Judgements

Regarding Atrocities On The Scheduled Castes And Scheduled Tribes … on 29 November, 2001

Lok Sabha Debates
Regarding Atrocities On The Scheduled Castes And Scheduled Tribes … on 29 November, 2001

Title: Regarding atrocities on the Scheduled Castes and Scheduled Tribes community, particularly in Uttar Pradesh.

श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद):अध्यक्ष महोदय, अभी अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग की जो छठवीं रिपोर्ट आयोग के अध्यक्ष ने राष्ट्रपति को प्रस्तुत की है, उसमें वर्ष २००० में अनुसूचित जाति पर होने वाले अत्याचारों की संख्या २३,७४२ है। उत्तर प्रदेश में दलितों पर पिछले वर्ष सबसे ज्यादा अत्याचार हुए हैं। यह संख्या ६५९९ है। आप जानते हैं कि अपराधों को कम करके लिखा जाता है। अनुसूचित जाति, जनजाति के लोग जब रिपोर्ट लिखाने जाते हैं तो उनकी रिपोर्ट नहीं लिखी जाती। यह बहुत गम्भीर मामला है।

एक सम्पूर्ण ग्राम विकास केन्द्र के नाम से एन.जी.ओ. है, उस एन.जी.ओ. ने २०२० दलित परिवारों से बात की, ११,६५८ लोगों से मुलाकात की, अनुसूचित जाति की ३१ उपजातियों और १२ जिलों में सम्पर्क करने के बाद जो निष्कर्ष निकाला है, वह यह है कि अनुसूचित जाति से सम्बन्धित ९६ प्रतिशत शिकायतें तो लिखी ही नहीं जातीं। उत्तर प्रदेश में अत्याचार इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि सरकार ही वहां तो अपराधियों से मिलकर बनी है। मैं समझता हूं कि अपराधियों के लिए जितना अच्छा वातावरण उत्तर प्रदेश में है, जितना अनुकूल माहौल उत्तर प्रदेश में है, उतना कभी नही रहा वह इसलिए है, क्योंकि ये उनके साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं। सरकार की जो मनोवृत्ति होती है, सरकार का जो आचरण होता है, सरकार की जो शक्ल होती है, उससे समाज में गतवधियां प्रभावित होती हैं। मेरा आरोप है कि उत्तर प्रदेश में अत्याचार इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि वहां जो लोग सरकार में बैठे हैं, उनका आचरण स्वयं संदिग्ध है।

अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से निवेदन करना चाहूंगा कि अभी फिलहाल जो घटनाएं घटी हैं, उनमें २४ अगस्त को नवाबगंज पुलिस ने माया गौतम नाम की एक दलित महिला की थाने में पिटाई की, वह महिला कल्याणपुर गांव की रहने वाली है, उसको थाने में पीटकर बन्द कर दिया गया। अभी कल-परसों मेरठ जिले के थाना दौराला के अन्दर मटोर गांव में रहने वाला प्रभुदयाल, अनुसूचित जाति का उप-प्रधान था, उसकी हत्या कर दी और भूसे में रखकर उसको आग लगा दी। शाहजहांपुर जिले के कांट थाने के पिपरौला गांव में ३५ वर्षीय दलित महिला के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ और मेरे बगल से लगा हुआ क्षेत्र है, प्रोफेसर एस.पी. सिंह बघेल ये वहां के सांसद हैं, वहां फिरोजाबाद जिले के नारकी थाने के अन्तर्गत रतौली गांव है, वहां १४ अक्टूबर की रात को एक दलित बीरपाल को पुलिस लाई, उसको चार हजार रुपये में छोड़ने की बात हुई। बाद में थानाध्यक्ष पहंचे, उसकी विधवा मां, उसकी पत्नी शीला और तीन अन्य लोगों को बेवजह संगीन धाराओं में जेल भेज दिया। यह बहुत गम्भीर मामला है।

उत्तर प्रदेश की सरकार दलित विरोधी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति आयोग की रिपोर्ट सदन में कभी डिसकस नहीं हुई। उत्तर प्रदेश का मामला बहुत गम्भीर है। उत्तर प्रदेश में अपराध इसलिए बढ़ रहे हैं, क्योंकि वहां जो सरकार बनी है, वह अपराधियों से सांठ-गांठ करके बनी है।

१२ १९ hrs .(Shri Devendra Prasad Yadav in the Chair).

उत्तर प्रदेश की सरकार ईमानदारी से काम नहीं कर रही है। जिस तरह से वहां की सरकार चल रही है, उसमें न तो अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं और न ही पिछड़े वर्ग के लोग सुरक्षित हैं। ऐसी सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। इस सरकार को बर्खास्त किया जाना चाहिए और अनुसूचित जाति एवम् जनजाति आयोग की रिपोर्ट पर बहस होनी चाहिए।

श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल):सभापति महोदय, यह कोई समाजवादी पार्टी या रामजी लाल सुमन की रिपोर्ट नहीं है। यह अनुसूचित जाति से सम्बन्धित मामला है और अनुसूचित जाति एवम् जनजाति आयोग की रिपोर्ट में लिखा गया है। उसमें बाकायदा प्रमाण सहित बताया गया है। आयोग में इस बात को स्वीकार किया गया है कि वहां अपराध के मामले दर्ज नहीं होते, बावजूद इसके लगभग २५,००० केस ऐसे हैं, जिनमें अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार हुए हैं। इसका कारण यह है कि कोई भी मुख्य मंत्री या प्रधान मंत्री इकबाल से सरकार चलाते हैं, लेकिन वहां ऐसा नहीं हो रहा है। वहां सरकार की मानसकिता आपराधिक तत्वों को शह देने की है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि वहां की सरकार में एक दर्जन मंत्री अपराधी हैं। अनुसूचित जाति के लोगों की उनके सामने हिम्मत नहीं है कि कुछ कह सकें। पूरे प्रदेश में अराजकता है। आज लखनऊ अपराधियों का सबसे बड़ा गढ़ बन गया है। वहां सत्ता की शह इन लोगों को है इसलिए अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार हो रहे हैं।

सभापति जी, दिक्कत यह पैदा हो गई है कि अधिकारी भी मंत्रियों को खुश करने में लगे हुए हैं। सरकार का इतना आतंक हो गया है कि वह बाकायदा इस वर्ग की सुरक्षा नहीं कर पा रही है। हमारी आपसे अपील है कि यहां से एक सर्वदलीय कमेटी बनाकर वहां भेजी जाए। उसको हम कम से कम आठ-दस प्रमाण ऐसे देंगे, जिससे पता चलेगा कि कैसे वहां की सरकार अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार, बलात्कार, जबर्दस्ती, हत्या और आगजनी कर रही है। जब से वहां की सरकार सत्ता में आई है, तब से पूरा अनुसूचित जाति वर्ग आतंकित हो गया है।

सभापति महोदय : मुलायम जी, आपको पता है कि यह शून्य काल है।

श्री मुलायम सिंह यादव : हम चाहते हैं कि वहां पर एक सर्वदलीय कमेटी बनाकर भेजी जाए, जो देखे कि इस वर्ग के लोगों पर क्या-क्या अत्याचार हो रहे हैं।

सभापति महोदय : अब आप अपना स्थान ग्रहण करें। मैं श्री वी.एस. शिव कुमार को बुला रहा हूं।…( व्यवधान)

सभापति महोदय : श्री वी.एस. शिव कुमार के अलावा और कोई बात रिकार्ड में नहीं जाएगी।…( व्यवधान)*

सभापति महोदय : रामजी लाल सुमन जी आपने अपनी बात कह दी है। वह रिकार्ड में आ गई है, फिर क्यों आप बोल रहे हैं। कृपया अपना स्थान ग्रहण करें।…( व्यवधान)

सभापति महोदय : आपको अपनी बात कहने के लिए काफी समय दिया गया है। अब आप स्थान ग्रहण करें।…( व्यवधान)

* Not Recorded

सभापति महोदय : आठवले जी आप भी बैठ जाएं। संसदीय कार्य राज्य मंत्री जी कुछ कहना चाहते हैं।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री संतोष कुमार गंगवार):सभापति जी, संसद में जो भी विषय उठाये जाते हैं, सरकार उसकी गंभीरता से कॉगनीजेंस लेती है और उस पर कार्रवाई करने की बात भी करती है लेकिन मेरा निवेदन इतना है कि कल यहां एक बहुत महत्वपूर्ण विषय उठाया गया था लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि उस विषय को फिर सुना नहीं गया। मेरा निवेदन इतना है कि कम से कम विपक्ष हमारे पक्ष को भी तो सुनने का काम करे। जो भी विषय उठाये जाते हैं,…( व्यवधान)वैसे तो यह विषय राज्य का विषय है।…( व्यवधान)मेरा निवेदन है कि यह राज्य का विषय है लेकिन अनुसूचित जाति, जनजाति के ऊपर अत्याचार देश के किसी भी हिस्से में अगर किये जाते हैं तो उस पर सरकार पूरा ध्यान देगी और उस पर कार्रवाई करेगी।…( व्यवधान)

सभापति महोदय : माननीय मंत्री जी ने कहा है और उन्होंने सूचना ग्रहण कर ली है।…( व्यवधान)

SHRI V.S. SIVAKUMAR (THIRUVANANTHAPURAM): Sir, I would like to raise an important matter… (Interruptions)

श्री मुलायम सिंह यादव :सभापति जी, नियमावली के अनुसार…( व्यवधान) ऐसे मामले में इस सदन में बहस होती है। यह व्यवस्था का सवाल है।…( व्यवधान)

SHRI V.S. SIVAKUMAR : Sir, I would like to raise an important matter regarding landslides on 9th of this Month… (Interruptions)

सभापति महोदय : चेयर सरकार को कम्पैल नहीं कर सकती। मुलायम सिंह जी, आप तो पुराने नेता हैं। सरकार ने सूचना ग्रहण कर ली है।…( व्यवधान)

श्री रामजीलाल सुमन : सभापति महोदय, यह दलितों के हितों के संरक्षण का मामला है।…( व्यवधान)शून्यकाल में जो मामले उठाये जाते हैं,…( व्यवधान)कल यह मामला राज्य सभा में उठा था।…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव :यह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति का मामला है। यह राज्य का मामला है, सरकार यह नहीं कह सकती, यह गलत है।…( व्यवधान)दलितों के हितों की रक्षा करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।…( व्यवधान)

सभापति महोदय : रामजीलाल सुमन जी, आप काफी देर से बोल चुके हैं।…( व्यवधान)

सभापति महोदय : आप आसन से कोई बात तो सुनिए। माननीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री जी ने साफ-साफ कहा कि उन्होंने इस संदर्भ में नोट कर लिया है और आपके विषय की सूचना ग्रहण कर ली है। शून्यकाल में इससे ज्यादा आप और क्या एक्सपैक्ट कर सकते हैं? शून्यकाल में सरकार के सामने शुरू से विषय नहीं रहते हैं।…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव : यह राज्य का मामला है, ऐसा वह कैसे कह सकते हैं? …( व्यवधान)

ऐसा नहीं कह सकते। आप इस पर व्यवस्था दीजिए।…( )

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