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Regarding Need For Compulsory Singing Of €˜Vande Mataram’ In The … on 23 August, 2006

Lok Sabha Debates
Regarding Need For Compulsory Singing Of €˜Vande Mataram’ In The … on 23 August, 2006


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Title : Regarding need for compulsory singing of ‘Vande Mataram’ in the educational institutions of the country.

प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर) : सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से भारत सरकार से मांग करना चाहता हूं कि राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम ” संपूर्ण देश की शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य किया जाए। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा अपने सुप्रसिद्ध उपन्यास आनन्द मठ में वर्णित वंदे मातरम भारत का राष्ट्रगीत है। इस गीत की रचना को आगामी ०७ सितंबर को १०० वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इस गीत पर पूरे राष्ट्र को गर्व है। यह हमारा राष्ट्रीय प्रतीक है। “वंदे मातरम ” जैसे देशभक्तिपूर्ण, प्रेरणादायी, प्रभावी, ओजस्वी एवं हजारों क्रांतिकारी तथा स्वाधीनता सेनानियों के मूलमंत्र पर आपत्ति किया जाना देशद्रोह के समान है।

वंदे मातरम राष्ट्रभक्ति का पर्याय है। इस्लाम कभी भी राष्ट्रभक्ति के खिलाफ नहीं हो सकता। यह कहना कि समस्त मुस्लिम समुदाय इस राष्ट्रगीत के खिलाफ है, यह सच्चाई से कोसों दूर है। यदि वंदे मातरम का इस्लाम अथवा शरीयत से कोई लेना-देना होता, तो अशफाक उल्लाह जैसे महान क्रांतिकारी लोग स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर नहीं करते और न ही ए.आर.रहमान जैसे अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार वंदे मातरम मां तुझे सलाम के रूप में पेश करते। यह अत्यंत खेद का विषय है कि भारत सरकार की नीति इस मामले में बहुत ढुलमुल है और वंदे मातरम गीत रचना के शताब्दी वर्ष में पूरे देश की सभी शिक्षण संस्थानों में इस राष्ट्रगीत को गायन के रूप में अनिवार्य किया जाना चाहिए।

इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

SHRI P.S. GADHAVI (KUTCH): Sir, I may be allowed to associate with what Prof. Rasa Singh Rawat mentioned. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Shri P.S. Gadhavi, Shri Bhanu Pratap Singh Verma and Shri Guharam Ajgalle are allowed to associate with what Prof. Rasa Singh Rawat mentioned just now.