Judgements

Alleged Conduct Of Officers Of Ats, Mumbai (Maharashtra) In The … on 20 April, 2010

Lok Sabha Debates
Alleged Conduct Of Officers Of Ats, Mumbai (Maharashtra) In The … on 20 April, 2010

Title: Alleged conduct of Officers of ATS, Mumbai (Maharashtra) in the matter of Malegaon blast case.

श्रीमती सुमित्रा महाजन (इन्दौर): अध्यक्ष महोदया, मैं एक बहुत ही संवेदनशील मामला सदन में उठाना चाहती हूं। हिन्दुस्तान एक लोकतांत्रिक देश है। एक प्रजातांत्रिक देश में पुलिस को वास्तव में लोगों की सुरक्षा करनी चाहिए। लेकिन मैं निवेदन करना चाहती हूं कि किसी व्यक्ति को पुलिस कस्टडी में या कस्टडी में लेने के बाद अगर उसका अता-पता नहीं लगता है तो यह एक चिंता की बात हो जाती है।

          मैं अपने लोक सभा क्षेत्र की एक घटना की ओर आपके माध्यम से सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहती हूं। मेरे क्षेत्र से एक व्यक्ति दिलीप पाटीदार को मुम्बई एटीएस पुलिस मालेगांव ब्लास्ट घटना के संदर्भ में पूछताछ के लिए10 नवम्बर,2008 को मुम्बई ले जाती है, जबकि वह व्यक्ति उस घटना में कोई आरोपी नहीं है। इन्दौर के खजराला थाने में इस बात को दर्ज कराया गया कि हम इस व्यक्ति को पूछताछ के लिए ले जा रहे हैं। पूछताछ के लिए ले जाने के बाद, एक महीने के बाद, दो महीने के बाद बार-बार जब उस व्यक्ति के परिवार वालों ने सम्पर्क किया कि वह आदमी कहां है, तो उसका कोई जवाब नहीं मिला। कभी कहा गया कि पूछताछ हो रही है, लेकिन मुम्बई ले जाने के बाद उस व्यक्ति का कोई पता नहीं कि कहां उसे रखा गया है। जब इस मामले को इन्दौर न्यायालय में हैबियस कॉरपस लगाई गई तो आज करीब डेढ़ साल के बाद अचानक पुलिस कहती है कि हमने तो उसे चार महीने बाद ही छोड़ दिया था। वास्तव में कानूनन रूप से जिस थाने से उस उठाकर ले जाते हैं, वहीं लाकर उन्हें बताना चाहिए था, लेकिन मुम्बई एटीएस पुलिस ने यह उत्तर देकर कि हमने चार महीने बाद छोड़ दिया।

लेकिन मुम्बई एटीएस ने यह उत्तर दिया कि हमने चार महीने बाद छोड़ दिया, इसलिए अब उन्हें नहीं पता है कि वह कहां है। यह बहुत बड़ा अपराध है। अगर पुलिस स्टेशन में उसे प्रताड़ित करके मारा गया है, तो उसका उत्तर भी देना चाहिए। इस तरह से एक व्यक्ति को गायब करना और न्यायालय के आदेश के बावजूद भी कोई उचित उत्तर नहीं देना, यह सही नहीं है। जगह-जगह गुहार लगाने के बाद आज मैं इसलिए यहां यह मामला उठा रही हूं कि गृह मंत्रालय इस मामले की जांच करे। दूसरे राज्य से पुलिस आ कर किसी व्यक्ति को उठा कर ले जाती है। यह मामला वहां दर्ज है। अगर इसके बाद भी वह लड़का नहीं मिले, तो उसके परिवार पर जो संकट आया है, उसके छोटे-छोटे बच्चे हैं। वह आरोपी नहीं है, इसलिए मैं इतना बोल रही हूं। जो आरोपी है, वे तो जेल में ठीक हैं। कसाब जैसे आरोपी को आराम से जेल में बिरयानी खाने को दी जा रही है और कोर्ट में पेशी कराई जाती है, लेकिन हिंदुस्तान का एक नागरिक, जो आरोपी भी नहीं है, उसके बारे में कुछ पता नहीं है।

          महोदया, मैं आपके माध्यम से कहना चाहती हूं कि गृह मंत्री इस मामले में जल्दी से जल्दी जांच कराएं और उस लड़के को लौटा दें या उसके वेयर एबाउट्स पता कराकर न्याय दिलाएं।