Discussion Regarding Natural Calamities In The Country Raised By … on 24 March, 2005

Lok Sabha Debates
Discussion Regarding Natural Calamities In The Country Raised By … on 24 March, 2005

Title: Discussion regarding natural calamities in the country raised by Shri Rupchand Murmu on 23.3.2005. (Discussion concluded).

13.02 hrs.

DISCUSSION UNDER RULE 193

Natural calamities in the Country – contd.

MR. SPEAKER: May I announce what we have agreed. First, it will be the reply of the hon. Minister up to 1330 hours – probably he will take that much time. We may have a luncheon recess from 1330 hours to 1400 hours. Then, Private Members’ Business will come. I seek the kind cooperation of all the hon. Members please. Now, the hon. Minister.

गृह मंत्री (श्री शिवराज वि. पाटील) : श्रीमन्, हमारा देश बहुत बड़ा देश है। यहां पर हिमालय है, बहुत सा लम्बा सागर तट है।( व्यवधान)

SHRI BIKRAM KESHARI DEO (KALAHANDI): In the Business papers distributed to the hon. MPs today morning, we have got a notice that further discussions under Rule 193 on Natural Calamities and Electoral Reforms would be taken up. (Interruptions)

MR. SPEAKER: No.

SHRI BIKRAM KESHARI DEO : We got the notice.

MR. SPEAKER: What is this? Where is that?

SHRI BIKRAM KESHARI DEO : Notice is there.

MR. SPEAKER: It is on the Business. I will call you later.

SHRI BIKRAM KESHARI DEO : Sir, How can you do. (Interruptions)

MR. SPEAKER: ‘How can you do’ means what?

SHRI BIKRAM KESHARI DEO : It is printed. It is in the printed Business papers that we have received in the morning. It is mentioned there that it has been shifted to 24th March.

MR. SPEAKER: Do you not want to listen to the hon. Minister’s reply?

SHRI BIKRAM KESHARI DEO (KALAHANDI): No, Sir, we would like to listen. But we would like to participate.

MR. SPEAKER: It is the most important debate for which I have found time. This is today’s business.

SHRI BIKRAM KESHARI DEO : It is in the papers we got, it is printed as Part I. We would like to participate.

श्री इलियास आज़मी (शाहाबाद) : जब से नई लोक सभा आई है, जीरो ऑवर में एक बार भी मुझे बोलने का मौका नहीं दिया गया है। यह मिसप्रिंट नहीं हुआ।

MR. SPEAKER: It is very unfortunate. I can only say this. Even the senior Members can label allegations, whatever they like.

(Interruptions)

SHRI BIKRAM KESHARI DEO : It is not an allegation.

अध्यक्ष महोदय : आपको नहीं कहा है।

श्री इलियास आज़मी : मैं एलीगेशन नहीं लगा रहा हूं। मैं सिर्फ याद दिला रहा हूं।

श्री शिवराज वि. पाटील : कल जो चर्चा हुई, बहुत अच्छी चर्चा हुई और बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा हुई। हमारा देश बहुत बड़ा देश है। यहां पर हिमालय है।( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Instead of Zero Hour, it has become a torture hour. Yes, it is a torture hour, the way most of the hon. Members of this House are behaving. You are openly defying the decision of the BAC. Please sit down.

श्री बिक्रम केशरी देव : आपको टाइम दिया है।( व्यवधान)

MR. SPEAKER: I have ruled you out. Only 15 matters were to be taken and they were of extreme serious urgency. It has become a matter of free-for-all. When we are trying to regulate and allow as many Members as possible, all sorts of allegations are thrown from any and every side. Everybody wants to be heard first. Sorry, you have to get rid of somebody then.

श्री शिवराज वि. पाटील : श्रीमान् जी, मैं कह रहा था कि हमारा देश बहुत बड़ा है। यहां पर हिमालय है और बहुत बड़ी कोस्ट-लाइन है।

MR. SPEAKER: The hon. Minister is replying on an important issue but still the running commentary is going on.

(Interruptions)

श्री शिवराज वि. पाटील : बहुत बड़ी नदियां हैं और इसी वजह से हर साल हमारे यहां कोई-न-कोई नैसर्गिक आपदा आती है और उसका हमें सामना करना पड़ता है। इस साल सुनामी आई और जम्मू-कश्मीर में हिम-वर्षा हुई।

13.06 hrs.

(Shri Devendra Prasad Yadav in the Chair)

उसके कारण लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ऐसे हालात जब होते हैं तो सारे लोग मिलकर, हालात का सामना करने के लिए खड़े हो जाते हैं और मुश्किलों में पड़े लोगों की मदद करते हैं। ऐसी परिस्थिति जब निर्मित होती है तो हमारे सशस्त्र-बल के अघिकारी भी आगे आते हैं और अपनी जान की परवाह किये बिना, रात-दिन काम करके, लोगों की मदद करते हैं। उसी प्रकार से, सरकारी अधिकारी भी रात-दिन काम करके लोगों की मदद करते हैं। हमारी सरकार का यह द्ृष्टिकोण रहा है कि चाहे पक्ष के नेता हों या सरकार के मुखिया हों या जिन लोगों पर जिम्मेदारी दी गयी होती है, ऐसे बहुत सारे पक्षों के लोग भी पीड़ितों की मदद के लिए, समय पर, आगे आते हैं। इससे जिन लोगों को मदद देना जरुरी होता है, उनकी मदद के काम में आसानी हो जाती है और उनके मन में भी विश्वास हो जाता है कि ऐसी आपदा के समय वे अकेले नहीं हैं, उनके साथ पूरा देश खड़ा है, उनके साथ पूरी सरकार खड़ी है, उनके साथ पक्ष के नेता खड़े हैं, उनके साथ चुने हुए लोग खड़े हैं और उनके साथ बाहर के लोग खड़े हैं। इस प्रकार की परिस्थिति में काफी मदद उन लोगों को मिल जाती है।

मैं समझता हूं कि हमारे देश में जो शक्ति है वह जीवन की ओर देखने के द्ृष्टिकोण में पाई जाती है। जब आपदा आई, जम्मू-कश्मीर में हिम वर्षा हुई, सुनामी आई, बाढ़ आई और भूकम्प आया, उस वक्त लोगों के मन में यह भावना आई है। यह सदन उन सारे लोगों के प्रति आदर की भावना प्रकट करता है, उनका ह्ृदय से अभिनंदन करता है, उनका आभार प्रकट करता है। सदन में सारे सदस्यों ने भी इसी प्रकार की भावना दर्शायी और हम उनका भी यहां आभार प्रकट करना चाहते हैं, आभार व्यक्त करना चाहते हैं।

कल यहां बाढ़ पर चर्चा हुई, जो भूकम्प आया, उस पर खास चर्चा नहीं हुई लेकिन उसके संदर्भ में भी चर्चा हुई। साइक्लोन पर चर्चा हुई और सुनामी के बारे में तो बहुत चर्चा हुई। काश्मीर में जो हिम-वर्षा हुई, हिमपात हुआ, उसके बारे में भी बहुत अच्छे ढंग से चर्चा हुई और इस चर्चा के दौरान सदस्यों ने बहुत अच्छे सुझाव दिये हैं लेकिन बहुत से सुझाव ऐसे हैं, जिन पर सरकार के रुख को डिटेल में यहां बताना, मेरे लिए मुश्किल होगा। लेकिन मैं यहां इतना कहना चाहता हूं कि जितने भी अच्छे सुझाव यहां पर दिये गये हैं, हमने उनको नोट किया है और बहुत सारे सुझावों पर हमने पहले से ही अमल किया है। अगर कुछ सुझाव बिना अमल के रह गये हैं, उनकी जांच-पड़ताल करके, जितने पैमाने पर हम उन पर अमल कर सकते हैं, उतने पैमाने पर हम जरुर अमल करेंगे।

जो कुछ खास सुझाव आए थे, जिन के बारे में यहां सरकार की ओर से बताना जरूरी हो जाता है, उसके संदर्भ में मैं आपके सामने राय रखना चाहूंगा। सबसे पहला सुझाव था कि प्राकृतिक आपदा को ध्यान में रख कर, देश में जोनेशन किया जाए कि किस जगह भूकम्प आता है, किस जगह साइक्लोन आता है, किस जगह में बाढ़ आती है और किस जगह पानी की कमी हो जाती है – इस प्रकार का जोनेशन होना चाहिए, ऐसा सुझाव यहां पर सदस्यों ने दिया है। इस प्रकार का जोनेशन अपने देश में किया गया है। इससे एक कदम आगे बढ़कर सदस्यो ने कहा कि माइक्रो जोनेशन होना चाहिए। यह बात बिल्कुल सही है कि बड़े पैमाने पर जोन्स बनाए गए हैं लेकिन बारीकी में जाकर जोनेशन करने की जरूरत है, ऐसा यहां कहा गया। सरकार इस बारे में जरूर कदम उठाएगी।

दूसरी बात यह कही गई कि हमारे यहां नदियों में बाढ़ आती है। कुछ नदियों में बहुत बाढ़ आती है, खासतौर पर ब्रहमपुत्र में बाढ़ बहुत आती है। नेपाल से निकलने वाली नदियों का पानी जब बिहार में आता है, उससे वहां बाढ़ आती है, जिससे लोगों के जान-माल का बहुत बड़ा नुकसान होता है और मवेशियों का भी बहुत नुकसान होता है। इस बारे में सुझाव दिया गया कि इन नदियों पर बांध बांधे जाने चाहिए। मैं बड़ी नम्रता से कहना चाहता हूं कि देश के स्वतंत्र होने के बाद, हमारे नेताओं ने जो काम किया, उन्होंने इस पर जरूर ध्यान दिया, इसीलिए भाखड़ा नंगल बना और जायकवाड़ी जैसा प्रोजैक्ट बना। उड़ीसा में बड़े-बड़े बांध इसी वजह से बने हैं। यह काम आगे भी चलता रहेगा। हम इस काम में कोई कोताही नहीं बरतेंगे। इसके लिए बहुत पैसे की जरूरत होती है और पैसा जुटाना मुश्किल काम होता है लेकिन पैसे जुटाने के लिए सरकार की ओर से जरूर प्रयास किया जाएगा।

तीसरा सुझाव लकिंग ऑफ रिवर्स के बारे में आया और कहा गया कि नदियों को जोड़ना चाहिए ताकि जिस नदी में ज्यादा पानी है, वहां से जहां पानी की किल्लत है, वहां पानी पहुंचाया जा सके और वहां के लोगों को पानी दिया जा सके। यह कल्पना कई सरकारों ने अपने हाथ में ली थी लेकिन मैं बड़ी नम्रता से कहना चाहता हूं कि यह कल्पना श्रीमती इन्दिरा गांधी के जमाने में हमारे सामने आई थी और उस जमाने से यह कल्पना हमारे देश के सामने हैं। यह ऐसा मामला है जिससे देश के लोगों को बहुत अच्छा लगता है। इतनी बड़ी योजना बना कर, देश की नदियों को जोड़ कर, जो पानी हिमालय से निकलता है, हिमालय से निकलने वाली नदियों में, नदियों से भूमि में और भूमि से घरों में पहुंचता है तो लोगों को बहुत अच्छा लगता है। यह जो कार्यक्रम, प्लान और प्रोजैक्ट है, हम इसे नहीं छोड़ेंगे – मैंने ऐसा इस सदन में भी बताया है और सुप्रीम कोर्ट में एक केस के दौरान भी बताया है। पैसे की किल्लत है और दूसरी भी समस्याएं हैं, हम उन्हें कैसे हल कर सकते हैं, उस द्ृष्टि से जरूर देखना चाहिए। इस काम के लिए सब लोगों की सहायता की आवश्यकता है। जिस पैमाने पर सहायता मिलेगी, उस पैमाने में यह काम आगे बढ़ सकेगा, ऐसा मुझे लगता है।

एक बात और बतायी गई जो यह है कि जहां पर सूखा पड़ता है, वहां अनाज, पीने का पानी पहुंचना चाहिए और वहां के लोगों को काम मिलना चाहिए। मैं बड़ी नम्रता के साथ कहना चाहूंगा कि हमारा यह प्रयास है कि जहां सूखा पड़ता है, वहां फूड बैंक्स बनाने की कोशिश करें। हम वहां अऩाज जमा करने की कोशिश करेंगे ताकि सूखा पड़ने के बाद वहां अनाज ले जाने की जरूरत महसूस न हो। सूखा पड़े या न पड़े वहां अनाज होना ही चाहिए।

हम इस प्रकार की व्यवस्था कर रहे हैं और उस पर विचार कर रहे हैं । हम आशा करते हैं कि हम इसमें सफल होंगे ( व्यवधान)

श्री शैलेन्द्र कुमार (चायल) : महोदय,पशुओं के चारे की व्यवस्था होनी चाहिए ।

श्री शिवराज वि. पाटील :पशुओं के चारे की व्यवस्था होनी चाहिए, आपने बिल्कुल सही कहा है। जब और जहां भी सूखा पड़ता है, वहां पर ट्रेन से ले जाते हैं( व्यवधान) इसे दूसरी पद्धति से ले जाते हैं

श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : अध्यक्ष महोदय, बाढ़ के पानी की व्यवस्था करनी चाहिए।( व्यवधान)

सभापति महोदय : वह शुरू में ही बताया गया है, आप सुन नहीं रहे थे ।

श्री शिवराज वि. पाटील : आपका सुझाव बिल्कुल दुरुस्त है, हम उसे भी ध्यान में रखेंगे । सुनामी के बारे में विचार करते समय लोगों ने जो सुझाव दिए हैं वे इस प्रकार हैं- पहला सुझाव था कि आपदा आई, लोगों के शवों को निकाला गया और लोगों के खाने और रहने का इंतजाम किया गया लेकिन इससे आगे चलकर काम करने की जरूरत है । दूसरा सुझाव था – टेम्परेरी डेवलपिंग यूनिट बनाई जाएं । मैं यहां पर बताना चाहूंगा कि हमने डेवलपिंग यूनिट बनाने के लिए कदम उठाए हैं और यह काम पूरा होगा। जहां क्षेत्र केंद्र के पास है वहां केंद्र की ओर से पहुंच कर काम करते हैं, अगर क्षेत्र स्टेट के पास है तो हम उन स्टेट्स को इस काम के लिए पैसा देते हैं, सामान देते हैं और कुछ अपने विचार और प्लॉन्स देते हैं और उनकी तरफ से करते हैं । हम आशा करते हैं कि बरसात शुरू होने के पहले जहां सुनामी का परिणाम हुआ है, वहां पर टेम्परेरी सेटस बनाने की कोशिश करें ।

एक सुझाव था कि परमानेंट डेवलपिंग यूनिट्स होनी चाहिए । जिस प्रकार से भूकम्प से ग्रस्त लोगों को प्रांतों में परमानेंट यूनिट दिए गए हैं उसी तरह से सुनामी से ग्रस्त लोगों को भी परमानेंट यूनिट्स देनी चाहिए । हालांकि हमें बहुत दु:ख है कि जो जानें गई हैं उन्हें वापस लाना नामुमकिन है । हमने एक प्लॉन बनाया है और प्रांत सरकार को बताया है कि अगर इसकी वजह से कोई गांव उजड़ गया है तो हम उस गांव को नया गांव बना सकते हैं । जहां पर भूकम्प आया, चाहे वह लातूर हो या गुजरात हो, वहां पर कोशिश की गई कि नई पद्धति से, नए प्रकार से और नई वैज्ञानिक पद्धति से विचार करके टाउन प्लानिंग करके गावं बसाए जाएं । जो भी घर वहां पर बनें वे अर्थक्वेक रजिस्टेंट होने चाहिए ताकि आपदा आने पर उन घरों में रहने वाले लोगों को कोई दिक्कत न आए, इस प्रकार का प्रयास होना चाहिए। यह हमारी कल्पना है, इस प्रकार के प्लॉन्स बनाए जा रहे हैं और हम उने पर अमल करेंगे ।

यहां पर कहा गया बच्चों, महिलाओं, बूढ़ों पर जब आपदा आती है तो बहुत तकलीफ होती है, उनके बारे में खास तौर से विचार करना चाहिए । हमारी नेता श्रीमती सोनिया गांधी जी ने इसके बारे में सोचा है और बताया है । दूसरे लोगों ने भी इसके बारे में सोचा और बताया है और इस प्रकार की सूचनाएं अधिकारियों को दी गई हैं कि बच्चों की पढ़ाई और रहने का इंतजाम हो ताकि बच्चों को अपनी जगह पर जाने की जरूरत महसूस न हो ।

यहां पर कहा गया है कि अस्पताल, स्कूल( व्यवधान)

श्री शैलेन्द्र कुमार : जो बच्चे अनाथ हुए हैं उन्हें गोद लेने के बारे में( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: The hon. Minister is not yielding. Please take your seat.

(Interruptions)

श्री शैलेन्द्र कुमार : महोदय, जो बच्चे अनाथ हुए हैं( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN : This is not correct.

श्री शिवराज वि. पाटील : अस्पताल, स्कूल, रोड्स, एयरपोर्ट, सीपोर्ट भी बनने चाहिए । इसके बारे में तय किया गया है और सरकार ने प्लानिंग कमीशन में एक कमेटी बनाई है, उस कमेटी में ( व्यवधान)

श्री राज बब्बर : मैं माननीय मंत्री जी से सहमत हूं लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि सारी चीज़ें वही कही जा रही हैं( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN : I have not allowed you. Please take your seat.

(Interruptions)*

MR. CHAIRMAN : Please take your seat. I am not allowing you.

श्री शिवराज वि. पाटिल : मैं हर बात का जवाब दूंगा, पहले मुझे बोलने दीजिये। अगर ओले पड़ने का सवाल है तो उसे जरूर देखा जायेगा। इस मामले में हम स्टेट गवर्नमेंट, सभी एम.पीज़ की मदद से, श्री राहुल गांधी जो कुछ कहते हैं, उनकी मदद से, हम लोग जरूर इसे देखेंगे।( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record except the speech of hon. Minister. Please take your seat.

(Interruptions)*

श्री शिवराज वि. पाटील : सभापति जी, मैं अस्पताल, स्कूल, जैटीज़ और एअरपोर्ट के बारे में कह रहा था। यह काम बहुत लम्बा है और इस काम में काफी पैसा लगना है( व्यवधान)

SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN (CHIRAYINKIL): Sir, I had given a suggestion about constructing a sea wall. (Interruptions)

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: I will reply to his question after I finish my initial statement. (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Shri Varkala Radhkrishnan, you are the seniormost Member and you are behaving like this.

(Interruptions)

SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : Sir, I have a suggestion to make. There must be constructed a sea wall. There must be a comprehensive programme. There must be a package for constructing a sea wall along the coastal area. (Interruptions)

 

 

 

 

 

*Not Recorded.

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: I will reply to his question after I finish my initial statement. मैं कह रहा था कि प्लानिंग कमीशन में एक कमेटी बनी है। उस कमेटी में अलग-अलग डिपार्टमेंट के लोग एक जगह बैठेंगे और इसे देखेंगे। जहां जैटीज़ बनानी है, उसे शिपिंग मनिस्ट्री देखेगी, जहां एअरपोर्ट बनाना है, सविल एविएशन मनिस्ट्री उसे देखेगी, जहां स्कूल बनाने हैं, वहां मानव संसाधन मंत्रालय देखेगा। ये सब लोग भविष्य की कार्यवाही तय करेंगे । यह कार्य केवल दो साल के लिये नहीं होगा, बल्कि ५०-१०० साल के लिये बनाया जायेगा। इस सोच के साथ काम चल रहा है।

सभापति जी, एक सुझाव आया कि समुद्र में दीवार बना दी जाये, लेकिन मैं बताना चाहूंगा कि समुद्र में दीवार बनाना घर जैसी दीवार बनाने के समान नही होता। समुद्र की दीवार अलग-अलग प्रकार की होती है। ऐसी दीवार सब जगह बनाने की जरूरत नहीं है। जैसे मुम्बई में मैरीन ड्राइव के एक हिस्से पर दीवार बनाई गई है ताकि जब पानी आये तो वह जमीन या घर तक न पहुंचे। इस प्रकार का इंतजाम, जहां जरूरी हो, किया जा सकता है। यह एक लम्बा काम है। इस पर विचार कर के जो भी हो सकेगा, हम करेंगे। किसानों की जमीन के बारे में कहा गया( व्यवधान)

SHRI A. KRISHNASWAMY (SRIPERUMBUDUR): I have given a suggestion about plantation of mangroves. (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Please take your seat.

श्री शिवराज वि. पाटील : वह भी करेंगे। मुझे पहले अपनी बात कहने दीजिये। उसके बाद आप जो सवाल उठायंगे, मैं उनका उत्तर दूंगा। मैं अभी अपने भाषण में जो कहना चाहता हूं, यदि मेरे दिमाग से निकल गया, तो फिर उसे वापस लाना मुश्किल होगा।

सभापति जी, मैं कह रहा था कि किसानों की जमीन के बारे में एक खास प्लान बनाया गया है। हम लोग जाकर उनके खेतों में ऐसी खाद डालेंगे, दवा डालेंगे, खेतों से पानी निकालने का कुछ ऐसा इन्तज़ाम करेंगे, जो उस जमीन के लिये उपयोगी हो। इस मद में काफी पैसा रखा गया है। हमारी प्लानिंग के अनुसार, इस कार्य के लिये २००-३०० करोड़ रुपया रखा गया है। यह बदकिस्मती है कि मछुआरे समुद्र के किनारे रहते हैं। जब सुनामी आयी तो उनकी बोट, घर सब कुछ बहाकर ले गयी। इस कारण उन लोगों को बहुत मुश्किल हुई। इस मुश्किल को ध्यान में रखकर हमने तय किया है कि उनकी काटामैरीन – जितना लकड़ी की बोट पर पैसा लगता है, सरकार द्वारा पूरा का पूरा पैसा न लोंगों को दिया जायेगा।

 

दूसरे उन्होंने यह तय किया है कि बोट में इंजिन लगाकर अगर वे डेढ़ लाख रुपये तक खर्च कर रहे हैं, तो उसमें भी सरकार और बैंक की ओर से पैसा दिया जायेगा। यदि कोई दूसरा कुछ दे रहा है तो वह भी दिया जाये, हमने उसका भी इंतजाम किया है।

तीसरी बात यह है कि अगर ऐस्टीमेट पांच लाख से बढ़कर है, तो उसमें बोट बनाने वाले को पैसा देना पड़ेगा और सरकार से भी उसमें मदद मिलेगी। उन्हें नैट्स देने का इंतजाम भी किया गया है। सरकार इस ओर विशेष रूप से ध्यान दे रही है। मैं आपको बताना चाहता हूं कि राष्ट्रपति जी ने इस बारे में हमें बताया है कि अगर आप ऐसा करने जा रहे हैं, तो वहां कोल्ड स्टोरेज भी बनाइयेगा ताकि वहां जो मछलियां आती हैं, उन्हें रखने का इंतजाम हो सके और बाद में वे बाजार में ले जाई जा सकें। इस बारे मे भी हमें सूचना दी गई है और हम यह सब वहां करने जा रहे हैं। हम लोग और क्या-क्या करने जा रहे हैं, वे सारी चीजें समय न होने की वजह मैं आपको बता नहीं पाऊंगा। वैसे भी मैं एक्सपर्ट नहीं हूं, इसलिए मैं सब कुछ आपको नहीं बता सकता। मगर हमने एक्सपट्र्स को बता दिया है कि वे बैठें और सारी चीजों के बारे में सोचें कि जिस रूप में आपत्ति आई है, उसमें वे ज्यादा से ज्यादा और जल्दी से जल्दी किस प्रकार लोगों की मदद कर सकते हैं। इन सारी बातों पर विचार किया जा रहा है और इन सबके लिए बहुत सारे पैसे दिये जा रहे हैं। मैंने जो स्टेटमैन्ट्स यहां रखे हैं, उन स्टेटमैन्ट्स में किस स्टेट को कितना पैसा दिया जा रहा है, किस आदमी को किस प्रकार पैसा मिलने वाला है, किस चीज के लिए कितना पैसा मिलेगा, ये सब कुछ उनमें बताया गया है। मैं उस सबको रिपीट नहीं कर सकता, क्योंकि समय बहुत कम है। मगर जो हमारे मछुआरे बहन-भाइयों के सवाल हैं, उन्हें हम हल करने की कोशिश करेंगे।

सभापति महोदय, यहां कहा गया कि लोगों को इम्पलॉयमैन्ट मिलना चाहिए। मैं बताना चाहता हूं कि सरकार ने तय किया है कि फूड फॉर वर्क इन इलाकों में हम पहले से ज्यादा शुरू करें। सरकार ने यह भी तय किया है कि इम्पलॉयमैन्ट गारंटी देने का जो विचार हम कर रहे हैं और अपनी नीति बना रहे हैं, उसके मुताबिक वहां लोगों को काम देने के लिए हम कदम उठा रहे हैं। कुछ सदस्यों ने कहा कि ठीक है आप उनकी मदद कर रहे हैं, लेकिन वे पूरी तरह से आप पर निर्भर न हो जाएं, ऐसी परिस्थिति आप निर्माण न करें। आप ऐसा करें कि इन लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करने की परिस्थिति निर्माण हो। इसलिए बैंकों को कहा गया है कि उन्हें सरकार की तरफ से इस तरह से मदद दी जाए, जिससे वे अपना व्यवसाय चालू कर सकें। ऐसी परिस्थितियां हम वहां निर्माण करने जा रहे हैं।

यहां एक विषय डिजास्टर अरली वार्निंग का आया। इसके बारे में पत्रों में भी चर्चा हुई और सदन में भी चर्चा हुई। कल हमारे साइंस एंड टैक्नोलौजी मनिस्टर, श्री कपिल सिब्बल जी ने यहां बहुत अच्छा भाषण दिया और बताया कि किस प्रकार सरकार की ओर से कदम उठाये जा रहे हैं। मैं बताना चाहता हूं कि उन्होंने ओशन डेवलपमैन्ट डिपार्टमैन्ट को जिम्मेदारी दी है और बे ऑफ बंगाल में तथा इंडियन ओशन में हम अरली डिजास्टर वार्निंग की पद्धति निर्माण करने के लिए कदम उठा रहे हैं। जो दूसरे प्रांत, दूसरी सरकारें और दूसरे देश हैं, उन्हें हम जितनी भी मदद दे सकते हैं, वह हम देंगे। अगर वे हमारे साथ आना चाहें तो आ सकते हैं। मगर पेसफिक ओशन में दूसरी बात है। लेकिन उसमें भी अगर कुछ इंफोर्मेशन टैक्नोलोजी कोऑपरेशन की जरूरत होगी, तो वह की जा सकती है।

सभापति महोदय, मैं बताना चाहूंगा कि वर्ष १९८० में जब श्रीमती इंदिरा गांधी के साथ मैं काम कर रहा था, उस जमाने में एक सैटेलाइट छोड़ा गया था। उस सैटेलाइट के छोड़ने के बाद लोग हमें बोल रहे थे कि यह क्या सैटेलाइट छोड़ा है, इस पर आपने एक हजार करोड़ रुपये खर्च कर दिया और एक खिलौना स्पेस मे छोड़ दिया है। इस खिलौने की हमें जरूरत नहीं है, हमें पीने के पानी की जरूरत है। उसके बाद दो साल तक सरकार की ओर से हमें यह बताना जरूरी हो गया था कि यह सैटेलाइट खिलौना नहीं है, यह सैटेलाइट एक ऐसा यंत्र है, जिसकी मदद से अगर कोई प्राक़ृतिक आपदा आई, तो हम उसके बारे मे मालूमात दे सकते हैं। यह डक्टलैस टेलीफोन के लिए भी काम कर सकता है, यह टी.वी. के लिए भी काम कर सकता है और बहुत तरह की इंफॉर्मेशन दे सकता है। इस प्रकार की पद्धति हमारे पास है। उसके बाद अब तक हमने बहुत सारे सैटेलाइट्स छोड़े हैं और हर सैटेलाइट में चार प्रकार के काम करने की ताकत है।

महोदय, एक तो वह टी.वी. के कार्यक्रम को प्रसारित करने में सहायता करता है, दूसरे वह टेलीफोन में मदद करता है, तीसरे वह सर्वे करता है और चौथे अरली वॉर्निंग में सब तरह से मदद करता है। इस सैटेलाइट की मदद फ्लड्स के लिए, साइक्लोन के लिए भी ली जाती है, लेकिन बदकिस्मती से जब भूकम्प आता है, तो उसकी कोई इन्फर्मेशन सैटेलाइट से नहीं मिलती है। आज तक ऐसी कोई टैक्नॉलौजी डैवलप नहीं हुई है जिससे कि भूकम्प आने की मालूमात, भूकम्प आने से पहले, लोगों को मिल सके। इसलिए सैटेलाइट ने हमें सूनामी आने की सूचना देने में कोई मदद नहीं की, जबकि दूसरे डिसास्टर में हमें इससे बहुत सहायता मिलती है।

SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : Without interrupting the Minister, I wish to put a very simple question. During the time of Tsunami disaster, we were very much confused. The Science and Technology Minister was giving one version, and the Home Minister was giving another version. The people were put to difficulties.

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: I will reply to your question.

SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN: Their statements were quite contradictory. Such a thing should not happen during the time of national disaster, but that is exactly what happened when Tsunami disaster happened.

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: I will reply to your question afterwards.

SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : You please hear me. People living in the coastal areas were misinformed by the Ministry.

MR. CHAIRMAN : The hon. Minister is not yielding, please take your seat.

SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : People were running away from the seacoast. The Science Minister had given one different version, the Home Minister had given another different version, and the people in the coastal areas were in utter confusion. I had to vacate thousands of people because of this misinformation. Such a thing should not happen.

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Save me from this disaster.

SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : I am sorry, I had to run away with people because of this wrong information.

MR. CHAIRMAN: Shri Varkala Radhakrishnan, this is not fair. Please take your seat.

SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : We were put to difficulties because of this wrong information.

MR. CHAIRMAN: Please take your seat.

SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : The Science Minister had given one information, and the Home Minister had given another information. People were running away, and we, MPs, had to run away with people. I had a bitter experience. I had to run away because of this wrong information.

MR. CHAIRMAN: How can you behave like this? This is not fair, please take your seat.

SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : I had to run away with people. I had a bitter experience.

श्री शिवराज वि. पाटील : श्रीमन्, इस संबंध में, मैं एक बात बताना चाहता हूं कि मनुष्य बहुत होशियार है, लेकिन इतना होशियार नहीं कि भूमि के उदर में क्या हो रहा है या समन्दर में क्या हो रहा है, वह बता सके। शायद, आकाश में क्या हो रहा है, वह आसानी से बता सकता है, लेकिन समुद्र में क्या हो रहा है, वह बताना बहुत मुश्किल हो जाता है। भले ही उसका कितना ही विकसित ज्ञान हो, उसकी कितनी ही अधिक शक्ति हो, लेकिन इस ब्रहमांड और भूमि के अंदर जो कुछ भी चलता है, वह समझने की शक्ति मनुष्य में आ गई है, मुझे ऐसा लगता है कि ऐसा नहीं है और वह शक्ति आज तक नहीं आई है।

सभापति जी, हमसे कोई गल्ती हो गई हो, तो हमें यहां आकर, सदन में आकर आपको बताने में कोई रंज नहीं है कि हमसे यह गलती हो गई है। हम उसकी जिम्मेदारी लेने के लिए भी तैयार हैं। झगड़ा करने के लिए भी तैयार हैं, उसका जवाब देने के लिए भी तैयार हैं, मगर जो कुछ भी काम हमने किया है, वह नेक-नीयती से किया है, बदनीयती से नहीं किया है। नेकनीयती से किए गए काम से भी यदि कहीं किसी को कष्ट पहुंचा है, कोई गलती हो गई है, तो हम उसकी जिम्मेदारी किसी और पर नहीं, अपने ऊपर लेने के लिए तैयार हैं और उसकी जिम्मेदारी मैं अपने ऊपर लेता हूं।

सभापति महोदय, मैं इसके बाद यह कहना चाहता हूं कि डिसेंट्रलाइज मैनेजमेंट डिसास्टर होना चाहिए, ऐसा एक माननीय सदस्य ने कहा। यह बहुत अच्छा सजैश्चन उन्होंने दिया है। इसके साथ-साथ यह भी कहा कि इसके लिए एक कानून बनाइए और कहा कि एक डिसास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी बननी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि डिसास्टर को मैनेज करने के लिए हमारे पास अपना सैनिक-दल और पैरा-मलिट्री फोर्सेस भी होनी चाहिए।

उसके साथ-साथ प्लान भी बनना चाहिए, माडर्न टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल होना चाहिए, नये विचारों का उपयोग होना चाहिए, नयी पालिसी होनी चाहिए, एनवायरमेंट को भी प्रोटेक्ट करना चाहिए और हमारी प्राकृतिक सम्पदा को भी प्रोटेक्ट करना चाहिए – इस प्रकार का सुझाव यहां दिया गया। इस बारे में हमारे नेता ने हमें बहुत कुछ बताया है और हम उसे करने जा रहे हैं। हमने पहले भी यह बताया, प्रेसीडेंट एड्रेस में भी बताया गया है कि हम डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लाने जा रहे हैं। यह एक्ट हमने तैयार कर लिया है और केबिनेट के अन्दर उसके ऊपर हमने चर्चा की है। हमने कहा कि इस प्रकार का एक्ट सदन में, सत्र के इस हिस्से में नहीं, मगर सत्र के अगले हिस्से में जरूर यहां लाएंगे। उसके अंदर अगर कुछ दुरूस्तियां हो सकें, तो उसे देखने के लिए ग्रुप ऑफ मनिस्टर्स बनाया गया है। वे उसे जल्दी ही देखेंगे। उनकी तरफ से सुझाव वगैरह आए हैं। उसे देख कर, अगर उसमें कुछ और दुरूस्तियां करनी हैं, तो उसका भी प्रयास किया जाएगा। मगर एक्ट बनने तक हम इसे रोकना नहीं चाहते। जो डिजास्टर मैनेजमेंट आथोरिटी है, एक्ट को शायद टाइम लग सकता है, क्योंकि वह इधर आएगा, फिर स्टैंडिंग कमेटी में जाएगा, स्टैंडिंग कमेटी में भी टाइम लगेगा और फिर यहां आएगा। उसमें अगर एक-आध साल चला गया तो इतने पीरियड तक डिजास्टर मैनेजमेंट आथोरिटी नहीं हो, ऐसी सिचुएशन यहां पैदा न हो, इसके लिए एडमनिस्ट्रेटिव आर्डर से, केबिनेट डिसीजन लेकर डिजास्टर मैनेजमेंट आथोरिटी बनाने का हमने निर्णय किया है। इस डिजास्टर मैनेजमेंट आथोरिटी के अलग-अलग अंग हैं और उसी तरीके से ये काम करेंगं। इसमें एक एग्जीक्यूटिव कमेटी और एडवायज़री कमेटी भी है। एग्जीक्यूटिव में सरकारी अधिकारी रहेंगे। आथोरिटी के अंदर जानकार लोग पालिसी बनाने में और टैक्नोलॉजी के संबंध में रहेंगे और ऐसे काम करने में एक्सपर्ट लोग उसके अंदर होने चाहिए। एडवायज़री कमेटी में यहां के और बाहर के एक्सपर्ट भी हैं। जब-जब जरूरत पड़े, तो एक-आध दूसरे काम के लिए अगर हम उन्हें बुलाना चाहें, तो बुला सकते हैं।

यहां श्री मानवेन्द्र जी ने जो सूचना दी थी, उसे हमने मान्य किया है और जितना मान्य किया है, उतना ही नहीं है। राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में उसका उल्लेख है। इतना ही नहीं, हमने केबिनेट में उसके बारे में निर्णय लिया है और एक बिल बना है, जिसे हम यहां रखने जा रहे हैं।

महोदय, मैं नम्रता से बताना चाहूंगा कि जब हम नेशनल डिजास्टर आथोरिटी की चर्चा करते हैं, इसका मतलब हम सारी चीजें लेकर, अपने हाथ में रख कर, यहीं से पूरा काम करने की कोशिश करते हैं – ऐसा समझना दुरुस्त नहीं है। ऐसा हमारा प्रयास नहीं है और हम ऐसा काम नहीं कर सकते। यह इतना बड़ा सौ करोड़ लोगों का देश है और इतने बड़े देश में ये सारी चीजें नहीं हो सकती – इसकी हमें जानकारी है। इसलिए नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट में हमने कहा है कि उसी प्रकार स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट आथोरिटी भी होनी चाहिए और डिस्टि्रक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट आथोरिटी भी होनी चाहिए। जहां तक केन्द्र सरकार का सवाल है, यहां जो करना है, उसे हम करेंगे। हमने जो किया है, उसके खिलाफ, उसके विरूद्ध, उसे तोड़ने-मोड़ने वाला कायदा-कानून शायद स्टेट गवर्नमेंट नहीं बना सके, मगर उसके साथ चलने वाला, उसे मदद करने वाला कायदा-कानून स्टेट गवर्नमेंट जरूर बना सकेगी और ऐसे अधिकार उन्हें दिए गए हैं। इसी प्रकार हम सेंट्रलाइज़ न करते हुए, डिसेंट्रलाइज़ करते हुए, यह काम करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा कानून बनाने के पीछे और इस प्रकार की आथोरिटी तथा एक्सपर्ट कमेटी बनाने के पीछे क्या उद्देश्य है, ये बहुत अहम् चीजें हैं। आज तक हम जो काम कर रहे थे, यह रीएक्टिव काम था। जब कोई चीज होती है, उसके लिए यह करना है, उतना ही हमने सोचा। आपदा आने के पहले, पूरी तरह से तैयारी करने का काम किया है, मगर पूरे तरीके से काम नहीं किया, प्लान नहीं किया। यह कानून बताता है कि अगर भूकम्म आने वाली कोई जगह है, तो वहां भूकम्प से राहत देने के लिए क्या करना चाहिए, बाढ़ आने वाली है तो उसके लिए क्या करना चाहिए।

साइक्लोन आने वाला है तो उसके लिए क्या करना चाहिए। शायद हमारी खुशकिस्मती से आने वाले ५००-१००० साल में सुनामी आये या न आये, मगर भूकम्प तो आते रहते हैं, बाढ़ तो आती रहती हैं और यहां सूखा तो पड़ता रहता है, इन सारी चीजों के लिए और मैनमेड डिजास्टर के लिए भी हम पूरी तैयारी करना चाहते हैं। इस पर हमने पूरा विचार किया है। उसमें यह बताया गया है कि पूरा प्लान सरकार की तरफ से भी बनाया जायेगा, उसी प्रकार से डिपार्टमेंट की तरफ से भी प्लान बनाया जायेगा। डिपार्टमेंट वह प्लान बनाकर एथॉरिटी को बतायेगा और एथॉरिटी से उसे ग्रीन सिगनल मिलने के पश्चात, उस पर अमल भी करेगा। इस प्रकार की टेक्नोलोजी डैवलपमेंट के जरिये पूरी व्यवस्था इसके अन्दर बताई गई है और पैसे का भी जो सवाल है, उसे भी हमने हल करने की कोशिश की है।

आज नेशनल केलेमिटी रिलीफ फंड और नेशनल कंटिंजेंसी रिलीफ फंड – ये दो फंड्स हैं, जिनके द्वारा हम पैसा देंगे। पहले के १०वें और ११वें फाइनेंस कमीशन ने जैसा रिकमेण्ड किया था, उसके मुताबिक हम उन्हें पैसा दे रहे हैं। अब १२वें फाइनेंस कमीशन ने ज्यादा पैसा देने का सुझाव किया है, ऐसा हमें मालूम हुआ है। वह बहुत अच्छी बात है। मगर इससे ज्यादा भी अगर पैसे की जरूरत है तो सरकार की ओर से जब-जब जरूरत होती है तो केबिनेट में निर्णय लिया जाता है और पैसे दिये जाते हैं।

अब सुनामी के लिए कितना पैसा लगने वाला है, लोग कल यह पूछ रहे थे। हमने उनको बताया है कि सुनामी के लिए करीब-करीब १० से १२ हजार करोड़ रुपये तक लगेगा, ऐसा हमारा अंदाज है। हमने आज की स्थिति में प्रान्त की सरकार को और यूनियन टैरीटरी एडमनिस्ट्रेशन को भी पैसा दिया है। वह पैसा करीब-करीब ३५०० करोड़ रुपये तक दिया है। बार-बार यह पूछा जाता है कि खर्चा १२ हजार करोड़ का कहते हैं तो आपने इतना पैसा क्यों दिया। यह पैसा एकदम देने की जरूरत नहीं है। यह पैसा जैसी जरूरत होगी, वैसे पैसा दिया जायेगा। हम कह रहे हैं कि पैसे की वजह से कोई काम नहीं रुकेगा। जितना पैसा देने की जरूरत है, आपकी सरकार की शक्ति है, इस देश के लोगों की शक्ति है, पैसे की वजह से काम नहीं रुकेगा, पैसा हम जरूर देंगे। इसका मतलब करीब १० हजार करोड़ रुपये लगने वाले हैं और तीन साल में खर्च करने हैं तो पहले ही १० हजार करोड़ रुपये लोगों के हाथ में देना जरूरी नहीं है। जितना जरूरी है, उतना पैसा जरूर दिया जायेगा और लोगो को राहत देने का काम किया जायेगा। इस प्रकार से काम किया जा रहा है। जो एक्चुअल काम कर रहे हैं, जो लोग काम में लगे हुए हैं, उन लोगों की पैसे के बारे में कोई शिकायत नहीं है, न धान की शिकायत है, न कोई व्यवस्था की शिकायत है, कोई शिकायत नहीं है। इस प्रकार से हम काम करने की कोशिश यहां पर कर रहे हैं।

मैं संक्षेप में कहना चाहूंगा कि हमारे ऊपर आपत्ति आई है, मगर इसमें से भी हम रास्ता निकालेंगे और आज जो हमारी परिस्थिति है, उससे अच्छी परिस्थिति कल के लिए हम बनाकर छोड़ना चाहेंगे। उसके लिए हम टेक्नोलोजी का उपयोग करेंगे, नये विचारों का उपयोग करेंगे, हमारी नई प्रशासन पद्धति का उपयोग करेंगे, नये कानून का उपयोग करेंगे और नये प्रकार के इथोस अपने देश में निर्माण करके, सब लोगों के साथ मिलकर और सब लोगों की सहायता से हम यह काम करने की कोशिश करेंगे।

अन्त में कहना चाहूंगा कि ये जो काम होने हैं, इन कामों के अन्दर सब लोगों का ( व्यवधान)

श्री हरिभाऊ राठौड़ (यवतमाल) : लातूर में भूकम्प आया था, वहां अभी तक रिहैबलिटेशन नहीं हुआ। वह आपके क्षेत्र में है( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN : Hon. Minister is not yielding. Please take your seat. (Interruptions)

श्री हरिभाऊ राठौड़ : जो लोग वहां पर भूकम्प से प्रभावित हुए थे, अभी तक उनका रिहैबलिटेशन नहीं हुआ।( व्यवधान)

श्री शिवराज वि. पाटील : श्रीमन्, मैं यह बताना चाहूंगा कि इन्हें मालूम नहीं है कि वहां पर पूरा इन्तजाम हुआ है। यह राज्य का प्रश्न है, उसका मैं उत्तर नहीं देना चाहता।

बाकी के सदस्यों ने चर्चा का स्तर बहुत ऊंचा रखा है, पोलटिकल द्ृष्टिकोण से उन्होंने बात नहीं की है और उस स्तर को मैं नीचे आने देना नहीं चाहता। हमारे साथी अगर मेरे साथ कोई चर्चा करें तो मैं उसका उत्तर दे दूंगा, मगर मैं इतना कहूंगा( व्यवधान)

सभापति महोदय : मंत्री जी, एक मिनट।

श्री शैलेन्द्र कुमार : मैं एक स्पष्टीकरण करना चाहता हूं।( व्यवधान)

सभापति महोदय : आपका स्पष्टीकरण मैं जानता हूं।

श्री शिवराज वि. पाटील : मैं एक मिनट में खत्म करूंगा।( व्यवधान)

सभापति महोदय : अब समाप्त हो रहा है।

श्री शैलेन्द्र कुमार : हम एक स्पष्टीकरण चाहेंगे।( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Hon. Member, I am not allowing you. (Interruptions)

श्री शिवराज वि. पाटील : मैं एक मिनट में खत्म करूंगा, फिर उनके प्रश्न का उत्तर दूंगा।( व्यवधान)

सभापति महोदय : ऑनरेबिल मनिस्टर साहब, माननीय सदस्यों की जो भावना है, लास्ट क्लैरीफिकेशन उनका यही था कि वर्षा का जल, भूगर्भ जल और नदियों का जल, इनको एक यूनिट बनाने पर सरकार का क्या व्यू है?

आपका यही सवाल है। मैंने आपका सवाल ले लिया है।

( व्यवधान)

सभापति महोदय : आप बैठ जाइए। आपको अब मौका नहीं मिलेगा।

( व्यवधान)

श्री मोहन रावले (मुम्बई दक्षिण-मध्य) : महोदय, मेरा सवाल दूसरा है।( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN : Please take your seat Rawaleji.

(Interruptions)

श्री शिवराज वि. पाटील : मैं आपके सवाल का जवाब पहले दूँगा।( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Hon. Members, please take your seats.

(Interruptions)

सभापति महोदय : यह आप सभी लोगों का सवाल है।

( व्यवधान)

सभापति महोदय : रावले जी, माननीयय मंत्री जी का जवाब पूरा होने दीजिए।

( व्यवधान)

 

 

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Let me complete. Then, I will tell you (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record except the reply of the hon. Minister.

(Interruptions)*

श्री शिवराज वि. पाटील : महोदय, आपने बहुत अच्छा सवाल पूछा है । उसका उत्तर जो मुझे वैज्ञानिक रूप से मिला है, वह मैं आपको देता हूँ। आप कह रहे हैं कि सबसोइल पानी कम होता जा रहा है, इसके लिए आप क्या करेंगे? मैंने कुछ वैज्ञानिकों से इसके बारे में चर्चा की थी। मैंने कहा कि हम लोगों को तालाब बनाने के लिए सूचनाएं आती हैं और हम बनाते भी हैं। आप समझ लीजिए कि वर्षा नहीं हुई और पानी नहीं आया तो क्या होगा । आज जमीन के अंदर जो पानी है, वह पानी बहुत ज्यादा मात्रा में बाहर निकाला जा रहा है। मैं आपको अपने गांव की बात बताता हूँ। जब मैं छोटा था तो मेरे गांव में एक बावड़ी थी और उस बावड़ी से पानी निकालते थे । आज मेरे गांव में ४००-५०० बावड़ियां हैं । उन बावड़ियों पर मोटर लगाकर जमीन में पावर पम्प लगाया गया है। पहले उस बावड़ी में से दिनभर पानी निकालने के बाद भी पानी दो-तीन फुट से नीचे नहीं जाता था। आज के हालात में लोग मोटर लगाकर पानी निकाल रहे हैं, इससे सबसोइल पानी कम होता जा रहा है। जब मैंने उनसे यह सवाल पूछा कि इसके लिए आप क्या करेंगे? उन्होंने जवाब दिया कि आपको जमीन के अंदर छेद करना पड़ेगा और छेद के द्वारा उसके अंदर पानी डालना पड़ेगा। मैंने उनसे कहा, क्या हम इसके लिए बोरवैल करेंगे? उन्होंने कहा कि मैं बोरवैल की बात नहीं कर रहा हूं । मैं छेद की बात कर रहा हूँ। उन्होंने कहा कि अगर आप वृक्ष लगाएंगे तो हर वृक्ष एक बोर की तरह होता है । जब वह वृक्ष जमीन में चला जाता तो उसकी जड़ों के बीच से वर्षा का पानी चला जाता है और वह सबसोइल पानी होता है। उन्होंने कहा कि जमीन के ऊपर का और जमीन के नीचे का पानी कम होने से रोकने का एक ही इलाज है और वह है वृक्ष लगाना। यही उत्तर है सरकार की ओर से और मेरे पास दूसरा कोई उत्तर नहीं है। धन्यवाद।( व्यवधान)

श्री राज बब्बर : ओले भी गिरे हैं। उसके विषय में आपने कहा था कि आप जवाब देंगे।( व्यवधान)

श्री शिवराज वि. पाटील : यह वहां की सरकार का काम है। हम उनके साथ बात करेंगे कि हम वहाँ क्या कर सकते हैं।( व्यवधान)

 

*Not Recorded.

MR. CHAIRMAN: Now, Mr. Rawale. Please ask your clarification.

(Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record except what Mr. Rawale says.

(Interruptions)*

MR. CHAIRMAN: Raj Babbarji, please take your seat.

Rawaleji, please ask only one clarification.

श्री मोहन रावले : आपके माध्यम से मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि जो उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान के विशेषज्ञों से या बाहर के विशेषज्ञों से मदद लेने जा रहे हैं। लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि इसमें हिन्दुस्तान के विशेषज्ञों को नजरअंदाज किया गया है। कोयम्बटूर में एक वैज्ञानिक हैं, जो सूर्य की किरणों के ऊपर प्रडिक्शन करते हैं और उन्होंने अभी जो बम्बई में भुकम्प आया या इंडोनेशिया और जापान में आया था, उसकी उन्होंने प्रडिक्शन की थी। उनकी एक वेबसाइट भी है। उनको चीन सरकार ने भी सम्मानित किया है। क्या सरकार उनका ख्याल करके, इस पर विचार कर रही है।( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Now, please take your seat Rawaleji.

(Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Now, Mr. Shailendra Kumar.

(Interruptions)

MR. CHAIRMAN : Please take your seat.

श्री मोहन रावले (मुम्बई दक्षिण-मध्य) : सभापति महोदय, मैं जानना चाहता हूं कि क्या सरकार इस पर विचार करेगी?( व्यवधान)

सभापति महोदय : आप बैठ जाएं। मंत्री जी एक ही बार जवाब देंगे।

…( व्यवधान)

श्री शैलेन्द्र कुमार : सभापति महोदय, मैंने कल मंत्री जी को एक सुझाव लिखकर दिया था कि प्राकृतिक आपदा के बारे में सदन में पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्यों ने चिन्ता जाहिर की, सबने बड़े विस्तार से अपनी बात कही। गांवों में गर्मियों में लू में घरों में अचानक आग लग जाती है। जैसे अभी श्री बब्बर ने कहा कि कहीं ओला वृष्टि होती है, तमाम दैवी आपदाएं होती हैं, हमारे पास सांसद नधि के पैसे होते हैं।( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Please be brief, do not go in detail. Take your seat.

*Not Recorded.

श्री शैलेन्द्र कुमार : क्या ओला वृष्टि होने या आग लगने की स्थिति में हम सांसद नधि से उनको सहायता के रूप में धन दे सकते हैं? इसकी व्यवस्था करवानेका कष्ट करें।( व्यवधान)

श्री राज बब्बर : महोदय, जैसा हमारे साथी ने कहा और आपने भी इस बात से सहमति प्रकट की कि आगरा में जिस तरह ओला वृष्टि हुई, मैं उस क्षेत्र के बारे में बार-बार जानबूझकर कह रहा हूं क्योंकि उस क्षेत्र में बहुत मुश्किल से फसल होती है। किसान किस तरह जीता है। केवल दो हैक्टेयर की जमीन वाले किसानों को ही ढाई हजार रुपये मिल रहे हैं, उससे ऊपर की जमीन वाले किसान मर चुके हैं। आज यह हालत है कि सारे बैंक केन्द्र के अधीन हैं।( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Please take your seat. Shri A. Krishnaswamy.

श्री राज बब्बर : मैं जानना चाहता हूं कि क्या उनका कर्जा माफ किया जाएगा?( व्यवधान)

श्री शैलेन्द्र कुमार : यह उत्तर प्रदेश का मामला है। आपको इस पर ध्यान देना चाहिए।( व्यवधान)

सभापति महोदय : आप बार-बार बिना अनुमति के क्यों उठ जाते हैं?

…( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Shri Shailendra Kumar, please take your seat. Nothing will go on record except Shri A. Krishnaswamy’s clarification.

श्री राज बब्बर : हम आपसे शिकायत नहीं कर रहे हैं, सिर्फ मांग कर रहे हैं।( व्यवधान)

सभापति महोदय : राज बब्बर जी, आप स्थान ग्रहण कीजिए।

…( व्यवधान)

श्री राज बब्बर : किसानों को एक साल की मेहनत के बाद सिर्फ दस रुपये का चैक मिल रहा है। उसे जमा करवाने के लिए उसे बैंक में पांच सौ रुपये देकर एकाउंट खुलवाना पड़ेगा।( व्यवधान)

सभापति महोदय : राज बब्बर जी, आप स्थान ग्रहण कीजिए। आपकी कोई बात रिकार्ड में नहीं जा रही है।

…( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record except What Shri A. Krishnaswamy says. You should start your point.

…( व्यवधान)

सभापति महोदय : आप टाइम क्यों वेस्ट कर रहे हैं। राज बब्बर जी, आपकी बात रिकार्ड में नहीं जा रही है।

..( व्यवधान)

SHRI A. KRISHNASWAMY : Mr. Chairman, Sir, you know very well that Tamil Nadu was worst affected (Interruptions)

सभापति महोदय : आप नई परिपाटी डाल रहे हैं। आप बैठिए।

..( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: This is not fair Mr. Raj Babbar. आप बैठ जाएं। आपकी कोई बात रिकार्ड में नहीं जा रही है।

…( व्यवधान)

SHRI A. KRISHNASWAMY ): Sir, Tamil Nadu is worst affected by the Tsunami. Ten out of 40 Members participated in the Tsunami discussion. Each and every Member has spoken about the corruption in Tamil Nadu while distributing the Tsunami fund. But, in reply to the discussion, the hon. Minister says that there is no complaint regarding distribution of money. I want clarification on this.

MR. CHAIRMAN: One by one. Only one clarification.

चौधरी लाल सिंह (उधमपुर) : सभापति महोदय, मैंने कल पूछा था कि क्या सरकार कोई एक्ट बनाने जा रही है? मैं जानना चाहता हूं कि सरकार इसके लिए क्या कर रही है?( व्यवधान)

श्री रघुनाथ झा (बेतिया) : माननीय सभापति महोदय, जब कहीं भी प्राकृतिक आपदा आती है तो सरकार उसकी भरपाई करती है, लोगों को मदद देती है, यह खुशी की बात है। हम बिहार से आते हैं। उत्तरी बिहार प्रतिवर्ष नेपाल की नदियों से प्रभावित होता है। वहां १० लाख हैक्टेयर जमीन में वाटर लॉगिंग है, नदियों से कटाव होता है। वहां हर वर्ष नेपाल की नदियों से बर्बादी होती है। मैं आपके माध्यम से सरकार से कहना चाहता हूं कि भारत सरकार नेपाल सरकार से बात करके इसका कोई स्थायी समाधान ढूंढ़े। जब तक इसका स्थायी समाधान नहीं होता तब तक हमारे नुकसान की भरपाई होनी चाहिए। वहां एक हजार करोड़ रुपये का प्रतिवर्ष नुकसान होता है। हमारा कहना है कि आप वहां मदद करने का काम करें। ( व्यवधान)

सभापति महोदय, वहां पैकेज देने की बात की गयी थी लेकिन वह पैकेज भी हमें नहीं मिला। हम

लोग बर्बादी के कगार पर हैं। ( व्यवधान)

सभापति महोदय : आप लोग समय का ख्याल रखें।

…( व्यवधान)

श्री रघुनाथ झा : सभापति महोदय, सरकार को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए।

श्री तुकाराम गणपतराव रेंगे पाटील (परभनी) : माननीय सभापति महोदय, मंत्री जी ने रिप्लाई बहुत अच्छा दिया है। मैं एक प्रश्न पूछना चाहता हूं कि देश के वभिन्न राज्यों में ओलवृष्टि हुई है, महाराष्ट्र में भी ओलावृष्टि हुई है, इस ओलावृष्टि के कारण किसानों को केन्द्र सरकार द्वारा क्या मदद दी गयी है, इस बारे में मंत्री जी ने कुछ नहीं कहा। मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि आप इस बारे में बताने की कृपा करें। ( व्यवधान)

डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया (खजुराहो) : सभापति महोदय, फसल बीमा योजना के तहत किसान पैसा जमा कराता है, लेकिन जो ओलावृष्टि हुई है, उसमें मदद की इकाई तहसील रखा गया है जबकि तहसील में यदि कुछ गांवों में ओला पड़ता है तो उनको इमदाद नहीं मिलती। मेरा कहना है कि मदद की जो इकाई है, वह खेत के नुकसान को देखकर मानी जाये। इसके बाद ही किसानों को मदद मिल सकती है, नहीं तो फसल बीमा के माध्यम से किसानों की लूट हो रही है। ( व्यवधान)

सभापति महोदय : आपको मैंने कॉल नहीं किया है।

…( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN : Please take your seat. Nothing will go on record except what Shri Swain says.

(Interruptions)*

MR. CHAIRMAN: I have called Shri Swain.

SHRI KHARABELA SWAIN (BALASORE): Sir, it is very surprising that most of the questions are being put by the Ruling Party Members. It is very surprising. If they are so much interested in putting questions to their own Government, I feel that they should come and sit here with us. I request them to come here! Sitting on that side of the House, they are putting questions! (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Shri Swain, why are you indulging in cross-talks?

(Interruptions)

 

*Not Recorded.

श्री राम कृपाल यादव : सभापति महोदय, हर मैम्बर को बोलने का अधिकार है चाहे वह इस पक्ष का हो या उस पक्ष का हो। ( व्यवधान)

सभापति महोदय : राम कृपाल जी, आप क्या कर रहे हैं ?

…( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Shri Ram Kripal Yadav, please take your seat.

(Interruptions)

SHRI KHARABELA SWAIN : Sir, I represent the principal Opposition Party. You should have actually called me first to put the question.

Yesterday, a very eloquent speech was made by the hon. Minister of Science and Technology. I did put a question to him, asking whether the Government is going to make a provision for the mandatory certification from the structural engineer, while constructing a high-rise building. His answer was that we have the technology, but we want a political will. So, I am asking this Minister whether he has the political will to do it. (Interruptions)

सभापति जी, यह कैसी बात करते हैं ? ( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record.

(Interruptions)*

SHRI KHARABELA SWAIN : Sir, it is very much insulting. …*

सभापति महोदय : स्वाईं जी, आपको समझ में नहीं आ रहा। आप समय का ध्यान रखिये।

…( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record except what Shri Swain says.

(Interruptions)*

सभापति महोदय : जो असंगत बात है, वह सदन की प्रौसीडिंग्स में नहीं जायेगी।

…( व्यवधान)

 

 

 

*Not Recorded.

14.00 hrs.

SHRI KHARABELA SWAIN : Do you have the political will to have mandatory structural engineer certification?

Secondly, are you going for the strict implementation of the Coastal Regulatory Zone Act? As per that Act, within 500 meters of the high tide zone, no commercial activity or construction is to be taken up.

My last question is, (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : You are allowed to ask only one clarification.

SHRI KHARABELA SWAIN (BALASORE): I am not asking individual question, I am asking on behalf of the principal Opposition Party.

A question was raised by hon. Member, Shri Suresh Prabhu. Are you going to form a Voluntary Corps to deal with emergency?

These are my three questions. Hon. Minister may kindly reply to them.

श्री नीतीश कुमार (नालन्दा) : सभापति महोदय, माननीय गृह मंत्री जी को स्मरण होगा और चूंकि अभी अपने उत्तर के सिलसिले में उन्होंने सूखे की भी चर्चा की है। बिहार के कुछ हिस्सों में सूखे की स्थिति है और नालन्दा में भूख से ६ लोग मरे, उनके नाम भी हमने यहां बताये थे और उसके संबंध में गृह मंत्री जी ने कहा था कि वहां से हम मालूमात करके इसकी जानकारी देंगे। इसके बाद कृषि मंत्री जी एक दिन यहां उपस्थित थे। उस दिन भी हमने सवाल उठाया था जब भूख से मरने वालों की संख्या बढ़कर १२ हो गई थी। लेकिन अफसोस की बात है कि वहां इस संबंध में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। आगे लोग इसका शिकार नहीं हों, इसके लिए कोई एहतियाती कार्रवाई भी नहीं हुई है। बीच के दौर में चुनाव की स्थिति थी। सब लोगों का ध्यान उधर से बंट गया था लेकिन आज चर्चा हो रही है। इसलिए मैं दरख्वास्त करूंगा कि वहां इस ओर ध्यान दिया जाए और जो भी आवश्यक कार्रवाई हो, वह की जाए।( व्यवधान)

चौधरी विजेन्द्र सिंह (अलीगढ़) : सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी के रिप्लाई के बाद क्लेरफिकेशन का प्रावधान है। यह सदन नियम-कानून से चलता है।( व्यवधान)

सभापति महोदय : विशेष परिस्थितियों में मौका दिया गया है। इसके पूर्व उदाहरण भी हैं।

चौधरी विजेन्द्र सिंह : विषय बहुत महत्वपूर्ण है। किसानों को बहुत नुकसान हुआ है। सवाल इसका नहीं है कि यह विषय केवल विधान सभा का है या भारत सरकार के अधिकार में आता है। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि किसानों को बहुत ज्यादा क्षति हुई है। ओले पड़ने से किसान बर्बाद हो गये हैं, उनके पशु मरे हैं। चाहे उत्तर प्रदेश में जितने भी पुराने मानक हों, यह ओलावृष्टि दैविक आपदा में आती है और दैविक आपदा राष्ट्रीय आपदा है। इसलिए हम माननीय मंत्री जी से कहना चाहेंगे कि चाहे ओलावृष्टि हुई है, इसके लिए किसानों को पैसा दिया जाए जिससे किसानों को राहत मिले। अलीगढ़ जनपद में भी यही हुआ है।( व्यवधान)

श्री रामदास आठवले (पंढरपुर) : सभापति जी, महाराष्ट्र में जो सूखा पड़ा था और जो एनडीए की सरकार थी, उसने ५० करोड़ रुपया दिया था।( व्यवधान) अभी यूपीए की सरकार के आने के बाद ५०० करोड़ रुपया मिला है। हमने १७०० करोड़ रुपये की मांग की थी। अभी महाराष्ट्र को १२०० करोड़ रुपया और मिलना चाहिए।( व्यवधान)

श्री अनंत गुढ़े (अमरावती) : सभापति महोदय, विदर्भ में भी सूखा पड़ने से फसलें नष्ट हुई हैं, वहां पीने का पानी नहीं है। मंत्री जी ने जवाब में कुछ नहीं कहा है।( व्यवधान)

सभापति महोदय : यह कोई डिबेट नहीं है। लास्ट क्लेरफिकेशन है। Nothing, except the clarification of Shri Varkala Radhrakrishnan, will go on record.

(Interruptions)*

MR. CHAIRMAN: Your Party Member has already spoken.

(Interruptions)

 

SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN: The tsunami disaster is most unprecedented. There was no warning. To my knowledge, there was no warning about its occurrence, throughout the world. It appears, thousands of people have lost their lives. I was at the midst of it at that time. What actually happened was, some announcements were made by the Home Ministry as well as the Ministry of Science and Technology. The Home Ministry pre-empted that it may occur again. Its re-occurrence may be there. The Science and Technology Ministry gave an impression that it will not occur.

*Not Recorded.

Sir, with such contradictory announcements by two Ministries, I had to run away from that place along with the people there. There was an announcement from the Home Ministry stating that Tsunami might recur again. This announcement was immediately contradicted by the Ministry of Science and Technology and Department of Ocean Development saying that there was no chance of Tsunami recurring. I had to run away with my car from that place because of this announcement (Interruptions) My point is that such contradicting announcements should not be made by the Ministries of the Central Government and instead, the Government should take proper measures to ensure that poor people are not put to hardships by confusing statements (Interruptions)

श्री अनंत गुढ़े : महोदय, एनडीए सरकार ने स्वजल धारा स्कीम चलाई थी…

सभापति महोदय : आप बैठ जाइए, मैं सिर्फ श्री रूपचन्द मुर्मू जी को बोलने के लिए बुलाया है।

श्री रूपचन्द मुर्मू (झाड़ग्राम) : महोदय, विनाशकारी सुनामी के विषय में यहाँ पर जो चर्चा हुई, उसका माननीय मंत्री जी ने बहुत अच्छे ढंग से विस्तृत उत्तर दिया है, लेकिन माननीय मंत्री जी से मेरा एक छोटा-सा प्रश्न है कि इस सुनामी की खबर अमेरिका के पास पहले से थी। लेकिन अमेरिका ने अन्य किसी देश को वह सूचना नहीं भेजी थी। इसके बारे में हमारी सरकार की क्या प्रतक्रिया है?

श्री राम कृपाल यादव : महोदय, माननीय मंत्री जी ने अपने जवाब में यह कहा था कि सुखाड़ वाले इलाकों में अनाज स्टोर किया जाएगा। माननीय सदस्य श्री नीतिश कुमार जी ने संसदीय क्षेत्र नालन्दा के विषय में बताया, इसी तरह बिहार में १९ जिले ऐसे हैं जहाँ पर पूरी तरह से सूखा पड़ा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में सरकार द्वारा अनाज दिया गया है, लेकिन सूखा प्रभावित इलाकों में अभी तक सरकार के माध्यम से किसानों को किसी तरह की सुविधा नहीं दी गयी है। मैं जानना चाहता हूँ कि बिहार के ऐसे पीड़ित लोगों के लिए सरकार क्या प्रावधान करने जा रही है?

SHRI BIKRAM KESHARI DEO: Sir, the hon. Home Minister has very articulately explained in his reply the various points and also has given us a lot of information. But during his reply we could not clearly get to know about the formation of the Disaster Management Authority and also about an Act on disaster management. I would like to know from the hon. Minister, in how many months time is he proposing to finally get an Act in this regard? Relief measures in the event of any calamity are implemented by the concerned State Governments. So, will the Government consider having an Act ensuring a uniform relief code to be followed taking into consideration the various agro-climatic zones in the country?

SHRI R. PRABHU (NILGIRIS): Sir, a PIL has been filed in the Supreme Court complaining that the relief meant for the Tsunami victims has not reached them properly. I would like to know from the Government whether the directions given by the Supreme Court are being followed by them or not. What actions the Government is taking to implement the directions of the Supreme Court in this regard?

DR. K.S. MANOJ (ALLEPPEY): Sir, the attitude of the Government towards protection of coastal areas is not satisfactory. Tsunami is an occasional phenomenon. In my place, sea erosion is a regular feature. Every year, thousands of people become homeless and it has an impact on the State Government. Sea erosion should also be considered as a natural calamity. Very often, we are not getting assistance from the Centre as it is not considered as a calamity. When CRZ is implemented, the geographical features and the peculiarity of Kerala should also be considered.

श्री बची सिंह रावत ‘बचदा’ (अल्मोड़ा) : àÉé BÉEä´ÉãÉ ABÉE cÉÒ ¤ÉÉiÉ BÉEÉÒ +ÉÉä® àÉÆjÉÉÒ VÉÉÒ BÉEÉ vªÉÉxÉ +ÉÉBÉßE­] BÉE®ÉxÉÉ SÉÉciÉÉ cÚÆ* àÉéxÉä BÉEãÉ +É{ÉxÉä £ÉÉ­ÉhÉ àÉå ªÉc nÉÒ lÉÉÒ ÉÊBÉE <ºÉ ´É­ÉÇ BÉEÉ{ÉEÉÒ £ÉÉ®ÉÒ ÉÊcàÉ{ÉÉiÉ cÖ+ÉÉ cè* ãÉÉäMÉÉå BÉEÉ BÉEcxÉÉ cè ÉÊBÉE MÉÉÌàɪÉÉå àÉå VÉãÉ ºiÉ® BÉEÉ{ÉEÉÒ ¤Éfà VÉÉAMÉÉ* ÉʤÉcÉ® àÉå £ÉÉÒ ¤ÉÉfà +ÉÉ<Ç +ÉÉè® xÉä{ÉÉãÉ BÉEÉÒ xÉÉÊnªÉÉå ºÉä £ÉÉÒ BÉEÉ{ÉEÉÒ {ÉÉxÉÉÒ càÉÉ®ä nä¶É àÉå +ÉÉiÉÉ cè* =ºÉBÉEä ÉÊãÉA ABÉE ÉʴɶÉä­ÉYÉ nãÉ MÉÉÊ~iÉ ÉÊBÉEªÉÉ VÉÉA, <iÉxÉÉÒ ¤É{ÉEǤÉÉ®ÉÒ cÖ<Ç cè, =ºÉBÉEÉ BÉEÉ{ÉEÉÒ º]Éä®äVÉ cÉä MɪÉÉ cè, =ºÉ ¤ÉÉ®ä àÉå ´Éc BÉÖEU BÉEɪÉÇ´ÉÉcÉÒ BÉE®ä*

MR. CHAIRMAN: Let there be no more clarifications as it is already 2.12 p.m. and there is further business before the House to be taken up.

(Interruptions)

DR. SUJAN CHAKRABORTY (JADAVPUR): Sir, I want a specific clarification from the hon. Minister. Government is definitely considering the question of coastal zone management. Many other issues have been talked about. But I do not want to go into them. Coastal area management is an important issue and obviously, Government is trying to consider it. In that sense, I want to know whether the Government is planning to have a national mangrove afforestation programme which is also very important. This is my specific question to the hon. Minister.

SHRI B. MAHTAB (CUTTACK): Sir, I would have appreciated if Mr. Kapil Sibal, the Minister for Ocean Development would have been here. My question is regarding the Ministry of Ocean Development and also Science and Technology. Though the Ministry of Home Affairs is the nodal agency dealing with the subject, this question is directed to the Minister for Ocean Development.

A report has come up from a scientist named, Shri Ramanathan, from Thiruvananthapuram about whom I mentioned yesterday. I also mentioned the Institute which has come out with that report.

My specific question is whether a study is being made in this regard or not. Do you contemplate to make a study in this regard? Drilling is being made in the ocean bed to bring out gas and oil. That also affects the core area of the earth. At times, it also leads to different types of earthquakes. It is also the shifting of the Indian Ocean plate that is having an effect on the Indian Ocean RIM countries . I want to know whether any study is being made by the Government by taking advantage of the report which has come out of the Institute of Trivandrum. I would like to seek a clarification from the Minister on this point.

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Sir, hon. Members are very learned because, while asking questions, they have also made suggestions. All the suggestions which have come in the shape of questions are also important. Hence, I would like to thank them.

One question was asked as to whether mandatory certificate would be made compulsory or not. We have already taken steps in this regard and we have prepared our policy and rules and we are sending those policies and rules to the State Governments. They are expected to give those policies and rules to the municipalities and corporations and see that the mandatory provisions are followed. So, this work cannot be done from the Ministry of Home Affairs or the Government. It has to be done from other parts. We have already taken steps in this regard.

As far as using CRZ is concerned, at the time of Shrimati Indira Gandhi, this CRZ was started and at that time, many people objected to it. They did not realize the importance of CRZ. I was one of the Ministers who was bombarded with letters that CRZ should not be there. But we are trying our best to see that CRZ is implemented. You are very right when you said that if CRZ was really implemented, so many lives would not have been lost.

Now that this tragedy has happened, this will be realised by all concerned and we will certainly like to see that the CRZ is implemented.

An hon. Member has asked a question about the voluntary organisations. We have a civil defence activity going on in the country. It is only yesterday we had the Thirteenth Conference of the forces which are part of the civil defence in the country. The Fire Brigade, the Home Guards, and others are also there. They would certainly be of help and would contribute in dealing with these things. We have rules and regulations and we have our policy. We would like to do it at a larger scale. The funds that are given to them are very limited. They find it difficult to manage with these funds. Yesterday, while speaking to them in the Conference I said that they are doing a very important job and we would like to help them with bigger amounts of money. राज बब्बर जी ने ओले के बारे में सवाल उठाया है, उसके बारे में मैं जवाब दे रहा था। ओला नैसर्गिक आपदा है, नेचुरल कैलेमिटी है। इसके लिए जो कुछ भी हम कर सकते हैं, जरुर करेंगे। मैं आपको यहां पर बताना चाहता हूं कि यहां पर जब चर्चा होती है तो यह माना जाता है कि सब काम हमको भारत सरकार की तरफ से ही करना है। हम यहां पर सुनामी के बारे में भी काम कर रहे हैं। आंध्राप्रदेश, पांडिचेरी, तमिलनाडु और केरल में हम क्या कर रहे हैं? हमने उनसे पूछा कि आपका कितना नुकसान हुआ, कितने पैसे की जरुरत है और आप उसमें क्या कर सकते हैं, वह बताइये, और हम आपकी इसमें ज्यादा से ज्यादा मदद करेंगे। यहां तक कि घर बांधने के लिए तो पूरा पैसा देने का सवाल है। उसी प्रकार से जो भी नैसर्गिक आपदा होती है, उसको हैंडल करने और उस पर कोई काम करने की जो जिम्मेदारी और दायित्व है वह प्रांत की सरकार का है लेकिन हम यह नहीं कह सकते हैं कि यह काम प्रांत की सरकार का है, हमारा कुछ नहीं है। हम, प्रांत की सरकार और लोग तो एक ही हैं। संविधान में कुछ अधिकार प्रांत को दिये हैं तो कुछ हमको दिये हैं। मैं कहना चाहूंगा वहां की सरकार से और यूपीए की सरकार से कि क्या हुआ है और वहां से सूचना आने के बाद उन्होंने बताया कि इतना नुकसान हुआ है और इस प्रकार का नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई इस प्रकार से की जाएगी, आने के बाद, जिस प्रकार से भी, हम ज्यादा से ज्यादा मदद कर सकते हैं वह हम करेंगे। यहां बैठकर तो मैं कुछ नहीं कह सकता हूं कि आपने इतना पैसा मांगा, मैं तत्काल दे दूं। उसका कितना फाइनेंशियल इम्प्लीकेशन है, वह भी देखना होगा। जब सरकार की तरफ से बात आयेगी तो हम जरूर उसके अनुरूप कार्य करेंगे। वहां की सरकार भी ऐसी सरकार नहीं है कि कुछ नहीं कर सकती है, उसने किया भी होगा। किया होगा, चाहे कम किया होगा। जब आप सब लोगों के प्रतनधि बोल रहे हैं तो आपके कहने का हम आदर करेंगे लेकिन तत्काल तो मैं बोलने की परिस्थिति में नहीं हूं।

कोस्टल-लाइन की बात बहुत अहम बात है और उसके लिए अलग-अलग विचार हैं। हमारी कोस्ट-लाइन ६ हजार किलोमीटर के लगभग है। उस पर क्या-क्या करना है, यह देखना बहुत बड़ा काम है। लेकिन इन दिनों पूरी दुनिया में यह विचार चल रहा है कि कोस्ट-लाइन को प्रोटैक्ट करने के लिए क्या किया जा सकता है? कुछ लोगों ने कहा कि आप नैसर्गिक पद्धति मैंग्रूव्ज वगैरह पर कार्य कर सकते हैं।

यह भी कहा जाता है कि कुछ जगहों पर आप दीवार बांधकर यह कार्य कर सकते हैं। दीवार बांधने का सवाल आता है तो लोग समझते हैं कि घर जैसी दीवार बांधना। आपने मैरीन ड्राइव देखा होगा तो ध्यान में आयेगा कि समुद्र के पानी से रक्षा करने के लिए किस प्रकार की दीवार बांधी जा सकती है, उसके ऊपर सोचना है। संसार में जो बड़ी-बड़ी ऑरगेनाइजेशन्स हैं वल्र्ड-बैंक वगैरह की रुचि भी इसमें बताई है।

इसके लिए पैसा बहुत लगेगा और बहुत दिनों के लिए पैसा लेना पड़ेगा। इस विषय में हमारे देश और दूसरे देशों में विचार चल रहा है। इसे ध्यान में रख कर हम जो भी कदम उठा सकते हैं, जरूर उठाने की कोशिश करेंगे लेकिन इम्मिजिएटली एक-दो साल में हो जाएगा, ऐसी बात नहीं कही जा सकती।

यहां बताया गया कि मैंने एक्ट के बारे में नहीं कहा। I have spoken about that. In fact, the Bill is ready and that has been considered by the Cabinet. But the Cabinet has referred it to a Group of Ministers. The Groups of Ministers are looking into the Bill to see as to how it can be refined further. This Bill is likely to be introduced in the next part of this Session. We are ready with it. We have given an assurance and that assurance is given to the hon. Members by the President of India in his first speech delivered to you. So, we have no escape. We shall have to bring it. We are ready with it. We will bring it. But, we are not waiting for the thing that until that Bill is passed, nothing will be done. This is the kind of stand that we are taking. What we are saying is that we will be introducing the Bill and whatever has been mentioned in the Bill, will be done through the Administrative Orders also. We took this matter to the Cabinet and the Cabinet has approved it. Now, there shall be a National Disaster Management Authority.

There shall be a State Disaster Management Authority and a District Disaster Management Committee. The National Disaster Management Authority and the State Disaster Management Authority will be helped by the Executive Committees – one at the national level and the other, at the State level. They shall also be helped by a Committee of Experts and advisors. The advisors will also be there.

Now, one of the points raised here was that what we have provided in the law, the same thing we are going to do through the Administrative Orders also. We are not saying that. But, after the law is passed by you and if you are suggesting that something else has to be done, the law will have the upper hand and we will modify our Administrative Orders. Everything will be done according to law. But, whatever has been suggested in the law is going to be done through the Administrative Orders also because this was the time when the attention of the people – thinking people specially, the experts, and those who can visualise as to what can happen in future and as to how to face the challenges of future – could be drawn. Now, they have been suggesting it. We are accepting their ideas. There will be new policies, new rules, new acts, and new arrangements. Now, we have about eight battalions of para-military forces getting trained. We have already established the National Disaster Management Institute and this Institute is preparing modules to be used for training purposes and that kind of training will be imparted to others also. So, all the steps which you have suggested – and very rightly suggested – we have already taken. We will only be happy to do if anything more is to be done.

14.23 hrs. (Mr. Deputy-Speaker in the Chair)

Now, as far as MPLAD Fund is concerned, the suggestion you have given is a very valid one. But, let me tell you, from the Home Ministry, we do not take action. In this matter, generally, the hon. Speaker is also involved. When I was the Speaker, I was not allowing anybody to interfere in it. I do not know whether the present hon. Speaker will allow me to interfere in it. But, what you have said is a part of the record and if you think that it is necessary for me to convey to him also, I will do that. But it is mainly for him and whatever he will suggest, will be acceptable.

Sir, I am sorry that some inconvenience was caused to my colleague. But, let me tell you, when the earthquake took place in Latur, every day we were receiving some rumours or some information that again the earthquake is going to take place. For the first few days, we were very alert and we felt very sorry also that something was going to happen again. Later on, we found that those were the rumours only. Whenever such a disaster takes place, there are people who say that this is going to happen or that is going to happen and all those things. Sometimes, you know, with an anxiety to see that the people are alerted, something is done.

Nobody has done it with wrong intentions. This was done when it came to the notice of the officers concerned. Here, ‘the officers concerned’ means, the officers from the Home Ministry, officers from the Scientific Ministry. Then, they had some consultations also. Though we had doubts in our minds yet some of us thought that let us err on the safe side. That was done. If any inconvenience is caused to my colleague and my friend, I am sorry about it. But we could not have helped that matter.

As far as the funds used by some States are concerned, let me tell you that this is a natural disaster. The attitude of the Government of India is not to find fault with anybody and criticise anybody. If anything has to be done in a proper manner, we expect that that could be done in a proper manner. If it is not done in a proper manner, those who are doing it in a wrong manner would be responsible. But we do not want to start this kind of help and relief with an intention to malign somebody. So, we would rather be very careful, whether from Delhi or from Chennai. We get nothing out of criticism. (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Hon. Member, please sit down. It is not to be recorded.

(Interruptions)*

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Again, there was a question about some other country. Let us, please, not create a situation in which we will be blaming each other. The entire world and all the people in the country felt for those who suffered in this calamity. So, it is not correct for us to say that they had some information and they did not purposely give this information. That kind of apportioning blame on anybody or unnecessarily criticising each other is to be better avoided. I think I have made it clear. (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: It is not to be recorded.

(Interruptions)*

*Not Recorded.

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: I cannot respond to what they have said. They have to respond to it. (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: What the hon. Minister can do, he has said about it.

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: I do not want to criticise in the same language the people who are there. I would only say that if they have done it, it is better that it should not have been done.

As far as Shri Nitish Kumar’s question is concerned, here again whenever we consider any problem on any issue, if we are speaking in Parliament, we think that everything has to be done by Parliament. If they are speaking in the Assembly, they think that everything has to be done in the Assembly. But, here, we shall have to share the responsibility. What we are going to do with respect to the availability of food has been explained by the Agriculture Minister while replying to the debate in the House. He is saying that we are going to give funds to the State Governments to procure food grains and keep those food grains in their States only so that it does not become necessary to transport food grains from one State to the other State covering thousands of kilometres and increasing the value and the price of the food grains also. More over, I think it would be a good thing if we accept the idea of having the Food Banks. That means, wherever it is necessary, the food grains should be available. If there are any areas which are affected by drought every now and then, there the Food Bank should be established so that the food grains are available.

As far as the individual cases are concerned, I will contact Shri Nitish Kumar and give some information. I will try to respond to them. I really have no memory of it. (Interruptions)

SHRI NITISH KUMAR: This is regarding the starvation deaths. I mentioned about it in the last Session. You had responded to it. It has been said that there were starvation deaths.

 

*Not Recorded.

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: If a statement was made that starvation deaths had taken place, we are very sorry. It should not have taken place. But we should get some information as to where the starvation deaths had taken place. If possible, the name and all those things should be available so that we could do something.

SHRI NITISH KUMAR: All the information was shared in the House itself. Even names were given.

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: I do not remember. I am sorry, if I do not remember it. But if it is there, I will see to it.

SHRI HANNAN MOLLAH (ULUBERIA): I want to know about the National Mangrove Programme.

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: This National Mangrove Programme comes under the Ministry of Science and Technology, and that Ministry will take care of it.

श्री मोहन रावले : साइंटिस्ट्स को प्रोमोशन नहीं दी जाती है( व्यवधान)

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: About the scientists, you give me the names, I will try to find out the information.

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