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Title : Regarding reported leakage of Librehan Commission Report.
श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी): अध्यक्ष महोदया, आज मैंने इंडियन एक्सप्रेस में पढ़ा …( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज (विदिशा): अध्यक्ष महोदया, आज नेता प्रतिपक्ष की तरफ से प्रश्नकाल स्थगन का एक नोटिस दिया गया है। मैं आपसे अनुरोध करना चाहूंगी कि सबसे पहले उन्हें अपनी बात कहने की इजाजत दें। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : मुझे नेता प्रतिपक्ष से प्रश्नकाल के निलंबन के लिए सूचना मिली है।
…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : लिब्राहन कमीशन के बारे में आज मैंने जो इंडियन एक्सप्रेस में पढ़ा, यह लीकेज क्यों हुआ? इसे बाकायदा सदन के पटल पर रखना चाहिए था। अध्यक्ष महोदया, ये परंपरायें हैं। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : मैं उसकी अनुमति नहीं दे रही हूं, क्योंकि वह नियम 388 के अनुरूप नहीं है, किंतु मैं नेता प्रतिपक्ष को संक्षेप में अपनी बात कहने के लिए अनुमति दे रही हूं।
…( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : धन्यवाद, अध्यक्ष महोदया। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : वह आप ही की बात कह रहे हैं, इनकी बात आने दीजिए।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी (गांधीनगर): अध्यक्ष महोदया, मुझे लगता है कि इस विषय पर भी कभी आपके कक्ष में बैठकर यह तय किया जाए कि किन-किन विषयों पर उचित रूप से प्रश्नोत्तरकाल स्थगित किया जा सकता है या इस प्रकार का प्रस्ताव रखा जा सकता है। मैं आपका आभारी हूं कि चाहे आपने मेरा प्रस्ताव नहीं स्वीकार किया, लेकिन मुझे इस विषय पर बोलने की अनुमति दी। मुझे जहां तक स्मरण आता है, मैंने जीवन में कभी पहले प्रश्नोत्तरकाल स्थगित करने की प्रक्रिया का उपयोग करने की कोशिश नहीं की। पहली बार मैंने नोटिस दिया है।
आज प्रातः काल जब मैंने इंडियन एक्सप्रेस देखा तो मैं हैरान हुआ कि अभी तक तो यह रिपोर्ट सदन के सामने भी नहीं रखी गयी, सदन को भी नहीं बतायी गयी, तो इंडियन एक्सप्रेस को किसने बतायी और क्यों बतायी? मेरे एक साथी ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के एडीटर से सीधे पूछा तो उन्होंने कहा कि मैं आपको कह सकता हूं कि यह ऑथेन्टिक है। इसमें कोई तथ्य हमने कपोल-कल्पित करके छापा हो, ऐसा नहीं है। मैं नहीं जानता हूं। मैं आश्चर्यचकित हूं। अगर कोई यह कहता है कि आडवाणी अयोध्या के उस अवसर पर, लोगों को संग्रहित करके वहां पर लाये, इतनी बड़ी संख्या में लोग वहां आए, इसीलिए यह घटना हो गयी। कोई कह सकता था, मैं अपेक्षा करता था कि शायद कोई कहेगा। इसमें इन्डाइटमेंट शब्द का प्रयोग किया गया है, इसमें दो बातें कही गयी हैं। …( व्यवधान)
श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज): महोदया, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : महोदया, आपने मुझे अनुमति दी है।…( व्यवधान) मैं जीवन में पहली बार इस प्रक्रिया का प्रयोग कर रहा हूं, ऐसा क्यों कर रहा हूं? …( व्यवधान)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन (भागलपुर): लीडर आफ अपोजीशन बोल रहे हैं, लीडर आफ हाउस बोलेंगे, क्या तब भी ऐसा करेंगे? …( व्यवधान) आप बताइए, क्या व्यवस्था का प्रश्न है? …( व्यवधान) कौन सी व्यवस्था का प्रश्न है? किस नियम के तहत आपका प्रश्न है? …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : उनका प्वाइंट आफ आर्डर है।
…( व्यवधान)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : यह डिस्टर्ब करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप किस नियम के तहत इसे उठा रहे हैं?
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप मुझे बोलने दीजिए। किस नियम के तहत व्यवस्था का प्रश्न उठा रहे हैं? आप वह नियम बताइए।
…( व्यवधान)
श्री जगदम्बिका पाल : महोदया, मैं आपके माध्यम से व्यवस्था का प्रश्न उठाना चाहता हूं।..( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप नियम बताइए।
…( व्यवधान)
श्री जगदम्बिका पाल : महोदया, क्या सदन में समाचार पत्रों का संज्ञान लिया जाएगा? अगर समाचार पत्र में है, …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप नियम बताइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप नियम बताइए।
…( व्यवधान)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : इन्हें कोई नियम मालूम नहीं है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप नियम बताइए।
…( व्यवधान)
श्री जगदम्बिका पाल : मैं आपकी अनुमति से चाहता हूं कि क्या समाचार पत्रों का संज्ञान लिया जाएगा? समाचार पत्र क्या आप सदन में …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : अगर आप नियम नहीं बता रहे हैं, तो आप अपना स्थान ग्रहण करिए। आप नियम बताइए।
…( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : यह कोई व्यवस्था का उल्लंघन नहीं है। यह स्वयं व्यवस्था का उल्लंघन है। …( व्यवधान)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : धन्यवाद। सम्मानित सदस्य को जानकारी होनी चाहिए कि वह कतरन देकर ही उसके आधार पर मैंने प्रॉपर परमीशन मांगी है, क्योंकि I was shocked to see this report.
जिस रिपोर्ट में मेरे वरिष्ठ नेता और काफी समय से अस्वस्थ चल रहे वाजपेयी जी को भी इनडाइट करने की बात कही गई है।…( व्यवधान) मुझे इनडाइट करते तो मैंने कहा कि मैं उसकी चुनौती को स्वीकार करता, चुनौती मानता। हवाला में मुझे इनडाइट करने की कोशिश की, मैंने चुनौती मानी। मेरा इनडाइटमैंट होता, मेरी पार्टी का इनडाइटमैंट होता, समझ में आता है, लेकिन वाजपेयी जी का उल्लेख देखकर मुझे लगा कि मेरा कर्तव्य बन जाता है कि जिनके नेतृत्व में मैंने जीवनभर राजनीति में काम किया, उनके खिलाफ, उनकी आज की अवस्था में कोई इस प्रकार की बात कहे और कही गई है। मैं इसलिए उसके बारे में डिटेल में नहीं जाता हूं, क्योंकि मैं चाहूंगा कि यह रिपोर्ट सरकार को जून के महीने में दी गई और जून के बाद आज नवम्बर का महीना पूरा होने को आया है, बीच में एक सैशन हो चुका है, उस समय गृह मंत्री जी ने यह रिपोर्ट सदन के सामने नहीं रखी। आज दूसरा सैशन शुरू हुए भी दो-तीन दिन हो गए हैं। हममें से बहुत सारे लोग समझते थे कि शायद पहले ही दिन यह रिपोर्ट रखी जाएगी, लेकिन नहीं रखी गई, दूसरे दिन नहीं रखी गई। आज तीसरा दिन है तो अचानक हम अखबार में मोटे तौर पर इस प्रकार की खबर देखते हैं और एडीटर कहते हैं कि यह ऑथैंटिक रिपोर्ट है। उसमें थोड़े-बहुत शब्द बदले होंगे, मैं नहीं जानता। मैं इतना जानता हूं कि इस रिपोर्ट के पब्लिश होने के बाद एक दिन का भी विलंब करने का अधिकार सरकार को नहीं है, तुंत रखनी चाहिए। मैं मांग करता हूं कि यह रिपोर्ट ज्यों की त्यों आज ही, सदन इसके बाद कोई दूसरी कार्यवाही न करे, इस रिपोर्ट को यहां पर रखने की मुझे इजाजत चाहिए। मैं दूसरी कोई मांग नहीं कर रहा हूं, मैं इतना जरूर कह रहा हूं कि अगर यह बात सही है जो इसमें लिखी है, तो यह दोनों बातें सरासर असत्य हैं, मैटिकुलसली प्लैंड। कोई षडयंत्र नहीं था, कोई योजना नहीं थी, यह घटना हुई जिस घटना के बारे में स्वयं लिब्रहान कमीशन के सामने कहा। मैंने उसके बाद तुंत लिखा हुआ है कि मेरे लिए एक बहुत दुखद दिन था, “It is the saddest day of my life.” यह मैंने स्वयं लिब्रहान कमीशन के सामने कहा। उसकी एवीडैंस में भी आएगा। जहां तक मैंने देखा है कि इस रिपोर्ट में भी उसका थोड़ा सा उल्लेख है। लेकिन मोटे तौर पर मेरी मांग है कि आज बिना दूसरी कार्यवाही किए हुए गृह मंत्री जी इस सदन में वचन दें कि मैं तुंत इस रिपोर्ट को लाकर सदन के सामने रखूंगा।…( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : वर्ना यह धारावाहिक चलता रहेगा, टू बी कंटीन्यूड है।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : इस रिपोर्ट के नीचे लिखा हुआ है ‘to be continued’. इस रिपोर्ट को उन्होंने इतना ऑथैंटिक माना कि वे इसे सीरियली देने को तैयार हैं, एक-एक हिस्सा करके, धारावाहिक करके देने को तैयार हैं। इस प्रकार की रिपोर्ट इस प्रकार अखबारों में छपती रहे, लीकेज होती रहे, It is a breach of privilege of the House, but that is a different matter. I have not taken recourse to the Privilege Motion, but I have sought from the Government immediate placing of this Report on the Table of the House. Personally, I am proud of my association with the Ayodhya Movement. I was distressed by the demolition of that structure, but so far as the Movement is concerned, मैं समझता हूं कि मेरे जीवन में मेरा अयोध्या मूवमैंट के साथ जुड़ना और वहां पर जनता की इच्छा के अनुसार उस स्थान पर एक भव्य राम मंदिर बने, यह मेरे जीवन की साध है और जब तक यह साध पूरी नहीं होगी, मैं इसके लिए कार्य करता रहूंगा। आज वहां पर एक मंदिर बना हुआ है और कुछ नहीं है, मंदिर ही है। लेकिन वह मंदिर जिस रूप में है, वह कोई भगवान रामचन्द्र के जन्म स्थान के अनुरूप नहीं है। मैं चाहूंगा कि वैसा ही एक भव्य मंदिर बने। यह मेरे मन की इच्छा है। आज गृह मंत्री जी से मेरी मांग है कि वह बिना अधिक विलंब के इस रिपोर्ट को सदन के सामने रखें जिससे हमें समझ में आए कि लिब्रहान कमीशन ने क्या कहा है। मेरी कम से कम उनके सामने जितनी एवीडैंस की रिपोर्ट हो गई, निश्चित रूप से दस दिन तक मैंने लिब्रहान कमीशन के सामने अपना बयान दिया, अपना विचार रखा, अयोध्या मूवमैंट के बारे में कहा। डिमॉलिशन मैं कभी एक्सपैक्ट नहीं करता था, डिमॉलिशन जिस प्रकार हुआ, मैं आपको कह सकता हूं कि वहां पर जितने लोग थे, वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के थे, विश्व हिन्दू परिषद के थे, बीजेपी के थे।
सबने पूरी कोशिश की कि जितने लोग उसे तोड़ रहे थे, आक्रमण कर रहे थे, वे ऐसा न करें। विश्व हिन्दू परिषद् के सबसे बड़े नेता श्री अशोक सिंघल को उन लोगों द्वारा मैन हैंडल किया गया। मुझे इसके अलावा और कुछ नहीं कहना। मैं एक बार फिर गृह मंत्री जी से निवेदन करूंगा …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मैं गृह मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि वे लिब्राहन रिपोर्ट सदन के सामने रखें।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : बहुत-बहुत धन्यवाद। मुलायम सिंह जी आपको क्या कहना है?
श्रीमती सुषमा स्वराज : अध्यक्ष महोदया, गृह मंत्री जी यहां बैठे हैं और नेता सदन भी बैठे हैं। …( व्यवधान)
श्री शैलेन्द्र कुमार (कौशाम्बी): आप उन्हें बोलने दीजिए। …( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज: वे जरूर बोलें। …( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : अध्यक्ष महोदया ने मुझे बोलने का टाइम दिया है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : उन्होंने यह मांग कर दी है, इसलिए आप बैठ जाइये।
…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : अध्यक्ष महोदय, लिब्रहान कमीशन की रिपोर्ट सदन के चलते लीक होना मैं अच्छा नहीं मानता हूं। लेकिन जहां तक नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उनका सौभाग्य है, तो मेरा भी सौभाग्य है कि इनका और हमारा टकराव इसी इश्यू पर हुआ। वह टकराव मामूली नहीं हुआ। उस समय पूरे देश में ऐसी आग लगी थी, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। यह लिब्रहान कमीशन 16 साल पहले गठित किया गया, जिसे इसी सरकार ने गठित किया। अब हालत यह है कि उस समय जो बच्चा था, वह अब जवान हो गया, जो जवान था, वह बूढ़ा हो गया और जो बूढ़ा था, वह मर गया, लेकिन लिब्रहान कमीशन की रिपोर्ट अभी तक सदन के सामने नहीं आयी। आखिर इसकी क्या वजह है? इसमें सरकार की भी रूचि है। एक रिलायंस कम्पनी है। उसकी रोजाना सुनवाई हो रही है, रोजाना पैरवी हो रही है। आखिर लिब्रहान कमीशन की रिपोर्ट को यहां पर रखकर उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह मैं सरकार से जानना चाहता हूं। अगर रिपोर्ट लीक हुई है, तो वह कहां से हुई है और अगर लीकेज हो गयी है, तो मैं भी चाहता
हूं, मैं प्रतिपक्ष के नेता की बात से सहमत हूं कि सदन तब चले जब लिब्रहान कमीशन की रिपोर्ट यहां रखी जाये। …( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : बिल्कुल ठीक है, सदन तब चलेगा जब रिपोर्ट यहां पेश होगी।
श्री मुलायम सिंह यादव : इस मामले में देश को कन्फ्यूजन में नही रखना चाहिए, क्योंकि इससे बड़े गंभीर परिणाम हो सकते हैं। धीरे-धीरे वही स्थिति आ सकती है, जो वर्ष 1990 से लेकर 1992 तक हुई। उस समय दंगे हुए जिसमें जानें गयीं, आग लगी आदि सब कुछ हुआ। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? सरकार यह जिम्मेदारी ले। आडवाणी साहब, आपका सौभाग्य है, तो मेरा भी सौभाग्य है कि हम आपके बीच टकराये और हमने मस्जिद की हिफाजत की। हमारा यह मत अभी तक साफ है कि न्यायालय जो भी फैसला करे, उसे हम स्वीकार करेंगे। अब वह फैसला चाहे मंदिर के पक्ष में हो या मस्जिद के पक्ष में हो। हमारा यही इश्यू था और इसी को लेकर हम चले थे। इसलिए हमें कुछ ऐसा करना पड़ा, न चाहते हुए हमें कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी जिसमें लोगों की जानें भी गयीं, बहुत सी सम्पति बर्बाद हुई। इसलिए हम चाहते हैं कि सरकार द्वारा अब इस मुद्दे को ज्यादा लम्बा खींचना उचित नहीं है। हम संसदीय कार्य मंत्री जी से कहना चाहेंगे कि सदन में ..( व्यवधान) गृह मंत्री जी हैं, तो तत्काल खड़े होकर बतायें। …( व्यवधान) आप इस रिपोर्ट को आज ही सदन में रखिए। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : कृपया आप सब शांत हो जाइये।
…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : आज ही रिपोर्ट सदन में रखिए। हम तो कह रहे हैं कि अभी रखिए। सदन तब तक के लिए स्थगित किया जाए। रिपोर्ट सदन में लायी जाये। हम पूछना चाहते हैं कि रिपोर्ट यहां लाने में देर क्यों हो रही है? हम चाहते हैं कि लिब्रहान कमीशन की रिपोर्ट तुंत यहां रखी जाये।
श्री दारा सिंह चौहान (घोसी): अध्यक्ष महोदया, लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट काफी दिन से लंबित है। इसे पहले ही सदन में लाना चाहिए था। लेकिन आज चर्चा दो सौभाग्यशाली लोगों के बीच में हो रही है। मैं केवल इतना ही कहना चाहूंगा कि रिपोर्ट तत्काल यहां पर आ जानी चाहिए। लेकिन इससे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि बिना संसद में रिपोर्ट आये हुए लीक हो जाना इससे बड़ा दुर्भाग्य है। इसलिए इन पर सारी जिम्मेदारी है। इनको पहले स्पष्टीकरण देना चाहिए कि कैसे यह रिपोर्ट लीक हुई? मैं बस यही कहना चाहता हूं।
SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): Madam, the Liberhan Commission is the longest Commission in our country. So many times, extensions have been given. We have been demanding since long that the Liberhan Commission’s Report should be brought before the House. When after the long 17 years, the Report was submitted to the Government in the last session, a demand was raised that the Report should be placed on the Table of the House.
When the entire nation is debating this and the report is selectively being leaked to the Press, why is the report not being placed before the House? Madam, when we demanded in the last Session, we were told that the report would be brought before Parliament along with the Action Taken Report. Our demand is that the Liberhan Commission Report along with the ATR be laid on the Table of the House today itself.
SHRI ARJUN CHARAN SETHI (BHADRAK): Madam, this is no doubt a matter of concern for all of us. The precedent in the House is that these reports are first brought before Parliament. Once a report is placed on the Table of the House, there is no harm in it being released to the press. It is a privilege of the House. As has been stated here, before being placed on the Table of the House the report has been leaked to the press. I do not know how far it is true. If it is true, the hon. Home Minister, who is present here, may state the facts. I demand that this report be placed on the Table of the House immediately. I also demand that the Home Minister do clarify whether this report has been leaked to the press or not.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी :महोदया, एक बात कहना चाहता हूं क्योंकि आपने कहा है कि यह बताओ कि लीकेज हुआ है या नहीं, इसमें रेफरेंस अगर किसी का है, तो होम मिनिस्ट्री सोर्सेज का ही है। Whether it is correct or not I do not know. I would like the Home Minister to clarify that. The newspaper report says, “Sources in the Union Home Ministry have confirmed to The Indian Express that the report is also severely critical of many Muslim leaders representing organizations such as Babri …”. It further says, “The Home Ministry, which is giving final touches to the action taken report (ATR), intends to table the ATR in Parliament along with the report of the Commission during the ongoing Winter Session”. So, the two references in this report are also to the Home Ministry.
THE MINISTER OF HOME AFFAIRS (SHRI P. CHIDAMBARAM): Madam Speaker, Government has noticed that a newspaper has carried a news story today relating to the report of the Liberhan Commission. The Liberhan Commission submitted its report on June 30, 2009. Government is required to lay the report on the Table of both Houses of Parliament together with an Action Taken Report within six months from that date. Government has already announced its intention to lay the report together with an ATR before Parliament in the Winter Session. Given the Government’s intention to lay the report within the stipulated time, it is unfortunate that a newspaper has published what purports to be the contents of the report. For reasons that are obvious, I refrain from commenting on the correctness or otherwise of the contents of the news story. I can assure the House, Madam, that there is only one copy of the Liberhan Report with the Ministry of Home Affairs and it is in safe custody, and no one from the Ministry of Home Affairs has spoken to any journalist about the report. I reiterate Government’s intention to lay the report before Parliament along with an ATR in the current Session.
श्रीमती सुषमा स्वराज : मैडम, सरकार का जवाब सही नहीं है। हमारा यह आरोप है कि यह रिपोर्ट सरकार की ओर से लीक कराई गयी है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए। कृपया प्रश्नकाल चलने दीजिए।
…( व्यवधान)
श्री दारा सिंह चौहान : महोदया, इस रिपोर्ट को पहले सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए था। यह सदन के विशेषाधिकार का सवाल है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप लोग बैठ जाइए। कृपया प्रश्नकाल चलने दीजिए।
…( व्यवधान)
11.04 hrs
At this stage, Dr. Sushant Rajan and some other hon. Members came
and stood on the floor near the Table.