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Introduction Of The Freedom Of Religion (Removal Of Restrictions) … on 28 July, 2000

Lok Sabha Debates
Introduction Of The Freedom Of Religion (Removal Of Restrictions) … on 28 July, 2000

Title: Introduction of the Freedom of Religion (Removal of Restrictions) Bill, 2000.

15.42 hrs.

SHRI G.M. BANATWALLA (PONNANI): I beg to move for leave to introduce a Bill to provide for removal of undue restrictions on freedom of religion.

MR. CHAIRMAN : Motion moved:

“That leave be granted to introduce a Bill to provide for removal of undue restrictions on freedom of religion “.

योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर) : सभापति महोदय, मैं इस विधेयक का विरोध करता हूं। यह विधेयक जिन दो अधनियमों का निरसन करने से संबंधित है, वह संविधान की मूल भावना के बिल्कुल विपरीत है। संविधान के अनुच्छेद २६ में साफ तौर पर लिखा है कि “लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य के अधीन रहते हुए प्रत्येक धार्मिक सम्प्रदाय या उसके किसी अनुभाग को धार्मिक और पूर्त प्रयोजनों के लिए संस्थाओं की स्थापना और पोषण का अधिकार है।”

माननीय सदस्य ने इस विधेयक को यहां इंट्रोडयूस करना चाहा। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि बहुत से ऐसे उदाहरण आए जहां दो राज्यों में ही नहीं बल्कि तीन राज्यों में यह विधेयक बना। राजस्थान में १९५४ में, मध्य प्रदेश में १९८४ में और पश्चिम बंगाल में १९८५ में यह अधनियम बना था। इसके पीछे कारण महत्वपूर्ण हैं। मुझ जैसा व्यक्ति जो सन्यासी हो और ऐसे विधेयक का विरोध कर रहा हो तो सब जगह इसका विरोध होना चाहिए। निश्चित रूप से यह बात इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है कि बहुत सी जगहों पर धार्मिक स्थलों का दुरुपयोग हुआ, उनकी सम्पत्ति का दुरुपयोग हुआ जिसे रोका जाना चाहिए। अभी उत्तर प्रदेश में इस प्रकार का एक अधनियम विधान मंडल से पास करके भेजा गया लेकिन कुछ गलतफहमी फैलाई गई। यह अधनियम केवल एक सम्प्रदाय विशेष के लिए नहीं है यानी भारत में रहने वाले किसी भी धर्म, सम्प्रदाय या किसी भी पूजा पद्धति को मानने वाले व्यक्ति पर यह बराबर लागू होगा। इस विधेयक से एक वर्ग विशेष को क्यों आपत्ति हो रही है? ऐसे बहुत से उदाहरण हैं जब सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर अनियंत्रित निर्माण और उपयोग के कारण कानून और व्यवस्था की स्थिति पैदा हुई। जो कानून राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में बने हैं, उसके पीछे कोई न कोई कारण रहे हैं। वधि में विद्यमान कानून के अन्तर्गत उन गतवधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए कोई इस प्रकार का कानून नहीं है, इसलिए उन राज्यों ने ऐसे कानून बनाए। जिस प्रकार से मध्य प्रदेश. राजस्थान और पश्चिम बंगाल ने कानून बनाए, उसी प्रकार अन्य राज्यों को भी ऐसे कानून बनाने चाहिए।

बहुत से क्षेत्रों में हबीब बैंक द्वारा मदरसों के निर्माण के लिए पैसा दिया जा रहा है। खास तौर से भारत नेपाल सीमा के आसपास के क्षेत्रों में दिया जा रहा है। इन मदरसों का काम इस्लामी तालीम देना है लेकिन वास्तविकता यह नहीं है। वस्तुत: मदरसे इस्लामी आतंकियों के संरक्षण, प्रशिक्षण के अड्डे हैं। अनेक मदरसों में आतंकवादी बनाने के कारखाने चल रहे हैं। वहां लश्कर-ए-तोइबा, हरकत-उल अंसार, अल वर्क तंजीम. तंजीम-उल-जेहाद, जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे खूंखार आतंकवादी पैदा हो रहे हैं। वहां इन संगठनों के सदस्यों को प्रशक्षित किया जाता है।

* *Published in the Gazette of India Extraordinary,Part-II,Section 2 dt.28.7.2000

सभापति महोदय, मैं भारत-नेपाल सीमा से लगे कुछ क्षेत्रों के बारे में बताना चाहता हूं। पिछले दो वर्षों में जिस प्रकार से अनियंत्रित निर्माण हुये हैं और जिस प्रकार से उन धार्मिक स्थलों का दुरुपयोग हुआ है, उससे पता चलता है कि नेपाल सीमा से लगे जनपदों में १२१ नये मदरसे बने हैं और १४६ नई मस्जिदें बनी हैं। मेरे संसदीय क्षेत्र से लगे महाराजगंज जनपद में २४ नये मदरसे, ३२ नई मस्जिदें बनी हैं. सिद्धार्थनगर जनपद में २२ नये मदरसे, २६ नई मस्जिदें, बलरामपुर में २५ नये मदरसे और २७ नई मस्जिदें, बहराइच में २६ नये मदरसे और २२ नई मस्जिदें, और लखीमपुर में १७ नये मदरसे और १० नई मस्जिदें बनी हैं। इसी प्रकार से अन्य सीमवर्ती क्षेत्रों में इस प्रकार की स्थिति पैदा हुई है। माननीय सदस्य श्री बनातवाला ने जो विधेयक यहां पेश किया है, मैं इसलिये पुरजोर विरोध करता हूं क्योंकि यह केवल एक धर्म सम्प्रदाय के लिये नहीं बल्कि इस देश में रहने वाले हर व्यक्ति के लिये हर सम्प्रदाय पर बराबर लागू होता है जबकि इस विधेयक से ईसाई, सिक्ख और हिन्दू सम्प्रदाय को कोई आपत्ति नहीं है तो केवल किसी एक वर्ग विशेष को इस पर आपत्ति निश्चित रूप से आश्चर्यजनक है। जिस प्रकार से धार्मिक स्थलों का दुरुपयोग हो रहा है, ऐसी स्थिति में इस विधेयक का पुरजोर विरोध करता हूं।

श्री जी.एम. बनातवाला (पोन्नानी): SÉäªÉ®àÉèxÉ ºÉÉc¤É, àÉé <VVÉiÉàÉÉ¤É âóBÉDxÉ BÉEÉ AciÉ®ÉàÉ BÉE®iÉÉ cÚÆ* ¤É½ÉÒ <VVÉiÉ BÉE®iÉÉ cÚÆ* ãÉäÉÊBÉExÉ àÉÖZÉä +É{ÉEºÉÉäºÉ cè ÉÊBÉE ´Éä ¶ÉɪÉn ÉʤÉãÉ BÉEÉä ºÉàÉZÉ xÉcÉÓ {ÉɪÉä +ÉÉè® VÉÉä BÉÖEU £ÉÉÒ BÉEcxÉÉ SÉÉciÉä lÉä , ºÉÉ®É àɺÉÉãÉÉ BÉEcÉÆ BÉEcÉÆ ºÉä ãÉÉBÉE® <vÉ® bÉãÉ ÉÊnªÉÉ MɪÉÉ cè ÉÊVɺÉBÉEÉ <ºÉ ÉʤÉãÉ ºÉä nÚ®-nÚ® iÉBÉE BÉEÉä<Ç iÉÉããÉÖBÉE xÉcÉÓ cè* ªÉcÉÆ iÉÉä ºÉÉÒvÉÉÒ-ºÉÉÒvÉÉÒ ¤ÉÉiÉ cè +ÉÉè® +ÉÉÉÌ]BÉEãÉ 25 àÉWÉc¤ÉÉÒ +ÉÉVÉÉnÉÒ BÉEä BÉÖEU cBÉÚEBÉE BÉEɪÉàÉ BÉE®iÉÉ cè* <ºÉBÉEä ºÉÉlÉ BÉEÉÊàɪÉÉå BÉEÉÒ BÉEÉä<Ç ¤ÉÉiÉ {ÉènÉ xÉcÉÓ cÉäiÉÉÒ* ªÉä ÉÊVɵÉE BÉE® ®cä lÉä ÉÊBÉE àÉWÉc¤É BÉEÉÒ iɤÉnÉÒãÉÉÒ, VÉ¥É- {ÉEÉäºÉÇ- ªÉÉ ãÉÉãÉSÉ-AãªÉÉä®àÉå]- ºÉä àÉÖkÉÉÉÊãÉBÉE cè VɤÉÉÊBÉE àÉä®ä ÉʤÉãÉ BÉEÉ <ºÉºÉä BÉEÉä<Ç iÉÉããÉÖBÉE xÉcÉÓ cè* VÉcÉÆ iÉBÉE {ÉEÉäºÉÇ BÉEÉ iÉÉããÉÖBÉE cè ÉÊBÉE +ÉMÉ® {ÉEÉäºÉÇ ºÉä ªÉÉ ãÉÉãÉSÉ ºÉä àÉVÉc¤É BÉEÉÒ iɤÉnÉÒãÉÉÒ cÉä ®cÉÒ cè iÉÉä =ºÉBÉEä ÉÊãɪÉä càÉÉ®ä {ÉÉºÉ <ÆÉÊbªÉxÉ {ÉäxÉãÉ BÉEÉäb àÉÉèVÉÚn cè ÉÊVɺÉBÉEä +ÉÆn® càÉå VÉÉä BÉEɪÉÇ´ÉÉcÉÒ BÉE®xÉÉÒ cè, ´Éc BÉEÉÒ VÉÉ ºÉBÉEiÉÉÒ cè* =ºÉºÉä àÉä®ä ÉʤÉãÉ BÉEÉ BÉEÉä<Ç iÉÉããÉÖBÉE xÉcÉÓ cè* ªÉc ÉʤÉãÉ àÉVÉc¤ÉÉÒ +ÉÉVÉÉnÉÒ, =ºÉBÉEÉÒ iɤÉãÉÉÒMÉ – |ÉÉä{ÉÉäMÉä¶ÉxÉ +ÉÉì{ÉE ÉÊ®ãÉÉÒVÉxÉ – +É¤É =ºÉBÉEä BÉÖEU AäºÉä BÉEÉxÉÚxÉ cé VÉÉä ÉÊ®ãÉÉÒVÉxÉ |ÉÉä{ÉÉäMÉä¶ÉxÉ BÉE®xÉä àÉå +Éɽä +ÉÉiÉä cé* +ÉMÉ® BÉEÉä<Ç JÉÖnÉ BÉEÉ JÉÉè{ÉE ÉÊnJÉÉiÉÉ cè iÉÉä BÉEcÉ VÉÉiÉÉ cè ÉÊBÉE ªÉc {ÉEÉäºÉÇ cè* +ÉMÉ® BÉEÉä<Ç VÉxxÉiÉ BÉEÉÒ ¤ÉÉiÉ BÉE®iÉÉ cè iÉÉä =ºÉä BÉEcxÉÉ ÉÊBÉE ªÉc ãÉÉãÉSÉ cè, ªÉä BÉEÉä<Ç +ÉVÉÉÒ¤É ºÉä BÉE´ÉÉxÉÉÒxÉ cé* VÉcÉÆ iÉBÉE {ÉEÉäºÉÇ ªÉÉ AãªÉÉä®àÉå] BÉEÉ ºÉ´ÉÉãÉ cè, =ºÉBÉEä ÉÊãɪÉä +ÉÉ<Ç.{ÉÉÒ.ºÉÉÒ àÉÉèVÉÚn cè* +ÉÉxÉ®ä¤ÉãÉ àÉèà¤É® xÉä VÉÉä BÉÖEU BÉEcÉ cè, ´Éä =ºÉàÉå ºÉàÉÉ ºÉBÉEiÉÉÒ cé ãÉäÉÊBÉExÉ àÉä®ä ÉʤÉãÉ ºÉä =ºÉBÉEÉ BÉEÉä<Ç iÉÉããÉÖBÉE xÉcÉÓ cè* ÉÊãÉcÉVÉÉ àÉé +ÉÉxÉ®ä¤ÉãÉ àÉèà¤É® ºÉä BÉEcÚÆMÉÉ ÉÊBÉE ´Éä MÉãÉiÉ{ÉEcàÉÉÒ +ÉÉè® xÉɺÉàÉZÉÉÒ àÉå BÉÖEU ¤ÉÉiÉå ªÉcÉÆ {É® ãÉɪÉä cé*

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बाकी तमाम बातें इन्होंने कहीं कि कुछ रुपया बाहर से आ रहा है और वह लालच बगैरह देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, आप कार्रवाई करो इंडियन पीनल कोड और तमाम कानून मौजूद हैं, जहां-जहां चाहे कार्रवाई करो, कोई उसे रोकता नहीं है। ख्वाह-मख्वाह उसे लेकर इस बिल के साथ जोड़ देना मुनासिब नहीं है, गलतफहमी पर है। लिहाजा मैं ऑनरेबल मैम्बर और इस ईवान से इस बात की गुजारिश करूंगा कि इस बिल को पेश करने की इजाजत दी जाए।

*m05

MR. CHAIRMAN (SHRI P.H. PANDIYAN): I have to inform the House that the Chair does not decide whether a Bill is constitutionally within the legislative competence of the House or not. The House also does not take a decision on specific question of vires of a Bill. The Chair also does not decide whether a Bill is ultra vires of the Constitution or not.

In the circumstances, I put the question before the House.

The question is:

“That leave be granted to introduce a Bill to provide for removal of undue restrictions on freedom of religion.”

The motion was adopted.

SHRI G.M. BANATWALLA : I introduce the Bill.

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