Posted On by &filed under Judgements.


Lok Sabha Debates
Combined Discussion On The Interim Budget (General) -2009-10; … on 24 February, 2009


>

Title:Combined discussion on the Interim Budget (General) -2009-10; Demands for Grant on Account (General) 2009-10 and Supplementary Demands for Grants (General) 2008-09.

 

 

MR. SPEAKER: Now we come to Items 23, 24 and 25 to be taken together. 

          Shri Mohan Rawale.  You have got eight minutes.

श्री मोहन रावले (मुम्बई दक्षिण-मध्य): महोदय, हिन्दुस्तान में अब तक जो घोटाला नहीं हुआ   ..*, इसे मैं आपके सामने रखना चाहता हूं। यूपीए सरकार ने यूएस के साथ डील की और हिन्दुस्तान के कंट्रोलर एंड आडिटर जनरल ने रिपोर्ट में लिखा है, as of September 2007, the estimated uranium reserves were about 1,07,268 tonnes.  40 साल तक पूरा हो सकता है। सरकार ने बताया कि हमारे पास सिर्फ छः महीने के लिए यूरेनियम है। इनको डील करनी थी  ..*

अध्यक्ष महोदय :  आप धीरे-धीरे बोलिए।

श्री मोहन रावले : महोदय, एक मेगावाट के लिए नौ करोड़ रुपए खर्च होने चाहिए जबकि 12 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। हिन्दुस्तान में वर्ष 2020 में एक करोड़ बीस हजार मेगावाट बिजली मिलने वाली है। अभी इसकी प्रोडक्शन कॉस्ट 12 करोड़ रुपए है इस तरह से इसकी कॉस्ट दो लाख चालीस हजार करोड़ होगी। इसे इतने सस्ते में कैसे दे सकते हैं? सामान्य आदमी को सिर्फ साढ़े पांच रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलती है।      ..* आपके पास यूरेनियम था। सीएजी ने रिपोर्ट दी है।     ..* अभी तक कांग्रेस सरकार हिन्दुस्तान को लूटती थी अब यूपीए उसके पार्टनर्स को लेकर हिन्दुस्तान को लूट रही है। आपने ऐसा क्यों किया? प्रणव मुखर्जी आप बताएं…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : जवाब देने के समय बताएंगे। अभी कैसे बताएंगे?

श्री मोहन रावले :  इससे पहले भी मैंने संसद् में बताया था कि वर्ष 2013 में  दो लाख मेगावाट बिजली की जरूरत है और वर्ष 2020 में यह जरूरत दुगुनी हो जाएगी, दो लाख की जगह चार लाख हो जाएगी। आप बताइए कि बीस हजार मेगावाट बिजली कहां से पूरी होगी?   ..*

 

* Not recorded.

 

          महोदय, इस्ताम्बुल में एक बार अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेस हुई थी। वहां हिन्दुस्तान के साइंटिस्ट गए थे और उन्होंने इंटरनेशनल कांफ्रेस में बताया था कि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की सहायता से न्यूक्लियर फ्यूल बना सकते हैं, थोरियम से न्यूक्लियर फ्यूल कन्वर्ट कर सकते हैं। इन्हें डील करने की क्या आवश्यकता थी? आपने विदेश को इतना पैसा क्यों दिया? दो लाख चालीस हजार करोड़ क्यों दिया? आज तक हिन्दुस्तान के इतिहास में ऐसा नहीं हुआ जो इन्होंने किया है। सीएजी ने इस बारे में रिमार्क दिया है जिसके बारे में मैं आपको बताना चाहता हूं। अमर्त्य सेन ने कहा है ­: Democracy is the reward by itself.[RP7] 

          हिंदुस्तान में 25 करोड़ से ज्यादा लोग बीस रुपये प्रतिदिन भी नहीं कमा पाते हैं। हमारे देश में 94 परसैन्ट लोग अनऑर्गेनाइज्ड सैक्टर में काम करते हैं। आज उन लोगों की नौकरियां जा रही हैं और उन्हें सरकार अनइम्पलायमैन्ट एलाउंस भी नहीं दे रही है। मैं कहना चाहता हूं कि UPA is the reward by itself. इन्होंने अपनी पीठ थपथपाई हैं कि हमने यह किया है, वह किया है। मैं जानना चाहता हूं कि इन्होंने क्या किया है? देश में इतने किसानों द्वारा आत्महत्याएं की गईं। महाराष्ट्र में हर दिन के बाद किसान आत्महत्याएं कर रहे थे, लेकिन इन्होंने क्या किया। इस मामले में हमारे आदरणीय उद्धव ठाकरे जी ने कई मोर्चे निकाले थ। उस समय वे किसानों से जाकर मिले, उनके लिए आवाज उठाई और बोले कि किसानों के कर्ज माफ करो। लेकिन इन्होंने उनकी बात नहीं सुनी और पैकेज डिक्लेयर होने के बाद भी बहुत सारे किसान मर गये।

          सर, मैं आपसे विनती करना चाहता हूं कि हमारे मुम्बई शहर के लिए 25 हजार करोड़ रुपये मिलने चाहिए। हमारे मुम्बई शहर से एक लाख करोड़ रुपये केन्द्र सरकार को मिल रहे हैं। मैं यह  मांग इसलिए कर रहा हूं क्योंकि हमारे मुम्बई शहर में प्रतिदिन पांच हजार लोग आते हैं और झुग्गी-झोंपड़ी बनाकर रहते हैं, जिसके कारण हमारी बिजली, पानी, शिक्षा और सारे इंफ्रास्ट्रक्चर पर इनका बोझ पड़ता है। इसलिए मुम्बई शहर को कम से कम 25 हजार करोड़ रुपया देना चाहिए। झुग्गी-झोंपड़ी और चाल में रहने वाले लोगों के लिए मुफ्त में घर देने चाहिए।

          सर, अभी मुम्बई शहर पर हमला हुआ। उसके लिए मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से विनती करना चाहता हूं कि स्नॉरकल में 32 परसैन्ट डय़ूटी लगाई जाती है।

अध्यक्ष महोदय : किसमें डय़ूटी लगाई जाती है?

श्री मोहन रावले : स्नॉरकल, जो फायर ब्रिगेड की गाड़ी होती है। उसके लिए सरकार 32 परसैन्ट डय़ूटी लगाती है। अभी मुम्बई शहर के लिए हमें पांच स्नॉरकल की आवश्यकता है, जो 68 एम.एम. से 100 एम.एम. तक जाने वाले हैं। यदि सरकार यह डय़ूटी कम करेगी तो हम ज्यादा मंगा सकते हैं। आपने देखा होगा कि होटल ताज और ओबरॉय में जो हमला हुआ, उसके कारण इनकी कभी भी बहुत आवश्यकता हो सकती है।

          इसके अलावा हम लोगों ने मुम्बई शहर के लिए रायफल्स मांगे हैं। लेकिन रायफल्स के मिलने में दिक्कत हो रही है, क्योंकि ये रायफल्स फॉरेन से आते हैं। वहां 9 एम.एम. रायफल्स की आवश्यकता है, स्पीड बोट्स की आवश्यकता है, माइन प्रोटैक्टेड व्हीकल्स की भी आवश्यकता है। लेकिन अभी तक केन्द्र सरकार के द्वारा ये सब चीजें वहां नहीं दी गई हैं। इसलिए मेरी विनती है कि केन्द्र सरकार इन चीजों को वहां तुंत देने का कष्ट करे।

         सर, मैं मिल मजदूर का बेटा हूं और मेरे क्षेत्र में सारी एन.टी.सी. की मिले हैं। स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी ने इनका राष्ट्रीयकरण इसलिए किया था, ताकि मिल मजदूरों को रोजगार मिले। लेकिन अभी मिलें बंद होने जा रही हैं और सरकार मिलों को बेचने भी जा रही है। किसी भी मिल पर पहला हक मिल मजदूर का होता है। यदि इन मिलों को सरकार बेच रही है तो वहां के मिल मजदूरों को मुफ्त घर मिलना चाहिए और प्राइवेट मिलों के लोगों को भी मुफ्त घर मिलना चाहिए। इसके लिए मैं सरकार से प्रार्थना करता हूं। इसके अलावा अभी एन.टी.सी. को ज्वाइंट वैन्चर करने जा रहे हैं। यदि इनका ज्वाइंट वैन्चर होता है तो जो वहां के वर्कर्स हैं, उनके बेटों को वहां प्रायोरिटी मिलनी चाहिए।

अध्यक्ष महोदय : सब हमारे से ले लोगे, आप हमारी मुम्बई, हमारी मुम्बई करते हो।

श्री मोहन रावले : सर, केन्द्र सरकार को मुम्बई से एक लाख करोड़ रुपये मिल रहे हैं।

अध्यक्ष महोदय : हम भी मुम्बई के हैं।

श्री मोहन रावले : सर, आपका स्वागत है। आपने हमें बहुत मौके दिये हैं, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं, लेकिन प्रार्थना करता हूं कि जो न्यूक्लियर डील हुआ है। I am neither a Science graduate nor a scientist. लेकिन मैं साइंस स्टूडैंट रह चुका हूं, इसलिए मुझे पता है। लेकिन मैं इसकी टैक्निकेलिटी में नहीं जा रहा हूं। लेकिन यह रियलिटी है, हमारे साइंटिस्ट्स ने उसी वक्त बोला था। भाभा ने कहा था कि हमारे पास इतना थोरियम है कि दो हजार सालों तक इसकी कमी नहीं होगी और इससे हम लोग यूरेनियम बना सकते हैं। हमारे वैज्ञानिक इतने सक्षम हैं। इस्तांबुल में स्टेटमैन्ट दी गई थी। सरकार ने कहा था कि हमारे पास छः महीने के लिए शॉर्टेज है। मैं जानना चाहता हूं कि सरकार ने ऐसा क्यों कहा? …( व्यवधान)   * इसलिए सरकार ने यह डील किया है। 

MR. SPEAKER: Please delete that. मुम्बई के लिए सभी कुछ ले लिया।

श्री मोहन रावले : सर, दस हजार करोड़ रुपये सीक्रेट फंड के लिए चले जाते हैं, लेकिन उसकी मॉनिटरिंग नहीं होती है। हमारा निवेदन है कि उसकी मॉनिटरिंग होनी चाहिए। मुम्बई में जो हमला हुआ, सीक्रेट…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : श्री येरननायडू, आप केवल पांच मिनट बोलेंगे[BS8] । 

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Now, please conclude. You are exploiting my affection for you.

SHRI MOHAN RAWALE : No, Sir.

          आपने मुझे बोलने के लिये जो मौका दिया है, उसके लिये बहुत बुहत धन्यवाद।  मुझे आप पर पूरा गर्व है क्योंकि आपने विपक्ष के लोगों को ज्यादा से ज्यादा बोलने का मौका दिया है, ऐसा मुझे लगता है। चाहे क्वैश्चन पूछने में हो या डिबेट के लिये हो…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय :  मैंने कोशिश की है।

श्री मोहन रावले : मुझे इस बात का दुख होगा क्योंकि पता नहीं आसन पर आगे कौन आयेगा?…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय :  अच्छा ही आयेगा।

श्री मोहन रावले : लेकिन आप नहीं होंगे, इसका मुझे दुख होगा।

अध्यक्ष महोदय : Thank you very much.  मैं जहां रहूंगा, आपसे जरूर मिलूंगा।

                                     

 

 

 

 

 

                                                                  

  * Not recorded.

 

 

 

SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU (SRIKAKULAM):  Mr. Speaker, Sir, I rise to participate in the debate relating to the Interim Budget presented by the hon. Finance Minister.

          This Interim Budget is a great disappointment for us.  It is a great deficit Budget.  Never ever in the past, in the Budget, there has a been a deficit of Rs. 3,30,000 crore.

          Now, the country is facing agrarian crisis,  economic crisis, price rise, unemployment problem and unprecedented inflation.  There is no solution mentioned in this Interim Budget about all these problems.

          Regarding the price rise, let me inform this august House that in the year 2004, the people were getting  rice in the open market at Rs. 12 a kilo whereas the present price of rice is Rs. 30 a kilo.  Same is the case of all the other essential commodities.  I am citing two-three more examples.  Take the case of tamarind.   In the year 2003, tamarind was being sold at Rs. 22 a kilo whereas the present price of tamarind is Rs. 60 a kilo.  Similarly, the cement in the year 2003, was being sold at Rs.  100 per bag whereas now, it is being sold  at Rs. 225 per bag. Similarly, the sunflower oil/ groundnut oil, in the year 2000, were being sold at Rs.  45 per litre and now, its price is  about Rs. 100 per litre.   This is the present situation about the price rise in the country.  But the Government of India has not taken any step for reduction of the prices of these essential commodities.  Even though the inflation  rate has reduced to about 4.3 per cent yet the prices of essential commodities are not coming down. Therefore, it is not Aam Admi’s Budget.  The common man  is suffering very badly in this country.

          Regarding the agrarian crisis, let me tell this august House that  in the last 12 years, 1,90,000 farmers  have already committed suicide.  In Andhra Pradesh alone, in the last five years,  4,805 farmers have committed suicide. In spite of the Prime Minister’ Relief Package, the Debt Relief Package of about Rs. 70,000 crore why are these suicides by farmers still continuing?  Lakhs of farmers have taken loans from the private moneylenders at a high rate of interest. But there is no solution provided in this Interim Budget  about their problems relating to debt.  This Debt Relief Package will not apply to the farmers, who have taken money from the private moneylenders, that too,  at a high rate of interest.   Therefore, the Government of India should also think about solving the problems of the farmers who have taken loans from the private moneylenders.  The situation is very alarming.

          Same is the case with weavers.  In Andhra Pradesh alone, 500 weavers have committed suicide because of lack of food and lack of work.  So many thousands of weavers have committed suicides in the whole of the country. Even the Minister of Textile has submitted a big package to the Government of India about waiver of Rs. 2,200 crore… (Interruptions)

SHRI L. RAJAGOPAL (VIJAYAWADA): The Government of Andhra Pradesh is doing many things.

SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU : I am requesting the Government of India… (Interruptions)

The Government of Andhra Pradesh has waived everything. Tomorrow, you are losing power, and that is why, you are giving concessions  and  everything… (Interruptions)

          Sir, this is the state of affairs in this country. That is why I would urge upon the Union Government to also   announce a package for the waivers in the country.

Similar is the situation about SEZs.  In the name of SEZs, the Government of Andhra Pradesh is forcibly taking lands  from the farmers even with two crops, three crops land. At the time of passing of the SEZ Bill, Mr. Speaker, you were in the Chair, and while replying, the hon. Minister of Commerce had assured the House: “ We will take up 150 SEZs in the first phase. Only after seeing the working conditions  of the SEZs, we will increase the number of SEZs.”  But till December, the Government of India has already given the formal approval of 552 SEZs. Among those 552 SEZs,  100 SEZs are approved in Andhra Pradesh alone. Even the Government of India is forcibly taking two crops/three crops land and forcibly  giving SEZs.   …[r9] **

          In the name of SEZ, they are giving the lands to the real estate people. In turn, the real estate people are selling those lands.

MR. SPEAKER: That comes under the State Government. That is a State Government matter.

SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU : Mr. Speaker, Sir, out of 552, there are 52 in Andhra Pradesh alone.

MR. SPEAKER: You cannot raise the State Government matter. The reference to the State Government will be deleted.

SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU : There is another issue. Mr. Speaker, Sir, you have anyhow obliged to discuss the Satyam scam tomorrow. So, I do not want to go into the details. Satyam scam is a big corporate scam.

MR. SPEAKER: It is coming up.  आप छोड़िए।

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Do not record it.

(Interruptions) …*

MR. SPEAKER: Now, Prof. Chander Kumar.

          Please conclude.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Nothing will be recorded. No, there is nothing more.

(Interruptions) … *

MR. SPEAKER: Now, Prof. Chander Kumar.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Your time was one minute. I have given you five minutes.

… (Interruptions)

* Not recorded.

 

 

MR. SPEAKER: No, I am sorry.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: No, do not record anything.

(Interruptions) …*

MR. SPEAKER: No, nothing will be recorded. Yerrannaidu ji,I am sorry.

          Prof. Chander Kumar.

(Interruptions) … *

MR. SPEAKER: Do not record his speech.

(Interruptions) …*

MR. SPEAKER: No, this is not Andhra Pradesh Budget.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: No, I am sorry. Mr. Yerrannaidu, you are not cooperating. I gave you time. Your time was one minute but I have given you five minutes.

                                                                            

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

* Not recorded.

 

 

 

*डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डेय (मंदसौर) : महोदय, केन्द्र की कांग्रेस नीत गठबंधन सरकार द्वारा जिस प्रकार का अंतरिम बजट प्रस्तुत किया गया है। यह बजट चुनाव को दृष्टिकोण में रखकर कुछ ऐसी घोषणाओं के साथ आया है जिन्हें कैसे पूरा किया जायेगा इसके बारे में कोई दृष्टिकोण प्रस्तुत नहीं किया गया है। यह बजट आम आदमी का बजट नहीं है। आम आदमी की चिंता यथावत है, यथावत रहेंगी। गरीबी और अमीरी की खाइ और बढ़ेगी। वर्ष 2008-09 में बजट में राजकोषीय घाटा कम दिखाने की दृष्टि से विभिन्न योजनाओं में आबंटन कम दिखाया गया है और जिसके बारे में कहा गया है कि आवश्यकता हुई तो अतिरिक्त आबंटन के द्वारा पूरा किया जायेगा। किंतु, यदि अनुमान लगाये तो अतिरिक्त आबंटन करने से यह घाटा 15 प्रतिशत तक पहुंच जायेगा। उदाहरण स्वरूप राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लिए धनराशि में 126 प्रतिशत वृद्धि की घोषणा की गई है जबकि कैग की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि इसका लाभ 40 प्रतिशत लोगों को ही मिल पाया है। कृषि क्षेत्र के संबंध में बढ़चढ़ कर बहुत बातें की गई हैं किंतु किसानों को सस्ते दाम पर रासायनिक उर्वरक नहीं मिल पा रहा है वह भी ऐसी दशा में जबकि खाद बनाने वाली कंपनियों को हजारों करोड़ रूपया सरकार की ओर से दिया जा रहा है। किसानों को उनकी उपज का वास्तविक दाम नहीं मिल रहा है, इस संबंध में विभिन्न विशेषज्ञों की रिपोर्टे जिनमें स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट प्रमुख है, उसकी सिफारिशों को भी लागू नहीं किया गया। आर्थिक वार्षिक वृद्धि दर जो एनडीए के समय 8.5 प्रतिशत थी वह आज केवल 6 प्रतिशत के आसपास है। यही कारण है कि महंगाई को रोक पाना संभव नहीं हो रहा है। आर्थिक पिछड़ापन यथावत है। समृद्धि कुछ शहरों तक सीमित है। सामाजिक विषमताओं के कारण अपराधवृत्ति  बढ़ी है, असुरक्षा बढ़ी है। दिल्ली राजधानी जैसे क्षेत्र में महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं। बच्चों को श्रेष्ठ शिक्षा की सुविधा नहीं है जो निजी स्कूल है उनको मनमाने तौर पर शुल्क बढ़ाने की छूट दे दी गई है ताकि गरीबों के बचचे उनमें भी शिक्षा प्राप्त न कर सके। रोजगार की तलाश में गांव के लोग शहर की ओर पलायन कर रहे हैं और सरकार का दावा गांवों में रोजगार की उपलब्धता का है। उसका खोखलापन सिद्ध कर रहा है। इस सरकार की न सुस्पष्ट शिक्षा नीति है और न रोजगार नीति है। चिकित्सा नीति का भी अभाव है। ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की बात बड़े जोर से हुई है। लेकिन जब शहरों में ही सामान्यजन को चिकित्सा सुविधा नहीं है तो गांव तक तो पहुंचना बहुत मुश्किल है। गांव के लोगों के

 

*  Speech was laid on the Table.

शहर की ओर बढ़ने से शहरों की समस्यायें और विकराल रूप धारण कर रही हैं। आज हमारी सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगे हैं। रक्षा बजट में यद्यपि वृद्धि की बात कही गई है किंतु आज की सेना की आवश्यकता

को देखते हुए उसमें और बढ़ोत्तरी किए जाने की आवश्यकता है। सेना में असंतोष होना और इसी कारण उनके त्याग के कारण उनको प्राप्त शौर्य चक्र आदि लौटाने को वो बाघ्य हो रहे हैं। सेना के आधुनिकीकरण की बहुत आवश्यकता है। लगातार वर्षो से इस पर विचार चल रहा है किंतु क्रियान्विती नहीं हुई है। सीमायें असुरक्षित हुई हैं। बांग्लादेशी घुसपैठ चिंता की बात है1 एनडीए सरकार के समय चलाई गई कुछ योजनाएं जिनमें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वजल धारा योजना, स्वर्णिम चतुर्भुज योजना आदि पर जिस प्रकार से ध्यान दिया जाना चाहिए और राशि आबंटित की जानी चाहिए उसमें सरकार ने विशेष ध्यान नहीं दिया है और यही कारण है कि यह कार्य अत्यंत शिथिलता से चल रहे हैं। देश को आज बिजली की बहुत आवश्यकता है। विद्युत उत्पादन जिस तेजी से बढ़ाना चाहिए उसके लिए जो आबंटन आवश्यक था वह नहीं किया गया है। फलस्वरूप पूरा देश बिजली संकट से ग्रस्त है1 परम्परागत बिजली उत्पादन तथा अपराम्परागत बिजली उत्पादन दोनों ही क्षेत्रों में काफी गुंजाइश है। सरकार को विशेष ध्यान देकर आबंटन बढ़ाते हुए बिजली की कमी को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। बजटीय आबंटन में कतिपय अन्य मांगों के बारे में भी सरकार का ध्यान नहीं गया है। विशेषकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे पिछड़े राज्यों में पर्याप्त औद्योगिक संभावनाएं होते हुए भी इन पिछड़े राज्यों में औद्योगिकरण के लिए विशेष आबंटन की आवश्यकता थी। एक सुस्पष्ट उद्योग नीति की आवश्यकता है। चालू उद्योग बंद हो रहे हैं। बेरोजगारी बढ़ रही है।

          कृषि के बारे में मैंने पहले कहा है किसानों को ऋण माफी का पूरा लाभ नहीं मिला है और ब्याज दर 3 प्रतिशत किया जाना आवश्यक है। प्रदेशों के साथ मांग के अनुसार उनके विकास के लिए विभिन्न क्षेत्रों में राज्यों में जो राशि आबंटित की जानी चाहिए और विभिन्न प्रकार की सहायता दी जानी चाहिए उसमें भी भेदभाव बरता जा रहा है।

          प्राकृतिक आपदा प्रबंधन के लिए आबंटन बढ़ोत्तरी की आवश्कता है और इसको ध्यान में रखते हुए एनडीए सरकार द्वारा नदी जोड़ो योजना आरंभ की गई थी उस हेतु आवश्यक धनराशि का इस बजट में अभाव देखा गया है। जैसाकि मैंने कहा कि सरकार की विभिन्न क्षेत्रों में कोई नीतिगत ढांचा ही नहीं है। वैश्विकरण के दौर में जब हम वैश्विक मंदी से प्रभावित हैं बेरोजगारी की समस्या विकट होती जा रही है। सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले युवा वर्ग हैं। गांव में रहने वाले हो या शहरों में महिलाएं तो पहले ही रोजगार से प्रायः वंचित ही हैं।

          विधि मंत्रालय के लिए भी और आबंटन बढ़ाये जाने की आवश्यकता है। आज विभिन्न न्यायालयों में हजारों की संख्या में वर्षो से प्रकरण लंबित हैं। अतः न्यायधीशों की संख्या बढ़ाते हुए न्यायालयों की संख्या भी बढ़ाया जाना आवश्यक है ताकि शीघ्र और सुलभ न्याय मिल सके। ग्राम न्यायालयों की घोषणा को अमली स्वरूप दिया जाये। सरकार द्वारा इस बारे में बार-बार घोषणा की गई । किन्तु पूरी नहीं हुई ।

          नागरिकों की सुविधा हेतु नगरीय तथा ग्रामीण क्षेत्रों में राष्ट्रीय पेयजल मिशन की स्थापना की गई तथा बजट का आबंटन किया गया, किंतु इनका कार्य भी अत्यंत धीमा है। नागरिक पेयजल जैसी सुविधा से भी वंचित है, आवास की सुविधा तो पहले से ही नहीं है। सांस्कृतिक मंत्रालय में बजटीय आबंटन बढ़ाया जाये ताकि सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा हो।

          आज कतिपय राज्य नक्सली और आतंकवादी घटनाओं से प्रभावित हैं जिनमें बिहार, छत्तीसगढ़, आंध्र, महाराष्ट्र प्रमुख हैं, उन सरकारों द्वारा केन्द्र से सहायता बढ़ाने हेतु बार बार कहा गया , किंतु उस ओर ध्यान न देने से उन राज्यों में नक्सली गतिविधियां बढ़ी हैं और जनजीवन असुरक्षित है।

          हमारी प्राप्तियां कम हो रही हैं और खर्च अधिक है। हमारे आयकर प्रणाली में और भी संशोधन आवश्यक हैं। हम देखते हैं कि काला धन जिस तेजी से छाया हुआ है, व न केवल आम आदमी बल्कि सरकार तक को प्रभावित कर रहा है। ब्याज दरें, घटती ऋण उपलब्धता, शेयर बाजारों की उठापटक और रूपए में गिरावट इसका आर्थिक बढ़ोत्तरी दर पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। जनता को एक ऐसे बजट की उम्मीद थी जो गतिशील हो, जो उनकी कठिनाईयां समझे और उनको राहत पहुंचाये। किंतु, इस सबका इस बजट में अभाव देखा गया है।

          मैंने ऊपर चिकित्सा सुविधाओं की भी चर्चा की है। देश भर में दिल्ली की दर्ज पर 6 एम्स खोले जाने की घोषणा की गई थी, किंतु उसका प्रारंभ आज तक नहीं हुआ है।

          हमारा सकल घरेलू उत्पाद घटा है। निर्यात दर विगत 9 महीनों में घटकर 17.1 तक आ गई है। किंतु, इस परिप्रेक्ष्य  में आयात बढ़ा है। यदि संक्षेप में यह कहा जाये कि इस बजट से आम आदमी निराश हुआ है, युवा हो, महिला हो, किसान हो, संगठित तथा असंगठित मजदूर हो, कर्मचारी वर्ग हो उन सब में एक प्रकार से निराशा है। अर्थव्यवस्था में नई जान पूंकने की आवश्यकता है। एक ऐसे आर्थिक माहौल की आवश्यकता है जो आत्मविश्वास से भरा हो, देश को आगे ले जाने वाला हो।

 

 

 

 

 

 

*SHRI A.K.S. VIJAYAN (NAGAPATTINAM) : Sir, the House has now taken the interim Budget (General) for the ensuing financial year. I thank the Chair for the opportunity given to me to speak as a Member of our party Dravida Munnetra Kazhagam, I welcome and support this Budget brought before this House by our External Affairs Minister, Shri Pranab Mukherjee, who holds additional charge of Finance portfolio.  On behalf of our Leader Kalaignar Karunanidhi who is the Chief Minister of Tamilnadu for the 5th time and also on behalf of our party Dravida Munnetra Kazhagam, let me extend my support to the financial statement made by our UPA Government.  Our in-charge Finance Minister has stated that taxation measures will be taken up by the new Government at the Centre that will take over in three months time from now.  Overcoming the Constitutional constraints for a pre-election budget and also overcoming the challenges in the wake of economic melt-down, a balancing act has been performed by the Finance Minister in this Budget.  This is what Dr. Manmohan Singh our Prime Minister heading the UPA Government has got to say about the Budget.  When there is a recession looming large over the global economy enough care has been taken to protect the most vulnerable poorer sections of our Indian population. About 35 per cent of our masses who are living below poverty line are getting a better deal in this Budget. The flagship programmes of this UPA Government have all been allocated with Rs.1,37,317 crores.  This much will be spent on various programmes and schemes like :- National Rural Employment Guarantee Programmes under NREG Act, schemes under Bharat Nirman, Sarva Siksha Abhiyan, Integrated Child Development Schemes, National Rural Health Mission, Rajiv Gandhi Rural Drinking Water Scheme, Total Rural Sanition Programme among others.  I welcome the concern expressed by the Government to help the ordinary people.   Even at a  time when  there is  challenge facing  our  economy

 

*English translation of the Speech originally delivered  in Tamil.

 

social sector spending has been enhanced. In order to rejuvenate rural reconstruction certain schemes and additional Rs.14,000 crores has been earmarked.  About 3.6 crores of Indian farmers have got the benefits of loan waiver scheme as the Union Government has extended so far Rs.65,300 crores.  It is heartening to note that an amount to the tune of Rs.2,50,000 crores of agricultural loan has been extended in the last year.  Foreign Direct Investment has poured in to the tune of US$.3200 crores. Through our effective reform measures, regulatory mechanism has been strengthened in the stock market. 

          Though this is an interim Budget, an all time high allocation of Rs.1,31,317 crores has been allocated for our Defence Expenditure.  We may not hesitate to welcome this unprecedented increase as it is expected to strengthen our security mechanism to protect our people from the Cross Border Terrorism.  There cannot be two opinions in appreciating this move.  But at the same time, we are not able to relish the news like our army is extending certain weapons and equipment apart from some training facilities to the Srilankan Armed Forces that apparently resort to genocidal attack on their own people.  Our armed forces must not help an army that let loose violent attack on its own unarmed innocent citizens.  There cannot be two opinions that we cannot be a party to such barbaric attack on the masses in a war torn zone.  When the Srilankan Government is making a tall claim that they have restricted the rebels against the Government to a very small area and destroyed them, how is it that cease fire has not been announced by that Government.  Why the innocent people are made a fodder to the artillery fire and shelling by the Srilankan Army and continued bombings including dropping of cluster bombs through aerial attacks.  Our Indian Army, which has been raised as a very big force with huge allocation of funds, must be able to ensure peace and normalcy in this region with its very presence.  But it is not happening.  We feel that our Defence machinery can still restore peace in that island nation even without attacking them.  Our strong presence is enough.  But still Indian Government is not attending to the far-cry of innocent Tamils in Srilanka. We urge upon you that the welfare and the rights of Srilankan Tamils must be protected.  Effective steps in this regard must be taken by the Government of India.

          The Tamil race which had ruled the island nation when it was taken over by the colonial rulers is being systematically eliminated now.  Hundreds of innocent Tamils are killed everyday. Deprived of even the basic medical care and facilities, without adequate food supply, Srilankan Tamils are internally displaced and live as refugees in their own homeland.  As envisaged in the Indo-Srilankan Accord signed by our former Prime Minister Late Shri Rajiv Gandhi, a Tamil homeland within Srilanka must be carved out merging both the Northern and the Eastern provinces within the framework of their Constitution.  Srilankan Tamils must be given protection.  Peace and normalcy must return there.  As a first step, Srilankan Army must declare cessation of hostilities.  I urge upon the Union Government to take effective steps to ensure peace both in Srilanka and in this region. 

          Our Armed Forces that cannot help save the hapless Srilankan Tamil victims must at least come forward to save our Indian people especially our fishermen from Tamilandu.  It is a pity that a very big army with a very big allocation of funds allocated through this Parliament is not able to give safety and security to its own poor fishermen who are carrying on with their traditional livelihood in the coastal regions of Tamilnadu.  I beseech the Government of India and the Defence Ministry to leave aside their indifferent posture.  They must readily act to protect our Indian fishermen from the barbaric attacks by the Srilankan Naval Force.  The innocent Srilankan Tamils must also be saved by our mere mighty presence.  In the last three years alone about 700 Tamil fishermen have been killed by the Srilankan Armed Forces.  I plead for the safety and security of our fishermen folk and urge upon the Government of India to give protection to their properties and livelihood.  Suitable effective measures must be taken by our Defence Forces and the Government of India.  Fishermen from my Nagapattinam Constituency are the worst hit.  They are afraid of venturing into the seas to carry on with their traditional occupation.  Fishermen of Tamilnadu must be helped to come out of this fear psychosis.  Peace and security in this region can be established only when peace and normalcy is restored in Srilanka.  Unless and otherwise a ceasefire is declared, peace cannot prevail there.  There cannot be scope for a negotiated political settlement.  Hence, Srilankan Government must be made to see reason and must effectively impress upon to behave in a responsible fashion as a civilised Government.  Hence, there is an urgent need for the Government of India to act responsibly at this juncture.  With this I conclude.

 

 

 

 

*श्री हरिकेवल प्रसाद (सलेमपुर) :  महोदय, माननीय वित्त मंत्री ने वर्ष 2009-10 के लिए जो अंतरिम बजट प्रस्तुत किया है, उससे देश के लगभग सभी वर्गो को निराशा हाथ लगी है। वित्त मंत्री जी ने अपने बजट भाषण के प्रारंभ में ही कहा है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए)  का राष्ट्रीय न्यूनतम साझा कार्यक्रम, आम आदमी को ध्यान में रखकर ही बनाया गया था। अंतरिम बजट प्रस्तुत होने के पूर्व आम आदमी और दूसरे क्षेत्रों को उम्मीद थी कि लोक सभा चुनाव को देखते हुए उन्हें राहत देने के लिए कोई उपाय किया जायेगा लेकिन बजट में उद्योग, व्यापार जगत और आम आदमी को राहत देने वाली किसी घोषणा के नहीं होने से चौतरफा निराशा की स्थिति है। पूर्व वित्त मंत्री जी ने जुलाई 2004 में प्रस्तुत किये गये अपने पहले बजट भाषण में जिन सात स्पष्ट आर्थिक उद्देश्यों को गिनाया था, मौजूदा बजट में भी उसे दोहराया गया है लेकिन इस सच्चाई को छुपा लिया गया है कि पिछले पांच बजटों के दौरान किस हद तक उन उद्देश्यों को पूरा किया गया है। बजट भाषण में पिछले चार वर्षों के आर्थिक विकास दर की बढ़ोत्तरी का गुणगान तो किया गया है लेकिन देश की मौजूदा विकास दर जिस झंझावत में फंसी है, इसका कोई उल्लेख नहीं है। इसी तरह कहा गया है कि इस अवधि में राजकोषीय घाटा कम हुआ है। यह वर्ष 2003-04 में 4.5 प्रतिशत था जो कम होकर 2007-08 में 2.7 प्रतिशत हो गया। भारतीय अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ होने के दावे तथा आंकड़ों के खेल से देश का भला होने वाला नहीं है। सच्चाई यह है कि राजकोषीय घाटा इस समय 10 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इसका सीधा असर आने वाले वर्षो में देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और उसका सबसे अधिक खामियाजा निम्न एवं मध्यम वर्ग को भुगतना पड़ेगा।

          मान्यवर, माननीय वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में विश्वव्यापी आर्थिक मंदी की चर्चा करते हुए अपने सरकार की उपलब्धियों की दिल खोलकर प्रशंसा की है लेकिन देश की वर्तमान आर्थिक हालत को नजरअंदाज कर गये हैं1 सरकार भले ही यह दावा करती हो कि भारत वैश्विक मंदी का शिकार नहीं है लेकिन जिस तरह विकास दर धीमी पड़ गयी है और अनेक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम होते जा रहे हैं। अभी तक कई लाख नौकरीपेशा लोगों को रोजगार से हटा दिया गया है उससे चिंतित होना स्वाभाविक है। लोगों को अंतरिम बजट में किसी आर्थिक पैकेज के घोषणा की उम्मीद थी लेकिन इसमें आर्थिक मंदी से निजात दिलाने का कोई उपायाय नहीं किया गया है। यह सच है कि विगत चार वर्षो में कई क्षेत्रों में आशाजनक प्रगति हुई है लेकिन यह भी सही है कि इन क्षेत्रों में सुधार की मांग होते हुए भी कोई ठोस कदम नहीं  उठाये  गये। जैसे सरकारी  खर्चो में कमी करने, श्रम क्षेत्र में सुधार की, घाटे वाले सार्वजनिक

उपक्रमों में विनिवेश की  अथवा आधारभूत ढांचे के निर्माण  की। देश का निर्धन  वर्ग पहले की तरह ही

* Speech was laid on the Table.

बदहाल है लेकिन इनकी भलाई के लिये अंतरिम बजट में कोई घोषणा नहीं की गयी है और इन्हें पिछले पांच बजटों के प्रावधान के सहारे ही छोड़ दिया गया है। गरीबों के उत्थान के बारे में सरकार की सोच पर मुझे कोई संदेह नहीं है लेकिन उसके क्रियान्वयन में व्याप्त अव्यवस्था पर शिकायत जरूर है। निर्धनों के उत्थान के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अनेक योजनायें चलाई गई हैं लेकिन उसका वास्तविक लाभ उन्हें नहीं मिलता। लाख प्रयासों के बावजूद गरीबी और अमीरी की खाई बढ़ती जा रही है। इतनी कोशिशों के बाद भी अभी तक गरीबों को आत्मनिर्भर नहीं बनाया जा सका जबकि इनके उत्थान के लिए चलाई जा रही योजनाओं में धन का आबंटन हर साल बढ़ाया जाता है। हकीकत यह है कि इन योजनाओं में इतना अधिक भ्रष्टाचार है कि गरीबों के लिए दिल्ली से भेजे जाने वाले पैसे का अधिकांश हिस्सा नौकरशाह और बिचौलिये खा जाते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए पिछले बजटों की तरह इस अंतरिम बजट में भी किसी ठोस ऊपाय की घोषणा नहीं की गयी है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली सबसे भ्रष्ट सरकारी योजनाओं में बदल चुकी है। सरकार द्वारा कराये गये सर्वेक्षणों एवं अध्ययनों से पहले ही यह तथ्य उजागर हो चुका है। भ्रष्टाचार के कारण निर्धन वर्ग के अधिकांश लोग इस योजना से वंचित रह जाते हैं। निवर्तमान वित्त मंत्री ने तो गत वर्ष सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया था कि राशान का 58 फीसदी हिस्सा लुटेरे डकार जाते हैं और ग्रामीण विकास की योजनाओं में लोगों तक एक रूपया पहुंचाने में चार रूपये खर्च हो जाते हैं। इसी भ्रष्टाचार और अनियमितता के चलते प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना, इंदिरा आवास योजना तथा राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना जैसी महत्वाकांक्षी एवं लोक कल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ गांवों, ग्रामीणों और अन्य व्यक्तियों को नहीं मिल पा रहा है, जिसे सुधारने के लिए कड़े प्रावधानों और नियमों की आवश्यकता है।

          महोदय, अंतरिम बजट में कृषि क्षेत्र को पिछले चार बजटों में दिये गये विशेष प्रोत्साहन का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि गत् चार वर्षों के दौरान कृषि की वार्षिक वृद्धि दर 3.7 प्रतिशत बढ़ गई है और इसे चार प्रतिशत के लक्ष्य तक ले जाना है। वास्तविकता यह है कि कृषि की मौजूदा विकास दर केवल 2.6 प्रतिशत पर अटका हुआ है। हमें इस हकीकत को स्वीकार करना होगा कि भारत वैश्विक मंदी की मार से यदि कम प्रभावित हुआ है तो इसकी असल वजह कृषि प्रधान देश का होना है। इस मंदी से सबसे अधिक वे देश प्रभावित हैं जो केवल उद्योगों पर निर्भर थे। वित्त मंत्री जी ने अपने अंतरिम बजट भाषण में कहा है कि पिछले बजट भाषण में घोषित कृषि ऋण माफी और ऋण राहत योजना किसानों को संस्थागत ऋण  बहाल करने में सफल हुई है जिसके तहत अब तक 3.6 करोड़ किसानों को 65 हजार तीन सौ करोड़ रूपये का कुल ऋण माफी/ऋण राहत मिली है। वित्त मंत्री जी को इस सच्चाई को भी स्वीकार करना होगा कि कर्ज माफी की घोषणा के बाद भी किसानों के आत्महत्या की घटनायें हुई हैं। इसकी वजह यह है कि किसानों का एक सीमित वर्ग ही बैंकों से संस्थागत कर्ज ले पाता है क्योंकि बैंकों के नियम इतने जटिल होते हैं कि छोटे और साधारण किसान इनकी शर्तों को पूरा नहीं करते। गत् वर्ष जारी की गई वित्तीय समावेश पर भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी. रंगराजन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के केवल 27 प्रतिशत किसान ही संस्थागत वित्तीय संस्थानों तक पहुंच रखते हैं। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि बाकी किसान 36 से 48 प्रतिशत की ब्याज दर पर साहुकारों से कर्ज लेते हैं। किसानों के कर्ज के बोझ तले दबकर विवशता में आत्महत्या करने का यह एक बड़ा कारण है जिसके निराकरण का कोई ठोस उपाय बजट प्रस्ताव में नहीं किया गया है। कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सुधार किये बगैर किसानों को लंबे समय तक कर्ज के फंदे से नहीं बचाया जा सकता। बजट प्रस्ताव में तीन लाख रूपये तक के फसल ऋणों पर 7 प्रतिशत ब्याज दर को बरकरार रखा गया है। सरकार द्वारा गठित राष्ट्रीय किसान आयोग के अध्यक्ष डॉ0 एम0एस0 स्वामीनाथन की उस सिफारिश की अनदेखी कर दी गई है जिसमें कृषि ऋणों पर 4 फीसदी की ब्याज दर लागू करने का सुझाव दिया गया है। मैं माननीय वित्त मंत्री जी से मांग करता हूं कि वह इस महत्वपूर्ण सुझाव को लागू करने के बारे में गंभीरता से विचार करे। साथ ही फसल ऋण की सीमा 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख कर दी जाये क्योंकि ट्रैक्टर जैसे बड़े कृषि यंत्रों की कीमत 3 लाख से अधिक है। इसके साथ ही बीज, उर्वरक, कीटनाशकों और कृषि यंत्रों पर अनुदान की राशि बढ़ाई जाये। किसानों और कृषि क्षेत्र को तभी प्रोत्साहन मिलेगा जब खेती की लागत खर्च कम होगी और किसानों को उनके उत्पादन का वाजिब दाम मिलेगा। बजट प्रस्ताव में धान और गेंहू का समर्थन मूल्य बढ़ाये जाने का तो उल्लेख है लेकिन उसका वास्तविक लाभ किसानों को कैसे मिले इसकी किसी सुनिश्चित व्यवस्था की चर्चा नहीं की गई है। व्यवहार में यह देखने को मिला है कि समर्थन मूल्य का अधिकाधिक लाभ बिचौलिये और बड़े व्यवसायी खरीद एजेंसियों की मिली भगत से उठा लेते हैं और किसानों तक वह नहीं पहुंच पाता। अंतरिम बजट में गन्ने के बारे में कोई चर्चा नहीं है जिसकी खेती संकट में पड़ी हुई है और उसका रकबा लगातार घटता जा रहा है। हालत यहां तक पहुंच गई है कि सरकार चीनी का आयात करने के बारे में विचार कर रही है। मैं वित्त मंत्री से मांग करता हूं कि वह बंद और बीमार पड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की चीनी मिलों के पुनरूद्वार के लिये विशेष आर्थिक पैकेज की व्यवस्था करें। बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर वर्गो के लिए इंदिरा आवास योजना के तहत गत् वर्ष तक 60.12 लाख मकानों के निर्माण का उल्लेख है, परंतु चालू वित्तीय वर्ष के लिए किसी लक्ष्य का उल्लेख नहीं है। मेरी मांग है कि इंदिरा आवासों की संख्या में वृद्धि करके बाढ़ प्रभावित जिलों को प्राथमिकता दी जाये तथा इसके आबंटन में व्याप्त विसंगतियों को दूर किया जाये।

          इन शब्दों के साथ मैं बजट प्रस्तावों का समर्थन करता हूं।           

 प्रो. चन्द्र कुमार (कांगड़ा) : महोदय, अंतरिम बजट वर्ष 2009-10 जो इस माननीय सदन में आदरणीय श्री प्रणव मुखर्जी जी ने प्रस्तुत किया है पर आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिए मैं आपका आभार प्रकट करता हूँ। महोदय, श्री प्रणव मुखर्जी जी ने जो बजट इस सदन में दिया है, वह अंतरिम बजट है और इस बजट में कांस्टीटय़ूशनल प्रोविजन रखे गये हैं। इस बजट में राष्ट्र के प्रति बहुत लंबे-चौड़े वायदे नहीं किये गये हैं। इस बजट में जो कुछ भी दर्शाया गया है वह हमारी यूपीए सरकार की पिछली शानदार उपलब्धियाँ रही हैं। इस राष्ट्र के प्रति हमारे जो अच्छे कार्यक्रम रहे हैं, इसमें उनका बखान किया गया है। हमारे आने वाले अगले चुनाव के लिए जो अंतरिम बजट दिया गया है, वह हमारे देश के आगामी कार्यक्रमों और नीतियों को निर्धारित करता है। महोदय, इस बजट में आम आदमी की बात रखी गयी है। सरकार ने जो पिछले प्रोग्राम दिये हैं, जिनमें विशेषकर यूपीए सरकार का जो नरेगा यानी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना कार्यक्रम को सारे हिन्दुस्तान में लागू किया गया है। उसके लिए यूपीए की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी जी, प्रधानमंत्री आदरणीय डॉ. मनमोहन सिंह जी और श्री प्रणव मुखर्जी जो हमारे वित्त मंत्री हैं ने इस बार फिर इस कार्यक्रम के लिए तीस हजार सौ करोड़ रूपया रखा है।

          महोदय, जब हम गांवों में जाते थे, हमारी बहुत सी माताएं, बहनें और जो गरीब आदमी था उसका बैंक में  कोई एकाउंट नहीं होता था, लेकिन आज वह डिस्बर्सन ऑफ मनी यानी कि हर एक गांव में छोटे से छोटा काम करने वाला आदमी का आज बैंक में एकाउंट है। जो सौ दिन का रोजगार उस गांव में दिया गया है, उससे उस गांव की व्यवस्था बदली है। आज गरीब से गरीब आदमी अपने उस पैसे का इस्तेमाल अपनी दिनचर्या के लिए कर रहा है। बहुत सी स्टेटों के लोग खासकर जो बीमारू स्टेट थीं, रोटी, रोजी के लिए पलायन करते थे। बहुत से लोग उड़ीसा, बिहार, यूपी, मध्यप्रदेश से पलायन करते थे और रोजी, रोटी की तलाश में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में जाते थे। वह पलायन आज इस नरेगा कार्यक्रम यानी, राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत बहुत बड़े स्तर पर रूका है। आज गरीब आदमी अपने ही घर में बैठकर अपनी रोजी, रोटी कमा रहा है। मैं यह चाहता था कि यह प्रोग्राम और मैं आदरणीय प्रणव मुखर्जी जी से प्रार्थना करूंगा कि यह जो 100 दिन गारंटी का रोजगार जो है इसको बढ़ाकर 200 दिन का करें ताकि हमारे गांवों की व्यवस्था बदले। [r10] 

          इसी के साथ साथ हमारी सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत 13,100 करोड़ रुपये रखे हैं। इस योजना से आज एक-दो किलोमीटर पर ही प्राइमरी स्कूल गांवों में खुल गए हैं। इससे जो लोग दूर दराज के इलाकों में रहते हैं, उनके लिए भी सुविधा हो गई है। भारत सरकार और राज्य सरकारों के माध्यम से इस इस योजना को आगे बढ़ाया गया है। शिक्षा को एक नई दिशा दी गई है। स्कूलों में दोपहर के खाने के लिए 8000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।  इससे हमारे बहुत से स्कूलों में ड्रापआउट ज्यादा होते थे, बहुत से बच्चे स्कूलों में जाते नहीं थे, गरीब आदमी अपनी रोज़ी रोटी की तलाश में, खासकर बच्चियों को स्कूलों में नहीं भेजते थे, इस मिड-डे मील कार्यक्रम के तहत गांवों के गरीब से गरीब बच्चे स्कूल की तरफ जा रहे हैं। मेरा सरकार से अनुरोध रहेगा कि इस सर्व शिक्षा अभियान के कार्यक्रम को जो एक स्टेट सब्जैक्ट है, उसको फंडामैंटल राइट्स बनाने का का एक बिल सदन में आने वाला है। इसमें शिक्षा को अनिवार्य किया जाए और पढ़ाई-लिखाई प्रत्येक बच्चे का जन्मसिद्ध अधिकार होना चाहिए। अभी इसको डायरैक्टिव प्रिंसिपल्स के तहत स्टेट्स में रखा गया है। इसकी समय समय पर मॉनीटरिंग होनी चाहिए। इसके साथ ही जो पेरेन्ट्स अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं, उन पर कुछ न कुछ पिनल क्लॉज़ लगानी चाहिए। बच्चों को स्कूल में भेजना कंपलसरी होना चाहिए, शिक्षा बच्चों का अधिकार होना चाहिए। इसलिए जो बिल संसद में आने वाला है, इससे हमारी शिक्षा प्रणाली में ज्यादा से ज्यादा सुधार आएगा। इसके साथ ही आज क्वालिटी एजुकेशन की भी ज़रूरत है।

          हमारे प्रधान मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी ने हरेक राज्य में एक सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी की घोषणा की है। इससे एजुकेशन को अच्छा बनाया जाएगा, इस सोसाइटी को नॉलिजियेबल सोसाइटी बनाया जाएगा। हमारे इन इंस्टीटय़ूशन्स ऑफ एक्सैलैन्स में हमारे नौजवान रिसर्च और शोध का काम करेंगे। इन इंस्टीटय़ूशंस में क्वालिटी एजुकेशन दी जाएगी। उस क्वालिटी एजुकेशन के लिए हमारी गाँवों की इकोनॉमी बढ़ेगी और जो हमारे अलाइड डिपार्ट्मैंट्स हैं, चाहे वह एग्रीकल्चर डिपार्टमैंट है, चाहे रिसर्च के यूनिट्स हैं, उनको ज्यादा से ज्यादा काम करना पड़ेगा। जो कुछ हम आज कर रहे हैं, उस टैक्नोलॉजी को ट्रंसफर करके गांवों तक ले जाना पड़ेगा। इससे हमारा आर्थिक पिछड़ापन दूर होगा। इन यूनिवर्सिटीज़ के माध्यम से हमारी नॉलेज सोसाइटी में अच्छे पढ़े-लिखे नौजवान सामने आएंगे और इस देश को एक नया रूप देंगे। इसके साथ ही इनफॉर्मेशन टैक्नोलाजी हरेक स्टेट में सरकार खोलने जा रही है जिससे साइंटिफिक टैम्पर नौजवानों में आएगा और नए नए शोध किये जाएंगे। आईटी में हमने अब तक कई कीर्तिमान स्थापित किये हैं। हमें वह वक्त याद है जब राजीव गांधी इसी सदन में बोल रहे थे कि मैं हिन्दुस्तान को बीसवीं और इक्कीसवीं सदी में ले जाना चाहता हूँ। हमारे विपक्ष में बैठे उस वक्त के भारतीय जनता पार्टी के लोग राजीव गांधी की खिल्ली उड़ाते थे कि एक कंप्यूटर बॉय इस संसद में आया है। आज हमें फLा है कि हिन्दुस्तान आईटी में विश्व के बड़े बड़े देशों का मुकाबला करके दूसरे और तीसरे नंबर पर है। इससे जिस प्रकार का साइंटिफिक टैम्पर हमारे गांवों में गया है, वह प्रशंसनीय है।  आज हम स्पेस के साथ जुड़े हैं। उसके इंटरप्रटेशन के लिए हमें जो मैप्स आ रहे हैं, हमारे एग्रीकल्चर सैक्टर और साइंस एंड टैक्नोलॉजी के लोग उसकी इंटरप्रटेशन करके आज गांव गांव में परिवर्तन का कार्यक्रम शुरू करने जा रहे हैं। इसके लिए भी वर्तमान यूपीए की सरकार धन्यवाद की पात्र है।[h11] 

          इसी के साथ हमारी सरकार ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत भारत निर्माण कार्यक्रम को शुरू किया है। आज शहरों और गांवों में फर्क नहीं होना चाहिए, जिसके लिए हमारी सरकार ने इफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए अंतरिम बजट में 40 हजार 900 करोड़ रूपये रखे हैं। इसी तरह से आरआईडीएफ के लिए सरकार ने 14 हजार करोड़ रूपया गांवों को जोड़ने के लिए रखा है। गांवों में साफ पीने का पानी पहुंचाया है। सौ फीसदी बिजलीकरण का नारा दिया गया है। गांवों में थ्री फेज बिजली पहुंचाने का काम सरकार कर रही है, जिससे हमारे नौजवानों को साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी में कैरियर बनाने में सुविधा हो सके। हमारे देश की इकोनॉमी कृषि पर निर्भर करती है, इसलिए हमारी कृषि में डाइवर्सिफिकेशन होना बहुत जरूरी है। भारत निर्माण के माध्यम से सिंचाई को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे हर खेत में बिजली और पानी पहुंचेगा। इससे देश की अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा।

          महोदय, हमारी सरकार ने बजट के माध्यम से बहुत सी सामाजिक सुविधाओं को बढ़ाया है। वृद्वावस्था पेंशन पहले दो सौ रूपये केन्द्र और दो सौ रूपये राज्य सरकार देती थी। इस राशि को बजट के माध्यम से सरकार ने बढ़ाया है। इसके अलावा विकलांगता पेंशन और विधवा पेंशन का प्रावधान किया गया है। सरकार अभी विधवा पेंशन 40 से 62 वर्ष की महिलाओं को देता है, इसके अलावा 14 से 40 साल के बीच की विधवाओं को सरकार आईआईटी के माध्यम से प्रशिक्षण देती है और पांच सौ रूपये खर्च के रूप में दिया जाता है। लेकिन बहुत सी महिलाएं 21-22 वर्ष की उम्र में अकस्मात विधवा हो जाती हैं। मैं सरकार को सुझाव देना चाहता हूं कि इसमें बदलाव किया जाए और उन्हें भी विधवा पेंशन दी जाए ताकि हमारे गांवों में रहने वाली गरीब विधवाओं को सुविधा प्राप्त हो सके।

          महोदय, मैं श्रीमती सोनिया गांधी का बड़ा आभारी हूं कि उन्होंने गांवों की व्यवस्था को देखते हुए यूपीए सरकार को सुझाव दिए, जिन्हें हमारे प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री जी ने कल्याणाकारी रूप में लागू किया है। आज गांवों का नक्शा बदल गया है।…( व्यवधान) मेरा निवेदन है कि देश के लोगों को रोजगार मुहैया करवाया जाए ताकि हम लोगों की गरीबी दूर कर सकें। इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे बोलने का समय दिया।

 

*DR. PRASANNA KUMAR PATASANI (BHUBANESWAR) : The Interim Budget documents confirm that the UPA Government has grossly failed to live up to the promises it had made in the Common Minimum Programme; that its claims in successive budgets have been, as we have been warning all along, wholly fabricated; and that it is guilty of grossly mismanaging both the economy and governmental finances.  Mr. Pranab Mukherji has listed the seven objectives that Mr. P. Chidambaram had spelled out in his first budget, and claimed that the Government has fulfilled. 

In fact, Far from placing the economy on a path of sustained growth of 7% to 8%, it is leaving the economy with a significant slowdown-a slowdown that started as soon as the momentum created by the NDA ran out; a slowdown that has been caused by its mismanagement, a mismanagement it is trying to cover up by invoking the international economic crisis;

 As far as “education and health” is concerned, the UPA had promised to spend at least 6% of GDP on education and 3% of the GDP on health.  It  even imposed a cess of 2% on all taxes to collect revenue for education.  In fact, the outlays are nowhere near the promised levels.  Moreover, the manner in which this money has been spent has remained opaque and apart

* Speech was laid on the Table.

 

from continuing with the Sarva Shikshan Abiyan initiated by the NDA Government, this Government has done nothing further in this field.

Far from “generating gainful employment and promoting investment”, it is leaving behind an economy in which at least a crore of persons who till recently had jobs are now without work; and investment is collapsing all across the country.

While the Government had promised to assure “hundred days of employment to the breadwinner in each family at the minimum wage”, its own report and those of the CAG show that in fact it is only in 14% of the cases that the promised days of employment have been provided; moreover, there have been widespread corruption and defalcation.

  As for “focusing on agriculture, rural development and infrastructure” agricultural growth remained respectable only in the years in which there were good monsoons-far from ensuring the interests of the farmers, its policies have driven the farmers to suicide; in the 47 days of 2009 alone, there have been in Vidarbha alone 112 suicides by farmers-these are the very farmers whom the Finance Minister has described as “the real heroes of India’s success story”.  Similarly, far from ensuring a focus on infrastructure, in fact the pace of infrastructure has been brought to a grinding slowdown-a fact which is exemplified by the pathetic condition to which the National Highway Programme has been reduced: the project completion rate of this programme has fallen from 81% in 2004-05 to just around 50% now.

  The claim about “accelerating fiscal consolidation and reform”, is by now known by all to be farcical: in the Common Minimum Programme the UPA had pledged to eliminating the revenue deficit of the centre by 2009, so as to release more resources for investments in social and physical infrastructure”, in fact, even the Finance Minister is admitting that the revenue deficit this year will be 4.4% of the GDP and fiscal deficit will be 6% of GDP.  The Finance Minister however is not telling the truth even in the interim budget. The Prime Minister’s Economic Advisory Council, in a report published in January 2009, has estimated that the fiscal deficit will be at least 8% of the GDP.  According to us, even this is an underestimation. Given the massive shortfall in revenues, Government of India’s fiscal deficit will exceed 10% of GDP. Once the deficits of the states are added, the UPA period would have plunged the country into unprecedented fiscal crisis.

 As for “ensuring higher and more efficient fiscal devolution”, the extent of devolution is determined by the Finance Commission; as for making the devolution more efficient, the UPA Government has done absolutely nothing at all.  The UPA Government claims to have ruled the country for the last five years in the name of the “Aam Admi” and yet it is the Aam Admi who has suffered the most during this regime because of its sheer mismanagement of the economy.  The Aam Admi has suffered like never before on account of unbridled price rise of essential commodities which even today continue to rise in double digit, loss of livelihood, economic insecurity and insecurity of life and limb. 

The interim budget has proved what we have been claiming all along namely that the budget presented by Shri P. Chidambaram on February 28, 2008 was a sham.  That budget is in tatters today both on the expenditure as well as the revenue side.  By under-funding various items of expenditure and not funding at all various others, he claimed the virtue of being within the FRBM targets.  He and his Government stand totally exposed today.  As the country has already been pushed into a deep economic crisis, the elementary duty of the Government was to take strong and effective counter-measures.  The statement of the Finance Minister shows that the UPA Government has completely abandoned its responsibilities. 

श्री काशीराम राणा (सूरत)  : अध्यक्ष महोदय, माननीय वित्त मंत्री जी ने जो अंतरिम बजट प्रस्तुत किया है, मुझे लगाता है कि इससे सारे देश में बहुत निराशा व्याप्त हुई है। खास कर इंडस्ट्री के लोगों को लगता है कि आज की जो स्थिति है, आगे आने वाले दिनों में इससे भी भयंकर स्थिति हो जाएगी। कहा गया है कि इंफ्लेशन रेट कम हो रहा है, लेकिन इसका कोई इंपेक्ट नहीं हुआ है। महंगाई ज्यों की त्यों बनी हुई है। इस बारे में भी माननीय मंत्री जी ने कोई कदम नहीं उठाया है।[r12] 

13.00 hrs.

          मैं कहूंगा कि गवर्नमेंट ने एक अच्छा चांस गंवाया है। The Government has lost the opportunity, क्योंकि आने वाले तीन-चार महीने के बाद, चुनाव के बाद जो बजट आएगा, उसमें कोई नयी स्कीम आएगी, लेकिन इन चार महीनों में इंडस्ट्री की हालत कितनी खराब हो जाएगी। इसमें ऐसा कुछ नहीं रखा, जिससे कि उसे प्रेरणा और प्रोत्साहन मिले। आज सरकार कहती है कि एम्प्लायमेंट दिनोंदिन घट रहा है, छंटनी हो रही है। माननीय वित्त मंत्री जी कहते हैं कि छंटनी मत करो, चाहे पगार कम करो, लेकिन आप युनिट चालू रखो। मेरा जो अनुभव है, टैक्सटाइल और डायमंड की जो स्थिति है, इसे देखते हुए मैं कहूंगा कि सरकार जानबूझ कर इंडस्ट्री में कैसे बेरोजगार ज्यादा बढ़े, यह काम सरकार कर रही है, इसका हमें बहुत दुख है।

  13.01 hrs.                               (Shri Varkala Radhakrishnan in the Chair)

          सभापति महोदय, डायमंड की स्थिति यह है कि आज 60 परसैंट डायमंड युनिट्स बंद हैं। हमारे जो रत्न कलाकार हैं, वे माइग्रेट कर रहे हैं। उनके जो बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, उनकी फीस भरने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं। ऐसी हालत में वे अपने बच्चों को स्कूल में पढ़ा नहीं पाते हैं। सरकार ने सोशल स्कीम में बजट में जो बढ़ोत्तरी की, उसमें अरबों रुपया बढ़ाया, लेकिन जो बच्चे पैसे के अभाव में पढ़ नहीं पा रहे हैं, उनकी टय़ूशन फीस, शिक्षा के लिए फीस कैसे दी जाए, उसकी व्यवस्था के लिए सरकार ने इसमें कुछ नहीं दिया। आने वाले दिनों में डायमंड, जिसके एक्सपोर्ट से सरकार को करीब एक लाख करोड़ रुपया मिलता है, लेकिन आज वहां हालत ऐसी है कि एक्सपोर्टर और कारखाने के मालिक रोड पर आ गए हैं। सरकार ने इस उद्योग के प्रति बिलकुल अनदेखी की है, जो हमें जबरदस्त एक्सपोर्ट रेवेन्यू दे रहे हैं, उनके लिए सरकार ने कुछ नहीं दिया। हम मांग करते हैं कि डायमंड इंडस्ट्री को बचाने के लिए सरकार को बहुत जल्द कदम उठाना चाहिए। हमारी जो हिन्दुस्तान डायमंड कम्पनी है, इससे जो रफ निकलती है, उसे पालिश करने के लिए कारखाने वालों को देनी चाहिए, जिससे कि वे अपना काम चालू रखें और जो पालिश डायमंड है, सरकार उसे अभी कुछ समय के लिए परचेज़ करके अपने पास रखे, तो मुझे लगता है कि उस कारखाने में आज जो करीब 7 लाख लोग बेकार हुए हैं, उन्हें रोजगार मिलेगा। हिन्दुस्तान डायमंड से रफ लेकर पालिश करने के लिए देना और बाद में सरकार उसे ले ले तो मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में वे फैक्ट्रियां चल सकती हैं।

          सभापति महोदय, आज जैसे हम गांवों में रोजगार गारंटी स्कीम चलाते हैं, उसे शहरों में चलाने के लिए भी सरकार सोच रही है। हमारे जो लाखों कारीगर डायमंड से जुड़े हुए हैं, उन्हें हम बेकारी भत्ता दें ताकि उन्हें जीने का सहारा मिले। सरकार का डिसीजन है कि जो फैक्ट्री ले-ऑफ हो चुकी है, उसके जो वर्कर्स हैं, उन्हें 50 परसैंट भत्ता हर रोज की जरूरत के लिए देना चाहिए। उन्हे बेकारी भत्ता भी नहीं दिया। उनके लिए अंतरिम बजट में ऐसा प्रावधान होना चाहिए था। माननीय वित्त मंत्री जी अच्छी तरह से जानते हैं कि पिछले साल इंडस्ट्रियल ग्रोथ आठ, सवा आठ परसैंट था, वह आज चार परसैंट पर आ गया है। प्रोडक्शन ग्रोथ आधा हो चुका है, उसका इफेक्ट हमारे वर्कर्स पर क्या होगा। वे बेकार घूम रहे हैं, आत्महत्या कर रहे हैं। अपने बच्चे को कुंए में डाल रहे हैं, उसकी बीवी का क्या हाल होता है। वे आज इतनी खराब स्थिति में जी रहे हैं। जहां तक टैक्सटाइल का सवाल है, मैंने जैसा कहा कि सरकार जानबूझ कर बेरोजगारी बढ़ाने के लिए काम कर रही है, इसका ताजा नमूना टैक्सटाइल इंडस्ट्रीज़ है।

          सभापति महोदय, टैक्सटाइल में जो प्रोसेसिंग हाउस हैं, उससे वीविंग और एंसिलियरी इंडस्ट्री चलती हैं। आज प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को, उसकी रिक्वायरमेंट के मुताबिक जो गैस मिलनी चाहिए, लेकिन गेल ने आज 70 परसैंट गैस की सप्लाई में कटौती कर दी।   [S13] 

          मान्यवर, गैस की सप्लाई में जो 60 से 70 परसेंट की कटौती की गई है, उसकी मैं कुछ फिग[r14] र्स देना चाहता हूं। 1 अप्रेल, 2008 को जो गैस सप्लाई मिलती थी, वह 3.50 एम.एम. एस.सी.डी थी, वह 1 अप्रेल, 2008 के बाद 2.70 एम.एम. एस.सी.डी. हमें मिली। उसमें भी और शॉर्टेज हो गई। अब 0.98 एम.एम. एस.सी.डी. गैस की कमी, यानी 30 परसेंट कटौती और कर दी। अब हमें जो गैस मिल रही है वह 1.4 एम.एम. एस.सी.डी. गैस मिल रही है, जबकि हमारी रिक्वायरमेंट है 3.50 एम.एम.एस.सी.डी गैस की है। इस प्रकार 65-70 परसेंट की शॉर्टफाल है।

          हम पैट्रोलियम मंत्री से रिक्वैस्ट करते हैं, गेल के ऑफीसर्स से रिक्वैस्ट करते हैं, लेकिन कोई सुनने के लिए तैयार नहीं है। गेल के ऑफीसर्स कहते हैं कि आप गुजरात गैस कंपनी के पास जाइए, क्योंकि हम तो उसे गैस की सप्लाई करेंगे। हमारी कमनसीबी है कि हमारी बात न सरकार सुनती है और न ही अधिकारी। इससे हुआ यह है कि जो गैस हमें ताप्ती फील्ड से मिलती थी, वह भी ट्रिपिंग की वजह से नहीं मिल रही है। ऐसी स्थिति पूरी इंडस्ट्री की हो चुकी है। गैस सप्लाई में कटौती  गेल के प्रोसेसिंग अधिकारियों की गलत नीतियों की वजह से आज पूरी प्रौसेसिंग और टैक्सटाइल इंडस्ट्री खत्म होती जा रही हैं। जिस प्रकार से डायमंड इंडस्ट्री खत्म होती जा रही है, उसी प्रकार से टैक्सटाइल इंडस्ट्री भी खत्म होती जा रही है। ऐसी स्थिति से उसे उबारने के लिए जो काम तीन-चार महीनों में करना था, वह भी नहीं किया गया। …( व्यवधान) मधुसूदन जी, आप जानते हैं, फिर क्यों ऐसा कह रहे हैं। आप जानते हैं, लाखों लोग बेरोजगार हो रहे हैं, जो मरने जा रहे हैं, उन्हें आपकी सरकार क्यों सहायता नहीं देती है। …( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN : Shri Madhusudan Mistry, you speak when your turn comes.  Please do not disturb.  He is speaking only on the general discussion on the Interim Budget.

… (Interruptions)

श्री काशीराम राणा : मान्यवर, मैं कहूंगा कि डायमंड इंडस्ट्री को बचाने के लिए आर.बी.आई. ने अभी-अभी एक टास्कफोर्स बनाई है। अहमदाबाद में उसकी एक मीटिंग भी हुई। जब मैंने रैवेन्यू सैक्रेट्री, भिडे जी से बात की, तो उन्होंने बताया कि अभी एक और मीटिंग मुम्बई में होगी। उसके बाद जो रिपोर्ट हमारे पास आएगी, उस पर हम डिसीजन लेंगे। मैं माननीय वित्त मंत्री जी से पूरे सम्मान के साथ कहूंगा कि टास्कफोर्स की रिपोर्ट उन्हें आज या कल मिल जाएगी और मुम्बई मीटिंग की रिपोर्ट भी उन्हें मिल जाएगी, तो डायमंड इंडस्ट्री को बचाने के लिए जो कदम हैं, वे तुरन्त उठाने चाहिए। जैसा मैंने कहा, प्रौसेसिंग इंडस्ट्री आज बिलकुल खराब स्थिति में है, जिसके कारण आने वाले दिनों में वह बैक नहीं हो सकेगी। इसे बचाने के लिए 1 अप्रेल, 2008 में जो गैस की सप्लाई थी, उतनी ही सप्लाई तुरन्त बहाल की जाए। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो यह इंडस्ट्री बचने वाली नहीं है। हमारा जो टैक्नौलौजी मिशन फंड था, उसका जिस प्रकार से यूज होता है और जितनी उसमें सबसिडी की रकम देनी चाहिए, उसे भी सरकार नहीं देती है। 2000 करोड़ रुपए की बजाय केवल 1400 करोड़ रुपए की सबसिडी का प्रावधान अब किया गया है। इसके कारण कोई भी इंडस्ट्री मॉडर्नाइजेशन के लिए बैंक को एप्लीकेशन नहीं देती है और बैंक किसी की एप्लीकेशन लेती नहीं हैं। इसलिए पूरा का पूरा मॉडर्नाइजेशन का काम ठप्प हो चुका है।

          मान्यवर, ऐसी स्थिति में जब बजट आता है, तो उसे लोगों से कुछ आशा होती है, लेकिन इस बजट में कोई होप नजर नहीं आ रही है। इसलिए मैं वित्त मंत्री जी से रिक्वैस्ट करूंगा कि डायमंड और टैक्सटाइल इंडस्ट्री को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। …( व्यवधान)

श्री हरिन पाठक (अहमदाबाद)  : सभापति महोदय, डायमंड इंडस्ट्री को बचाने के लिए केन्द्र सरकार की ओर एक पैकेज जारी किया जाना चाहिए। …( व्यवधान)

 

 

SHRI FRANCIS FANTHOME (NOMINATED): Thank you for giving me an opportunity to participate in the discussion on the Interim Budget 2009-10 presented to parliament on 16 Feb. 2009 Sir, while supporting the provisions of the Interim Budget and the Supplementary Demands for Grants, I oppose the cut motions moved by some members on the Grants on Accounts.

The interim budget and vote on accounts are temporary authorizations to incur expenditure during the next four months. As the term of the 14th Lok Sabha is about to close, the Finance Minister has resisted from giving sops and left fiscal and economic measures to the government in the 15th Lok Sabha.

The markets, normally boyed by election eve budget proposals were in for a masterful exhibition of fiscal prudence.  Consequently they exhibited a drop in enthusiasm scaling about 300 points, but the confidence in the UPA government rose amongst the common people who understand that difficult times require pragmatism and steadfast belief in the wisdom of the people.

While the UPA government under Dr. Manmohan Singh and the stewardship of Mrs. Sonia Gandhi can take justified credit for having steered the economy through one of the most dreary phases of economic downturn in world history, in which the most of the developed economies are facing recession and economic meltdown, loss of prosperity leading to unemployment and reduced compensations, we in the country while facing consequent turbulence have

been relatively more resilient, though economic growth has slowed down from

a robust over 9% during the past three years  to about 7%.

 

Despite the rhetoric of some people, the nation’s growth curve is still positive even after adjusting for about 3.6% inflation, making the country one of the fastest growing economies in the world.

 

* Speech was laid on the Table

Sir, while the interim budget has disappointed the urban based industrial economy to a certain extent, for lack of fiscal sops to weather the impact of the global downturn, the concerns of the “aam admi” have been given the highest attention with increased allocation of One lakh thirtyone thousand crores for flagship programmes e.g. Bharat Nirman, which includes the National Rural Employemnt Guarantee Scheme, Integrated Child Development Scheme, Sarva Shiksha Abhiya, National Rural Health Mission and the Rural Sanitation Programme.

 

In addition One lakh fortyone thousand crores has been provided for Defense and to fight terrorism.

 

These allocations exhibit the UPA government’s priority to address the concerns of the rural economy and to bring the benefits of economic growth to the poorest in the country.  A priority focused by the UPA leadership.  This is commendable in the context of the impending elections and the restraints operating on mobilization of resources.

 

There was mention in the House that the present Government has failed to address employment attrition due to reduction in industrial production.  Sir, the direction of industrial growth needs to keep pace with emerging market trends and new technologies there is therefore need to generate skills that will address the new market requirements and not those that continue to hold down the pace of  economic growth.  The UPA government has addressed these trends with mapping and setting up agencies that will address the skill sets required for the future.

 

Several members have mentioned concerns related to the security of the country.  This needs to be addressed at various levels with greater professionalism and attention to modernizing the equipments made available to those engaged in security of the country.  The police, the para military forces and the armed forces need to be provided:

 

-modern training  facilities in IT and Communication technology

– alert surveillance

-best arms and ammunition

– protective grear

-credit intelligence information

– bullet proof vehicles

– and capacity building to keep ahead of emerging trends in the professional space.

 

In conclusion, I would like to mention that there is need to enhance the level of altertness and commitment with which the average security personnel addresses his/her responsibility.  There is need to keep the forces alert so that they appreciate the enormity of their responsibility in the context of the challenges before the nation.

 

Sir, despite the attention  given to the education of the girl child and the dignity with which she is to be addressed, the  enabling provisions need to be substantially enhanced.  The minorities need for greater enabling provisions to unshackle the chains of restraint, denial, fear, oppression, conditioning towards marginalization from the mainstream.  It is  satisfying to find the journey started by the UPA government reach its logical destination in the course of the 15th Lok Sabha.

MR. CHAIRMAN : Nothing will go on record except the speech of Shri Kuppusami.

(Interruptions) …*

 

* Not recorded

SHRI C. KUPPUSAMI (MADRAS NORTH):  Sir, I rise to participate on behalf of my Party, DMK, in the General Discussion in the Interim General Budget presented by the hon. Leader of the House and Ministry of External Affairs and the Minister of Finance, Thiru Pranab Mukherjee … … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN :   Shri Kuppusami, you continue your speech.  They will continue to make noises.

… (Interruptions)

SHRI C. KUPPUSAMI : As the name goes, Vote on Account, this is an Interim Budget to cover the first three to four months of the next financial year 2009-2010, as the tenure of this 14th Lok Sabha will be coming to an end in May and the nation is going for the General Elections for a new Lok Sabha very soon. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : Do not make noise. Shri Kuppusami alone can speak.

          Shri Kuppusami, you may continue.

SHRI C. KUPPUSAMI : In the face of global meltdown, our Government headed by Dr. Manmohan Singh under the able guidance of Madam Sonia Gandhi has taken effective steps to meet the situation.… (Interruptions)

The Government has put in more money in poor people’s hand which will give a stimulus to the economy, apart from bail out packages given to various sectors of industry. However, the employers are not passing the benefits of stimulus packages to the workers. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record, except Shri Kuppusami’s speech.

(Interruptions) …*

 

 

 

* Not recorded.

 

 

SHRI C. KUPPUSAMI : The Government should make it clear to all the industries that there should not be any retrenchment and all workers should be protected. According to the latest Labour Ministry’s estimates, five lakh people lost their jobs between October and December 2008 and this number could be just the tip of the iceberg.

          While addressing the 42nd Session of the Indian Labour Conference, our hon. Minister Thiru Pranab Mukherjee said that jobs must be protected even if it means some reduction in compensation at various levels.

          Sir, please permit me to lay the remaining part of my speech on the Table of the House.

*According to ILO report, the rate of unemployment is rising at 6.1% globally.  Therefore, the situation is very grim and the Central Government should take pro-active actions to deal with the situation.

Interest rate on PF to be increased – I understand that the Trust has recommended for increase of interest rate on PF to 8.5%. Senior citizens are getting higher rate of interest from the banks.  On the same pattern, the workers, who are also, in the vulnerable sector, who get hit the most by the price rise, should also be given a higher rate of interest. I would urge upon the Government that it is a meager increase and the interest rate should be increased to at least 11%, in view of erosion of rupee value.  Similarly pension being given to workers on EPF pension should also be enhanced as the Government has got a good corpus amount.

Handloom Weavers’ Scheme – Weavers are worst hit after farmers.  The Government has recently introduced some insurance scheme for the weavers.  But much more needs to be done to ameliorate the lost of the handloom weavers.  The Government should come out with a specific policy for the handloom sector. 

 

 * …..* This part of the Speech was laid on the Table.

They should come out with more subsidy for handloom products.  There should be Handloom Weavers’ Welfare Fund to take care of handloom weavers in distress.

Chennai Metro Rail Project – Nawaharlal Nehru National Urban Renewal Mission (JNURM) was launched to give focused attention to integrated development for urban infrastructure and service.  I welcome the allocation of Rs. 11, 842 crore for the year 2009-10.  In the first phase, Chennai Metro Rail Project, it has been approved from Washermanpet to Chennai Airport.  On representation to the Hon’ble Chief Minister of Tamil Nadu, it has been advised to examine the feasibility of extending the metro project from Thiruvottiyur to Chennai Airpot.  I would urge upon the Central Government to examine the proposal and expedite clearance of First Corridor of Chennai Metro Rail Project which is proposed from Thiruvottiyur to Chennai Airport.

To boost housing sector – To combat recession in the housing sector, I request the Government to consider further reduction in interest rates on home loan to boost demand for new homes.  The income-tax rebate on home loan should also be increased from 1.5 lac to Rs. 3 lac.  Similarly, excise duty on steel and cement should be reduced to encourage the construction sector where the workers engaged are mostly unorganized. I further request to allocate more funds for urban housing scheme to the BPL in urban areas.  Similarly for poor people and weaker sections in the urban areas, adequate funds should be allotted  for construction of houses under various schemes, especially to the metropolitan city of Chennai.

The Honourable Minister may recall that in the earlier Budget, there was a scheme brought out for providing drinking water from saline water (sea water).  I would request the Government to expedite this scheme so that the people in Chennai get clean drinking water from the scheme without further delay.

Inter-linking of rivers – Our Chief Minister, Dr. Kalaingar has recently inaugurated State level inter-linking of rivers like Tamirabaruni and other State rivers, which would enhance the availability of water in the water bodies for irrigation purposes.  The Central Government should extend finance to his project, as part of the interlinking of rivers, which would solve the shortage of water over a period of time.

Pongal Gift – Dr. Kalaingar has also given Pongal Gift to the people in Tamil Nadu on the occasion of Tamil Festival and Tamil New Year which is being celebrated on the 14th of January. As a part of the Pongal Gift, Rice, Dal, jaggery, Cashewnut, dry Grapes were distributed to the common people through PDS system.  I would suggest that the Central Government can also launch a similar scheme for important festivals like Holi, Onam, Durga Puja in various parts of the country.  This scheme in Tamil Nadu was appreciated by all people and it became very popular.

LPG price to be reduced – The prices of LPG cylinders which are meant for domestic household need to be reviewed by the Government.  I would request the Government to reduce the price further so that the poor people can get some relief and the Government can see the god in the smile of Poor, as Peraringar Anna said this.

Golden Quadrilateral projects – we congratulate our dynamic Minister for Road Transport and Shipping, Thiru Baalu who with the blessings of our leader Dr. Kalaignar has made remarkable achievements in Golden Quadrilateral projects, completing more than 85% of the target up to now.  All nation highway roads are developed and widened which would go a long way in making a strong India.

With these words, I support the Budget.

 

 

 

 

 

 

श्री किशन सिंह सांगवान (सोनीपत)  महोदय, माननीय वित्त मंत्री जी ने दिनांक 16.2.09 को संसद में जो अंतरिम बजट पेश किया है वह बड़ा ही निराशाजनक है । वित्त मंत्री जी ने अपने बजट भाषण में अपने पिछले चार साल की उपलब्धियों का बखान किया है । इसमें नया कुछ नहीं है । बजट भाषण के 18 पृष्ठों में से लगभग 14 पृष्ठों में केवल मौजूदा यू0पी0ए0 सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का एक विवरण दिया है ।  सिर्फ चार पन्नों में अगले वित्त वर्ष 2009-10 की बात की है । वित्त मंत्री जी ने सरकार को केवल सलाह दी है कि अगले चार साल में उसे क्या करना चाहिए, लेकिन कोई कदम उठाने का एलान नहीं किया । इन्होंने बदलती अर्थव्यवस्था के मद्देनजर राजकोषीय घाटे की समीक्षा की सलाह भी दे डाली । अपने बजट भाषण के निष्कर्म में इन्होंने फिर से सरकार के चार साल की उपलब्धियों का बखान कर डाला  ।

 

        जहां तक किसान और कृषि का संबंध है, किसानों के लिए मात्र सब्सिडी जारी रखने की बात कही गई है । किसानों के लिए किसी विशेष पैकेज की घोषणा नहीं की गई । आज किसानों की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है । किसानों द्वारा आत्महत्याएं बढ़ रही हैं । किसान लगातार कर्ज में डूब रहा है । न उसको बिजली मिलती है, न

पानी मिलता है और न ही लाभकारी मूल्य मिलते हैं और न ही समय पर अच्छा खाद व बीज मिलता है । सरकार का लगभग 65000 करोड़ रू0 कर्ज माफी की घोषणा से आम किसान जो व्यावहारिक आदमी है, उसको कोई लाभ नहीं हुआ है । इस कर्ज

 

 

————————————————————————-

* Speech was laid on the Table.

 

माफी से या तो बैंकों की डूबी हुई रकम वसूल हुई है या हैबिचुअल डिफाल्टरस को लाभ हुआ है । सरकार ने गेहूं का मूल्य 80 रू0 प्रति किवंटल बढ़ाकर किसानों का अपमान किया है । जबकि किसान खेती के लिए जिन चीजों का इस्तेमाल करता है  उन सभी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं । सरकार विदेशों से 1500 रू0 प्रति किवंटल गेहूं खरीद रही है । जिसको पशु भी नहीं खाते । लेकिन अपने किसान को पूरी कीमत नहीं दे रहे हैं । इस सरकार ने पूरे 5 वर्षों में किसानों के लिए कोई कृषि नीति नहीं बनाई, केवल किसानों का कर्जा उतारने के लिए और अधिक कर्जा देकर झूठी वाहवाही लूटी जा रही है । सरकार ने पूरे 5 वर्षों में यह स्पष्ट नहीं किया कि कृषि के बजट में कितने प्रतिशत रूपया आबंटित किया गया है । और न ही कृषि में विकास दर कितनी बढ़ी है इसका उल्लेख किया है, केवल 4औ वकास दर का लक्ष्य हासिल करने के लिए कहा गया है । जो यह सरकार पूरा नहीं कर पाई है ।

 

        महोदय, माननीय वित्त मंत्री जी, चुनाव की चुनौती और अंतरिम बजट की संवैधानिक मर्यादा के बीच संतुलन के प्रयास में उद्योग जगत को भूल ही गए । जहां तक मार्किट का, स्टाक मार्किट का सवाल है तो सरकार ने कोई एलान नहीं किया, जिससे संसेक्स फिर लुड़कना शुरू हो गया । अर्थव्यवस्था एक असाधारण दौर से गुजर रही है । इसमें सरकार की ओर से असाधारण कदम उठाने की भरपूर गुंजाइश थी। अर्थव्यवस्था के बावजूद सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष 2008-09 के दौरान विकास दर 7.1 फीसदी रहने की उम्मीद जताई है । सरकार के आंकड़े सही तस्वीर पेश नहीं करते।  अर्थव्यवस्था  कर हर सैक्टर धीमेपन का शिकार हो रहा है । हर कारोवारी यह उम्मीद लगाए बैठा था कि सरकार इस परेशानी से पार लगाएगी । वह निवेश बढ़ाने के कदम उठाएगी । परन्तु ऐसा कुछ न हुआ, वित्त मंत्री जी ने राजनैतिक रूप से सुरक्षित रास्ता पकड़ा और एक भी नई घोषणा नहीं की ।

 

         महोदय, माननीय वित्त मंत्री जी ने नरेगा और भारत निर्माण जैसी फलैगशिप योजनाओं के लिए घोषणाएं तो की लेकिन इन्होंने इनका आबंटन नहीं बढ़ाया ।

 

        इस बजट में रक्षा बजट पर जरूर कुछ ध्यान दिया गया जिसमें पूंजीगत खर्च भी शामिल है, परन्तु इससे सेवानिवृत सैनिकों को शायद ही कोई लाभ मिलेगा । ये रिटायर्ड  सैनिक एक पैंशन एक रैंक के लिए काफी लम्बे समय से संघर्ष करते आ रहे हैं और पिछले दिनों उन्होंने अपने मैडल जो उन्होंने देश की उत्कृष्ट सेवा के लिए दिए गए थे तथा जिन्हें वे अपनी छाती से लगाकर रखते थे, माननीय राष्ट्रपति महोदया, को सामूहिक रूप से लौटा दिए थे । हमारे लिए इससे ज्यादा शर्म की और क्या बात हो सकती है ।

       

         महोदय, इस बजट में डाक विभाग में आम आदमी की सेवा करने वाले कर्मचारी जो लगभग 3 लाख की संख्या में हैं, जिन्हें ग्रामीण डाक सेवक कहा जाता है, जो गांवों की जनता के लिए डाकघर बचत बैंक, डाकघर पत्रों, लघु बचत योजना, वृद्धावस्था पैंशन का भुगतान करना, रोजगार गारंटी के काम में मदद करना इत्यादि सेवाओं में लगे हुए हैं, उनके साथ भी बहुत अत्याचार हो रहा है । न उनका कोई वेतनमान है, न कोई अवकाश, न रिटायरमेंट के लाभ मिल रहे हैं और न ही छटे वेतन आयोग में भी इनकी सेवाओं को शामिल किया गया है । ये कर्मचारी आज संघर्ष पर उतारू हैं । इनके लिए भी इस बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है ।

 

         महोदय, मैं जाट समाज को हरियाणा राज्य व केन्द्र स्तर पर पिछड़े वर्ग में शामिल करने की मांग निम्नलिखित सामाजिक, शैक्षणिक व आर्थिक ठोस कारणों के आधार पर करता हूं ।

 

        देश स्वतंत्र होने के बाद सामाजिक तौर पर पीड़ित अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजातियों को लाभ देकर दस वर्ष बाद समीक्षा का प्रावधान किया गया था । इसके अतिरिक्त भारत सरकार ने अन्य पिछड़ी जातियों की पहचान के लिए संविधान की धारा 340 के तहत पहले 20 जनवरी,1953 को केलकर कमीशन, जिसकी रिपोर्ट संसद में पेश नहीं हुई तथा बाद में 1 जनवरी, 1979 को बी0पी0 मंउल की अध्यक्षता में पिछड़ा आयोग गठित किया, जिसने रिपोर्ट 30 दिसम्बर, 1980 को दी व जिसे 13 अगस्त1990 को लागू किया गया । कमीशन ने सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को आधार मानते हुए रिपोर्ट में पृष्ठ संख्या 40 पर अहीर कुर्मी, कोहारी व जाट आदि जातियों को अन्य पिछड़ी जाति माना है तथा जाटों का सामाजिक स्तर भी अन्य पिछड़ी जातियों अहीर, गुर्जर, सेनी, लुहार, कुम्हार, सुनार, खाती व कम्बोज के समान माना है।

 

         महोदय, कमीशन ने अपनी रिपोर्ट के पृष्ठ संख्या 44 पर ग्रामीण श्रमिक तथा किसान जातियों को शैक्षणिक तौर पर पिछड़ा माना है । हरियाणा में 90औ से अधिक जाट गांवों में रहकर खेती करते हैं । रिपोर्ट के पृष्ठ संख्या 28 पर 4 एकड़ जमीन के एक किसान को उदाहरण देकर पिछड़ा सिद्ध किया है । हरियाणा में 70औ से अधिक ऐसे जाट किसान है, जिनके पास 4 या 4 एकड़ से कम जमीन है ।

 

         महोदय, मैं आपके माध्यम से सरकार को अवगत कराना चाहता हूं कि हरियाणा में अन्य पिछड़ी जातियों की पहचान के लिए जस्टिस गुरनाम सिंह की अध्यक्षता में गुरनाम सिंह आयोग का गठन किया गया, जिसने अपनी रिपोर्ट 30 दिसम्बर, 1990 में पेश की । इस आयोग ने मण्डल कमीशन के आधार पर रिपोर्ट में एक सर्वे में एक जाति के लिए सामाजिक  एवं शैक्षणिक आधार पर कुल 60 अंक रखे थे , 1 से 29 अंक प्राप्त करने वाली जातियां अगड़ी जातियां तथा 30 या 30 से अधिक अंक वाली जातियां अन्य पिछड़ी  जातियां मानी गई । रिपोर्ट के पृष्ठ नं0 28 पर क्रमांक 7 पर जाट जाति को 36 क्रमांक 15 पर सैनी जाति को 33 तथ अहीर/यादव जाति को 31 अंक दिए गए है । जिससे रिपोर्ट में जाटों को अहीर, सैनी जातियों से अधिक पिछड़ा पाया हे । तत्कालीन मुख्यमंत्री मास्टर हुक्म सिंह जी ने हरियाणा सरकार के आदेश पत्र क्रमांक  ज़्च्व्क़् Hङ 299 च्ज़्(1) 91   दिनांक 05 फरवरी,1991 के तहत जाट जाति सहिर अहीर, गुर्जर, मेव, सिख, जाट, बिश्नोई, सैनी, रोड, त्यागी व राजपूत कुल दस जातियों को पिछड़ा घोषित किया था, परन्तु अगली सरकार ने राजनैतिक द्धेष के चलते जाट व अन्य पांच जातियों को बिना कारण बताए हरियाणा सरकार के आदेश पत्र क्रमांक 1170- च्ज़्( 1) दिनांक 07.06.1995 के तहत सूची से बाहर कर दिया व लोढ़ा जाति को ओ0बी0 सी में शामिल कर लिया ।

 

         महोदय, अहीर, सैनी, गुर्जर आदि पिछड़ी जातियों को राज्य सरकारों व केन्द्र स्तर पर पहले ही आरक्षण सूची में रखा गया है । जाट जाति को केवल राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराचंल, दिल्ली व हिमाचल प्रदेश ने ही अन्य पिछड़ी जाति का दर्जा देकर आरक्षण सूची में रखा हे । जबकि देश के सभी प्रदेशों में जाटों का सामाजिक और शैक्षिणक व आर्थिक स्तर अन्य पिछड़ी जातियों अहीर / यादव, सैनी गुर्जर आदि के समान है । परन्तु हरियाणा, पंजाब, जम्मू और कश्मीर आदि अन्य राज्यों में जाटों को पिछड़ी जातियों की सूची में नहीं रखा गया है । अतः मैं आपसे जाट जाति को राज्यों व केन्द्र स्तर पर अन्य पिछड़ी जातियों की सूची में शामिल करके नौकरियों व शैक्षणिक संस्थानों में दाखिलों में आरक्षण  दिया जाए तथा राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, उत्तरांचल व हिमाचल प्रदेश के जाटों को राज्य स्तर के साथ-साथ केन्द्र स्तर पर भी अन्य पिछड़ी जातियों की सूची में शामिल करके  नौकरियों व शैक्षणिक संस्थानों में दाखिलों में आरक्षण दिया जाए ।

 

        इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं । आपने मुझे समय दिया, इसके लिए मैं आपका आभार प्रकट करता हूं ।

 

       

 

           

 

           

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ााळमती रंजीत रंजन (सहरसा): सभापति महोदय, मैं 5-7 पाइंट्स बताना चाहूंगी। उससे पहले मैं जनरल बजट का समर्थन करती हूं। आज सरकारी राजस्व की बढ़ोत्तरी के लिए और अच्छा बजट बनाने के लिए मैं आपका धन्यवाद करती हूं,         साथ ही कुछ पाइंट्स पर मैं आपका ध्यान आकर्­िात करना चाहूंगी।

          शिक्षा पर आपने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बेसिक शिक्षा को हम लोगों को बढ़ावा देना है, लेकिन मैं बताना चाहूंगी कि बेसिक शिक्षा में, खासकर जो शिक्षा नियोजन वहां पर शुरू हुआ, डिग्री के आधार पर वहां पर टीचर्स की बहाली की गई। हम लोगों ने खुद जाकर देखा, जहां पर टीचर्स पढ़ा रहे हैं, छठी और सातवीं कक्षा का एग्जाम दिया जा रहा है, बच्चे क्वश्चन नहीं उतार पा रहे हैं, क्योंकि वहां जिन टीचर्स की बहाली हुई, वे टीचर्स अंगूठा छाप हैं। इसलिए मैं कहना चाहूंगी कि अगर एक तरफ सरकार कहती है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हो तो भारत सरकार की कड़ी निगरानी, कड़ी मोनेटरिंग स्टेटवाइज़ होनी चाहिए, क्योंकि सिर्फ स्टेट को दे देना, कोई भी प्रोजैक्ट को दे देना, फिर वे जिस तरह से भी चलायें, यह पूरे इंडिया के बच्चों की बेसिक एजुकेशन का मामला है तो मैं चाहूंगी कि बेसिक एजुकेशन कार्यक्रम की, खास तौर से मोनेटरिंग हो। इसके साथ ही मैंने पिछली बार भी माननीय पी.िचदम्बरम जी को जनरल बजट पर कहा था कि कस्तूरबा गांधी स्कूल, जिससे बच्चियों की शिक्षा को बढ़ोत्तरी मिली, इंटीरियर गांवों में जो बच्चियां नहीं पढ़ सकती हैं, आठवीं क्लास तक उन बच्चियों के लिए आपने सुविधा दी, लेकिन उसके आगे वे बच्चियां कई जगह पर दूर जाकर पढ़ाई नहीं कर सकती हैं। मेरा आग्रह है कि कस्तूरबा गांधी स्कूल को 10+2 तक किया जाये।

          साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में जो आशा महिलाओं को, जो प्रसूति वाली महिलाएं हैं, उनको सरकारी अस्पताल तक लेकर जाएंगी, जब वे बच्चा कराती हैं तो प्रति बच्चे पर उनको 200 रुपये दिये जाते हैं। मेरा आग्रह है कि आशा महिलाओं को सैलरी बेस्ड कोई मिनिमम सैलरी प्रति माह दी जाये, ताकि उनका उत्साहवर्धन भी हो। आशा महिलाओं की यह शिकायत है कि हम लोगों का पेमेण्ट मंथलीबेस्ड होना चाहिए।

          आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों के कुपो­ाण को रोकने के लिए हैं। उनको एक तरह से आप कह सकते हैं कि वे प्री प्राइमरी लिटिल प्ले स्कूल हैं। मेरा आग्रह है कि सेविका और सहायिका की जो तनख्वाह है, उसको जनरल बजट में बढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही मैं कहूंगी कि प्रियदर्शिनी परियोजना जो आपने ली है, जिसको आप अभी एक प्रोजैक्ट के रूप में देख रहे हैं, जिसमें महिलाओं के सशक्तीकरण और आजीविका के साधन के रूप में आप एक प्रयोग कर रहे हैं, इसमें बिहार में आपने मात्र 2-3 जिलों को लिया है। मैं आग्रह करूंगी कि जिस तरह बिहार में कोसी क्षेत्र में बाढ़ आई तो मेरा आग्रह है कि पूर्व और पश्चिम, दोनों क्षेत्रों को, जहां इस साल बाढ़ आई और जहां पर हर साल बाढ़ आती है, पूरे कोसी क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रियदर्शिनी परियोजना वहां की महिलाओं की आजीविका के लिए और सशक्तीकरण के लिए वहां पर चलनी चाहिए।[R15]  

          महोदय, मैं ग्रामीण चिकित्सा के बारे में कहना चाहूंगी कि हमारे देश के गांव में, इंटीरियर में डाक्टर जाना नहीं चाहते हैं। दूसरी तरफ ग्रामीण चिकित्सक मित्र होते हैं, जिनको, 10,15 से 20 साल तक का एक्सपीरियंस होता है।  डाक्टर्स के साथ रह-रहकर उनको इतना एक्सपीरियंस हो चुका होता है कि वे फर्स्ट ऐड से लेकर, मिडिल ऐड तक इलाज करते हैं और आज कर रहे हैं। उनको एक तरह से झोलाझाप भी कहा जाता है, पर उनमें बहुत सारे डाक्टर्स ऐसे हैं, जो सही मायने में इलाज भी करते हैं और लोग उन्हीं के पास जाते हैं।  मैं उदाहरण देना चाहूंगी कि राजस्थान और केरल में उन ग्रामीण चिकित्सकों को ऐज ए ग्रामीण चिकित्सक मित्र के रूप में रजिस्टर्ड किया गया।  मेरा आग्रह है कि यदि बिहार से आपको जानकारी नहीं भी आयी हो, तो पूरे हिंदुस्तान में तीन लाख ऐसे ग्रामीण चिकित्सक हैं, जो रजिस्टर्ड हैं, उन्होंने अपनी यूनियन बनायी हुयी है, मैं चाहूंगी कि उनको बिहार में ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों में भी इसमें लिया जाए। भारत सरकार का कहना है कि डाक्टरी का जो पेशा है, डाक्टर्स गांव में नहीं मिलते हैं, इसलिए मेरा आग्रह है कि ग्रामीण चिकित्सक मित्र को भी स्वास्थ्य से जोड़ा जाए।

          महोदय, कोसी की बाढ़ के बारे में मुझे आश्चर्य हुआ कि आपने बजट में कोई भी ऐसी घोषणा नहीं की।  कोसी के कारण इस बार जो प्रलय आयी, उसे सुनामी से जोड़ा जाता है। इसमें 40 लाख लोग अफेक्टेड हुए, लेकिन एक भी घोषणा इसके संबंध में नहीं हुयी।  मैं आपका ध्यान आकर्षित करूंगी कि जो घर का मुआवजा है, ऊंट के मुंह में जीरे वाली बात कही जा रही है, प्रति हेक्टेयर चार हजार रूपए जमीन के दिए जा रहे हैं, जबकि उसकी जुताई और बुवाई में 15 से 20 हजार रूपए लगते हैं। 

          दूसरी बात, घर के मुवाअजे के बारे में कहना चाहूंगी।  वहां कहा जा रहा है कि जो सेंट्रल की एजेंसी आयी है, जो सर्वे कर रही है, यदि 100 घरों की क्षति हुयी है, तो मात्र 10 घरों को इसमें लिया जा रहा है। वे कहते हैं कि हमारा जो फंड है, जो सर्वे है और हमें जो पीछे से गाइडलाइन्स मिली हैं, उसमें मात्र 10 प्रतिशत को ही हमें मुआवजा देना है।  यह कोई न्याय नहीं है। जितने लोग अफेक्टेड हों, जितने घरों की क्षति हुयी, हर व्यक्ति को मुआवजे का हक है और उनको मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिनकी झोपड़ी थी, जिनका घर टूट गया था, वे अब वापस चले गए। जिन्होंने थोड़ा सा भी अपना शेल्टर कर लिया, उनको उसमें नहीं लिया गया।  मेरा आग्रह है कि जितने लोग अफेक्टेड हुए, जितने गांव अफेक्टेड हुए, उन सब को इसमें लेना चाहिए। साथ ही क्या कोसी का बांध बन गया, आपने  फंड दे दिया, बनवा दिया, अब पानी वहां सीपेज नहीं हो रहा है, लेकिन क्या यह परमानेंट सोल्यूशन है?  हम लोग चाहते थे और मुझे पूरी उम्मीद थी, मैं इस संबंध में दो बार माननीय प्रधानमंत्री जी से भी मिली थी कि वहां परमानेंट सोल्यूशन के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। 

          वहां हाई-डैम की बात हुयी, उस पर चर्चा हुयी, लेकिन नेपाल और इंडिया की बात होते-होते, उसमें 34 से 54 करोड़ रूपए दिए गए, लेकिन सिर्फ सर्वे होता रहा।  अब 5 साल बीत गए, लेकिन हाई-डैम की कोई बात नहीं हुयी। वहां बांध बना, लेकिन पूर्व में जो हर साल बाढ़ आती थी, हर साल वैसे ही वहां घर कटेंगे, गांव कटेंगे, हर साल 17 जिले बाढ़ से अफेक्टेड होते रहेंगे।  हम लोगों का कहना था कि वहां किसी परमानेंट सोल्यूशन के लिए सरकार को कोई ठोस कदम उठाना चाहिए था।  इस बार जो बाढ़ या प्रलय आयी, उसमें कोसी का दूसरा रूप भी देखने को मिला था।  हम लोगों को पूरी उम्मीद थी कि कोई ठोस कदम उठाया जाएगा, लेकिन नहीं उठाया गया।  मेरा आग्रह है कि आप अपने जवाब में इसको जरूर लें।

          एक प्वाइंट और कहकर मैं अपनी बात को खत्म करूंगी।  मैं धन्यवाद करती हूं कि युवा विधवा के लिए, उन्हें पैरों पर खड़ा करने के लिए, उनको औद्योगिक प्रशिक्षण देने के लिए, उनके सशस्त्रीकरण के लिए आपने जो योजना तैयार की, वह प्रशंसनीय है। लेकिन मैं इसके साथ जोड़ना चाहूंगी कि विधवा विवाह के लिए भी कोई मिनिमम राशि डीएम के द्वारा वहां पर जमा हो, ताकि जो यंग वूमेन हैं और जो डावरी का सिस्टम हैं, क्योंकि ऐसी बच्चियों को ब्याहने में बड़ी दिक्कतें आती हैं, मेरा आग्रह है कि जो युवा विधवा हैं, उनके लिए भारत सरकार की ओर से राशि दी जाए। जैसे प्रतिमाह 500 रूपए बजट में उनको देने के लिये रखे गए, विधवा विवाह के लिए भी मिनिमम राशि भारत सरकार की ओर से दी जाए।  इतना कहकर मैं एक बार फिर आग्रह करूंगी कि मैं इस बजट का समर्थन करती हूं, लेकिन मेरा आग्रह है कि कस्तूरबा गांधी को प्लस टू तक करने और ग्रामीण चिकित्सक मित्र के बारे में सोचने और कोसी के लिए कोई ठोस कदम उठाने के लिए आप जरूर इस बजट में बोलें।

          इन्हीं शब्दों के साथ, आपको मुझे वक्त देने के लिए धन्यवाद करते हुए अपनी बात समाप्त करती हूं।   

 

SHRI BALASAHEB VIKHE PATIL (KOPERGAON): Sir, I thank you for giving me this opportunity.  I would dwell upon only one point. मैं सबसे पहले वित्त मंत्री जी का अभिनन्दन करता हूं कि उन्होंने बिल्कुल मंदी और कठिन समय से गुजरते हुए भी कम से कम घाटा रखने की कोशिश की है। उन्होंने तीन-चार दिन पहले अपने एक भाषण में उद्योग जगत से अपील की थी कि मजदूरों की छंटनी मत कीजिए, यदि हो सके तो उनकी तनख्वाह कम कर दीजिए। आपको याद होगा कि एक साल पहले जब फिक्की में प्रधान मंत्री जी ने भाषण दिया, उस समय भी उन्होंने उद्योग जगत से अपील की थी कि आप अपने पर्क्स, प्रिविलेजेज आदि के बारे में सोचें और जिन लोगों की तन्ख्वाह इतनी ज्यादा बढ़ा रहे हैं, वह ठीक नहीं है। उस समय उद्योग जगत ने काफी हल्ला मचाया था और कहा था कि प्रधान मंत्री जी का भाषण हमारे कार्य क्षेत्र में हस्तक्षेप है, यह ठीक नहीं है और हम इसका विरोध करते हैं। अब जब हम मंदी के दौर से गुजर रहे हें, तो पूरा उद्योग जगत सरकार से बेल आउट मांग रहा है। हमने बेल आउट पैकेज दिया है, इंडस्ट्री को दिया है, खासकर हाऊसिंग यानी कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री और ऑटो के लिए दिया है। अभी भी कुछ उद्योग जैसे मीडिया, फिल्म इंडस्ट्री और बाकी इंडस्ट्रीज भी बेल आउट पैकेज मांग रही हैं। मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि हमें बेल आउट पैकेज देना पड़ेगा क्योंकि हर रोज ले-ऑफ हो रहा है, कुछ शिफ्टें कम हो रही हैं, उद्योग बंद हो रहे हैं। मजदूर कहां जाएंगे? मजदूर गांवों में अपने घर जाएंगे। वे दिल्ली से गांव जायेंगे, मुम्बई से अपने गांव जाएंगे, कोलकाता से गांव जायेंगे। जो लोग बड़े-बड़े शहरों में आये हैं, वे सब अपने-अपने गांव जायेंगे। उन्हें बेल आउट पैकेज देना जरूरी है। मेरा सरकार से आग्रह है कि यदि बेल आउट पैकेज देना है तो कंडीशन लगा दें और उनकी सैलेरी पर सीलिंग लगायें। प्रिविलेज एंड पर्क्स में थोड़ी कमी हो और जो टॉप एग्जीक्यूटिव्ज़ साल में करोड़ों रुपये तनख्वाह ले रहे हैं, उसे भी कम करना जरूरी है। जो सरकार की कंडीशन मान ले, उन्हें ही बेल आउट पैकेज देने की जरूरत है। ऐसा बेल आउट पैकेज न दें कि उनका बोनस भी दुगुना हो जाये, उनकी तन्ख्वाह ज्यादा हो जाये और वे एनजॉय करें। मजदूर और टॉप एग्जीक्यूटिव्स की तन्ख्वाह में काफी अंतर हो गया है, वह भी थोड़ा कम होना चाहिए। हमारी नियमित अर्थव्यवस्था के कारण हम थोड़े बच गये हैं और बच भी रहे हैं, लेकिन बेरोजेगारी बढ़ रही है। इसलिए बेल आउट पैकेज देने पर कुछ कंडीशन रखनी चाहिए क्योंकि यह टैक्स- पेयर्स की मनी है। अमेरिका में यह काम शुरू हो गया है। पूरी दुनिया में मंदी का असर हो रहा है, रिसेशन, कन्वर्शन कभी-कभी डिप्रेशन भी हो जाता है। हम बहुत सावाधानी से चल रहे हैं, इसलिए भारत सरकार के प्रधान मंत्री खासकर वित्त मंत्री जी का मैं अभिनंदन करना चाहता हूं कि उन्होंने समय पर कुछ एक्शन इनीशियेट किया है।

           बजट में इफ्रास्ट्रक्चर के लिए कुछ प्रावधान किया गया है, जो सही प्रावधान है। अभी रूरल हाउसिंग, हमने जैसे कमजोर वर्गों के लिए, बिलो पावर्टी लाइन वाले लोगों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में हाउसिंग स्कीम चलायी है, वैसे ही ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक हाउसिंग स्कीम बनायी जाये जिससे कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग खुद मकान बनायें और उसमे रहें। शहरों में मकान चाहिए लेकिन साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ऐसी नीति होनी चाहिए जिससे इफ्रास्ट्रक्चर को सुविधा मानकर रिसेशन के कारण रोजगार भी बढ़े और ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी के लिए सुख-सुविधा बढ़े।

           आपने बजट में इफ्रास्ट्रक्चर के लिए कहा, मैं इतना कहूंगा कि ग्रामीण सड़कें या डिस्ट्रिक्ट रोड्स और बाकी रास्तों को मजबूत करें, उनका विस्तार करें। उनके लिए एक लाख करोड़ रुपये, दो लाख करोड़ रुपये जितना भी पैसा चाहिए, वह दीजिए। गोल्डन क्वाड्रिलेट्रल कॉरीडोर, नैशनल हाईवेज तो बनाना जरूरी है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई जगह रास्ते नहीं हैं। अगर रास्ते हैं तो ब्रिज नहीं हैं। पहाड़ी इलाके, दूर-दराज गांवों के इलाके, जब मैं वहां जाता हूं, तो लोग मेरे पास आते हैं और कहते हैं कि कुछ भी कीजिए लेकिन हमें एक किलोमीटर का रास्ता दे दीजिए, दो किलोमीटर का रास्ता दे दीजिए। आज भी कई गांवों और जिलों में पक्के रास्तों की कमी है। वहां कच्चे रास्ते बने हुए हैं। इसलिए गांवों में इन कामों को करवाना चाहिए ताकि जो लोग इस मंदी के दौर में  गांवों से निकलकर शहरों की ओर जा रहे हैं, वे शहरों में न जाएं। इससे गांव में काम बढ़ेगा, रोजगार बढ़ेगा, जिससे उनको आमदनी होगी।

          मैं इनकम्पलीट प्रौजेक्ट्स के बारे में कहना चाहूंगा, जैसे ऑन गोइंग इरीगेशन प्रौजेक्ट है, उनके लिए पूरी धनराशि दी जानी चाहिए। उन पर 19-20 परसेंट की कोई कंडीशन मत लगाइये। जहां इरीगेशन की स्थिति कमजोर है, नैशनल एवरेज से कम है, उसके लिए ज्यादा धनराशि दीजिए, क्योंकि जब दो-तीन साल बाद इरीगेशन के प्रौजेक्ट पूरे होंगे, तो उनके पीने के पानी की समस्या हल होगी।[N16] 

          खेती की उपज बढ़ेगी। इसके साथ ही साथ उद्योगों को भी पानी मिलेगा। इससे उद्योग जगत भी ठीक चलेगा और गांव में रोजगार बढ़ेगा जैसा मैंने शुरू  में कहा। इस कारण लोगों के पास पैसा आयेगा, तो वे मार्केट में जाकर कपड़ा खरीदेंगे, लाइफ स्टाइल की चीजें खरीदेंगे, बर्तन आदि खरीदेंगे।  इससे उद्योग जगत को भी राहत मिलेगी। इसके लिए हमें डोमेस्टिक मार्केट बढ़ानी पड़ेगी।  जब तक हम डोमेस्टिक मार्केट नहीं बढ़ायेंगे, तब तक हमारा रोजगार और उद्योग  अच्छा नहीं चलेगा। डोमेस्टिक मार्केट  बढ़ाने के लिए हमें यह करना होगा कि इफ्रास्ट्रक्चर के लिए जितनी धनराशि हमें देनी है, वह  दी जाये। लेकिन इफ्रास्ट्रक्चर बिल्कुल सलैक्ट हो, जैसे रूरल हाऊसिंग, रोड्स, पक्का रोड, नैशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और ईरीगेशन प्रौजेक्ट, इनकम्पलीट  और ऑन गोइंग प्रोजैक्ट हों।

           सभापति महोदय, मुझे ज्यादा कुछ नहीं कहना, लेकिन उद्योगों को हमें बढ़ावा देना चाहिए जैसे एसईजेड है। हमने एसईजेड को काफी सहूलियतें दी हैं, टैक्स कन्सेशन दिया और एक्सपोर्ट -इम्पोर्ट के लिए कस्टम को कन्सेसन दिया। जो एक्सपोर्ट जोन उनके लिए बनाया, उसके लिए भी दिया। लेकिन वे मजदूर को निकाल देते हैं। जब वे सरकार के पैसे के इंटरैस्ट पर सहूलियत लेते हैं, तो सरकार की भी जिम्मेदारी बनती है कि जो एसईजेड के उद्योग हैं, उनमें सरकार की परमीशन के बिना, सरकार की एप्रोच के बिना किसी मजदूर की छंटनी न की जाये, किसी को बेरोजगार न बनाया जाये।  यदि कोई उद्योग बंद करना है, तो कम से कम सरकार की परमीशन लेनी चाहिए, कम से कम सरकार की  नॉलेज में तो लाना चाहिए कि वे क्या करने जा रहे हैं? यदि बेरोजगारी बढ़ेगी, तो उससे वायलेंस बढ़ेगी।

          इसलिए मैं आपके माध्यम से सरकार से आग्रह करना चाहता हूं कि इफ्रास्ट्रक्चर के कारण अमेरिका में 1930 में रिसेशन आया था…( व्यवधान) All these infrastructural projects in the country should be through public funding.

          यह मेरी सरकार से दरख्वास्त है। आपने मुझे समय दिया, इसके लिए धन्यवाद।

                                                                                               

SHRI P.C. THOMAS (MUVATTUPUZHA): Sir, due to paucity of time I will only touch upon the main points.

          Sir, my first point is that there should be an immediate package for those agricultural producers and plantation crop producers who are facing serious problems due to fall in prices of Paddy, Coconut, Rubber, Arecanut, Vanila and vegetables etc. An immediate action needs to be taken to help them tide over their problems.  

          Employees in different categories including the Staff Nurses in Government hospitals are facing a serious problem due to non-implementation of the recommendations of the Sixth Pay Commission. Also, some of the recommendations which have been given in favour of employees in different other Sectors of the Government are also not being implemented. So, I would like to request the Government to take immediate action to redress the grievances of these employees. I may also mention in this regard that the Nurses are on a strike from the 16th onwards in Delhi.

          Sir, the retirees, especially the senior citizens of different categories, including the Provident Fund beneficiaries are also clamouring for their pensions to be revised for a long time. But that has not been done. Other facilities due to them are also being denied to them. I would like to request the Government to initiate immediate action to redress their grievances.

          Sir, in regard to the ED Postal employees I would like to mention that in spite of assurances on several occasions from the Government about enhancement of their emoluments and improvement of their working conditions, nothing has been done so far. They need to be given justice and their case needs to be considered immediately.

Sir, Kerala’s share of PDS rice has been drastically cut. Electricity supply from other pool has also been cut. The supply of these things should be restored immediately. The Government should allot money for agricultural debts of banks. The money earmarked for this purpose should be given to the banks. When banks are approached, they say that relief cannot be given because money has not come. This aspect has to be dealt with immediately. The debts of dalits and tribals should either be waived or given relief. I would like to make a point about the dalits belonging to Christian faith in Delhi. [R17] 

I would submit that in a secular country, this should not be done.  They should not be discriminated against. Just because they have less faith in a particular religion, may be in Christianity or Islam, they may not be denied the rights of dalits, if they are really entitled as per the Constitution.  So, as regards reservation, there should be an amendment to the Constitution which has been assured but has not been done so far. About 2000 people from different parts of the country have come to Delhi and they are holding a strike today that is going on outside the Parliament  House.

          My penultimate point is, the Government should also help more of exports that have been declared in the speech of the President as well as in the Budget.  When I asked the question today in Parliament, the Government says that as regards export of natural rubber which is facing a real problem, the price of natural rubber has come down from Rs. 143 per kilogram to Rs. 65 per kilogram.  It is more than half the price. But still the Government is not supporting exports. The exports have come down and the Government says that there is no glut in the market.  That is not the point.  There is glut in the market and imports are taking place.  About 50,000 tonnes of natural rubber have already been imported. And those who have to buy natural rubber from the farmers or big tyre manufacturers refrain from coming to the market and they have imported stuff. So, export subsidy or whatever support can be given should be given immediately.

          My last point is that import duty on natural rubber should be increased from 20 per cent to at least 60 per cent because of the conditions of the farmers.  But the Government says that there is a ban because of the WTO agreement. If that is so, then Government says that for five per cent there is no problem. Then why not they increase it by five per cent like from 20 per cent to 25 per cent? That must be done immediately. 

          There was a Bill passed here which was about Maritime University. That is a very good step.  The Government has taken a very good step to start the Maritime University in Chennai. We appreciate it but the Standing Committee of Shipping of the Parliament has also recommended other places for starting the Maritime University including Cochin.  Some of those places which were so recommended have been at least given a little share by way of a university centre like in Kolkata, Mumbai, etc.  We welcome that.  But why not Cochin be given such a thing? Cochin has also been benefited by a lot of things.  There is the proximity of the maritime area there. It is benefited by the international sea route and also shipyard, the ports, etc. are coming up.  If not a university, at least a centre of Maritime University should be started in Cochin.

                                                                                               

SHRI ASADUDDIN OWAISI (HYDERABAD):   Sir, if you see the Finance Minister’s speech, when it comes to minorities, he has said that adequate allocations are being made but in the last year’s Budget of 2008-09, Rs. 1000 crores have been allocated for the Ministry of Welfare of Minorities.  I am surprised that it has been cut down to Rs. 650 crores and out of that Rs. 650 crores which we see, the Maulana Azad Education Found is still disbursing the funds not out of the budget of 2008-09 but of 2005-06.  This shows that either the allocations are not being made at the right time to the Ministry or the Ministry itself is not working properly.  

          Another issue is regarding multi sector development programme and 90 MCDs were launched with much fanfare.  But as of now, not a single work has been grounded. Leave aside 90 districts but even in 20 or 30 districts, plans are still being[U18]  made. 

What we see over here is that even for that the allocation has come down from Rs. 485 crore to Rs. 251.89 crore.  How do you expect such a huge programme to be grounded when the Government keeps on decreasing the amount? 

          The third issue is about the Merit-cum-Means Scholarship.  You have given last year Rs. 1,000 crore.  I know this is only a Vote on Account and it is only a stop gap arrangement for four months.  But basing on Rs. 1,000 crore, you should have at least allocated Rs. 75 crore.  That has also not been done. 

          We do not know what will be the fate of the Mungerkar Committee’s recommendations.  The Mungerkar Committee talks about 251 urban towns wherein you have a large number of minorities and the basic amenities and socio-economic parameters are very low.  We do not know whether the Ministry concerned, whether it is the Ministry of Urban Development or whether it is the Ministry of Women and Child Development, is taking any steps which the Mungerkar Committee identified. 

          I welcome the two new schemes that the Government has started. The National Fellowship for Students of Minority Communities and the new schemes which have been given for the Central Wakf Council.  I would also welcome the Government steps, the steps which you have taken, which have led to increase in employment, especially in the Ministry of Urban Development, in the Ministry of Railways, etc. 

          The main thrust of the issue over here is that we have received 45 billion dollars worth of foreign exchange.  Now, according to the Ministry of External Affairs and the World Bank, we are going to touch round about fifty billion dollars.  Due to global economic meltdown, thousands of people are coming back from the Middle-East.  The main source of foreign exchange for the Government of India is the Middle-East.  Thousands of people are coming back from the Middle-East.  They are leaving their jobs because of global economic meltdown. 

I would like to know from the Government whether any arrangement is being made for them. These are poor people. They are not asking for any subsidy or any charity.  The most unfortunate part is that these people who are working in the Middle-East do not get any protection from the Government over there.  If I work in the U.S.A or U.K., I have some sort of comfort arrangement over there.  Now, when they are coming back in thousands, what is the plan the Government has? 

My suggestion to the Government, through you, is that please make a plan through the NRI Ministry and give directions to the banks so that these people can start small businesses. Due to this global meltdown, in urban areas there is a huge unemployment. In the form of taxi drivers or auto drivers, there is a huge unemployment.  So, I would hope that some sort of arrangement could have been made or at least now create a evaluation mechanism to help them. 

Another issue is very important in relation what had happened in Satyam Computers.  This whole fiasco had happened a month ago. I was expecting that this Government would take some certain steps.  I mean, 26/11 forced you to bring the UAPA Act.  You acted immediately.  After introduction it was passed very quickly.  Why does not this Government bring a Bill on the lines of Sarbanes Oxley law, which was brought in the U.S.A.?  Unless and until the Government brings this Sarbanes Oxley law, more Satyams would happen. … (Interruptions) The Sarbanes Oxley law says that any Independent Director is also criminally liable along with the auditors. That should have been brought in this Session itself.  The poor investor invests because he sees the Independent Director and he sees that reputed firms are there as auditors.  Basing on these two things, he invests.  More Satyams will happen unless and until the Government brings an Act on the lines of Sarbanes Oxley law. 

          Lastly, I agree that inflation has come down from 13 per cent to 3.2 per cent, but what about the rate of interest?  Unless you bring down the rate of interest to the levels what it was four years ago, how can you benefit the common man?  This Government stands for the common man, the Aam admi. But your rate of interest is very high. It has to be brought at least to the levels where it was four years ago.[MSOffice19] 

          Lastly, a sum of Rs. 1,000 crore was allotted last year and you have brought it down to Rs. 650 crore.  The Ministry is not spending; I think the Ministry of Finance is not caring to allot the amount to the Ministry of Minority Affairs.  Also, the National Minorities Commission Bill, which was supposed to give constitutional status to the National Minorities Commission, is still pending.  That should have been brought in this Session itself.  But, unfortunately, that has not happened.  So, I would request that these steps should have been taken by this Government which would have given a lot of hope. 

          Sir, with these few points, I would like to conclude.

SHRI SURESH PRABHAKAR PRABHU (RAJAPUR): Sir, as the hon. Minister himself has admitted that the economic growth rate is slowing down and with the best of times, it will come down to about seven per cent. 

          Sir, I think, China is worried about the fact that every time their growth rate falls by one per cent point, they feel that they will lose at least something like ten million jobs, which otherwise would have been added.  I would request the hon. Minister to come out with some sort of matrix between the falling rate of growth and how much of the employment we are going to lose.

          Sir, the hon. Minister has presented, as a full-fledged hon. Minister of Finance, the Budget and he was one of the last Ministers which produced the revenue surplus in the Budget.   So, over a period of time we are seeing a declining fiscal situation.  I am surprised by the words used by the hon. Minister of Finance that there is a fiscal consolidation.  So, it is the highest fiscal deficit in the last few years. The highest current account deficit is almost touching to 2.5 per cent.  There is a revenue deficit which is rising very rapidly, there is a trade deficit which is also adding to the woes, and to top it all; it is one of the highest public debt to GDP ratio among the developing countries.  Now, I am just wondering in this scenario when the growth rate is falling and we would like to put more public investment to actually kick start the economy, where is the money going to come from? It will be at the expense of further deteriorating our fiscal situation.  So, my request to the hon. Minister is that the new agenda he has spelt out for the new Government should be implemented.  I was just wondering can he also spell it out a little more and say that there is the money we are going to find in the economy where we can actually kick-start the economy?  Where is it going to come from? 

          Secondly, I come to infrastructure which is a very important issue.  In fact, we want nine per cent of GDP now to be invested into infrastructure which is now at four per cent.  Now, again, this is linked to that.  Can the infrastructure investment take place from the private sector alone and if he is going to do that, then who is going to pay the user charges which the private sector will expect to make the project bankable.  Therefore, if it is going to come from the private investment, then wait for the user charges issues that have to be addressed. If it is going to come from the public investment, I just talked about the fiscal situation how it is going to happen.    But in any case, in infrastructure my request to the hon. Minister is that debt is something which comes a little later. First, you have to find equity to finance infrastructure.     Where are you going to find equity for infrastructure, which is a major challenge for the whole world and also for India?  I would request the hon. Minister to talk about it a little more.

          Now, I come to delivery of service particularly the quality aspect of it. It has been a major challenge for us for a long time.  In fact, I would request the hon. Minister, who has also been the Deputy Chairman of the Planning Commission, as to how he is going to address the issue now.  It is because we have time to increase the coverage of education, but is the quality issue addressed?  The same is the case in the health sector.  So, this is something which the hon. Minister needs to look at.

          I come to external situation.  We already have almost $ 65 million going out of our foreign exchange reserves because FIB withdrew the money.  It is putting tremendous pressure on our current account situation.  So, at a time, when our remittances from non-residents had reached the highest level ahead of China, Philippines and even Mexico that means despite all these, our current account situation is showing a sign of stress.  Now, how are you going to handle the external situation which is also going to put a lot of pressure on rupee and that again will have some adverse impact on the economy in the years to come?   So, I would request the hon. Minister to make a statement about how does he see rupee performing in the next few years’ time in the light of this tremendous pressure on our external account.

          Sir, employment as I started by saying is a very important issue.  We do not really calculate the loss of employment in unorganized sector particularly for constructions where the DLF and Unitech shares are falling because of the big news. But because of that, millions of workers are losing jobs in that sector who do not have any protection whatsoever in social safety net.  They have gone to the villages and they have no voice and they cannot talk about it.  So, can we actually think about some scheme for such workers? [a20] 

They are people who are really in need of it.

          Mr. Minister, you started a Scheme for the widows to be given pension. I welcome the Scheme. But, Sir, widowhood is not something which is going to haunt us as much as the sum of Rs.200 as pension per month that a widow is going to get. Does the hon. Minister really believe that a widow can survive on Rs.200 per month? It is something like a cruel joke on widowhood of the women of India. I would, therefore, request the hon. Minister  to at least raise it by  ten times if not substantially. It can at least be something reasonable, it can be a respectable figure. So, Rs.2,000 would really be good.

          The Constitution of India provides for taking care of some of the backward areas of India in terms of giving a Development Board for them. In Maharashtra, we created one such Board for the rest of Maharashtra. I would request the hon. Minister to consider this demand. This is a demand which has been pending before the Government for a long time. This demand was as well made by me for a long time. It was also a demand made by the State Government as well. I have been a Member of Parliament representing the Konkan Region. I would request the hon. Minister to consider this. Can he create a new framework, a new regime in which the region like the Konkan Region –  it is one of the most backward ones, which has a potential to grow – can really be taken care of?

The Government has taken credit for a laudable programme which has been endorsed by almost all the Parties in Parliament. The Government said that we must write off loan of farmers. But there are many segments of farmers who have not yet been covered by this Loan Waiver Scheme. For example, the fishermen are there who cannot be treated differently. Fishermen also depend on farmers. They do fishing in the sea. The farmers do it on land. The farmers get the benefit of loan waiver programme. Can we not think of having a loan waiver programme for the fishermen as well on the same lines of the farmers?

I am just winding it up with this. So, something needs to be done in this respect. My request to the hon. Minister Shri Pranab Mukherjee is this. He is a very knowledgeable person. I do not see anyone as knowledgeable and as experienced as he is. I would request him to spell out an agenda for the future. Can he actually now give a prescription for the future? Actually, it is not just an agenda. What needs to be done is known to us. But how it needs to be done is something important. How do you manage the fiscal situation of India while going in for development of the country? How do you make sure that when economic growth takes place, it also takes care of the employment potential of the economy?

Next, I come to agriculture which is the root cause of the problem. Only 18 per cent of the GDP is coming from agriculture. As per the Government’s own admission, more than 62 per cent of the people depend on it. So, how do you address the root cause of poverty? Therefore, Sir, my request to the hon. Minister is to spell out an agenda. It is not just an agenda for the next Government, because probably, he also knows that the next Government will be from this side which will be going there. So, they will have to do something. So, my request is that with the political wisdom,  while spelling out an agenda, I am sure,  he will give us a piece of advice on such important issues as to how to address the challenges.

With these words, I conclude.

                                                                            

*DR. SUJAN CHAKRABORTY (JADAVPUR) : Hon’ble Chairman Sir, I am glad that you have allowed me to speak on Interim Budget. I’ll be very brief.  Sir, in the last four five years, there was no threadbare discussion on Budget I personally feel that the opposition should have played the role of scanning the Budget but it did not do so.  And that has harmed the interest of the country.  This is the Vote-on-Account.  It is true that there are certain limitations.  Even then, it could be made more effective. There was a scope for that.  61 years have passed since independence. What we perceive today is that the gap between two classes in the society is increasing day by day.  True, India is shining but is also true that ‘Bharat’ is suffering.  This divide within the same country is leading us towards a dangerous peril. Rightly there are 55 billionaires in our country who can be compared with these of other countries.  In the last year only 23,000 millionaires have been added to the list.  This is one side of the story.  On the other hand, according to Arjun Sengupta Committee Report, 77% of the population thrive on a meagre daily income of less than Rs.20. What will happen to them?

          What will be their future? Sir the Unorganized Sector Bill has been adopted. But we are yet to see what effective measure it takes.  Farmers are still committing suicide.  There have been so many debt relief measure, special packages but where is the solution? 18% of the country’s GDP depends on agriculture, 62% of the population survives on agriculture.  This is an extremely important sector but is plagued by a number of problems and strikingly enough, there is a lack of political will.  Sir, prices are shooting through the roof.  Inflation rate though has come down a bit.  But due to price rise, the rate of inflation in food grains is rather high. Thus the essential commodities are going out of reach of the common people.  They are suffering like anything.  This has to be remembered. 

 

 

*English translation of the Speech originally delivered in Bengali.

The status of BPL is not very clear even today.  We cannot say that we are following the BPL parameters entirely.  In some cases, APL people are turning into BPL and they in turn are being deprived of their privileges and rights.  As a result, there is an emergence of a kind of social unrest.  I think we should address the real issue. Sir, the 2006 report of the Swiss Bank Association reveals that India is the highest investor among the five countries which deposit money in their bank.

It has infact invested 15 times more than the fifth country.  It amounts to 1456 billion dollar that is approximately 12-13 times higher than our foreign debt.  Where from is this huge amount pouring in? Who all are running these accounts? Why is the amount being related to the country’s resources? We cannot turn a blind eye to the problem.

          Similar is the issue of black money.  Every time we discuss about black money and the parallel economy which runs in the country.  We are very much concerned about that.  The entire Parliament rues about the problem but we have do away with this, otherwise the entire economy right me destroyed.  Country denotes the people, its citizens who should be taken care of.

          Today we are having a jobless growth.  Growth rate is undoubtedly high but it jobless. In the last 3 months, 5 lakh employees have last their jobs.  Definitely, this is an incomplete report.  It is must be much higher.  Previous speakers have also mentioned this.  But how to check this jobless? What needs to be done? There is certainly come weaknesses on our part.

          Sir, agriculture, small industries etc.  are the main sectors.  In the small industries, bank loans are not easily available, though it is in the priority sector.  Even if credit is available, the rate of interest is very high.   

          The bigger industries are given easy credit.  The interest rate should be lower in case of smaller entrepreneurs but that is not happening.  I think we should look into this aspect.

          In the same manner, Swaminathan Committee has recommended that interest rate for the farmers should be brought down from 7% to 4%.  Therefore, the priority sector has to be nurtured through proper planning and budgetary allocation. Are we doing that? Perhaps not.

          Sir, at least four or five major sectors are there :- like R&D. Nothing can be more important than this.  Education is another such sector with immense potential.  When will be the Budget expenditure on education touch 6% mark? What are we going to do for our unorganized sector? When are we going to act? When are we going to have 5% expenditure on health sector?

          We are not functioning in a proper manner.  There is definite lack of political will.  While concluding, I may say that once Lal Bahadur Shashtri had said – Jai Jawan, Jai Kisan.  We were all very happy at that time.  So many years have passed since then.  But the farmers have not succeeded, the young people have not succeeded. Unemployment has risen; the basic problems of the cultivators have not been addressed.  We can only find a cover of India shining but that does not present the real picture.

          These are the major lacunae in the Budget speech according to me.  I hope Hon’ble Minister will address all these issues in his reply.

 

 

 

 

 

श्री निहाल चन्द (श्रीगंगानगर):  महोदय, आपने मुझे सामान्य बजट के संबंध में बोलने का समय दिया है, इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूं। यह बजट बुनियादी ढांचागत योजनाओं के वित्त पोषण की दृष्टि से दिशाहीन है। उद्योग जगत के लिए इस मंदी के दौर में कर में छूट देने का कोई रास्ता नहीं निकल रहा है, इससे निराशा जाहिर हुई है। मैं ज्यादा लंबी-चौड़ी बात नहीं कहता हूं। मैं राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्र से चुनकर आया हूं। राजस्थान में केंद्र सरकार ने आईआईएम की घोषणा की थी और बाद में किसी जिम्मेदार मंत्री ने यह कहकर मुंह फेर लिया कि आईआईएम राजस्थान में नहीं बल्कि दूसरी स्टेट में बनना है, यह बजट में गलती से छपा है। सदन का मुख्य बिंदु, जिम्मेदार मंत्री इस तरह की स्टेटमेंट दे तो इससे बड़ा दुर्भाग्य हमारे और सदन के लिए नहीं हो सकता है। मैं आपके माध्यम से सरकार से निवेदन करता हूं कि राजस्थान में आईआईएम खोला जाए।…( व्यवधान) जोधपुर राजस्थान में है, हरियाणा में तो नहीं है।…( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN : Nothing is going in the records.  You can continue.

(Interruptions) …*

श्री निहाल चन्द :   महोदय, गुरुजल षडय़ंत्र योजना, कोटा में, राजस्थान परमाणु विद्युत में नेवेली लिग्नाईट, जोधपुर सेज, भारतीय वाणिकी अनुसंधान संस्थान और राजस्थान इलेक्ट्रानिक्स के लिए केंद्र सरकार ने इस बजट में जो धनराशि दी है, वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि धनराशि बढ़ानी चाहिए। इसी बजट के बाद संसेक्स गिरा है। मैं केवल इतना कहना चाहूंगा कि घरेलू उत्पादन का राजकोषीय घाटा छः प्रतिशत हुआ है, यह चिंता का विषय है। अगर सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया और कोई कदम नहीं उठाया तो यह आम आदमी के लिए घातक सिद्ध होगा। वित्त मंत्री जी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आम आदमी के हाथ में इस बजट में पैसा छोड़कर जा सकते थे लेकिन उन्होंने निराशा व्यक्त की है। खुदरा व्यापार को बढ़ावा देने, उद्योग और श्रम पर आधारित उद्योगों की मंदी को बचाने के लिए इस बजट में कुछ नहीं किया गया है। इस देश के 80 प्रतिशत नागरिक खेती पर निर्भर हैं। किसान की फसल के जो भाव 1990 में थे, आज भी वही हैं। कपास और गेहूं की फसल का जो उचित भाव किसान को  मिलना चाहिए था, वह आज तक नहीं मिला है। इस अंतरिम बजट में, पेट्रोल और डीजल में 1990 के बाद जो बढ़ोत्तरी हुई है, उसके अनुसार किसान को फसल का उचित मूल्य नहीं मिला है। मेरा सरकार से अनुरोध है कि किसान को उसकी फसल का उचित मूल्य मिलना चाहिए।

          महोदय, राजस्थान सिंचाई पर निर्भर है, कृषि पर निर्भर है। पंजाब से राजस्थान के लिए पानी आता

  * Not recorded.

 

है। बीबीएमबी बोर्ड में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान, तीन सदस्य हैं। लेकिन आज से पहले राजस्थान का सदस्य नहीं बना, आज से पहले हरियाणा और पंजाब के सदस्य बने हैं। मैं आपके माध्यम से सरकार से निवेदन करता हूं कि बीबीएमबी में राजस्थान का सदस्य नियुक्त करें। राजस्थान को शिक्षा की दृष्टि से विशेष दर्जा दिया जाना चाहिए। राजस्थान में जहां स्कूल हैं, वहां बिल्डिंग नहीं है, जहां बिल्डिंग हैं, वहां अध्यापक नहीं हैं और जहां अध्यापक हैं वहां बच्चे नहीं हैं। मैं निवेदन करता हूं कि शिक्षा की दृष्टि से राजस्थान को  विशेष दर्जा दिया जाए ताकि राजस्थान में शिक्षा को बढ़ावा मिल सके।

          मैं इस मौके पर इतना कहना चाहूंगा कि बजट में आम लोगों को बजट के प्रति निराशा हुई है। आप उसे आगे रखें। लोगों को कर में छूट दें ताकि आम आदमी आगे बढ़ सके। मैं इतना निवेदन करके अपनी बात समाप्त करता हूं।

          *महोदय, वित्त मंत्री द्वारा पेश अंतरिम बजट से आम जनता को घोर निराशा हुई है। यह बजट उद्योग जगत के बुनियादी ढांचा योजनाओं के वित्त पोषण की व्यवस्था की दृष्टि से दिशाविहीन है। इस मंदी के दौर में कर छूट में कोई राहत नहीं देने को लेकर निराशा जाहिर की है। होम लोन के ब्याज पर टैक्स में छूट में बढ़ोत्तरी नहीं हुई, जिससे आम नागरिकों को घोर निराशा हुई है। मैं राजस्थान के श्रीगंगानगर से लोक सभा के लिए प्रतिनिधित्व करता हूं। राजस्थान को अंतरिम बजट में घोर निराशा का मुंह देखना पड़ा। राजस्थान की जनता से सीधा छलावा हुआ। राजस्थान में आई.आई.एम. खोलने के लिए केन्द्र सरकार ने बयान दिया। जब कोई निर्णय नहीं हुआ तो सदन में एक जिम्मेवार मंत्री ने यह कहकर मुंह फेर लिया कि बजट में राजस्थान का नाम गलती से छप गया। राजस्थान एक पिछड़ा हुआ प्रदेश है। जहां पर आई.आई.एम. आना बहुत जरूरी है। कृपया केन्द्र सरकार राजस्थान के लिए आई.आई.एम. की घोषणा करे। राजस्थान में जो पुराने विकास कार्यक्रम में जो धन दिया गया था, कोई भी योजना पूरी नहीं हुई और उन्हीं योजनाओं को बजट में दोबारा गिनाया गया, जो पर्याप्त नहीं है। अध्यक्ष महोदय, केन्द्र सरकार ने राजस्थान के साथ फिर सौतेला व्यवहार किया है।

 

 

 

*…..* This part of the Speech was laid on the Table.

 

          इसमें गुरूजल संयंत्र कोटा के लिए राजस्थान परमाणु विद्युत केन्द्र के लिए नेवली लिग्नाईट जोधपुर सेज के लिए भारतीय वाणिकी अनुसंधान संस्थान के लिए राजस्थान इलैक्ट्रॉनिक के लिए जो धन केन्द्र सरकार ने जारी किया है, वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। इस अंतरिम बजट से निवेशकों की उम्मीद पर पानी फिर गया है। निवेशकों को भारी निराशा हुई। इस घोर निराशा से शेयर बाजार में जमकर बिकवाली हुई। तगड़ा झटका लगा। बी.एस.ई का सेंसेक्स शुक्रवार को 963.74 की तुलना में 329 रह गया। मुम्बई शेयर बाजार पर सेंसेक्स 329 अंक ही रह गया।

           महोदय, वर्ष 2008-09 में सकल घरेलू उत्पादन का राजकोषीय घाटा 6 प्रतिशत हो जाना चिंता करने की बात है। बढ़ते हुए राजकोषीय घाटे पर अगर केन्द्र सरकार ने सही कदम नहीं उठाए तो निश्चित रूप से इस देश के आम आदमी को घाटा होगा। माननीय वित्त मंत्री प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कर में राहत देकर आम आदमी के हाथों में कुछ पैसा छोड़ सकते थे जिससे खुदरा कारोबार को बढ़ावा मिलता। इससे खुदरा कारोबारियों में निराशा हुई। इसी तरह कपड़ा उद्योग और श्रम आधारित उद्योगों को मंदी से बचाने के लिए कुछ नहीं किया। यह केन्द्र सरकार की विफलता है।

           महोदय, इस देश का 80 प्रतिशत नागरिक खेती पर निर्भर है। किसान की फसल का उचित मूल्य जब तक किसान को नहीं मिलेगा, तब तक किसान तरक्की नहीं कर पाएगा। आज डीजल, कैरोसिन, खाद, बीज एवं कीटनाशक पदार्थ इतने महंगे हो गए हैं जबकि किसान की फसल का उचित मूल्य आज भी 20 साल पुराना है। किसान की फसल का उचित मूलय किसान को मिले ताकि किसान खुशहाल हो। यह बात भी अंतरिम बजट में आनी चाहिए थी, जो नहीं आई।

          महोदय, मेरा क्षेत्र श्रीगंगानगर सिंचाई एवं कृषि पर निर्भर है। राजस्थान को अधिकांश पानी पंजाब से मिलता है, मेरा आग्रह है कि पंजाब सरकार राजस्थान के हिस्से का पर्याप्त पानी जारी रखे एवं बी.बी.एम.बी का आज तक सदस्य पानी के बंटवारे को लेकर पंजाब और हरियाणा का रहा है। राजस्थान का भी एक सदस्य मनोनीत करें। राजस्थान का अब तक एक भी व्यक्ति सदस्य नहीं रहा है।

          महोदय,, शिक्षा के क्षेत्र में भी राजस्थान को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान को विशेष दर्जा घोषित किया जाये। राजस्थान के प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापक नहीं हैं, विद्यालय भवन नहीं है। विशेष दर्जा घोषित कर अध्यापक एवं विद्यालय भवन की व्यवस्था कराई जाये।

          केन्द्र सरकार अपनी जिम्मेवारियों को समझते हुए इस देश के आम नागरिकों के प्रति सहानुभूति रखते हुए उनको प्रत्येक वस्तु उचित मूल्यों पर उपलब्ध कराई जाये। पूर्ववर्ती योजनाएं चाहे नदियों से नदियां जोड़ने की बात हो या फिर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क की बात हो, अन्य विकास की योजना हो केन्द्र सरकार समय पर उसे पूरा करे, जिससे राष्ट्र का विकास एवं निर्माण सही तरीके से हो।   *

श्री विजय कृ­ण (बाढ़): सभापति महोदय, आदरणीय वित्त मंत्री जी ने बहुत ही अच्छा अंतरिम बजट प्रस्तुत किया है।[r21]  इसके पहले भाजपा के हमारे साथी बड़े चिंतित थे कि लोक-लुभावना अंतरिम बजट आयेगा, चुनावी बजट आयेगा। लेकिन जब अंतरिम बजट आया तो सबके मुंह बंद हो गये। यह एक तथ्यपरक और जो पिछला बजट था, उसे सप्लीमैन्ट करते हुए बात को बहुत ही संतुलित ढंग से आगे बढ़ाने की बात की गई।

MR. CHAIRMAN : The Minister has to reply.  You finish it.

श्री विजय कृष्ण : कई महत्वपूर्ण बातें इस अंतरिम बजट में हैं। भारत निर्माण के लिए 40,900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मैं इसमें एक बात कहना चाहता हूं कि स्टेट और केन्द्र दोनों के बीच में बेहतर समन्वय और मॉनिटरिंग की व्यवस्था होनी चाहिए। मैं मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि जिस पैसे का उन्होंने आबंटन किया है, वह गरीबों तक पहुंच रहा है या नहीं पहुंच रहा है। क्योंकि इसी सदन में डा.लोहिया ने कभी तीन आने की बात उठाई थी और दिवंगत नेता, श्री राजीव गांधी ने 15 पैसे की बात कहकर देश में चर्चा चलाई थी। जो आबंटन आप दे रहे हैं, उसकी बेहतर मॉनिटरिंग की व्यवस्था है या नहीं है, वह पैसा सही जगह पहुंच रहा है या नहीं, खर्च हो रहा है या नहीं, यह मैं जानना चाहूंगा। नरेगा जैसे काम में बेहतर ढंग से पंजीयन नहीं हो रहा है।

MR. CHAIRMAN: Your time is over.  The hon. Minister has to reply.  Please conclude.

… (Interruptions)

श्री विजय कृष्ण : सभापति महोदय, अभी तो मैंने शुरू किया है। आप कहते हैं तो हम बैठ जाते हैं। सर्व शिक्षा अभियान में बड़ा ऐतिहासिक काम किया गया है। गांव-गांव में…( व्यवधान) लेकिन जो छात्रों का ड्रॉप आउट है, आप जो पैसा दे रहे हैं, क्या आपने उसका आकलन किया है कि कितने लोग जो स्कूलों में नहीं जा रहे थे, अब जाने लगे हैं। मैं समझता हूं कि इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। मैं सिर्फ प्वाइंट्स बोल रहा हूं।

MR. CHAIRMAN: It is Shrimati Jhansi Lakshmi Botcha’s time now.

… (Interruptions)

श्री विजय कृष्ण : एन.पी.ए. की चर्चा होती है। एक लाख हजार करोड़ रुपया अब तक एन.पी.ए. का हो गया होगा। बड़े-बड़े उद्योगपति पैसे लेकर भाग रहे हैं और उस पैसे को आप समाप्त करते हैं और छोटे-छोटे किसान या कोई दूसरा आदमी कर्जा लेता है तो उसकी कुर्की, जब्ती हो रही है। हम जानना चाहेंगे कि बैंक की देनदारी का जो पैसा बड़े-बड़े उद्योगपति लेकर भाग रहे हैं और भागे हुए हैं, उस पैसे की वसूली के लिए आप कौन सा प्रावधान कर रहे हैं, उसके लिए आपने कौन सा मैकेनिज्म अपनाया है, क्या-क्या व्यवस्था हुई है, यह हम जानना चाहेंगे?

          सभापति महोदय, इस सरकार ने किसानों के धान का समर्थन मूल्य नौ सौ करोड़ रुपये तय किया है। यह एक अच्छा कदम है, हम इसकी तारीफ करते हैं। लेकिन विश्व व्यापार संगठन, डब्ल्यू.टी.ओ. एकदम निगाह लगाये हुए है। उसकी बैठक में आप जाते हैं, लेकिन उन बैठकों में इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि जो दबाव बनाने का काम चल रहा है, हम उम्मीद करते हैं कि यह सरकार उस दबाव में नहीं आयेगी और किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे और जो काम आपने किया है, उसे आप जारी रखेंगे। क्योंकि किसानों का जो सबसे बड़ा अचीवमैन्ट है, वह अन्न के मामले में हम लोग आगे बढ़े हैं, यह बहुत बड़ी बात हुई है। यदि हम किसान को ताकत नहीं दे सकेंगे और अन्य दूसरे काम नहीं करेंगे तो अनाज आयात करने की स्थिति पैदा होगी, जो बहुत ही भयावह स्थिति होगी। इसलिए डब्ल्यू.टी.ओ. की बैठक में यदि हम जाएं तो हमारा पक्ष मजबूत होना चाहिए। भोजन, पैट्रोलियम, उर्वरक सहित प्रमुख सब्सिडी का आकलन 95 हजार करोड़ रुपये का है। आपने जो यह सब्सिडी दी है, यह बहुत अच्छा कदम है। 

MR. CHAIRMAN: Now the Minister will reply.  Please conclude.

श्री विजय कृष्ण : सभापति महोदय, किसानों के कर्ज माफी का ऐतिहासिक काम हुआ है। लेकिन बहुत सारे अभी भी ऐसे क्षेत्र हैं, जिसमें किसानों के कर्जे माफी जारी रहने चाहिए और बल्कि उन्हें आगे बढ़ाये जाने की जरूरत है। किसान देश की बैकबोन है, यदि आप उसकी बात नहीं सुनेंगे, उसकी बात नहीं करेंगे, उसे संरक्षण नहीं देंगे, उसे आप ताकत नहीं देंगे तो भयावह स्थिति आ सकती है और अनाज आयात करने की स्थिति पैदा हो सकती है, यह मैंने कहा है। इस सरकार ने अपने चरित्र को उजागर किया है, दिखलाया है। यह श्री हरिन पाठक जी जैसे लोगों के लिए चिंता का विषय हो सकता है[BS22] ।

 

 

 

 

 

          हज यात्रियों के लिये पैसा बढ़ा दिया, इन लोगों को यह चिन्ता हो जाती है।  लेकिन जो काम इस सरकार ने किया है, उसने अपना चरित्र दिखलाया है और श्रमिकों के लिये बढ़ा काम किया है, उसके लिये कुछ नहीं बोलते। माननीय सदस्य श्री औवेसी साहब ने माइनौरटीज के लिये जो सवाल उठाया है, वे बड़े गूढ़ सवाल हैं, सरकार को उस पर ध्यान देना चाहिये।…( व्यवधान)

           सभापति महोदय, बिहार में दियारा का एक बड़ा क्षेत्र है। मैं उसका  एक उदाहरण देना चाहता हूं। वहां जो टाल का क्षेत्र है, यह कई किलोमीटर में फैला हुआ क्षेत्र  है। टाल और  दियारा क्षेत्र में बढ़ से हर साल लाखों रुपये का नुकसान होता है, लोग प्रभावित रहते हैं। इसलिये इस क्षेत्र के लिये बड़ी योजना होनी चाहिये। इस योजना पर कई बार चर्चा हुई है। सरकार इस योजना के लिये अलग से पैसा आपदा प्रबंधन कोष से आबंटित करना चाहिये और जो पैसा पहले दिया है, उसे बढ़ाना चाहिये। आज दियारा और टाल क्षेत्र में बाढ़ से बहुत नुकसान होता है। कई माननीय सदस्यों ने इस पर कहा भी है। इसलिये मेरा सरकार से निवेदन है कि आपदा प्रबंधन कोष के अंतगत पैसा आबंटित किया जाय़े क्योंकि वहां बाढ़ से भयावह स्थिति हो जाती है।…*

MR. CHAIRMAN : Now, the hon. Minister will reply to the debate.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: There is a limit for everything.  Please sit down.  Nothing will go on record.

(Interruptions) …*

MR. CHAIRMAN: As a special case, I will allow Shri Harin Pathak to speak for only one minute.

 

 

 

 

 

 

 

  * Not recorded.

 

श्री हरिन पाठक (अहमदाबाद)  :  सभापति जी, मुझे ज्यादा नहीं कहना है क्योकि यह अंतरिम बजट है। देश आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है और  इस मंदी से कई उद्योग प्रभावित है। इस में गुजरात का एक उद्योग कुप्रभावित है – हीरा उद्योग। पिछले साल इस उद्योग ने करीब एक लाख करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट किया है जिससे केन्द्र सरकार को 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा हुआ है। जितने भी कामगार वहां काम कर रहे हैं, वे आत्महत्यायें कर रहे हैं। 1985 में टैक्सटाईल वरकर्स की ऐसी स्थिति बनी थी और उन्हें बचाने के लिये केन्द्र ने रिहैबिलिटेशन फंड बनाया गया था। इसी तरह की एक योजना हीरा उद्योग के कामगारों को बचाने के लिये आर्थिक मंदी के दौर से उन्हें बचाने के लिये बनाई जाये। इसलिये उन्हें एक आर्थिक पैकेज दिया जाये। हिन्दुस्तान डायमंड्स के कहा जाये कि वह रफ डायमंड गुजरात के हीरा उद्योग को दे ताकि वह पालिश करके  सरकार को वापस देगी और सरकार  उसे एक्सपोर्ट करेगी। इससे हीरा उद्योग भी बचेगा और कामगारों के लिये एक आर्थिक पैकेज भी मिल जाये तो मैं सरकार का आभारी रहूंगा। 

                                                                                               

MR. CHAIRMAN:  Now, the hon. Members who would like to lay their written speech on the Table of the House, they can do so.

*SHRI RAYAPATI SAMBASIVA RAO (GUNTUR): 

Sir, I thank you for giving me the opportunity to participate in the General Disucssion in the Interim General Budget presented by the hon. Leader of the House and Ministry of External Affairs and the Minister of Finance, Shri Pranab Mukherjee. The UPA Government has stabilised the economy.  There cannot be two opinions about this.

          India is successfully coming out of the global economic crisis. This is certainly due to our UPA Chairperson, Madam Sonia Gandhi and our Prime Minister, Dr. Manmohan Singh.  The UPA Government has taken very effective steps to meet the situation.

          On every front, the UPA Government has made great strides.  It is therefore everyone to see.  The Government has come out with bail out packages and has given fillip to the economy to ensure that no sector of the country is affected.

          Before I conclude my speech, I would like to lay stress on the Technology Upgradation Fund which is meant for the textile industry. The Government is allowing to use this Fund to be utilised only by profit making companies.  I would strongly urge the Government to allow the sick units to avail the funds from the  Technology Upgradation Fund so that they can modify their units and prosper. I hope the Government would consider my request for the benefits of the textile industry in my home state, Andhra Pradesh.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

*SHRI C.S. SUJATHA (MAVELIKKARA) : I regret to say that the Interim Budget which was presented by Hon’ble Finance Minister Shri Pranab Mukherjee has been prepared with an eye on the coming elections. When claims are made that many policies are being implemented for the common man, it would be pertinent to remember what eminent economist and Congress MP Shri Arjun Sen Gupta has mentioned in his report.  He mentions about the seventy seven percentage of our population whose daily wages are rupees twenty. This Budget makes no provisions for crores of such impoverished families.  Some policies are being implemented, but their results are not reaching the common man.

          Due to recession, the traditional industries are facing a crisis.  Lakhs of labourers are loosing their jobs. Sir, the traditional industrial sectors in Kerala like coir, cashew nut, fisheries handicrafts and plantations are all facing a crisis.  Government of Kerala has declared a package of 10,000 crores to boost up these sectors.

          The Government of Kerala has asked the Centre to enhance  the credit limit. But our request has not been favourasly considered.  I request that the Centre should give a helping hand to Kerala.

          Lakhs of Keralites are employed abroad.  Their share of contribution towards our foreign exchange reserve, comes to crores of rupees.  Sir, the Centre should come out with a package for the rehabilitation of those Indians who are compelled to return jobless from foreign countries.

          The Centre has come out with a package for Kuttanad area, but nothing has been spelt-out in detail.  Due to its geographical features, Kuttlanad is a unique area.  It deserves special consideration from the Central Government. The State Government has formed a prosperity council, with the Chief Minister as its Chairman, for the welfare of Kuttanad.  The Centre, should contribute financially to the success of this scheme.

 

*  English translation of the speech originally laid on the Table in Malayalam..

          The inordinate delay in passing the Women’s Reservation Bill, is a betrayal of faith reposed on this Government.  Sir, the Women’s Reservation Bill was part of the UPA’s common minimum programme.  The Congress party, has been waxing eloquently on this issue.  But Women’s Reservation Bill has not yet been passed. History will not forgive this Government for their lack of will.

 

*SHRI K. FRANCIS GEORGE (IDUKKI): The Interim Budget presented by the Hon’ble Finance Minister has disappointed the country, as the people expected at least some steps through the Budget to address the problems-financial and others faced by the country during these days.

          This hope was eroded due to the announcement of an Interim Budget instead of an vote-on-account to be presented by the Government and that too at the last phase of this Government.

          Sir, the Hon’ble Finance Member chose to be silent on the most important and vital issue of farmers, debts still remaining, probably more than what has been waived through the loan/debt waived scheme announced in the last budget.  The Government is of the opinion that it has solved the debt crises in the agricultural sector, through the write off of loans over due to the time of about 65000 crores, it is eluding itself.

          Sir, a large number of small and medium farmers are still under the debt trap even though they had  renewed their loans by submitting interest portion to avoid legal action by the Banks. To avoid them by saying that the waiver scheme is not a repayment scheme, will be tantamount to sweeping the problem under the carpet.

          Sir, in Kerala, more than those who got benefits are the eligible ones who got excluded from this scheme. I request the Hon’ble Finance Minister not to penalise honesty in the name of norms, which should be amended to address and solve the issue, as otherwise there will be more cases of suicides by farmers. When we expect a growth of 4% plus in the Agri-sector for boosting the overall economic growth, we should ensure that the farming community feels secure and confident about their future.

 

* Speech was laid on the Table.

          Sir, the Government should also address the problem of the steep fall in prices of agricultural products like Rubbers, Pepper, Cardamom, Tea and Coffee. The Hon’ble Finance Minister should have formed a Price Stabilisation Fund to help the farmers from the financial loss they have to face off and due to the steep fall in prices and price fluctuation which these products are subjected to due to the unrealistic export-import policy of the Central Government. Sir, I would request the Government to consult States before entering into bilateral treaties to grant duty concessions and MFN Status to countries on import and export of agricultural products, which are vital to the livelihood, security of farmers of a particular State.

          Sir, the Government should also take an urgent decision to limit the interest of farm loans at 4%.

          Sir, in the case of Centre State economic relations, it is high time that we make a fresh look. More devolution of Central funds and grants are required for States to tide over their financial difficulties. The issue is being deliberated by the 13th Finance Commission and it awards for the next five years are yet to come. Meanwhile the Government should enter into a discussion with the States to meet the challenges of the financial crisis that has affected our country also. Sir, the Union Government should raise the borrowal limits of States to allow them more public spending. The Government should also come out with a rehabilitation package for the NRI’s who are coming back from abroad, from the Gulf, America and European countries due to loss of jobs consequent to the financial crisis. The States would not be able to cope up with this problem on their own and so liberal assistance from the Central Government must come.

          Sir, in the education sector, Government should start more centres of higher learning, specially in the technical side. The long standing demand of Kerala State for an IIT, has been subjected even in this budget. Kerala’s just demand, considering the studies  the State made in the education sector and the educational manpower it produces and `export’ and provide for the countries development, for an IIT to further upgrade and to rectify its deficiencies in  technical institutes of excellence, the denial of which has been a matter of great disappointment for the people of Kerala.

          Sir, the States like Kerala should be helped by the Centre to consolidate and sustain its achievements in the field of education and health care.

                                                                                                         

 

*श्री हरिसिंह चावड़ा (बनासकांठा) :  महोदय, मैं अंतरीम बजट को स्पोर्ट करने के लिए खड़ा हुआ हूं। यूपीए सरकार ने देश के विकास, लोगों के विकास के लिए अच्छे कार्य किए हैं। जिसके लिए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री और यूपीए की चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी बधाई की पात्र हैं।

          महोदय, देश के गरीब लोगों, किसानों और नौजवानों के लिए ज्यादा धन के प्रावधान की आवश्यकता थी। इतने साल की आजादी के बाद भी हमारे देश में गरीब लोग स्लम और झोपड़पट्टी में रहते हैं। इन लोगों के रहने के लिए मकान नहीं है। पेट भरने के लिए रोजगार नहीं है। बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। किसान दुखी हैं। युवक-युवतियां बेकार घूम रहे हैं। मैं वित्त मंत्री जी निवेदन करना चाहता हूं कि इन सब बातों को ध्यान में रखा जाए।

          महोदय, मेरा जिला बनासकांठा बहुत ही बेकवर्ड एरिया है। मैंने बार-बार स्पेशल पैकेज के द्वारा बनासकांठा जिले के विकास की मांग की है। लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया गया है। पूरे देश का विकास होना आवश्यक है। जब तक देश के हर हिस्से का विकास नहीं होगा, तब तक पूरे देश का विकास नहीं हो सकता है।

          महोदय, मेरी प्रार्थना है कि बनासकांठा को स्पेशल पैकेज देकर विकास किया जाए। मैं इस बजट को स्पोर्ट करता हूं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

*Speech was laid on the Table.

*SHRIMATI JHANSI LAKSHMI BOTCHA (BOBBILI):  Sir, I rise to support the Interim General Budget, 2009-10 presented by the hon. Finance Minister, Shri Pranab Mukherjee. It is a pro-aam aadmi budget.  As the Finance Minister said, all this has been made possible with guidance of UPA Chairperson, Shrimati Sonia Gandhi and inspiring leadership of the Prime Minister, Dr. Manmohan Singh.

            The UPA Government has been able to fulfil its commitments made in its National Common Minimum Programme. For the first time, the Indian economy showed a sustained growth of over 9 percent for three consecutive years. During this period, the fiscal deficit came down. The Indian economy showed resilience in the wake of the world financial crisis and the Great Depression.

            Due to shortage of time, I want to confine myself to some social issues pertaining to women.

            I thank the Finance Minister for the two schemes Indira Gandhi National Widow Pension Scheme and Indira Gandhi National Disability Pension Scheme which are being launched in the current year.  This will provide Rs. 200 to widows between the age group of 40-64. 

            I thank the Finance Minister for his gesture to empower the young  widows of the age group of 18-40 by equipping and standing on their own feet. They will get priority in the admission to the ITIs, women ITIs,  national/regional it is.  I congratulate the Government for providing Rs. 500; and bearing the cost of the training.

            In the last five years, the Government has given priority to expand the reach of the higher education in every nook and corner of the country. The outlay for the higher education has been increased by 900 per cent.  I welcome the move of the Government to start new IITs, IIMs and Central Universities. I request the Government to open an AIIMs type institution at Vizinagaram and IIM at Visakhapatnam. This will benefit the backward people as well as the tribal people of the States of Andhra Pradesh, Orissa, Chhattisgarh, Madhya Pradesh and West Bental.

            With these few words I support the Interim General Budget 2009-10. 

 

 

 

 

 

 

 

 

MR. CHAIRMAN:    Now, the hon. Minister will reply to the debate.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN:  Nothing will go on record except the reply of the hon. Minister. 

          I am very firm on this.  My dear friends, everybody has been given a chance to speak.  Please sit down.

(Interruptions) … *

MR. CHAIRMAN:  Now, the hon. Minister.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

* Not recorded.

THE MINISTER OF EXTERNAL AFFAIRS AND MINISTER OF FINANCE (SHRI PRANAB MUKHERJEE): Mr. Chairman, Sir, I rise to reply to the debate. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record except the speech of the hon. Minister.  Everybody has been given time.  Shri Harin Pathak was the last person who spoke.  Sufficient time has been given.  It is very unfortunate.

 (Interruptions) … *

MR. CHAIRMAN: Now, the hon. Minister.

SHRI PRANAB MUKHERJEE: Sir, the debate was initiated by the spokesperson of the principal Opposition Party, Shri Ananth Kumar ji. … (Interruptions)  When the reply comes, the spokesperson of the principal Opposition Party remains present in the House, and maybe because of some reasons he is not here now but I shall try to address the points which he has raised in the course of the discussion. 14.09 hrs                                  (Mr. Speaker in the Chair)

          Sir, it is natural that the Members who belong to the Opposition will oppose the steps of the Government and the Budget, whether it is a regular Budget or an Interim Budget, is no exception. [H23] 

          The other participants, including the participants from our erstwhile supporters and now in the Opposition, pointed out certain lacunae in the areas of presentation in the Interim Budget. What are those lacunae? They have pointed out on several counts.  They have found the failure of the Government on overall economic performance, performance of the public sector, performance on employment generation, Government’s measures to handle the inflation, on fiscal deficit, plight of farmers, FDI and inadequacies of our regulatory framework.  These are some of the issues, which the hon. Members in their observations have highlighted while making their comments on the Interim Budget.

          Sir, I found one striking commonality that what I stated in my Budget observations and the Budget Speech, the hon. Members  have also indicated the same  in other languages.  What I stated in my Budget Speech.  Yes, I expressed satisfaction on the overall performance of the Government for the full period of five years because this is the end of the mandate, which we received five years ago, and it is quite obviously in conformity with the parliamentary etiquette and responsibility to give an account.  Yes, I express my satisfaction over the performance.  What are the reasons for the satisfaction? The satisfaction is very simple. Never before in the history of this country, we could find a period of three consecutive years   where the economy  has registered a sustainable growth of nine per cent. 

          Mr. Speaker, Sir, most humbly I would like to submit that I had the privilege in the last two decades of being in the Finance Ministry occasionally and with a little command, which I have on the subject, I can say that never before, the country has registered, over a period of five years, 8.6 per cent GDP growth in our economy. From, 1951 to 1979, which is a long period, our GDP growth rate was 3.5 per cent. In the whole decade of Eighties, the GDP growth hovered around 5.6 per cent to 5.7 per cent.  In the Nineties, we had the Economic Reforms introduced by Dr. Manmohan Singh, the incumbent Prime Minister. All of us are missing him because he is recovering, and I do hope that before the end of the Session, at least, he will come for a short while.

MR. SPEAKER: We share your hope.

SHRI PRANAB MUKHERJEE: In the whole Nineties, during the 8th Plan and 9th Plan, we found some fluctuations. 

          But this is a compact period of five years, where we achieved  an average growth rate – including the slowdown of  this fiscal year  — of 8.6 per cent.  If I express a little satisfaction, I think, my distinguished colleagues need not mind it.[r24] 

          Ananth Kumar ji, while making his observations, stated that we inherited an excellent economy from the NDA and we have spoilt it by total mismanagement. The sum total of his observation was that there is total mismanagement of the economy and that an excellent economy which we had inherited from NDA. It is true NDA was in office for uninterrupted six years. Of course, there was a break during the Lok Sabha elections. But the Executive continued to stay from 1998 till 2004. In these six years, what was the average GDP growth rate? The average GDP growth rate was 5.8 per cent. What was the annual average fiscal deficit? It was 5.5 per cent. What was the revenue deficit? It was 4.4 per cent.

Now just to compare the period where the allegation is that we have spoiled, we have destroyed during the five years period of UPA, including the year of unprecedented financial crisis and melt-down, where the growth has slowed down, where the fiscal deficit has increased, where the revenue deficit has increased, where in my own Budget speech I have admitted this, what is the total average performance of five years? The GDP growth rate is 8.6 per cent compared to 5.8 per cent. Fiscal deficit is 4.1 per cent compared to 5.5 per cent.  Revenue deficit is 2.5 per cent compared to 4.0 per cent. We are told we have destroyed the economy. I leave the question to the hon. Members to find an answer.

          Let us take into account certain other indicators. The tax GDP ratio during the six years’ period of NDA was 8.8 per cent. During the five-year period of UPA, it is 11.1 per cent. It was a dismal performance. Here, I can tell one point to them that this is for the first time that there has been little less but thanks to Dr. Manmohan Singh, when he was Finance Minister from 1991 to 1996 and thanks to Mr. Chidambaram, who presided over this Ministry till the other day. Every year the first document I used to consult, after the presentation of the Budget, is the comparable figure of the Revenue Receipts, between BE and RE. We were used to, we were accustomed to see that more than often, RE used to be less than BE. But during this period, we found a pleasant exception that RE was always more than BE. The Revised Estimate was always more than BE. That is the strength of the economy, tax GDP ratio, savings rate and your capacity to invest. What was the investment? During the NDA regime, the investment in terms of GDP was 25.2 per cent and during the UPA regime, it is 35.9 per cent.[m25] 

          Now I come to rate of savings. During the NDA regime, it was 25.6 per cent. During the UPA regime, it is 34.8 per cent. Still, we are told that we have mismanaged the economy as a whole.

I would just like to draw your attention, Mr. Speaker Sir, and through you, of the hon. Members of the House – because to my mind, it is one great advantage which the NDA had – to the prices of the crude oil. During the period of the NDA regime, the average price of crude oil was little more than $ 27 per barrel. I am talking of the average for the period of six years. When we assumed office, it started enhancing almost uninterruptedly. The curve was moving upward and it reached in August 2008 to $ 147 per barrel.  With the industrial growth, with the growth of economy, your consumption of imported crude will increase. You can imagine how much pressure it puts on the overall economy, overall resources. But because of the management, we did not feel the BoP crisis. Earlier, we had this problem at one point of time, for which we were maligned. I was the Finance Minister in the early 1980s. To overcome the BoP crisis, when we entered into the extended funding facility with IMF of about 5 billion SDR, we were told that we had mortgaged the economic sovereignty of this country. Nothing happened. We came out with our heads high from the building of IMF. We had not withdrawn even the last instalment of about 1.2 billion SDR. Now, there were many self-styled Cassandras who prophesied the grimness of the economy. 

Most respectfully, I would like to submit let us have some confidence, self-confidence of ourselves. We have managed the Indian economy. Please also look at what I have stated in my Budget Speech. In my Budget Speech I myself had expressed deep concern about the impact of the financial crisis and the global meltdown. It is quite obvious. Any responsible Finance Minister will have to express his concern. At the same time, I expressed that I had confidence on the resilience of the Indian economy and we would overcome the crisis. I am repeating that we are confident that Indian economy will overcome the crisis. We will overcome the crisis. We will not allow the country to deviate from the path of cherished goal. Yes, it may take some more time, it may take some more policy changes. It is a continuing process. Nobody can say, either on the floor of this House or outside, that all the problems in the developed world have been solved, whether in North America or in Europe.[SS26] 

Please remember that their — North America, Europe and Japan — economy is sliding down despite the heavy industrialisation and resources at their command, and we are not brought down to zero. Yes, it has dwindled from 9 per cent to 7.1 per cent. We have taken corrective steps, and it is not correct to say that we have not taken the corrective steps.

          What would happen within these four months? The Government has a sovereign responsibility, and the Government will exercise that sovereign responsibility — as per the Constitutional mandate — till the day the successor Government resumes responsibility. But at the same time, please remember that there are certain Constitutional norms and Parliamentary propriety. How do you expect that I will burden the exchequer or any Finance Minister presenting the Interim Budget will burden the exchequer with series of taxation proposals when our mandate for the next fiscal year is extended for a period of less than two months? What would be the credibility if I announce a series of expenditure proposals without locating the resources? Who is going to believe me? What type of confidence can we create in the system? But we have done whatever is possible, and I will come to it a little later.

          We did not wait. Two stimulus packages were announced by the Prime Minister in December and January. The Reserve Bank changed the REPO interest rate and the reverse REPO interest rate. The REPO interest rate was brought down from 9 per cent to 5.5 per cent; the reverse REPO interest rate was brought down from 6 per cent to 4 per cent; and the Cash Reserve Ratio (CRR) was reduced from 9 per cent to 5 per cent. The banks are provided adequate liquidity, and the banks have actually started doing it. The banks can adjust interest rates to meet the demand of the economy.

          People say that there is no impact of the stimulus packages, which we have provided. I have myself stated in the Budget speech that : “Yes, it takes some time.” Two stimulus packages have been announced, one in December and another in January. Three months have not yet passed or four months have not yet passed. It takes some time for it to have its impact, but look at the state of health in the steel industry, cement industry, etc. Productions have started picking up, and demand is being generated.

          In my Budget speech, I have myself stated that the enhanced expenditure contained a component of more than Rs. 39,000 crore of Plan expenditure. I have also stated about the elements of the Plan expenditure. Everything directly related to the development of the rural sector, rural infrastructure, agriculture including accelerated irrigation facilities.[r27]  Not only these Rs.39,000 crore. About Rs.24,000 crore would be roughly the Central Plan, and Rs.15,000 would be the assistance to States and Union Territories by the Centre. The State Governments also will have to come forward. Mr. Speaker, Sir, through you I appeal to them. We have also provided adequate leverage to them.

          If we look at the ways and means position of the States today, I have the figures as on 20-2-2009, of 14 days’ Treasury bills the States are having Rs.78,360.28 crore; auctioned Treasury Bills Rs.12,808.88 crore; total cash surplus of all the States taken together is Rs.91,169.16 crore. They are also to spend. Some of them have the mandate for the whole five years. Some of the States’ mandates are coming to an end. All the major development in the rural infrastructure, in the rural development will be undertaken by the States. Even the Centrally-sponsored schemes are being implemented by the States. So, when you look at the States, you shall have to look at it taking into account the entire package and not in piecemeal.

          If you look at some of the high surplus States, Maharashtra has Rs.12,279 crore. Some hon. Members from Maharashtra were asking as to why we are not giving them adequate assistance! Tamil Nadu has RS.12,135 crore; Bihar Rs.6,903 crore; and Orissa Rs.7.705 crore. Of course, there are some States with negative balance like Jammu and Kashmir where the problem is different; and there are some other States for which we shall have to take appropriate steps.

          Mr. Speaker, Sir, as we mentioned, not only the Reserve bank announced its monetary policy, we also took a series of fiscal measures. Mr. Chidambaram when he was the Finance Minister, took a number of tax and other fiscal measures to address these issues. I would not like to burden the Members with too many statistics but I would like to state a few of them here. They are: across the board cut of Cenvat by four percentage points benefiting all sectors; reduction of rate of duty on cotton textiles and textile articles from four per cent to zero; provision of additional funds of Rs.1,100 crore to ensure full reform of terminal excise duty and CST; specific measures on customs duties on sectors such as steel and cement through restoration of levels of protection; service tax concessions and enhancement of drawback rates for exports; interest subvention to help the export sector on pre and post shipment trading for labour-intensive exports for textiles, leather, gems and jewellery, carpets, and handicrafts; extension of a line of credit by Rs.5,000 crore to EXIM Bank from RBI to provide pre-shipment and post-shipment credit in rupees or in dollars to Indian exports for achieving the competitive rate.[KMR28] 

·       Re-finance facilities respectively of Rs.4000 crore for the National Housing Banks for housing sectors.

·       Announcement of a package by public sector banks for borrowers of home loans up to Rs.20 lakh. This sector will be kept under a close watch and additional measures would be taken, as necessary, to promote an accelerated growth trajectory. 

·       Provision of additional allocation of Rs.1400 crore to clear the entire backlog of Technical Upgradation Fund Scheme in the textile sector.

·       Inclusion of all items of handicrafts under Vishesh Krishi and Gramudyog Yojana.

·       To facilitate the flow of credit to medium, small and micro enterprises, which is very important, Reserve Bank of India has announced a refinance facility of Rs.7,000 crore for SIDBI which will be available to support, incremental lending either directly to MSME or indirectly via banks, NBFCs and SFCs.  In addition, certain other steps are being taken.

·       To boost the collateral free lending, the current guarantee cover under the Credit Guarantee Scheme for micro and small enterprises on loans will be extended from Rs.50 lakh to Rs.1 crore with guarantee over 50 per cent.  The lock in period of loans covered under the existing Credit Guarantee Scheme will be reduced from 24 to 18 months to encourage the banks to cover more loans under the guarantee scheme.

·       Public sector banks have announced a reduction of the interest rates on existing as well as new loans to MSME sectors.

·       Special monthly meeting of the State level bankers committee would be held to oversee the resolution of the credit issues of micro, small and medium enterprises by banks, departments of MSME and department of Financial Services will jointly set up a cell to monitor progress on this front.  Matters of MSME remaining unresolved with the Bank’s SME helpline for more than a fortnight may be brought to the notice of this Cell.

Hon. Members are aware, we have already taken legislative measures to provide a measure of security to the unorganised workers.  We have enacted the Unorganised Sector Workers Social Security Bill 2008.  The National Commission of Enterprises in the unorganised sector has been asked to work out a detailed scheme in this regard.

There were certain proposals which the Governors Conference made, particularly in respect of the empowerment of women.  We have considered and we have decided to set up a high-power committee of eminent persons and experts to study the status of women of India to enable the Government to take expeditious action;  To set up a National Mission of Empowerment of Women for implementation of women centric programme in a mission mode to achieve the better coordination and synergy amongst the participating stake-holders; To restructure and revitalise the Rashtriya Mahila Kosh to scale up their activities including that of backward and forward linkages; to function as a single window facilitator and service provider for women self-help groups, the authorised and paid up capital of Rashtriya Mahila Kosh will be enhanced in a phased manner.

Mr. Speaker, Sir, while making his observations my good friend Shri Salim talked about the performance of the public sector and the Central Government’s apathy towards the public sector.[R29] 

          Now let us look at some of the figures to indicate the performance of the central public sector enterprises.  In 2003-04, the total turn over of all the Central public sector enterprises was Rs.5,87,000 crore.  In 2007-08, the total turn over of the Central public sector enterprises has increased by 84 per cent from Rs.5,87,000 crore to Rs.10,81,000 crore.  Let us look at the profitability.  In 2003-04, the profitability of the Central public sector enterprises taken together was Rs.53,000 crore.  In 2007-08, it is Rs.91,000 crore.  There is an increase of 72 per cent.

          As regards the number of loss making Central public sector enterprises, it was 73 in 2003-04 and we have brought it down to 58 in 2007-08. Similarly, the number of the profit making public sector enterprises has increased from 143 to 158.  The number of profit making public sector enterprises is increasing and the number of loss making public sector enterprises is decreasing.  The turn over is increasing, profit is increasing and if somebody comes out and says that you are neglecting the public sector enterprises, I am afraid I cannot … (Interruptions)

SHRI RUPCHAND PAL (HOOGHLY): Sir, Md. Salim did not participate in the discussion.

SHRI PRANAB MUKHERJEE: I have listened to the hon. Members very carefully and patiently and this much courtesy I can expect from my colleagues that when I speak in the House, they would not interrupt me… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Please do not interrupt.  If you have anything to ask, we shall see later on.

SHRI PRANAB MUKHERJEE: More than 100 times you have told that as I cannot expect them to speak what I like, similarly, they cannot expect me to speak what they like.  This is parliamentary democracy.  If I have distorted the facts and if I am incorrect, you have every right to bring a privilege motion against me.  But please do not interrupt me… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Very well. It should be substituted by Shri Rupchand Pal,

SHRI RUPCHAND PAL:  Sir, I have not spoken about it.

MR. SPEAKER:  Then, who has spoken about it?  Probably, he might have spoken earlier.  He thought that it is a common refrain, that is why, he mentioned it.

SHRI PRANAB MUKHERJEE:  They have told that the Government is bringing disinvestment through backdoor.  I am afraid it is totally a baseless contention.  What we have done is that the Government’s policy on disinvestment does not envisage any outright or strategic sale of a Central public sector enterprise.  The focus of the policy is to enable and utilise unlisted and profitable Central public sector enterprises to raise capital through Initial Public Offering (IPO) with the Government offering a minority shareholding for divestiture.  The intent is to ensure that the Government equity remains 51 per cent and the Government retains the management control.  However, so far this year of 2008-09 is concerned because the market condition is down, that is why, we did not allow to have a single IPO.[R30] 

Not only that, the UPA Government is making all possible efforts to turn around the loss making Central PSUs, like the Indian Telephone Industries through the infusion of funds and superior technologies which we have entrusted in some of the projects in Railways and in some of the projects and units in IITs and that will be the general policy which we have pursued during the last five years and which we will continue to do in future if we are brought back to power with a massive mandate of the people.

          Mr. Speaker, Sir, as I mentioned, the scope is extremely limited. With due respect to the desires of some of the hon. Members I think we should not violate the cardinal principal that every constitutional body should operate – whether it is the Executive accountable to the Parliament, whether it is Parliament or whether it is the Judiciary – within the constitutional jurisdiction in the overall constitutional scheme of things through which we are living since 1950. Therefore, it was not possible for me to indulge in financial profligacy by making too many announcements, by giving too many concessions and by taking too many decisions without the backing of adequate financial resources. But keeping in view, whatever we could do, within the constraints and within the constitutional framework after listening to the suggestions of the hon. Members and having reactions from the various stakeholders, I have tried to make certain changes to provide further stimulus to the economy. Even though the signals are encouraging, the full impact of recession in other parts of the world, particularly Asia and Europe, is yet to unfold. Due to strong export linkages with these economies it is likely that the Indian economy may feel further impact in the coming months. To counter any such effects, the UPA Government has taken certain steps and I would like to place these before this House.

          Sir, on Central Excise, the general reduction in Excise Duty rates by 4 per cent point was made with effect from 07.12.2008 and it is now being extended beyond 31st March, 2009. In addition, it has now been decided to reduce the general rate of Central Excise Duty from 10 per cent to 8 per cent; retain the rate of Central Excise Duty on goods currently attracting ad valorem rates of 8 per cent and 4 per cent respectively; reduce the rates of Central Excise Duty on bulk cement from 10 per cent or Rs. 290 per metric tonnes whichever is higher, to 8 per cent or Rs. 230 per metric tonnes whichever is higher. The Government is keen that the business confidence in the service sector is restored. It is also our objective that the dispersal between CENVAT rate and the service tax rates is reduced with a view to moving towards the stated goal of a uniform goods and service tax. In line with these objectives it has been decided to reduce the rates of service tax  on taxable service from 12 per cent to 10 per cent. [R31] 

To provide relief to the power sector, naptha imported for generation of electric energy has been fully exempted from basic customs duty.  This exemption which was available upto 31st March, 2009 is now being extended beyond that date.   Section 10AA of the Income Tax provides for exemption in respect of the export profit of a unit located in the Special Economic Zone  The export profits are required to be computed with reference to the total turnover of the SSEs.  These have resulted in discriminatory  treatment of SSEs having units located  both in SEZ and the domestic tariff area vis-a-viz SSEs having units located only within the SEZ.  It has now been decided to remove this anomaly through necessary changes in the Act when the regular budget is being presented. 

Hon. Members may recall that in my budget speech, I have indicated that we have a review of the ceiling of fiscal deficit that the States can incur in 2009-10 in terms of the debt consolidation  and relief facility. As a part of the first stimulus package, it was increased by 0.5 per cent to 3.5 per cent of the Gross State Domestic Product for 2008-09.  To start the development of infrastructure and employment generation, this arrangement is being extended to 2009-10 with the possibility of further review if required in the coming months despite the fact as I stated earlier, that the States together are left free right now with about Rs. 91 crores of surplus.

Sir, our policies are clear.  Rapid development of infrastructure both in rural and urban areas and agriculture growth leading to employment generation and distributive justice tops the list.  For us, economic growth is an instrument for development and not an end in itself.  Economic growth has to be both inclusive and equitable.  It must provide social justice and lead to empowerment of aam aadmi.  In the last five years, the UPA Government has moved steadfastly  in that direction  but a social revolution which must flow from these methods is a long process and has to be worked out carefully and systematically not only through economic growth and mobilisation of resources but also through institutional changes and mobilisation of the masses.  It is my earnest feeling that we will all walk together in the journey to achieve this shared vision.  With these words, I conclude.   

I thank you, Mr. Speaker, for giving me an opportunity.

SHRI HARIN PATHAK (AHMEDABAD):   Sir, what about relief to diamond workers? … (Interruptions)

SHRI PRANAB MUKHERJEE: In respect of diamonds, benefits which are given are extended to the entire export sector including diamond sector.

प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर):  माननीय अध्यक्ष महोदय, जिस दिन आज के वित्त मंत्री माननीय प्रणव मुखर्जी ने अपना अंतरिम बजट प्रस्तुत किया था, उस दिन आईआईएम के बारे में चर्चा करते हुए आपने  यह उल्लेख किया था कि ग्यारहवीं योजनावधि के लिए प्रस्तावित [MSOffice32] छः नये भारतीय प्रबंध संस्थानों में से चार में शैक्षिक वर्ष 2009-10 से शिक्षिण कार्य शुरू होने की संभावना है।

          यह हरियाणा, राजस्थान, झारखंड और तमिलनाडू की स्थिति है, यह आपने फरमाया था। मुझे खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि शुक्रवार दिनांक 20 फरवरी, 2009 को केन्द्रीय विश्वविद्याय विधेयक की चर्चा का उत्तर देते समय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री श्रीमती डी. पुरन्देश्वरी ने इस सदन के अंदर एक वक्तव्य देते हुए कहा था,  I would like to quote.  The hon. Minister of State for Human Resource Development said:

 “An IIT is already functioning at Rajasthan during the 11th Five Year Plan, through its temporary campus and it is being mentored by IIT, Kanpur.  But due to an inadvertent typographical error which had crept in the inputs provided by our Ministry for the Budget Speech of the hon. Finance Minister while listing the names of the States where the new IIMs are to start from the academic year, 2009-10, the State of Rajasthan has been mentioned instead of Chhattisgarh.  So, I humbly submit to the House that this may kindly be taken on record.  We sincerely apologise for this typographical error from the Ministry of Human Resource Development.”

 

सारे राजस्थान में इससे बहुत असंतोष व्याप्त हो गया है। यहां भी आपकी सरकार है और वहां भी आपकी सरकार है। राजस्थान में आईआईएम खोले जाने की जो घोषणा आपने की थी, क्या राजस्थान में वह खोला जाएगा या नहीं, उसमें क्या सच्चाई और वास्तविकता है, यह बताने का कष्ट करें?

SHRI RUPCHAND PAL : We have great respect for Shri Pranab Mukherjee’s memory.  He has responded to the issues raised by my colleague, Shri Md. Salim, that he raised when he was speaking on the Motion of Thanks on the President’s Address.  … (Interruptions)

MR. SPEAKER: During the Budget speech, it has not been washed away.

… (Interruptions)

SHRI RUPCHAND PAL : There is scope for reduction in the prices of petroleum products.  They have given ten times relief to the ATF.  But the common people are not being given relief.  We had expected that the Government will come out with some steps for the relief of the common man, the Aam Admi.  What is the response to that? … (Interruptions)

MR. SPEAKER: But there is no reduction in the passengers.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Every hon. Member has one question.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Not a single word will be recorded.

(Interruptions) …*

MR. SPEAKER: Mr. Minister, would you like to respond to that issue of typographical mistake?

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Hon. Members, I am waiting for the hon. Minister to respond.

… (Interruptions)

* Not recorded.

 

 

 

MR. SPEAKER: He has said all that he has to say.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: As it was mentioned in your Budget speech, he is referring to it.  What is the correct position?  The hon. Minister of State of Human Resource Development has said that. 

… (Interruptions)

SHRI PRANAB MUKHERJEE: As far as the issue raised by the hon. Member, Shri Rasa Singh Rawat, is concerned, apparently there appears to be a defect in what I stated in my Budget speech.  Certainly, I shall have to verify the facts and we will correct. Naturally, the procedure is there to follow if there is any incorrect information given in reply to the Questions of Parliament.  The Minister always has the liberty, with the indulgence of the House and with the permission of the Chair, to correct that and it will be done.  … (Interruptions)

          With regard to certain other issues that have been raised by the hon. Members, what I would like to say is that I am not ruling out the possibility. Insofar as the Government’s functioning is concerned, it is a continuing one.  It will continue to do so. Nothing prevents the Government from taking appropriate steps which will be called for during this period to respond to the emerging situation.  It is not necessary to reflect everything in the Budget document.  Budget is one instrument through which we are addressing certain issues.  But there are other instrumentalities that are available at the command of the Government for addressing the issues, including the exports.  When they got the concessions, it was not through any financial proposal.[MSOffice33] 

15.00 hrs.

          The Finance Minister has the leverage.  Take for instance, the concessions which I have announced. For that I am not making any amendment because it is within the powers, which the Parliament was kind enough to vest in the Finance Minister. So, on some of the general issues, I am trying to point out that we will address the issue as and when the situation arise and we will respond to it. 

          Sir, in respect of the ITI, yesterday the Cabinet took the decision. They have agreed to provide the support and liquidate the liabilities so that the appropriate mechanism for rehabilitation can be done.  I am told that it is possible to rehabilitate it immediately and some proposals are coming.  Therefore, there are no two opinions on it.  … (Interruptions) It is coming and please do not worry about it. The Cabinet decision is – which was communicated by my colleague, Shri P. Chidambaram through media – that the Government has decided to discharge the total liabilities of more than Rs. 2,820 crore and a decision has already been taken in this regard.   … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Nothing will be recorded except what the hon. Minister of Finance says.

(Interruptions) … *

SHRI PRANAB MUKHERJEE: Sir, though this is not related to the budgetary proposals, yet the hon. Members are agitating on certain issues relating particularly to the situation in Sri Lanka.  There has been some development.  Yesterday, through certain international agencies, a proposal has come from the LTTE to facilitate the evacuation of the civilians.   On earlier occasions, I made a statement on the floor of the House and I also reported after my visit to Sri Lanka on 27th of last month, that we are constantly monitoring the situation. The Ministry of External Affairs has expressed its intention and requested the Sri Lankan Government to facilitate the process of evacuation of the civilians in the context of the announcement made by LTTE so that the civilians could be brought to the safe zone, both through the sea route and through the land route; and also with the presence of the international observers so that they can oversee the movement and there should be no firing in the safe zone.  The sanctity of the safe zone should be ensured.  This we have done and the Ministry of External Affairs has issued the relevant statement.         Thank you.

… (Interruptions)

* Not recorded.

15.04 hrs.

 

(At this stage, Shri Rupchand Pal, Mohan Rawale, Shri Anant Kumar

 and some other hon. Members left the House.)

 

… (Interruptions)

 

MR. SPEAKER: I shall not put the Demands for Grants on Account (General) for 2009-10 to the vote of the House.

          The question is:

“That the respective sums not exceeding the amounts on Revenue Account and Capital Account shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India out of the Consolidated Fund of India, on account, for or towards defraying the charges during the year ending the 31st day of March, 2010, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 1 to 33, 35, 36, 38 to 62, 64 to 74, 76, 77 and 79 to 105.”

 

The motion was adopted.[a34] 

 

 

 

 

 

 

MR. SPEAKER:  I shall now put the Supplementary Demands for Grants (General) for 2008-09 to the vote of the House.

          The question is:

“That the respective supplementary sums not exceeding the amounts on Revenue Account and Capital Account shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India out of the Consolidated Fund of India to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 2009, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 1 to 3, 6, 8, 10 to 19, 21, 23 to 25, 27 to 33, 35, 38 to 43, 46 to 51, 53 to 55, 57 to 62, 64, 65, 67 to 69, 71, 72, 74, 77, 79, 80, 83 to 88, 90 to 101 and 103 to 105.”

 

The motion was adopted.

 MR. SPEAKER: The Supplementary Demands  for Grants (General) for the year 2008-09 are passed.

 


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

* Copy This Password *

* Type Or Paste Password Here *

6 queries in 0.420 seconds.