Title : Alleged payment of salaries in the name of fake employees causing huge losses to Municipal Corporation of Delhi.
श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज): सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं। मैं आपके माध्यम से एक अत्यंत महत्वपूर्ण समस्या की तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं। देश की राजधानी दिल्ली में स्थित जो एमसीडी कार्यालय है, वहां पर 22853 कर्मचारी बिना काम किए हुए सैलरी ले रहे हैं, जिससे सालाना 204 करोड़ रुपया गवर्नमेंट एक्सचेकर पर पड़ रहा है।
महोदय, इस बात की स्वीकृति खुद, एम.सी.डी. कमिश्नर श्री के. एस. मेहरा ने अगस्त मास में की थी। जब उन्होंने एम.सी.डी. में अटेंडेंस के लिए बायोमीट्रिक सिस्टम को लागू किया, तो उस जांच में यह बात उत्पन्न हुई कि लगभग 22,853 ऐसे लोग हैं, जो बरसों से काम कर रहे हैं, लेकिन वे एम.सी.डी. के कार्यालय या फील्ड में उपस्थित नहीं हैं। इसके बावजूद उन्हें बिना काम किए तनख्वाह मिल रही है। उन्हें चैक से सैलरी मिल रही है। मैं समझता हूं कि इससे गम्भीर बात और कोई नहीं हो सकती है कि ऐसे लोग जिन्हें गवर्नमेंट के एक्सचैकर से सैलरी मिल रही हो और वे अपने दायित्व का निष्पादन न करें तथा उन्हें अपने कर्तव्य का बोध न हो। मैं निश्चितरूप से चाहूंगा कि केन्द्र सरकार एम.सी.डी. को इस बात के लिए निर्देशित करे कि उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाए और यह पता लगाया जाए कि किन वर्षों में ऐसे लोगों की नियुक्तियां हुई; ये अवैध नियुक्तियां कैसे हुईं, जो व्यक्ति वास्तविक रूप से इन पदों पर कार्यरत नहीं हैं, लेकिन उनके नामों से तनख्वाहें कैसे निकलती रही हैं? यह निश्चित रूप से पैसे का दुरुपयोग है। इसलिए मैं समझता हूं कि यह अत्यन्त गम्भीर एवं महत्वपूर्ण प्रश्न है। इस बारे में पूरी जांच होनी चाहिए।