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Title: Need to formulate a permanent action plan in collaboration with Government of Nepal to solve the problems of floods, drought and power situation in Bihar.
(झंझारपुर) : अध्यक्ष महोदय, मैं महत्वपूर्ण विषय की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। भारत-नेपाल का एक समझौता वर्ष २००१ में हुआ था जिसके तहत बाढ़-सुखाड़ का अध्ययन करने और उसका स्थायी समाधान करने के लिए सात जगह संयुक्त प्रौजेक्ट कार्यालय खोले जाने का निर्णय लिया गया था लेकिन आज भी नेपाल भाग में वह कार्यालय नहीं खुल रहे हैं। वित्त मंत्रालय में प्रस्ताव एक साल से धूल चाट रहा है। बाढ़-सुखाड़ के चलते १० करोड़ लोग बिहार के हर साल परेशान होते हैं । आज बिहार की आर्थिक बदहाली बढ़ गयी है क्योंकि उससे झारखंड राज्य अलग हो गया है। जहां से ४० परसेंट खनिज पदार्थ आता था, वह राज्य आज उससे अलग हो चुका है। आज बिहार की हालत बहुत ही खराब है।
इसलिए हम चाहते हैं कि भारत-नेपाल समझौता जो वर्ष २००१ में हुआ था, उसके तहत जो सात जगह प्रौजेक्ट कार्यालय खोलने हैं, उसका एक कार्यालय विराट नगर में है, काठमांडू में सम्पर्क कार्यालय है, इसी के साथ-साथ जनकपुर, कूरेले, विराटनगर,, लहान आदि जगहों पर तुरंत कार्यालय स्थापित करके बाढ़-सुखाड़ का स्थायी समाधान होना चाहिए। इसके कारण पूरे देश में ४० से लेकर ५० हजार करोड़ रुपये का नुकसान होता है जबकि राहत के नाम पर सिर्फ १० हजार करोड़ रुपये ही दिये जाते हैं। हमारा कहना है कि राहत को बंद किया जाये। आर्थिक पैकेज बिहार को नहीं चाहिए। हमको इसका स्थायी समाधान चाहिए क्योंकि हम देश को पुरुषार्थहीन नहीं बनने देना चाहते। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : ठीक है, मैंने आपको दो मिनट दे दिये हैं।
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: श्री रघुनाथ झा और श्री रघुवंश प्रसाद सिंह, इन दोनों को मैं इनके साथ एसोसियेट करता हूं।
…( व्यवधान)