Judgements

Regarding Need To Organise Special Programmes On The Occasion Of … on 24 July, 2003

Lok Sabha Debates
Regarding Need To Organise Special Programmes On The Occasion Of … on 24 July, 2003


font>

12.45 hrs.

(i) RE : NEED TO ORGANISE SPECIAL PROGRAMMES ON THE OCCASION OF BIRTH CENTENARY OF SHRI JAI PRAKASH NARAYAN

Title: Regarding need to organise special programmes on the occasion of Birth Centenary of Shri Jai Prakash Narayan.

श्री रामजीलाल सुमन

(फिरोजाबाद): अध्यक्ष महोदय, मैं आपका आभार प्रकट करता हूं। ११ अक्तूबर जयप्रकाश जी का जन्मदिन है और ११ अक्तूबर २००२ को भारत सरकार की तरफ से यह घोषणा की गई थी कि जिस तरह से महात्मा गांधी, मौलाना अबुल कलाम आजाद, पंडित जवाहर लाल नेहरू और डा. अम्बेडकर का जन्म शताब्दी समारोह मनाया जाता रहा है, ठीक उसी तरह से भारत सरकार जयप्रकाश जी का जन्म शताब्दी समारोह वर्ष मनाएगी। हिन्दुस्तान के महामहिम उप राष्ट्रपति श्री भैरो सिंह शेखावत जी को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया और यह कहा गया कि पूरे वर्ष जयप्रकाश जी के जन्मदिन से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। बजट सत्र के दौरान कहा गया कि १०० जिलों को चिन्हित करके ग्रामीण विकास की तमाम योजनाएं श्री जयप्रकाश जी के नाम पर संचालित की जाएंगी। जयप्रकाश जी का व्यक्तित्व महान था। हिन्दुस्तान की आजादी की लड़ाई में उनका योगदान अविस्मरणीय है और १९४२ के अंग्रेजों भारत छोडो स्वतंत्रता आंदोलन के श्री जयप्रकाश जी और डा. लोहिया जी नायक थे। जयप्रकाश जी की प्रतिष्ठा और गरिमा इस बात से नहीं है कि वह कोई ओहदे पर थे। वह न इस देश के राष्ट्रपति थे और न प्रधान मंत्री थे लेकिन जयप्रकाश जी का कद इस देश में किसी प्रधान मंत्री और राष्ट्रपति से ज्यादा था। लेकिन बेहद तकलीफ से कहना पड़ता है कि एक प्रदर्शनी को छोड़कर जो इस संसद के गलियारे में लगी थी, भारत सरकार ने पूरे वर्ष कोई कार्यक्रम जयप्रकाश जी के नाम पर संचालित नहीं किया। आपकी कृपा से इस संसद परिसर में उनकी प्रतिमा तो लगी लेकिन जिस तरह से जयप्रकाश जी को याद करने का काम किया जाना चाहिए था, वह नहीं किया गया।

मैं निवेदन करना चाहूंगा कि वाराणसी में जून १९६० में जयप्रकाश जी ने गांधी अध्ययन केन्द्र स्थापित किया था। उस गांधी अध्ययन केन्द्र की गतवधियों पर भी अंकुश लगाने का काम किया गया, उसको बंद करने का काम किया गया। यह वर्ष ऐसा था कि जयप्रकाश जी ने जो १९६० में वाराणसी में गांधी अध्ययन केन्द्र स्थापित किया था सरकार उसको मदद करती, आचार्य राम मूर्ति जी उसके अध्यक्ष थे लेकिन उसको बंद कर दिया गया। हमारा निवेदन है कि उसको अनुदान देने का जो काम है, वह भी कर दिया जाए। हमारा जयप्रकाश जी से जज़बाती रिश्ता है। जहां आजादी की लड़ाई में उनका योगदान था, वहीं हिन्दुस्तान में जब इस देश के व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ और आपातकाल लगा तब हिन्दुस्तान में जयप्रकाश जी ने आजाद हिन्दुस्तान में भी इस देश की रहनुमाई की और सम्पूर्ण क्रान्ति का आंदोलन चलाया। वह हमारे आदर्श हैं। पूरे हिन्दुस्तान के समाजवादी राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े हुए लोग तथा गांधीवादी संस्थाओं से सम्बद्ध व्यक्ति और जिन लोगों का जज़बाती रिश्ता जयप्रकाश जी से है, उनको इससे बड़ी तकलीफ है कि भारत सरकार अपने फर्ज़ को पूरा नहीं कर रही है। मैं यह जरूर कहना चाहूंगा कि आप भारत सरकार को निर्देश दें कि जयप्रकाश जी का जो व्यक्तित्व था, उसके अनुरूप यह सरकार आचरण नही कर रही है और जिस तरीके से उनका जन्म शताब्दी समारोह मनाया जाना चाहिए, उस कर्तव्य से सरकार हट रही है।

श्री मुलायम सिंह यादव : अध्यक्ष महोदय, हम भी बोलना चाहते हैं।

अध्यक्ष महोदय : मुलायम सिंह जी, मैं आपको भी इजाजत दूंगा। यदि आप बोलना चाहते हैं तो बोलिए।

श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर) : अध्यक्ष महोदय, यह विषय राष्ट्रीय महत्व का विषय है।…( व्यवधान)

श्रीमती रेनु कुमारी (खगड़िया) :अध्यक्ष जी, हमारा बहुत महत्वपूर्ण विषय है,…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : जयप्रकाश नारायण जी का विषय चल रहा है, उसे पूरा होने दीजिए।

श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव: लोक नायक जयप्रकाश नारायण जी न केवल सम्पूर्ण क्रांति के नायक थे बल्कि पूरे देश में जिस समय लोक तंत्र पर हमला हुआ था, उस समय भी ५ जून १९७४ को जब करोड़ों छात्रों का सम्पूर्ण क्रांति का छात्र आंदोलन था, उसका भी नेतृत्व कर रहे थे। आज हम लोग उस आंदोलन के बाद यह महसूस कर रहे हैं कि केन्द्र सरकार ने जो जन्म शताब्दी समारोह मनाने का निश्चय किया था और महामहिम उपराष्ट्रपति जी की अध्यक्षता में जो कमेटी गठित हुई थी और १०० जिलों को ग्रामीण विकास के कार्यक्रमों के लिए चयनित करना था, यह कार्यक्रम रस्म-अदायगी के तौर पर किया गया। ११ अक्तूबर २००२ को जो निर्णय हुआ था कि अगले वर्ष २००३ को जयप्रकाश जी के जन्म शताब्दी समारोह वर्ष के रूप में मनाया जाएगा लेकिन आज मैं जानना चाहूंगा कि सरकार आखिर इस सवाल पर उदासीन क्यों है? सम्पूर्ण राष्ट्र के स्वतंत्रता सैनानी, सम्पूर्ण राष्ट्र के छात्र आंदोलन से जुड़े हुए नौजवान और जो नेता हैं, आज इस बात के लिए उनको बड़ा क्षोभ है। स्वतंत्रता संग्राम के इतने महान योद्धा जयप्रकाश जी के जन्म शताब्दी समारोह के कार्यक्रम में उदासीनता बरतना चिंता का विषय है। यह बहुत उपेक्षा की बात है।

 
 

केन्द्र सरकार आखिर क्या कर रही है। केन्द्र सरकार अपने इस उत्तरदायित्व से भाग नहीं सकती कि जो कार्यक्रम सुनिश्चित किए गए थे, उनको पूरा न किया जाए। लेकिन हो यह रहा है कि केवल रस्म अदायगी करके उसकी इतिश्री कर दी गई है। मैं आपके माध्यम से केन्द्र सरकार से विनती करता हूं कि वह इस मामले को गम्भीरता से ले। जो जन्म शताब्दी समारोह के कार्यक्रम है, उसके आगे का कार्यक्रम तय करे और घोषित करे, क्योंकि यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है।

श्री चन्द्रशेखर

(बलिया, उ.प्र.) : अध्यक्ष महोदय, रामजी लाल सुमन ने जो सवाल उठाया है, उसमें बहुत कुछ सत्य है, लेकिन यह सही नहीं है कि भारत सरकार द्वारा इस कार्यक्रम में कोई लापरवाही की जा रही है। उस समति के सामने बहुत सारे सुझाव आए। जो भी ऐसा सुझाव आया, जिस पर सरकार को तुरंत काम करना चाहिए, वे काम किए जा रहे हैं। जयप्रकाश जी के गांव में व उनके द्वारा चलायी गई संस्थाओं में भी काम हो रहा है। एक संस्था में जिसकी ओर रामजी लाल सुमन ने संकेत किया है, बनारस में जो जयप्रकाश जी ने इंस्टीटयूट बनाया था, उस पर सरकार का रुख कुछ अच्छा नहीं है, बहुत खराब रुख है। प्रधान मंत्री जी के हस्तक्षेप के बाद भी हमारे मानव संसाधन विकास मंत्री जी के रुख में नाराजगी है, वह बदली नहीं है। वह किस कारण से है, यह मैं नहीं जानता। लेकिन यह एक अशोभनीय बात है। इस बात में कमी आई है। मोहन धारिया जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने एक कमेटी बनाई है या कमीशन बनाया है, वैस्ट लैंड बोर्ड या कमीशन है, मुझे नाम याद नहीं है। उस समति द्वारा देश में १०० गरीब गांवों का चयन करके वहां विकास के काम करने हैं। वह भी प्रस्ताव समति ने स्वीकार कर लिया है और उसको ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी स्वीकार कर लिया है। लेकिन उस दिशा में कोई काम नहीं हुआ है। जहां तक श्री भैरों सिंह शेखावत का सवाल है, वह केवल उप राष्ट्रपति ही नहीं हैं, उस समति के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने उस हर प्रस्ताव को स्वीकार किया है, जो प्रस्ताव कहीं से भी आया है। जो सांस्कृतिक विभाग के मंत्री हैं, श्री जगमोहन जी, उन्होंने बड़ी तत्परता से इस कार्यक्रम को लिया है। उस समति की एक उप समति है, जिसका मैं अध्यक्ष हूं। इसलिए मैं अगर उसके बारे में नहीं बताऊंगा तो मैं अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाऊंगा। मुझे नहीं मालूम कि कोई ऐसा प्रस्ताव आया, जिसको उस समति ने स्वीकार नहीं किया हो। कुछ पैसे की कमी थी। थोड़ा पैसा मिला है। वित्त मंत्री जी और पैसा देने वाले हैं। कौन से १०० गांव चिन्हित किए गए हैं, मुझे मालूम नहीं है। लेकिन वह काम राज्य सरकारों को करना होगा। वे सरकारें काम कर रही हैं या नहीं कर रही हैं, इसकी मुझे कोई सूचना नहीं है। लेकिन दो कामों में एक तो गांवों में विकास का काम और दूसरा जो गांधी इंस्टीटयूट बनारस में है, इनमें कमी है। गांधी इंस्टीटयूट के लिए खास जिम्मेदारी केन्द्र सरकार की है। मानव संसाधन विकास मंत्री, जो शिक्षा मंत्री महोदय भी हैं, उस संस्था से क्यों नाराज हैं, मैं नहीं जानता। इन दो कामों को छोड़ कर और कामों में कोई कोताही नहीं हुई है। जयप्रकाश जी के नाम पर बहुत सी संस्थाएं चल रही हैं। मैं उस समति की ओर से सभापति श्री भैरों सिंह शेखावत से जरूर कहूंगा कि जो काम चल रहे हैं, सांस्कृतिक विभाग के मंत्री जी ने जो कदम उठाए हैं, उनकी एक सूची बनाकर सारे सदस्यों को वितरित करा दें, ताकि यह मालूम हो सके। लेकिन मैं नहीं जानता कि राज्य सरकारें उस कार्यक्रम को क्यों नहीं लागू कर रही हैं।

श्री मधुसूदन मिस्त्री (साबरकांठा): गांधी इंस्टीटयूट और गांधी आश्रम में भी कोई काम नहीं हो रहा है। राज्य सरकार उस पर ध्यान नहीं दे रही है। उस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

श्री मुलायम सिंह यादव :माननीय अध्यक्ष जी, जहां तक जयप्रकाश जी के व्यक्तित्व और कृतित्व का सवाल है तो पूरा देश और यह सदन उनके योगदान को जानता और मानता है। जयप्रकाश जी ने शिक्षा प्राप्ति के बाद अपना पूरा जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया और बदले में कभी कुछ नहीं चाहा। देश की आजादी की लड़ाई में उनकी भूमिका को सभी जानते हैं। हजारीबाग जेल से जब वे निकले थे तो अंग्रेज पुलिस उनको गोली मार सकती थी लेकिन अपने प्राणों की परवाह न करते हुए उन्होंने देश के नौजवानों को आजादी की लड़ाई में भाग लेने के लिए प्रेरित किया, उनको जगाया। बहुत से छात्र नेता अपनी कानून की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर जयप्रकाश जी के आवाहन पर आजादी के लिए उनके साथ निकल पड़े। हमारा तो समाजवादी आंदोलन से बहुत गहरा संबंध रहा है। सभी जानते हैं कि सन् १९७७ में भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्र आंदोलन उनके नेतृत्व में किया गया और वह आंदोलन गुजरात या बिहार तक सीमित न होकर पूरे देश में फैला तथा १९७७ में नया परिवर्तन आया। वह परिवर्तन उनके ही संघर्ष का परिणाम था। जहां तक उनकी जन्म-शताब्दी मनाने का सवाल है तो हो सकता है कि दो-चार जगह मनाई जा रही हो और जैसा माननीय चन्द्रशेखर जी ने कहा, लेकिन हम समति के बारे में कुछ नहीं कह रहे हैं और न उस बारे में कोई टिप्पणी करना चाहते हैं। यह ठीक है कि अगर सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं तो सरकार की तरफ से जो गांव चुने गये हैं अगर उनकी सूची आ जाएगी तो हम संतुष्ट हो जाएंगे। पहले भी कुछ क्षेत्रों से हम चुने गये हैं, लेकिन हमें पता है कि उन क्षेत्रों में कोई कार्यक्रम जयप्रकाश जी के ऊपर नहीं हुआ, जिलों में भी इस बारे में कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। पूरे देश के बारे में तो हम बता नहीं सकते हैं लेकिन उत्तर प्रदेश के सात-आठ जिलों को हम गिना सकते हैं जिनमें एक भी कार्यक्रम इस बारे में नहीं हुआ है। एक भी कार्यक्रम न तो राज्य सरकार की तरफ से न ही केन्द्र सरकार की तरफ से हुआ है। समति का प्रस्ताव हो रहा है तो अच्छा है। कार्यक्रम सीमित रूप में कहीं पर हुआ होगा, मैं उस बारे में कुछ नहीं कह सकता हूं। अध्यक्ष महोदय, इसलिए मैं आपसे आग्रह करता हूं कि जयप्रकाश जी जैसे महानायक, जन-नायक, लोक नायक की जीवनी को पढ़कर अगर आने वाली पीढि़यां प्रेरणा नहीं लेंगी तो यह देश का ही नुकसान होगा। मैं कहना चाहता हूं कि जो देश अपने पुरखों को, अपनी विभूतियों को भूल जाता है वहां से सभ्यता, संस्कृति, इंसाफ, आजादी और देशभक्ति की भावना खत्म हो जाती है। माननीय चन्द्रशेखर जी के प्रयासों से आचार्य नरेन्द्र देव जी की जन्मशताब्दी पर कुछ संकलन हुआ और उनकी जीवनी पर एक किताब लिखी गयी थी, उसे हमने पढ़ा है। हमने चर्चा इसलिए की क्योंकि एक लोहिया ट्रस्ट हमने बनाया है और उनके ऊपर लिखी गयी किताबों का संकलन हम कर रहे हैं। माननीय चन्द्रशेखर जी सितम्बर के महीने में एक दिन खाली रखें क्योंकि एक प्रोग्राम जन्म-शताब्दी के उपलक्ष में हो रहा है। अगर समति का कार्यक्रम हमें भेज देंगे तो हमें खुशी होगी। समति ने जो कुछ जयप्रकाश जी के लिए किया है उसकी हम सराहना करते हैं। लेकिन उस बारे में हमें ज्यादा पता नहीं है।

अध्यक्ष जी, हम भी जयप्रकाश जी के आवाहन पर जेल में रहे और बहुत से लोग भी जेल में रहे। सभी जानते हैं कि हमारा संबंध समाजवादी आंदोलन से रहा है। हमारी प्रार्थना यह है कि आप सरकार को इस बारे में निर्देशित करें। आप इस बारे में कभी मीटिंग बुला लें। राष्ट्रपति जी से तो आप निवेदन कर सकते हैं लेकिन हमारे लिए तो माननीय चन्द्रशेखर जी ही काफी है। हम चाहते हैं कि जयप्रकाश जी की जीवनी पर एक पुस्तक संकलित हो जाए, जिससे आने वाली पीढि़यां प्रेरणा ले सकें।

श्री राम विलास पासवान

(हाजीपुर) : अध्यक्ष जी, मुलायम सिंह जी के विचारों से हमें भी संबद्ध किया जाए।

अध्यक्ष महोदय : ठीक है।

13.00 hrs.

डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): अध्यक्ष महोदय, लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी की जन्म-शताब्दी समारोह देशभर में जानदार व शानदार ढंग से मनाए जाएं। इस बारे में समति भी बनी हुई है और जहां-तहां राज्य सरकारें भी इस समारोह को मना रही हैं। बनारस में लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी ने गांधी विद्या संस्थान की स्थापना की थी और सरकार से उस संस्थान को कुछ सहायता मिलती थी, लेकिन अफसोस की बात है कि उस सहायता को मानव संसाधन विकास मंत्री, डा. मुरली मनोहर जोशी जी ने रोक दिया है। महोदय, केवल उसे रोक ही नहीं दिया है, बल्कि उस पर आरएसएस का कब्जा भी करा दिया है। इसके विरोध में तमाम गांधीवादी और सर्वसेवा संघ के लोग धरना-आन्दोलन कर रहे हैं और राज्य सरकार की पुलिस भी आरएसएस के पक्ष में ही काम कर रही है। असली भेद यह है, जैसा श्री चन्द्रशेखर जी ने संकेत किया कि उन्होंने प्रधान मंत्री जी से शिकायत की, तो प्रधानमंत्री जी ने लाचारी व्यक्त की। वे आरएसएस के समक्ष असहाय हैं और उन्होंने कहा कि श्री मुरलीमनोहर जोशी हमारी बात नहीं सुनते हैं। …( व्यवधान)मैं सरकार और सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी के संदर्भ में राष्ट्रकवि‘दिनकर’ने लिखा था – “जयप्रकाश नाम है, देश की जलती हुई जवानी का। कहते हैं उसको जयप्रकाश, जो मरण से कभी नहीं डरता है।” लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी के कारनामे हैं, उनकी अमर कीर्ति है और गांधी विद्या संस्थान जो अपनी ही जमीन पर है, उस पर आरएसएस के द्वारा कब्जा कराने का काम हो रहा है। जयप्रकाश जी द्वारा खोले गए तमाम संस्थानों का भगवाकरण कराने की इजाजत नहीं दी जा सकती है और न इसे बर्दाश्त किया जा सकता है। इसलिए कार्यबद्ध ढंग से वहां पर सर्वसेवा संघ के लोग आन्दोलन चला रहे हैं, भूदानी लोग आन्दोलन चला रहे हैं। श्री रामचन्द्र राही, श्री अमरनाथ राही और श्री सुरेन्द्र मोहन हमारे पास आए थे और उन्होंने बताया कि वहां पर जोर-जुल्म हो रहा है। इस जोर-जुल्म को रोका जाए और लोकनायक जयप्रकाश नारायण की अमर कीर्ति को आरएसएस के कब्जे से बचाया जाए। इसके साथ ही जो पूर्व में उनको सहायता मिल रही थी, उसको दिया जाए। …( व्यवधान)

श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, हम आपका संरक्षण चाहते हैं। आप निर्देशित कर दीजिए कि सरकार इस संबंध में क्या कर रही है और इसकी जानकारी सभी सदस्यों को मिल जाए। …( व्यवधान)आप सरकार को निर्देशित कर दीजिए और इस संबंध में एक पुस्तिका सभी सासंदों को मिल जाए।

अध्यक्ष महोदय

: श्री रामजीलाल सुमन जी ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी की जन्म-शताब्दी के बारे में सुझाव दिया है। श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव, माननीय चन्द्रशेखर जी, माननीय मुलायम सिंह जी और श्री रघुवंश प्रसाद सिंह जी – इन सभी माननीय सदस्यों ने …

…( )

श्री बसुदेव आचार्य (बांकुरा): अध्यक्ष महोदय, पूरे सदन की ओर से विचार व्यक्त कर दें।

: ठीक है, पूरे सदन की ओर से कहता हूं। चर्चा में दो बातें कही गईं हैं – एक यह कि जन्म-शताब्दी समारोह अलग-अलग समारोहों में इस समारोह को किया जाए और दूसरी सूचना यह भी है कि जो प्रस्ताव सरकार के सामने हैं, उस प्रस्ताव को त्वरित पूरा करने के लिए मदद की जाए। मैं सोचता हूं कि जयप्रकाश नारायणजी के बारे में ज्यादा कहने की जरूरत नहीं है। वे बड़े स्वतन्त्रता सैनानी थे और बहुत ही अच्छे समाज सेवक थे। देशहित में उन्होंने हर समय काम किया है। आप सभी माननीय सदस्यों को याद होगा, उनकी प्रतिमा संसद भवन में नहीं थी। मैं जब यहां अध्यक्ष बन गया, तो प्रतिमो को लगाने का पहला काम मैंने किया था। इसलिए मैं इस अवसर पर चाहता हूं कि इस विषय में तरक्की करने की जरूरत है। मैं पार्लियामेन्ट्री एफेयर्स मनिस्टर से कहूंगा कि वे सदन की चर्चा तथा सदन में जो भावना व्यक्त हुई है, उसको प्रधानमंत्री जी तक पहुचायें। इससे उनका आदर हो जाएगा और हम सभी को खुशी होगी।