Judgements

Regarding The Constitution (One-Hundred And Eighth) Amendment … on 11 March, 2010

Lok Sabha Debates
Regarding The Constitution (One-Hundred And Eighth) Amendment … on 11 March, 2010


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Title: Regarding the Constitution (One-Hundred and Eighth) Amendment Bill, 2008.

 

MADAM SPEAKER: Question Hour. Q. No.201, Dr. K.S. Rao.

… (Interruptions)

11.00 ¼ hrs.

 

At this stage Shri Dharmendra Yadav and some other hon. Members came and stood on the floor near the Table.

 

अध्यक्ष महोदया :  मुलायम सिंह जी, क्या आपको कुछ कहना है? क्या आप कुछ कहना चाहते हैं?

…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी):  हम कहना चाहते हैं।

अध्यक्ष महोदया :  आप लोग अपनी  जगह पर जाइये। मुलायम सिंह जी, आप इन लोगों को अपनी जगह पर वापस बुला लीजिये।

                                                            …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया :  आप लोग अपनी जगह पर वापस जाइये। आपके नेता कुछ कहना चाह रहे हैं। आपके नेता कह रहे हैं कि आप अपनी जगह पर वापस जाइये। मुलायम सिंह जी, आप पहले इन्हें वापस बुला लीजिये। पहले आप कहिये, फिर लालू जी कहेंगे। आप इन्हें वापस बुला लीजिये।

MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions) …*

 

11.01 hrs.

 

At this stage Shri Dharmendra Yadav and some other hon. Members went back to their seats.

 

श्री मुलायम सिंह यादव : अध्यक्ष महोदया, हम आपकी हर बात मानते हैं लेकिन आप ऐसा करिये कि नेता सदन से भी हमारी बात मनवाइये। अभी अन्तर्रा­ट्रीय महिला दिवस मनाया गया, उससे महिलाओं को क्या मिला? इस सदन ने क्या दिया है, हम नेता सदन से पूछना चाहते हैं? सरकार ने और नेता सदन ने क्या दिया? आप तो पहले ही से अध्यक्षा बनी हैं, मिनिस्टर भी पहले से रही हैं। आज हमारा साथ साथ है। हम इस समाज को जोड़कर चलेंगे। उससे लोकतंत्र मजबूत होगा, उससे हमारे देश की शक्ति बढ़ेगी, सद्भावना बढ़ेगी। जो आज आगे निकल गये हैं, आप उन्हें और आगे निकाल रहे हैं। जो पीछे रह गये हैं, इन्हें धक्का मारकर और पीछे कर रहे हैं । इसीलिये हमने कहा है, ऐसे ही नहीं कहा है। एक तरफ दलित हैं, पिछड़े हैं, मुसलमान हैं, इनकी महिलाओं को आरक्षण दीजिये। हम स्वीकार करते हैं और देश की एकता को मजबूत करने के लिये यह बात कह रहे हैं कि सब मिलकर समाज में चलें। समाज में जो गैर-बराबरी फैली है, जो वि­ामता फैली है, उस विषमता के चलते लोकतंत्र मज़बूत नहीं हो पायेगा। इसलिये सब को एक साथ चलने का मामला है। हमारी राय में आजादी की लड़ाई में क्या ये मुट्ठीभर लोग लड़े थे? पूरे हिन्दुस्तान की जनता खड़ी हुई थी, गरीब, अमीर, अनपढ़,खेत काटने वाला किसान,फावड़ा चलाने वाला सभी एक हो गये थे। अंग्रेज बिना हथियार चलाये चला गया। इन लोगों ने आजादी की लड़ाई में सब से ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, वे आज और पीछे चले गये हैं। आजादी के बाद जो दलित है, पिछड़ा है, और मुसलमान है, वे सब और पीछे रह गये हैं।  क्या आप उन्हें और पीछे करना चाहते हैं? यह आरक्षण किन महिलाओं का हो रहा है? हम  महिलाओं के लिये आरक्षण के विरोधी नहीं थे लेकिनजिस तरह का कानून आ रहा है, जो विधेयक आ रहा है, हम उस विधेयक के खिलाफ हैं। इस विधेयक में संशोधन कीजिये, उसमें प्रावधान कीजिये कि मुसलमान, दलित और पिछड़ी महिलाओं के लिये आरक्षण अलग से रख दिया गया है। इसलिये हम यह लड़ाई लड़ रहे हैं, हम समाज को जोड़ने के लिये लड़ रहे हैं, हम देश की मजबूती के लिये लड़ रहे हैं।  अब चीन तो कर रहा है कब्जा और ये हम पर कर रहे हैं हमला। यह सोचिये। चीन की बात नहीं सोच रहे हैं, महंगाई की बात नहीं सोच रहे हैं। बहुत लोगों के परिवार में होली नहीं मनी है जिसे मैंने कहा था कि 25 परिवार होली नहीं मना पाये हैं। महंगाई के कारण नहीं मना पाये हैं। इसीलिये, अध्यक्ष जी हम आपसे कह रहे हैं कि यह देश का सवाल है। ये देशभक्ति की बात करते हैं। चीन हमला कर रहा है, आप यहां सदन में बैठे हैं? …*

अध्यक्ष महोदया :  राज्यसभा का उल्लेख यहां मत कीजिये। That will not go on record. Any mention of Rajya Sabha will not go on record.

श्री मुलायम सिंह यादव : … *

अध्यक्ष महोदया :  जो नियम विरुद्ध है, आप उसका उल्लेख न करिये। यह रिकार्ड में नहीं जायेगा।

श्री मुलायम सिंह यादव : महोदय, हम कहना चाहते हैं कि दलित, पिछड़ी और मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान कीजिए और शांतिपूर्ण तरीके से सदन चलाइए। हम पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं। यदि यह नहीं होता है तो हम यहां बैठकर क्या करेंगे? इसके पीछे दूसरा षड़यंत्र यह है कि ऐसा प्रावधान किया है जिससे पिछड़े, दलित और मुसलमान पुरूषों का नेतृत्व भी न आ सकें। इस प्रावधान के होते लालू जी, मुलायम सिंह, शरद यादव और ऐसे लोग जो पीछे बैठे हैं, वे न आ सकें।

श्री लालू प्रसाद (सारण): इसमें आड़वाणी जी भी आ जाएंगे।

श्री मुलायम सिंह यादव : आड़वाणी जी पर क्या प्रभाव पड़ेगा, वे तो रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने तो रिटायरमेंट की घोषणा कर दी है। उनके ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा।

अध्यक्ष महोदया : मुलायम सिंह जी, धन्यवाद।

श्री मुलायम सिंह यादव :  महोदया, आप नेता सदन से कहिए कि हमारी जो गलत बातें हों, उन्हें न माने, लेकिन हम देश को जोड़ने के लिए, देश की एकता के लिए काम करें। सीमा पर खतरा है, सीमा पर खतरे के लिए हम आपके साथ हैं, इसके लिए पूरा देश आपके साथ खड़ा होगा। आप महंगाई रोकिये। जब-जब ये महंगाई रोकने की बात करते हैं, तब-तब महंगाई बढ़ जाती है। इसलिए मैंने नेता सदन से कहा कि आप अब मत कहना कि हम महंगाई रोकेंगे। आप महंगाई रोकने का बयान देते हैं और उसी दिन, दूसरे दिन महंगाई फिर बढ़ जाती है।…( व्यवधान) आप बहस मत कीजिए। इस पर अलग से बात करेंगे।

श्री शरद यादव (मधेपुरा): महोदया, आज देश में महिला रिजर्वेशन के मामले में बहुत बैचेनी है। हम इसके बारे में प्रधानमंत्री जी से मिले थे, उन्होंने हमें कल सुबह बुलाया था। हमने उनसे अनुरोध किया, विनती की। मैं सदन से कहना चाहता हूं कि जब भी यह बिल आया है- चाहे गुजराल जी रहे हों, चन्द्रशेखर जी रहे हों, चाहे नरसिंह राव जी रहे हों…

श्री बसुदेव आचार्य(बांकुरा): नरसिंह राव नहीं थे, नरसिंह राव के समय नहीं आया था। वर्ष 1996 में देवेगौड़ा गवर्नमेंट थी।

श्री शरद यादव :  नरसिंह राव जी, यहां मेरे बाजू में बैठते थे।

श्री बसुदेव आचार्य :  बाजू में बैठते थे, लेकिन उनके समय नहीं हुआ था।

श्री शरद यादव : एनडीए के जमाने में देवेगौड़ा जी, गुजराल साहब थे। हम 6 साल अटल जी के साथ मंत्री थे। सारे लोगों ने मिलकर बात की थी। इसमें हमारे साथ सब लोग थे। हम सब लोग, जिनको बिल के बारे में शंका थी, तकलीफ थी उनके साथ घंटे भर बैठे। उन्होंने साफ कहा कि जब आम सहमति हो जाएगी, सब पार्टियों के बीच में सहमति हो जाएगी तभी इस बिल को लाया जाएगा। यह बिल संविधान संशोधन है। उन्होंने इस सदन के फ्लोर पर भी कहा, जब यहां से लोगों ने कहा कि आप इसे जल्दी नहीं ला रहे हैं, आप ऐसा नहीं चाहते हैं तो उन्होंने कहा कि जब सबकी सहमति बनेगी तभी मैं इस बिल को लाऊंगा। जैसे ही सहमति बनेगी, मैं जल्दी से इस बिल को लाऊंगा। कल हमने कहा कि एक दिन में आकाश नहीं टूटेगा, आप सबसे बात कर लीजिए। आज मैं आपका बहुत धन्यवाद करता हूं कि आपने पहली बार इस सवाल पर दो बात सुनने का काम किया है। सारी पार्टियों के लोग बैठेंगे, तो हो सकता है कि रास्ता निकल जाए, हो सकता है न निकले, लेकिन मैं यह मानता हूं कि रास्ता बहस से निकलता है, संवाद से निकलता है। इसमें कोई न कोई रास्ता निकल जाएगा। उन्होंने मुझे ऐसा जरूर कहा, लेकिन उन्होंने अपनी बात रखी, जो मैं यहां नहीं रखना चाहता हूं। एक दिन सब लोगों के बीच में मीटिंग हो जाए, वह बात नहीं हुई।

            मैं मानता हूँ कि यह सारा सदन आपके ज़िम्मे है, आप उसकी मालिक हैं। लेकिन मुझे बताया गया कि कल राज्य सभा में जब बिल पास हुआ, (Interruptions) …*

अध्यक्ष महोदया : शरद जी, दूसरे सदन में क्या हुआ है वह नहीं कह सकते हैं।

…( व्यवधान)

श्री शैलेन्द्र कुमार (कौशाम्बी): यह बड़ा महत्वपूर्ण मामला है। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : शैलेन्द्र जी, आप बैठ जाइए। हम नियम354से बँधे हुए हैं। इसलिए मेरा आपसे कृपापूर्वक अनुरोध है कि राज्य सभा का उल्लेख न करें।

श्री मुलायम सिंह यादव :(Interruptions) …*

अध्यक्ष महोदया : शरद जी उस बात को समझ गए हैं।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव : महोदया, आप मेरी विनती सुन लीजिए। मैं यहाँ आपके सम्मान पर एक शब्द भी नहीं बोलूँगा, मैं तो सिर्फ एक प्रोप्राइटी का सवाल उठा रहा हूँ कि (Interruptions) … *  मैं आपको बता दूँगा और निवेदन कर दूँगा। मैं आपसे  निवेदन करना चाहता हूँ कि हिन्दुस्तान के राजनीतिक कार्यकर्ता से ज्य़ादा हिन्दुस्तान को समझने की शक्ति और सामर्थ्य किसी में नहीं होती है। मेरी पक्की मान्यता है कि हिन्दुस्तान में यदि कोई एक जमात है जो इस देश को जितना जानती है, उतना देश के बाकी वॉक्स ऑफ लाइफ के लोग अलग अलग विश्व को जानते हैं। हमारे बाद यदि कोई देश को जानता है तो पत्रकार जानते हैं। यह सहज ही इवॉल्यूशन हुआ था। यह जो महिला रिज़र्वेशन लाने की बात चली है, वह दिल्ली में बैठी हुई कुछ महिलाओं द्वारा शुरू हुआ है। देवेगौड़ा जी जिस मीटिंग में थे, उसमें 132 महिलाएँ थीं, जिसमें वे अनाउंस करके चले आए। मेरा निवेदन यह है कि हिन्दुस्तान के राजनीतिक कार्यकर्ता का जो इवॉल्यूशन है, वह स्कूल और कालेज में नहीं होता, वह स्वयं प्रेरणा से राजनीति में जाता है। मैं इंजीनियर हूँ लेकिन मैं स्वयं प्रेरणा से लोगों के बीच में, रिक्शा वाला, तांगा वाला, खेत वाला, खलिहान वाला, दुकान वाला, बुद्धिजीवी, बड़ा, छोटा, सबके साथ ज़िन्दगी बिताता हूँ। …( व्यवधान) महिला तो हमारी माँ है, उसके बिना तो हम यहाँ हो नहीं सकते। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप क्यों खड़े हो गए, आप बैठ जाइए।

श्री शरद यादव : आप मेरी बात तो पूरी सुनिये। मैं कनक्लूड कर रहा हूँ। …( व्यवधान) मैं आपसे निवेदन करूँगा कि आप हर दूसरी सीट विधान सभा में, हर दूसरी सीट लोक सभा में ऐसा करेंगे तो राजनीतिक कार्यकर्ता जब नीचे जाएगा तो इस सदन की बहस का गला घोंट दिया जाएगा। यह जो बोली है, भाषा है, समझ है, दो मिनट में नहीं आती है। हिन्दुस्तान का जो लोकतंत्र है, उस लोकतंत्र में 13 फीसदी महिलाएँ वैसे ही आ गई हैं। वे आई हैं तो मैं उनको सलाम करता हूँ कि वे कार्यकर्ता हैं। वे राजनीतिक ज़मीन से खड़ी हुई कार्यकर्ता हैं, तब वे यहाँ आई हैं। आपसे हमारा यही कहना है कि यह बिल और यह जो सारा काम हो रहा है, इसको बंद करिये। सरकार बैठकर ठीक से बात करे। हम लोग इसका विरोध कर रहे हैं, इस सदन में सारे लोग, नीचे से पीछे तक सारे लोग बेचैन हैं …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : अब आप बैठ जाइए। अब लालू जी को बोलने दीजिए।

श्री शरद यादव : आपसे मेरी विनती है कि …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए अधीर रंजन जी, आप क्यों खड़े हो रहे हैं?

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव : आप लोग बाहर क्या बोलते हैं? मुझसे कहलवाओ मत बाहर क्या बोलते हो?…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप लोग बैठिये। शरद जी, अब आप समाप्त करिये।

…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : निरुपम जी, आप क्यों खड़े हो गए?शरद जी, अब आप समाप्त करिये, लालू जी को बोलने दीजिए।

…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप क्यों बार बार खड़े हो रहे हैं?

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव : बाहर हमें बोलते हैं कि आप ही हैं आशा की किरण। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : मुलायम सिंह जी, आप बैठिये। अब लालू जी बोलेंगे।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव : मैं आपसे निवेदन करता हूं कि यह बिल इस सदन में आने के पहले हर तरह से चाहे वह सहयोगी दल हल…( व्यवधान) तृणमूल कांग्रेस के एमपी मिले हुए थे, बाहर जो खड़े थे, हमने कहा कि आप अंदर क्यों नहीं हैं?…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप लोग क्यों बोल रहे हैं, आप शांत रहिए।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव : मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि इस बात पर आम सहमति बनाने की जरूरत है और देश के अंदर जो राजनैतिक जीवन में अपनी जिंदगी खपा करके, मैं तो कहीं से लड़ जाऊंगा, एक-एक एमपी ने जो जिंदगी खपाई है, वह जनता का हक है, वह वहां का नेता है, उनके कटने का सवाल का खड़ा हुआ है, उनके कटने का मतलब है, इस देश की लोक सभा की बहस को बर्बाद करना। इसलिए आम सहमति के लिए सरकार लोगों को बुलाकर, पार्टियों को बुलाकर सहमति बनाएं और वीकर सैक्शन्स के 80फीसदी लोग हैं, जो बेजुबान हैं, हजारों वर्षों से सताए हुए हैं, चाहे वे मुसलमान हैं, दलित हैं, पिछड़ी जाति के लोग हैं, वैसे ही दलित बोल नहीं पाता है…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : ठीक है। धन्यवाद।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव : उसके 40आदमी उसमें घुसा दिए हैं, वैसे ही उसकी जुबान काटने का काम किया है।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : ठीक है। आपका हो गया है।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव : वह वैसे ही गुलाम बनकर रह गए हैं, इसलिए इसको ऐसे नहीं लाने दिया जाएगा। हम फिर कहना चाहते हैं कि इसको ऐसे नहीं होने दिया जाएगा। आपसे विनती है कि आप इसको ठीक से लाइए, ठीक से बात कीजिए, इस पर और बहस करने का काम कीजिए। यह बहुत गलत काम हो रहा है। आप व्हीप मत लाइए तब देखिए, 70 प्रतिशत आदमी यदि इसके खिलाफ वोट न दें तो मैं सदन से इस्तीफा देकर चला जाऊंगा। यह मेरा सभी पार्टियों को कहना है। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : अब आपका हो गया है, आप बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : ठीक है। श्री लालू प्रसाद जी।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव : इस तरह से आप बुलडोज़ करके नहीं कर सकते हैं।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आपका हो गया है, आप बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव : बुलडोज़ लगाकर के आप इसको पास नहीं करवा सकते हैं।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप क्यों खड़े हो जाते हैं? आप बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव : हम इसे मानने वाले नहीं हैं। हम ऐसे मानने वाले नहीं हैं।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप समाप्त कीजिए।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव : आप चाहे मार्शल्स से हटवा दीजिए, लेकिन हम इस पर मानने वाले नहीं हैं।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए। आप समाप्त कीजिए।

            श्री लालू प्रसाद जी, आप बोलिए।

…( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद : महोदया, वह बैठे तभी तो हम बोलेंगे।…( व्यवधान)

श्री शरद यादव : अध्यक्ष महोदया, मेरा कहना है कि हम अनुशासन वाले लोग हैं,…( व्यवधान)

हम मार्शल से संविधान संशोधन नहीं होने देंगे।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : ठीक है। अब आप बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव : पुलिस से संविधान संशोधन नहीं होने देंगे। यह हम आपसे निवेदन करते हैं कि मार्शल से लोकतंत्र नहीं चलेगा…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : ठीक है। अब आप बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव : मार्शल लाकर लोकतंत्र नहीं चलेगा।…( व्यवधान) बाहर की फौज को यहां नहीं बुलाया जाए। बाहर की फोर्स यहां नहीं आएगी।…( व्यवधान) यह मार्शल ही काफी हैं, हम इनसे लड़ने वाले नहीं हैं। यदि यह कह दें तो हम उठकर चले जाएंगे…( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद : महोदया, यह कोई फाइनल डिबेट नहीं हो रही है।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : जी हां। यह कोई डिबेट नहीं है, केवल दो मिनट के लिए आप लोगों ने विचार व्यक्त करने हैं, वह आप कीजिए।

श्री लालू प्रसाद : महोदया, हम आपको धन्यवाद देना चाहते हैं कि आपने हम लोगों से यह जानना चाहा कि हम लोग संसद को क्यों रोक रहे हैं? हम लोगों का आपकी सीट तक जाने का कोई फैशन नहीं है। आप न तो सत्ता पक्ष और न ही विपक्ष के लिए हैं, आप सभी के लिए हैं। इसलिए हम किसे कहने जाएं। जब कोई आदमी नहीं सुनता है तो नजदीक जाना पड़ता है, नजदीक से बात बतानी पड़ती है। आप इसे अदरवाइज़ मत लीजिएगा, यह हम लोगों का आपसे आग्रह है। हम आज से राजनीति में नहीं हैं, हम वर्ष 1977 से हैं। नये लोग आए हैं, अभी नया प्याज खा रहे हैं, उन्हें कल पता लगेगा, जब वह रोना शुरू करेंगे। बीजेपी और कांग्रेस के जितने एमपीज़ हैं, वे सभी बोल रहे हैं कि हम लोगों को बचा लो।…( व्यवधान) हम लोगों को डेथ सर्टिफिकेट पर दस्तखत करने के लिए कहा जा रहा है। यह यथार्थ है और सच्चाई है। हम लोग महिलाओं के विरोधी नहीं हैं। आप लाल कार्ड धारी महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत कीजिए। क्रीमीलेयर लगा दीजिए। लेकिन हम लोगों की कैसी तस्वीर उतारी जा रही है, तीन यादव। हम लोग तीन पार्टी के लीडर हैं, सुप्रीम हैं, हम लोग चुने गए हैं, हम लोगों का सोशल जस्टिस प्लैन्क है…( व्यवधान)

श्री बसुदेव आचार्य : सुप्रीमो हैं।

श्री लालू प्रसाद : ठीक है, सुप्रीमो, जो चाहे कह लीजिए। लेकिन आपका तो शुरू में ही खत्म हो गया है। आप न तो हिन्दुस्तान में हैं न पाकिस्तान में हैं…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : लालू प्रसाद जी, आप इधर संबोधित कीजिए।

…( व्यवधान)

 

श्री लालू प्रसाद : हम ममता जी को धन्यवाद देते हैं कि वे लीड ले गईं और आप पीछे चले गए। हम लोग ममता जी से आशा रखते हैं। महोदया, हमारी हाथ जोड़ कर विनती है, हमने बार-बार कहा है कि आप संविधान संशोधन करने जा रहे हैं, अध्याय बदलने जा रहे हैं, इसमें सब की राय होनी चाहिए। मैडम सोनिया जी यहां बैठी हुई हैं, इन्होंने भी कई बार कहा, उन दिनों हम लोग भी तैयार थे कि ठीक है हम बैठ कर इसका कोई न कोई रास्ता निकालेंगे। इस देश में हमारी मुस्लिम बेटियां, महिलाएं नगण्य हैं। आपको किन का वोट मिला? आपको मुसलमानों भाईयों ने 80 परसैंट वोट दिया है। अब जब उनका नाम आ रहा है, भारत के पिछड़े वर्ग की बेटियों को, नरेगा में मिट्टी ढोने वाली, घास काटने वाली, मसूरी उखाड़ने वाली और दौलत पैदा करने वाली बेटियों के लिए हम कह रहे हैं कि उनका भी इस दर्पण में चेहरा आना चाहिए, तस्वीर आनी चाहिए। आपको नफरत क्यों है, हम जानना चाहते हैं, देश जानना चाहता है? हम डेरोगेट्री बात करना नहीं चाहते हैं। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया: लालू जी, अब आप समाप्त करें।

श्री लालू प्रसाद : अध्यक्ष महोदया, हम खत्म कर रहे हैं, हम बोलना नहीं चाहते थे। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया: लालू प्रसाद जी, अब आप समाप्त करिए, इधर देख कर सम्बोधित करिए।

श्री लालू प्रसाद : हम आपको सम्बोधित कर रहे हैं।

             (Interruptions) …*

MADAM SPEAKER: This will not go on record.

(Interruptions) …*

श्री लालू प्रसाद : यह हमारी संस्कृति नहीं है। हमारी विरासत, संस्कृति एवं भारत का संस्कार यह नहीं है।…( व्यवधान) इससे परहेज़ करना पड़ेगा। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया: लालू प्रसाद जी, अब आप समाप्त करिए।

श्री लालू प्रसाद : यहीं पर फिर झंझट की गुंजाइश रह जाती है। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया: लालू जी, आप जल्दी समाप्त करिए।

                                                …( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद : जितनी ही आप हमारी बात सुनेंगे, उतनी ही वहां आने-जाने में कमी हो जाएगी। इसलिए बार-बार मुलायम सिंह यादव जी, शरद यादव जी और हमने कहा कि आप ऑल पार्टी मीटिंग बुला लीजिए और उसमें सब की राय जान लीजिए, बात सुन लीजिए। सब की बात सुनने के बाद कोई न कोई रास्ता निकलेगा, लेकिन कोई भी आदमी इस बात को सुनने के लिए तैयार नहीं है। इस बात को बार-बार कहा जा रहा है। हम फुलस्टॉप, कॉमा कोई परिवर्तन नहीं करेंगे। हमने राहुल गांधी जी को भी फोन किया था, ये युवा एवं उदयमान नेता हैं। इस पर हम लोगों को कोई हैड ट्रिक नहीं है, आगे बढ़ना चाहिए। ये कलावती बेटी के घर में गए।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया: लालू प्रसाद जी, अब आप समाप्त करिए।

…( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद : अध्यक्ष महोदया, हमारी थोड़ी सी बात सुन लीजिए। बी.जे.पी. के लोग कलावती का नाम सुन कर जिस तरह से कमेंट कर रहे थे, भारत की मिट्टी में जो सुगंध है, उन बेटियों के लिए हम कह रहे हैं कि उनका आरक्षण और मुस्लिम बेटियों के लिए आप प्रावधान करिए। हर पांच साल बाद रोटेशन होगा, जो जीत कर आएगा, फिर बोलते हैं कि लॉटरी निकालेंगे। आप जो लॉटरी निकालेंगे, उसे कौन देखने जा रहा है कि उसमें आपने किसे कहां निकाल दिया। …( व्यवधान) आप लोगों का नुकसान हो जाएगा। …( व्यवधान) हम लोग तो भीतर से निकल जाएंगे।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया: लालू प्रसाद जी, अब यह डिबेट लम्बा खींच रहा है।

…( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद : इसलिए ये सब बंद करिए। हम कुछ नहीं जानते, (Interruptions) …* लेकिन इस रूप में हमें यह बिल स्वीकार नहीं है।…( व्यवधान)

THE MINISTER OF FINANCE (SHRI PRANAB MUKHERJEE): Madam Speaker, most respectfully.… (Interruptions)

श्री अनंत गंगाराम गीते (रायगढ़): मैडम, सभी पार्टियों के लोगों ने अपनी बात कही है। हमें भी तो अपना बात कहने का मौका दीजिए। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप कृपा कर के बैठ जाइए। अब आप, लीडर ऑफ दि अपोजीशन को बोलने दीजिए।

श्री अनंत गंगाराम गीते : मैडम, सरकार के जवाब देने से पहले हमें भी बोलने दिया जाए। हमारी बात सुनने के बाद सरकार अपना पक्ष रखे।…( व्यवधान)

MADAM SPEAKER: Please extend that courtesy. You please sit down. When we have a proper debate, we will listen to everybody. Kindly sit down.

… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदया : आप क्यों बोल रहे हैं। आपकी बात रिकॉर्ड पर नहीं जा रही है। Nothing will go on record.

(Interruptions) …*

SHRI PRANAB MUKHERJEE: I would just like to respond to what these three hon. Members have stated. It is not a full-fledged debate. … (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Hon. Leader of the House is speaking. Please sit down. This is not a debate.

… (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Nothing is going on record.

(Interruptions) …*

SHRI PRANAB MUKHERJEE: This is becoming really a very difficult situation. Anybody can get up at any point of time.… (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Nothing is going on record.

(Interruptions) …*

MADAM SPEAKER: आप बैठिए। अब आप सुनिए। Do not disturb the House. Please sit down. Nothing is going into record. All your efforts are futile. It is not going into record.

(Interruptions) …*

SHRI PRANAB MUKHERJEE: Madam Speaker, I sought your permission to respond to three hon. Members Shri Mulayam Singh Yadavji, Shri Sharad Yadavji and Shri Lalu Prasad Yadavji because they were permitted by the hon. Speaker to make their observations. This is the parliamentary practice which is being followed from day one. If Members want to make any special submission, they seek the permission of the Speaker and if the Speaker permits, they do so. They have raised certain issues.

            My first observation is that all these issues can be raised, can be debated and can be decided upon by this House only, by 543 Members sitting here belonging to different political parties. They and they alone can decide all the contents of that. … (Interruptions) Therefore, this is nothing and I am not going into the merit of it. The fact of the matter is, on this issue, there are divergences of views. Certain political parties also represented peoples’ views. They came to certain conclusion that this piece of legislation will have to be brought in. There were debates. All of them are fully aware that there were discussions. We could not unfortunately reach at a consensus. I myself participated in several rounds of talks. The former Home Minister Shri Shivraj Patilji took a meeting; Dr. Manmohan Singh took a meeting. Before the UPA-1, during the NDA regime also, various attempts were made to arrive at a consensus. Various formulations are worked out. But certain political parties took a particular view; certain political parties took a different view. There was no convergence. Even when the Bill was debated and finally adopted in Rajya Sabha, on that morning also three of them met the Prime Minister. The Prime Minister requested them to come the previous night. They had some inconvenience. Thereafter they informed him that the next day morning at 9.30 they would be meeting. I was also having a meeting with the Leaders of the Political Parties, representatives of all political parties represented in Rajya Sabha along with the Leader of the Opposition and all major political parties were present there. When we were discussing, the Prime Minister called me and reported what he informed. … (Interruptions) Let me complete Shri Sharadji. Most respectfully, I would like to submit. … (Interruptions)

श्री शरद यादव : मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं कि सारी पार्टियों को आपके यहां नहीं बुलाया जाता है। … (Interruptions)

SHRI PRANAB MUKHERJEE: Just one minute. I will not take more than a minute.

अध्यक्ष महोदया : शरद यादव जी, आप बैठ जाइए। उन्हें अपनी बात समाप्त करने दीजिए।

… (Interruptions)

SHRI PRANAB MUKHERJEE: I am coming to that point.

            The hon. Members stated that an all-party meeting should be called. There is no harm in calling an all-party meeting. Even this can be done because each House has to pass a Constitution Amendment with special majority. Thereafter, in this case it will have to be ratified by half of the States. There were instances when one House passed a Constitution Amendment and thereafter it was rejected by the other House and the Constitution Amendment could not be carried.

            The Prime Minister pointed out that before the Bill is discussed in the Lok Sabha we can consult you, various ideas could be explored, various possibilities could be explored and it can be considered if it is possible to narrow down divergences and bring about convergences. These actions are being taken independently. Of course, if there would be an Amendment, the other House will also have to take it into account.

            Therefore, most respectfully, I would like to submit that all the issues which the three hon. Members raised here could be discussed at the time of debate on the Reservations Bill as it has been debated earlier.

            You have talked of the high prices. Again you discuss it, during the Budget you discuss it, you criticse the Government. … (Interruptions)

अध्यक्ष महोदया : योगी जी, आप उनकी बात सुनिए।

…( व्यवधान)

श्री प्रणब मुखर्जी : थोड़ा-बहुत भूखा है, वह अलग बात है। But nothing could be achieved by stalling the proceedings of the House.

MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions) …*

SHRI PRANAB MUKHERJEE: Madam, most respectfully, I would like to submit, let the House transact the normal business. Financial business has to be transacted. There is a time schedule and this time schedule has to be adhered to in order to comply with the rules which we ourselves made. Nobody made these rules for us. We have made these rules. Therefore, it is our sovereign right to make an amendment to the Constitution or not to make. My submission to you would be that please allow the normal business to be transacted, and we can tell you; before the Bill is introduced in the Lok Sabha, we will consult you.

            Thank you, Madam Speaker, for giving me the opportunity to speak.

MADAM SPEAKER: Thank you so much, hon. Leader of the House.

            Question No.201 – Dr. K.S. Rao.

श्री मुलायम सिंह यादव : हमारी जो मूल भावना थी …( व्यवधान)

श्री मंगनी लाल मंडल (झंझारपुर): मंत्री जी के जवाब से कोई संतुष्ट नहीं है।  …( व्यवधान)

12.00 hrs.

The Lok Sabha re-assembled at Twelve of the Clock.

 

                                    (Shri P.C. Chacko in the Chair)

… (Interruptions)

12.0 ¼  hrs

At this stage, Shri Mulayam Singh Yadav, Shri Lalu Prasad

 and some other hon. Members came and stood on the floor  near the Table.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : Please go back to your seats.

… (Interruptions)