Title : Maj. General (Retd.) B.C.Khanduri, AVSM called the attention of the Minister of Rural Development to the situation arising out of unsatisfactory utilization of funds under the Pradhan Mantri Gramin Sadak Yojana in Uttaranchal and steps taken by Government in regard thereto.
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूडी अध्यक्ष महोदय, मैं ग्रामीण विकास मंत्री का ध्यान अविलम्बनीय लोक महत्व के निम्न विषय की ओर दिलाता हूं और प्रार्थना करता हूं कि वह इस संबंध में वक्तव्य दें :
“ उत्तरांचल में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत नधियों के असंतोषजनक उपयोग से उत्पन्न स्थिति और इस संबंध में सरकार द्वारा उठाए गए कदम। ”
ग्रामीण विकास मंत्री (डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह) : अध्यक्ष महोदय, ‘ग्रामीण सड़क’ राज्य का विषय है, जो भारत के संविधान की ७वीं अनुसूची की सूची-II की क्रम संख्या १३ पर निर्दिष्ट है। तथापि, ग्रामीण विकास मंत्रालय, राज्यों को शत-प्रतिशत केन्द्रीय सहायता के रूप में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत ग्रामीण सड़कों के निर्माण और सुधार के लिए नधियां उपलब्ध कराता है। इस कार्यक्रम को क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।
MR. SPEAKER : Hon. Minister, You can lay the speech on the Table of the House.
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : महोदय, मैं बाकी का वक्तव्य सदन के पटल पर रखता हूं।
*२. केन्द्र सरकार इस बात को अच्छी तरह जानती है कि उत्तरांचल में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के क्रियान्वयन की गति संतोषजनक नहीं है। चरण -I (२०००-०१) के ६९ सड़क कार्यों में ६७ कार्य पूरे हो गए हैं। चरण -II (२००१-०३) के ९२ सड़क कार्यों में से ५३ कार्य पूरे हो गए हैं। चरण-IIIके ५२ सड़क कार्य ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ७.६.२००३ को स्वीकृत किए थे। चरण-III का कोई भी सड़क कार्य अब तक पूरा नहीं हुआ है। ग्रामीण विकास मंत्रालय राज्य सरकार पर पहले से अनुमोदित सड़क कार्यों को तेजी से पूरा करने की आवश्यकता पर बल दे रहा है।
३. मंत्रालय ने राज्य सरकार से २० मई, २००३ को ६० करोड़ रुपए की राशि के चरण-IV (२००४-०५) के लिए अपने प्रस्ताव ३० अक्टूबर तक भेजने का अनुरोध किया था। १ फरवरी, २००५ को राज्य सरकार
· Laid on the Table and also placed in Library, see No. LT 2826/2005
को चरण -IVके प्रस्तावों के आकार के बारे में भी जानकारी दे दी गई थी। २९ अप्रैल, २००५ को उत्तरांचल के मुख्यमंत्री को भी, चरण-IIIके सभी कार्य देने के पश्चात, चरण-IV और चरण-V (२००५-०६) दोनों के लिए २१५ करोड़ रुपए के प्रस्ताव भेजने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया था। अब तक राज्य सरकार से चरण-IV और चरण-V के प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुए हैं।
४. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए राज्यों को नधियों की रिलीज कार्यक्रम के दिशा-निर्देशों में निर्धारित शर्तों के अनुसार अधिशासित की जाती है, जिनमें पिछले चरणों में वास्तविक और वित्तीय प्रगति के कतिपय स्तरों को हासिल करना शामिल है। चरण-I के कार्यों के लिए ६०.६३ करोड़ रुपए की संपूर्ण राशि एक किस्त में मार्च, २००१ में रिलीज की गई थी। चरण-II के कार्यों के लिए १४०.४१ करोड़ रुपए की संपूर्ण राशि दो किस्तों में – २००१-०२ में ७० करोड़ रुपए और २००३-०४ में ७०.४१ करोड़ रुपए – रिलीज की गई थी। राज्य सरकार ने चरण-I में ५६.१३ करोड़ रुपए और चरण-II में ६५.८९ करोड़ रुपए का व्यय होने की जानकारी दी है। चरण -III के संबंध में कोई व्यय न होने की जानकारी दी गई है। इस तरह से राज्य सरकार के पास खर्च न हुई शेष राशि ७९.०२ करोड़ रुपए है। चरण-III के लिए नधियां अभी तक रिलीज नहीं की गई हैं।
५. ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्य सरकार को समय-समय पर कार्य में तेजी लाने की सलाह दी है। राज्य सरकार ने बताया है कि कार्य में धीमी प्रगति, वन भूमि को स्थानांतरित करने की लंबी और बहु-स्तरीय प्रक्रिया, कार्य करने के सीमित मौसम, खराब मौसम, पर्याप्त क्षमता वाले ठेकेदारों का न मिलना, वर्षा के मौसम में अत्यधिक वर्षा और भू-स्खलन, जिनके कारण सड़कों को क्षति पहुंचती है, बनाई जाने वाली सड़कों की अधिक लंबाई, जिसके लिए केवल सिंगल वर्किंग फेस वाली मशीनें ही उपलब्ध हैं, मशीनों को आगे बढ़ाने में बाधक चट्टानी पर्वतीय भाग और संयोजन पुलों के निर्माण में देरी, के कारण हैं। राज्य सरकार पर मंत्रालय जिन बातों पर दबाव डालने का प्रयास कर रहा है, वे निम्नलखित हैं :-
(क) ८-९ मई, २००३ को क्षेत्रीय समीक्षा बैठक में राज्य को यह बताया गया था कि २००१-०२ में स्वीकृत कार्यों की प्रगति की गति बहुत धीमी है और यह है कि वन भूमि की मंजूरी के अभाव में १० जिलों में कार्य आरंभ नहीं किया जा सका। राज्य को यह जांच करने के लिए कहा गया था कि क्या इस चरण के कार्यों को और ऐसे कार्यों को, जो वन भूमि की स्वीकृति न मिलने जैसे मुद्दों के कारण शुरू नहीं किए जा सकते, अनुवर्ती चरणों में शुरू किया जा सकता है। उन्हें समयबद्ध तरीके से इस चरण के कार्यों को पूरा करने की सलाह भी दी गई थी। राज्य से विशेष रूप से यह अनुरोध किया गया था कि वन भूमि की स्वीकृति की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और यह कि राज्य कार्यक्रम के अंतर्गत भविष्य में बनाई जाने वाली सड़कों में वन भूमि के शामिल होने वाले मामलों में स्वीकृति की आवश्यकता का पता लगाएं।
(ख) १०-१२ नवम्बर, २००३ को क्षेत्रीय समीक्षा बैठक में राज्यों को यह बताया गया था कि कार्यों की प्रगति चिंता का विषय है तथा राज्य इस मुद्दे का समाधान करें। इस मुद्दे को एक बार फिर २६-२७ अक्तूबर, २००४ को क्षेत्रीय समीक्षा बैठक में राज्यों के साथ उठाया गया था।
(ग) कार्य की धीमी प्रगति के कारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने अप्रैल, २००५ के दौरान उत्तरांचल का दौरा किया तथा राज्य में पी.एम.जी.एस.वाई. के कार्यान्वयन की व्यापक समीक्षा की।
(घ) ग्रामीण विकास मंत्री ने २९ अप्रैल, २००५ को राज्य के मुख्यमंत्रियों को कार्यों की धीमी प्रगति से अवगत कराया और कार्यों की गति में तेजी लाने के लिए शुरू किए जाने उपचारी उपाय सुझाए। मंत्रालय ने राज्य को हर संभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया। मुख्य मंत्री से स्थिति की समीक्षा करने तथा उपचारी उपाय करने के लिए निर्देश जारी करने का आग्रह भी किया गया।
(ड़) मंत्रालय ने पाया कि राज्य में कार्यान्वयन की प्रगति को सुधारने के लिए राज्य में संस्थागत, तकनीकी, प्रबंधकीय तथा संविदात्मक क्षमता को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। इसे ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार को यह सलाह (१३ जून, २००५ को) दी गई है कि वे कार्यक्रम कार्यान्वयन इकाइयों की सहायता करने के लिए परियोजना कार्यान्वयन सलाहकार (पी.आई.सी.) नियुक्त कर सकते हैं। परियोजना कार्यान्वयन सलाहकारों को पी.एम.जी.एस.वाई. में से धनराशि दी जाएगी। परियोजना कार्यान्वयन सलाहकार, परियोजना प्रस्तावों को तैयार करने, कार्य प्रापण, निर्माण पर्यवेक्षण, परियोजना निष्पादन निगरानी, परियोजना कार्यान्वयन इकाइयों तथा ठेकेदार के लोगों को प्रशिक्षण देने, सामाजिक और पर्यावरण संबंधी सुरक्षा उपाय करने में परियोजना कार्यान्वयन इकाइयों की मदद कर सकते हैं।
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूडी : माननीय अध्यक्ष जी, मंत्री जी से इस प्रकार के जवाब से मुझे बहुत निराशा हुई है। आपके सामने समस्या रखी गई थी और आपने पूरे दो-ढाई पेज के स्टेटमेंट में बहुत सारे आंकड़े दिए हैं, लेकिन उनसे समस्या का समाधान नहीं होने वाला है, क्योंकि आपने उसकी कोई चिंता नहीं की है। आपने जो आंकड़े दिए हैं, उससे क्या नतीजा निकलना चाहिए और क्या विश्लेषण करके उस पर कुछ करना चाहिए था, यह स्पष्ट नहीं है। मंत्री जी द्वारा अपने स्टेटमेंट में दिए गए आंकड़े और सदन में पूछे गए इस सम्बन्ध में प्रश्नों के उत्तर में जो आंकड़े दिए गए थे, मैं उनका जिक्र करना चाहता हूं। मुझे आशा थी कि उन आंकड़ों के आधार पर आप तथ्यों की जानकारी लेकर कोई निष्कर्ष निकालेंगे। आपने वजह दी है कि क्यों पैसे का उपयोग नहीं हो पा रहा है और क्यों सड़कें नहीं बन रही हैं। प्रदेश सरकार ने जो आपको उसकी वजह और आंकड़े दिए हैं, उन्हें आपने स्वीकार कर लिया है। क्या आपने देखा है कि पहले वाली स्थिति अब भी वहां है, जबतेज गति से काम तब हुआ था? आपने जो आंकड़े दिए हैं, उनके अनुसार वर्ष २००० में यह योजना शुरू हुई। २००१ के शुरू में काम प्रारम्भ हुआ। पहले एक साल के अंदर, जनवरी २००१ से जनवरी २००२ तक ६०.६३ करोड़ रुपए दिए गए, उसमें से ५४.११ करोड़ रुपए का उपयोग हुआ। सरकार ने ६९ सड़कों का काम स्वीकृत किया और उसमें से ६५ का काम पूरा हुअ्ाा[R3] । एक साल के अंदर २८४ किलोमीटर से ज्यादा पूरी हो गयीं। पहले साल में जबकि काम मुश्किल होता है क्योंकि नयी योजना होती है, लेकिन वे पूरी हुईं। जब २००१-२००२ में दूसरी सरकार वहां आई, जो आज बहानेबाजी कर रही है, वहां कोई काम नहीं हुआ। आपने ७० करोड़ रुपया स्वीकृत किया, लेकिन काम कुछ नहीं हुआ। आपने वर्ष २००२-२००३ के मिलाकर आंकड़े दिये हैं। इन दो सालों में ९२ काम स्वीकृत हुए हैं और जून २००५ तक ५३ सड़कें पूरी हुई हैं। एक साल के अंदर ६९ में से ६५ सड़कें पूरी होती हैं और चार साल में ९२ में से ५३ सड़कें पूरी होती हैं। इन चार सालों में कितनी सड़कें बनती हैं – १०१ किलोमीटर जबकि एक साल में बनती हैं २८४ किलोमीटर।
आगे और देखिये। सन् २००३-२००४ में न तो आप पैसा देते हैं न सड़कें बनती हैं, न स्वीकृति आती है और कोई काम पूरे साल नहीं होता है, पूरी तरह से शांति रहती है। उसी तरह से सन् २००४-२००५ में सब शून्य है, आपने कोई पैसा नहीं दिया है और आंकड़ों में आप कहते हैं कि पैसा उनके पास पड़ा है, इसलिए पैसा भी रिलीज नहीं करते हैं। आप कहते हैं कि ग्रामीण सड़क बनाना स्टेट का काम है। पैसा आप दे रहे हैं, लेकिन वे काम नहीं करते हैं और आप अपना हाथ झाड़ जाते हैं। आप यहां से किस प्रकार का कंट्रोल कर रहे हैं, मुझे आपसे बहुत निराशा हुई है। मैं आपसे अपेक्षा करता था कि इसमें कुछ काम होगा। आपसे दो-तीन बार मैं मिला हूं, चटि्ठयां भी लिखी हैं। आपने जवाब दिया है और समय-समय पर आप भी और पिछली सरकार भी बराबर कह रही है कि काम नहीं हो रहा है, उनको वार्निंग दे रहे हैं, जब भी काम नहीं होता है तो वजह पूछते हैं। मंत्री जी, वे जो वजह देते हैं वह आपने दी हैं। पैरा ५(क) में आपने दिया है कि ८-९ मई, २००३ को क्षेत्रीय समीक्षा बैठक में राज्य को जांच आदेश दिये गये थे और राज्य ने इसके जवाब में आपको बताया कि राज्य को यह बताया गया था कि काम बिल्कुल खराब चल रहा है, लेकिन
“The State Government has informed that the slow progress of work is due to lengthy and multistage process of transfer of forest land, limited working seasons, extreme weather conditions, non-availability of contractors with adequate capacity, excessive rains and landslides …… ”
क्या ये चीजें पहले साल में नहीं थीं, क्या ये चीजें वर्ष २०००,2001 में नहीं थीं? शुरु में तो नयी सरकार थी, नयी योजना थी। अब तो सरकार पिछले साढ़े तीन साल से चल रही है और आप इन बातों को मान लेते हैं कि सब ठीक है। केन्द्र सरकार क्या असहाय है, कुछ कर नहीं सकती है? आप तो सिर्फ वार्निंग दिये जा रहे हैं। क्या हमारे पास कोई तरीका नहीं है जिससे काम हो सके? मंत्री जी, यह बात ठीक नहीं है। माननीय मंत्री जी, इन्होंने जो वजह दी हैं वास्तव में वजह वे नहीं हैं और मुझे समझ में नहीं आता है कि आपके मंत्रालय को सही वजह क्यों नहीं मालूम है। मैं आपको जानकारी देना चाहता हूं कि जब नयी सरकार बनी, बीजेपी की सरकार के बाद कांग्रेस की सरकार बनी तो झगड़ा हुआ कि रुरल डैवलेपमेंट मनिस्ट्री इस काम को करेगी या पीडब्ल्यूडी इस काम को करेगी। हमारे समय में पीडब्ल्यूडी ने काम किया था। उसके पास व्यवस्था थी, आदमी थे और पूरा ऑरगेनाइजेशन था। रुरल डैवलेपमेंट के पास कोई व्यवस्था तो है नहीं और उनको काम दे दिया। उनका आपस में झगड़ा हुआ। अब यहां पर मुझे वे कारण बताने की शायद इजाजत नहीं है कि क्यों झगड़ा हुआ? रुरल डैवलेपमेंट मनिस्ट्री के पास कोई आदमी नहीं हैं, व्यवस्था नहीं है। इसलिए उन्होंने मेगा-टैक नाम की कंपनी को काम दे दिया। पांच आदमी इकट्ठा किये और कंपनी को काम दे दिया, १३ जिलों के अंदर ५-६ आदमियों की टीम बना दी। हमारे जिले में एक आदमी भी ढूंढने पर नहीं मिलता है। यहां से शिकायत हुई। मैं आपको ध्यान दिलाना चाहता हूं कि आपके कार्यालय के पूर्व मंत्री जी ने एक सख्त चिट्ठी मुख्यमंत्री जी को लिखी थी कि यह जो काम हो रहा है यह ठीक नहीं है। आपके पास कोई व्यवस्था नहीं है। उसके बाद आपने लिख दिया है कि क्या वार्निंग दी गय्ाी[r4] ।
वजह यह नहीं है कि बारिश हो रही है, लैंड स्लाइड्स हो रही हैं। वे पूरे भारतवर्ष में और उत्तरांचल में हो रही हैं। एक साल में २८४ किलोमीटर सड़क बनी है। वजह यह है कि ऐसी संस्था को अपने स्वार्थ के लिए काम दिया गया जिन के पास उसकी कैपेबिल्टी और कैपेसिटी नहीं थी। झगड़ा यही चलता रहा। उन्होंने आधा काम किया। आज वे सड़कें अधूरी हैं। जिस कम्पनी ने उसे शुरू किया, उसने काम पूरा नहीं किया। आज फिर पीडबल्यूडी को हैंड ओवर कर दिया गया है। जो काम उन्होंने किया, वह काम आज भी उपलब्ध
नहीं है। वह इंजीनियर भाग गए। हम सड़क की प्रोग्रैस के बारे में पूछते हैं तो पीडबल्यूडी वाले कहते हैं कि हमें जानकारी नहीं है। माननीय मंत्री जी, यही वजह है जिस की आपको कोई व्यवस्था करनी चाहिए। प्रदेश सरकार को उनसे पूछना चाहिए था कि क्यों ऐसा किया? आपने उनकी बातें मान कर अपना भी समर्थन दे दिया जो ठीक बात नहीं है। अब आपने उनको और छूट दी है। आप कनसल्टैंट्स की टीम बना लीजिए, यह कर लीजिए, वह कर लीजिए। अगर जरूरत है तो केन्द्र से एक टीम बना कर भेजिए। उनके इस अधिकार को वापस लीजिए। अगर वह इतनी अयोग्यता बरत रहे हैं तो कार्रवाई कीजिए। कहा जाता है कि पैसा नहीं दे रहे हैं क्योंकि उनका पैसा पड़ा है और उसका उपयोग नहीं हो रहा है। आज के दिन ७४ करोड़ रुपए ऐसे ही पड़े हैं और दो साल से आपने पैसा रीलिज नहीं किया है। डेढ़ सौ करोड़ रुपए के करीब प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना का पैसा पड़ा है। मेरी संसदीय क्षेत्र में ऐसी जगह हैं जहां आदमी दो दिन पैदल चल कर पहुंचता है। वे सड़कें स्वीकृत नहीं हो रही हैं। मैं यहां आलोचना करने के लिए खड़ा नहीं हुआ हूं। मैं कुछ सुधार चाहता हं। हमें वहां के लिए सड़कें चाहिएं क्योंकि मुश्किल हो रही है। वहां के लोग इसके लिए त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। वे चिल्लाते हैं कि सड़क नहीं है लेकिन पैसा फालतू पड़ा है।
अगर आप कोई निर्णय करेंगे और प्रदेश सरकार उसे नहीं मानती है तो क्या ऐसे बात को टालते जाएंगे? मैं आपके पास आया, कितनी दफा मिला, चार सड़कें पूर्व मंत्री ने विशेष परिस्थिति में स्वीकृत करके दी थीं लेकिन प्रदेश सरकार उसे नहीं देख रही है। वह जनसंख्या वगैरह के बहाने बना रही है।
अध्यक्ष महोदय: यह स्टेट गवर्नमैंट का मसला है। ये केवल पैसा देते हैं।
MAJ. GEN. (RETD.) B. C. KHANDURI : No, Sir. This is not the point.
MR. SPEAKER: Mr. Khanduri, I have already allowed you to speak for 12 minutes on this issue. मैंने आपको बोलने का मौका दिया।
MAJ. GEN. (RETD.) B. C. KHANDURI : Sir, I am grateful to you for it.
वहां के लोग सडक तक पहुंचने के लिए दो दिन पैदल चलते हैं। मंत्री जी मैं आपका ध्यान इस तरफ दिलाना चाहता हूं कि आपने कहा कि जनसंख्या नहीं है इसलिए वे चारे सड़कें स्वीकृत नहीं कर रहे हैं। मैं आपसे विशेष तौर पर जानना चाहूंगा कि क्या पिछले चार साल से कोई भी ऐसी सड़क स्वीकृत नहीं हुई है जो उस मानक से बाहर है? पहाडों के लिए जनसंख्या ढाई सौ है। आपने कहा कि एक हजार पूरी होगी तब देंगे। मैं जानना चाहता हूं कि पूरे देश में क्या कोई ऐसी सड़क नहीं है जिन्हें इन मानकों को कम करके स्वीकृति दी गई हो? मैं जानता हूं कि दी गई है। सवाल यह है कि पूर्व मंत्री ने इसे स्वीकृति दी थी और प्रदेश नकार रही है। यह चिन्ता की बात है। आप उनको भी समर्थन दे रहे हैं जो ठीक बात नहीं है।
अंतिम बात यह जानना चाहता हूं कि जनसंख्या का जो विषय है, पिछली दफा इस बात पर चर्चा की गई थी और पहाड़ों के लिए पांच सौ से लेकर ढ़ाई सौ तक की छूट दी गई थी। इसमें एक व्यवस्था यह भी थी कि सड़क का जो एलाइनमैंट है, उसके आधा किलोमीटर एक तरफ और दूसरी तरफ उस जनसंख्या को जोड़ लिया जाए। अब आपके मंत्रालय ने क्या शुरू किया है? क्या आखिरी गांव की जनसंख्या ही जोड़ी जाएगी? बीच में दो हजार-तीन हजार आदमी रहते हैं, क्या उनका कोई मतलब नहीं है? उनको भी उस सड़क से फायदा हो रहा है इसलिए आधा किलोमीटर आइदर साइड ऑफ दी एलाइनमैंट, उस जनसंख्या को भी जोड़ने के लिए क्या आप स्वीकृति देंगे? कृपया बताएं।
MR. SPEAKER: Shri Bachi Singh Rawat. Mr. Rawat, kindly note that you have given the notice at 1220 hours, but I am giving you this opportunity because you come from that area. You can only ask a question from the hon. Minister, and no speech to be made here.
श्री बची सिंह रावत ‘बचदा’ मैं केवल दो तथ्यों का उल्लेख करके सीधा प्रश्न पूछ रहा है। मेरे संसदीय क्षेत्र में चार जिले आते हैं जो पर्वतीय हैं अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चम्पावत। वहां २००१-२००२ के बाद कोई सड़क प्रधानमंत्री सडक योजना मे नही बनी। जो सड़कें बनी थीं, वे लैंड स्लाइड्स आदि से टूट कर बह चुकी हैं। इस प्रकार बनी हुई सड़कें जीरो की हालत में हो गई हैं। सड़कें टूट गई, बाद में बनी नहीं। क्या उनके लिए अलग से पैसा देंगे? खंडूरी जी ने कहा कि धन का दुरुपयोग हुआ। मेगाटक कम्पनी पांच परसैंट कनसल्टैंसी लेकर चली गई है। आपका उसके ऊपर कंट्रोल होना चाहिए। इसकी जांच करके पैसे की रिकवरी होनी चाहिए। वन संरक्षण अधनियम इसमें बहुत रुकावट डाल रहा है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: No other hon. Member would be allowed to ask questions on this issue as the issue is specifically meant for the State of Uttaranchal.
… (Interruptions[ak5] )
श्री बची सिंह रावत‘बचदा’ : वन संरक्षण अधनियम में संशोधन आ जाए…( व्यवधान) संशोधन अगर सरकार ला सके तो सड़कें बन सकती हैं, इस संबंध में क्या आप विचार करेंगे?
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य द्वारा जो ध्यानाकर्षण किया गया है, उनकी चिंता जायज है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के छठे साल में राज्य का हिस्सा कुल ३९५ करोड़ रु बनता है, जिसमें से अभी तक २०० करोड़ रुपए दे दिए गए हैं। २०० करोड़ में से वे १२१ करोड़ रुपए खर्च कर पाए हैं और ७९ करोड़ रुपए बचे हुए हैं। इस तरह से ७९ करोड़ रुपए स्टेट में बचे हुए हैं और हमारे यहां १९५ करोड़ रुपए बाकी हैं। अभी पैसे बचे हुए हैं और काम ठीक से नहीं हो रहा है। माननीय सदस्य ने स्पष्ट किया है कि पहले इसे रूरल डेवलपमेंट मंत्रालय कर रहा था फिर पी.डबल्यू.डी की अदला-बदली हुई, यह स्टेट गवर्नमेंट का ज्यूरिस्डिक्शन है, इसमें हम कुछ नहीं कर सकते हैं। हम सिर्फ देखभाल कर सकते हैं, पूछताछ कर सकते हैं। हमने माननीय मुख्यमंत्री जी से २९ अप्रैल, जो बीत गया है, को पत्र लिखा था कि हालत ठीक नहीं है, आप इसे देखें और सही कराएं। २९ तारीख, जो चार दिन बाद आने वाली है, उसमें तेरह राज्यों में, जहां काम पीछे है, उन सभी राज्यों के सैक्रेट्रीज़ को बुलाया है यह पूछने के लिए कि उनकी क्या कठिनाइयां हैं। माननीय सदस्य जो चिंता व्यक्त कर रहे हैं, हम उन सभी कठिनाइयों को देखेंगे कि काम क्यों पीछे है, राज्य सरकार की क्या कठिनाइयां हैं क्योंकि राज्य सरकार की भी कठिनाइयां होती हैं। हम उन्हें बुलाकर जानकारी लेंगे कि उनकी क्या कठिनाइयां हैं। हमारी तरफ से उन्हें पूरा सहयोग मिल रहा है ताकि जनता का काम हो, सड़कों का निर्माण हो और बढि़या तरीके से हो। हम पूरी तरह से सहयोग करने के लिए तैयार हैं। हम सब जगह लिखा-पढ़ी करके, उनको बुलाकर उनसे बात करके देखते हैं कि यह सब कैसे होगा।
माननीय सदस्य ने जो दूसरा सवाल दो तीन जिलों के बारे में उठाया है – चमौली में दो सड़कें हैं कुनार बैण्ड से घेस और देवरखाल उड्डा माण्डा से पाटियूं चौपड़ा। इन दो सड़कों के संबंध में जिला परिषद् और स्टेट ने भी अनुशंसा की है और हमारे यहां एम्पावरमेंट कमेटी को देखने के लिए कहा है कि वहां एक हजार की आबादी नहीं है इसलिए इसे रोक रखा है। आपने हमारा ध्यान आकर्षित किया है इसलिए मैंने अपनी तरफ से जानकारी ली है। जो अन्य दो सड़कें हैं – जिला रुद्रप्रयाग से जिला पौड़ी गढ़वाल, इन दोनों के संबंध में न जिला परिषद् ने लिखा है और न राज्य सरकार ने लिखा है। माननीय सदस्य से हम अपेक्षा करते हैं क …(व्यवधान)
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूडी : वह इसलिए इसमें नहीं लिखा गया क्योंकि जगह बदल गई है, राजनीति चल रही है…( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : उसमें कोई भी राजनीति नहीं है। गाईडलाईन में स्पष्ट लिखा है कि कोई भी माननीय सदस्य सड़कों की अनुशंसा जिला परिषद् को देंगे और वहां से, स्टेट के मार्फत हमारे यहां आएगा और यदि जिला परिषद् उस सड़क को स्वीकार नहीं करता है तो उनको बताना पड़ेगा कि उन्होंने माननीय सदस्य की अनुशंसाओं की कद्र क्यों नहीं की। यह स्पष्ट गाईडलाईन में है इसलिए मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य खंडूरी जी और अन्य माननीय सदस्यों को जानकारी देना चाहता हूं कि जिला परिषद् में जो भी लोग सड़क की अनुशंसा करना चाहें, वह करें। अगर जिला परिषद् उसे नहीं मानेगा तो उनको बताना पड़ेगा कि किस कारण से माननीय सदस्य की अनुशंसा की कद्र नहीं हुई। हम चाहते हैं कि माननीय सदस्य की अनुशंसाओं की कद्र हो और राज्य सरकार भी उसका आदर करे। हम भी उनका आदर करेंगे इसमें माननीय सदस्यों की उपेक्षा का कोई सवाल नहीं है। दो सड़कों के संबंघ में उन्होंने औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं, दो सड़कों के लिए जिला परिषद् और राज्य सरकार से अनुशंसा कराकर हमें भिजवाएं, हम उस पर विचार करेंगे।
श्री बची सिंह जी ने सवाल उठाया है क…( व्यवधान)
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूडी : आधा किलोमीटर के बारे में बताइए।…( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : हम इस पर खुल कर विचार करेंगे। इसे आप भिजवाइए।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You will consider all their suggestions.
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : उस सुझाव को भी देखेंगे कि कैसे कठिनाइयों का समाधान किया जा सकता है और उसे किया जाएगा[p6] । श्री बची सिंह रावत ने सवाल उठाया है कि उनका क्षेत्र पहाड़ी एरिया है। आप जानते हैं कि पहाड़ी एरिया में सड़क बनाना बड़ा मुश्किल काम है। उसके लिए सारा सामान ऊपर ले जाना पड़ता है। लोग कहते हैं कि वहां की एजेन्सी का एक हिस्सा भाग गया, वहां इस तरह की तमाम कठिनाइयां सामने आती हैं और पैसा होते हुए भी काम नहीं हो पाता है। लेकिन सरकार की योजना के तहत समतल जगह में एक हजार की आबादी को और पहाड़ी एरिया में पांच सौ की आबादी को चार वर्ष के अंदर सड़क से जोड़ा जायेगा। हम बताना चाहते हैं कि उसमें भी पैसे की कमी नहीं होने दी जायेगी। भारत निर्माण की जो महत्वाकांक्षी योजना है, उसमें भी इसे शामिल किया गया है। इनके समय में २३०० से २४०० करोड़ रुपये का बजट था, जिसे इस साल बढ़ाकर ४२०० करोड़ रुपये का बजट उपलब्ध किया गया है। इनका जो उत्तरांचल का हिस्सा ६० करोड़ था…( व्यवधान) हमने इनका हिस्सा बढ़ाकर ९५ करोड़ रुपये किया है। यदि पैसे की और कमी होगी तो हम और पैसा देंगे।…( व्यवधान)
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूडी : वह सब पैसा आपके पास पड़ा हुआ है।
अध्यक्ष महोदय : आप ऐसा मत कीजिए, आप तो बहुत डसिप्लिन्ड सदस्य हैं।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : यहां से वहां राय करके, राज्यों से परामर्श तथा आपसी सहयोग करके, माननीय सदस्यों की सहायता लेकर तथा सब जानकारी प्राप्त करके हम देखेंगे कि जो पैसा वहां खर्च हो, वह सही ढंग से खर्च हो तथा जनता की महत्वकांक्षाएं पूरी हों। माननीय सदस्य अपने क्षेत्र की जनता को जो सहूलियत देना चाहते हैं, उसमें भी हम इनका सहयोग कर सकते हैं।
अध्यक्ष महोदय : यह क्या हो रहा है। Nothing will be on record. Without my permission, nobody can speak.
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12.42 hrs.