Title: Regarding problems being faced by farmers due to laxity in procurement of foodgrains by FCI in Bihar.
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह :अध्यक्ष महोदय, देश भर के किसान तबाह हैं, लेकिन बिहार के किसानों की तबाही सबसे अधिक है और वह इसलिए कि प्राकृतिक आपदा की मार तो उनके ऊपर है ही, लेकिन उसके साथ-साथ केन्द्र सरकार की मार भी उनके ऊपर पड़ रही है। केन्द्र सरकार ने कहा था कि एफ.सी.आई. की तरफ से १०० क्रय केन्द्र बिहार में धान एवं चावल की खरीद हेतु खोले जाएंगे, लेकिन अभी तक कुछ हजार टन का ही प्रक्योरमेंट हुआ है जब कि बिहार में १ करोड़ २३ लाख टन धान की पैदावार हुई है। इसके कारण बिहार में अनाज सरप्लस है, लेकिन प्रक्योरमेंट में बहुत कोताही हो रही है। एफ.सी.आई. की तरफ से कभी गोदाम भर गए हैं, कभी बैंक का खाता नहीं खुला है और कभी तराजू उपलब्ध नहीं है, इस प्रकार बहुत कोताही बरती जा रही है। इसके कारण किसान मंडियों से लौट रहे हैं।
अध्यक्ष महोदय, बिहार के किसानों ने कमर-तोड़ मेहनत कर धान एवं अन्य अनाजों का उत्पादन किया, लेकिन एफ.सी.आई. उनकी धान की खरीद नहीं कर रहा है जिसके कारण किसानों को अपनी धान औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है। इसलिए मैं मांग करता हूं कि भारत सरकार सदन को बताए कि बिहार में किस-किस क्रय केन्द्र में कितना-कितना अनाज खरीदा गया और जहां कम खरीदा गया वहां ज्यादा खरीदने की व्यवस्था करे ताकि किसानों को सपोर्ट प्राइस मिल सके।
अध्यक्ष महोदय, सेनगुप्ता कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि अनाज की खरीद में कुछ राज्यों की उपेक्षा होती है। अत: मैं भारत सरकार से इस बारे में सदन में एक वक्तव्य दिए जाने की मांग करता हूं जिससे किसी राज्य की उपेक्षा न हो और सभी किसानों का अनाज खरीदा जाए जिससे उन्हें सहूलियत मिल सके और उन्हें अपने धान एवं चावल की सही कीमत मिल सके और सेनगुप्ता कमेटी की सिफारिशों को तत्काल लागू किया जाए।