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Title : Alleged irregularities in preparation of lists of people living Below Poverty Line.
श्री वीरेन्द्र कुमार (सागर) : सभापति महोदय, मैं बहुत ही गम्भीर मामले पर सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं, जो आम आदमी, गरीब आदमी के हित से जुड़ा है। अभी गरीबी रेखा सूची का सर्वे सारे देश में हुआ है। सभी सांसदों को जनता के बीच में जाना पड़ता है। जनता उनसे सवाल पूछती है कि जिनके नाम पिछली सूची में थे, नई सूची में क्यों नहीं जुड़ पाये। बी.पी.एल. सर्वे में जो अंकों का आधार बनाया गया है, १४ अंक से नीचे अंक प्राप्त करने वाला गरीबी रेखा सूची में आ गया और १४ अंक से ऊपर वाला बाहर हो गया। सरकार कहती है कि गरीबी का प्रतिशत ३४ प्रतिशत से घटकर २६ प्रतिशत रह गया है। क्या इस तरह से रातों-रात गरीब व्यक्ति अमीर व्यक्तियों की श्रेणी में पहुंच जाएगा, गरीबी कम हो जायेगी?
अब किसी व्यक्ति के पास साइकिल, पंखा, रेडियो है तो उसका नाम बी.पी.एल. सूची में नहीं आता। अगर कोई व्यक्ति ८०० रुपये प्रतिमाह कमाता है, वह ४०० रुपये खर्च करता है, ४०० रुपये बचाता है और उसमें से साइकिल, पंखा या ब्लैक एण्ड व्हाइट टी.वी. ले लेता है तो वह सूची से वंचित हो जाता है। दूसरी तरफ कोई व्यक्ति अगर ८०० रुपये कमाता है और वह ६०० रुपये की शराब पी जाता है और २०० रुपये बचने के कारण वह फटेहाल रह रहा है तो वह गरीबी रेखा सूची में आ जाता है।७७ट
सरकार को चाहिए कि आय से अधिक सम्पत्ति हो, तो जांच कराये तथा गहन जांच कराकर आय के मापदंड में संशोधन करके गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले सभी व्यक्तियों को सूची में शामिल किया जाए तथा जिन लोगों ने फर्जी नाम जुड़वाये हैं, उनके विरूद्ध कार्यवाही का प्रावधान करें, ताकि गरीबों का हक न छीना जा सके, साथ ही साथ सर्वे अवधि को बढ़ाया जाए, ताकि वास्तविक गरीब जो इससे वंचित रह गये हैं, उनके नाम इसमें जुड़ सकें तथा इसके माध्यम से शासन की वभिन्न योजनाओं का लाभ उनको मिल सके।