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Title : Issue regarding MP’s recommendation for treatment of poor patients from Prime Minister’s Relief Fund.
श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : अध्यक्ष महोदय, विगत सत्र में भी हमने इस सवाल को उठाया था और यह सवाल अति संवेदनशील है। यहां सदन के नेता मौजूद हैं। देश के असाध्य रोगों से ग्रसित गरीब मरीजों के इलाज हेतु प्रधानमंत्री राहत कोष से सहायता राशि पहले से ही प्रदान की जाती रही है, जिसके सहयोग से मरीज अपनी प्राण रक्षा कर लेते हैं। प्रधानमंत्री राहत कोष से सहायता राशि प्राप्त करने के लिए गरीब मरीजों को अपने स्थानीय सांसद से अनुशंसा करवानी पड़ती है। सांसदों की अनुशंसा के आलोक में राहत राशि प्रदान की जाती रही है। दिनांक १०.११.०५ को प्रधानमंत्री राहत कोष कार्यालय से मेरे पास एक पत्र आया कि नये नियम के अनुसार कोई भी सांसद एक वर्ष में केवल १२ मरीजों की ही अनुशंसा कर सकता है, यानी कि महीने में केवल एक मरीज आपके द्वारा अनुशंसित १२ लोगों को सहायता राशि दे दी गयी है, इसलिए आप अब किसी भी मरीज की अनुशंसा नहीं भेजें।
अध्यक्ष जी, बीमार पड़ने वाले गरीब मरीजों की संख्या पूर्व से निर्धारित करना किसी भी सांसद के लिए मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव है कि किस वर्ष और किस महीने में कितने लोग बीमार पड़ेंगे। स्थानीय सांसद होने के नाते कोई भी सांसद अपने क्षेत्र के गरीब मरीजों की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए सहायता राशि की अनुशंसा कर देता है ताकि उसकी प्राण रक्षा हो सके। एक तो राहत कोष की जटिल कागजी प्रक्रिया के कारण समय से सहायता राशि नहीं मिल पाती है, जिसकी वजह से समय से ऑपरेशन नहीं करा पाने के कारण कितने मरीजों की मृत्यु हो जाती है, अब इस नये नियम से कितने और गरीबों की जान जाएगी, कहना मुश्किल है।
अध्यक्ष महोदय, इस संबंध में हमने जब एक पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय में भेजा, उसका मुझे जो उत्तर मिला, उसका कुछ अंश मैं आपको पढ़ कर सुनाना चाहता हूं जो इस प्रकार हैं – मुझे इस संबंध में आपको स्थिति से निम्नानुसार अवगत कराने का निदेश हुआ है – हमें ऐसे कुल ३० मामले प्राप्त हुए हैं, जिनकी आपने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के तहत सहायता देने हेतु सिफारिश की है। फिलहाल, इस कार्यक्रम के अंतर्गत अप्रतिबद्ध नधियों की उपलब्धता को देखते हुए इन सभी मामलों को स्वीकृत करना हमारे लिए संभव नहीं है। यद्यपि, हम इस बात को समझते हैं कि ये मामले तत्काल चकित्सा की समस्याओं से जुड़े हुए हैं, फिर भी आपसे अनुरोध है कि कृपया आप संसाधनों की उपलब्धता की स्थति को ध्यान में रखें। हम आपके आभारी रहेंगे यदि आप मामलों की प्राथमिकता तय कर दें। यदि आप ऐसा करना जरूरी न समझते हों तो हम उपर्युक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, प्रारंभिक अनुरोध के प्राप्त होने की तारीख के आधार पर क्रमानुसार उन्हें स्वीकृत करने हेतु कार्रवाई करेंगे। स्वीकृत किए जा चुके मामलों की एक सूची आपके संदर्भ हेतु संलग्न है।
अध्यक्ष जी, तीस नामों की सूची मेरे पास भेजी गई है। आपकी इजाजत हो तो हम इस सूची को टेबल पर रखना चाहते हैं।
अध्यक्ष महोदय : नहीं, आपको कह दिया है।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप लोग बैठ जाइए। मेहरबानी करके आप लोग बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मैं आपको बोलने नहीं दूंगा।
…( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : हम किसी पर आरोप प्रत्यारोप नहीं लगा रहे हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप लोगों के बैठ जाने से इम्पोर्टेंट इश्यु ठीक तरह से उठाया जा सकेगा।
…( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, हम किसी पर आरोप प्रत्यारोप नहीं लगा रहे हैं। हम आपके माध्यम से, सदन के नेता मौजूद हैं, विशेष आग्रह करना चाहते हैं कि किसी भी सांसद के लिए यह तय करना सम्भव नहीं है कि कौन मरीज पहले मरने वाला है और कौन सा मरीज बाद में मरने वाला है। ऐसी सिफारिशें पहले से होती आ रही हैं। यह कोई नई बात नहीं है। इस बारे में किसी तरह के नियम में फेर बदल करना देश के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है। मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि इस बारे में गंभीरता से विचार करते हुए जो नए नियम बनाए गए हैं, वे समाप्त किए जाएं।… (Interruptions)
MR. SPEAKER: No, nothing will be recorded.
(Interruptions)* …
श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : महोदय, मैं अपना पत्र ले करना चाहता हूं।
* Not Recorded.
MR. SPEAKER: No, I am sorry. You can send it to the Ministers separately and not to the House.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : आप लोग बैठ जाइए। Please sit down. मेहरबानी करके हाउस को चलाने का मौका दीजिए।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Mr. Harikewal Prasad, kindly listen to me. आप सुनिए, एक मिनट रुक जाइए। Hon. Members, this is a matter on which I have received notices from two hon. Members[m64] . He has raised it. I have got a notice from Shri Harikewal Prasad. I will ask him to associate.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: As a special matter, you can send your slip to show that you have associated.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: But this is not a precedent, not everyday it will happen. आपने तो नोटिस देने का कष्ट भी नहीं किया।
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: The names of Dr. Karan Singh Yadav, Shri Subhash Maharia, Dr. Satyanarayan Jatiya, Shrimati Kiran Maheshwari, Shrimati Pusp Jain, Maj. Gen. (Retd.) B.C. Khanduri, Shri Santosh Gangwar, Shri E. Ponnuswamy, Shri Subrata Bose, Shri K.S. Rao, Shri L. Rajagopal, Shri Anantha Venkatarami Reddy, Shri K.J.S.P. Reddy, Shri D. Vittal Rao, Shri G. Nizamuddin, Shri M. Sreenivasulu Reddy, Shri Raghunath Jha, Shri Alok Kumar Mehta, Shri Sunil Kumar Mahato, Shri Ram Kripal Yadav, Shri Sita Ram Singh, Shri Ganesh Prasad Singh, Dr. Dhirendra Agarwal, Shri Rabinder Kumar Rana, Dr. K.S. Manoj, Shri Shriniwas Patil, Dr. C. Krishnan, Shri Ravichandran Sippiparai, Shri Bachi Singh
Rawat, Shri Virendra Kumar, Shri Devendra Prasad Yadav may also be associated.
श्री हरिकेवल प्रसाद (सलेमपुर) : माननीय अध्यक्ष जी, माननीय प्रभुनाथ सिंह जी ने जो नोटिस दिया है, मैं उससे अपने को जोड़ता हूं और आपके माध्यम से विशेष तौर से सदन के नेता से अनुरोध करना चाहता हूं। आज की जो परिस्थिति है, उसमें माननीय सदस्य अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र से चुनकर यहां आते हैं, वहां के मतदाताओं की संख्या १२ लाख से लेकर १३-१४ लाख होती है। मेरा इलाका तो एकदम पिछड़ा है और वहां से अनेक बीमार लोग आते हैं और हमसे मिलते हैं। वे कहते हैं कि हमारा आदमी पी.जी.आई. में भर्ती है, एम्स में भर्ती है, उसका आपरेशन होना है और हमारे पास पैसा नहीं है। डाक्टर ने जो रिपोर्ट दी है, उस रिपोर्ट के अनुसार ३-४ लाख रुपया हम कहां से दे पाएंगे। ऐसी परिस्थिति में जब मेरे सामने ऐसा सवाल आता है तो मैं प्रधानमंत्री को लिखने का प्रयास करता हूं, मुख्यमंत्री को लिखने का प्रयास करता हूं। बहुत से मरीज ऐसे आये, जिनके आवेदन-पत्र जाने के बाद भी पैसा न मिलने के कारण वे यहां से चले गये।
मैं आपके माध्यम से प्रधानमंत्री से मानवता के आधार पर अनुरोध करना चाहता हूं कि इतनी बड़ी संख्या में तमाम तरीके से, दूसरे ढंग से पैसे चले जाते हैं, लेकिन मानवता के आधार पर आप एक महीने में एक सांसद को एक आवेदन पर धन देने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करें और जो आवेदन-पत्र आये, उसे मानवता के आधार पर धन देने का काम करें।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपसे उम्मीद और विश्वास करता हूं कि इस काम को पूरा करेंगे।
…( व्यवधान)
मोहम्मद सलीम (कलकत्ता-उत्तर पूर्व) : ऐसी डिमांड के लिए स्पीकर रिलीफ फंड होना चाहिए। …( व्यवधान) ये बहुत सीरियसली कह रहे हैं।
श्री मोहन सिंह (देवरिया) : हमारे संरक्षक आप ही हैं।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: No, not even one word is being recorded.
(Interruptions)*
MR. SPEAKER: You do not have to tell us what is the condition in this country. Everybody knows about it. This is a question of a special fund. You are talking about the hon. Prime Minister’s Relief Fund.
… (Interruptions)
* Not Recorded
MR. SPEAKER: Who is talking? When I am talking why are you talking? क्यों लास्ट दिन ऐसा करते हैं, हम निकाल देंगे। Do not take liberties with this Chair.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: We are all very concerned. Not a single individual in this country or single citizen will suffer because of lack of healthcare or lack of proper treatment. This is the objective. I am sure everybody has to see to it. The Government is under one of its obligations whether through this fund or not. I am sure everybody wants that everybody is properly treated. So far as this issue is concerned, nobody can dispute.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : हम क्या करेंगे, जाकर सारा बन्द कर देंगे क्या?
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Gurudas Dasgupta.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nothing will go on record except what Shri Gurudas Dasgupta says.
(Interruptions)*
MR. SPEAKER: Please follow the proper procedure. You are such an articulate Member. You spoke very well on discussion on nuclear issue. Please sit down.
… (Interruptions) अध्यक्ष महोदय : ठीक है। बैठिये। फाइनेंस बिल में थोड़े ज्यादा टैक्स के लिए राजी हो जाइये। Shri Gurudas Dasgupta.
… (Interruptions) MR. SPEAKER: I am not minimising the importance of this matter. Please do not think so. But I have to regulate the House. There are so many matters before me. इतने मैटर हमको खत्म करने होंगे।
… (Interruptions)
* Not Recorded
MR. SPEAKER: I find that brevity is a virtue that is being lost. Both relevance and brevity are great virtues.
… (Interruptions)