Title: Need to take action against the guilty police officers who opened fire on a gethering of unarmed local peole in Muzaffarnagar, Uttar Pradesh leaving four persons dead and several injured.
(मुजफ्फ़रनगर): अध्यक्ष जी, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया। देश और हमारे उत्तर प्रदेश की स्थिति बहुत चिंताजनक बनी हुई है। मुजफ्फरनगर में सात तारीख को एक अपरहण हुआ। वहां की जनता ने इस पर अपना रोष प्रकट करके अपनी तकलीफ जाहिर की और उसको बरामद करने की मांग की। जब ये लोग एक जगह इकट्ठे होकर अपनी चिंता जाहिर कर रहे थे तो वहां की पुलिस ने बिना आंसू गैस छोड़े, बिना वार्निंग के ही फायरिंग शुरू कर दी। इसके परिणामस्वरूप चार व्यक्ति मारे गए और ४०-५० लोग गोलियां लगने से घायल हो गए। ये सब बेगुनाह और निहत्थे थे। घायल लोगों का अभी तक कोई उपचार नहीं हो रहा है और न ही कसूरवार पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज की गई है। वहा की सरकार का और पुलिस का रवैया पक्षपातपूर्ण है। वहां के एस. एस.पी. को, जो चार्ज दे चुके थे. सस्पेंड करदिया गया है। लेकिन जिन पुलिसकर्मियों ने फायरिंग की और निहत्थे लोगों की जान ली, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उक्त एस. एस.पी. उस जमाने में सहारनपुर में तैनात थे , बसपा का दफ्तर खाली कराया था इसलिए द्वेषपूर्ण भावना के तहत उसे सस्पेंड कर दिया गया, जबकि एस. एस.पी. उस वक्त चार्ज छोड चुके थे। अभी तक मारे गए लोगों के परिवारजनों को कोई मुआवजा भी नहीं मिला है। मैं सरकार से अपेक्षा करता हूं कि वह इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और मृतकों के परिवारजनों को दस-दस लाख रुपए मुआवजे के तौर पर दे। जिन पुलिसकर्मियों ने फायरिंग की, उनके खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज करके कार्रवाई की जाए। गृह मंत्री जी तत्काल इसमें हस्तक्षेप करें ताकि वहां के लोगों को न्याय मिल सके।
प्रो. एस.पी.सिंह बघेल : अध्यक्ष महोदय, मैं अपने को और अपने दल को इससे सम्बद्ध करता हूं। मैं भी वहां गया था। माननीय सदस्य ने जो कहा है, वह सही है। पुलिस फायरिंग में एक १२ साल का बच्चा, जो सात बहनों का एक भाई था, भी मारा गया है। १२ साल का बच्चा गुनहगार नहीं हो सकता।