श्री आर.के.िंसह पटेल (बांदा): सभापति महोदया, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा देश भर में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत माध्यमिक शिक्षा हेतु हाई स्कूल स्तर तक के विद्यालय खोले जाने हेतु नियमावली बनाई गई है जिस नियमावली को उ.प्र. में लागू नहीं किया जा रहा है। प्रदेश में हाई स्कूल स्तर के लगभग 20 हजार माध्यमिक विद्यालय हैं जिनमें कुल 4 हजार विद्यालय वित्त पोषित हैं तथा एक हजार विद्यालय माध्यमिक, राजकीय अथवा आश्रम पद्धति के हैं। शेष 15 हजार के लगभग माध्यमिक विद्यालय प्रदेश सरकार द्वारा उ.प्र. से मान्यता प्राप्त वित्त विहीन संचालित हैं। इन 15 हजार माध्यमिक विद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा मिशन योजना में शामिल करके वित्त पोषित करने के लिए प्रदेश सरकार को दिशा निर्देश जारी करने के साथ गाइड लाइन में शामिल कर लिया जाए तो समग्र शिक्षा के विकास के लिए एक अच्छा कदम होगा।
यदि भारत सरकार सही मायने में माध्यमिक स्तर के छात्रों को निशुल्क शिक्षा देना चाहती है तो उ.प्र. के 15 हजार वित्त विहीन विद्यालयों को इस योजना में शामिल कर लें तो एक अच्छा कदम होगा। माध्यमिक शिक्षा के नाम पर परिषदीय विद्यालयों को उच्चीकृत करके योजना में शामिल किया जा रहा है जबकि वित्त विहीन मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को इस योजना में नहीं लिया जा रहा है।
अत: मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित कराना चाहता हूं।