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Title : Need to take effective measures for cleaning of the river Yamuna.
श्री जय प्रकाश अग्रवाल (उत्तर पूर्व दिल्ली): यमुना नदी की सफाई का अभियान विगत कई वर्षों से चल रहा है। वर्ष 1985 से लेकर अब तक यमुना की सफाई पर 1356.05 करोड़ रूपये व्यय हो चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद भी यमुना का प्रदूषण स्तर (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड – बी0ओ0डी0) ढाई गुना बढ़ा है। अब पुनः वर्ष 2012 तक यमुना को साफ करने का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर अरबों रूपये व्यय करने की योजना बनाई जा रही है। लेकिन अरबों रूपए व्यय होने के बावजूद भी इसकी कोई गारंटी नहीं है कि यमुना की सफाई हो जायेगी। गंदे पानी को साफ करने के बाद ही यमुना अथवा अन्य नालों में छोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि यमुना में करीब 70 फीसदी गंदगी का बहाव गंदे नालों से आता है।
मेरा केन्द्र सरकार से अनुरोध है कि वह ऐसी योजना बनाये, जिससे गंदे पानी को स्वच्छ करने के पश्चात ही यमुना में छोड़ा जाये तथा वह इसकी जांच भी करवाये कि इतनी बड़ी धनराशि व्यय करने के पश्चात भी यमुना आज तक स्वच्छ क्यों नहीं हो पाई है और इसके प्रदूषण स्तर में कमी न होकर वृद्धि किन कारणों से हो रही है।