Title: Further discussion on the Airports Authority of India (Amendment) Bill, 2003 moved by Shri Syed Shahnawaz Hussain on 8 May, 2003. (Bill passed)
श्री विलास मुत्तेमवार (नागपुर) : माननीय सभापति जी, मैं आपका और हमारी नेता तथा विपक्ष की नेता श्रीमती सोनिया गांधी जी का आभारी हूँ कि जिन्होंने मुझे इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा आरंभ करने का अवसर प्रदान किया। विमानन क्षेत्र के लिए इस प्रकार के विधेयक की अत्यंत आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी और यह प्रसन्नता का विषय है कि अब सरकार ने इस बात को महसूस किया है कि देश के वर्तमान हवाई अड्डों का दर्जा बढ़ा दिया जाए और नए अंतर्राष्ट्रीय विमानपत्तन भी विकसित किये जाएं ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध की जाएं। अच्छा हुआ, देर आयद दुरुस्त आयद। मैं अपने नौजवान नागरिक उड्डयन मंत्री श्री शाहनवाज़ हुसैन जी को भी बधाई दूंगा कि जिनकी कमान में मंत्रालय ने बहुत प्रगति की है। नए-नए आयाम ढूंढ़े गए हैं और भविष्य में भी इस नौजवान मंत्री से हमें बहुत उम्मीदें हैं। मुझे आशा है कि मंत्री जी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण संशोधन विधेयक २००३ को गंभीरता से लेंगे और चर्चा में जो भी मुद्दे उठाए जाएंगे, उन पर विचार करेंगे और आवश्यक कार्रवाई भी करेंगे।
आज सत्र के अंतिम दिन इस महत्वपूर्ण विधेयक पर जल्दबाज़ी में चर्चा करने पर भी हमें ध्यान देना होगा क्योंकि यह अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
महोदय, इस महत्वपूर्ण विषय पर हो रही इस चर्चा में सभी पक्षों के कई सांसद भाग लेना चाहते थे, लेकिन समय का अभाव है और बिल को पारित करना भी आवश्यक है। इसलिए आज इसे हम इस सभागृह में पास करना चाहते हैं। संशोधन विधेयक २००० जो वापस लिया गया उसका सम्बन्ध केवल एयरपोर्ट की लीजींग से था और जो नया विधेयक प्रस्तुत किया गया है, वह व्यापक स्वरूप का है और इसमें अन्य प्रावधान भी समाविष्ट किए गए हैं।
महोदय, इस विधेयक द्वारा भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण के अधीन विमान पत्तनों में अन्य संरचनात्मक काम, जिसे अपग्रेडेशन कहते हैं और जिसे ग्रीन फील्ड कहते हैं, यानी नए विमान पत्तनों में प्राइवेट भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि नवीनतम तकनीक का पूरा उपयोग इन विमानपत्तनों पर हो।
महोदय, सेवा और सुविधाओं को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप बनाने के लिए उनमें सुधार की आवश्यकता है और ऐसे सुधार को सुकर और सरल बनाने के लिए यह विधेयक लाया जा रहा है। इसके
* The Bill moved by Shri Syed Shalinawaz Hussain on 8th May, 2003
परिणामस्वरूप पर्यटन और व्यापार में वृद्धि होगी और आमतौर पर देश की अर्थव्यवस्था प्रोत्साहित होगी। इसके लिए भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि अन्य क्षेत्रों के साथ अन्याय न हो।
महोदय, कोई भी विधेयक या नियम बनाते समय हम तीन मुद्दों पर ध्यान देते हैं- सोश्यल जस्टिस, रीजनल बैंलेंस और नैशनल सिक्योरिटी। जब इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा हो रही है, तो मंत्री महोदय को देखना होगा कि सोश्यल जस्टिस का कहां तक ध्यान रखा गया है, रीजनल बैलेंस और नैशनल सिक्योरिटी का कहां तक ध्यान रखा गया है।
महोदय, सोश्यल सिक्योरिटी के बारे में मैं कहना चाहता हूं कि माननीय प्रधान मंत्री जी ने मुम्बई और दिल्ली, दो हवाई अड्डों के विकास के लिए अभी हाल ही में पारित बजट में जो प्रावधान किए हैं
तीन हजार करोड़ रुपए का प्रावधान इन हवाई अड्डों को आधुनिकीकरण करने के लिए किया गया है और केवल दो शहरों पर ध्यान दिया गया है। तीन हजार करोड़ रुपए की रकम बहुत बड़ी होती है। मैं इस संबंध में कहना चाहता हूं कि जहां सोश्यल जस्टिस की हम बात करते हैं तो मुम्बई हमारी कमर्शियल कैपीटल है और दिल्ली हमारी पॉलीटिकल कैपीटल है। दोनों बड़े शहर हैं। इस विधेयक के द्वारा दोनों एयरपोर्ट में हम जितने पूंजी निवेश की अपेक्षा कर रहे हैं, उतना निवेश हमें आशा है कि सरलता से हो जाएगा। प्राइवेट पार्टी निवेश कर देंगी।
महोदय, इसके मद्देनजर मैं कहना चाहता हूं कि सोश्यल जस्टिस में कई कमिटमेंट हमारे सामने हैं। जैसे सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने का सवाल है, डिं्रकिंग वाटर उपलब्ध कराने का सवाल है, रास्ते बनाने का सवाल है, स्वास्थ्य का सवाल है, एजूकेशन का सवाल है, इस प्रकार से सरकार
को इनकी ओर भी देखना पड़ेगा कि कहीं हम इन महत्वपूर्ण कार्यों की उपेक्षा न कर दें।
महोदय, मुझे मालूम है कि हम एयरपोट्र्स को इंटरनैशनल स्टेंडर्ड का बनाने के लिए क्यों प्रयास किये जा रहे हैं, उसमें कितना और किस प्रकार का पोटेंश्यल है। यह बात सही है कि आज विश्वभर में कई देश हैं जिनमें फ्रांस, जर्मनी, यू.एस.ए., चीन, हांगकांग और आस्ट्रेलिया आदि हैं जो अपने यहां बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए हवाई अड्डों के नवीनीकरण और विस्तार पर करोड़ो रुपए खर्च कर रहे हैं।
पर्यटन विदेशी मुद्रा का भी अर्जन करता है, लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि भारत पर्यटन का प्रमुख केन्द्र है फिर भी सरकार इस तरफ ध्यान नहीं दे रही है। देश के कई हवाई अड्डे उपेक्षित पड़े हुए हैं। हम विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में असफल रहे, क्योंकि हम हर जगह अंतर्राष्ट्रीयस्तर की सुविधाएं देने में असफल रहे, हम कहीं भी ऐसी सुविधाएं नहीं दे सके। हमारे देश में ऐसे अनेक शहर और स्थल हैं, जो पर्यटन केन्द्रों के निकट हैं। मेरा सुझाव है कि विकसित देशों में भारत की गणना हो, इसके लिए हमें हवाई अड्डों को अंतर्राष्ट्रीय सुविधाओं से परिपूर्ण बनाना चाहिए और ऐसी बड़ी-बड़ी परियोजनाओं को गंभीरता से क्रियान्वित करना चाहिए।
सभापति महोदय, बार-बार पूंजी निवेश व्हायबिलीटी की बात होती है। जहां तक ऐसे विमानपत्तनों की वायबिल्टी का सवाल है, दुनिया में ऐसी कई जगह हैं जहां नये एयरपोर्ट बनाए गए और उन पर करोड़ों रुपए का खर्चा किया गया। ये जब शुरू हुए थे तो लगता था कि ये वायबल नहीं हैं, लेकिन बाद में ऐसे एयरपोर्ट वायबल हुए। मैं म्यूनिख एयरपोर्ट का उदाहरण देना चाहूंगा। १९९२ में जब यह एयरपोर्ट यात्रियों के लिए खुला तो इसका विश्व में ५१वां स्थान था, १९९९ में ४४ हो गया और वर्ष २००० में ३७वें स्थान पर आ गया और आज यह फ्रैंकफर्ट के बराबर महत्वपूर्ण है तथा इस क्षेत्र के अग्रणी हबों में इसकी गिनती हो रही है।
सभापति महोदय, हम जो चर्चा करते हैं कि हमारे देश में ऐसे एयरपोर्ट बनाने के बाद वे सारे एयरपोर्ट कैसे वायबल हो जायेंगे, मैं बताना चाहता हूं कि विश्व भर में यात्रियों का यही प्रयास रहता है कि किसी भी स्थान पर पहुंचने के लिए छोटे से छोटे मार्ग से पहुंचा जाए। अगर किसी को दिल्ली से न्यूयार्क जाना है तो वह डायरेक्ट फ्लाइट में नहीं जाना चाहता, वह लंदन या पेरिस या फ्रैंकफट या एम्सटर्डम के हवाई अड्डे होते हुए, उड़ान बदलते हुए पहुंचना चाहता है। इन हवाई अड्डों पर एक आकर्षण होता है, इन हवाई अड्डों पर बहुत सी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अतिआधुनिक शोपिंग सेंटर्स उपलब्ध होते हैं, जहां यात्री अगली उड़ान पकड़ने से पहले चार-पांच घंटे का समय व्यतीत कर सकते हैं। ऐसी ही सुविधाएं भारतीय हवाई अड्डों पर उपलब्ध होनी चाहिए ताकि यात्रियों को अगली उड़ान पकड़ने से पहले ट्रांज़िट सुविधाओं और डयूटी फ्री शॉप्स का लाभ मिल सके। भारत में भी अधिक से अधिक विश्वस्तर की ट्रांज़िट सुविधाओं से परिपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय यात्री ट्रैफिक यूरोप के चार हवाई अड्डों में सबसे अधिक है। लंदन में हिथ्रो एयरपोर्ट में प्रतिवर्ष करीब साढ़े पांच करोड़ यात्री, पेरिस में साढ़े चार करोड़, फ्रैंकफर्ट में करीब चार करोड़, एमस्टर्डम में करीब चार करोड़, साऊथ-कोरिया में करीब साढ़े चार करोड़ यात्री और हांग-कांग में करीब साढ़े तीन करोड़ यात्री सुविधाओं का लाभ उठाते हैं। जहां तक भारत का सवाल है तो यहां भी इस तरह का प्रोजेक्शन हुआ है और तभी मैं समझता हूं कि मंत्रालय ने इस बारे मेंयात्रियों की सुविधा के लिए हवाई अड्डों के नवीनीकरण के लिए सोचा है। इस संबंध में बोईंग विमान कम्पनी के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट डा. दिनेश केसकर हाल ही में भारत की यात्रा पर आए थे।
“A country’s or a region’s GDP growth is a good measure of its air traffic potential. South West Asia, where India is the dominant country, is expected to average the second highest growth rate in the world, of 4.9 per cent, during 2002 to 2021. It will be second only to China’s anticipated 5.9 per cent. By contrast, the global average is expected to be only 2.9 per cent….. China leads the world with an amazing 7.8 per cent followed by India with 4.8 per cent. Incidentally, a recent World Bank projection expects India to be the fourth largest economy by 2020. In terms of traffic increase, South West Asia is expected to achieve an average annual growth of 6.7 per cent over the next 20 years.
Commenting on global commercial aircraft requirement during 2002-2021, a total of 23,929 new aircraft would be required, worth a total of 1.79 trillion dollars …. India’s overall requirement during that period is projected at 290 new jet aircraft worth a total of 22 billion dollars.”
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यह आवश्यक है कि हम देश में विश्व स्तर के हवाई अड्डों के निर्माण को प्राथमिकता दें और इस सम्बन्ध में कम से कम अगले २० वर्षों की योजना तैयार करें। इसके लिए बजटीय आबंटन और अन्य सभी संसाधनों को जुटाने के अथक प्रयत्न किये जाने चाहिए।…( व्यवधान) अभी तो मैंने शुरूआत की है।
सभापति जी, जैसा मैंने कहा कि आने वाले दिनों में इस देश में एविएशन इंडस्ट्री का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन उसके लिए हमें खबरदारी लेने की जरूरत है।
जहां तक नये विमानपत्तनों के विकास का सवाल है, इस एमेंडमेंट में जहां एनक्रोचमेंट हटाने के लिए कुछ प्रावधान किये गये हैं, कुछ अधिकार इस विधेयक के माध्यम से एयरपोर्ट एथारिटी ऑफ इंडिया को मिलने वाले हैं,और मंत्रालय को मिलने वाले हैं, लेकिन इस संदर्भ में मैं आपके माध्यम से मंत्री महोदय को बताना चाहूंगा कि जो नये एयरपोर्ट बन रहे हैं या बनाना चाहते हैं, उसमें सबसे बड़ा अड़ंगा लैंड एक्वीजीशन का आता है और उसका इस बिल में कहीं उल्लेख नहीं है। बैंगलौर का ही मसाला हमारे सामने है। बैंगलौर में लैंड एक्वीजीशन के लिए करीब ७-८ साल लग गये और इससे भी प्रोजैक्ट डिले हो गया। ऐसी ही समस्या हैदराबाद के एयरपोर्ट में भी आई। आने वाले दिनों में जहां-जहां हम नये एयरपोर्ट बना रहे हैं, वहां लैंड एक्वीजीशन का सवाल आयेगा। मैं मंत्री महोदय से चाहूंगा कि इस सम्बन्ध में भी थोड़ा इनीशिएटिव लेने की जरूरत है कि जहां इस प्रकार की योजना आती है तो लैंड एक्वीजीशन में हम जितनी भी जगह चाहते हैं, वह प्रोजैक्ट के प्रांरभ में ही उस जगह का लैंड एक्वीजीशन हो जाये। लैंड एक्वीजीशन में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिनकी हम जमीन लेते हैं, उन्हें हैंडसम कम्पेंसेशन मिलना चाहिए। हमेशा ऐसा होता है कि इतनी बड़ी योजनाएं होती हैं, करोड़ों रुपये की योजनाएं होती हैं और कम्पेंसेशन का एमाउंट ५-१० करोड़ रुपये में होता है। यह विषय बहुत गंभीर है, क्योंकि जो लोग अपनी जमीन देते हैं, वे हमेशा के लिए अपनी जमीन से बेदखल होते हैं, उनके जीने का सहारा वही होता है, इसलिए इस पर हमें ध्यान देना होगा कि उन्हें मार्केट रेट से कम्पेंसेशन मिले, उनका अच्छा रिहैबलिटेशन हो और अगर उनके घर हटाने पड़तेहैं तो उनका भी अच्छा रिहैबलिटेशन हो।
इस विषय को आप विधेयक में तरजीह दें। इस संबंध में मैं बताना चाहूंगा कि लैंड एक्वीजिशन की जिम्मेदारी हमेशा स्टेट गवर्नमैंट की होती है जबकि स्टेट गवर्नमैंट के अपने साधन लमिटेड होते हैं। मेरी मांग है कि लैंड एक्वीजिशन का पैसा देने के लिए हमारी सविल एवीएशन मनिस्ट्री राज्य सरकारों की मदद करे।
अभी मंत्री महोदय दिल्ली के हवाई अड्डे का विकास कर रहे हैं, मुम्बई के हवाई अड्डे का विकास कर रहे हैं, बंगलौर और हैदराबाद के हवाई अड्डे को भी इस विधेयक के बाद विकास करें, ऐसा हमारा कहना है। जिस तरह कोच्चि में पहला प्राइवेट हवाई अड्डा अस्तित्व में आया है। विदर्भ के लोग नागपुर में भी इंटरनैशनल मल्टी मॉडल पैंसेजर और कार्गो हब बनाने के लिए लगातार मांग कर रहे हैं। इस संबंध में वहां के मुख्यमंत्री आपके मंत्रालय से वार्ता कर रहे हैं। वे मंत्री जी से मिले भी हैं। पहले श्री विलास राव देशमुख और अब श्री सुशील कुमार शिंदे लगातार मंत्री जी से मिल रहे हैं।
मैं उनसे अर्ज करना चाहता हूं कि वे इस एयरपोर्ट को जल्दी मान्यता दें। जहां तक नागपुर का सवाल है, यह बात किसी से छिपी हुई नहीं है कि वह देश के मघ्य में है। एक अच्छे एयरपोर्ट के लिए जो सुविधाएं चाहिएं, वे सारी सुविधाएं वहां पर उपलब्ध हैं। नागपुर का एयरपोर्ट जो एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के तहत आता है, वह आपरेटिव एयरपोर्ट है, जहां बी-७४७टाईप हवाई जहाज उतर सकता है। हैदराबाद में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है जबकि नागपुर में यह सुविधा है। वहां १०,५०० फीट लंबा रनवे है। वहां बिलडिंग एक साथ ७०० पैसेंजर्स को वह हैंडल कर सकता है। ये सब सुविधाएं वहां है। मैं कहना चाहता हूं कि वहां तुरंत इंटरनैशनल एयरपोर्ट कारगो एंड पैसेंजर हब बनाने के लिए परमीशन दी जाये। मैं समझता हूं कि इस विधेयक के माध्यम से हमारी मदद होगी।
जहां तक इक्विटी पार्टनरशिप का सवाल है, उसमें पहले यह अड़चन थी कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया अपनी प्रापर्टी किसी को दे नहीं सकता था लेकिन इस विधेयक के माध्यम से जो प्रस्ताव आया है, वह महाराष्ट्र सरकार की तरफ से आया है। महाराष्ट्र सरकार ने इसके लिए सारी तैयारियां की हुई हैं। ऐसा नहीं है कि हब बनाने के लिए उन्होंने वैसे ही एप्लीकेशन दे दी है। पांच करोड़ रुपये का खर्चा करके लारसन एंड टूबरो रामबोल कंपनी की तरफ से उसकी टेक्नो इकोनॉमी फिजीबलिटी रिपोर्ट तैयार कराई है जो एक साल से आपके पास है। महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमैंट कारपोरेशन का निर्माण उसे अपने हाथ में लेने के लिए किया गया है।
मैं आपके माध्यम से मंत्री महोदय से आग्रह करना चाहूंगा कि आप मुम्बई, दिल्ली, बंगलौर, हैदराबाद के साथ-साथ नागपुर में भी इंटरनैशनल विमानपत्तन का निर्माण करने की घोषणा करें और महाराष्ट्र सरकार को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की जो प्रापर्टी है, वह इक्विटी के तौर पर, उन्हें
महाराष्ट्र करके दें। अगर आप ऐसा करते हैं तो छ: महीने में वहां इंटरनैशनल कारगो का आपरेशन शुरू हो सकता है। इसमें आपको थोड़ा दखल देने की जरूरत है।
मैं एक बात और बोलना चाहता हूं, अगर नहीं बोलूंगा तो अन्याय होगा। मैं मंत्री महोदय से इसलिए भी उम्मीद कर रहा हूं कि नागपुर में उन्होंने हज यात्रा शुरू की, तभी हमारे रनवे को अपग्रेड किया गया। अभी कोई भी वाइड बॉडीड एयक्राफ्ट हब कारगो या पैसेंजर का वहां उतर सकता है। पीछे छ: हजार हज यात्री हमारे नागपुर से गये और वापिस आये। अब वह इंटकनैशनल एयरपोर्ट बन गया है, ऐसी घोषणा आप करें और उसके निर्माण के लिए मदद करें।
इन्हीं शब्दों के साथ आपने मुझे बोलने का मौका दिया, उसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। इस विधेयक का समर्थन करता हूं।