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Alleged Violation Of Forest Rights Act In Niyamgiri Hills In … on 13 August, 2010

Lok Sabha Debates
Alleged Violation Of Forest Rights Act In Niyamgiri Hills In … on 13 August, 2010

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Title: Alleged violation of Forest Rights Act in Niyamgiri Hills in Lanjigarh Block of Kalahandi district in Orissa.

श्री भक्त चरण दास (कालाहांडी):  अध्यक्ष महोदया, आपने मुझे एक गंभीर मामले पर प्रीमिटिव आदिवासिसों के अधिकार के बारे में बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। हमारे कालाहांडी के नियमगिरी जंगल में आठ हजार प्रीमिटिव ट्राइबल्स रहते हैं। भारत सरकार के 2006, एफआर एक्ट के तहत उन्हें कम्युनिटी राइट जंगल की सम्पदा के ऊपर मिलना चाहिए। लास्ट जनवरी में दस गांव के लोगों ने नियमगिरी का जो माइनिंग एरिया है, उसमें अपने हक के लिए एफआरसी के जरिए एसडीएलसी में एप्लाई किया, लेकिन अभी तक उन्हें रिकोग्नाइज़ नहीं किया गया। मैंने खुद उनकी दरख्वास्त को एसडीएलसी में पिछले महीने की 12 तारीख को सबमिट किया, लेकिन उसके बावजूद भी नहीं किया गया।

          अध्यक्ष महोदया, मैं आपके माध्यम से सदन में कहना चाहता हूं कि दूसरी तरफ से वे लोग एफआरसी के अंडर कम्युनिटी राइट नहीं मांगे, उन आदिवासियों के ऊपर किस तरह से वेदान्त कम्पनी ने पुलिस को यूटिलाइज़ करके टार्चर किया है, यह बात मैं आपके सामने बहुत दुख के साथ रखना चाहता हूं। कल 12 तारीख को बंद्रा शिवाजी में एक सम्मेलन का आयोजन किया था, जिसमें फोरेस्ट राइट एक्ट के ऊपर चर्चा होने वाली थी और उसमें ये लोग भागीदारी लेने वाले थे। जब दस तारीख को वे लोग जंगल से निकले तो किस तरह से 15 स्टेनगनधारी पुलिस वाले सीधे सिविल ड्रेस में, जैसे डकैत लोगों को उठा कर जंगल में ले जाते हैं, उसी तरह से लोगोशिकाका और उसके साथी को उठा कर ले गए। वह भी कालाहांडी की पुलिस नहीं थी, रायगढ़ की पुलिस को बुला कर किस तरह से सत्ता और पुलिस का दुरुपयोग करके उन्हें यहां आने से रोका। इस बात को मैं सदन में बहुत दुख के साथ रखना चाहता हूं। …( व्यवधान) ये वेदान्त कम्पनी का मामला है। राज्य सरकार किस तरह से पुलिस का दुरुपयोग…( व्यवधान) किस तरह से राज्य सरकार वहां के आदिवासियों को हक दिलाने की बजाए पुलिस को किस तरह से गलत व्यवहार करके एक कम्पनी का फेवर करने के लिए आदिवासियों के हक को कुचलने के लिए प्रयास एवं कोशिश कर रही है। 

          अध्यक्ष महोदया, मैं आपके माध्यम से सदन से दरख्वास्त कर रहा हूं, भारत सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि फोरेस्ट राइट एक्ट के तहत उन्हें उनका अधिकार मिलना अनिवार्य है। आदिवासी वर्षों से सबसे अधिक शोषित हुआ है। आज कल नक्सलाइट भी उनका शोषण कर रहे हैं, उनका जंगलों में अड्डा बना हुआ है। सरकार और अधिकारी वर्ग की और से तथा तमाम अधिकार सम्पन्न लोगों की और से आदिवासी शोषित हुआ है। आदिवासियों को उनका हक मिलना चाहिए, नहीं तो एफआर एक्ट को एबोलिश कर देना चाहिए, उस कानून की कोई जरूरत नहीं है।  मैं इस सदन के सभी सदस्यों से दरख्वासत करता हूं कि नियमगिरी प्रीमीटिव ट्राइब्स है, लोधा मांझी एक गरीब आदमी है, उसने कोई गुनाह नहीं किया, उसे बिना कारण गिरफ्तार करके ले गए और दूसरे दिन मेरे द्वारा हस्तक्षेप करने से उसे छोड़ दिया गया। आदिवासी कम्युनिटी राइट माइनिंग एरिया में नहीं मांगे, इसलिए यह साजिश की गई है। यह बहुत संवेदनशील विषय है।

          अध्यक्ष महोदया, मैं तमाम उन मासूम लोगों की तरफ से आपसे दरख्वास्त कर रहा हूं कि उन्हें न्याय मिलना अनिवार्य है। आप उन्हें भारत सरकार की ओर से न्याय दिलाने का प्रयास करेंगी। धन्यवाद।

DR. TARUN MONDAL (JOYNAGAR): Madam, I want to associate with him.

SHRI RAJAIAH SIRICILLA (WARANGAL): Madam, I also want to associate with him.

SHRI BADRUDDIN AJMAL (DHUBRI): Madam, I want to associate with him.

MADAM SPEAKER: Dr. Tarun Mondal,

Shri Rajaiah Siricilla and

Shri Badruddin Ajmal,

Shrimati Jayaprada are allowed to associate with him.