Title : Regarding demand and supply of electricity in the country.
श्री राजनरायन बुधौलिया (हमीरपुर, उ.प्र.) : सभापति महोदय, देश में इस समय विद्युत का गंभीर संकट है। मैं शून्य काल में माननीय रेवती रमण जी की बात का समर्थन करते हुए कहना चाहूंगा कि देश में उपलब्ध बिजली का जनसंख्या, क्षेत्रफल, मांग, राजस्व एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों की संख्या को देखते हुए राज्यों के लिए केन्द्र द्वारा विवेकाधीन कोटा फिक्स किया जाना चाहिए। वर्तमान की विद्युत वितरण प्रणाली दोषपूर्ण है, उसे संशोधित किया जाए। खात तौर पर उत्तर भारत में पड़ रही प्रचंड गर्मी के कारण उत्तर प्रदेश की विद्युत मांग १३ से १५ प्रतिशत तक बढ़ी है। उत्तर प्रदेश की दैनिक विद्युत मांग वर्तमान में १५१ से १५३ मलियन यूनिट है, उसे तुरंत पूरा कराने के प्रयास केन्द्र द्वारा किए जाएं।
सभापति महोदय, उत्तर प्रदेश को केन्द्रीय सेक्टर की इस वर्ष प्रारम्भ की गई १२०० मेगावाट की नवीन विद्युत इकाइयों से उसके अंश की पूर्ण अतरिक्त बिजली तुरंत उपलब्ध कराई जाए। उत्तरी ग्रिडर के उल्लंघन की माप के लिए जो मानक केन्द्रीय एजेंसी द्वारा बनाए गए हैं, वे छोटे और बड़े राज्यों की एक साथ तुलना करते हैं, यह उचित नहीं है। उस पद्धति को बदला जाए। उत्तर प्रदेश मे पीक आवर्स के संबंध में विवेकाधीन कोटे से आवंटित विद्युत अन्य राज्यों की तुलना में मांग के हिसाब से कम है। जैसा कि उत्तर प्रदेश को १६६७ मेगावाट की कमी के लिए मात्र १९१ मेगावाट विद्युत की आपूर्ति की गई है, जब कि हरियाणा में ५८३ मेगावाट की कमी के सापेक्ष २३६ मेगावाट तथा दिल्ली के मामले में ५१ मेगावाट की कमी के सापेक्ष ३०० मेगावाट अतरिक्त विद्युत आवंटित की गई है, जो तार्किक रूप से उचित नहीं है। इस प्रकार यह स्पष्ट हो जाता है कि पूर्व निर्धारित सिद्धांतों पर विचार न कर प्रदेश के आवंटित अंश को न तो बढ़ाया गया और न ही विवेकाधीन कोटे से अतरिक्त विद्युत का आवंटन हुआ, जिससे विद्युत की समस्या गंभीर एवं असहनीय हुई। यदि देखा जाए तो देश के उत्तरी क्षेत्र के छ: राज्यों में उत्तर प्रदेश की जनसंख्या लगभग ५८ प्रतिशत है तथा पीक आवर्स का विद्युत आवंटन केन्द्र की ओर से मात्र २० प्रतिशत तथा आफ पीक में ३३ प्रतिशत है, जिसमें संशोधन किया जाना अत्यावश्यक है। यदि वभिन्न राज्यों में कर एवं शुल्क अंश का अध्ययन किया जाए तो उत्तर प्रदेश का अंश लगभग ७० प्रतिशत है, लेकिन विवेकाधीन कोटे से विद्युत आवंटन का अंश इस तुलना में बहुत ही कम है, जिसमें संशोधन की तुरंत आवश्यकता है।
सभापति महोदय, मेरा आपसे यही कहना है कि उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन पर लगाए गए एक लाख रुपए के सांकेतिक जुर्माने को तुरंत हटाने हेतु आवश्यक निर्देश दिए जाएं और उत्तर प्रदेश के साथ जो भेदभाव हो रहा है, उसे अविलम्ब समाप्त किया जाए तथा उत्तर प्रदेश को पावर पैकेज अविलम्ब प्रदान किया जाए।