Posted On by &filed under Judgements.


Lok Sabha Debates
Discussion On The Demands For Grants Nos. 80 To 82 Under The Control Of … on 23 April, 2008


>

 

Title: Discussion on the Demands for Grants Nos. 80 to 82 under the  Control of the Ministry of Rural Development for 2008-09.

 

 श्री काशीराम राणा (सूरत)  : अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसलिए बहुत-बहुत धन्यवाद। देश के गांवों के गरीब और बेरोजगार लोगों को रोजगार देना, गांवों में पीने का पानी पहुंचाना और बहुत सारा डेवलपमेंट वर्क रूरल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री की तरफ से हो सकता है। जो बजट यहां पेश किया गया उसमें बहुत अच्छी राशि मिनिस्ट्री को दी गई है, करीब 42 हजार 400 करोड़ की राशि ग्रामीण विकास मंत्रालय को दी गई है। इस राशि का सही उपयोग हो, जरूरतमंद लोगों को जिसकी जरूरत है, चाहे पीने का पानी हो, चाहे रोजगार हो, वह मिले, इससे बहुत अच्छी सेवा हो सकती है, भारत का अच्छा निर्माण हो सकता है। आजादी के 61 साल के बाद आज जो गरीब पीने के पानी के लिए तरसते हैं और रोजगार के बिना मर जाते हैं, उनको बचाने का अच्छा मौका मिनिस्ट्री के पास है। मैं इसकी अलग-अलग योजनाओं के विस्तार में जाना नहीं चाहता हूं क्योंकि मेरे माननीय सदस्य इस बारे में बोलेंगे।

          मैं आपका ध्यान राष्ट्रीय रोजगार योजना की तरफ आकृष्ट करना चाहता हूं। ये ऐसी योजना है जिसके जरिए गांव के लोगों तक रोजगार पहुंचाने का एक बहुत अच्छा काम हो सकता है। इस बार बजट में 16,000 करोड़ रुपया सिर्फ एनआरईजीपी के लिए एलोकेट किया गया है। मैं मानता हूं कि बेरोजगारों को रोजगार देने की जो गारंटी सरकार ने स्वीकार की है, अगर इसे अच्छी तरह से फुलफिल करना है तो अगर इसके लिए ज्यादा पैसा देना पड़े तो देने में हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। मैं माननीय मंत्री महोदय की कद्र करता हूं कि उनके दिल में गरीबों और गांवों के लिए अच्छी भावनाएं हैं, मैं इसकी सराहना भी करता हूं। उन्होंने समय-समय पर एमपीज़ को प्रपत्र भी भेजे हैं कि आप उस पर निगाह रखें ताकि राष्ट्रीय रोजगार योजना का अच्छी तरह से अमलीकरण हो सके। लेकिन मुझे माफ कीजिए यह अच्छी योजना होते हुए जिस प्रकार से यह योजना चल रही है उसका जो लाभ मिलना चाहिए उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। यह ठीक किया गया है कि पहले 200 जिले लिए फिर 330 जिले बनाए और 1 अप्रैल से पूरे देश को कवर कर लिया है। यह अच्छा है कि देश के सभी स्टेट्स के गांवों में बसे बेरोजगारों को रोजगार मिल जाए और इसके साथ गांवों का विकास भी हो, जो वहां की छोटी-छोटी योजनाएं हैं, उनके अच्छी तरह से बन पाने की क्षमता इस प्रोग्राम में है। लेकिन इस योजना का लाभ जिस प्रकार से होना चाहिए वह नहीं हो रहा है। यह मैं नहीं कहता, यह रिपोर्ट है और इसमें कहा गया है कि इस योजना में भ्रष्टाचार बहुत ज्यादा है। उन्होंने हर स्टेट में जो रिपोर्ट दी है, अगर उस रिपोर्ट को देखा जाए तो इसका सही लाभ बेरोजगारों को नहीं मिल पा रहा है। आप जानते हैं हाउसहोल्ड रोजगार देने की नेशनल एवरेज 2006-07 में 43 दिन थी, 2007-08 में कम होकर 38 दिन हो गए यानी एक साल में पांच दिन की कमी हुई, अब 2008-09 में क्या होगा जब चर्चा होगी तब पता चलेगा।[r8]  लेकिन जिस प्रकार से एवरेज डेज में कमी होती जाती है, इसके बारे में सरकार को सावधानी रखनी चाहिए। इसलिए एवरेज डेज  कैसे बढ़े, इसके बारे में सरकार को ध्यान जरूर रखना चाहिए। जैसा मैंने कहा कि इस देश में ऐसे-ऐसे राज्य हैं, जहां बहुत ज्यादा बेरोजगारी है, उनमें बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, तमिलनाडु आदि प्रमुख हैं। ऐसे राज्यों में बहुत अधिक बेरोजगारी होने के कारण वहां से दूसरे राज्यों में रोजगार पाने के लिए माइग्रेशन होता है। लेकिन फिर भी वहां लाखों-करोड़ों की संख्या में बेरोजगार हैं। इसका कारण यह है कि देश में रोजगार की कमी है और खासकर जो बैकवर्ड स्टेट्स हैं, जहां रोजगार चाहिए, वहां हमारी योजना का कैसा इम्पैक्ट हैं, उसके बारे में मैं बता रहा था। देश में जो गरीब या पिछड़े हुए राज्यो की श्रेणी में आने वाले जो राज्य हैं, उनमें बिहार का उदाहरण ले लीजिए, वहां एवरेज वेज केवल 22 है। उत्तर प्रदेश में 28 है, झारखंड 47 है, मध्य प्रदेश 58 है। इस तरह से जो गरीब, बैकवर्ड या अविकसित राज्य की कैटेगरी में आने राज्य हैं, जो अविकसित हैं। वहां एवरेज डेज की संख्या ज्यादा होनी चाहिए, लेकिन वहां यह कम है। इसीलिए एवरेज डेज की जहां जरूरत है, वहां उसे रोजगार नहीं मिल पाता है। यह बहुत गम्भीर समस्या है। यह कैसे बढ़े, इसके बारे में हमें सोचना चाहिए और रोजगार का दायरा और भी बढ़ाना चाहिए।

          अध्यक्ष महोदय, मैं इस बात पर भी जोर देना चाहूंगा कि यदि इसमें बढ़ते हुए करप्शन को नहीं रोका गया तो आखिर यह योजना फेल हो जायेगी। जैसे कैग ने रिपोर्ट दी है कि हर एक स्टेट में अलग-अलग तरह से किस प्रकार करप्शन की जाती है। वहां कई जगहों पर मजदूरों, वर्कर्स का डुप्लिकेशन हो रहा है। किस प्रकार से अप्रूवल के बिना भी पैसा खर्च किया जा रहा है और कई ऐसे राज्य हैं, जहां आज तक कोई प्लानिंग ही नहीं हुई, जिसकी वजह से वहां काम उपलब्ध नहीं है। मैं एक-दो उदाहरण देना चाहूंगा कि कैसे-कैसे प्रोजैक्ट्स का अमलीकरण हो रहा है। जो कैग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, उसे आपने भी पढ़ा होगा, मैं उसके बारे में ज्यादा नहीं कहूंगा, चूंकि मैं सदन का ज्यादा समय नहीं लेना चाहता। मैं आपको बताता हूं कि चाहे मणिपुर हो, जहां पर लाखों रुपया, जो मजदूरों को देना चाहिए था, वह मजदूरों तक नहीं पहुंचा। आंध्र प्रदेश को भी कम्पैनसेशन मिलना चाहिए था, वहां दो लाख पांच हजार नौ सौ ग्यारह हमारे भाई-बहनें हैं, जो वहां काम करते थे, उन्हें अभी तक वह पैसा नहीं मिल पाया। हरियाणा में भी इसी तरह से फंड का डाइवर्जन हो गया। वहां ट्रैक्टर और कार्ट ओनर को मिट्टी के खनन के लिए पैसा दे दिया गया और कहीं-कहीं पर डिले पेमेन्ट होने के कारण बेरोजगार भाई-बहन रोजगार लेने के लिए नहीं आते हैं। मैं अभी अपने संसदीय क्षेत्र में नवसारी, जलालपुर, चिखली और गंडेवी खासकर इसी योजना का निरीक्षण करने के लिए गया था। सिर्फ इसी योजना को देखने के लिए मैंने दो दिन के लिए वहां का दौरा किया[b9] । सर, जैसे मैंने कहा कि एवरेज डेज जो मिलना चाहिए, वह उनको नहीं मिल पाता। [r10] जो जॉब-कार्ड हम इश्यू करते हैं, मैं एक नवसारी जिले का उदाहरण देना चाहूंगा। जॉब-कार्ड वहां पर इश्यू कर दिये गये लेकिन जॉब-कार्ड से भी 50 या 45 प्रतिशत लोगों को ही जॉब मिल पाता है। यह बात सही है कि फंड की कमी नहीं है। आप जो मांगे, फंड दे देते हैं लेकिन एडवांस प्लानिंग पूरी न होने की वजह से जितने भी लोगों को रोजगार देने की ख्वाहिश है, वह पूरी नहीं होती और इसीलिए मैंने पाया कि बहुत सारी कमियों को तुंत दूर करना चाहिए। कमी नं. एक यह है कि मैंने जो वहां काम करने वाले लोगों से पूछा कि आपको पेमेंट कब मिलती है? वे कहते है कि, हम एक वीक काम करते हैं, दूसरे वीक में वे मेजरमेंट लेने के लिए आते हैं और तीसरे वीक हमें पेमेंट मिलता है। अब जिसको खाना रोज का नहीं मिल पाता है, इसीलिए वे काम करने के लिए आते हैं। इसलिए अगर उनको डेली या दो दिन में या वीकली पेमेंट नहीं मिलेगा तो वह कैसे अपना काम करेगा, कैसे अपने परिवार को खिलाएगा, कैसे अपना पेट भरेगा जिसके लिए यह योजना बनी है? इसलिए आज काम करो और तीसरे वीक में अगर उसे पेमेंट मिलेगा तो इसके बारे में सरकार को  गंभीरता से सोचना चाहिए। पांच दिन के बाद अगर पेमेंट जाता है तो उसके हाथ में उसको पैसा मिल जाए, न कि वह बैंक एकाउंट में जाए। बैंक एकांउट में भी उतनी ही गड़बड़ है। उसे एमाउंट रखना पड़ता है, फिर पैसा उस एकाउंट में जमा रखना पड़ता है। बिना रोजगार वाला आदमी पैसा कहां से लाएगा? इसलिए हमारे सिस्टम में जब तक बदलाव नहीं आएगा, तब तक इस काम में मैं नहीं मानता कि हमारे भाई-बहन जो बेरोजगार हैं, वे इस योजना में आने के लिए तैयार हो जाएंगे।

          जो लूपहोल्स हैं, वे ये हैं कि जो बेरोजगार लोग हैं, मानिए कि जिसने 15 दिन में मजदूरी मांगी और हमने नहीं दी, ऐसे अगर मजदूर हैं या भाई-बहन हैं तो उनको हम बेरोजगारी भत्ता देते हैं। इसमें बहुत भारी गड़बड़ होती है। जो हमारे बेरोजगार भाई-बहन हैं, जिन्हें जॉब-कार्ड इश्यू किये गये हैं, जिन्होंने यह डिमांड करी थी कि मुझे मजदूरी चाहिए, उनको तो मिलती ही नहीं है। इसीलिए इसके बारे में भी यह हमने अच्छा सा निकाला है कि सबको रोजी मिले और रोजी नहीं तो एलांसेज मिले। इसके लिए भी बहुत सख्ती से उसका अमलीकरण हो, इस दिशा में आपको आगे बढ़ना पड़ेगा नहीं तो बेरोजगार के नाम से पैसे खाने वाले लोग पैसे खा जाएंगे और हम यहां बताते रहेंगे कि देखिए, कितना अच्छा हमारा काम हो रहा है।

          महोदय, मैं यह कहना चाहूंगा कि इस प्रकार से जैसे डुप्लीकेशन वर्कर्स में होता है, वैसे ही ओवर पेमेंट या डबल पेमेंट का भी बहुत बड़ा किस्सा कैग ने अपनी रिपोर्ट में दिखाया है। मैं चाहूंगा कि आप ठीक करके अगर आगे ले जाएंगे तो यह जो राष्ट्रीय रोजगार योजना है, वह सफल होगी अन्यथा वह फेल हो रही है, ऐसी आज तक की रिपोर्ट है। अखबार पढ़िए या रिपोर्ट पढ़िए या अभी जो स्टैंडिंग कमेटी ऑन फाइनेंस कमेटी की रिपोर्ट पढ़िए, इसमें प्लानिंग कमीशन ने जो डिटेल्स भेजी हैं, उसमें भी उन्होंने एवरेज डेज के बारे में कहा है और साथ-साथ यह भी कहा है कि इस योजना का इफैक्टिवली इम्पलीमेंटेशन हो। यह मिनिस्ट्री ऑप प्लानिंग का भी सवाल है।  यह ऑथेंटिक न्यूज है, ऐसा नहीं कि हम यहां सदन में वैसे ही कुछ समाचार पढ़ें और कह दें कि कैग की रिपोर्ट है। इसलिए इन सब  बातों को देखते हुए मेरा कहना है कि आज यह राष्ट्रीय रोजगार योजना ठीक तरह से नहीं चलती है। [r11] 

अध्यक्ष महोदय : काशीराम जी, आपने बहुत महत्वपूर्ण मामला उठाया है। क्या वहां पंचायत का कोई पार्टिसिपेशन है?

श्री काशीराम राणा : पंचायत का पार्टिसिपेशन तो बहुत है क्योंकि पंचायत ही सैलेक्शन करती है। आखिर यह जो काम है, इसमें काम का सैलेक्शन भी वे करते हैं, पंचायत में जाब कार्ड इश्यू करना है तो उसके लिए किसका सैलेक्शन करना है मजदूरी के लिए, वह भी पंचायत देखती है। इतना ही नहीं, इसका जो सोशल आडिट होता है, वह भी पंचायत के द्वारा होता है। यह होते हुए इसमें इतना घपला होता है और मुझे लगता है कि 16000 करोड़ रुपये की राशि एक ही योजना के पीछे जा रही है। मुझे लगता है कि जो दो साल का अनुभव है, उसको ध्यान में रखते हुए यदि इसमें सुधार नहीं किया गया तो इस साल भी 16000 करोड़ रुपये बरबाद होने वाले हैं। 

श्री मधुसूदन मिस्त्री (साबरकंठा): वे यह नहीं बता रहे हैं कि हमारे देश के अंदर गुजरात में लोएस्ट मिनिमम वेज है। That is why people are not getting enough wages. It is the lowest paid wage in the country. …( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Do not make it controversial, Mr. Mistry.

SHRI HARIN PATHAK (AHMEDABAD): He is not blaming the Government. Do not politicize it. …( व्यवधान)

श्री काशीराम राणा : महोदय, मैं उसको पोलिटिसाइज़ नहीं करता। इतना घपला जो हो रहा है, मैं उसमें नहीं जाना चाहता। …( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Do not make it controversial. He himself has said that it is an important project. How to do it better is the issue.

…( व्यवधान)

श्री काशीराम राणा : यह कांग्रेस के ही राज में जो तालाब बना था, उसको स्विमिंग पूल में कर दिया। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : इसमें पार्टी पोलिटिक्स मत लाइए। ठीक ढंग से चर्चा करें।

…( व्यवधान)

SHRI MADHUSUDAN MISTRY (SABARKANTHA): I admire him for making that statement. I am indeed very happy that he made that statement for his own Government.

 अध्यक्ष महोदय : ठीक है, आप बैठ जाइए।

श्री काशीराम राणा : मैं सुझाव देना चाहूँगा कि जो 100 दिन का रोज़गार देने की योजना है, इसमें 2007-08 में एवरेज डेज़ 38 हैं। मैं कहना चाहूंगा कि 100 दिन के रोज़गार को बढ़ाकर आपको 200 दिन का रोज़गार देना चाहिए। मानसून के दिन आप कम कर लीजिए। अगर 200 दिन का रोज़गार मिलेगा तो जहां 100 दिन के रोज़गार में 38 दिन हैं, वहीं 200 दिन का रोज़गार देना हमारे देश के गरीब और गांवों में बसने वाले बेरोज़गार लोगों के लिए बहुत ही आवश्यक है। मैं यह भी कहना चाहूंगा कि हमारा जो प्रोजैक्ट है, जो वर्क की प्लानिंग होती है, वह ऐसी होनी चाहिए कि जो गांव के डैवलपमैंट का हिस्सा हो। मैंने कई जगह देखा कि ड्रेनेज खोदी जा रही है, मिट्टी वहीं की वहीं पड़ी रहती है। वही मिट्टी मानसून में फिर से अंदर मिल जाएगी और ड्रेनेज खत्म हो जाएगी। मैं कहना चाहूंगा कि इसका स्थायी उपयोग हो ऐसी प्लानिंग करनी चाहिए। प्लानिंग एडवांस में होनी चाहिए। ऐसा नहीं कि जैसे भी ग्राम सभा या ग्राम पंचायत कर दे। उसकी मानीटरिंग भी हो और मानीटरिंग सिर्फ एडवांस प्लानिंग की नहीं, इसके बाद जो काम हुआ, उसकी भी होनी चाहिए। मैं कहना चाहूंगा कि इसमें जो गांव के एजुकेटेड लोग हैं, पूरे एजुकेटेड नहीं हों, लेकिन उनकी जो समस्या है, उसको भी देखना चाहिए। उनको इन वेजेज़ से संतोष नहीं होता है। मैं चाहूंगा कि उनके लिए अलग प्रकार से सोचा जाए जिससे उनको भी संतोष हो। इसके साथ साथ मैं यह भी कहूंगा कि आज जो सोशल आडिट हो रहा है, वह भी पंचायत ही करती है। कोई न्यूट्रल व्यक्ति या संस्था तालुका स्तर पर होनी चाहिए और एक मानीटरिंग कमेटी बनानी चाहिए जो न्यूट्रल होकर जांच करे। नहीं तो काम भी वह देगा, मीज़रमैंट भी वह लेगा और आडिट भी वही करेगा। आखिर न्याय मिलने की संभावना कम हो जाती है। इसलिए सोशल आडिट का सिस्टम ऐसा हो जाना चाहिए जिससे उसको लाभ मिले।[b12]  इसी प्रकार से जो लैंड रिसोर्सेस का मामला है, इसकी गंभीर समस्या की तरफ आपका ध्यान खींचना चाहता हूं। जैसे हमारा गुजरात 16 सौ किलोमीटर का लम्बा बिलकुल एक कोस्टल एरिया है और सारे देश का जो आधा हिस्सा है, वह करीब साढ़े पांच हजार किलोमीटर का पूरा दरियाई एरिया है। आज उनकी जो समस्या है, उसके प्रति सरकार का जितना ध्यान जाना चाहिए, उतना अभी तक नहीं गया। जितना ध्यान उन्होंने दिया है, उसके बारे में जो कुछ उपाय करने चाहिए, वे अभी तक इम्प्लीमेंटेशन में नहीं लाए हैं।

 

 

   12.56 hrs.

(Mr. Deputy Speaker in the Chair)

 

          उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी जानते होंगे कि अभी एक रिपोर्ट छपी है, हमारे कोस्टल एरिया की जो फर्टाइल लैंड है। फर्टाइल लैंड आज सेलाइन लैंड में कंवर्ट होती जा रही है, इससे कितना भारी नुकसान हो रहा है, इस बारे में आपको भी मालूम होगा। कृषि की उपज कम होती जा रही है। पीने के पानी में भी, सेलिनिटी आने की वजह से पीने लायक पानी नहीं रहा। धीरे-धीरे सेलाइन लैंड आगे बढ़ती जा रही है। इंटरनेशनल इंस्टीटय़ूशन है – ग्लोबल असेस्मेंट ऑफ सॉयल डिग्रेडेशन, इन्होंने रिपोर्ट में यह कहा है कि साऊथ एशिया में 421 लाख हैक्टेयर लाख जमीन सेलाइन लैंड हो चुकी है और भारत में आज 260 लाख हैक्टेयर जमीन सेलाइन लैंड में कंवर्ट हो चुकी है। गुजरात के बारे में भी मैं कहूंगा कि नेशनल ब्यूरो ऑफ सॉयल सर्वे एंड यूज़ प्लानिंग ने जो सर्वे किया है, उसके सर्वे के मुताबिक गुजरात की जो कुल जमीन है, इसका 27.17 परसैंट, यानी 50 लाख 80 हजार जमीन आज सेलाइन लैंड में कंवर्ट हो चुकी है। हर साल दो लाख हैक्टेयर जमीन और भी सेलाइन होती जा रही है। सरकार का ध्यान इसके प्रति नहीं गया है। हम जब कोस्टल एरिया के गांवों में जाते हैं तब वे कहते हैं कि हमारे यहां पीने का पानी नहीं मिलता है। हमे पहले मीठा पानी मिलता था और अब बिलकुल नमक जैसा पानी आ रहा है। वहां पीने का पानी भी नहीं मिलता और एक-दो हैक्टेयर जमीन में कृषि उपज से अपना जो पोषण करता था, वह भी आज बंद हो गया है। उस एरिया में बहुत खराब हालत है, सरकार को जिस प्रकाल से उस तरफ ध्यान देकर, इनकी मदद के लिए आगे बढ़ना चाहिए, उस प्रकार से वह नहीं बढ़ी है।

          उपाध्यक्ष महोदय, जब मैं मंत्री था तो हमने वहां एक पायलट प्रौजेक्ट चलाया था, जो सेलाइन लैंड हो जाती है उसे फिर से फर्टाइल लैंड करना और मीठे पानी की व्यवस्था करना, इसके लिए हमने एक पायलट प्रौजेक्ट सूरत, बल्सार और भड़ौच जिले में बनाया था। मुझे कहते हुए दुख होता है कि हमने जो पायलट प्रौजेक्ट बनाया, वह इतना सफल हुआ। वहां आज कई गांव के लोग कहते हैं कि अगर ये प्रौजेक्ट अन्य जिलों में भी गए तो इसका वहां भी अच्छा परिणाम मिल सकता है। लेकिन न जाने सरकार ने उसे क्यों बंद कर दिया? जो प्रौजेक्ट इम्प्लीमेंट था, वहां पर उसकी जो राशि देनी थी, वह भी आधी दी। इसीलिए एक अच्छा सा पायलट प्रौजेक्ट बनाया था कि जो हजारों किलोमीटर का लम्बा कोस्टल एरिया है, वहां गांवों में जो समस्या है, उसे दूर करने के लिए ऐसे किया था, मगर ऐसा हो नहीं पाया, इसका मुझे बहुत दुख है। आप इस पायलट प्रौजेक्ट को फिर से शुरू करें। इसे शुरू करने से मैं मानता हूं कि हमारी जो लाखों हैक्टेयर फर्टाइल जमीन सेलाइन लैंड में कंवर्ट हुई है। जिसकी वजह से हमारी कृषि की उपज कम होती जा रही है, आज हम एग्रीकल्चर ग्रोथ में चार परसैंट से दो परसैंट पर आ गए हैं। इसके लिए सरकार ने 1825 करोड़ रुपए अलॉट किए हैं।[s13] 

 

          उपाध्यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि यदि इस योजना का बड़े पैमाने पर अमलीकरण हो, तो इससे बहुत बड़ा लाभ आने वाले दिनों में जरूर होगा।

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please conclude now.

श्री काशीराम राणा : महोदय, अब[r14]  मैं वाटर मैनेजमेंट, जैसे स्वजलधारा योजना और रूरल वाटर सप्लाई के बारे में थोड़ा कहकर अपना वक्तव्य पूरा करूंगा। गांवों में पीने के पानी की जो समस्या आज भी मौजूद है। हम इसे दूर नहीं कर सके, इसका हमें दुख है। हरेक को इसका दुख होगा। आजादी के इतने सालों के बाद भी अगर हम दूर-दराज के गांवों में बसे अपने देशवासियों को पीने का पानी भी नहीं दे सके, तो सरकार का क्या फायदा? हम तो बार-बार कहते हैं कि ऐसी सरकार निकम्मी है। पीने का पानी प्राप्त करने का प्रत्येक ग्रामवासी का अधिकार है। यदि पीने का पानी उस तक नहीं पहुंचाया, तो मुझे लगता है कि आजादी का मतलब थोड़े लोगों के लिए होगा। इनके लिए तो आज भी वही गुलामी है, क्योंकि वे बिना पीने के पानी के जी रहे हैं। गांव में दूर-दूर से, कहीं चार किलोमीटर, कहीं आठ किलोमीटर और कहीं 10 किलोमीटर से, आज भी हमारी बहनें और माताएं पीने का पानी लाती हैं। अगर इस समस्या का निवारण नहीं किया गया और पीने का पानी उपलब्ध नहीं कराया गया, तो यह देश के लिए दुर्भाग्य की बात है। जैसे रोटी के लिए घमासान होता है वैसे ही पानी के लिए भी रायट होगा, ऐसी संभावना आज हम चारों ओर देख रहे हैं।

          महोदय, हम ए.आर.डब्ल्यू.एस.पी.  चलाते हैं। मैं जानता हूं कि इसमें क्या-क्या हो रहा है, लेकिन चाहे यह योजना हो और चाहे रूरल वाटर सप्लाई की योजना हो, इनमें यदि हम सफलता का प्रतिशत देखें, तो हमें बहुत कम है। रूरल वाटर सप्लाई स्कीम में हमने वर्ष 2007-08 में 1,55,499 हैबीटेशन लिए थे और इनमें से सिर्फ 67,285 हैबीटेशन में हमने अचीवमेंट प्राप्त किया है। हमने सिर्फ 67, 285 हैवीटेशन में पानी पहुंचाया है। इसी प्रकार से ए.आर.डब्ल्यू.एस.पी. में हमने जो एलाटमेंट की, उसे जिस प्रकार से पानी प्राप्त करने के लिए खर्च होना चाहिए था और जिन्हें यह पानी पहुंचाना चाहिए था, वह नहीं पहुंच पाया। हमारे नेता बार-बार रूरल डैवलपमेंट की बात करते हैं और कहते हैं कि सच्ची आजादी तो तभी आएगी जब गांवों में पूरी आबादी होगी। अगर गांवों की आबादी के लिए यह मिनिस्ट्री बनी है और उसके लिए हजारों करोड़ों रुपए के प्रोग्राम बने हैं, तो जब तक इनका सही परिणाम नहीं मिलता है, तब तक इस धन और इन योजनाओं का कोई अर्थ नहीं है।

          महोदय, मैंने मान्यवर मंत्री जी को जब वे यहां बैठते थे, तब बोलते हुए सुना है। वे मुझसे भी ज्यादा तेजाबी भाषा में अपनी बात रखते थे। आज यह जिम्मेदारी उनके ऊपर है कि वे इसे अच्छी तरह से निभाएं। मैं चाहूंगा कि एक-एक पैसा, फिर चाहे 16000 करोड़ रुपए हों या 42,400 करोड़ रुपए हों, आखिर उसमें इस देश के गरीब लोगों का भी हिस्सा है, वह ठीक प्रकार से खर्च हो और उसे राइट है कि उसे पानी मिले, रोजगार मिले और आवास मिले। मुझे आशा है कि इस योजना के अन्तर्गत जरूरतमंद लोगों की आवश्यकताओं को पूरा किया जाएगा। यदि ऐसा होगा, तो मैं समझूंगा कि जो पैसा दिया गया है और जिस काम के लिए दिया गया है, वह सार्थक होगा।

MR. DEPUTY-SPEAKER: Those hon. Members who wish to lay their written speeches can do so.  All such laid speeches will form part of the proceedings.

 श्रीमती प्रतिभा सिंह (मंडी)  : उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे रूरल डैवलपमेंट ऑन दि डिमांड्स फॉर ग्रांट्स 2008-09 पर बोलने का मौका दिया। मैं रूरल डैवलपमेंट डिपार्टमेंट का आभार प्रकट करना चाहती हूं जिसने आज बहुत ज्यादा डैवलपमेंट ग्रामीण क्षेत्रों में की है। अभी मेरे भाई ने कुछ आपत्तियां जताईं। [r15]  उन्होंने पीने के पानी की समस्या की बात कही, उन्होंने यह भी कहा कि यहां से जो पैसा जा रहा है, उसकी मॉनीटरिंग होनी चाहिए। मैं उन्हें बताना चाहती हूं कि सरकार के द्वारा एक मॉनीटरिंग सेल गठित किया गया है। उसके द्वारा डिस्ट्रिक्ट लेवल, ग्राम पंचायत लेवल तक सरकार की नजरें हैं। उस पर जो भी पैसा खर्च किया जा रहा है, उसकी मॉनीटरिंग की जाती है और सही समय पर सरकार को रिपोर्ट दी जाती है। इसलिए इस बात की मुझे खुशी है कि भारत सरकार के द्वारा जो स्कीमें गांव में चल रही हैं, उसकी मॉनीटरिंग ग्राम सभा और ब्लॉक लेवल तक की जाती है।

          इसके अलावा आपने पानी की कमी की बात कही, लेकिन मैं आपको बताना चाहती हूं कि मैं पहाड़ी क्षेत्र से आती हूं जहां पानी की बहुत समस्या थी। गांवों में पानी पहुंचाना दुर्लभ कार्य दिखाई देता था, लेकिन मैं यूपीए सरकार का और रघुवंश प्रसाद सिंह जी का आभार प्रकट करना चाहती हूं, जिन्होंने कार्यक्रम चलाकर गांव-गांव में पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाया है।

          माननीय सदस्य ने अपने गुजरात की कुछ समस्याओं का जिक्र यहां किया, लेकिन मैं फिर भी मंत्री जी को दुर्गम क्षेत्र की, गांव की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए जो स्कीमें चलाई हैं, चाहे वह रोजगार, पीने के पानी, प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत गांवों को जोड़ने की बात है, आपने जो कार्य किए हैं, वे बहुत ही सराहनीय हैं। इसके लिए हम आपका बहुत-बहुत आभार प्रकट करते हैं। आप जानते हैं कि गांवों में गरीबी और बेरोजगारी की समस्या पर सरकार ने क्रान्तिकारी कदम उठाए हैं। शहरों की तरफ जो लोग दौड़कर चले आते थे और समझते थे कि शहर में जाने से हमारी इस समस्या का हल होगा, आज मै समझती हूं कि शहर और गांव की दूरी को कम करने के लिए मंत्रालय ने जो कदम उठाए हैं, उससे पलायन पर रोक लगी है। अब गांव के लोग गांव में ही रहकर जीवन बसर करना चाहते हैं और खेती करना चाहते हैं। इन अच्छी योजनाओं को लागू करने के लिए मैं ग्रामीण विकास मंत्रालय को बधाई देना चाहती हूं। आप जानते हैं कि शहर और ग्रामीण क्षेत्र की खाई को कम करने के लिए इन्होंने टाइमबाउण्ड प्रोग्राम चलाए हैं। उसी तरह से बजटरी स्पोर्ट भारत सरकार की तरफ से मिला है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में शानदार काम हुए हैं।

          महोदय, नेशनल रूरल इम्पलायमेण्ट गारण्टी एक्ट ने फूड सिक्योरिटी को इन्श्योर किया है। गांवों में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो चाहते हैं कि उन्हें रोजगार मिले, उनमें बहुत हुनर है, जिसे उभारने के लिए आपने सेल्फ हेल्प ग्रुप को प्रोत्साहित किया है, उन्हें धन उपलब्ध करवाया है। इसके कारण ग्रामीण लोग अपनी बनाई हुई चीजों को मार्किट तक पहुंचा पाते हैं। मैं आपको उन्हें सहयोग देने के लिए बधाई देना चाहती हूं। आप उनके लिए समय-समय पर शहरों में फेयर लगाकर, जैसे दिल्ली हॉट और प्रगति मैदान में उनके हाथ से बनी चीजों की प्रदर्शनी के द्वारा लोगों तक पहुंचाते हैं। इसके लिए मैं सरकार का आभार व्यक्त करती हूं।

          दूसरी बात, इण्टीग्रेटिड वॉटर शेड प्रोग्राम के तहत गांव में बिना ज़मीन के रहने वाले लोगों की आवाज़ सरकार तक पहुंची है। सरकार ने इस के तहत जो कदम उठाए हैं, मैं उसके लिए मंत्रालय को बधाई देना चाहती हूं। क्योंकि हमारे गरीब लोग यह समझते थे कि उन्हें कभी जमीन मुहैया नहीं हो पाएगी, लेकिन आज सैंकड़ों लोगों को सरकार की मार्फत जमीन मिली है, जिससे वे अपनी रोज़ी-रोटी कमा सकें[r16] ।

          इसी तरह से भारत निर्माण के तहत चार सालों में सरकार ने एक लाख चौहत्तर हजार करोड़ रूपए की धनराशि देकर हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में सड़के बनाने का काम किया है, इरीगेशन का काम किया है, रूरल हाउसिंग का काम किया है, रूरल वाटर सप्लाई और बिजली पहुंचाने का काम किया है, टेलीफोन सुविधा उपलब्ध कराने का काम किया है।  इससे हर भारतीय नागरिक, खासकर जो ग्रामीण क्षेत्र में रहता है, उसे फायदा पहुंचा है।  इसके लिए भी हम भारत सरकार के बहुत आभारी हैं कि आज आपने ये सारी सुख सुविधायें हमारे ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाकर लोगों को लाभ पहुंचाया है।

          आपने रूरल डेवलपमेंट की बात कही और लोगों को रोजगार देने की बात कही। आपने कहा कि साठ साल में भी हम इसे हासिल नहीं कर पाए, परंतु मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि आज ग्रामीण क्षेत्र में सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है, उनके ज्यादा पढ़े-लिखे होने की आवश्यकता नहीं है और इसके बावजूद उनको सौ दिन का रोजगार मिल रहा है। इसके लिए हम प्रधानमंत्री जी के बहुत आभारी हैं कि इन्होंने एक बहुत बेहतरीन स्कीम चलायी है। इसमें पहले दो सौ जिले आते थे, आपने इसमें एक सौ तीस और जिलों को जोड़कर उनकी संख्या बढ़ायी है। आपने कहा है कि बाकी दो सौ पचहत्तर जिलों को भी उसमें जोड़ेंगे।  आपने पांच साल के अंदर सभी डिस्ट्रिक्ट्स को जोड़कर गांव में रोजगार देने की बात कही है।  आपने रोजगार को थ्रू एक्ट आफ पार्लियामेंट लीगल राइट दिया, इसके लिए मैं आपको बहुत-बहुत बधाई देना चाहती हूं। मैं गांव के लोगों की तरफ से आपका आभार प्रकट करती हूं कि आपने हमारे गांव के क्षेत्र के लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है।  आज वे अपनी रोजी-रोटी उसके जरिए कमा रहे हैं। उन्हीं के क्षेत्र में, जो उन्हीं के गांव का काम है, उसमें उनकी भागीदारी है, यह एक बहुत ही सराहनीय काम है। 

          महोदय, आप जानते हैं कि स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना चल रही है।  मैंने पहले भी कहा कि सेल्फ हेल्प ग्रुप्स की आपने मदद की है।  सत्ताइस हजार ऐसे सेल्फ हेल्प ग्रुप्स हैं, जिनको आपने बैंक का क्रेडिट दिलाया और गवर्नमेंट की तरफ से सब्सिडी दिलायी।  उनकी आपने मदद की। उसमें बीपीएल के लोग आते हैं, एससी एवं एसटी के लोग आते हैं और उसमें बहुत सारी महिलाएं भी लाभान्वित हुयी हैं।  इसमें पचहत्तर प्रतिशत भारत सरकार का अनुदान है और पच्चीस प्रतिशत राज्य सरकार को अनुदान देना होता है।  यह भी एक बहुत ही सराहनीय कार्यक्रम है।  इसके लिए हम भारत सरकार के आभारी हैं कि आपने हमारे गांव के लोगों तक इन स्कीम्स को पहुंचाकर उन्हें लाभन्वित किया है।

          इसी प्रकार से एक अन्य योजना प्रधानमंत्री सड़क योजना है, जो कि एक सेंट्रल स्पांसर्ड स्कीम है। इसमें शत-प्रतिशत पैसा भारत सरकार देती है।  आज हमें खुशी है कि आपने इसमें तीन लाख इकहत्तर हजार सात सौ पच्चीस किलोमीटर नयी सड़कें बनायी हैं और आपने तीन लाख अड़सठ हजार सड़कों को अपग्रेड किया है। इसी तरह से आज आपने इसके लिए एक लाख बहत्तर हजार करोड़ रूपए व्यय करके गांव-गांव को और हर पंचायत को सड़कों से जोड़ा है, इसके लिए मैं आपका आभार प्रकट करती हूं। 

          आप जानते हैं कि हमारी सड़कें ही हमारे भाग्य की रेखा हैं। आज गांव तक सड़कें पहुंचाकर हमने गांव में रहने वाले लोगों को जहां रोजगार दिया है, स्वास्थ्य सुविधायें दी हैं, अच्छी शिक्षा दी है, स्वच्छ पीने का पानी दिया है, जमीन को इरीगेट करने के लिए पानी मुहैय्या कराया है।  यह सब तभी संभव हो पाया, जब हमारे पास गांव में आने-जाने के लिए अच्छे यातायात के साधन हैं।  इसके लिए भी हम सरकार का आभार प्रकट करते हैं कि आपने प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत इतनी बड़ी रकम देकर गांव का जो उत्थान किया है, इसके लिए भी हम आपके आभारी हैं।

          इसी प्रकार से आपने इंदिरा आवास योजना चलायी है।  आप जानते हैं कि बहुत से परिवार हैं जो बिलो पावर्टी लाइन रह रहे हैं। उनके पास सिर ढकने के लिए छत भी नहीं है।  उनको भी आपने इसके अंतर्गत लाकर धनराशि मुहैय्या करायी है।  इसमें पच्चीस हजार रूपए प्रति परिवार को दिया जाता है और जो दुर्गम क्षेत्र में रहता है, ट्राइबल एरिया में रहता है, उसे आपने सत्ताइस हजार पांच सौ रूपए की धनराशि उपलब्ध कराकर एक छोटी सी झोपड़ी अपने लायक बनाने के लिए आपने जो उसकी मदद की है, उसके लिए भी मैं आपका बहुत-बहुत आभार प्रकट करती हूं। [p17]      

[N18] 

          उसी तरह नेशनल सोशल असिस्टैंस प्रोग्राम के तहत आपने ओल्ड एज पैंशन स्कीम चलाई है, नेशनल फैमिली बैनीफिट स्कीम चलाई है, नेशनल मेटरनिटी बैनीफिट स्कीम चलाई है, इससे महिलाओं को फायदा पहुंचा है, वृद्ध लोग जिन्हें पैंशन मिलनी थी, उन्हें फायदा पहुंचा है। मैं उनकी तरफ से मंत्री जी का बहुत आभार प्रकट करती हूं। हम प्रधान मंत्री जी के भी बहुत आभारी हैं कि उन्होंने जो एनाउंसमैंट की है – Old age pension to all ciitzens above 65 and below poverty line. I think this is highly appreciated. इससे बहुत से लोग लाभान्वित हुए हैं। इसके लिए मैं सबकी तरफ से प्रधान मंत्री जी का बहुत आभार प्रकट करती हूं कि आपने बहुत ही सराहनीय कदम उठाया है।

          उसी तरह एरिया डैवलपमैंट प्रोग्राम जो मिनिस्ट्री ऑफ रूरल डैवलपमैंट के अंतर्गत आते हैं, उसमें आपने बहुत बेहतरीन योजनाएं चलाई हैं, जैसे ड्राउट प्रोन एरियाज में आपने प्रोग्राम चलाए हैं, डैजर्ट डैवलपमैंट एरिया में प्रोग्राम चलाए हैं। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां हम चाहते थे कि सरकार की नजरें जाएं। आपने वहां की विकट समस्याओं पर गौर किया है। पंचायती राज संस्थाओं द्वारा बहुत ही बढ़िया स्कीम्स वहां चल रही हैं। इसके लिए मैं आपको बधाई देना चाहती हूं।

          उसी तरह आपने हरियाली इनटिगरेटेड वेस्टलैंड डैवलपमैंट प्रोग्राम चलाया है जिसके अंतर्गत हरियाली का बहुत सुंदर कार्यक्रम है। उसमें वाटरशेड द्वारा गांव के लोगों को जानकारी दी जाती है कि किस तरह से पानी सिंचित करना है और उसका किस तरह सही उपयोग किया जा सकता है। यह कार्यक्रम बहुत ही सफल तरीके से ग्रामीण क्षेत्रों में चलाया जा रहा है। आप जानकारी देते हैं कि जो हमारी बावड़ियां, पॉड्स हैं, उन्हें किस तरह साफ-सुथरा रखना है जिससे लोगों को उसका लाभ होगा। इसके लिए हम सरकार के आभारी हैं कि उसने हरियाली कार्यक्रम चलाकर गांव के लोगों को बहुत राहत पहुंचाई है।

          जैसे मैंने शुरू में कहा कि मौनीटरिंग और इवैलुएशन का कार्यक्रम चला है, भारत सरकार जहां से फंड दे रही है, उसे भी मौनीटर किया जाता है। इसके लिए सरकार ने मौनीटरिंग इवैलुएशन गठित किया है जिसमें डिस्ट्रिक्ट लैवल, ब्लॉक लैवल, ग्राम पंचायत के लोगों को इन्वॉल्व किया गया है ताकि वे समय-समय पर सरकार को अवगत करवाते रहें और बताते रहें कि उसमें क्या कमी है, क्या प्रोवीजन होने चाहिए। इसके लिए हम आपके आभारी हैं।

          आपने रूरल डैवलपमैंट कार्यक्रम को हाईलाइट करने के लिए बहुत ही सराहनीय कदम उठाया है, जैसे विभाग द्वारा मीडिया, प्रैस, प्रिंट मीडिया तक बात पहुंचनी चाहिए। उसके लिए आप समय-समय पर प्रैस कौफ्रैंस करते हैं। ग्रामीण भारत की एक मंथली मैगज़ीन छपती है जिसके द्वारा गांवों के लोगों तक डिटेल में प्रोग्राम पहुंचाए जाते हैं। इसके लिए मैं आपको बहुत बधाई देना चाहती हूं कि ग्राम पंचायत के लोग उस पत्रिका को सुचारू रूप से पढ़ते हैं और विभाग द्वारा उन तक जो जानकारी पहुंचनी चाहिए, वे उस पत्रिका द्वारा उसे हासिल करते हैं।  यह भी बहुत सराहनीय कदम है।[N19] 

          आप सब जानते हैं कि सर्व शिक्षा अभियान का जो एनुवल बजट है, उसके लिए सरकार द्वारा 3,678 करोड़ रुपये दिए गए हैं। गांवों में रहने वाले बच्चे जिन्हें अच्छी तरह शिक्षा नहीं मिल पा रही थी, वे आज उससे लाभान्वित हो रहे हैं। जहां से भी मांग आती है कि स्कूल को अपग्रेड करने की आवश्यकता है, कमरा बनाने की आवश्यकता है, टॉयलेट बनाने की आवश्यकता है, उसके लिए सर्व शिक्षा अभियान की तरफ से जो मदद दी जा रही है, मैं समझती हूं कि यह बहुत ही सराहनीय कदम है। गांव के क्षेत्र में आज इससे बहुत लाभ पहुंचा है। हमारी जो मिड-डे-मील स्कीम है, उसके तहत आज हमारे लाखों बच्चे, जो खाने से वंचित रहते थे, उनको एक समय का भोजन दिया जा रहा है। इसके लिए भी हम भारत सरकार के बहुत आभारी हैं। इसी तरह नैशनल रूरल हैल्थ मिशन के तहत सरकार ने एनुअल बजट में 12 हजार करोड़ रुपये दिये हैं। मैं समझती हूं कि जो स्वास्थ्य सुविधाएं आज हम गांव के लोगों को दे पा रहे हैं, वे तभी उपलब्ध हो पायी हैं जब सरकार ने इतनी बड़ी धनराशि हमें यहां से दी है। हम जानते हैं कि गांवों में महिलाएं बहुत नैगलेक्टिड रहती हैं। उनके स्वास्थ्य की तरफ हमें ध्यान देना है। आज हमें उसमें पैसे का कोई भी अभाव नहीं दिख रहा है। इसके लिए हम भारत सरकार के आभारी हैं कि आपने इतनी बड़ी धनराशि देकर इंटीरियर के गांव-गांव में लोगों को खासकर महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की हैं। इसके लिए भी मैं आपका आभार प्रकट करती हैं।

          आपने नैशनल रूरल इम्प्लायमैंट में 16 हजार करोड़ रुपये की धनराशि दी है। अभी मेरे भाई कह रहे थे कि आपने कहा कि 60 सालों में इसका कोई लाभ नहीं हो पाया। परन्तु आप स्वयं जानते हैं कि जब हम अपने क्षेत्र का दौरा करते हैं और वहां लोगों से बातचीत करते हैं, तो मैं समझती हूं कि सबसे सेक्ससफुल स्कीम इम्प्लायमैंट देने का रही है। गांव के क्षेत्र में इससे बहुत लोगों को लाभ पहुंचा है। जो लोग अपनी दो टाइम की रोटी-रोजी को पूरा नहीं कर पाते थे, आज वे कम से कम अपने इलाके के काम  में अपनी भागीदारी देकर उन कामों को कर रहे हैं। इसके लिए भी मैं आपका बहुत-बहुत आभार प्रकट करती हैं।

          उसी तरह हमारे फार्मर्स के ऊपर जो लोन था, उसे सरकार ने वेव किया है। हमने बार-बार संसद में यह बात उठायी कि  हमारे फार्मर्स सूसाइड कमिट कर रहे हैं क्योंकि उनके ऊपर आर्थिक बोझ है। इसके लिए भी सरकार ने बहुत ही सराहनीय कदम उठाया है। मैं आपका बहुत आभार प्रकट करती हूं कि आपने इस कार्यक्रम के तहत गांव के लोगों को लाभान्वित करने के लिए हजारों-करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इन सब स्कीमों को चलाने के लिए अपने सारे डिपार्टमैंट्स को इन्वाल्व करके आप स्टेट सरकार को बार-बार पत्र लिखते हैं, उनको अवगत कराते हैं। माननीय मंत्री के पत्र भी हम सांसदों को आते हैं कि आप इनको मॉनीटर करें। आप देखें कि ये स्कीमें सही तरीके से चल रही हैं या नहीं। मैं आपको बताना चाहती हूं कि बहुत ही सेक्ससफुल कार्यक्रम गांव के क्षेत्र में चल रहे हैं।

          अंत में, मैं रघुवंश प्रसाद जी का बहुत-बहुत आभार प्रकट करती हूं कि जब से आपने यह डिपार्टमैंट संभाला है तब से बहुत बेहतरीन  काम इस क्षेत्र में हुआ है। हमारे गांव के लोग इससे बहुत लाभान्वित हुए हैं चाहे सड़कों की बात हो, स्वास्थ्य सुविधाओं की बात हो या शिक्षा की बात हो। मैं समझती हूं कि भारत सरकार ने अपना रुख गांव की तरफ मोड़ा है, उससे हमारे गांव में रहने वाले लोगों को बहुत फायदा पहुंचा है।

          इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

*SHRI S.K. KHARVENTHAN (PALANI): I rise to support the Demands for Grants (2008-2009) for the Ministry of Rural Development.

After assumption of UPA Government under the leadership of Madam Soniaji, our Hon’ble Prime Minster, Dr. Manmohan Singhji has implemented number of projects for the upliftment of rural and backward areas of this country. Bharat Nirman is one of the initiatives taken by the Union Government. It is having a plan for building rural infrastructure within a period of four years 2005-2009. It has six components Viz., Irrigation, Roads, Water Supply, Housing, Rural Electrification and Rural Telecom Connectivity. Estimated cost for this scheme is Rs. 174,000 crore. Out of above six components, three are implemented by the Rural Development Ministry such as Rural Roads, Rural Water Supply and Rural Housing. The Ministry of Rural Development is also implementing wage employment programmes of national rural Employment Guarantee Scheme (NREGS), Sampoorna Grameen Rozgar Yojana (SGRY) and Swaran jayanti Gram Swarozgar Yojana (SGSY). through bharat nirman, it has been envisaged to connect 1.5 lakh km. Village roads habitations over 500 people in hilly areas and over 1,000 people in other areas.  It is decided to equip 66,820 villages with telephone and 14,183 remote villages by digital satellite phones. For creating irrigation facilities, 1 cr. hectare of irrigation potential and restore 10 lakh, hectare potential by renovation and modernization schemes. Furthermore, it is decided to provide drinking water facilities for 55,067 uncovered habitations and 2.8 lakh partially covered habitations and provide potable water to 2 lakh villages. It is decided to construct 60 lakh villages for the rural poor and provide electricity to 1.25 villages. Even though Government of India is allocating huge funds for rural development, number of State Governments are still not complying with norms

 

 

* Speech was laid on the Table.

when it comes to the implementation. Some States have not complied with norms relating to release of funds for District Rural Development Agency (DRDA) administration.

Bihar has emerged as the largest non-complying State with 36 Districts not complying with the norms of SGSY, seven Districts are not complying with Indira Awaas Yojana Scheme norms and 10 districts were proposals for DRDA administration have not received.

Further I want to bring certain facts about the implementation of the NREG Scheme. The Rural Employment Guarantee Scheme is facing with certain challenges in many States. The beneficiaries of jobs cards are not properly identified in many States. Moreover, if identified, there are favoritism in issuing cards to the beneficiaries. The job card holders are not being paid by full wages. In many cases, they are being paid as low as Rs. 25 or Rs.30 per day and the rest of the amount is being swallowed by middlemen. Moreover, the work which has already undertaken are taken up again without any proper time limit. Hence, immediate steps should be taken for continuous supervision of the work undertaken under NREG Scheme.

Before implementing NREG Scheme, Government of India has allocated huge funds for implementation of various schemes through District Panchayats, Intermediate  Panchayats and Gram  Panchayats under Sampooran  Gramin Rojgar Yojana (SGRY). Now, the Government has stopped the total allocation of funds under the SGRY scheme. Through this scheme, out of the total allocation, 22% of the money was earmarked for the individual benefits of the poor downtrodden SC/ST individuals. This Scheme is also now scrapped. District Panchayats and Intermediate panchayats are not having any funds to implement any developmental schemes and they are also not answerable to the public and voters. Hence, I request the Government that the funds should be earmarked for SGRY Scheme or some other schemes to implement through District Panchayat and Intermediate Panchayats.

70% of the population are living in rural are living in rural areas. Villages lack basic amenities of health services, housing, education, safe drinking water, rural connectivity and communication facilities. If Bharat Nirman Scheme is implemented properly, then only these problems will be solved.

In rural areas throughout the country, nearly 28,444 schools are not having drinking water facilities and 9.13 lakh schools are not having sanitation facilities.

Our late leader, Rajivji announced that he allocation of fund by Government of India reaches the masses only 10% and remaining are swallowed. Even now, the same situation continues. All the Government of India schemes to be implemented only through District Panchayats, Intermediate Panchayats and Gram Panchayats, then only the rural problems will be solved.

I want to put forth about the great achievement of our Tamil Nadu Government headed by Dr. Kalaignar Karunanidhi in implementing various rural development schemes. Government of Tamil Nadu and its Local Development, Minister, Shri M.K. Stalin has implemented, “Anaithu Grama Anna Marumalarchi Thittam”. It is a novel scheme to identify the village panchayat for implementing various rural development schemes. In contrast, to the conventional practices of choosing one village panchayat annually in very Assembly Constituency for development are spreading resources thinly across all the village panchayats. The Government of Tamil Nadu has developed the scheme during 2007 to identify financially weaker village panchayats and has given priority. The above scheme is covering one-fifth of the village panchayat in each block in each year in the ascending order of its per capita income. Funds from schemes of other departments such as the Highways, Public Works, Social Welfare and Education are allocated to the extent possible for solving the existing problems and it is planned to complete it within 2011. During 2006-2007, Government of Tamil Nadu has allocated Rs. 508 crore for the development of 2,540 village panchayat at the rate of Rs. 20 lakh per village panchayat. Total funds are utilized and schemes were completed within the financial year. During current year, it is proposed to allocate Rs. 507 crore for 2,534 villages. I urge upon the Government to direct all the State Governments to implement this landmark scheme and I am once again appreciating our hon”ble Chief Minister, Dr. Kalaignar and also the Local Administration Minister, Shri M.K. Stalin for implementing this scheme.

With these words, I am supporting the Demands for Grants for Rural

 

 

 

*SHRI J.M. AARON RASHID (PERIYAKULAM): My thanks to Hon’ble Speaker, for allowing me to speak a few words.   In Theni District which is from my constituency The Government is allotting more funds for rural development for which I am extremely Thankful to Hon’ble Minister, Prime Minister Ji and Madam Sonia Ji for giving more importance to rural development projects, particularly drinking water ,road development and basic sanitation under Indira Awas yojana. This year the World Water Day coincides with the International Year of Sanitation.  To achieve the targets under Millennium Development Goal the Governments needs to focus efforts for raising awareness and taking concrete action by evolving new interventions and policies to provide this fundamental right of access to safe water and basic sanitation to the millions of people across the country. Happy to say that some territories with 100% grants are implementing Water Supply Schemes in their villages but this should be extended to Tamil Nadu and particularly Theni District also. I welcome the Efforts taken by our UPA government for introducing Centrally Sponsored Scheme namely Accelerated Rural Water Supply Programme (ARWSP) under Rajiv Gandhi National Drinking Water Mission (RGNDWM). The Rajiv Gandhi National Drinking Water Mission was introduced during 1989 and it is nearly two decades old.   I feel this is the right time to restructure this mission. 

Regarding the funding pattern of all these programmes is different.  In ARWSP (Normal) it is 50:50 between Centre & States in Sector Reform Pilot projects and Swajaldhara it is 90:10 between Centre and beneficiaries/Community and Sub-Missions on Water Quality and sustainability it is 75:25 between Centre and States. Under ARWSP (DDP Areas) 100% grant in aid is provided to concerned States.   Since Water is essential in not only every body’s day to day life but also in all walks of life It would be more appropriate to extend 100% grant in aid to States.

 

* Speech was laid on the Table.

It is noticed that certain Central Government Funds allotted to State Governments for relevant subjects have not been utilized and diverted to some other subjects without any intimation to the Centre which is not a healthy trend.  Recently Hon’ble Finance Minister has sanctioned some amount to State Governments for disbursement among Senior Citizens but this was diverted to some other cause with out intimation to the Central Government. Our Chief Minister is whole heartedly supporting the cause of Central Government but the local officers are not co-operating.

In this pious mission of restructuring and rebuilding a vibrant India, I seek their dedication and full co-operation too.

Further, the august House is well aware that the UPA government since its inception in 2004 has been the first government since Independence to conceive and implement NREGS, to banish rural unemployment in the country to check outflow of rural population to urban areas. Initially this scheme was operational in few districts in the country, but I take this opportunity of congratulating Shri Rahul ji that after assuming the responsibility of General Secretary of AICC, his first concern was to get this scheme implemented in all districts of the country. He made a fervent appeal to government and our Hon’ble Prime Minister gave immediate approval to the same and sizable amount has been earmarked in this budget for the same by our Hon’ble Finance Minister.

Sir, Theni district in my parliament constituency of Periyakulam is covered by mountains and hills from all sides and water during the monsoon goes waste. I request the Ministry to please asses the viability of constructing few reservoirs so that rainwater is harvested to be used in lean and dry season.

Apart from this Sir, Ministry of Rural Development is doing wonderful job under CAP ART. They have different programmes like Village Knowledge Centres, Gramin Vikas Andolan and Nirmal Gram Abhiyan, CAP ART Institute for Poverty Alleviation and Rural Techonology (CIPART), “Demonstration-cum-Awareness Workshop’ under Centre for Sustainable Technologies, Special Swaranjayanti Gram Swarozgar Yojna (SGSY), Arid Horticulture by Rain Water Harvesting etc. The technology advocated by the council is quite simple which is very well adapted by moderately educated and illiterate rural masses. CAP ART renders distant services from a single window point in remote areas through modern Information and Rural Technology. I request the Hon’ble Minister to depute some officials from CAP ART to visit my constituency toasses the situation on the spot, set up their offices to bring awareness among the farming community, for which apart from the Central Government grants and assistance, I am willing to contribute permissible funds from MPLAD and request and persuade Government of Tamil Nadu to provide necessary assistance for infrastructure development in this regard.

Sir, this august house is well aware of agitations in the State of Haryana, Punjab, and West Bengal in the recent past. Agricultural land has been acquired for SEZ’s displacing Farmers. We all agree that development of Industry and Agriculture is complementary and supplementary to each other. In this regard my sincere suggestion is that SEZ’s be Developed on wastelands and degraded forest lands and if at all the development of SEZ’s has to be on agricultural land, the requiring body should be asked to develop equal area of wastelands simultaneously so that the loss of agricultural land could be compensated.

RURAL DEVELOPMENT

At the outset I humbly submit my appreciation on the present excellent trend of centre state relationship. This has become possible because of this liberal financial assistance provided by the Centre to the states for its developmental and welfare activities of the states, major part of the funds allotted by the centre is meant for rural development of some states. Some of the Rural Developmental Schemes are

1.   Indira Awas Yojana-(lAY)

2.                                   Swamajayanti Gram Swarozgar Yojana(SGSY)

3.                                   Sampoorna  Grameen Rozgar Yojana (SGRY)

4.                                   Total Sanitation Scheme.

5.                                   Nirmal Gram Proskar Award.

6.                                   Integrated Waste Land Development Program.

7.                                   Pradan Manthri Gramin SadaK Yojana.

8.                                   SaiyaSikshaAbiyan-(SSA)

9.                                   National Employment Guarantee Scheme.

All these items relate to Development of the Rurals in India. These schemes are planned, programmed the State Govts. After introduction of the above scheme, We can see the upward change in the living condition of rural populations including the down trodden. However, as elected representatives of the mass I have no role to play, as non-of the schemes is carried out with my knowledge and consultation. Further, the oases relating to the IAY, SSA etc., recommended by me are also hot being considered by the implementing Agency of my constituency, which causes frustration in the minds of the general public. Therefore it is my earnest appeal that the MP’s of the constituency should be authoritatively vested with powers to participate in the implementation of schemes of the constituency funded by the Central Govt. This would facilitate the MP’s to have a monitoring system right from the beginning and prevention of any leakages and durations, In fact majority of the people are under the impression that these schemes are done by the states

and the centre, despite pooling enormous funds into the state goes unrecognized or under recognized. Therefore, I once again make it clear that MP’s should be made part and parcel of the schemes for which centre provides crores and crores of rupee.

I am having one more reason for active the participation of the MP’s in the implementation schemes – ie. of during the recent heavy rains (in March’08) flood situation became worst in my constituency and the authorities were puzzled to control the floods. Several farmers and residents sustained substantial loss. As an elected representative of the people, I could not convince the affected people and remained as a spectator, as I could not promise any future remedial action.

I am also informed that some favoritism is being done by the implementing Agency of the central scheme by allowing more funds to a particular constituency (e.g) Aundipatti is one of the Assembly segments in my constituency and is receiving un-due favoritism just because it happens to be the constituency of the former CM (Ms.Jayalalitha). Therefore, I once again appeal that the active participation of MP’s of the constituency is absolutely essential to check favouritism, unauthorized diversion of central funds and to see whether the funds allotted by the center reaches its destination properly to the benefit of the people. Central Govt should ensure that funds given to the Union Govt for CSA, SGSY. PMGSY should be spent on the recommendations of the local MPs so that the MPs can solve the local urgent and needy problems can be addressed. Pure Drinking Water, good roads are the main needs for the local people. I am really thankful to the Govt lead by our Hon’ble PM Dr. Manmohan Singhji under the auspicious guidance of madam sonia ji is doing well for the rural masses.  My request is that these programme should reach the people for which we have to monitor through the local MPs. with these words, I conclude Sir.

 

 

श्री हन्नान मोल्लाह (उलूबेरिया)  :  माननीय उपाध्यक्ष महोदय, सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालय की चर्चा में भाग लेने के लिए आपने मुझे समय दिया, उसके लिए मैं आपका आभार प्रकट करता हूं। श्री रघुवंश बाबू के दिल में गरीबों के लिए विशेष जगह है। वे उन गरीबों को सुविधाएं देने के लिए बहुत ही ईमानदारी से कोशिश कर रहे हैं, उसके लिए मैं उनकी सराहना करता हूं, आभार प्रकट करता हूं।  मगर उनकी समस्या यह है कि जिस माहौल में उनको काम करना पड़ रहा है, जिसे नियो लिब्ररल इकोनॉमी में काम करना पड़ रहा है, वह उसके खिलाफ है क्योंकि नियो लिब्ररल इकोनॉमी पूरी दुनिया में गरीबी बढ़ाती है। वे अमीर और गरीब के बीच को खाई को बढ़ाती है। बहुत कोशिश के बावजूद भी इसमें कामयाब होने में हमें मुश्किल हो रही है। यह एक लड़ाई है जिसे हम  लड़ रहे हैं। शायद श्री रघुवंश बाबू भी इस लड़ाई में हमारे साथ रहेंगे। आपको बहुत भारी काम करना पड़ता है क्योंकि जो 70 प्रतिशत लोग गांव में रहते हैं, उनमें भूमिहीनता हर साल बढ़ती जा रही है।[MSOffice20]  यह एक नयी समस्या है। भूमि से ही गांव के लोग अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं, अगर वे भूमि खो दें तो उनकी जिन्दगी के लिए समस्या पैदा हो जाती है। बहुत से ग्रामीण जो गरीब हैं, उनके पास बीपीएल कार्ड भी नहीं है, उनको इसकी सुविधा नहीं मिलती है।  खेतिहर मजदूरों की आबादी बढ़ती जा रही है, मगर उसके काम को संरक्षण देने के लिए हम कोई कानून नहीं बना पाए हैं। रोजी-रोटी की तलाश में लोगों का एक राज्य से दूसरे राज्य में जो पलायन हो रहा है, वह भी एक बड़ी समस्या है। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में जो गरीब हैं, उन्हें भी देखना है।  देश का असंगठित क्षेत्र, जिसमें देश के कुल मजदूरों का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा आता है, जिनका एक बड़ा हिस्सा गांवों में रहता है।  उनकी समस्याएं भी बोझ के रूप में आपके सिर पर है, जिसको आपको संभालना पड़ता है।  इसी तरह ग्रामीण एससी, एसटी और महिलाओं की समस्याएं हैं।  इसके साथ ही जैसा कि अर्जुन सेन गुप्ता कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश में 63 करोड़ लोग सिर्फ 20 रूपए में किसी तरह जी रहे हैं, ऐसे लोगों की बड़ी संख्या गांवों में रहती है।  इन सभी समस्याओं का मुकाबला करने के लिए जो मंत्रालय है, वह आपका मंत्रालय है।  इसलिए इतना बड़ा काम करने के लिए जो आपका मंत्रालय है, आप जो कार्यक्रम लेते हैं, उनके बारे में आज सदन में चर्चा हो रही है, यह बहुत अच्छी बात है। पिछले सालों में इस मंत्रालय के लिए पैसे का प्रावधान बढ़ाया गया है, लेकिन जितने ज्यादा लोगों को इसे कवर करना है, जितनी बड़ी समस्याओं का इस मंत्रालय को सामना करना है, उन्हें देखते हुए यह रकम काफी नहीं है। प्लानिंग कमीशन से आपके मंत्रालय द्वारा जितना पैसा मांगा गया था, शायद उसके 60 प्रतिशत पैसे का ही प्रॉविजन किया गया है।  इसलिए मैं चाहूंगा कि पूरे सदन को मिलकर कहना चाहिए कि इस मंत्रालय के लिए ज्यादा धनराशि का प्रावधान होना चाहिए।

          मंत्रालय में आपका फ्लैगशिप प्रोग्राम राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना है।  यह योजना आपकी सरकार पिछले चार सालों से चला रही है। पहले इसके अंतर्गत 200 जिले थे, जिनको बढ़ाकर 330      किया गया और अब इसका विस्तार पूरे देश पर किया गया है। पिछली बार जब इसमें 330 जिले कवर होते थे, उसके लिए जितने रूपयों का प्रावधान था, उससे अब जिलों की संख्या डबल हो गयी है, लेकिन इसकी तुलना में पैसों में केवल 33 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है। जिलों की संख्या बढ़कर डबल हो गयी, लेकिन धनराशि में केवल 33 प्रतिशत की वृद्धि करना सही नहीं है। इसके बारे में प्लानिंग कमीशन की राय से हम सहमत नहीं हैं। इसलिए इस प्रावधान को 100 प्रतिशत बढ़ाना चाहिए, यह मेरी सरकार और प्लानिंग कमीशन से मांग है। आंकड़े आपके सामने हैं कि रूरल इंप्लायमेंट के लिए हम जीडीपी का कितना हिस्सा खर्च कर रहे हैं। यह हिस्सा घट रहा है। रूपए के आंकड़े में तो यह बढ़ रहा है लेकिन जीडीपी के परसेंटेज के रूप में यह घट रहा है।  वर्ष 2007-08 में यह पैसा जीडीपी का 0.36 प्रतिशत था, लेकिन वर्ष 2008-09 में यह घटकर जीडीपी का केवल 0.27 प्रतिशत हो गया। इसलिए इस पैसे को जीडीपी परसेंटेज के रूप में भी बढ़ाना चाहिए। मैं सरकार और प्लानिंग कमीशन से मांग करूंगा कि इस मंत्रालय के साथ सौतेला व्यवहार नहीं होना चाहिए क्योंकि यह हमारे देश के सबसे ज्यादा गरीबों से जुड़ा हुआ मंत्रालय है। एनआरईजीएस के बारे में मैं कहना चाहूंगा कि यह बहुत अच्छा प्रोग्राम है। इसे बनाने में हमने बहुत मेहनत और मदद की है। यह प्रोग्राम जब से शुरू हुआ है, जब हम राज्यों में जाते हैं, गांवों में जाते हैं, वहां से इसमें कुछ सुधार करने के बारे में हमें फीडबैक मिल रहे हैं।  इसमें जो कमियां है, मैं उनके बारे में कुछ बोलना चाहूंगा।[R21]  मैं एक तो यह बात कहना चाहता हूं कि इस योजना के बारे में अवेयरनैस की कमी है। लोगों को इस योजना के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। मजदूरी के लिए कार्ड तो दे दिए जाते हैं, लेकिन जब दरख्वास्त दी जाती है, वह कहां देनी है, उसकी रसीद लेनी है या नहीं और उसकी कोई शिकायत करनी है तो कहां करनी है, इन सबके बारे में इन तीन वर्षों में काफी लोगों को जानकारी नहीं है। इसलिए सब तरह की जानकारी लोगों को देनी चाहिए, जिससे वे लोग अपने हक को ठीक से समझ सकें और उसके लिए लड़ सकें। इसके अलावा मैं यह कहना चाहता हूं कि जब दरख्वास्त दी जाती है तो उसकी कोई एकनॉलेजमेंट नहीं दी जाती है, क्योंकि नियम में प्रावधान है कि अगर वह दे दी गई और नाम रजिस्टर्ड हो गया, तो फिर 15 दिन में उस व्यक्ति को काम देना होगा, नहीं दिया जाएगा तो बेरोजगारी भत्ता देना पड़ेगा। जब गरीब आदमी दफ्तर में जाकर अपनी दरख्वास्त देता है तो उसे इस चीज का पता नहीं होता। इसलिए इस कमी पर भी ध्यान देना होगा। गरीबों के साथ ठगने वाली बात नहीं होनी चाहिए। जिस दिन वह दरख्वास्त दे, उसी दिन की उसे रसीद देनी चाहिए।

          अब मैं न्यूनतम मजदूरी के बारे में कुछ कहना चाहता हूं। हमारे देश के राज्यों में इस सम्बन्ध में अलग-अलग मजदूरी है। सबसे ज्यादा केरल में 125 रुपए मजदूरी दी जाती है और गुजरात में सबसे कम 50 रुपए मजदूरी दी जाती है। मैं पूरे देश में घूमा हूं इसलिए मुझे इस चीज की काफी जानकारी है। यह बात ठीक है कि इस कार्यक्रम की वजह से न्यूनतम मजदूरी में हर राज्य ने वृद्धि की है। इस योजना से लोगों को काम भी मिल रहा है, लेकिन जहां सबसे कम यानि 50 रुपए मजदूरी है, वहां प्रदेश सरकार से बात करके आपको यह बढ़ानी चाहिए।

          राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत एक नया सर्कुलर आया है। उसमें कहा गया है कि काम की अवधि नौ घंटे होगी। यह ठीक बात नहीं है। हम सब लोग दिन में आठ घंटे काम करते हैं, आधा घंटा ब्रेक होता है, टिफिन का समय होता है। आईओएल की भी जो कंवेंशन है आठ घंटे काम की, उसके भी खिलाफ है। इसलिए इस पर ध्यान देना चाहिए। मेटिरियल के रेशों के बारे में भी काम में समस्या आ रही है, उसे भी देखना चाहिए।

          आपने इस कार्यक्रम के तहत कामों की सूची जारी की है, उसे बढ़ाना होगा। अभी आपने सूचनी में 11 कामों के नाम दिए हैं। उसमें भी सबसे ज्यादा काम पानी से सम्बन्धित हैं कि पानी के लिए खुदाई वगैरह करना। कुछ जगह तो यह ठीक है, जैसे राजस्थान है, वहां पानी की समस्या है और जगह भी काफी है इसलिए पानी की खुदाई का वहां काफी औचित्य है। लेकिन जहां पानी ज्यादा है और जगह भी उतनी नहीं है, वहां यह काम ज्यादा कारगर सिद्ध नहीं हो रहा है। इसलिए आपको लिस्ट में कामों की संख्या बढ़ानी होगी, क्योंकि यह प्रेक्टिकल नहीं है। हमारे देश में बाढ़ वाले, सूखे वाले, पहाड़ी, जंगल और रेगिस्तानी क्षेत्र हैं इसलिए इस लिस्ट को बढ़ाना पड़ेगा, क्योंकि इसके अभाव में बहुत से राज्यों में काम ढूंढ़ने में काफी परेशानी आ रही है। हर जगह एक ही तरह का काम नहीं हो सकता है इसलिए आप इस ओर जरूर ध्यान दें।

          इस कार्यक्रम के लिए जिलों को सीधा पैसा दिया जाता है। हमने देखा है कि कुछ जिलों में ज्यादा पैसा खर्च हो जाता है और काम भी काफी अच्छा होता है और कुछ में काम सही नहीं हो पाता, क्योंकि पैसे की समस्या आती है। इसलिए आपको राज्य सरकार को यह फ्लैक्सिबिलिटी देनी चाहिए कि जहां काम नहीं है और जहां काम हो गया है, पैसा भी पड़ा है, वहां का पैसा उस जिले में ट्रंसफर कर दिया जाए। यह एक प्रेक्टिकल समस्या है इसलिए आप इस पर ध्यान देकर इसे जरूर लागू कराएं, क्योंकि हमने देश के कई भागों में जाकर इस चीज को अनुभव किया है।

          बैंकों के जरिए लोगों को पैसा दिया जाता है। कई जगह बैंकों की शाखाएं ही नहीं हैं। देस में कुल 52,000 के करीब बैंकों की शाखाएं हैं, लेकिन गांवों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है। इसलिए आपने पोस्ट ऑफिस को भी इसमें जोड़ा है, लेकिन हर जगह पोस्ट ऑफिस वाले इसके लिए राजी नहीं हो रहे हैं और सर्विस चार्जेज मांगते हैं। आपको इस ओर ध्यान देकर पोस्ट ऑफिस वालों को निदेश देना चाहिए ताकि गरीब लोगों को ठीक से और समय से पेमेंट हो सके।

          मेरा इस कार्यक्रम के तहत एक अनुरोध और है। आपको फूड ग्रेन भी आपको इसके तहत देना चाहिए। आजकल महंगाई काफी बढ़ रही है और खाद्यान्नों के दाम आसमान छू रहे हैं। गरीब आदमी पैसा लेकर बाजार जाता है तो ऊंची कीमतों के कारण वह खाद्यान्न खरीद नहीं सकता। जिस तरह पहले फूड फार वर्क होता था, आप पैसा देने के बजाय फूड ग्रेन दें तो काफी उचित होगा। कई जगह पैसा देने में असुविधा हो रही है, अगर आप गेहूं आदि खाद्यान्न देंगे तो गरीब आदमी उसे लेकर अपने घर जा सकता है और उसके लिए खाने का प्रबंध हो सकता है। वैसे इसका इसमें प्रावधान है।[R22]  मगर इसमें एफसीआई, एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री और सबसे तालमेल करके, कैसे इसे लागू किया जाए, यह देखना पड़ेगा। यह प्रोग्राम बहुत ही अच्छा है, इसमें जो कमियां हैं उन्हें देखना पड़ेगा। मेरे पूर्व-वक्ता माननीय काशीराम राणा जी ने कुछ समस्याएं बताई हैं जो कंट्रेक्टर पैदा कर रहे हैं। आपको मालूम है कि बिहार में, उत्तर प्रदेश में, जहां सबसे गरीब लोग हैं, वहां यह प्रोग्राम सबसे कम लागू हो रहा है।

श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) :  बिहार में सबसे ज्यादा गरीब लोग नहीं हैं।

श्री हन्नान मोल्लाह : गरीब लोग हैं, पूरे हिंदुस्तान में काम के लिए पलायन कहां से ज्यादा होता है। वहां काम 18 प्रतिशत होता है।

श्री प्रभुनाथ सिंह : सबसे ज्यादा गरीब लोग बंगाल में हैं।

श्री हन्नान मोल्लाह : ठीक है, आप जाकर देखें कि बिहार में काम कम क्यों हो रहा है? वहां क्या अमीर लोग हैं, क्या काम नहीं करना चाहते हैं? यूपी, बिहार में सबसे कम काम हो रहा है और हमारा कहना है कि वहां ज्यादा काम होना चाहिए। बिहार के सब जिलों को इस योजना से जोड़ा गया है, मगर लोग काम नहीं कर रहे हैं। काम में जो कमी है, इस बारे में सरकार को देखना चाहिए और सरकार को इस योजना की मॉनिटरिंग करनी चाहिए। साथ ही जिनके लिए प्रोग्राम बनाया गया है, उनको भी काम करना चाहिए। जहां ज्यादा जरूरत है वहां काम नहीं हो रहा है। इसलिए मैं सरकार का ध्यान उस ओर आकर्षित करना चाहता हूं।

          आवास से वंचित लोगों के लिए भी प्रोग्राम है। आई ए वाई में फिजिकली टार्गेट जो अचीव होता है वह आप 97 परसेंट से ज्यादा दिखा रहे हैं और 84 परसेंट इसमें खर्चा दिखा रहे हैं। यह खर्चा कैसे होता है कि कम खर्च में ज्यादा टार्गेट हासिल होता है? इसमें भी थोड़ी समस्या है, इसे भी ध्यान से देखना चाहिए। इसमें जो जगह दी जाती है, वह भी सही जगह नहीं होती है, वह जगह बहुत दूर दी जाती है। मेन-लोकेलिटी से दूर, एक कोने में जगह पड़ी है, वहां जाकर दो-तीन कमरे बना दिये, वहां जाकर गरीब लोग कैसे रहेगा, जहां कोई सुविधा नहीं है। इसलिए सरकार को मेन-लोकेलिटी के पास ही जगह खरीदकर देनी चाहिए। हाउस-साइट मेन-लोकेलिटी के पास होनी चाहिए, नहीं तो गरीब लोगों को कोई फायदा नहीं पहुंचता है। यह एक समस्या है, जिसकी ओर सरकार का ध्यान जाना चाहिए।

          इसके अलावा हमारी प्राइम-मिनिस्टर-ग्रामीण-रोजगार-योजना है, जिसे हजारों करोड़ रुपये खर्च करके हम बना रहे हैं लेकिन राज्य सरकार के पास उसे मेनटेन करने के लिए पैसा नहीं है। वह पांच साल के बाद खराब हो जाएगी, तो इतना पैसा खर्च करने के बाद उसका कोई फायदा नहीं रहेगा। मेरा आग्रह है कि इसके मेनटेनेंस की जिम्मेदारी भी सेंट्रल गवर्नमेंट को लेनी चाहिए। इतना अच्छा बनाने के बाद अगर वह बाद में टूट जाए तो इसका फायदा स्थाई रूप से नहीं होगा। इसके मेंटेनेंस के बारे में भी सरकार को सोचना चाहिए।

          बीपीएल के सवाल पर प्लानिंग कमीशन ने बोल दिया कि 18 प्रतिशत से ज्यादा गरीब नहीं है, पता नहीं इनका क्या हिसाब है? हम जब गांव में जाते हैं तो देखते हैं कि ऐसे काफी लोग हैं जिनको बीपीएल का कार्ड नहीं मिलता है। इस बारे में जो मानक बनाए हैं, वे मानक ठीक नहीं हैं। इन मानकों में परिवर्तन करके बीपीएल के कार्ड सही ढंग से बनाने का काम होना चाहिए।

          इसके अलावा जो रूरल ड्रिंकिंग वाटर स्कीम है, इसमें 50-60 प्रतिशत की अचीवमेंट है। यह भारत निर्माण का एक महत्वपूर्ण प्रोग्राम है, मगर हम देख रहे हैं कि एआरडब्ल्यूएसपी के 57 प्रतिशत अनकवर्ड विलेजिज में यह प्रोग्राम पूरा हुआ है। बाकी जगह पानी दे रहे हैं लेकिन कुछ दिन बाद पानी का स्रोत सूख जाता है और लोगों को पानी नहीं मिलता है। इसलिए ज्यादा दिनों तक लोगों को पानी मिले, यह भी देखना होगा। इसके साथ-साथ पानी की क्वालिटी को भी देखना पड़ेगा। जैसे कि फ्लोराइड से 30 हजार और आयरन से 70 हजार गांव प्रभावित हैं। इस बारे में भी हमें देखना पड़ेगा कि हम कैसे लोगों को ठीक क्वालिटी का पानी दे सकें। गांवों में करीब 80 हजार स्कूल ऐसे हैं जहां पानी की कमी है और वहां पानी के लिए टय़ूवैल्स दे रहे हैं, लेकिन अभी भी, पूरे हिंदुस्तान के गांवों में 84 हजार, ऐसे स्कूल हैं जहां पानी नहीं है। इसकी जिम्मेदारी भी ग्रामीण मंत्रालय की है और इस पानी मुहैया कराने की जिम्मेदारी को भी उसे देखना है। [r23]   

          आपका सेनिटेशन का टोटल अचीवमेंट 49 परसेंट है। यह अच्छा प्रोग्राम है, लेकिन और ज्यादा अचीवमेंट की जरूरत है। लैंड रिफार्म की बात हम पिछले 60 साल से कहते आए हैं, मगर लैंड रिफार्म नहीं हो रहा है। इसका नतीजा है कि ग्रामीण गरीबी कम नहीं हो रही है। लैंड रिफार्म्स डिपार्टमेंट ने जो काम शुरू किया है, उसे पूरा करे। सरप्लस लैंड, वेस्ट लैंड को ठीक प्रकार से गरीब लोगों में, भूमिहीन लोगों में बांटा जाए। आपका आईडब्ल्युडीपी प्रोग्राम बहुत अच्छा है, लेकिन नार्थ ईस्टर्न रीजन में सबसे कम काम हो रहा है। वहीं इस प्रोग्राम की सबसे अधिक जरूरत है और वहीं यह प्रोग्राम नहीं चल रहा है। इसलिए एन. ई. रीजन में ज्यादा जोर दे कर काम किया जाए।

          मेरी यही मांगे हैं। ये सभी कार्य आपके अंतर्गत आते हैं और कमियों की तरफ आपका ध्यान आकर्षित किया है। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

 

श्री हरिकेवल प्रसाद (सलेमपुर)  :  महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे इस चर्चा में भाग लेने का अवसर दिया। सबसे पहले ग्रामीण विकास मंत्रालय के मंत्री आदरणीय रघुवंश जी को मुबारक और बधाई दूंगा कि उन्होंने जनहित में दबे कुचले गरीब लोगों को राहत देने के लिए कुछ योजनाओं को चलाया है। सांसदों को इन योजनाओं को जिला स्तर पर समिति का निर्माण करके सम्मान देने का भी काम किया है। मैं दो तीन बातें इस मंत्रालय के संबंध में मंत्री जी को, जिनकी इच्छा है कि गरीब लोगों को राहत मिले और योजनाओं को सफलता मिले, बताना चाहता हूं। जहां कहीं बाधाएं हैं, उन बाधाओं को कैसे दूर किया जा सकता है, उनके बारे में सुझाव दूंगा।

          पहली बात भारत सरकार की ओर से आपके मंत्रालय द्वारा प्रधान मंत्री सड़क योजना का निर्माण हुआ, यह एक सराहनीय कदम है। आज का जो बजट है, जिसमें इस योजना में और ज्यादा बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, उसमें बढ़ोतरी नहीं हुई। मैं चाहूंगा कि आबादी के आधार पर जहां 500 से 1000 की आबादी है, उन गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ने का प्रावधान था। मुझे लगता है कि शायद आपने यह योजना समाप्त कर दी है। हम आपसे चाहेंगे कि जब आप अपना उत्तर दें, तो इस तरफ भी प्रकाश डालें।

          महोदय, मैं यह भी बताना चाहता हूं कि जब बैठक हो रही थी, तब हमारे सांसद साथियों ने मिल कर आपसे कहा कि प्रधान मंत्री सड़क योजना का उद्घाटन करने का अधिकार सांसदों को होना चाहिए और उनके सुझाव के अनुसार ही सड़कों का निर्माण होना चाहिए। मुझे ऐसा लगता है कि मौखिक रूप से आपने कहा कि उद्घाटन करने का पत्र आपने सांसदों को भेज दिया है, लेकिन शायद या तो आप भूल गए होंगे या आपके दफ्तर में वह पत्र पड़ा हो, लेकिन सांसदों द्वारा उद्घाटन करने का पत्र किसी सांसद के पास नहीं पहुंचा है। हम चाहते हैं कि जब आप उत्तर दें तो कम से कम इस बात को साफ करें कि सांसदों के सुझाव के आधार पर प्रधानमंत्री सड़क योजना का निर्माण होना है। आपने जब बैठक शुरू हुई थी, तब इस तरह का निर्देश दिया था, उस निर्देश का पालन ही नहीं हुआ है।[R24]  अधिकारी मनमाने तरीके से सड़कों का प्रपोजल बनाते हैं और गुणवत्ता के आधार पर सड़कों का निर्माण नहीं हो रहा है। सड़कों का जो रूट बनना चाहिए, ठेकेदार और अधिकारी मिल कर मनमानी करते हैं। मैं चाहूंगा कि वह इस पर ध्यान दें। अगर उन्होंने उद्घाटन का परिपत्र जारी किया है तो उसे साफ कर दें और सांसदों के सुझाव के आधार पर जिन सड़कों का निर्माण होना था जिस की उपेक्षा की जा रही है, उनके बारे में हम चाहेंगे कि आप ध्यान देने का काम करे। उत्तर प्रदेश और बिहार जहां दबे, कुचले गरीब लोग झोंपड़ियों में रहते हैं और जहां से आप आते हैं, वहां से लोग शहरों की ओर पलायन कर रहे थे। आपने उनके लिए राष्ट्रीय ग्रामीण योजना बना कर रोकने का काम किया है। उसे रोकने के साथ-साथ जो प्रारूप बनाया गया उसके अनुरूप काम नहीं हो रहा है। इसके संबंध में आपको शिकायतें मिली होंगी। हम चाहेंगे कि आप उसे गम्भीरता से देखें। लिस्ट बन रही है लेकिन वह ठीक से नहीं बन रही है। इसमें भी कोताही बरती जा रही है। लक्ष्य के आधार पर काम हो। बेरोजगर लोग जो गांव से पलायन होकर शहरों की ओर जाते थे, उनको रोजगार मिलना चाहिए। पूरे देश में मजदूरी का निर्धारित लक्ष्य नहीं है। वह कहीं कुछ है और कहीं कुछ है। इसके आधार पर ऐसी परिस्थिति बने कि देश के पैमाने पर जो राज्य सबसे ज्यादा गरीब हैं, जहां लोग भूख से तरस रहे हैं, वहां अच्छी मजदूरी मिले क्योंकि अभी मजदूरी बहुत कम है। आज आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं। ऐसे  में मेहनत करने वाले श्रमिक की मजदूरी नहीं बढ़ेगी, रोजगार गारंटी योजना असफल हो जाएगी। हम चाहते हैं कि मजदूरी में विसंगतियों को दूर किया जाए। इसके लिए राज्यों के मंत्रियों और अधिकारियों से बात करके सुधार लाने का काम करे।

          हमने आपके बजट में इन्दिरा आवास योजना को देखा है। भारत सरकार का लक्ष्य है कि बेघर लोगों को घर मुहैय्या कराया जाए। जब आप यहां भाषण दे रहे थे तो बड़े जोरदार ढंग से अपनी बातों को  रखने का काम कर रहे थे। जो लोग झोंपड़ियों में रहते हैं जिन का कोई मकान नहीं है जो खुले आसमान के नीचे रहते हैं, उनके यहां एक आशा की किरण जगी थी। मैं गुजारिश करना चाहता हूं कि इन्दिरा आवास योजना के बारे में आप गम्भीरता से सोचें। इसमें बड़ा भ्रष्टाचार है। जो सूची बनायी जाती है, वह दलगत भावना के आधार पर बनायी जाती है। गांवों में गोलबंदी है। अगर कोई गरीब है लेकिन असरदार व्यक्ति के साथ नहीं है तो उसका नाम काट दिया जाता है। जो नौकरी करता है, विदेश में भी रहता है और सम्पन्न है, उसका नाम इन्दिरा आवास की लिस्ट में दर्ज हो जाता है। वह दफ्तरों में जाता है, बंधी हई रकम है और दफ्तरों में तीन से पांच हजार रुपए दे देता है, बिना सूची बनाए उसे इन्दिरा आवास आवंटित हो जाता है। इस तरह पूरे देश में आपकी भावनाओं को चोट पहुंचाने का काम हो रहा है। जो तीन हजार या पांच हजार रुपए देकर उनकी पूजा करेगा, उसे इन्दिरा आवास मिल जाएगा और जो नहीं देगा और असरदार आदमी के साथ नहीं है, अधिकारियों के चंगुल में नहीं फंसा है, वह इन्दिरा आवास से वंचित हो जाएगा। आपका एक संदेश गया था कि सूची में कोई भेदभाव न बरता जाए। मेरा अन्दाजा है कि आज की तारीख में वह भेदभावपूर्ण सूची है और इसे लेकर हमारे मन में असंतोष है।  पिछली बार हमने कहा था कि महंगाई बढ़ रही है। जब महंगाई बढ़ रही है तो महंगाई के परिवेश में 25000 में से 5000 या 3000 देने के बाद जो धनराशि बचती है उससे निर्माण कैसे करें, इसलिए इसे बढ़ाने का काम कीजिए। आपने शायद 35000 रुपए किया है, जैसा कि आपने बजट में कहा था, जो लोग इस सदन में बैठे हैं सबको मालूम है कि 50000 रुपए से कम में इंदिरा आवास का निर्माण ठीक ढंग से नहीं होगा। इसलिए इस राशि को 35000 से बढ़ाकर 50000 रुपए करें और सूची को भी ठीक तरह से बनाएं जिससे इंदिरा आवास योजना के पैमाने पर गरीब लोग, जो आशा लगा कर बैठे हैं, वह उन्हें मिल जाए। मैंने इसी सदन में पिछली बार आपसे कुछ अर्ज किया था और आपने उसके बाद कहा था जहां दैवी प्रकोप है, आग लग जाती है या बाढ़ आ जाती है, जो परिवार या घर बर्बाद हो जाता है उसे तीन दिन के अंदर इंदिरा आवास में परिवर्तित कर दिया जाए। आपने इस सदन में एक बार नहीं अनेक बार घोषणा की है कि तीन दिन के अंदर इंदिरा आवास में परिवर्तित कर दिया जाए। मैं आपके ही दफ्तर की चिट्ठी के बारे में बताता हूं, आपके दफ्तर ने 12.04.2006 को जारी की थी, मैं आपकी आज्ञा से चिट्ठी इसलिए पढ़ना चाहता हूं कि माननीय मंत्री जी इस सदन में बराबर घोषणा करते हैं कि जले हुए घर के लोगों को इंदिरा आवास का रूप दे दिया जाए। मैं महसूस करता हूं कि ऐसा देश के अनेक राज्यों में हुआ है लेकिन उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में आपके आदेश का पालन नहीं हुआ, हो सकता है यह आपकी जानकारी में न हो या आपके दफ्तर ने आपको जानकारी न दी हो। पूरे देश में जहां आग लगती है, हर राज्य में राज्य स्तर पर कोई न कोई सहायता मिल जाती है, कहा जाता है कि प्रोफार्मा बना कर भेज दें। 2006-07 और 2007-08 का प्रोफार्मा है कि आगजनित दैवी आपदा से प्रभावित लाभार्थियों को इंदिरा आवासीय सूची के वांछित प्रारूप, प्रारूप में कहा गया है – लाभार्थी का नाम, पिता का नाम, निवास स्थान, जाति, डीपीआर नं., दुर्घटना की प्रवृत्ति, दुर्घटना का समय, क्षति सीमा, राज्य अंश धनराशि और अंत में लिखा है कि प्रमाण पत्र साक्ष्य के साथ किसी अन्य माध्यम से सहायता नहीं दी गई है। मेरे कहने का मतलब है कि जहां मकान जलेगा और जब वह प्रमाण पत्र लिख कर देगा कि उसे कोई सहायता नहीं मिलेगी तब आपके वचन के अनुसार इंदिरा आवास मिलेगा। लेकिन कौन अधिकारी देगा? आपके इस आदेश ने आपकी पवित्र भावना को, जिससे लोगों का इंदिरा आवास बन जाता, पूरा नहीं किया है। इस प्रोफार्मा से पूरे उत्तर प्रदेश में किसी जिले के एक अधिकारी ने भी एक इंदिरा आवास इस योजना के तहत आबंटित नहीं किया। हम चाहते हैं कि आप अपने इस प्रपत्र को देख लें, आपने जनहित में कम से कम जो वादा किया है, जो सदन में कहा है, उसमें रुकावट हो गई है, इसे पुनः पूरा करने का ऐलान करें। अगर ऐलान नहीं करेंगे तो मेरे जैसा आदमी महसूस करेगा आपकी वाणी और भाषा लोगों को सहयोग देने का नहीं बल्कि झुठलाने वाला है। इस पर आपके दफ्तर ने कहीं प्रश्नवाचक चिह्न लगा दिया है तो आप जैसे जमीन से निकलने वाले आदमी, लोगों का दर्द जानने वाले आदमी की भावना पर एक पत्र द्वारा कुठाराघात किया गया इसलिए इसे रोकने का काम करें।[r25]  इसलिए हम आपसे कहना चाहते हैं कि आज पूरे देश में इतनी लम्बी समयावधि के बाद भी पीने का शुद्ध पानी नहीं दिया जा सका। कहीं भी पीने का शुद्द पानी नहीं मिल पाया है। हम चाहें कितनी ही डींगें हांकें, लेकिन हम लोगों को स्वच्छ पानी तक नहीं दे पाये हैं। उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री, मायावती जी अपने दल के विधायकों को 250 हैंडपम्प दे रही हैं और दूसरे दल के विधायकों को सौ हैंडपम्प दे रही हैं। आप कभी हकीकत को भी कबूल किया करो। यह आज उत्तर प्रदेश की स्थिति है और इस सदन में चाहे किसी भी दल के सदस्य हैं या देश के किसी भी कोने से चुने हुए सदस्य हैं, किसी भी सांसद को अपनी कलम से हैंडपम्प देने का अधिकार नहीं है। अब हमें लोगों ने दिल्ली भेजा है। जब हम कभी अपने इलाके में घूमते हैं और किसी झोंपड़ी में जाते हैं तो वहां से गरीब आदमी निकलकर कहता है, बाबू, आप दिल्ली मे गये हैं, आप हमें पानी के लिए एक हैंडपम्प की व्यवस्था तो करा दीजिए। लेकिन हम यह नहीं कर सकते। हम आपसे कहना चाहते हैं कि जब हम आपसे मिले थे और हमारा एक प्रतिनिधिमंडल, जिसमें माननीय रेवती रमण सिंह, प्रो.राम गोपाल जी और इलियास आजमी यहां बैठे हैं, हम सभी लोग जाकर प्रधान मंत्री जी से मिले और उन्हें एक ज्ञापन दिया और कहा कि माननीय प्रधान मंत्री जी, कम से कम ऐसी व्यवस्था कर दीजिए कि प्रत्येक सांसद को अपने लोक सभा क्षेत्र में पांच सौ हैंडपम्प देने का अधिकार मिल जाए। लेकिन यह नहीं हुआ। हम आज भी आपसे इसकी मांग करना चाहते हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय इतना बड़ा मंत्रालय है और गांव के लोगों को पीने का शुद्द पानी देने के काम हेतु जब हम लोगों का ज्ञापन माननीय प्रधान मंत्री जी को गया है, तो हम लोगों को यकीन है कि जब आप सदन में जवाब देंगे तो कम से कम आखिरी सत्र में पांच सौ हैंडपम्प हर सांसदों की संस्तुति पर देने की घोषणा कर दीजिए।

          दूसरी बात मैं जल संचय के बारे में कहना चाहता हूं। पोखर खोदकर जल को इकठ्ठा करने की आपकी एक योजना है। लेकिन मेरा अंदाजा है कि कहीं भी पोखरा खोदा ही नहीं गया। कागज पर खोदे गये, पैसा ले लिया गया, मजदूरों के द्वारा कहीं खुदाई नहीं हुई, ट्रैक्टर से खुदाई हो गई। हम चाहते हैं कि मंत्री  जी इस पर भी थोड़ा ध्यान देकर इस काम को अपने ढंग से पूरा कराने का काम करें।       

          इसी तरह से गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के बारे में मैं कहना चाहता हूं। माननीय प्रधान मंत्री जी ने भाषण दिया था कि गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले 65 वर्ष के लोगों को पेंशन दी जायेगी। यह प्रक्रिया बहुत अच्छी है। इसके लिए प्रधान मंत्री जी बधाई के पात्र हैं। लेकिन यह योजना केवल कागजों में ही रह गई है, यह साकार रूप नहीं ले रही है। हम चाहेंगे कि मंत्री जी इसे भी अपने ढंग से देखें।

          इसके अलावा हम आपसे एक निवेदन और करना चाहते हैं कि प्रत्येक गांव सभा में पंचायत भवन की व्यवस्था की जाए। सरकार की इतनी तरह की छोटी-बड़ी योजनाएं आती हैं, गांवों में एक जगह बैठकर इन सारी योजनाओं का लोग निस्तारण करें, इसके लिए एक पंचायत भवन की व्यवस्था होनी चाहिए। प्रत्येक गांव सभा में यदि पंचायत भवन की व्यवस्था हो जाती है तो इससे हमें और गांवों के लोगों को बहुत खुशी होगी। जैसे प्राइमरी स्कूल हैं, वहां सर्व शिक्षा अभियान के तहत बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था है। लेकिन पीने के पानी के लिए हैंडपम्प की व्यवस्था नहीं है। मैं विशेष तौर से ग्रामीण विकास मंत्री जी से इस बात के पूरा होने की उम्मीद करता हूं।

          जैसे राजीव गांधी विद्युत परियोजना है। इस परियोजना के तहत गांवों का विद्युतीकरण करने का जो लक्ष्य था, उस लक्ष्य की पूर्ति नहीं हो पा रही है। हम चाहेंगे कि आप उस पर भी विचार करें और उसे भी पूरा करने का प्रयास करें। इसी के साथ मैं इन अनुदानों  की मांगों का समर्थन करता हूं, वहीं उम्मीद करता हूं कि जो आपके दफ्तर ने पत्र भेजकर काम रोक दिया है, उसमें आप सांसदों की संस्तुति पर पांच सौ हैंडपम्प देने की घोषणा तो कर सकते हैं। कृपया आज आप इसकी घोषणा करने का काम करें। इन्हीं शब्दों के साथ मैं ग्रामीण विकास मंत्रालय के बजट का समर्थन करता हूं।

 

 

s*श्री मनसुखभाई डी. वसावा (भरूच) :  अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से ग्राम विकास मंत्री जी का ध्यान दिलाना चाहता हूं कि रोजगार गारंटी योजना गरीबों, बेरोजगारों के लिए यह योजना बहुत अच्छी योजना है। गांवों का विकास करने वाली योजना है। आशीर्वादरूप योजना है।

          किंतु, कहीं कहीं पर यह योजना का लाभ आज भी नहीं मिल पाता है। जैसे कि समुद्र तल में खारापन दूर करने का कोई उपाय नहीं है। एनडीए के समय में योजना थी उनको बंद कर दियाय है और जहां रिजर्व फारेस्ट जैसे वन कानून है। अभ्यारण्य जैसे वन कानून है। वहां ग्रामीण विकास मंत्रालय की बहुत सारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता। वन कानूनों वाले गांवों में आने जाने के लिए रोड़ नहीं है। पीने का पानी नहीं है ऐसे गांवों में प्रधान मंत्री सड़क योजना वाली कोई भी योजना से रोड़ बनाना चाहिये और वैसे गांवों का सम्पूर्ण विकास होना चाहिये।

          गुजरात के नर्मदा, भरूच, सूरत जिला के बहुत सारे गांव हैं जो आज भी बहुत सारी यातनायें भुगत रहे हैं, आने जाने का रास्ता नहीं है तो ऐसे गांवों में ग्रमीण विकास मंत्रालय की बहुत सारी योजना लागू होना चाहिये। रोजगार गारंटी योजना का लाभ मिलना चाहिये।

         

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

*Speech was laid on the Table.

 

14.00 hrs.

उपाध्यक्ष महोदय : इसके साथ ही मैं एक बात और जोड़ना चाहता हूं और वह यह है कि बहुत से क्षेत्र ऐसे हैं जहां फस्ट और सैकेंड लैवल पर पानी गंदा है। अगर स्कूलों में बच्चों के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था हो जाए तो बच्चों को स्वच्छ पानी मिल सकेगा।

          श्री राम कृपाल यादव।

श्री प्रभुनाथ सिंह : केवल प्रशंसा ही मत करिएगा और बातें भी बिहार के बारे में बोलिएगा।

श्री राम कृपाल यादव (पटना)  :  बिहार के बारे में जानते हैं तो बिहार पर ही बोल रहा हूं। आप शांति से बैठे रहिए। …( व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे इस ग्रामीण विकास मंत्रालय के बजट पर चर्चा करने का अवसर प्रदान किया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय एक बहुत ही अहम मंत्रालय है और जैसे कि हम सब लोग जानते हैं कि भारत जो गांवों का देश है जहां 70 से 80 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। जब तक गांवों में खुशहाली नहीं होगी, देश खुशहाल नहीं हो सकता। ग्रामीण विकास मंत्रालय के माध्यम से गांवों की खुशहाली की जिम्मेदारी मंत्री जी पर है जिन्होंने बखूबी निभाने का काम किया है। मैं इसके प्रति भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण योजना भारत निर्माण योजना चलाई है। इंडिया का विकास बहुत हुआ है लेकिन भारत का निर्माण नहीं हो सका है और जब तक भारत का निर्माण नहीं होगा, भारत का विकास नहीं होगा, जहां गावों में गरीब तबके के लोग बसते हैं तब तक कितना भी आप कुछ कर लीजिए, मगर भारत विकसित नहीं हो सकता। आज जिस तरह से गांवों और शहरों में खाई बढ़ती जा रही है, किस तरह से गांवों के लोग धीरे-धीरे प्लान करके शहरों में बसते जा रहे हैं, उसका मूल कारण यह है कि गांवों के स्तर पर जो सुविधाएं गरीबों को, मजदूरों को, खेतों में काम करने वाले लोगों को मिलनी चाहिए, वे सुविधाएं उनको गांवों में नहीं मिलती। इसलिए मजबूरी में रोजगार के लिए या अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए या दूसरी सुविधाएं पाने के लिए पूरी गांव की आबादी शहरों में बसती जा रही है। अगर ये ही सारी सुविधाएं सरकार गांवों में प्रदान कर दे तो जो गरीब लोग मजबूरी में गांवों से शहरों की तरफ बस रहे है और शहर में उनका जो बुरा हाल हो रहा है, वह नहीं होगा। वह रोजी-रोटी कमाने के लिए शहर में बस रहा है। वह गरीब आदमी जो रोजी-रोटी कमाने के लिए गटर में रहने का काम कर रहा है और उनके पास पीने का पानी नहीं है, बच्चों को पढ़ाने की सुविधा नहीं है, वह गरीब आदमी बहुत सारी असुविधाओं को झेलते हुए भी अशुद्ध हवा में भी रहने का काम कर रहा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय पर ही ऐसे लेगों की जिम्मेदारी है कि गांवों के उन वर्गों, तबकों को हम को संतुष्ट करें जो वर्ग, जो तबका असंतुष्ट होकर बड़े पैमाने पर शहरों की तरफ भाग रहा है। आज गांवों के लोग शहरों में बसने का काम कर रहे हैं।

           कई माननीय सदस्यों ने भारत निर्माण की कई योजनाओं की चर्चा की है। मैं भी माननीय मंत्री जी का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं, वैसे माननीय मंत्री जी के प्रति जितना हम साधुवाद व्यक्त करें, जितना प्रशंसा करे, वह कम होगी क्योंकि अपने प्रयास से पिछले चार सालों में उन्होंने जो विकास करने का प्रयास किया है, जो धनराशि आबंटित की है और उस राशि को सही जगह पहुंचाने का काम किया है, वह अपने आप में एक रिकार्ड है। पूर्ववर्ती सरकार और इस सरकार ने काफी पैसा विभिन्न योजनाओं में दिया है चाहे वह इंदिरा आवास योजना हो या जल की सुविधा के लिए हो या प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के लिए हो या बंजर जमीन को विकसित करने के लिए हो, रोजगार गारंटी योजना हो, मैं कहूंगा कि जो नया क्रंतिकारी कदम इस सरकार ने उठाया है, जिसके लिए लोग वर्षों से सपना देख रहे थे, उस रोजगार गारंटी योजना को वैधानिक दर्जा देकर जो काम किया है, वह भी अपने आप में सराहनीय है और एक बड़ा कदम है। इसके लिए मैं माननीय प्रधान मंत्री जी का और यूपीए सरकार का आभार व्यक्त करना हूं मगर निश्चित तौर पर योजनाएं तो बनती रहती हैं लेकिन योजनाओं का जो सही रूप है, वह आम लोगों तक नहीं जा पाता तो योजनाओं का कोई मतलब नहीं रह जाता। आप राशि आबंटित कर रहे हैं और राशि जा भी रही है, आपका मन भी साफ [r26]है।  आपकी नीति भी साफ है और नीयत भी साफ है। हमें लगता है कि जो एजेन्सियां हैं उन पर भी जिम्मेदारी होती है। इसकी एजेन्सी राज्य सरकारें होती हैं। राज्य सरकाऱें अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करेंगी तो निश्चित तौर पर चूंकि फैडरल स्ट्रक्चर है, उसमें आप कुछ नहीं कर पाएंगे। आप सीधे डंडा नहीं चला सकते हैं। आपके पास उतनी शक्ति नहीं है। मैं खासकर बिहार की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ। अभी हमारे वरिष्ठ माननीय सदस्य प्रभुनाथ सिंह जी बोल रहे थे। हमारे यहां बिहार में वे सत्तारूढ़ दल के सदस्य हैं, उनकी सरकार राज्य में चल रही है। वे क्रंतिकारी व्यक्ति हैं। यदि राज्य सरकार गड़बड़ करती है तो वे चिल्लाते हैं और यही डैमोक्रेसी का मतलब होता है। इधर चिल्लाने का मतलब नहीं है। सदन में और सदन के बाहर भी यदि कोई सरकार चाहे वह यहां की हो या वहां की हो, अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करती है तो जनता सबको वाच कर रही है क्योंकि सब जनता के बीच में से चुनकर आते हैं।  हमें लगता है कि इन दिनों इनको कुछ सत्ता से मोह हो गया है, इनको जरूर सत्ता से प्यार  हो गया है, इसलिए ये अपने दायित्वों को भूल गए हैं और जनता की जो आवाज़ उठनी चाहिए, वह ठीक से नहीं उठ रही हैं।

उपाध्यक्ष महोदय : यहां प्रभुनाथ सिंह जी जबाव देने के लिए बैठे हैं।

श्री राम कृपाल यादव :  वे जवाब देंगे। मैं आपके माध्यम से इनका ध्यान आकृष्ट करवा रहा हूं क्योंकि ये बहादुर और लड़ाकू साथी हैं। इनका अपना लड़ने का इतिहास रहा है मगर आजकल इन्होंने लड़ना बंद कर दिया है। पता नहीं क्या समझौता हो गया है, इनको शायद मोहब्बत हो गई है, प्यार हो गया है, इसलिए सही बात नहीं बोल पा रहे हैं।

           मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट करूंगा और बंजर भूमि की बात करना चाहूँगा। बंजर भूमि को खेती योग्य बनाना भारत निर्माण के अंतर्गत आता है। मैं समझता हूं कि हजारों करोड़ रुपये इन्होंने इसके लिए पूरे देश के पैमाने पर आबंटित किये होंगे। जितनी कृषि योग्य भूमि है, उसको अक्वायर करके वहां उद्योग लगाए जा रहे हैं। उद्योग लगने चाहिए और हम इसके पक्षधर हैं। जब तक देश में उद्योग नहीं लगेंगे, रोज़गार नहीं होंगे, हम विकसित नहीं होंगे। मगर रोज़गार के अवसर प्राप्त करने के लिए और देश को समृद्ध करने के लिए आम लोगों को खत्म न करें। स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन के नाम पर न जाने कितने हज़ारों एकड़ ज़मीन देश के विभिन्न राज्यों से ले रहे हैं। आप लीजिए, मगर क्या होगा? हमारी आबादी बढ़ रही है, उत्पादन क्षमता घट रही है। उत्पादन क्षमता इसलिए घट रही है कि कृषि योग्य भूमि को हम सिंचित नहीं कर पा रहे हैं। पानी का अभाव है, कई तरह की बात है। उसमें यह भी है कि इकोनॉमिक ज़ोन के नाम पर हम बड़े पैमाने पर कृषि योग्य भूमि ले रहे हैं। उसकी व्यवस्था करनी चाहिए। उसके लिए बंजर भूमि को कृषि योग्य भूमि बनाने का दायित्व आपके ऊपर है। हम आपके माध्यम से जानना चाहेंगे और मंत्री जी जब जवाब दें तो उसमें बताएं कि कितने हजार करोड़ रुपये आपने देश के अन्य भागों में बंजर भूमि को कृषि योग्य भूमि बनाने के लिए आबंटित किये, कितने खर्च कर पाए और कितनी बंजर भूमि को कृषि योग्य भूमि बना दिया। नहीं तो यह होगा कि आपकी जो स्कीम है, यह लोकप्रिय स्कीम है, यह कागजों पर रह जाएगी तो निश्चित तौर पर मैं समझता हूं कि हम लोगों को कोई जानकारी नहीं होगी। हम जानना चाहेंगे कि हमारा जो टार्गैट है, हमारा जो उद्देश्य है, उसकी पूर्ति में हमने कितनी सफलता प्राप्त की है। इसकी जानकारी हम चाहेंगे ताकि स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन के अंतर्गत की ज़मीन राज्य को भरपाई कर सकें और उत्पादन की क्षमता प्राप्त कर सकें। मैं निवेदन करूंगा कि निश्चित तौर पर इसका जो कुप्रभाव पड़ रहा है उसको कम करने के लिए राष्ट्रीय उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए आप क्या करने जा रहे हैं और क्या कर पाए हैं यह अवश्य बताएँ।

          दूसरी महत्वपूर्ण योजना की चर्चा कई माननीय सदस्यों ने की है – राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना। यह बहुत ही लोकप्रिय योजना है। इस पर बड़ी चर्चा हुई मगर हमें लगता है कि कहीं न कहीं इसमें कोई कमी है जिसकी वजह से राष्ट्रीय रोज़गार गारंटी योजना के अंतर्गत जो हज़ारों करोड़ रुपये आबंटित कर रहे हैं, उसका लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। जाब कार्ड ठीक से नहीं बन रहे हैं। जाब कार्ड बोगस बनाकर बड़े पैमाने पर ठेकेदारों के हाथ से  ट्रैक्टर से काम हो रहा है, जैसा यहां माननीय सदस्यों ने चर्चा की है। [b27]  आप उसकी किस तरह से मोनिटरिंग कर रहे हैं, आप अपने जवाब में बताएंगे। आपने कहा कि हम काम के अवसर उपलब्ध कराएंगे। अगर काम के अवसर उपलब्ध नहीं होंगे तो हम निश्चित तौर पर उतने दिन का पैसा उपलब्ध करा देंगे, नकद राशि उपलब्ध करा देंगे। आपने कितने लोगों को राशि उपलब्ध कराई है? हम खास कर अपने प्रदेश की चर्चा कर रहे हैं, हमारा प्रदेश बिहार जो गरीबों का प्रदेश है, जहां रोजगार की समस्या है। हमारे यहां दो इलाके हैं, जिनमें एक तरफ बाढ़ आती है और एक तरफ सुखाड़ होता है। हमारे यहां बड़े पैमाने पर वर्षों से पलायन हो रहे हैं। वहां के मुख्य मंत्री जी ने कहा था कि हमारी सरकार जब बनेगी तो हम रोजगार के इतने अवसर उपलब्ध प्राप्त करा देंगे कि बाहर के लोग हमारे प्रदेश में आ जाएंगे, जो पहले से बाहर गए हुए हैं, अब तो कोई नहीं जाएगा। हम ऐसा माहौल बनाएंगे, ऐसा रोजगार उपलब्ध कराएंगे कि बाहर के लोग यहां आ जाएंगे। पता नहीं माननीय मंत्री जी को कितनी इसकी जानकारी हुई होगी। आपको इस बात की जानकारी लेनी चाहिए कि वहां कितने रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। आज भी बड़े पैमाने पर बिहार के लोग, जैसे पंजाब में आपके यहां है, हरियाणा, मुंबई, असम एवं महाराष्ट्र तथा दिल्ली आदि कई जगहों पर अपना श्रम लगा कर अपनी रोजी-रोटी कमाने का काम कर रहे हैं। मैं समझता हूं कि वहां इसका असर पड़ा है। जैसे कि मंत्री जी स्वयं यदा-कदा हम लोगों से चर्चा के दरम्यान बोलते रहते हैं कि राम कृपाल जी, राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत बिहार सरकार को हमने जो राशि आबंटित की है, वह पैसा खर्च नहीं हो रहा है। न सिर्फ रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत, बल्कि विभिन्न योजनाओं में इंदिरा आवास इतनी लोकप्रिय योजना है, उसमें भी खर्च नहीं हो रहा है। पेयजल पर भी खर्च नहीं हो रहा है। पैसा जो बड़े पैमाने पर खर्च हो रहा है, उसमें जो अनियमितता है उस कारण से वह पैसा वहां नहीं पहुंच पा रहा है। यह चिन्ता का विषय है और हमारे लोग बाहर जाकर मार खा रहे हैं। महाराष्ट्र में मार खा रहे हैं, वहां किसी का हाथ काट दिया जाता है। असम में बड़े पैमाने पर लोग मारे जा रहे हैं। दिल्ली में भी अब शुरू हो गया है। अगर किसी को अपने यहां रोजगार के अवसर मिल जाएंगे तो वह बाहर क्यों जाएगा। वह मार खाकर और गाली सुन कर क्यों दूसरे राज्य में जाएगा। ऐसी कई समस्याएं हैं। ऐसे कई गरीब एवं पिछड़े प्रदेश हैं जिनके उद्देश्यों की पूर्ति राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत हो सकती है। मगर उसका सही रूप से इम्प्लीमेंटेशन नहीं हो रहा। वहां के मुख्य मंत्री जी किस तरह से मोनिटरिंग कर रहे हैं। वे क्या कर रहे हैं, किस तरह से देख-रेख हो रहा है। वहां अधिकारियों को छूट है – लूट सको तो लूट लो, राम-नाम की लूट है और इसी लूट में प्रभु नाथ बाबू का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। ये क्यों नहीं बोल रहे हैं। जब इन्हें बोलने का अवसर मिलेगा तो हम आशा करते हैं कि ये जरूर इस पर बोलेगें। ये स्पष्ट वक्ता हैं, दूध का दूध और पानी का पानी रखते हैं। हमें विश्वास है कि स्पष्ट रूप से अपनी बात को रखेंगे। जॉब कार्ड वगैरह ठीक ढंग से नहीं मिल रहा है। हम अपने क्षेत्र की बात बोल रहे हैं, हमारे क्षेत्र में पटना से सटे हुए फुलवारी विधान सभा क्षेत्र है। हमने इस मामले को सदन में उठाया था, माननीय मंत्री जी का ध्यान इस तरफ आकृष्ट कराया था। वहां बड़े पैमाने पर काम कर लिए गए, लेकिन उन मजदूरों को पेमेंट ही नहीं दे रहे। राज्य सरकारों के माध्यम से पेमेंट होता है, कार्यवाही होती है तो मैं समझता हूं कि निश्चित तौर पर राज्य सरकार अगर अपने कर्तव्यों को ठीक ढंग से ईमानदारी के साथ निर्वहन कर रही होती तो यह परेशानी नहीं झेलनी पड़ती और धरना एवं प्रदर्शन की स्थिति नहीं आती। जब तक इस देश की क्रयशक्ति गरीबों के हाथ में है,…( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : आपको बोलते हुए 15 मिनट हो गए हैं, आपकी पार्टी के अन्य माननीय सदस्यों को भी बोलना है।

श्री राम कृपाल यादव : उपाध्यक्ष महोदय, कृपा कर हमें बोलने का थोड़ा और अवसर दिया जाए। गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों की हमारा यहां बहुत आबादी है। मैं समझता हूं कि उनकी क्रयशक्ति बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए हम क्रयशक्ति बढ़ाने का उपाय सोचेंगे, या नहीं सोचेंगे।[s28] 

          उपाध्यक्ष महोदय, उसके लिए और क्या सोचेंगे? ग्रामीणों का विकास कैसे होगा? गरीब अगर विकसित नहीं होगा, गरीब के पास पैसा नहीं आएगा, गरीब की क्रय-शक्ति नहीं बढ़ेगी, तो ग्रामीण विकास का कोई मतलब नहीं है। देश के 70-80 प्रतिशत गरीब लोगों की क्रय-शक्ति बढ़ाए बिना देश की हालत ठीक नहीं हो सकती है। जब देश की हालत ठीक करने के लिए आप बैठे हैं, तब गरीबों की क्रय-शक्ति बढ़ाइए। महंगाई की स्थिति तो आप देख ही रहे हैं।

          महोदय, दूसरी महत्वपूर्ण चीज पानी, जल, ड्रिंकिंग वाटर है। हिन्दुस्तान की आजादी का 61वां वर्ष प्रारम्भ हो गया है और 61 साल की आजादी के बाद भी, हम अगर आम लोगों तक पीने का पानी नहीं पहुंचा पा रहे हैं, तो आजादी का कोई मतलब ही नहीं हुआ। आप भी गांव और गरीब परिवार से आते हैं। आप भी अहसास करते होंगे और पूरा सदन भी इस बात का अहसास करता होगा। आज भी देश के ग्रामों में पीने का शुद्ध पानी ठीक प्रकार से नहीं मिल रहा है। किसी गांव के लोग गन्दे कुए का पानी पी रहे हैं, तो किसी गांव के लोग गंदे तालाब का पानी पी रहे हैं। खासकर हमारे प्रदेश बिहार में ऐसी स्थिति है। हमारे प्रदेश में गरीबी भी है; इसमें कोई दो मत नहीं हैं। वहां गरीब भी हैं, पिछड़े भी हैं। उसके कई कारण हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है कि वहां ड्रिंकिंग वाटर अवेलेबल नहीं है।

          महोदय, बिहार के अनेक गांवों के पानी में आर्सैनिक आ रहा है। इस कारण वहां बहुत लोग रोगों से ग्रस्त हैं। इसके लिए हमने क्या कार्रवाई की है? हमारे पास योजना है। बिहार के विभिन्न इलाकों के बारे में आपके पास रिपोर्ट्स हैं, लेकिन वहां अभी तक पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। मैं आपके माध्यम से पूछना चाहता हूं कि वहां शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए आप क्या व्यवस्था कर रहे हैं? निश्चित तौर पर अगर हम ड्रिंकिंग वाटर नहीं देंगे, तो यह देश के आम नागरिकों के साथ न्याय नहीं होगा।

          महोदय, शौचालय की व्यवस्था का मामला भी मंत्री जी के विभाग से सीधा जुड़ा हुआ है। हिन्दुस्तान की 61 वर्ष की आजादी के बाद भी हमारे देश की मां और बहनें सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले शौच जाने को मजबूर हैं। हमारे नेता, डॉ. राम मनोहर लोहिया ने कहा था कि आज जो हिन्दुस्तान है, वह ऐसा हिन्दुस्तान है, जिसकी मां और बहनें दिनभर गंदे शौच को अपने पेट में रखकर जीने को मजबूर हैं। हमने आजादी अवश्य प्राप्त कर ली है, लेकिन आजादी का सही मतलब अभी तक गांवों तक नहीं पहुंच सका है। आपने शौचालय का अभियान चलाया है। बहुत कारगर ढंग से चलाया है और आपके पास योजना है। मगर ये शौचालय कितने हद तक सफल हुए हैं, यह आपको मालूम होगा। आपने पूरे हिन्दुस्तान के स्तर पर और हमारे बिहार के पैमाने पर जो टार्गेट रखा था, क्या वह पूरा हुआ है, यह हम माननीय मंत्री जी से जब वे जबाव देंगे, तब जानना चाहेंगे? आज भी, आपके चाहने के बावजूद गांवों में शौचालयों की उपलब्धता बड़े पैमाने पर नहीं हो रही है। हम यह नहीं कहेंगे कि आप अवेयरनैस जगाने का काम नहीं कर रहे हैं। आप अवेयरनैस जगा रहे हैं। आप लोगों को जागृत करने का काम कर रहे हैं। आप मीटिंगों के माध्यम से और अपने भाषणों के माध्यम से लोगों में जागृति ला रहे हैं, लेकिन इस काम को करने वाली एजेंसी राज्य सरकार की है और स्टेट गवर्नमेंट अपने काम को ठीक प्रकार से नहीं कर रही है।

          महोदय, विज्ञापन छप रहे हैं, वह हम लोगों पर हमला है। माल महाराजा का और मिर्जा खेलें होली, वाली बात हो रही है। भारत सरकार का पैसा है और जो वहां के सांसद हैं, उन्हें ही फंक्शन में नहीं बुलाया जाता है, क्योंकि हम लोग प्रतिपक्ष के हैं। हम बताना चाहते हैं कि हमें अपने फोटो नहीं छपवाने हैं, हम तो चाहते हैं कि गांवों का विकास हो। हमारे लिए गांवों का विकास ही सर्वोपरि है। गांवों के विकास का दायित्व राज्य सरकारों का है। वहां ऐसा हो रहा है कि पूरा पैसा भारत सरकार दे रही है और फोटो छप रहा है माननीय मुख्य मंत्री जी का और वहां के मंत्रियों। भारत के प्रधान मंत्री जी गायब, मंत्री जी गायब और वहां के लोकल सांसद गायब। जगह-जगह बोर्ड लगे हुए हैं और उनमें नीचे लिखा हुआ है ‘राज्य सरकार के सौजन्य से’ मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि इस बारे में आपका क्या विचार है? काम कीजिएगा आप, काम कर रही है यू.पी.ए. सरकार और नाम हो रही है एन.डी.ए. सरकार का। क्या व्यवस्था है, इसमें आप कितने सफल हो रहे हैं, वह हमें बताइए? सारे विकास कार्यों का श्रेय हमारे प्रदेश के मुख्य मंत्री ले रहे हैं। उन्हें ‘विकास पुरुष’ कहा जा रहा है। विकास-विकास का नारा लग रहा है। वाह रे विकास। पैसा हमारा और नाम राज्य सरकार का। वोट हमारा और राज तुम्हारा, यह चलने वाला नहीं है। देश का अवाम जानता है कि अगर वोट हमारा है, तो राज भी हमारा होगा। इसलिए मैं माननीय मंत्री जी आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि इसके लिए आप कुछ कीजिए।

उपाध्यक्ष महोदय : राम कृपाल यादव जी, आपको भाषण करते हुए 20 मिनट हो गए हैं। अब आप अपना भाषण समाप्त कीजिए।

श्री राम कृपाल यादव : मैं कनक्लूड कर रहा हूं। माननीय मंत्री जी आप जरा ध्यान दीजिए और कुछ कराइए।

उपाध्यक्ष महोदय : आपको बोलते हुए 20 मिनट हो गए हैं। मुझे कोई ऐतराज नहीं है। यदि माननीय मंत्री जी चाहें, तो आप रात भर इस बहस को चलाइए।

श्री राम कृपाल यादव : महोदय, मैं दो-तीन योजनाओं का जिक्र कर के अपनी बात समाप्त कर दूंगा। सर, अगर हमारी बात कुछ कड़वी लग रही हो, तो हमें माफ कीजिएगा। इंदिरा आवास योजना में आपने 25 हजार रुपए से 35 हजार रुपए कर दिया, अच्छी बात है।[r29] 

          महोदय, हजारों वर्षों से गरीब का घर का सपना था। उसे पूरा करने के लिए इंदिरा आवास योजना प्रारंभ की गई। झौपड़ियों को आवास में बदलने का आपने अच्छा काम किया है, यह बहुत ही स्वागत योग्य कदम है। लेकिन कब तक सभी लोगों का सपना पूरा होगा, क्योंकि आप जरूरत के मुताबिक आवास नहीं दे पा रहे हैं। इंदिरा आवास योजना में आवास 25 हजार रुपयों से नहीं बनता है। आपने इस राशि को 35 हजार रुपए किया है। जिस तरह से महंगाई बढ़ी है, लोहा, सीमेंट और मकान बनाने का मैटीरियल का दाम बहुत बढ़ा है, इसके साथ मजदूरी भी महंगी हो गई है, ऐसे में क्या कोई 35 हजार रुपए में मकान बना पाएगा? माननीय सदस्य ने सही कहा है कि इस पैसे को और ज्यादा बढ़ाए जाने की जरूरत है। इतने पैसे में भी दलालों को, बिचौलियों को पैसा देना पड़ता है।

 

 

 

14.21 hrs.

(Shri Giridhar Gamang in the Chair)

 

          पांच से दस हजार रुपए बिचौलिए या व्यवस्था के अंदर लोगों को पैसा देना पड़ता है। अगर वे यह पैसा नहीं देते हैं तो पैसा लाभार्थी तक नहीं पहुंच पाएगा। आपने कुछ उपाय किए हैं, लेकिन वे सार्थक नहीं हैं। आज भी बड़े पैमाने पर इस पैसे में लूट हो रही है। इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत जो पैसा दिया जा रहा है, पंचायत स्तर पर, बीडीओ से ले कर दूसरे अधिकारी  उसमें लूट मचा रहे हैं। उस पर आप कैसे नियंत्रण करेंगे, कैसे गरीब तक पैसा जाएगा? 35 हजार रुपया आपने इस योजना के लिए लाभार्थी को देने के लिए रखा है, लेकिन उसमें से ज्यादातर पैसा बिचौलियों में ही चला जाता है और गरीब आदमी तक पूरा पैसा नहीं जा रहा है।

          वृद्धा अवस्था पेंशन योजना के बारे में भी मैं कुछ कहना चाहता हूं। यह बहुत लोकप्रिय योजना है।  आपने पेंशन को बढ़ा कर दो सौ रुपए किया है। उसका दायरा भी प्रधानमंत्री जी की घोषणा के अनुसार बढ़ाया है। यह उत्तम कदम है, लेकिन हम जिस प्रदेश से आते हैं, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे यहां अभी तक राज्य सरकार ने जो योजना थी, दो तरह की योजनाएं थीं, एक भारत सरकार की योजना है और दूसरी राज्य सरकार की योजना है। भारत सरकार की योजना तो चल रही है, लेकिन बिहार सरकार की योजना नहीं चल रही है। वहां की सरकार समझती है कि सौ रुपए को दो सौ रुपया उसने किया है और राज्य सरकार अपने नाम से वह पैसा लाभार्थी को बांट रही है। आप उसके लिए क्या व्यवस्था कर रहे हैं? राज्य सरकार वहां सहयोग नहीं दे रही है। राज्य सरकार वहां अपना नाम भांजने का काम कर रही है। इसे रोकने के लिए आप क्या व्यवस्था करने जा रहे हैं? आप जो काम कर रहे हैं, कम से कम उसके लिए विज्ञापन तो छपवाइए। वहां एक पैसा भी राज्य सरकार की तरफ से इस योजना के लिए नहीं दिया गया है। पूववर्ती सरकार ने जो पैसा दिया था, उसे भी इस सरकार ने बंद कर दिया है। राज्य सरकार अपनी तरफ से कोई पैसा नहीं दे रही है, इसलिए हम चाहते हैं कि इन योजनाओं का प्रचार और प्रसार मंत्रालय अपने माध्यम से करे, जिससे कि राज्य सरकार आपके कामों को अपने खाते में न ले सके। वृद्धावस्था पेंशन योजना एक लोकप्रिय योजना है। आपने 65 वर्षों के वृद्धों के लिए घोषणा की है। आप इस योजना को इम्प्लिमेंट कीजिए। अभी तक राज्य सरकारों द्वारा पैसा नहीं दिया जा रहा है। लोगों के आवेदन आ रहे हैं, लेकिन उन्हें पैसा नहीं दिया जा रहा है। एक अंतिम बात मैं प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के बारे में कहना चाहता हूं। यह योजना एक क्रान्तिकारी कदम है। पूरे देश में इस योजना के अन्तर्गत आपने जो राशि आवंटित की है और योजना रखी है कि वर्ष 2009 तक एक हजार की आबादी वाले गांवों को सड़क से जोड़ दिया जाएगा। यह अच्छी बात है कि काम हो रहा है और वाहवाही भी हो रही है, लेकिन मैं यह जानना चाहता हूं, हमारे यहां सेन्ट्रल एजेन्सी काम कर रही है, जिस रफ्तार से आप पैसा देना चाहते हैं, जिस रफ्तार से आप काम करवाना चाहते हैं, उस रफ्तार से देश और बिहार में काम नहीं हो रहा है। मैं यह जानना चाहता हूं कि आपने पिछले तीन-चार वर्षों में जो राशि आवंटित की है, उसका कितनी गुणवत्ता के साथ उपयोग हुआ है? मैंने आपका ध्यान गुणवत्ता की तरफ आकर्षित करवाया है। गुणवत्ता की कमी की वजह से रोड़ पांच साल से पहले ही टूट जाता है। एनबीसीसी इत्यादि चार-पांच एजेंसियां काम कर रही हैं, लेकिन वे धीमी गति से कर रही हैं। इसमें राज्य सरकार का असहयोग भी है। हमारे यहां भारत सरकार जो काम कर रही है, उससे हमारी और यूपीए सरकार की इमेज बढ़ रही है। इससे भारत सरकार और एमपीज़ को फायदा हो रहा है तो राज्य सरकार ने अड़ंगा लगा दिया है, पूर्ववर्ती राज्य सरकार और वर्तमान की केन्द्र सरकार ने एमओयू साइन किया था और सेन्ट्रल एजेन्सी को जिम्मेदारी दे दी गई[r30] । राज्य सरकार ने कहना प्रारंभ कर दिया है कि हम सेंट्रल एजेंसी से काम नहीं करायेंगे, क्योंकि उनका बोर्ड वहां नहीं लगा रहा है। उन्होंने कहा कि इनका डीपीआर बनाकर मत भेजो।  डीपीआर बनाने का आपने डायरेक्शन दे दिया, आप अडिग हैं कि आप इसे करायेंगे।  आपने यहां तक राज्य सरकार को कहा कि वर्ष 2009 तक सड़कों का निर्माण करना है, जहां भी एक हजार से अधिक की आबादी है। पैसे की कोई कमी नहीं है।  आप सेंट्रल एजेंसी को भी काम करने दें, राज्य सरकार भी जितना दे सके, योजना भेजे, हम उसे भी राशि देंगे। मगर राज्य सरकार की वजह से खासकर बिहार में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का पूरे तौर पर लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। 

          मेरा माननीय मंत्री जी से कहना है कि आपको बिहार पर स्पेशल फोकस करना है, क्योंकि आप बिहार के सपूत हैं और बिहार के लाल हैं।  इन तमाम चीजों पर आपको ध्यान देना है।  बागवानी योजना के संबंध में कहना चाहूंगा कि पिछले तीन-चार साल के दरम्यान मात्र पैंतीस करोड़ रूपए बिहार की सरकार इसके लिए ले सकी है।  ये है, बिहार की सरकार, जहां विकास पुरूष हो रहे हैं।  ये वहां के हालत हैं।  मैं समझता हूं कि इन तमाम बतों का आप जिक्र करेंगे।

          ग्रामीण विकास मंत्रालय के माध्यम से विभिन्न योजनाओं की यदि ठीक ढंग से मानिटरिंग नहीं की जाएगी, ठीक ढंग से राशि आवंटित नहीं की जाएगी, गांव का विकास नहीं होगा, तब तक इस देश का विकास नहीं होगा। मैं इस बात को मानता हूं। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पिछले वित्तीय वर्ष से इस बार लगभग 18 से 19 प्रतिशत राशि इनहैंस की है। पहले की सरकार से लगभग तीन से चार गुना पैसा बढ़ाने का काम किया है।  यूपीए सरकार, माननीय प्रधानमंत्री जी और मंत्री जी आप गांव की चिंता से चिंतित हैं और आप ही कुछ कर सकते हैं।  इनसे कोई आशा नहीं रखी जा सकती है।  ये भारत विकास वाले लोग नहीं हैं, ये इंडिया शाइनिंग में विश्वास करते हैं। भारत का निर्माण आपके हाथों में है।  जब तक आपका कुशल नेतृत्व नहीं मिलेगा, तब तक देश और गांव का विकास नहीं हो सकता है।

          इन्हीं चंद बातों के साथ ग्रामीण विकास मंत्रालय के बजट का पुरजोर समर्थन करते हुए कहना चाहूंगा कि जो कमी है, उसे आप दूर कीजिए और देश को आगे ले जाने में सहायक भूमिका अदा कीजिए।  गांव का गरीब आपकी तरफ देख रहा है। आप गांव के बेटे हैं। खेत और खलिहान में काम करने वाले किसान हैं।  मुझे विश्वास है कि आपके नेतृत्व में देश आगे बढ़ेगा। 

                                                                                                         

*SHRIMATI K. RANI (RASIPURAM) : Sir,  a great privilege for me to participate in the discussion on the Demands for Grants of the Ministry of Rural Development for 2008-09, and also to extend my support. While doing so, I would like to place the following few points for the consideration of this august House.

In rural development, we have three very ambitious and flagship
programmes, viz. Bharat Nirman, NREG scheme and the PMGSY, among others.

As regards Bharat Nirman, our country has made impressive progress in the
previous year. Under Bharat Nirman, on each day of the year, 290 habitations
are provided with drinking water, 17 habitations are connected through all
weather roads. 52 villages are provided with telephones and 42 villages are
electrified each day. This is the achievement of our Govt, under Bharat Nirman,
which needs recognition from all sections of the House.

Under this programme, action is being taken with regard to irrigation facilities, rural roads, rural housing, rural water supply, rural electrification and rural telecommunication connectivity, etc.

This is a programme envisioned,

•        To connect 66,802 habitations with all weather roads

•        To construct 1,46,185 kilometers of the new rural roads network

•        To upgrade 1,94,132 kilometers of the existing rural roads network

The target to complete them is next year and hopefully, with the guidance of the UPA Chairperson Smt. Sonia Gandhi and under the supervision of our hon. Prime Minister, they would be completed by the targeted date, with sufficient allocation of funds for all the projects.

Coming to the National Rural Employment Guarantee Scheme, it is said that it will be rolled out to all the 596 rural districts in India. Here, Rs. 16,000crore is provided to start with; and there is also an assurance from the Finance Minister that as and when there is demand, the allocation will be increased.

 

* Speech was laid on the Table.

As far as Tamil Nadu is concerned, there are ten districts which are covered under NREGS now. This Scheme is a grand success all over the country and I request that it may be increased to cover more districts of rural Tamil Nadu so that many poor people are benefited.

In the case of Rajiv Gandhi Drinking Water Mission, the goal is to supply safe drinking water to uncovered habitations and slipped back habitations. Here, the allocation has been increased from Rs.6500 crore to Rs.7300 crore this year.

The other important flagship programme of this Govt, here is the Rural Roads Scheme or PMGSY. Here also, rural roads are being constructed on a grand scale throughout the country, and this Govt, deserves congratulations from all sides of the House.

We know that real India lives in villages. Development has to hit rural India; villages have to be connected by Internet; there should be adequate push to rural economy; ‘Roads’ should lead to rural prosperity; health facilities should be extended to rural India. There is a need to look into all these major aspects and to make sufficient allocation of funds for these.

I hope the Govt, is focusing its attention on all these and making sufficient allocation of money to make rural India a prosperous India so that urban-rural divide is minimized.

With this, I support the Demands for Grants of the Ministry of Rural Development and I thank the Chair for having given me time to participate in this discussion.

 

                                                                                                         

 

 

 

श्रीमती रंजीत रंजन (सहरसा)  :महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी का बजट के लिए धन्यवाद करूंगी।  मुझे अफसोस है और बड़ा दुख है कि चाहे किसी की भी सरकार हो, चाहे आज विपक्ष की हो या कल हमारी सरकार हो, लेकिन जब भी हम लोग रूरल एरियाज में जाते हैं और यहां आते हैं, तो दोनों में जमीन आसमान का अंतर होता है।  यहां आकर हमें बहुत खुशी होती है कि हम भारत सरकार से इतनी सारी योजनाएं रूरल एरियाज के लिए लेकर जा रहे हैं और वह भी उन लोगों के लिए ले जा रहे हैं, जो पिछली पंक्ति में खड़े होते हैं, लेकिन धरातल में उनको कुछ नहीं मिल पा रहा होता है।  हम लोग उनके बीच जाते हैं और मीटिंग करते हैं।  वहां पर जो जमीनी सच्चाई हमें पता चलती हैं, उसमें उनकी बहुत ही दयनीय स्थिति होती है।  आज भी यह सच्चाई है कि आजादी के साठ साल होने जा रहे हैं, फिर भी यदि आप उनके साथ मीटिंग कर रहे होते हैं, तो उनको यह भी नहीं मालूम होता है कि एक सांसद क्या कर सकता है? न हम वृद्धावस्था पेंशन दे सकते हैं, न ही हम उनको लाल कार्ड दे सकते हैं, न हम उनको किरोसीन तेल दे सकते हैं और न ही उनको इंदिरा आवास दे सकते हैं।  उनकी जो जमीनी मांग है, वह इससे ऊपर उठी ही नहीं है।  यही सच्चाई है।  आज हमारे गांव में खासकर बिहार में, हम जिस डिस्ट्रिक्ट को रिप्रेजेंट करते हैं, जिसकी आधी आबादी बांध के अंदर है उनकी यही मांग रहती है और उनकी आंख में आज भी वही आंसू हैं, जो पचास-साठ साल पहले थे।  चाहे जिसकी सरकार रही हो, सिर्फ प्रलोभन देकर उनका वोट ले लिया जाता है। उनको आज यदि सब्सिडी मिल भी रही है, तो भी उनको तीस रूपए से नीचे किरोसीन तेल नहीं मिलता है। यदि उनको आज सब्सिडी मिल रही है, तब भी चाहे अन्योदय योजना हो या अन्नपूर्णा योजना हो लेकिन उनको तीन रूपए प्रति किलो वाला चावल नहीं मिलता है।  डीलर सरेआम मार्केट में उसे बेचता है, उसमें ब्लाक भी मिला होता है, एफसीआई के पदाधिकारी भी मिले होते हैं। आप इंदिरा आवास के लिए चाहे पच्चीस हजार से पैंतीस हजार रूपए कर दें, चाहे पचास हजार रूपए कर दें, फायदा अगर किसी को हो रहा हे, तो वे बिचौलिए हैं, पदाधिकारी है और पंचायती राज के भी कुछ सदस्य हैं।  [p31]      

          हमने इम्प्लीमैंट किया कि भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए हम उनका एकाउंट खुलवाएंगे, लेकिन हम जितनी योजनाएं दे रहे हैं, मैं कहती हूं कि आप उसे एक साइड में रखकर, यदि हमें अभी किसी चीज की जरूरत है तो वह यह है कि इन योजनाओं को इम्प्लीमैंट करने के लिए हम कौन सी योजना बना रहे हैं और इसके लिए हमें ब्लॉकवाइज जाना पड़ेगा। पदाधिकारी, पंचायती राज, विधायक हों या एमपी हों, जो भी कमीशन ले रहे हैं, यहां कोई नहीं बोलता हो, लेकिन डीएम, डीडीसी, ब्लॉक और मैं कहूंगी कि कुछ एमपीज़ तक का पीसी बंधा हुआ है। चाहे एमपी का फंड हो, चाहे रूरल एरिया का फंड हो, सबमें 22 से 30 प्रतिशत पीसी पदाधिकारियों को जाता है। मैं यह भी कहूंगी कि आपने सांसद को चपरासी की तरह बनाया हुआ है। आपने कहा कि हमने आपको निगरानी कमेटी का अध्यक्ष बनाया है, लेकिन यदि सरकार विपक्ष की है तो वहां कोई भी डीएम या पदाधिकारी आपकी सुनने वाला नहीं है, क्योंकि उसे मालूम है कि उसकी मौनीटरिंग सीएम से होनी है। हमने कई बार मीटिंग की और आज यह सच्चाई है कि मैंने चार महीने से मीटिंग करनी बंद कर दी है। हमने बहुत सी चीजों को उजागर किया, चाहे इंदिरा आवास हो, चाहे बीपीएल की लिस्ट हो, चाहे वृद्धा पैंशन हो, चाहे अन्त्योदय हो, चाहे अन्नपूर्णा है, चाहे प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना हो, धरातल पर लाकर सबूत के साथ रिप्रैजैंट किया गया। आपने प्रधान मंत्री निर्माण सड़क योजना शुरू कर दी। लेकिन प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना में आज तक कितनी सड़कों का पूर्ण निर्माण हो चुका है। हमने कितने लोगों को ब्लैक लिस्टेड सामने लाकर दिखाया। जो पांच-पांच बार ब्लैक लिस्टेड हुआ, उसे ही बार-बार टेंडर दिया जाता है, सरेआम टेंडर दिया जाता है। उसे कोई भी पूछने वाला नहीं है। सच्चाई यह है कि जब तक हम धरातल में जाकर इस चीज को इम्प्लीमैंट नहीं करेंगे कि हमें अपनी राशि को इम्प्लीमैंट कैसे करवाना है, तब तक कुछ नहीं होगा। यह सच्चाई है कि स्वर्गीय राजीव गांधी जी ने कहा था कि एक रुपये में से 15 पैसे ही गरीब को मिलते हैं। आज मुझे लगता है कि उससे भी कम मिलता है। आज बिहार में जो प्रशासन की मनमानी चल रही है, पदाधिकारियों की मनमानी चल रही है, सरेआम पीसी और घूस ली जा रही है। मैं कहूंगी कि अपने संविधान में संशोधन करके यदि हम इस पीसी को अनिवार्य कर दें, तो 80 परसेंट राशि जमीन पर उतरनी शुरू हो जायेगी, क्योंकि हम अंदर-अंदर कमीशन और पीसी ले रहे हैं, दे रहे हैं लेकिन ऊपर से बोलने वाला कोई नहीं है। आज हम इंदिरा आवास के लिए गांव-कूचों में जाते हैं, जो जैनविन आदमी है, उसे कुछ मिल नहीं रहा है। हमने बीपीएल की लिस्ट बनाई। एक बार बनायी, तो एपीएल के लोग बीपीएल में आये और बीपीएल के लोग एपीएल में आये।  20 साल से जो लोग बीपीएल के तहत लाभार्थीं थे, आज उनका नाम बीपीएल में नहीं है। उसकी जांच बैठायी गयी और दोबारा बीपीएल लिस्ट बनी। आज तक जो जनरल बीपीएल धारक हैं, उनको अभी तक कार्ड भी मुहैया नहीं कराया गया। अभी जो नयी बीपीएल लिस्ट आयी है, उसमें भी जैनविन लोगों का नाम नहीं है। क्या माननीय मंत्री जी आपको मालूम है कि पंचायती राज में पदाधिकारी और ब्लॉक वोट देखकर कि किस जाति ने, किस पार्टी ने हमें वोट दिया और कौन ग्रुप, कौन गांव, कौन कस्बा हमें वोट देता है, उसके आधार पर बीपीएल लिस्ट बनायी जाती है। उसके आधार पर अन्त्योदय औंर अन्नपूर्णा दिया जाता है। उसके आधार पर किरोसिन तेल दिया जाता है। हम लोग जब गांव में जाते हैं, क्षेत्र में जाते हैं, तो लोग कहते हैं कि हम आपको वोट देकर मर गये क्योंकि सरकार किसी और की है। वे एक ग्रुप को तेल देकर चला जाता है, हम लोगों को कहता है कि 30-40 रुपये में लेना है, तो ले लो। उसके बावजूद जो बचा हुआ तेल है, जो 30-40 रुपये में लेने लायक है, वह यदि मरकर लेते भी हैं लेकि उसमें भी 70 प्रतिशत तेल मार्केट में बेच दिया जाता है या थोड़े अच्छे किसानों को दे दिया जाता है। वे खेतों में ट्रैक्टर चलवाते हैं।

          अभी हमारे माननीय सदस्य रोजगार गारंटी योजना के बारे में कह रहे थे।  आप स्पष्ट करें कि रोजगार गारंटी योजना के तहत क्या बिहार में मिट्टी का कार्य भारत सरकार ने तय किया है या बिहार सरकार ने तय किया है क्योंकि सबको मालूम है कि 17 जुलाई को बिहार में बाढ़ आती है। वहां पर सिवाय मिट्टी के कार्य के अलावा कोई दूसरा कार्य नहीं दिया गया है। कार्य करने वाले लोग जिला परिषद के हों या रोजगार गारंटी के तहत मजदूर लोग हों, वे कहते हैं कि हमें पदाधिकारी ने बोला है कि हमें किसी भी हालत में पैसा खर्च करना है। आप जहां मर्जी गड्ढ़ा खोदो लेकिन पैसा खर्च कर दो। आज किसी के खेत में गड्ढ़ा खोद दिया गया है, सड़क के किनारे गड्ढ़ा खोद दिया गया है। उसके कारण सड़क भी खराब हो रही है और गड्ढ़े भी खराब हो रहे हैं। उसके कारण कीचड़ भी हो रहा है और सड़क भी खराब हुई। इसके अलावा खेतों में गड्ढ़े किये हुए हैं। क्या इसके बारे में किसी ने सर्वे या निगरानी कराई है कि रोजगार गारंटी के तहत मिट्टी का कार्य हो रहा है, मात्र दो तीन महीने के लिए मिट्टी का कार्य होता है। वे लोग पूजा कर रहे होते हैं कि कब बरसात आये और हम अपना फाइल में पैंमेंट उठायें और फिर मिट्टी का मिट्टी हो। हम दोबारा से  फिर वहीं गड्ढ़ा खोदेंगे।[N32] 

          उसी तरह मंत्री जी, क्या आपको मालूम है कि जॉब कार्ड  बनाने के लिए 25 रुपये से लेकर सौ-दो रुपये रुपये तक लिये जाते हैं। यहां वह गरीब व्यक्ति मरता है जो इंदिरा आवास में भी मर रहा है क्योंकि जहां तक कमीशन का सवाल है, तो जो व्यक्ति पांच हजार रुपये देने की हैसियत रखता है, वह गरीब नहीं है । हम लोगों ने गांव मे जाकर देखा कि जो गरीब है, जिसे जैनुइन तरीके से इंदिरा आवास की जरूरत है, वह पांच हजार रुपये की हैसियत नहीं रखता है। ऐसे लोग गांव के बिचौलिये को दो हजार रुपये देकर आज भी  इंदिरा आवास का सपना देख रहे हैं। जब हम मीटिंग करते हैं, तो पता लगता है कि 90 प्रतिशत इंदिरा आवास बन गये हैं। उसके लिए इतनी राशि खर्च हो गयी लेकिन यदि आप गांव में जायें, तो जो गरीब तबका है जिनको शायद भूले से एक राशि मिली भी होगी, उनके पास छत नहीं है। सिर्फ चार या दस फीट की दीवार खड़ी की गयी है। अब आप 35 हजार रुपये करें या 50 हजार रुपये करें, यदि 50 हजार रुपये होंगे, तो मुझे यह जरूर मालूम है कि उनका कमीशन बढ़ जायेगा। आज दिनों-दिन कमीशन बढ़ता जा रहा है। लेकिन जैनुअन तरीके से जो गरीब व्यक्ति है उसे न केरोसिन तेल मिलता है और न ही इंदिरा आवास मिलता है। यहां तक कि बीपीएल लिस्ट से भी उसका नाम छांट दिया गया है। यही हालत भारत सरकार की वृद्धा पेंशन की है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोगों को यह जानकारी नही है कि भारत सरकार की वृद्धा पेंशन कौन सी है और बिहार सरकार की कौन सी है और किस तरह का हमें लाभ मिल रहा है? हम जहां जाते हैं वहां हम प्रयास करते है कि लोगों को इस बात की जानकारी हो, लेकिन उसके बावजूद पदाधिकारियों का रवैया बहुत उदासीन है। हमें इन योजनाओं को सही तरह से इम्प्लीमैंट करना चाहिए। पहले हम लोगों को जागृत करें कि आपके लिए ऐसी कितनी योजनाएं हैं, जो भारत सरकार आपके हक के लिए दे रही हैं। लेकिन उन्हें जानकारी नहीं होती। आज भी उन्हें यही भ्रम है कि जिनका बीपीएल में नाम है, उन्हीं के लिए वह है जबकि आपने कहा है कि जो भी 65 वर्ष से ऊपर है, उसे पैंशन मिलेगी। इसी तरह से आपने विकलांग लोगों के लिए पर पंचायत 15 लोगों का किया है। लेकिन आज तक ब्लाक द्वारा, पंचायत द्वारा बिहार के प्रशासन द्वारा किसी को जानकारी देने की अहमियत नहीं की गयी है ताकि लोगों को जानकारी मिले। जब लोग जागृत होंगे, लोगों को पता चल जायेगा कि हमारा हक है, तो वहां पर कमीशन थोड़ा कम हो जायेगा, लेकिन बंद नहीं होगा।

          माननीय मंत्री जी, मैं आपसे कहूंगी कि सबसे पहले यदि योजना को कार्यान्वित कराना है, तो हम  उसे इम्प्लीमैंट कैसे करें, यह बहुत ही चिंतन का विषय है। यह सिर्फ आज का नहीं है चाहे उसकी सरकार हो या हमारी सरकार हो,  यह 60 साल से चला आ रहा है। जब  तक यह कमीशन बंद नहीं होगा,  तब तक कुछ नहीं होगा। जिन लोगों को खाना मिल रहा है या जिनके पास घर है, वे थोड़ा बहुत कमीशन देकर अपना काम करा लेंगे, लेकिन जो एक दीवार अमीरी और गरीबी को दिनोंदिन पटती जा रही है, हम अपने टाउन का जितना माडर्नाइजेशन कर लें, जितना आगे बढ़ जायें, लेकिन गरीब आज भी गरीब होता जा रहा है, उसकी स्थिति ऊपर नहीं आ रही है। आज भी गांवों में लोगों के पेट में खाना नहीं है। उनको न मिड डे मील मिल रहा है और न ही स्कूलों में सही शिक्षा हो रही है। हम यहां शिक्षा को और अच्छा करने की बात करते हैं, लेकिन गांवों में आपकी बेसिक शिक्षा से ही लोग बेहाल हैं। मैं मिड-डे मील की बात करना चाहूंगी। मैं आपसे यह जरूर कहना चाहूंगी कि मिड डे मील की जिम्मेदारी आप शिक्षकों को न दें। मिड डे मील की जिम्मेदारी होने से वे शिक्षक दो-तीन दिन छुट्टी ले लेते हैं कि हमें चावल लेकर आना है, दाल लेकर आनी है। आप उसका अलग से कोई पदाधिकारी नियुक्त करें और उसके बाद उसकी क्वालिटी को मेनटेन किया जाये। आज भी बहुत सारे पेपरों में आपने देखा होगा, हम लोगों ने आंखों से देखा है कि मिड डे मील में जो खाना बच्चों को परोसा जाता है, उससे कई बच्चे बीमार हुए हैं क्योंकि वे फूफंदी लगा हुआ चवल खा रहे होते हैं।

          मैं माननीय मंत्री जी से कहूंगी कि पहले हम उन गरीबों की उपेक्षा न करें, उन गरीबों का भी हक समझें कि उनका भी हिन्दुस्तान में उतना ही हक है। उनको भी सही फूड, अच्छा भोजन और स्वास्थ्य लाभ का उतना ही हक है जितना एक अमीर आदमी को है। उसके बाद हम कुछ कर सकते हैं।

           मैं एक प्वाइंट कहकर अपनी बात समाप्त करूंगा। मैंने क्वेश्चन ऑवर में स्वजलधारा योजना के बारे में क्वेश्चन उठाया था। आपको भी जानकारी होगी कि वहां जो कोशी एरिया है, मैं सच बता रही हूं कि मैं भी वहां का पानी नहीं पीती क्योंकि यदि मैं चार दिन भी वह पानी पी लूं, तो बीमार पड़ जाऊंगी। वहां पर बहुत ज्यादा आयरन है, आर्सेनिक है जिसके कारण लाखों करोड़ों की संख्या में व्यक्ति बीमार पड़ रहे हैं। वे कैंसर, गेंगरिन, टय़ूमर की बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं, लेकिन किसी के कान में जूं नहीं रेंग रही। आज भी वे दूषित पानी ही पीते हैं चाहे चापाकल से पीयें, चाहे कुएं से पीयें या नदी से पीयें। [MSOffice33] 

          आज तक इस पर रिसर्च नहीं हुई कि जब हम पानी को नॉर्मल फिल्टर करने के बाद भी उस पानी से आर्सेनिक नहीं जाता है। एक जगह आप दस किलोमीटर चलकर एक घड़ा पानी लेकर आते हैं और दूसरी तरफ  हमारे यहां दूषित पानी, जिसे मैं कह सकती हूँ कि जहरीला पानी है, आज तक लोग पी रहे हैं और इसकी ओर किसी की नजर नहीं गयी, न आज तक कोई रिसर्च टीम वहां इसके अध्ययन के लिए गयी। इसी तरह स्वच्छता अभियान के बारे में मैं कहना चाहूंगी कि पंचायत का कोई भी पदाधिकारी इसमें रूचि नहीं लेता है कि वह लोगों को यह बताए कि 1500 रूपए में उनके घर में शौचालय बन सकता है। आज लोगों की ऐसी मंशा बन चुकी है कि वे हम लोगों से डायरेक्ट मांगते हैं कि आपको शौचालय बनाने के लिए पैसा देना है तो दीजिए, 35,000 रूपए या 40,000 रूपए देने हैं तो दीजिए क्योंकि वे जानते हैं कि इसमें से कम से कम 10,000 रूपए वे बचा लेंगे। हम उन गरीबों को नहीं पकड़ पा रहे हैं, जिनको सिर्फ शौचालय चाहिए, न कि पैसे चाहिए।  आज भी गांवों में, घरों में जिनको इसकी जरूरत है, वहां पर उनके लिए शौचालय नहीं बन रहे हैं। मैं बजट का समर्थन करते हुए यह कहूंगी कि आपका काम योजना बनाना है।  आपने योजना बनाई है, लेकिन हम सभी का काम है उसे इंप्लीमेंट करना, जिसके लिए हम सभी दोषी हैं और हमें ही इन्हें सही ढंग से इंप्लीमेंट करना है। इसलिए मैं कहना चाहूंगी कि कोई ऐसी योजना बने जिसमें सभी को यह भाव मिले कि इसे कैसे इंप्लीमेंट करना है, इसमें जमीन पर किस तरह उतारेंगे और गरीब को उसका हक किस तरह से देंगे।

 

*SHRI K.C. PALLANI SHAMY (KARUR) : Hon. Sir, Vanakkam ! I extend my support to the Demands for Grants pertaining to the Union Ministry of Rural Development. Let me thank the chair for giving me this opportunity.  I would like to place on record my deep gratitude and heartfelt thanks to our leader the Hon. Chief Minister of Tamil Nadu Dr. Kalaignar Karunanidhi and Thalapathi Mu. Ka. Stalin, the lieutenant of our Dravidian Movement who is also the Rural Development Minister of Tamil Nadu, who have enabled me to represent the people of my constituency in this august House.

          I also would like to congratulate and thank our Hon. Ministers for Rural Development both Shri Raghuvansh Prasad Singh and Shri Chandra Shekhar Sahu for implementing various programmes for social, economical and infrastructural development of rural areas in the country.

          As a Member of the Departmentally Related Standing Committee on Rural Development, I have witnessed a lot of improvement in the monitoring mechanism and I am sure that with the efforts put in by the Ministry, the status of our rural people in our country would considerably improve.    

          After becoming a member of this august House in 2004, atleast till 2006, whenever we met our Union Minister of Rural Development Dr. Raghuvansh Prasad with some demands he would always be insisting on forwarding of recommendation from the State Government. The then Government in Tamil Nadu used to ignore all our recommendations.  It is our good fortune that we now have good governance in Tamil Nadu with Dr. Kalaignar Karunanidhi at the helm of affairs.  After his coming to power,  we were spared from running from pillar to post.  Instead of our going in search of officials the officials themselves are coming to people’s representatives like me as directed by our Chief Minister.  So the schemes suggested by us are being recommended by the State Government. 

 

*English translation of the speech originally delivered in Tamil.

Hence I urge upon the Union Rural Development Minister to take note of the welcome change and concede to our rightful demands duly recommended by the Government of Tamil Nadu. 

          I would like to point out that Government of Tamil Nadu is in the forefront in implementing all the centrally sponsored Rural Development Schemes.  Our leader Thalapathi Mu. Ka Stalin, as Minister of Rural Development has done a very commendable job in making all round development particularly in providing good rural roads and clean drinking water to all the villages in rural Tamil Nadu under Anna Marumalarchi Scheme.  Government of Tamil Nadu has made a great strides in computerization of records pertaining to land and rural water supply.  As he has been taking very keen interest in all aspects of Rural Development, I personally appeal to the Hon. Union Minister Shri Prasad to allocate additional funds for Rural Development Schemes in Tamil Nadu, especially to upgrade the rural roads from being mud road to metalled  roads.

         I am glad that National Rural Employment Guarantee Act that came in to force in February, 2006, has been extended to all the 604 districts throughout the country.  Government of Tamil Nadu has provided marketing infrastructure facility to women’s self help groups under the Poomalai Scheme.  This is a pioneering scheme to promote the sales of products manufactured by rural women in villages.  I urge upon the Union Rural Development Ministry to encourage the State Governments towards construction of State level marketing complexes to provide linkage to the products of Self Help Groups (SHG’s). I also urge upon the Union Government to render financial assistance to the Government of Tamil Nadu for setting up pioneering marketing complex units.

          Our UPA Government has increased the amount of National Old Age Pension from Rs.200/- to Rs.400/-. In Indira Awaz Yojana that provide Rs.22000 to construct houses in rural areas there has been an increase to Rs.42000.  I thank the Hon. Minister and Hon. Prime Minister and also the chairperson of UPA Madame Sonia Gandhi for this remarkable achievement.  I  thank them on my own behalf and on behalf of our leader Dr. Kalaignar Karunanidhi.

 I would like to make a few demands on behalf of the people of our state and my constituency Karur. Sanitation facilities including Aanganwadi buildings & toilets are not adequate and the number of toilets units should be increased.  Fund allocation is made once in five years for their maintenance. It must be made annual.  Allocation of additional funds under Pradhan Mantri Grameen Sadak Yojana for my Karur constituency is not there anymore after the implementation of NREGA. I wish the scheme is continued with.  Tamil Nadu must get more funds for rural roads.

          I would like to request the Union Rural Development Ministry to enhance from Rs. 15000 to Rs.25000 the grant to convert Kutcha houses to Pukkah houses under Indian Awaz Yojana.

          Tamil Nadu Government has set up rural libraries extensively in villages.  I urge upon the Union Government to provide them with computers so that rural youth will be connected to outer world and job market through internet in the information highway.   

          While contemplating rural development taking industries and infrastructure facilities there, unfortunately we find nationalized Banks moving out of villages.  This trend must be arrested.  I urge upon the Union Rural Development Ministry to make a co-ordinated effort to expand and increase the services of Banks and Post offices in rural areas and villages.  Information Technology, Postal Services and the Banking Services must be available in a co-ordinated manner in a knowledge society.

          I have already requested Hon. Minister to look into these areas.  I hope, he would consider these issues favourably for the welfare of rural people of my Karur constituency.

          I sincerely express my thanks to the chair for giving me  this opportunity to speak on the Demands for Grants 2008-09 pertaining to the Ministry of Rural Development.  

 

 

 

 

 

 

 

श्री मो. ताहिर (सुल्तानपुर) : सभापति महोदय, आपने बोलने का मौका दिया, उसके लिए मैं आपका शुक्रिया अदा करता हूं। मैं अपनी पार्टी बीएसपी की ओर से वर्ष 2008-2009 की ग्रामीण विकास मंत्रालय की अनुदानों की मांगों का समर्थन करता हूं। हमारे प्रदेश में आवासहीन परिवारों को इंदिरा आवास उपलब्ध कराने के लिए केन्द्र सरकार की वचनबद्धता है। प्रदेश में 2002 के बीपीएल सर्वे के अनुसार 11वीं पंचवर्षीय योजना तक लगभग 45 लाख आवासों की आवश्यकता है, जिसमें नौ लाख आवास प्रति वर्ष की दर से निर्मित कराए जाने थे। केन्द्र सरकार द्वारा 2007-2008 में विभिन्न राज्यों को इस मद में 4032.70 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए थे।[R34] 

          उत्तर प्रदेश के साथ, धनराशि के आवंटन में, सौतेला व्यवहार किया गया। इसमें 2 लाख 55 हजार आवासों का लक्ष्य निर्धारित करते हुए 467 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गयी थी। बिहार जो हमारे माननीय मंत्री जी का स्टेट है, उसे आपने 5 लाख 67 हजार आवास निर्मित करने के लिए करीब दुगुनी राशि उपलब्ध कराई थी। हमारा उत्तर प्रदेश बहुत गरीब है और हमारी बगल में माननीय हरिकेवल प्रसाद जी बैठे हुए हैं, जिन्होंने बताया कि अग्नि-कांड में जिन लोगों को आवास मिलना चाहिए, उन्हें नहीं मिलता है। जब चोरी होती है तो घर का कुछ सामान बच जाता है लेकिन अग्नि-कांड में घर का कुछ भी सामान नहीं बचता है। जिन लोगों का पूरा घर जल जाता है उनको आवास देने के लिए आपको पहल करनी चाहिए। सर, आप गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं इसलिए गरीबों का दर्द आप अच्छी तरह से जानते हैं। हम लोगों की आपसे गुजारिश है कि गरीब लोगों की समस्याओं का आप विशेष ख्याल रखें। आपने आवास के लिए अब 35 हजार रुपये कर दिये हैं, उसके लिए आपका धन्यवाद, लेकिन आप भी जानते हैं कि आज 35 हजार रुपये में कुछ नहीं बनता है। बिचौलिये चार-पांच हजार रुपये बीच में खा जाते हैं, इसलिए इस राशि को बढ़ाकर आप 50 हजार रुपये करने का कष्ट करें। आज महंगाई बहुत बढ़ गयी है, हर सामान के रेट बहुत बढ़ गये हैं, इसलिए गरीबों के साथ न्याय करके उन्हें आवास दिलाने का कष्ट करें। गरीब के साथ न्याय हो और वह देश की मुख्य धारा में शामिल हो, ऐसा कार्य आपको करना चाहिए।

          पिछले बजट में, प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत, हमारे क्षेत्र सुल्तानपुर को आपने प्राथमिकता दी, उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। इसी तरह से आपने वर्ष 2007-2008 में, उत्तर प्रदेश को 1213 करोड़ रुपये की धनराशि दी थी और वह सारी की सारी राशि इस काम में लग गयी। इस बार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1087 करोड़ रुपये की मांग की गयी है लेकिन अभी तक एक पैसा भी वहां नहीं पहुंचा है। आपसे प्रार्थना है कि इस राशि को भिजवाने की कृपा करें।

          पिछली बार, केन्द्र सरकार द्वारा, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत 1657 करोड़ 60 लाख रुपये दिये गये, जिनका उपयोग किया जा चुका है। करीब 1057 करोड़ रुपये की मांग और की गयी है। मैं आपसे मांग करता हूं कि उत्तर प्रदेश के साथ सौतेला व्यवहार न करते हुए इस राशि को भी देने का कष्ट करें।

          सर, आप गरीबों पर दया दिखाने वाले बहुत अच्छे इंसान हैं। आपके माध्यम से मैं मांग करता हूं कि वर्ष 2002 में  बीपीएल की जो सूची बनी थी, उसमें बड़े पैमाने पर गरीबों को हक नहीं मिला, गरीबों के साथ चिटिंग हुई। जो लोग ताकतवर थे, उन्होंने उस सूची में अपना नाम चढ़वा लिया, इसलिए आप उस सूची का दुबारा सर्वे कराकर, गरीबों का जो हक ताकतवर लोगों द्वारा मारा जा रहा है, उसे दिलाने का कष्ट करें, उनके साथ इंसाफ करें।

          नल के विषय में मेरा कहना है कि हमारे दोस्त ने 500 नलों की मांग की। हम लोगों को हमारे क्षेत्र में बेइज्जत किया जाता है। जो 542 एमपीज चुनकर आते हैं उनमें से हाई-लेवल एमपीज को छोड़कर, जो हम जैसे गरीब एमपीज हैं उनको टार्चर किया जाता है। इसलिए हर गरीब एमपीज को 1000 नल देने का काम करें, जिससे वे 100-100, 200-200 नल हर विधान सभा क्षेत्र में लगवा सकें और गरीबों के साथ न्याय कर सके। गरीबों, अल्पसंख्यकों, मुस्लिमों या सर्वजन समाज में, जो गरीब ब्राह्मण या ठाकुर लोग हैं, जिनके साथ गरीबी के कारण न्याय नहीं हो पाता है, क्योंकि हिंदुस्तान में हमेशा उन्हीं को न्याय मिला है जो यहां ताकतवर और मालदार लोग थे। [r35] 

          महोदय, मेरी प्रार्थना है कि आप एक हजार नल देने का काम करें। आप बहुत बड़े खजाने के मालिक हैं। आप ही सभी सांसदों के साथ इंसाफ कर सकते हैं।

          इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

 

*श्री अविनाश राय खन्ना (होशियारपुर) : महोदय, जब भी कोई राजनेता भाषण देता है तो अपनी बात देश के बारे में इस ढंग से शुरू करता है कि अगर किसी ने भारत देखना है तो भारत के गांव में देखा जा सकता है। अगर कोई धार्मिक नेता बात करता है तो वह कहेगा कि अगर भगवान देखना है तो भारत के गांव में देखा जा सकता है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी भारत के गांव के उत्थन का सपना देखा था और कहा था कि अगर भारत का गांव विकसित होगा तो देश विकसित होगा। शायद हम आजादी के बाद देश के गांव को भूल गये हैं और गांव के विकास को भूल गये हैं। देश के गांववासियों को भी भूल गये हैं। जितना योगदान देश के विकास में एक गांव का होता है उतना योगदान सरकारों का उस गांव के विकास के लिए नहीं होता। भारत निर्माण के तहत गांव में सड़कें पीने का पानी, खेतों का पानी, घर, बिजली और टेलीफोन जैसी सुविधा देना का छः सूत्री कार्यक्रम लागू करने की योजना भी शायद नाकाफी सिद्ध हो रही है और पिछले चार सालों में भारत निर्माण के तहत 174000 करोड़ रूपये खर्च करने का अनुमान है। रोजगार योजना, सम्पूर्ण रोजगार योजना, सवर्ण जयंती ग्राम स्व रोजगार योजना राष्ट्रीय ग्रामीण सेहत मिशन इत्यादि भी देश के गांव के विकास की गति को बड़ा नहीं पा रही।

          आज गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, सफाई पीने का पानी खेत को लगाने के लिए पानी सड़कें इत्यादि की बहुत भारी कमी देखी जा रही है। अगर कहीं सभी समस्याओं को एक साथ देखना हो तो गांव में देखा जा सकता है। देश में ऐसे भी गांव हैं जहां से शिक्षा लेने के लिए स्वास्थ्य सेवा लेने के लिए मीलों दूर जाना पडता है। सरकारी अधिकारी वहां जाने को तैयार नहीं है ताकि गांव के लोगों का हाल जाना जा सके। जितनी भी हम योजना बनायेंगे उन योजनाओं का लाभ गांव तक इसलिए नहीं पहुंच पाता क्योंकि कहीं न कहीं इच्छा शक्ति की कमी रहती है और केन्द्र भी बहुत सी बातों को राज्यों के ऊपर अपनी जिम्मेवारी से भागता है।

          आज गांव से शहरों की तरफ पलायन बहुत बढ़ रहा है। शहरों की भी व्यवस्था इस पलायन के कारण खराब हो रही है। अगर गांव को ही शहरों जैसी सुविधा दी जाये तो इस पलायन को भी रोका जा सकता है। गांव का कुटीर उद्योग लगभग बंद हो चुका है। गांव का किसान भी अब खेती में उतना फायदा नहीं ले पा रहा जितना वो मेहनत करता है। इसलिए खेती भी एक लाभप्रद व्यवसाय नहीं रहा। पहले खेती के कारण कई लोगों को रोजगार मिलता था। और कई परिवारों की रोजी रोटी खेतों के ऊपर ही निर्भर थी। आज जमीन की उपजाऊ शक्ति भी कम हो रही है और फसलें प्राकृतिक आपदाओं के कारण खेती की आमदनी की अनिश्चितता बनी रहती है।

 

* Speech was laid on the Table.

          इन सभी बातों के ध्यान में रखते हुए प्रश्न पैदा होता है कि गांव का विकास कैसे हो इतना पैसा देने के बावजूद भी जो गांव का विकास होना चाहिए वह नहीं हो पा रहा है। फिर कमी कहां है, अगर इस बात का विषलेशण नहीं करेंगे तो एक के बाद एक योजना फेल होती जायेगी और नतीजा कुछ नहीं निकलेगा। मेरा एक सुझाव है मैं लम्बी चौड़ी बहस में पड़ना नहीं चाहता। अगर इस सुझाव पर विचार कर लिया जाये तो हम गांव को अपने पैरों पर  खड़ा  कर  सकते हैं और गांव का विकास भी  कर सकते हैं।  सुझाव  निम्नलिखित  हैं कि जो भी राजस्व एक गांव से मिलता है उस राजस्व की निश्चित मात्रा वो वहीं गांव को दे दी जाये तो एक पंचायत के पास एक साल में कतना पैसा आने वाला है वो हिसाब उनके पास रहेगा। उदाहरण के तौर पर किसी गांव में कोई से बिजली, टेलिफोन बिल मार्किट फीस इतयादि इकटठे होते और वह पैसा राज्य या केन्द्र के पास चला जाता है। अगर पहले सारा पैसा सरकार को जाये फिर वह पैसा वापिस गांव को जाये इस आने जाने में लिकेज बहुत होती है। अगर उस पैसे का प्रतिशत यहीं हर गांव को दे दिया जाये तो गांव की एक निश्चित आमदनी हो जायेगी। तो हर समय उस गांव को विकास के लिए सरकार की तरफ देखना नहीं पड़ेगा। इसी तरह गांव में ईंट के भटटे लगते हैं, पैट्रोल पम्प होते हैं, शराब के ठेके खुलते हैं या कोई उद्योग लगता है। उससे जो भी कर एकत्रित हो उसका एक निश्चित प्रतिशत वहीं गांव को दे देना चाहिए। इससे गांव आर्थिक तौर पर मजबूत होगा। इससे विकास होगा। रोजगार के साधन पैदा होंगे और पंचायती राज प्रणाली मजबूत होगी। आशा है कि मंत्री जी इस विषय को ध्यान में रखते हुए सरकार की योजना मेरे इस बिन्दु को ध्यान में रखकर बनायेंगे।

                                                                                               

 

 

*SHRI BRAHMANANDA PANDA (JAGAT SINGH PUR) : Hon. Chairman Sir, I thank you sincerely for allowing me to participate in the Demand for Grants for the Ministry of Rural Development.  As you are aware, the soul of India lives in her villages.  Ours is a rural-based civilization.  The Government which is not concerned about the villages or the upliftment of the rural population can never build a prosperous India.  In this context we have to find out why some states in India are regarded as backward.  Many of the backward states have majority of Scheduled Caste, Scheduled Tribe and Minority population.  In the language of the UPA Government, they are the “Aam Aadmi” Gandhiji believed that if we fail to bring a smile on the faces of the common man, we can never prosper as a nation. 

          In our villages, the rural people face a multitude of problems like poverty, illiteracy, unemployment etc.  They have no access to potable drinking water, no sanitation facilities or good quality roads.  They remain cut-off from the urban cities and from development.

          Sir, I represent a state called Orissa which is regarded as a backward state although she is richly endowed with bounties of Mother Nature like minerals, forests and a long coastline.  Due to the negligence of the centre,  the people of Orissa remain deprived and they have not benefited as compared to some other states.

          Sir, you yourself represent a tribal-dominant area of our state.  It is our good fortune that a revolutionary man like the Hon. Minister is occupying the highest chair in the Ministry of Rural Development.  The Minister of State Mr. Chandra Sekhar Suhu, who is from my state is an equally capable man and a pro-active leader. Both of them are great visionaries. They dream of a prosperous India by hastening the pace of work in rural areas.  Whenever Hon. Minister delivers his speech, we all listen with rapt attention and get deeply moved.

 

* English translation of the speech originally delivered in Oriya.

 

We feel, if his vision of the future is translated into reality, very soon the face of rural India will be transformed.  There will be no poverty, unemployment or deprivation and all our rural brethren will comfortably march forward to a better life.

          In order to reach this goal,  the “Pradhanmantri Gram Sadak Yojna” is the 1st step.  The Department of Rural Development has taken up the onerous task of connecting all the villages to sub-divisional headquaters and capital cities.  But there are certain bottlenecks.  In this context I would like to draw your attention to the bordering districts of Orissa as well as other states.  There are certain districts which are located in the far flung border areas, in hilly, inhospitable terrain.  These areas remain cut off from the national main stream, which has now become the brewing ground of Naxalism, Maoism and Terrorism etc.  Sir, I believe the primary reason of this development is the absence of navigable roads. Even after 60 years of independence the tribal people have no access to good quality roads and they remain isolated.  Hence I would request the Hon. Minister to give priority to tribal districts and far-flung border areas regarding construction of roads under the Pradhan Mantri Gram Sadak Yojna.  These areas which are infested with Naxalism, Maoism and Terrorism, the people are rather vulnerable.  They are away from civilization and all its progress as they do not have even the most basic infrastructure like road.  Thus if these areas are given priority under the Pradhan Mantri Gram Sadak Yojan, it will reduce their bitterness and may dilute their extremist mindset.

          Sir, huge amount of funds have been allocated for the purpose of Pradhan Mantri Gram Sadak Yojan. However, it is now observed that there is a lack of interest in the part of road-contractors.  They are reluctant to apply for tender as the profit margin is stated to be very discouraging.  Recently while I was chairing a Vigilance Committee, I interacted with district officials.  They told me that, there has been an escalation in the price of cement, steel and other raw material.  Again there are also problem of transportation.  The bridges  constructed on the roads are very narrow, their width being only 15 meters.  If the width of the bridges are expanded upto 20/30 meters it will greatly benefit the commuters.

          Sir, 47.13% of the backward class people reside in Orissa. I am sure there may be some other states who will have similar population dynamics.  Orissa is the holy land of Lord Jagannath, who is a symbol of secularism. Two of his most famous devotees are ‘Salabeg’, a Muslim and ‘Dasia’ a Scheduled Caste. The real theme of Socialism, Communism and Secularism originates from the land of Jaganath.

          Hon. Minister for Rural Development belongs to my neighbouring state. Orissa and Bihar have a rich, cultural, social and spiritual tie.  We are thus in a position to demand from the Hon. Minister that he should be extra-generous to us.  I am confident that he will respect our hopes with positive action.  I would also request that Hon. Minister for State Mr. Chandra Sekhar Sahu be given some additional independent responsibility.  As Rural Development is a huge department and Mr. Sahu is a competent, pro-active man, we can hope for better things.

THE MINISTER OF STATE IN THE MINSTRY OF DEFENCE (SHRI M.M. PALLAM RAJU): You make him Chief Minister. …(Interruptions)

SHRI BRAHMANANDA PANDA (JAGAT SINGH PUR) : Hon. Chairman Sir, drinking water is a basic necessity.  It is very unfortunate that after 60 years of independence people do not get clear drinking water. I represent a constituency called JagatSinghPur which is touched by the Bay of Bengal in four places – Balikuda, Ersama, Tirtol and Kakatpur.  The people of some villages which are adjacent to the sea do not get potable drinking water.  Villagers in many villages of Orissa have to drink with infected water.  No wonder they suffer from Dysentery, Diarrhoea and Malaria etc.  If after six decades of independence the ‘Aam Aadmi’ does not get a basic requirement like ‘drinking water’, it is a sad commentary on the state of affairs.  It is sheer injustice.  In Orissa the districts of Ganjam faces acute shortage of drinking water.  Other sea-bordering districts like Bhadrak, Balasore, Kendrapara etc.  too face this hardship.  If ‘Desalination’ is done properly, this problem can be solved.

          Again, the problem of sanitation is also very acute. Huge amount of funds are being allocated.  But no monitoring is being done. I would request the Hon. Minister to constitute an Expert Committee under his stewardship to do periodical monitoring and establish inter-state coordination. So that progress can truly be evaluated.

          Recently Dr. A.P.J. Abdul Kalam has expressed his concern about widening gap between rural and urban India and the mass migration of rural poor to the urban slums.    Today bonded labours, workers etc are leaving their native land to get exploited in an alien land.  Are we really the largest democratic country of the world?  Is this the future we had dreamt of?  We are the representatives of the people in this august House.  We are here to voice their grievances.

          Sir, the National Rural Employment Guarantee Progarmme is a very good step.  But it is going through a lot of uncertainties and we are doubtful about its future. It is a scheme which is like giving homeopathy to an ailing elephant.  Merely ensuring 100 days work for a jobless person is very inadequate. It should be increased further. As one of my predecessor was mentioning, a member of the Legislative Assembly can sanction 200 hand-pumps. But we the Member of Parliament can not sanction even two hand-pumps.  It is very unfortunate.  Hence I would request the Hon. Minister to sanction at least 500 hand-pumps per constituency and also speed up Indira Awaas Yojna for the rural poor.  In many areas we see the poor homeless does not make it to the BPL list, but the well-to-do manages to do.  I do not want to go into details. 

          As per the record of 1997, Orissa had 44 lakh beneficiaries for the Indira Awaas Yojna.  But as per the BPL list of 2002 the number has been restricted to 34 lakh families only.  We are very unhappy with this development.  Our Hon. Chief Minister Shri Naveen Patnaik has met Hon. Minister for Rural Development regarding this issue and hence we demand that the list of 2002 be made null and void and the list of 1997 be prevailed.

 Sir, Orissa is a backward state where 70% of the people live in villages.  I would like to recite a poem of revolutionary poet Dr. Sachi Routray –

“My village is a small one

it may not be found in a geography book

but if such small villages are happy

they will make India smile”.

 

Sir, lastly I demand that ‘Orissa’ be given a ‘Special package’, so that it can prosper like the other states.  Jai Jagannatha

 Glory to our Mother land Utkal.

 

श्री खारबेल स्वाईं (बालासोर)  : मंत्री जी, उन्होंने आपकी बहुत प्रशंसा की है कि आपने बहुत जोरदार ढंग से अपनी बात रखी है। वह सिर्फ यह मांग रहे हैं कि जैसे एम.एल.एज. को कुछ टय़ूबवैल वगैरह दिये जाते हैं, ऐसे ही सब एम.पीज. को भी अपने-अपने क्षेत्र में लगाने के लिए आप कुछ न कुछ दीजिए।

 

 

 


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

* Copy This Password *

* Type Or Paste Password Here *

107 queries in 0.261 seconds.