीं है। केस में सिम्पल फैकटस हैं कि जब भारत सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई की, विभागीय कार्रवाई शुरू करने की कोशिश की तो विश्वास साहब ने कलकत्ता हाई कोर्ट में चैलेंज किया। हाई कोर्ट ने उनकी वह कार्रवाई कवैश कर दी है। अब आर्मी बुलाई जाए या नहीं बुलाई जाए, इसका कोई ताल्लुक नहीं है। सवाल यह है कि उनकी प्रोसीडिंग वैलिड है या इनवैलिड है। यह मामला कोर्ट में गया है। आज लालू जी शामिल हैं, प्रश्न इस बात का नहीं है, अब इस मामले में अपील डालनी है या नहीं डालनी है, इसका निर्णय लीगल लोग करेंगे। एटॉर्नी जनरल, एडवोकेट जनरल और अन्य लीगल लोगों से राय ली जाएगी। अगर हमें इस तरह से प्रैशराइज करके, कयोंकि इसमें बहुत पोलटिकल लोग शामिल हैं, अपील डालने की परम्परा डालेंगे तो यह उचित नहीं होगा। इसलिए मेरा अनुरोध है कि आप इस पर निर्णय सरकार के हित में करें, लाइट में करें। लीगल ओपिनीयन आ जाएगी तो उसके आने के बाद अगर वह यह कहती है कि अपील डालनी चाहिए तो सरकार को अपील डालनी चाहिए। लेकिन अगर लीगल ओपिनीयन यह आती है कि इसके अंदर कोई आर्गुएबल पाइंट नहीं है तो उसमें अपील डालने का कोई मतलब नहीं है। १५ अगस्त तक इसकी समय सीमा है। सरकार के पास पूरा समय है इसलिए मैं सरकार से विनती करना चाहता हूं कि अपील डालने का और नहीं डालने का निर्णय केवल राजनीतिक दबाव में बिल्कुल नहीं करना चाहिए कि इस बात को देखते हुए कि फलां आदमी शामिल है, मैरिट पर निर्णय होना चाहिए। मैरिट है तो अपील डालें, मैरिट नहीं है तो न डालें।
SHRI A.C. JOS (MUKUNDAPURAM): Sir, it is a very serious matter.(Interruptions).
MR. CHAIRMAN : Shri Jos, please sit down.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Shri George Fernandes, would you like to say something?
… (Interruptions)”>
रक्षा मंत्री (श्री जार्ज फर्नांडीज): सभापति जी, मैं एक बात यहां स्पष्ट करना चाहता हूं। यहां कहा गया कि सविल सर्वेंट ने सेना को बुलाया और यह मामला संवैधानिक मामला और गम्भीर मामला है। यह सुप्रीम कोर्ट, कलकत्ता हाई कोर्ट और पटना हाई कोर्ट से जुड़ा हुआ तथ्य है। पटना हाई कोर्ट ने सी.बी.आई. को यह बात कही कि अगर पुलिस बल आपको नहीं मिलता आपका काम करने के लिए तो फिर आप दानापुर में सेना है, वहां सेना के अधिकारी को पत्र लखिए और उनसे मदद मांगिए। जब यह बात कही गई तो वहां श्री विश्वास नहीं थे, वे कलकत्ता में थे। यह बात अदालत ने तब कही जब एक नहीं, दो नहीं, बल्िक छः एफिडेविट बिहार राज्य सरकार ने अदालत के सामने दे दिए थे, जिसमें यह कहा था कि कितने भी बड़े लोग कयों न हों जिनके ऊपर कोई कार्रवाई होनी है, उस कार्रवाई को करने के लिए पुलिस बल की मदद चाहिए तो वह मिल जाएगी। पुलिस बल की मदद न मिलने पर जो स्थानीय सी.बी.आई. के अधिकारी थे, वे अदालत में गए। उन स्थानीय अधिकारियों को दिल्ली में सी.बी.आई. के जो सबसे बड़े डायरेकटर बैठते हैं, उन्होंने कहा कि अदालत ने वारंट इश्यू किया है, उसको तत्काल अमल में आप लोग लाएं। उन सी.बी.आई. के स्थानीय अधिकारियों के पास अदालत के नानबेलेबल वारंट पर तत्काल अमल करने का जिम्मा था और यह उनका कर्ततव्य था इसलिए इस कार्य का पालन करने के लिए उनको अदालत से सुझाव गया था। उनको पुलिस नहीं मिली तो सी.बी.आई. के वकील ने अदालत में जाकर कहा कि हम लोग इस हालत में हैं। तब अदालत ने कहा कि आप सेना के पास जाएं। सेना को चिट्ठी गई और उस चिट्ठी पर सेना ने यह सोचा कि हमें अपने, चूंकि यह सविल अथोरिटी से नहीं आई थी, अदालत के आदेश पर जो बोई का आदेश था, मगर जिसको स्वीकार किया गया है इसलिए मैंने कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट, पटना हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में भी यह मामला आया था, यह बात स्वीकार की है कि जस्िटस झा ने कहा था कि आप जाकर सेना की मदद लीजिए। श्री इन्द्रजीत गुप्त (मिदनापुर): लखित कहा था या जुबानी कहा था? श्री जार्ज फर्नांडीज: जुबानी कहा था, लेकिन यह बात अदालत ने स्वीकार की है। प्रश्न यह नहीं है कि लखित कहा था या मौखिक कहा था। अदालत का यह मामला है। अदालत ने यह बात कही थी और उसके ऊपर कार्रवाई की गई। तत्कालीन ग्ृाह मंत्री ने रेल्वे प्रोटेकशन फोर्स के डायरेकटर जनरल के जरिए जांच कराई। जांच के बाद उन्हीं के ग्ृाह मंत्रालय द्वारा चार्ज-शीट दी गई। उस चार्ज-शीट के खिलाफ विश्वास कैट में गए और कैट ने कहा कि हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे। तब वे कलकत्ता हाईकोर्ट में गए। कलकत्ता के हाईकोर्ट का इस पर जो निर्णय हुआ उसके दो वाकय मैं आपको पढ़ कर सुनाता हूं:
“We are clearly of the view that the Central Government has acted illegally and mala fide in initiating proceedings against Dr. Biswas as an investigating officer, who is still in charge of investigation, which will spoil the investigation and the end result would be disastrous. The attitude of the court and the administration are quite different. The court is concerned to preserve and protect the administration of justice and to see that the same is not broken down”..(Interruptions)
MR. CHAIRMAN : Please hear the Minister.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Please hear him first. After the completion of his statement, you can raise your points.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: I will give you a chance later. Please sit down. The Minister has not completed his statement. Please sit down.
MR. CHAIRMAN: Except the hon. Minister’s statement, nothing else will go on record.
(Interruptions)*
MR. CHAIRMAN: I have called the hon. Minister. He has not completed his statement.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Shri Acharia, please sit down. I will give you a chance later. श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : अध्यक्ष जी, यह कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला है। अब कलकत्ता हाईकोर्ट ने भारत सरकार की जो इसके बारे में भूमिका थी, उसको अस्वीकार किया था। अब अपील में जाएं या न जाए, यह सरकार के करने लायक फैसला है। श्री लालू यादव को जमानत दी गई थी, जब कि सीबीआई ने नीचे के स्तर पर उनके बारे में वहां एक प्रकार का विरोध बता दिया था, लेकिन उनको जमानत दे दी गई। उसमें भारत सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए नहीं गई थी। मैं यह नहीं समझ सका कि सीबीआई को गिरफतारी का आदेश कयों नहीं दिया जाता। हाईकोर्ट के जरिए जमानत का आदेश दिया जाता है तथा उस पर सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार नहीं जाती है, उन लोगों की सरकार को आप बोलते हैं कि कयों नहीं अपील कर रहे हो। अपील करना या न करना, तब भी सरकार के बस में था और आज भी सरकार के बस में है और सरकार उसको तय करेगी, इस पर चिल्ला कर कोई फैसला नहीं हो सकता।
MR. CHAIRMAN: Shri Raghubans Prasad Singh.
… (Interruptions)
SHRI A.C. JOS : Mr. Chairman, Sir…(Interruptions)
MR. CHAIRMAN: One minute, Shri Jos. I have called Shri Raghubans Prasad Singh.
… (Interruptions)
SHRI A.C. JOS : Sir, I am not surprised to see hon. George Fernandes arguing for the establishment…(Interruptions). Last year he was arguing against it, now he is arguing for it…(Interruptions).
SHRI GEORGE FERNANDES: Sir, in the last four years, I have fought to see that people who have cheated the treasury are brought to book. I have fought this for four years and he knows it…(Interruptions)
____________________________________________________________________________
* Not recorded”>
श्री रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): सभापति महोदय, पटना हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि सीबीआई अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही नहीं हो सकती, उसकी अपील सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी सीबीआई का पदाधिकारी अवैध कार्य करे तो सरकार को उस पर कार्यवाही करने का, जांच करने का पूरा अधिकार है, वह फैसला हमारे हाथ में है। उसके बाद जब सरकार ने कार्यवाही शुरु की तब श्री विश्वास कलकत्ता हाईकोर्ट चले गए। कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि उन पर कोई कार्यवाही नहीं होगी। मेरा सबमिशन है कि जब पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही नहीं होगी, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार किसी भी अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र है और फिर कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि उस अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही नहीं हो सकती। यहां सुप्रीम कोर्ट का फैसला प्रिवेल करेगा या हाईकोर्ट का फैसला प्रिवेल करेगा।
MR. CHAIRMAN : The Minister is here. Why are the Members unnecessarily reacting?
… (Interruptions) श्री रघुवंश प्रसाद सिंह : पटना हाईकोर्ट का फैसला है कि सीबीआई के अधिकारी के विरूद्ध फैसला नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, जिसमें जस्िटस भड़ूचा, जस्िटस सेन, दोनों जज थे, उन्होंने कहा कि सरकार स्वतंत्र है, कोई भी अधिकारी अगर अवैध कार्य करे उसके विरुद्ध सरकार कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र है। उस फैसले के आलोक में जब कार्यवाही शुरु हुई, श्री दुरई ने जांच की और जांच करके यह पाया कि जांच डायरेकटर ने आर्मी बुला कर अवैध कार्य किया। उसके आलोक में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उस नोटिस को कवेश किया और रोक दिया। जब सुप्रीम कोर्ट के जजों ने फैसला दिया कि सरकार कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने उसको रोकने का काम किया। अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू होगा या हाईकोर्ट का फैसला लागू होगा। इसलिए यह फिट केस है। जब सरकार की तरफ से सीबीआई ने आडवाणी जी पर चार्जशीट किया, लेकिन सीबीआई सुप्रीम कोर्ट गई और उस पर फैसला हुआ। इसलिए सरकार में परिपार्टी है। जहां इस तरह का सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले में फर्क पड़े तब सुप्रीम कोर्ट का फैसला प्रिवेल करेगा और सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए। हम जार्ज साहब का बहुत आदर करते हैं।
… (´ªÉ´ÉvÉÉxÉ)
MR. CHAIRMAN: Please wind up. You are giving a speech. You are repeating everything.
… (व्यवधान) श्री रघुवंश प्रसाद सिंह : सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सुन लीजिए, मैं एक लाईन में सुनाना चाहता हूं:
“The warrant against Shri Laloo Prasad Yadav having been issued by the Special Court in which the charge-sheet had been filed after completion of the investigation…. there was no occasion for any officer of the CBI to approach the High Court or the Division Bench of the High Court to issue any directions, oral or otherwise, for seeking the aid of the Army for execution of the warrant against Shri Laloo Prasad Yadav. On this basis, it was contended that some of the directions given in the impugned order pertaining to the inquiry into the incident relating to the seeking of the aid of the Army, were not matters required to be gone into by the High Court and the directions relating to the same are untenable.” हाईकोर्ट के फैसले के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया और सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार कार्यवाही करे। उस फैसले के आलोक में कार्यवाही हो रही है।
… (´ªÉ´ÉvÉÉxÉ)ºÉÖ|ÉÒ¨É EòÉä]õÇ Eòä b÷ɪɮúäE¶ÉxÉ Eòä ¨ÉÖiÉÉʤÉEò VÉÉä”>कार्यवाही हो रही है उसको हाईकोर्ट कलकत्ता को रोकने का अधिकार नहीं है। … (व्यवधान)
SHRI GEORGE FERNANDES: Please ask the hon. Member to tell what the judgement says. He has no right to mislead the House. Let him clarify ….(Interruptions) आप इसको पढ़िए।
MR. CHAIRMAN: Please sit down. Why are you provoking?
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Now, no more discussion on this matter. I am requesting all the Members that now there will be no more discussion on this matter.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Shri H.D. Deve Gowda on Calling Attention.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Except the speech of Shri H.D. Deve Gowda, nothing will go on record. There will be no more discussion on this matter. We have discussed this matter elaborately in this House.
(Interruptions)* श्री मदन लाल खुराना: आपने जो फैसला पढ़ा है वह १९९७ का किसी और संदर्भ में है, जबकि यह हाईकोर्ट का फैसला १९९८ का है।
… (´ªÉ´ÉvÉÉxÉ) श्री रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): वही है।
… (´ªÉ´ÉvÉÉxÉ)
MR. CHAIRMAN (SHRI K. YERRANNAIDU): Everything is going on record.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: You cannot change records and judgements. Everything is there on record. Please take your seat.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: We have to continue the discussion on the Budget also today. Please cooperate with the Chair.
… (Interruptions)
SHRI H.D. DEVEGOWDA (HASSAN): Mr. Chairman, Sir, with your permission… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: I have called Shri Devegowda. Please take your seat.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: The former Prime Minister is on his legs. Please cooperate.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Shri Kurien, I have called Shri Devegowda. Please take your seat.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record except Shri Devegowda’s speech.
(Interruptions) *
MR. CHAIRMAN: Shri Devegowda is on his legs. Please cooperate.
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* Not recorded श्री जी.एम. बनातवाला (पोन्नानी) : यह सरकार टाल-मटोल की कार्यवाही कर रही है। मुस्िलम लीग भी वाक-आउट करती है। हमारा वाक-आउट रिकार्ड पर लिया जाए।
MR. CHAIRMAN: It will be recorded. There is no problem.
14.32 hrs.
Shri G.M. Bantawala then left the House श्री सत्य पाल जैन : आप एक भ्रष्टाचारी आदमी को बचाना चाहते हैं। डा. शकील अहमद : सुखराम जी बड़े आदर्शवादी हैं, उनको आपने गोद में बिठा लिया है।