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Title : Regarding heavy donations collected by non registered institutions and tax evasion thereto.
श्रीमती किरण माहेश्वरी (उदयपुर) : महोदय, आयकर अधनियम में सार्वजनिक पुन्यार्थ संस्थाओं की कर गणना एवं कर से छूट से संबंधित प्रावधान धारा ११,१२,१३ में दिये गये हैं। इन धाराओं में कर से छूट लेने के लिए यह आवश्यक शर्त है कि वह संस्था अधनियम की धारा १२ ए में पहले अपना पंजीकरण करवायें। बिना पंजीकरण के उन्हें कोई भी छूअ इन धाराओं में नहीं मिलती है।
मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ है कि भारत में लायंक क्लब और रोटरी क्लब के नाम से लगभग १०००० से अधिक संस्थायें देश के सभी शहरों और प्रमुख कस्बों में पिछले ५० सालों से कार्य कर रही है। इनमें से किसी भी संस्था ने आयकर कानून की धारा १२ ए में अपना पंजीकरण नहीं करवा रखा है। ये संस्थायें कम्पनी अधनियम में संस्था पंजीकरण अधनियम में अथवा न्यास के रूप में भी पंजीकृत नहीं है। ऐसे में ये संस्थायें मात्र व्यक्तियों का समूह है। इनकी कोइ भी वैधानिक पृथक पहचान नहीं हे।
धारा १२ ए में पंजीकरण नहीं होने से इन संस्थाओं की कुल सकल प्राप्तियां कर गणना के लिये कुल आय मानी जानी चाहिये। पर आयकर विभाग ने अभी तक इन संस्थाओं से कर वसूली की कोई भी प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की है। राजस्थान उच्च न्यायालय में एक याचिका के माध्यम से भी सरकार द्वारा इतने बडे स्तर पर हो रही कर चोरी रोकने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। यह याचिका भी लगभग २ सालों से लंबित है। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को भी इस बारे में ज्ञापन दिये गये हैं। पर सरकार ने इन संस्थाओं से कर वसूली के कोइ भी प्रयास ही नहीं किये हैं।
देश में ऐसी लगभग १०००० संस्थायें कार्य कर रही हैं। एक संस्था अपने सदस्यों से व जनता से औसतन ५ लाख रूपया साल भर में संग्रहित करती है। इस पर कर मुक्त आय सीमा के एक लाख रूपयों की छूट देने के बाद भी कर एक लाख बीस हजार रूपया बनता है। इस प्रकार एक साल में लगभग १२० करोड़ रूपयों की कर चोरी की जा रही है। इन पर ब्याज व शस्ति भी १२० करोड रूपया बनती है। पिछले ५० सालों में यह कर चोरी १२००० करोड़ रूपयों की हो जाती है।
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*The speech was laid on the Table.
लायंस क्लब का दक्षिण पूर्व एशिया का मुख्यालय मुम्बई में स्थित है। इस मुख्यालय द्वारा लगभग १००० करोड़ रूपयों की प्राप्ति की जाती है। यह भी धारा १२ ए में पंजीकृत नहीं है। इसकी कर देयता भी ३०० करोड़ रूपया प्रतिवर्ष की बनती है। ये संस्थायें रुाोत पर कर कटौती नहीं करने की भी दोषी है।
महोदय, इसी प्रकार ये संस्थायें विदेशों से भी अनुदान प्राप्त करती हैं। विदेशों से अनुदान प्राप्त करने के लिये विदेशी अनुदान नियमन अधनियम १९७६ के अंतर्गत पूर्व पंजीकरण आवश्यक होता है। इन संस्थाओं ने इस अधनियम में भी कोई पंजीकरण नहीं करवा रखा है। गृह मंत्रालय कइ बार सूचना देने के बाद भी इस अधनियम के अंतर्गत कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
सरकार का इतने बड़े स्तर पर एवं खुली कर चोरी पर मूक दर्शक बना रहना जनता में कई संदेहों को उत्पन्न करता है। सरकार इस बारे में क्या ठोस कार्यवाही कर रही है। इस बारे में सदन को बतायें।