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Title: Regarding problems being faced by refugees from Bhutan.
श्री गणेश सिंह (सतना): सभापति महोदय, मैं भारत सरकार का बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। हमारे पड़ोसी मित्र देश भूटान के लगभग डेढ़ लाख नागरिक विगत १६ वर्षों से शरणार्थी की जिन्दगी जीने के लिए विवश हैं। उनका अपराध मात्र यह था कि उन लोगों ने राजतन्त्र के खिलाफ मानवाधिकार के पक्ष में शांतिपूर्ण आंदोलन चलाया था। बदले में भूटान नरेश ने उन पर गोलियां चलाईं, जेलों में बंद किया, इतना ही नहीं उनकी नागरिकता भी समाप्त कर दी गई और उन्हें देश से निकाल दिया गया। तब से लेकर आज तक ये सारे लोग नेपाल के झापा और मौरंग जिलों में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं और इनकी देखभाल संयुक्त राष्ट्र संघ की एक संस्था कर रही है। इस महत्वपूर्ण मामले से भारत सरकार अपने आपको अलग रख रही है, जबकि यह मामला दोनों पड़ोसी मित्र देशों के बीच का है। इसमें त्रिपक्षीय वार्ता की पहल भारत सरकार को करनी चाहिए, मैं इसकी मांग करता हूं।