Title: Need to tackle the Y2K computer problem more effectively before the deadline (i.e. 31st December, 1999).
श्री नारायण दत्त तिवारी (नैनीताल) : अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी आज्ञा से एक विषय, जो राष्ट्र के हित और आर्िथक व्यवस्था के संबंध में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, की ओर आपका ध्यान आकर्िषत करना चाहता हूं। नई सदी और सहस्राब्िद के आगमन को तेरह दिन बाकी रह गए हैं। कम्प्यूटर जगत की वाई.टू.के. की समस्या सारे संसार में है। हमारे देश में भी पिछले वषर्ों में यह बहुत चर्िचत रही है। इसके बारे में तमाम जानकारियां विभागों द्वारा दी गई हैं। लेकिन जो हो रहा है, उससे लगता है कि इस महत्वपूर्ण विषय के बारे में वर्तमान शासन उतना जागरूक नहीं है जितना होना चाहिए। हाल ही में प्रधानमंत्री जी ने देश के नाम विज्ञापन द्वारा जो एक अपील जारी की, वह मेरे पास है। उसकी घोषणा सदन में होनी चाहिए थी । मुझे दुख है कि प्रधानमंत्री जी की इतनी महत्वपूर्ण अपील विज्ञापन द्वारा जारी की गई संसद द्वारा नहीं । उसमें लिखा है -“Fellow Indians,
It is time to unite against a common enemy, the Y2K bug. It is much more than a computer and microchip problem. It can affect our business, our industry and the essential services we depend in our daily life. Remember, this is one deadline we cannot afford to miss.” यह डैडलाइन ३१ दिसम्बर, १९९९ और उसके बाद की तथियां है। शासन द्वारा इस विषय पर बयान आ रहे हैं, पर इस सदन में आज तक राष्ट्र के आर्िथक भविष्य के ऐसे अत्यन्त महत्वपूर्ण विशद के संबंध में अभी तक कोई विषद बयान, कोई टिप्पणी या विवाद प्रस्तुत नहीं हुआ। यह बड़े दुख और आश्चर्य का विषय है। श्रीमन्, आप देखेंगे कि इस बारे में सरकार ने बहुत कमेटियां बनाई। ठHigh-Level Empowered Action Force – Impact of Year 2000 Problem” इस विषय को लेकर प्लानिंग कमीशन के श्री मौंटैक सिंह आहलूवालिया के नेत्ृात्व में एक कमेटी बनाई गई।… (व्यवधान)
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : They have appointed a Sub-Committee.
SHRI NARAYAN DATT TIWARI : Perhaps they might announce this today. इस कमीशन ने दो महत्वपूर्ण सिफारिशें की – पहली कि वाई.टू.के. के बारे में एक कानून बनाना चाहिए। देशभर में इतने कम्प्यूटर हैं, इतना विस्तार हो रहा है, प्राईवेट, व्यकितगत, कम्पनियों से लेकर बैंकिंग आदि ग्यारह सैकटर जो हमारे जीवन से संबंधित हैं, उन पर प्रभाव पड़ने वाला है। फाईनैंस और बैंकिंग, नॉन-बैंकिंग फाईनैंस कम्पनी, म्यूचुअल फंड, इंश्योरैंस, बिजली, पावर, सविल एविएशन, रेलवे बोर्ड, स्पेस, डिफैंस, पैट्रोलियम, कम्युनिकेशन, ये ग्यारह महत्वपूर्ण सैकटर हैं जो इससे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, हैल्थ और दूसरे सैकटर तो हैं ही। उनके बारे में अभी तक कोई भी अलग-अलग जानकारी नहीं दी गई है। इस बारे में मुख्य मंत्रियों की कोई मीटिंग बुलानी चाहिए थी। मुझे जानकारी मिली है कि प्रधानमंत्री जी चीफ मनिस्टर्स को चिट्ठी लिखने वाले थे। वह चिट्ठी लिखी गई या नहीं। शायद ही दो-चार मुख्य मंत्री अपने से कुछ कर रहे हों। अनेक मुख्यमंत्रियों ने इस सम्बन्ध में कंट्रोल रूम तक स्थापित नहीं किये हैं। राज्य सरकारों और केन्द्रीय सरकार के बीच जो बिजली के मामले में आन्तरिक सम्बन्ध हैं, वह आप जानते हैं और सदन जानता है। अब इस सम्बन्ध में देखें, बिजली सैकटर को केवल लें तो हमारे देश में बिजली में ३१७०८ मैगावाट पावर कैपेसिटी डिजीटल कण्ट्रोल पर चल रही है। अगर कहीं भी किसी भी राज्य में वह डिजीटल कण्ट्रोल का Y2K कारणों से नई सदी में फेल कर गया तो कितना बड़ा संकट देश के सामने होगा, जनता के सामने होगा, उद्योग, व्यापार और दैनिक जीवन में हमारे सामने होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है। इसके साथ ही साथ हमारी कोई अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इस सम्बन्ध में ढंग से बातचीत हुई, यह स्पष्ट नहीं है दुनिया का विश्वास हमारे ऊपर कम हो गया है। मैंने दो रिपोर्टस देखी हैं, जिनमें एक तो स्िवस बैंक, के “क़ेडिट स्िवस” ने एक सर्वे किया है, उसके अनुसार भारत को2K प्रिपेयरनैस में, जिसके बारे में प्रधान मंत्री ने इतनी मार्िमक अपील की है, उसमें भारत को Y2K अवेयरनैस के बारे में आठवां स्थान दिया है। दूसरा सर्वे इस संसार में गार्टनर ग्रुप की ओर से हुआ है और इसमें हिन्दुस्तान में फेलियर रेट ५० परसेंट रखी है कि ५० परसेंट हमारी फेलियर की संभावनाएं हैं, उसने सम्भावना आधी-आधी रखी है और हमें अर्जेण्टीना, कोलम्िबया, इजिप्ट और वेनेजुएला की टककर में रखा है कि इतनी कम हमारी तैयारी है। इस बारे में सरकार को सदन को विश्वास दिलाना चाहिए। इस पर एक और वर्िकंग ग्रुप ने सिफारिश की थी कि पहली जनवरी सन् २००० के आसपास बैंकों में छुट्टियां होनी चाहिए और पावर स्टेशंस को भी विशेष रूप से प्रबन्ध करने चाहिए। मेरे पास तमाम आंकड़े हैं, पूरी जानकारी है, जो अब तक शासन ने कहा है, इस संबंध में, लेकिन मैं समझता हूं कि यह बिल्कुल अपर्याप्त है। यह इस शासन की असफलता का प्रमाण होगा, यदि वह इस सम्बन्ध में जो अब एक क़ाइसिस कण्ट्रोल के हिसाब से १३ दिन बच गये हैं, उनके कार्य पूरा नहीं करती एक केबिनेट मोनेटरिंग सैल हो, मंत्रिमंडल उसका गठन करे, इसकी हमें बहुत आवश्यकता है।”>
श्री प्रमोद महाजन : अध्यक्ष जी, मैं नारायण दत्त जी का बहुत आभारी हूं कि इस महत्वपूर्ण विषय को उन्होंने यहां पर उठाया। अगर आपकी अनुमति हो तो भोजनावकाश के बाद सरकार की ओर से Y2Kसम्बन्धी कया तैयारियां हुई हैं, इसके बारे में हम वकतव्य देने के लिए तैयार हैं। लेकिन इस क्षण मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि Y2Kके लिए हिन्दुस्तान सरकार ने और जनता ने पूरी तैयारियां की हैं। जिस प्रकार की नारायण दत्त तिवारी जी की पैनिक फैलाने वाली आशंका है, वैसी कोई स्िथति नहीं है।अध्यक्ष महोदय : डेढ़ घंटे बाद स्टेटमेंट हो जाएगा।
श्री प्रमोद महाजन : डेढ़ घंटे में भी प्रैस में बहुत सी बातें जा सकती हैं। इसलिए ऐसी कोई स्िथति नहीं है।We have complied with everything about Y2K. And we are confident in dealing with this.