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Title : Need to take timely action to refrain China from constructing dam on the River Brahmaputra near Great Bend in North East.
श्री हर्ष वर्धन (महाराजगंज, उ.प्र.): तिब्बत के दक्षिण पूर्व भाग से निकल कर पूर्व दिशा में लगभग 16 सौ किलोमीटर प्रवाहित होने के पश्चात येलौंग साम्पो नदी प्राकृतिक रूप से “यू-टर्न” लेकर भारत में प्रवेश करने वाली ब्रह्मपुत्र नदी है। इस यू-टर्न पर जिसे सूमाटन पॉइन्ट या ग्रेट बेन्ड कहा जाता है, चीन 40 हजार मेगावॉट क्षमता का जल विद्युत परियोजना का निर्माण कर रहा है। इस परियोजना के साथ ही चीन अपने देश के उत्तर एवं उत्तर पश्चिम भू-भाग को जल से पोषित करने के उद्देश्य से येलौंग साम्पो (ब्रह्मपुत्र) की जलधारा को ग्रेट बैन्ड से पश्चिम मार्ग की तरफ मोड़ कर मानव निर्मित नदी के रूप में यलो नदी से जोड़ने का भी उपक्रम कर रहा है।
चीन का यह प्रयास सफल रहा तो ब्रह्मपुत्र से प्रतिवर्ष 200 बिलियन क्यू0 मीटर जल चीन अपने भूभाग में ले लेगा और विशेषज्ञों का मत है कि इससे भारतीय क्षेत्र की ब्रह्मपुत्र नदी में जल की 60 प्रतिशत मात्रा की कमी हो जायेगी। परिणामस्वरूप ब्रह्मपुत्र से पोषित होने वाले क्षेत्रों का पर्यावरण इस सीमा तक बिगड़ जायेगा कि संबंधित क्षेत्र के निवासियों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होगा।
भारत से होकर बांग्लादेश में प्रवेश कर ब्रह्मपुत्र नदी गंगा से मिलकर जो विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा क्षेत्र बनाती है, वह पूरी तरह समाप्तप्राय हो जायेगा। परिणामस्वरूप जल की समस्या से त्रसित बांग्लादेश के निवासी पलायन कर भारत में आने को विवश हो जायेंगे। यह सम्पूर्ण स्थिति भारतीय गणराज्य की संरचना को प्रभावित करने वाली है। अतः इस गंभीर प्रकरण में भारत सरकार समय रहते कार्यवाही करे।