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Need To Set Up A Judicial Enquiry To Look Into The Matter Of Delhi Police … on 17 April, 2000

Lok Sabha Debates
Need To Set Up A Judicial Enquiry To Look Into The Matter Of Delhi Police … on 17 April, 2000

Title: Need to set up a judicial enquiry to look into the matter of Delhi Police atrocities on the students of the Jamia Millia Islamia University and withdraw all cases against the students.

श्री हन्नान मोल्लाह (उलूबेरिया); ÉÊb{]ÉÒ º{ÉÉÒBÉE® ºÉÉc¤É, àÉé ºÉ®BÉEÉ® BÉEÉä ¤ÉiÉãÉÉxÉÉ SÉÉciÉÉ cÚÆ ÉÊBÉE SÉÉcä |ÉÉ<ºÉ ®É<VÉ BÉEÉ àÉÉàÉãÉÉ cÉä ªÉÉ ´ÉBÉEÉÒãÉÉå {É® càÉãÉä BÉEÉÒ ¤ÉÉiÉ cÉä, àÉé <ºÉàÉå ABÉE +ÉÉè® ºÉ®BÉEÉ® BÉEä +É{É®ÉvÉ BÉEÉÒ ¤ÉÉiÉ VÉÉä½xÉÉ SÉÉciÉÉ cÚÆ*

आप जानते हैं दिल्ली और देश का एक मशहूर विश्वविद्यालय जामिया मलिया इस्लामिया है। उस विश्वविद्यालय में नौ तारीख की रात को दिल्ली पुलिस के १००-२०० लोगों ने हॉस्टल में घुसकर जिस बर्बरता के साथ स्टूडेंट्स की पिटाई की है, मैंने खुद वहां दो घंटे जाकर हर कमरे को देखा है। कम से कम २५ कमरों के पूरे दरवाजे टूटे हुए हैं, कमरे के अंदर की सारी चीजें तितर-बितर हैं। वहां दो सौ से ज्यादा स्टूडेंट्स की पिटाई की गई और उन्हें जेल में बंद किया है। मस्जिद में जाकर देखा, वहां टीयर गैस सैल्स हैं, उसकी मैट जली हुई है। मस्जिद के इमाम साहब जो हमारे बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से आते हैं, उनकी अंदर जाकर इतनी पिटाई की गई और उनके हाथ-पैर तोड़कर उन्हें तिहाड़ जेल में डाल दिया गया है। इतनी बर्बरता और साम्प्रदायिक ढंग से वहां पुलिस बात कर रही थी, यह भी बहुत शर्म की बात है। मैंने वहां खुद जाकर देखा एक विदेशी स्टूडेंट – यमन की एक स्टूडेंट – है उसके हाथ-पैर में बहुत पिटाई लगाई है। बंगलादेश के तीन स्टूडेंट्स हैं। मैंने हिंदुस्तान की ओर से उससे माफी मांगी कि हमारे देश में पढ़ने आये और तुम्हारे ऊपर इतना जुल्म हुआ, यह हमारे देश के लिए अपमान की बात है। सर, वहां दो सौ से ज्यादा स्टूडेंट्स के कमरों को तोड़-फोड़ दिया, उनके पैसे लूटे गये, डॉलर लूटे गये। यह एक छोटी सी घटना हो सकती थी, यदि पुलिस इसे आसानी से और तरीके से हैंडिल करती। स्टूडेंट्स का मामला सैंसटिव होता है। यदि थोड़ी बहुत गड़बड़ हो जाए तो पुलिस उसे तरीके से हैंडिल कर सकती थी। लेकिन जिस तरह बेरहमी से, भेदभाव के द्ृष्टिकोण से दिल्ली की पुलिस ने उन पर जुल्म किया, मुझे देखकर बहुत ताज्जुब हुआ। मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी नहीं देखा कि किसी यूनिवर्सिटी में इस तरह का हमला हुआ हो। उसमें वाइस चांसलर भी नहीं गया और कोई हमदर्दी नहीं जताई।

इसलिए मेरी मांग है कि इस मामले में जूडीशल इंक्वायरी होनी चाहिए। जिस डी.सी.पी. के नेतृत्व में यह जुल्म हुआ, उसे बर्खास्त किया जाना चाहिए। स्टूडेंट्स पर जो झूठे इल्जाम लगाये गये, उन्हें हॉस्टल में मारा-पीटा गया और उनके खिलाफ दफा ३०२ के मुकदमे लगाये गये, ये सारे मुकदमें वापिस होने चाहिए और उनके नुकसान की क्षतिपूर्ति होनी चाहिए और उनकी मदद करनी चाहिए और जो अपराधी हैं, उन्हें इसकी सजा मिलनी चाहिए। यह मेरी सरकार से मांग है। सर, अभी तक होम मनिस्टर या किसी अन्य मनिस्टर ने इसके बारे में कोई स्टेटमैंट दिया और न कोई उधर पहुंचा और न आश्वासन दिया। इसलिए मैं अपील करूंगा कि सरकार इस बारे में एक सही कदम उठाये, यही मेरी मांग है।

श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : उपाध्यक्ष महोदय, एयरलाइंस के जहाज …( व्यवधान)

श्री राशिद अल्वी : सर, इस मामले में हमारा नाम भी है।

श्री जी.एम. बनातवाला (पोन्नानी) : डिप्टी स्पीकर सर, मेरा भी यही मामला है।

(Urdu script to be typed)

श्रीमती फूलन देवी (मिर्जापुर) : सर, यह बहुत महत्वपूर्ण मामला है।…( व्यवधान)

श्री जी.एम.बनातवाला : डिप्टी स्पीकर सर, जो जुल्म-ओ-सितम दिल्ली पुलिस ने जामिया मलिया के तलबा पर ढाये हैं, उसकी मिसाल नहीं मिलती है। मैंने इस सवाल पर आज एडजर्नमैंट मोशन तक दिया था और यह नोटिस भी दिया था कि इस पर बोलने दिया जाए। शायद यह हद है इस महीने की नौ तारीख को बगैर किसी इजाजत के, एडमनिस्ट्रेशन से इजाजत लिये बगैर, एक अनप्रीसीडेन्टिड मैनर पर, यह किया गया, ऐसा मालूम होता है कि दिल्ली पुलिस अपनी जहनी तवाजुन खो चुकी है। इक्तेदार के नशे में चूर .यह जामिया मलिया में अंदर घुसती है और वहां पर बर्बरियत की वह मिसाल सामने आती है कि इंसानियत शर्म से सिर झुका ले। तलबा को मारा-पीटा गया, उनके सामान को लूटा गया, उनका रुपया-पैसा तक लूटा गया। वह तलबा जो इम्तिहान की तैयारिया कर रहे थे। उनमें से एक को तीसरे माले की बालकनी से नीचे फेंक दिया गया, जो बुरी तरह जख्मी है।

वहां पर जो बरूनी ममालिक के तलबा पढ़ते हैं, उनके साथ भी बेरहमाना तशद्दुद भरा जो सलूक हुआ है, वह इन्तिहाई शर्मनाक है। साहब, ये पुलिस बार-बार हमारे इन तालिबां को कहती रही है कि हमारी दरसगाहें, हमारी यूनिवर्सटियां, हमारे मदरसे और हमारे मुस्लिम्स सेन्टर्स ऑफ लर्निंग आई.एस.आई. ऐजेन्ट के मराकिज़ बन चुके हैं। उन्हें आई.एस.आई. ऐजेन्ट कहा गया और बुरी तरह से पीटा गया। उनमें से कुछ को गिरफ्तार करके, वहां से ले जाकर पुलिस स्टेशन पर भी बेतहाशा मारा और पीटा गया। उनकी दाढि़याँ नोंच-नोंचकर कहा गया कि ये अल्लाह के नूर की निशानी नहीं बल्कि ये दाढ़ी हिन्दुस्तान के अंदर आई.एस.आई. ऐजेन्ट होने की निशानी है। ये हालात वहां पर बने। वहां मस्जिद में जूतों समेत घुसकर वहां पर इमाम साहब को भी मारा-पीटा गया और उनकी टांगें तोड़ी गईं। कहां तक इस बर्बरता का जिक्र हम करते रहें। आज मैं यह कहने पर मजबूर हूं कि इतना सब कुछ होने पर भी हुकूमत के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगी है। वह पुलिस ऑफिसर्स जिन्होंने इस तरह जुल्मो-सितम और बर्बरता मचाई और तास्सुब और कम्यूनल प्रीज्यूडिस पेश किया, कोई ऐक्शन उनके खिलाफ अभी तक नहीं हुआ है। उनको सस्पेन्ड करो, यह पहला काम है। ज्यूडीशियल इनक्वायरी करो और बिल्कुल गलत तौर पर चार्जेज फ्रेम करने की कोशिश की गई है। वह स्टूडेन्ट्स जो इम्तिहान की तैयारियों में लगे हुए थे, उनको ले जाकर बंद किया गया। अब उनके ऊपर फर्जी मुकदमे दायर किये जा रहे हैं। मैं ज्यादा वक्त आपका नहीं लूंगा, लेकिन इस ऐवान को सोचना है कि पुलिस को यह क्या हो गया है। यह सब इसी वजह से हुआ जिसकी जिम्मेदारी सरकार पर है। यह सरकार और जो हालात हैं उनमें बार-बार यह प्रपोगण्डा किया है कि Muslims centre of learning are centres of terrorists and ISI agents और आज इस प्रपोगन्डा के होते हुए भी एक भी मदरसे या एक भी दार-उल-उलूम से कोई आई.एस.आई. ऐजेन्ट बरामद नहीं हुआ, लेकिन यह चीज है प्रपोगन्डा जिसने कम्यूनलिज़्म को फैला रखा है और अकलियत खिलाफ जज्बात को उभार रखा है और इसी अकलियत-खिलाफ जज्बात से हुकूमत द्वारा और संघ परिवार की तरफ से इस तरह के प्रचार किये जा रहे हों तो फिर पुलिस और जो सरकारी लोग हैं, उनको भी ऐनकरेजमेंट मिलती है, उनकी भी हौसलाफज़ाई होती है। बगैर ज्यादा वक्त लिये मैं इस बात का मुतालबा करता हूं कि ज्यूडीशियल इनक्वायरी की जाए। जो जिम्मेदार पुलिस अफसर हैं, उनको सस्पेन्ड किया जाए, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए, फर्जी मुकदमे हटाए जाएं। खुद होम मनिस्टर को चाहिए कि तलबा को बुलाएं, उनके साथ बैठें, उनके साथ गुफ्तगू करें, यह भी बहुत ज़रूरी है। आज वह स्टूडेन्ट्स भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। होम मनिस्टर उनके साथ गुफ्तगू करें और यह जो जुल्मो-सितम हुआ है, इसका तदारक फौरी तौर पर होना चाहिए। इसकी तमाम जिम्मेदारी अगर किसी पर आयद होती है तो वह हमारी हुकूमत पर आयद होती है।

 

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Mr. Deputy-Speaker, it is a great shame… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: This is ‘Zero Hour’. One has to be shortened.

श्री जी.एम.बनातवाला : हमने एडजर्नमैंट मोशन के बारे में नोटिस दिया था।

…( व्यवधान) ऐसी हकूमत को तो हक हासिल नहीं हकूमत करने का …( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: That is true. But we are now in the ‘Zero Hour’ and not in the Adjournment Motion.

… (Interruptions)

श्री रघुवंश प्रसाद सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, छात्रों पर जो अत्याचार हुए, उसके बारे में श्री बनातवाला जी ने बयान दिया और सरकार चुपचाप सुनती रही। क्या सरकार को इस बारे में कोई बयान नहीं देना चाहिए? यह बड़ा संवेदनशील मामला है। जामिया मलिया के लड़कों पर होस्टल में अत्याचार हुए।…( व्यवधान)

श्री जी.एम.बनातवाला : उपाध्यक्ष महोदय, होम मनिस्टर साहब यहां पर बयान दें और तालिबां के साथ बातचीत की जाये। …( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Dr. Raghuvansh Prasad Singh, please take your seat.

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Mr. Deputy-Speaker, Sir, what has happened in Jamia Millia Islamia is very shocking… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: It is already 1.35 p.m. now. There are still two-three other hon. Members to speak on the same subject. What I am requesting them is that they should also associate them with the other Members who have already spoken.

Yes, Shri Priya Ranjan Dasmunsi, please.

 

 

 

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): Mr. Deputy-Speaker, Sir, the incident that had taken place in the Jamia Millia Islamia is not merely an incident. It is a design. That design has been exposed now.

Sir, I am also a product of students movement. I came in the public life through the students movement. It is the students who lay the foundation of major issues concerning the people, concerning the country and concerning the world. It is the students who gear up the issues and people respond, encourage and honour them.

Jamia Millia Islamia is not merely a university confined within the territory of Delhi, it has its own international reputation. When I heard this incident, I first felt of late President Dr. Zakir Hussain who symbolised his dream with this university. This university is having students not only from India but also from the rest of the world, especially the Muslim nations.

Mr. Deputy-Speaker, Sir, there was an established code, I remember, in the Sixties when the nationalised movement was at its height in Bengal. That code in the Vice-Chancellors’ Conference said `unless the Administration, the Vice-Chancellor or the Principle, as the case may be, himself invites intervention by the police to respond to a particular situation, the police should not enter into the academic arena without the prior permission.’ That was the established truth. It was hailed by all the Vice-Chancellors during the Sixties. At that time, I was also a student leader.

But, Sir, last week, a very shocking incident has taken place in the Jamia Millia University. The students have met me and narrated me the whole thing. The Imam who hails from Murshidabad, as Shri Hannan Mollah has rightly said, is a universal man. He who used to conduct prayer in the mosque is not party to any political activity. But the way he was tortured and the kind of abuses that were hurled on him by the police, I feel sad being a citizen of this nation that this can happen by the police authority! The students who were busy for the preparation of their examination, reading books were tortured. Their hands were tied and they were beaten. One student told his story to me. I do not want to mention his case as he concealed his name. But the way he was undressed, the way he was hit by the Police lathi and gun point, it is intolerable. It is a shame. The police said:”तुम मुसलमान लोग देश में बगावत करते हो और अब यहां पर भी आये हो।” He cried on his feet. But he was not spared. The students who were preparing for their examination were not spared by the police. The tear gas shells were thrown not only inside the mosque but also on the table of the books where the boys were studying. In spite of all this, several students were arrested and cases were registered against them under Section 302. Even the Imam was taken to the custody. Several students have been arrested under false and fake cases. Even the students of Bangladesh are being tortured.

So, Sir, I feel that a secular Government has a responsibility to respond to such issues not just considering the Jamia Millia university as a campus but as a reputation that we like to have in abroad. They should try to think about it.

So, I demand not only a judicial inquiry forthwith but the withdrawal of all charges and cases against those innocent students. All the arrested students should be released immediately and the honour of the Imam be restored with the profound apology on the part of the Administration. Not only this, I also feel that the hon. Home Minister, in this very House, should come out with a statement tomorrow responding to the issues that we have raised today.

On behalf of my party, Indian National Congress, I demand this and express our full concern and sympathy to the students of Jamia Millia. Thank you.

प्रो. आई.जी. सनदी (धारवाड़ दक्षिण) : उपाध्यक्ष महोदय, मैं भी उनकी बात का सपोर्ट करता हूं।

श्री राशिद अल्वी : डिप्टी स्पीकर साहब, जामिया मलिया महज एक यूनीवर्सिटी का नाम नहीं है। जामिया मलिया इस देश के अंदर एक मूवमैंट है और हिन्दुस्तान की आजादी से पहले स्टालवाड फ्रीडम फाईटर ने इसकी बुनियाद इसलिए डाली कि जामिया मलिया में पढ़ने वाले लड़के फ्रीडम फाईटर हों।

उस जामिया मलिया के अंदर ९ तारीख को पुलिस दो क्रमिनल्स को पकड़ने के लिए गई। वे क्रमिनल्स जो सड़क पर दौड़ रहे थे, वे दोनों होस्टल के अंदर दाखिल हो गए। पुलिस उनके पीछे-पीछे होस्टल के अंदर पहुंची। वे दो क्रमिनल्स पकड़े गए या नहीं, यह नहीं मालूम लेकिन उन होस्टल्स के अंदर बेदर्दी के साथ, वहशियाना तरीके से जो जुल्म और बर्बरियत की कहानी दिल्ली की पुलिस ने की है, उसकी कोई मिसाल तारीख के अंदर नहीं मिलती। मैं होस्टल के अंदर गया। मैंने होस्टल में देखा, मुझे तकलीफ होती है, मेरा दिल रोता है यह कहते हुए कि जो बच्चे होस्टल में पढ़ रहे थे, कमरों के दरवाजे तोड़ दिए गए, विंडो तोड़ दी गई और अंदर जाकर उन पर डंडे बरसाए और बंदूक की नालियों से उन्हें मारा गया। मेरी कार के अंदर वह डंडा रखा है जो मैं जामिया मलिया से लेकर आया हूं। इस हाउस की इज्जत करता हूं इसलिए इस हाउस के अंदर नहीं लाया। लेकिन अगर आप इजाजत देंगे तो मैं वह डंडा दिखा सकता हूं जिसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए वहां के लड़कों को मार-मारकर। यही नहीं, एक लड़का जो किडनैप्ड है, जिसकी दो टांगे टूट गई हैं, दो टांगें काट दी गईं, उस लड़के को उठाकर मारा गया। उस लड़के का क्या कसूर था। वह कैसे आई.एस.आई. का एजैंट हो जाएगा। तीसरी मंजिल से लड़के को उठाकर फेंक दिया। उसकी पतलून लोहे की सलाख में फंस गई, लड़का फंस गया। उसे बंदूक से जबरदस्ती नीचे फेंक दिया गया। पतलून वहीं अटकी रह गई। लड़का तीसरी मंजिल से नीचे आकर गिरा। यह है पुलिस का काम। वहां तकरीबन डेढ़ सौ लड़कों की पिटाई की गई और जो लड़का ज्यादा जख्मी था, उसे जेल के अंदर बंद कर दिया गया। बाकी लड़कों को छोड़ दिया गया। करीब ६६ लड़कों को बंद किया गया। वाइस चांसलर की परमीशन नहीं थी। वी.सी. ने कहा कि मेरी इजाजत के बगैर पुलिस जामिया मलिया के अंदर आई थी। पुलिस की तादाद ५०-६० नहीं थी, पुलिस की तादाद, जो मुझे बताई गई, ५००-६०० थी। मैं तिहाड़ जेल गया। सारे लड़कों से मिल कर आया । मैं बयान नहीं कर सकता, बहुत तकलीफ से कहता हूं, जो आंसू उनकी आंखों से निकल रहे थे कि हमारा कसूर क्या है। भारतीय जनता पार्टी इस देश में टैरोरिज्म की बात करती है, यह सरकार टैरोरिस्ट्स की बात करती है, यह टैरोरिस्ट्स पैदा करने का काम करती है। मैं हिन्दू लड़कों से मिला था जो जामिया में अंदर पढ़ते हैं। मैं इस हाउस से यह कहता हूं कि उन्हीं लड़कों से बयान लेकर फैसला कर देना चाहिए। वे लड़के रोते थे कि हम हिन्दू और मुसलमान भाई-भाई की हैसियत से जामिया के अंदर रहते हैं। लेकिन जिस तरह का सलूक पुलिस ने किया, जिस तरह की जुबान पुलिस ने बोली कि ये आई.एस.आई. के एजैंट हैं, यहां से इन्होंने दूसरे मुल्कों की एजैंसी ले रखी और इस होस्टल में रहते हैं। वे हिन्दू मासूम बच्चे मुझे बयान कर रहे थे। इमाम को पकड़ा गया। उन्हें मारा गया। मैं उनसे मिला। वे तिहाड़ जेल के अंदर रो-रोकर अपनी कहानी बयान करते हैं कि मैं मस्जिद के अंदर बैठा था, कुरान-ए-पाक के साथ बेइज्जती की गई। क्या यह सैकुलर देश है ? क्या यह तवक्को की जा सकती है कि जिन लड़कों के साथ आज यह जुल्म हो रहा है, कल वे बहुत पैटि्रयौटिक होंगे, बहुत नैशनलिस्ट होंगे ? बी.जे.पी. की सरकार इस देश में टैरोरिज्म पेदा करने के लिए जिम्मेदार है। मैं तकलीफ के साथ कहना चाहता हूं, आज १७ तारीख है, ९ दिन हो गए, एक पुलिस वाले के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई। यह कैसा जुल्म है कि लड़कों के खिलाफ ३०७ इरादा-ए-कत्ल की दफा लगाई जा रही है और पुलिस के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। मैं कहना चाहूंगा कि होम मनिस्टर को जामिया के अंदर जाकर माफी मांगनी चाहिए। पुलिस आफिसर्स के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए। ज्यूडशियल इन्क्वारी होनी चाहिए और उसके साथ-साथ मुखतलिफ पार्टीज के एम.पीज को कमेटी बनाकर वहां जाकर देखकर आना चाहिए कि इस देश के अंदर क्या हो रहा है। इस देश में मुसलमानों के साथ क्या हो रहा है, मुसलमानों के बच्चों के साथ क्या हो रहा है। इसके बाद बी.जे.पी. की सरकार कहती है कि हम सैकुलर हैं। उत्तर प्रदेश के अंदर जो मस्जिद और मदरसों का कानून बनाया है, उससे हमें शुबहा पैदा हो जाता है। वही काम जामिया मलिया के अंदर हो रहा है। मैं पूरे जोर-शोर, पूरी ताकत के साथ अपनी पार्टी की तरफ से, अपनी तरफ से इससे एहतजाज करता हूं और मुतालबा करता हूं कि फौरन पुलिस आफिसर्स के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए। पुलिस का ऐटीटयूड यह है। जब मैं तिहाड़ जेल मिलने गया, बी.जे.पी. की सरकार के एक मंत्री बैठे हैं, ये भी मिलने गए।

इनसे भी पूछा जा सकता है कि क्या हुआ। जब मैं जेल के अन्दर मिलने के लिए गया, मैं पुलिस का एटीटयूड बता रहा हूं, जब मैं दोपहर को बाहर वापस आया तो मेरा ड्राइवर गायब था। मैं उसे तलाश करते हुए घूमा कि कहां है तो पता चला कि ए.सी.पी. की कार आ रही थी और मेरी कार उसके बीच में खड़ी थी, इसलिए मेरे ड्राइवर को उस ए.सी.पी. के आर्डर्स पर बन्द कर दिया गया है। वकीलों के साथ पुलिस ज्यादती करेगी, जामिया मलिया के लड़कों के साथ करेगी, एम.पीज़. के साथ करेगी, पुलिस का यह एटीटयूड है। इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मेरे ड्राईवर को सिर्फ इसलिए बन्द कर दिया कि ए.सी.पी. की कार जा रही है तो बीच में कोई कार कैसे आ सकती है। वे तो हयूमन बीइंग से ज्यादा ऊंचे होते हैं, वे कोई इंसान थोड़े ही हैं, वे तो इंसानों से बड़ी चीज हैं। मैं उनके खिलाफ प्रिवलेज मोशन भी पेस करूंगा कि दिल्ली पुलिस का क्या एटीटयूड है। बी.जे.पी. की सरकार को खत्म करने के लिए किसी की जरूरत नहीं, मुझे पूरा यकीन है कि दिल्ली पुलिस खुद इस सरकार को खत्म कर देगी।

श्रीमती फूलन देवी (मिर्जापुर) : उपाध्यक्ष जी, हम भी जामिया मलिया में गये थे, हमें भी एक मिनट का समय दिया जाये।…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Devendra Prasad Yadav, your notice on a question of privilege has been received by the hon. Speaker. It is under his consideration.

… (Interruptions)

SHRI E. AHAMED : This cannot be brushed aside like that. We want the response of the Government. Such a brutality has not been heard of in independent India against a university, against a community or against the people of this country. … (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Ahamed, you know that the Chair cannot compel the Government to react.

… (Interruptions)

SHRI HANNAN MOLLAH : I am requesting the hon. Minister. Let the Home Minister make a statement. … (Interruptions)

SHRI E. AHAMED : Muslims are also citizens of India. We want that justice should be done. … (Interruptions)

श्री हन्नान मोल्लाह : मंत्री जी, इस पर भी कुछ बोलिये।

श्रीमती फूलन देवी : जामिया मलिया इस्लामिया में हम भी होकर आये हैं, एक मिनट का समय हमें भी दिया जाये। वहां पर छात्रों के साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है, अत्याचार हुआ है। छात्रों को मारा-पीटा गया है, छात्रों का…( व्यवधान)

डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : सरकार संवेदनहीन हो जाये तो देश में क्या होगा। जिस तरह के जुल्म का वाकया माननीय सदस्यों ने सुनाया, वह आंखों देखी बात है।…( व्यवधान)

श्रीमती फूलन देवी : उपाध्यक्ष जी, हम भी दौरा करके आये, घूमकर आये। वहां बच्चों की आंखों में आंसू नहीं देखे जा रहे।

उपाध्यक्ष महोदय : आप जामिया के बारे में बोलना चाहती हैं ? एक महिला के नाते उनको बोलने दीजिए।

श्रीमती फूलन देवी (मिर्जापुर) : जामिया मलिया इस्लामिया में हम भी गये। जब हम वहां पर पहुंचे तो वहां पर बच्चे ऐसे रोने लगे, जैसे छोटे बच्चे मां को देखकर रो पड़ते हैं। पुलिस ने, पी.ए.सी. ने वहां पर घुसकर बच्चों को बुरी तरह से मारा, उनको नंगा-उघाड़ा करके, रूम्स को तोड़कर, घर में घुसकर उनको मारा-पीटा और उनका जो सामान था, उसको डकैतों की तरह लूट लिया। दूसरे उनको ३०७ में, बन्द किया गया। जो बच्चे वहां भविष्य बनाने आये थे, उन बच्चों का भविष्य इन लोगों ने बिगाड़ दिया, बबार्द कर दिया। ३०७ और ३०२ के केस लगाकर उनको जेल में बन्द कर दिया। जिन मां-बाप ने मजदूरी करके अपने बच्चों को पढ़ने के लिए वहां भेजा था, उनका भविष्य बनाने के लिए भेजा था, आज दिल्ली पुलिस प्रशासन ने उन बच्चों का भविष्य खत्म कर दिया है। मैं मांग करती हूं कि इस तरह के पुलिस प्रशासन के साथ कड़ा रवैया अख्तियार किया जाये। जांच करके जो भी शासन के लोग हों, उनको दंड दिया जाये। बलिया में इसी तरह हुआ और बनारस में भी इसी तरह हुआ और छात्रों के साथ जामिया मलिया इस्लामिया में भी इसी तरह हुआ। मैं इस सरकार से मांग करती हूं कि जांच करके पुलिस प्रशासन के अधिकारी या जो भी इसमें लिप्त हैं, उनको सजा दी जाये, सस्पेंड किया जाये। बच्चों पर जो भी फर्जी केस लगाये गये हैं, उनके केस वापस हों। बच्चों से यहां की सरकार जाकर माफी मांगे। इस सरकार के अधिकारियों के कारण पुलिस प्रशासन ने जबरदस्ती की, उनको सजा मिले। बताओ क्या कानून व्यवस्था है, पुलिस ही सब कुछ है, जो चाहे पुलिस कर सकती है। कहीं किसी को पकड़कर मार सकती है, किसी को आरोपी बना सकती है। आप उन बच्चों के साथ सहानुभूति प्रकट करें और उनके केस वापस लेकर उन बच्चों से भारत सरकार माफी मांगे, गृह मंत्री जाकर माफी मांगें।

श्री हन्नान मोल्लाह : इतना जुल्म हुआ है, आप कुछ तो बोलें।

SHRI E. AHAMED : We want a response from the Government. … (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Ahamed, I cannot compel the Government.

… (Interruptions)

श्री प्रभुनाथ सिंह : हमें आपने तीन बार बिठाया है।

उपाध्यक्ष महोदय : क्या करें, मंत्री जी बोल रहे हैं, रिएक्ट कर रहे हैं।

संसदीय कार्य मंत्री तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री (श्री प्रमोद महाजन) : इस चर्चा के दौरान जितनी जानकारी मैं अपने साथी शाहनवाज हुसैन से ले पाया हूं, उसके आधार पर मैं कुछ कहना चाहता हूं। अगर कोई गलती हो तो मैं पहले ही क्षमा चाहता हूं। इस घटना के सम्बन्ध में विद्यार्थियों का एक प्रतनधिमंडल गृह मंत्री जी से मिला था। हमारे मंत्री शाहनवाज हुसैन जी स्वयं उस प्रतनधिमंडल को लेकर गृह मंत्री जी के पास गए थे। उनको जो भी शिकायत थी, जिसका कुछ बयान यहां भी हुआ, वह गृह मंत्री जी के पास रखी। गृह मंत्री जी ने एल.जी. को इसकी जांच करने के लिए कहा है। शायद कोई मजिस्ट्रेट लेवल की जांच हो रही है।

श्री जी.एम. बनातवाला : मजिस्ट्रेट लेवल की जांच से क्या होगा…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Let the Minister reply. You please hear him. If you want any further clarifications, you can ask him later.

श्री प्रमोद महाजन : पहले मुझे पूरा करने दें। अगर कोई समस्या हो तो मैं गृह मंत्री जी के पास रखूंगा, लेकिन मुझे कम से कम क्या हुआ, यह तो बताने दें। अगर जांच के स्तर से आप सहमत नहीं हैं, अगर आप और उच्च स्तरीय जांच चाहते हैं तो मैं गृह मंत्री जी को आपकी इस मांग से भी अवगत करा दूंगा। मैं केवल स्थिति को बयान कर रहा हूं। गृह मंत्री जी इन विद्यार्थियों से मिल चुके हैं। एल.जी. को जांच करने को कहा है। एल.जी. की ओर से जांच हो रही है। गृह मंत्री जी ने हमारे मंत्रिपरिषद के सहयोगी शाहनवाज हुसैन से कहा कि वे स्वयं जेल जाकर इनसे मिलें। वे मिले भी हैं और उनकी शिकायतें फिर गृह मंत्री जी के पास रखी हैं। उसके आधार पर उनकी जमानत जब होने लगी तो सरकार की ओर से जमानत का विरोध नहीं किया गया। इसके पश्चात भी सदस्यों ने जो वभिन्न मुद्दे उठाए हैं, उनमें से जो मांगें बनती हैं, उन सारी मांगों को कंसोलिडेट करके मैं गृह मंत्री जी के पास फिर से आप सबका निवेदन भेजूंगा।

कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज, उ.प्र.) : विद्यार्थियों के ऊपर जो फर्जी मुकदमा दायर किया है, पहले वह वापस लिया जाए। यह कोई सहानुभूति की बात नहीं है कि पहले मुकदमा लगा दिया और फिर जमानत का विरोध नहीं कर रहे हैं। यह बड़ा गम्भीर मामला है।

MR. DEPUTY-SPEAKER: The hon. Minister has stated that he would convey the views expressed by the hon. Members to the Home Minister for further action.

कुंवर अखिलेश सिंह : संसदीय कार्य मंत्री जी के बयान से यह परिलक्षित हो रहा है कि यह प्रथम द्ृष्टया मामला बनता है और सरकार भी इसे मान रही है। …( व्यवधान) <ºÉÉÒÉÊãÉA VÉàÉÉxÉiÉ BÉEÉ ÉÊ´É®ÉävÉ xÉcÉÓ BÉE® ®cÉÒ cè *

MR. DEPUTY-SPEAKER: I am on my legs.

… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: I will not ask the Minister to reply to this.

कुंवर अखलिश सिंह : ªÉc MÉà£ÉÉÒ® àÉÉàÉãÉÉ cè* ºÉ®BÉEÉ® {ÉcãÉä àÉÖBÉEnàÉÉ ´ÉÉ{ÉºÉ ãÉä* ªÉc BÉEÉä<Ç +ÉSUÉ iÉ®ÉÒBÉEÉ xÉcÉÓ cè {ÉÖÉÊãÉºÉ ÉÊVÉºÉ ºÉƺlÉÉ àÉå SÉÉcä PÉÖºÉ VÉÉA =xcå àÉÉ®ä {ÉÉÒ]ä +ÉÉè® {ÉEVÉÉÔ àÉÖBÉEnàÉÉ BÉEɪÉàÉ BÉE®BÉEä VÉäãÉ £ÉäVÉ nä * ( व्यवधान) लोगों की जमानत कराकर उनके ऊपर आपराधिक मुकदमा दायर कर दिया जाए, यह कोई बात नहीं हुई।…( व्यवधान) ये जमानत का विरोध नहीं कर रहे हैं, इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि सरकार भी मान रही है कि छात्रों के साथ ज्यादती हुई है। हमारा अनुरोध है कि इस मामले की जांच के लिए एक संसदीय समति का गठन किया जाए।

SHRI E. AHAMED : This issue cannot be treated in a high-handed way. This issue cannot be treated in a cavalier fashion.… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: On your insistence, the hon. Minister intervened and he has given whatever information he had with him.

SHRI E. AHAMED : Let there be a statement by the Minister.

MR. DEPUTY-SPEAKER: He has already said that the feelings of the entire House will be conveyed to the Home Minister.

SHRI PRAMOD MAHAJAN: Sir, even the reactions to my intervention will be communicated to the Home Minister.

SHRI G.M. BANATWALLA : The Home Minister must make a statement here.… (Interruptions)

SHRI E. AHAMED : We will be satisfied if the hon. Home Minister come to the House and make a statement. Let him convey the feelings of the House.… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Ahamed, this is what he has been repeatedly saying.

श्री राज बब्बर (आगरा) : उपाध्यक्ष जी, जब सारे सदन में इसकी निंदा की जा रही है तो आपकी तरफ से गृह मंत्री जी को यहां सदन में बुलाकर जवाब देने के लिए कहा जाये। वे सारे सदस्यों की भावनाओं को समझें और उनका आदर करें कि सारा सदन इस बात पर गहरी चिंता प्रकट कर रहा है। करीब ६७-६८ निर्दोष विद्यार्थियों को धारा ३०२-३०७ लगाकर गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि वी.सी. साहब ने कहा है कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों को कोई इजाजत नहीं दी थी और उनकी इजाजत के बगैर कोई भी अधिकारी अंदर नहीं जा सकता है। सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए। गृह मंत्री को यहां आकर जवाब देना चाहिए। पूरा सदन इस बात पर एकमत है, सारी पार्टियां एकमत हैं कि विद्यार्थियों के साथ दुव्र्यवहार हुआ है। गृह मंत्री जी को यहां बुलाया जाये और जवाब देने के लिए कहा जाये।

MR. DEPUTY-SPEAKER: It amounted to a discussion. The Minister has reacted and said that the entire feelings of the House would be conveyed to the Home Minister.

कुंवर अखिलेश सिंह : मान्यवर, यह गंभीर मामला है। गृह मंत्री जी यहां आयें। सरकार को आपकी तरफ से जवाब देने का निर्देश दिया जाये। यह गंभीर मामला है।

MR. DEPUTY-SPEAKER: This is `Zero Hour’. You are a junior Member.

SHRI G.M. BANATWALLA : But I am a senior Member.

MR. DEPUTY-SPEAKER: I did not term you as a junior Member but only Shri Akhilesh Singh.

Your feelings have already been taken note of by the Minister.

… (Interruptions)

डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : यह नौजवान हैं, इसलिए बोल रहे हैं।

उपाध्यक्ष महोदय : मैं भी बोल रहा हूं और आप भी बोल रहे हैं तो कैसे चलेगा।

I have heard every one of you and before we adjourn the House for Lunch I would like to hear Shri Prabhunath Singh.

कुंवर अखिलेश सिंह : उपाध्यक्ष जी, ६७ छात्रों के भविष्य का सवाल है और एक शिक्षण संस्था के अंदर पुलिस द्वारा छात्रों पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया गया है। इस सवाल को ऐसे ही मत छोड़िये। मान्यवर, अगर इस सवाल कोऐसे ही छोड़ दिया गया तो पुलिस का मनोबल बढ़ जायेगा। आज सारे लोग इसके खिलाफ हैं। दिल्ली पुलिस बर्बरता के सभी रिर्काड तोड चुकी है ।

श्री राज बब्बर (आगरा) : यह लगातार तीसरी घटना है। ए.एम.यू में हुआ, बनारस यूनिवर्सिटी में हुआ और अब जामिया में हुआ। यह तीसरी घटना है। आप सरकार को निर्देश दें कि गृह मंत्री जी सदन में आकर जवाब दें।

MR. DEPUTY-SPEAKER: I cannot compel the Government to call the Home Minister here.

कुंवर अखिलेश सिंह : इतना अत्याचार हो रहा है तो हाउस से निर्देश दिया जाये।

उपाध्यक्ष महोदय : यहां से निर्देश नहीं दिया जा सकता है।

कुंवर अखिलेश सिंह : ऐसे मामलों में देना चाहिए।

उपाध्यक्ष महोदय : जो नियम बनाये गये हैं उन्हीं के अनुसार हम बता सकते हैं।

The Presiding Officer cannot give any direction to the Government.

रघुवंश प्रसाद सिंह : जो संवेदनशील सरकार है उसको निर्देश देने की परिपाटी नहीं है,लेकिन जो सरकार संवेदनहीन हो जाये, जुल्म करने लगे, उस हालत में उपाध्यक्ष जी, आपको निर्देश देना चाहिए।

14.00 hrs.

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please cooperate with me.

… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: I heard you. It is his turn now. Nothing will go on record.

(Interruptions)*