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Need To Honour Martyrs Of Village Malcha Sanauh In Delhi Who Fought … on 7 September, 2007

Lok Sabha Debates
Need To Honour Martyrs Of Village Malcha Sanauh In Delhi Who Fought … on 7 September, 2007


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Title: Need to honour Martyrs of village Malcha Sanauh in Delhi who fought against Britishers.

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श्री किशन सिंह सांगवान (सोनीपत)  : महोदय, मैं आपके माध्यम से एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय आपके समक्ष रख रहा हूं।  सारा देश सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की डेढ़ सौवीं वर्षगांठ मना रहा है।  स्टेट गवर्नमेंट और सेंट्रल गवर्नमेंट देश में सन् 1857 की आजादी की लड़ाई में जिन लोगों ने हिस्सा लिया, उनकी डेढ़ सौवीं वर्षगांठ मना रहे हैं।  मुझे यह बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि जिस स्थान पर हम बैठे हैं, देश की सबसे बड़ी पार्लियामेंट यह लोकसभा है, राष्ट्रपति भवन, नार्थ ब्लाक, साउथ ब्लाक सहित लगभग पूरी नयी दिल्ली जहां बसी है, यह मालचा समूह के 12 गांवों का एरिया है, जिसमें नयी दिल्ली बसी है।  उन गांवों के लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई की थी।  अनेक लोग मारे गए, अनेक लोगों को अंग्रेजों ने बेदखल कर दिया, वे भाग गए और कुछ अंग्रेज-भक्त किस्म के लोग चंद अंग्रेजों के साथ मिलकर यहां रह गए। इन बातों को डेढ़ सौ साल हो गए हैं।

            मेरे क्षेत्र सोनीपत में मालचा एक गांव है। कुछ लोग कुरुक्षेत्र जिले में बस गए, कुछ गुड़गांव में बस गए और कुछ लोग दिल्ली के अलग-अलग गांवों में बस गए। बहुत लोगों को अंग्रेजों ने मार भी दिया। उनकी सारी जमीन छीन ली और उन्हें एक पैसा भी मुआवजा नहीं मिला। जिन लोगों ने इतनी कुर्बानियां दीं, आज यहां भवन बने हुए हैं, सारी नई दिल्ली बसी हुई है, लेकिन उन गांवों के लोग मजदूरी करने पर मजबूर हैं, क्योंकि उन्हें जमीन का कोई मुआवजा नहीं मिला। देश की फ्रीडम फाइटर्स लिस्ट में भी उनका नाम नहीं है। हमारे फ्रीडम फाइटर्स के साथ काफी ज्यादती हो रही है। उन लोगों ने बार-बार रिप्रैजैंटेशन दिए लेकिन कहीं उनकी सुनवाई नहीं हुई। मालचा और उसके आस-पास के गांवों में एक प्राचीन मंदिर शिवालय है।…( व्यवधान) वह मंदिर आज भी ऐग्ज़िसटैंस में है और बाकायदा वहां पूजा होती है। जब अंग्रेजों ने वहां दमन शुरू किया, उन बारह गांवों के सब लोगों ने मंदिर में इकट्ठे होकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ने का प्रण लिया था। जिसे आज बुद्धा गार्डन कहा जाता है, उस वक्त वहां बहुत बड़ा जंगल होता था। बारह गांवों की महिलाओं ने सब गांवों के लोगों को इकट्ठा करके सांझा रोटी का आयोजन किया था। आज जो जगह धौला कुआं के नाम से जानी जाती है, वहां एक कुआं होता था, जिसमें लोगों ने नमक डालकर प्रण लिया था। सारा कुआं नमक से भर गया था, इसीलिए उसका नाम धौला कुआं पड़ा। इतने सारे लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाया। वे जमीन से बेदखल हो गए, लेकिन आज तक उनका रिकार्ड सरकार के पास नहीं है।…( व्यवधान) उन्हें एक पैसा मुआवजा नहीं मिला और यहां बड़े-बड़े भवन बन गए।

            पहले देश की राजधानी कलकत्ता होती थी। 1911 में जब राजधानी कलकत्ता से यहां शिफ्ट हुई, तब इसे नई दिल्ली नाम दिया गया। तब सारी जमीन अंग्रेजों ने अपने कब्जे में ले ली थी।…( व्यवधान)

            मेरा आपके माध्यम से केन्द्र सरकार से अनुरोध है कि जिन लोगों ने इतनी कुर्बानियां दी हैं, आज उनका कहीं कोई रिकार्ड नहीं है। सारे गांवों का रिकार्ड चैक किया जाए, उन्हें उनकी जमीनों का मुआवजा दिया जाए, उन्हें फ्रीडम फाइटर्स डिक्लेयर किया जाए, उन्हें फ्रीडम फाइटर्स की फैसीलिटीज मिलनी चाहिए।…( व्यवधान) उन्हें फ्रीडम फाइटर्स का सम्मान मिलना चाहिए, बाकायदा रिकार्ड में आना चाहिए। मेरी एक यह मांग है।

            सोनीपत के पास लिबासपुर नाम का एक गांव है। उसके पास राई गांव है। राई में अंग्रेजों की फौज का अड्डा होता था। लिबासपुर गांव में भी 28-30 व्यक्ति कोल्हू में जिंदा पेर दिए गए थे। इसका रिकार्ड भी है। मैं आपको चार व्यक्तियों के नाम भी बता रहा हूं। उनके साथ काफी जुल्म हुआ।…( व्यवधान)

एक व्यक्ति उदमी राम और उनकी वाइफ, गुलाब सिंह, जसराम, चार व्यक्ति ऐसे थे जिन्हें अंग्रेजों ने पेड़ों पर कीलों से गाढ़ दिया था। तीन दिन बाद उनकी मौत हो गई। 28-30 व्यक्ति कोल्हू में लहूलुहान हो गए थे। वह कोल्हू आज भी उस गांव में मौजूद है। सारा गांव बेदखल कर दिया गया था। आज उनके पास एक इंच जमीन नहीं है, श्मशान घाट नहीं है, तालाब नहीं हैं, उन्हें कोई जमीन नहीं मिली, कोई मुआवजा नहीं मिला। ऐसे लोग जिन्होंने देश के लिए इतनी कुर्बानी दी हो, वे आज फ्रीडम फाइटर्स कहलाने लायक भी नहीं हैं।

            मेरा अनुरोध है कि जिन लोगों ने वास्तव में देश के लिए कुर्बानी दी, उनके इतिहास की छानबीन होनी चाहिए। उन्हें फ्रीडम फाइटर्स डिक्लेयर करके पूरी फैसीलिटी मिलनी चाहिए। धन्यवाद।[N36]