Title: Need to ensure comprehensive study of B.T. cotton seeds before it is used in farming.
(फिरोजाबाद):सभापति महोदय, बी.टी. कॉटन की उपज में उत्पादन बढ़ने और लागत कम होने की बात बीज उत्पादक निजी क्षेत्र की कम्पनियों द्वारा कही जा रही है। परन्तु इसका देश में परीक्षण अधिकारिक रूप से सरकारी क्षेत्र में हुआ नहीं दिख रहा। विश्व के अमेरिका, आस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका, अर्जेन्टाइना, मैक्सिको, इण्डोनेशिया जैसे कपास उत्पादक देशों में भी बी.टी. कॉटन उत्पादन की खुली छूट नहीं है, वहां एक सरकारी विभाग है उससे अनुमति लेनी पड़ती है और दिशा निर्देशों के अनुसार उसकी निगरानी में इसकी खेती की मंजूरी मिलती है। देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बी.टी.कॉटन के कुप्रभाव की जानकारी सरकार के पास बी.टी. कॉटन उत्पादक संस्थान की रिपोर्ट ही है। इस उपज का देश के उत्तरी भाग में इस कम्पनी द्वारा भी परीक्षण नहीं किया गया है। परन्तु उत्तरी भारत- पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जो कपास उत्पादक राज्य हैं, मैं बी.टी. कॉटन का बीज किसानों को बेचा जा रहा है। बिना परीक्षण, बिना जांच और उपज के कारण पैदा होने वाले कुप्रभावों की रोकथाम के उपायों के बिना इस उपज की खुली छूट राष्ट्र हित में नहीं ।
अत: सरकार इस मामले पर अलग-अलग तीन चार सरकारी व निजी वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा जांच पड़ताल कराये और जांच की रिपोर्ट पर अध्ययन कर बाद में आगे की कार्यवाही करे।