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Title: Need to include ‘Sanwara’ community of Chhattisgarh in the list of Scheduled Tribe category.
श्री गुहाराम अजगल्ले (सारंगढ) : महोदय, मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959/छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के धारा 165(1) में जो अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति की सूची बनायी गयी है उसके क्रमांक 42 में सावर अथवा सवारा, 43 में सहरिया, सेहारिया, सोसिया अथवा सोर, 44 में सौर, 45 में सौंर लिखा हुआ है।
जबकि छत्तीसगढ़ के महासमुंद, रायगढ़ जिले के उड़ीसा के सीमावर्ती बहुत स्थानों में यह जाति सौंरा, संवरा के नाम से जानी जाती है। इसके राजस्व अभिलेखों में भी सैंरा, संवरा अंकित है यह समूह सवर, सवरा, सौर, सोर का ही पर्याय है।
उक्त आशय के संबंध में विशेष सचिव छत्तीसगढ़ शासन आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के द्वारा दिनांक 24.6.2003 को पत्र के माध्यम से संयुक्त सचिव भारत सरकार जनजाति कार्य मंत्रालय शास्त्री भवन, नई दिल्ली को उक्त आशय की अधिसूचना शीघ्र जारी करने हेतु भेजा गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के पूर्व संवरा जाति अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में आता था और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण एवं सुविधाओं का लाभ शिक्षा एवं नौकरियों के क्षेत्र में मिलता था।
केवल मात्रा में सद्भाविक चूक जोकि कार्यालयीन चूक है जिसका दंड निर्दोष संवरा जाति को उठाना पड़ रहा है, जो अत्यंत दुखद विषय है।
अतः माननीय मंत्री जी से निवेदन करता हूं कि संवरा जाति को अनुसूचित जनजाति की अनुसूची में शामिल किया जाये और राज्य सरकार को निर्देशित किया जाये ताकि संवरा जाति के लोग अनुसूचित जनजाति आरक्षण की सुविधाओं से लाभान्वित हो सके।