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Lok Sabha Debates
Discussion On The Interim Budget (Railways) 2009-10; Demands For … on 18 February, 2009


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Title: Discussion on the Interim Budget (Railways) 2009-10; Demands for Grants on Account (Railways) 2008-09;  Supplementary Demands for Grants (Railways) 2008-09; Demands for Excess Grants (Railways) 2006-07.

 

MR. CHAIRMAN : The House will now take up General Discussion on Interim Railway Budget for the year 2009-2010, discussion and voting on Demands for Grants on Account (Railways) for the year 2009-2010, discussion and voting on Supplementary Demands for Grants (Railways) for the year 2008-2009 and discussion and voting on Demands for Excess Grants (Railways) for the year 2006-2007.

Hon. Members present in the House whose cut motions have been circulated may, if they desire to move their cut motions, send slips to the Table within 15 minutes indicating the serial numbers of the cut motions they would like to move. Only those cut motions will be treated as moved.

A list showing the serial numbers of cut motions treated as moved will be put up on the Notice Board shortly thereafter. In case any Member finds any discrepancy in the list, he may kindly bring it to the notice of the Officer at the Table immediately.[R35] 

          Motion  moved:

“That the respective sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India out of the Consolidated Fund of India, on account, for or towards defraying the charges during the year ending the 31st day of March, 2010 in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 1 to 16.”

 

 

 

* Moved with the recommendation of President.

 

 

MR. CHAIRMAN : Motion moved.

 

“That the respective supplementary sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India out of the Consolidated Fund of India to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 2009, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 1, 3 to 13, 15 and 16.”

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

MR. CHAIRMAN : Motion moved :

 

“That the respective excess sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India, out of the Consolidated Fund of India, to make good the excess on the respective grants during the year ended on the 31st day of March, 2007, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 1, 10, 15 and 16.”

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

MR. CHAIRMAN :Those who want to lay their written speeches, they can do so. Those will be treated as part of the proceedings.

… (Interruptions)

SHRI E. PONNUSWAMY (CHIDAMBARAM): Sir, yesterday also there was no `Zero Hour’ and I did not get any chance. Today also I gave notice on an important issue… (Interruptions) Only leaders of parties are getting an opportunity to speak during the `Zero Hour’… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : Nothing is going on record.

(Interruptions) …*

MR. CHAIRMAN: It was fixed by the hon. Speaker that the discussion on the Railway Budget would be taken up at 5 p.m.

… (Interruptions)

SHRI K. FRANCIS GEORGE (IDUKKI): Sir, what is the harm in extending the time by another five minutes… (Interruptions)

SHRI E. PONNUSWAMY : Sir, what is the solution?… (Interruptions)

SHRI K. FRANCIS GEORGE : This is very unfortunate.

MR. CHAIRMAN: Nothing is going on record.

(Interruptions) …*

 SHRI E. PONNUSWAMY : Only the leaders are getting a chance to speak. You are being partial on giving chance to speak… (Interruptions)

 

SHRI K. FRANCIS GEORGE : We also are Members of the House. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: We have taken up the next item on the agenda. Now, your issue cannot be taken up. It is against the rules.

… (Interruptions)

* Not recorded.

 

 

SHRI K. FRANCIS GEORGE : What do you mean by rules?… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: We have already started the discussion on Railway Budget.

… (Interruptions)

SHRI E. PONNUSWAMY : Sir, this is the right of the Members… (Interruptions)

।थ्र्01

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन (भागलपुर):  सभापति महोदय, मैं रेल मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं क्योंकि वे देश के इतिहास के पहले ऐसे रेल मंत्री हैं, जिन्होंने छः बार रेल बजट पेश किया है। जिस समय बजट पेश किया गया था तो वह अनुपूरक मांगों का था। लेकिन जब उन्होंने बजट पेश किया तो ऐसा कहीं नहीं लगा कि वह चार महीने के लिए है, ऐसा लगा कि उन्होंने पूरे साल का बजट पेश किया है। उनकी घोषणाओं से लोगों को उम्मीद जगी थी कि प्रणब दा जब बजट पेश करेंगे तो लालू जी की ही तरह कोई अच्छी घोषणा करेंगे। लेकिन दोनों बजट को देखकर ऐसा कहीं नहीं लगा।

सभापति महोदय : मैं बताना चाहता हूं हम आइटम नंबर 33 से लेकर 36 तक को शामिल कर रहे हैं।

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : ठीक है, सर। लेकिन मुझे इस बात का दुख है कि जिस दिन उन्होंने बजट पेश किया दुर्भाग्य से उसी दिन दो रेल दुर्घटनाएं हुईं। सुबह जहां बजट पेश करने की खुशी थी, शाम को वही तनाव में थे। जब रेल दुर्घटना होती है तो सबसे ज्यादा तनाव रेल मंत्री जी को ही होता है। मैं अपनी चर्चा की शुरूआत इसी बात से करना चाहता हूं। मैं भागलपुर से सांसद चुनकर आया हूं।[r36]  लालू जी ने मेरे लिए बहुत किया है, लेकिन वह चुनावी वर्ष में मेरा नाम लेकर मुझे क्रेडिट नहीं देंगे। हमारे संबंध इतने खराब भी नहीं हैं, लेकिन अगर चुनावी वर्ष न होता तो वे मेरी तरफ देखते और कहते कि शाहनवाज़ तुमने जो चिट्ठी लिखी थी, मुझे मिल कर कहा था, वह काम हमने कर दिया है। मैंने जो 26 दिसम्बर को चिट्ठी लिखी थी, उसे भी साथ में लाया हूं। मैं उम्र में कम हूं, लेकिन मेरा अनुभव ज्यादा है। मैं देश का सिविल एविएशन और नागरिक उड्डयन मिनिस्टर रहा हूं।…( व्यवधान)

रेल मंत्री (श्री लालू प्रसाद)  :  आपका सब कुछ ठीक है, लेकिन संगत ठीक नहीं है।

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : उस नाते मैंने इसलिए बताया, मैं अपनी कोई बढ़ाई करने के लिए नहीं खड़ा हुआ हूं। रेल मंत्री जी को मालूम होगा कि कमिश्नर रेलवे सेफ्टी सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के अंडर काम करती है। मैं जब सिविल एविएशन मिनिस्टर था तो रेलवे की सुरक्षा का जवाब पार्लियामेंट के फ्लोर पर मुझे देना पड़ता था, इसलिए मुझे कुछ जानकारी है। वैसे पूरे कार्यकाल का यह आखिरी सत्र है। चंद दिन बीते हैं, कल भी मैंने देखा कि विपक्ष के नेता और सत्ता पक्ष के नेता की बातचीत में कड़वाहट नहीं थी। मैं भी अपने स्वभाव के अनुसार कभी अपनी बातचीत में कड़वाहट नहीं डालता हूं, लेकिन लोकतंत्र में, पार्लियामेंट में अपनी बात रखने का एक अधिकार है, जिस अधिकार का मैं सदुपयोग जरूर करूंगा।

          सभापति महोदय, बिहार में उर्दू सैकिंड लैंग्वेज़ है। जब लालू जी का भाषण हो रहा था, पिछली बार शेयरो-शायरी उर्दू में थी, लेकिन इस बार उन्होंने अच्छी कविताएं पढ़ीं। मैं भी अपनी शुरुआत एक इशारे के साथ करना चाहता हूं कि लालू जी ने जो बातें कहीं, उसमें मुनाफे की बात कही। उन्होंने कहा कि बहुत प्रोफिट कमाया, लेकिन जम्हूरियत में मुनाफे के लिए ये यहां नहीं आए। जब कोई सरकार बनती है तो वह कार्पोरेट सैक्टर की सरकार नहीं है, कार्पोरेट का सीएमडी कहे कि बैलेंसशीट इतना बढ़ गया, लेकिन जो मंत्री होते हैं, उन्हें यह कहना होता है कि हमने सुविधाएं इतनी बढ़ा दीं। इसलिए एक शायर ने कहा कि – “जम्हूरियत एक तर्जे हुकूमत है, कि जिसमें बंदों को गिना करते हैं, तोला नहीं करते।” जो बंदें हैं, उन्हें हमने क्या फेसिलिटी दी। जब लालू जी रेल मंत्री के तौर पर यहां पहला भाषण कर रहे थे, तब मैं इस सदन का सदस्य नहीं था। सभापति जी, आपके आशीर्वाद से मैं इलैक्शन में भागलपुर से चुन कर आया और मैंने रेल मंत्री जी का जो पहला बजट था, इनकी पुरानी जो स्पीच थी, उसे हमने टीवी पर सुना था। वैसे भी हमारी पार्टी के लोगों ने उस वक्त रेल मंत्री जी का भाषण नहीं सुना था, लेकिन हमने इनका भाषण टीवी पर सुना था। दल की राजनीति अलग भी हो, लेकिन जब कोई राज्य का व्यक्ति किसी सरकार में होता है, वे कुछ बोलते हैं, वे महत्वपूर्ण पद पर हैं तो राजनीति के कार्यकर्ता के नाते हम लोग उनकी बात को ध्यान से सुनते हैं।

          सभापति महोदय, रेल मंत्री जी ने जब पहला भाषण किया था, आज आखिरी बार इस पर चर्चा हो रही है। मैं मानता हूं कि राजनीति में जीवन में कौन कहां क्या करेगा, यह जनता तय करती है। लेकिन हमें याद है कि रेल मंत्री जी के भाषण में कुल्हड़ की बड़ी चर्चा हुई थी और अब कुल्हड़ से हम लोग आखिरी भाषण में बुलेट ट्रेन पर पहुंच गए। सन् 2004-05 में रेल बजट में कुल्हड़ की, छाछ की, खादी और शायद रेल मंत्री जी को याद आ जाए कि यह भी चर्चा हुई थी कि बिहार से सब्जी चलेगी और सीधे दिल्ली उतरेगी। हमारे यहां छपरा में भी अच्छी सब्जी होती है और भागलपुर की जमीन ज्यादा फर्टाइल है।[S37] 

वहां पर सब्जी बहुत अच्छी होती है, तो हम लोगों ने उम्मीद की थी और वहां के लोगों भी लगा था कि शायद हमें ताजी सब्जी मिलेगी और किसानों को भी लगा कि हमारी सब्जी के जो रेट हमें नहीं मिलते थे, अब मिलेंगे, लेकिन पांच साल हो गए, अभी तक इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है। हमें लगता है कि जब हमारी सरकार आएगी, तो लालू प्रसाद जी की घोषणा को हमारी सरकार को पूरा करना पड़ेगा।

          महोदय, जब इन्होंने तीसरा बजट दिया, तो गुजरात और राजस्थान के बीच में एक रूट को आगे बढ़ाने की बात कही थी। चौथे बजट में डीजल रूट पर तिमंजिला और विद्युत मार्ग पर दो मंजिला कंटेनर चलाने की योजना बनाई गई थी। वह योजना परवान चढ़ना अभी बाकी है। शहरों में रहने वाले लोगों को जो सब्जियां रेलवे उपलब्ध कराने वाली थी, वह वायदा भी अभी बाकी है।

          महोदय, हाल ही में 36 हजार कोचों में डिस्चार्ज फ्री ग्रीन टॉयलेट उपलब्ध कराने की घोषणा भी की गई है। यह घोषणा भी पिछले साल के बजट में की गई थी। जाते-जाते अब रेल मंत्री जी, हमें बुलेट ट्रेन का ख्वाब दिखाकर जा रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि …( व्यवधान)

श्री सुरेन्द्र प्रकाश गोयल (हापुड़): हम तो इन्हें प्रधान मंत्री बनाना चाहते हैं।

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : क्या लालू प्रसाद जी को आप फिर रेल मंत्री बनाने वाले हैं? अच्छा गोयल साहब बोल रहे हैं। यदि आप श्री लालू प्रसाद को प्रधान मंत्री बनाना चाहते हैं, तो डॉ. मनमोहन सिंह जी का क्या होगा? आप जो बोल रहे हैं, आप पर कार्रवाई हो जाएगी। 

सभापति महोदय : प्लीज आप चुप रहिए। बीच में मत टोकिए। उन्हें बोलने दीजिए।

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : सभापति जी, रेल मंत्री जी का भाषण यहां हो रहा था, तो पूरा देश इसे बहुत ध्यान से सुन रहा था। रेल मंत्री जी ने इसमें बहुत सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही है। अब जब सुविधा की बात कही है, तो मैं इनका ध्यान आपके माध्यम से आकर्षित करना चाहता हूं कि इन्होंने कहा कि मालभाड़े में कमी की गई है। मैं बताना चाहता हूं कि मालभाड़े में कभी कमी नहीं की गई, बल्कि बजट से पहले ही, इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि क्लासीफिकेशन चेंज करते हुए, मालभाड़े में 1.3 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी कर दी गई। रेलवे फ्रेट कोरीडोर की योजना कई वर्षों से चल रही थी, लेकिन मात्र शिलान्यास के अलावा कुछ नहीं हुआ। मैं आज कह रहा हूं कि रेलवे के पास इतना पैसा है कि माननीय मंत्री जी उसका शिलान्यास से आगे का काम कर सकते थे। जहां तक फ्रेट का सवाल है, जिस पर बहुत चर्चा हो रही है कि फ्रेट यानी किराए वृद्धि नहीं की है, लेकिन सच्चाई यह है कि ढुलाई के रेट का जो क्लासीफिकेशन है, उसमें भी खासकर भोजन सामग्री पर दिनांक 01-04-2004 में 1000 किलोमीटर पर किराए का जो रेट था वह 100 था, जिसे लालू जी ने 1 अप्रेल, 2008 को क्लास को बढ़ाकर 120 कर दिया। इसकी वजह से दिनांक 1-4-2004 में एक बोरे पर, यानी 1000 किलोमीटर पर प्रति टन 578 रुपए प्रति बोरे था, वह बढ़कर दिनांक 1 अप्रेल, 2008 में 810 रुपए कर दिया गया।

          महोदय, इस समय मेरे पास जो आंकड़े हैं, वे बहुत ऑथेंटिक हैं। चूंकि शब्दों में हेर-फेर न हो जाए, इसलिए मैं इसे बहुत ध्यान पूर्वक पढ़ रहा हूं। मालगाड़ियों की जो कैरिंग कैपेसिटी है, बिना ट्रैक की क्षमता बढ़ाए आमदनी बढ़ाई जा रही है। रेलवे में बिजी सीजन सरचार्ज अलग से 7 प्रतिशत लगा दिया गया है। डैवलपमेंट सरचार्ज के रूप में 2 प्रतिशत किराए में भी शामिल किए गए। कुल मिलाकर 9 प्रतिशत सरचार्ज के रूप में अतिरिक्त ढुलाई किराए में अप्रत्यक्ष रूप से वृद्धि की गई है। एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल हेतु जब सामान चढ़ाते हैं, तो उस पर टर्मिनल चार्ज, सरचार्ज के रूप में 10 रुपए दिए जाते थे। इसी राशि को बढ़ाकर 20 रुपए प्रति टन कर दिया गया और यही नहीं जिस टर्मिनल से माल चढ़ाया जाएगा, उससे भी यह धनराशि ली जाएगी और जहां उतारा जाएगा, वहां भी यह धनराशि ली जाएगी, यानी प्रत्येक टन पर 20-20 रुपए माल चढ़ाने और उतारने के लिए चुकाने पड़ेंगे। इस तरह अगर मान लें कि 25 हजार टन की एक मालगाड़ी है, तो उसमें 50 हजार रुपए अतिरिक्त चढ़ाने के और 50 हजार उतारने के, यानी 1 लाख रुपए प्रति गाड़ी मालभाड़ा बढ़ गया। [r38]   कहने का मतलब यह है कि आज जो महंगाई बढ़ रही है, इससे खान-पान की चीजों पर संसद चलते हुए आपने जो इस पर टैक्स लगाता, वैसे तो यहां पर कहा कि हमने कुछ नहीं बढ़ाना, लेकिन संसद चलने से पहले आपने इस टैक्स को बढ़ाने का काम किया है। मालगाड़ी की जो कैरिंग कैपेसिटी है, बिना ट्रैक क्षमता बढ़ाये हुए उसमें आमदनी हो रही है, लेकिन सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

          सभापति जी, आपको मालूम होगा कि इस देश में बहुत रेल दुर्घटनाएं होती थीं। लाल बहादुर शास्त्री जी जब रेल मंत्री थे तो रेल दुर्घटना हुई थी तो उन्होंने त्याग-पत्र दिया था। नीतीश कुमार जी भी जब रेल मंत्री थे तो गायसल में दुर्घटना हुई थी तो उन्होंने त्याग-पत्र दिया था, क्योंकि जो दुर्घटना होती है, उससे रेल मंत्री पर बहुत दबाव पड़ता है। आपको याद होगा कि रेल के अन्दर जब एन.डी.ए. की सरकार थी तो पहली बार रेल के ट्रैक को…( व्यवधान)

जल संसाधन मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री जयप्रकाश नारायण यादव): आप गोधरा पर भी बोलिये।

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : गोधरा? हम बहुत बढ़िया बोल रहे हैं, ज्यादा टोकिएगा तो हम बहुत बढ़िया तरीके से बोलेंगे। आप मंत्री हैं, चुपचाप बैठ जाइये।…( व्यवधान)

श्री जयप्रकाश नारायण यादव: नीतीश कुमार जी वहां गये थे या नहीं?

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : हम बढ़िया तरीके से बोल रहे हैं, आप माहौल खराब मत कीजिए। आपकी बीच में बोलने की आदत है। यह रेल मंत्री का भाषण है और जवाब मैं दे रहा हूं, आप कौन हैं? आप राज्य मंत्री हैं। …( व्यवधान)

श्री जयप्रकाश नारायण यादव: हम आपको याद दिला रहे हैं।…( व्यवधान)

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : आपको जो खाद विभाग मिला है, उसको तो आप चला नहीं पा रहे हैं और बीच-बीच में बोल रहे हैं। लालू जी को जयप्रकाश जी की मदद की जरूरत नहीं है, लेकिन जबरदस्ती मदद कर रहे हैं। आप बैठ जाइये।…( व्यवधान)

श्री जयप्रकाश नारायण यादव: सदन में सब को बोलने का अधिकार है।…( व्यवधान)

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : नहीं, आपको अधिकार नहीं है। आप मंत्री हैं, आपको बीच में टोकने का अधिकार नहीं है। आप नये-नये मंत्री बने हैं, पढ़कर आइये, आपको पता नहीं है। यह आपके विभाग का मामला नहीं है। आप बीच में बिना बात के बोल रहे हैं।…( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद : जयप्रकाश जी आपकी हैल्प कर रहे हैं। जो ट्रेन में आग लगी तो वहां नीतीश जी नहीं गये थे? आपको वह बता रहे हैं, आपकी हैल्प कर रहे हैं।…( व्यवधान)

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : रेल मंत्री जी, बड़े अच्छे माहौल में चर्चा चल रही है और थोड़ा टोकने के बाद मेरा भी उत्साह बढ़ जाता है। पहले तो मैं सीधे ट्रैक पर जा रहा था और लालू जी के लिए मैंने कोई ऐसा बात नहीं की, लेकिन जयप्रकाश जी मुंगेर में मेरे पड़ोसी हैं, पता नहीं अगली बार पड़ोसी वहां से चुनाव लड़ेंगे कि नहीं। वहां चर्चा दूसरी है, लेकिन ये बीच में आकर कूद गये। पड़ोसी का धर्म भी नहीं निभा रहे हैं, इनको क्या बतायें।…( व्यवधान)

श्री जयप्रकाश नारायण यादव: मैं अपने धर्म का निर्वाह कर रहा हूं, आप बोलिये।…( व्यवधान)

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : मैंने आपसे यहां पर कहा कि आज रेलवे को सुरक्षा के ऊपर बहुत ध्यान देने की जरूरत है और रेलवे ट्रैक की सुरक्षा, सेफ्टी पर जब एन.डी.ए. की सरकार थी तो पहली बार 17 हजार करोड़ रुपये का इन्तजाम वाजपेयी जी की सरकार ने किया था, तब नीतीश कुमार जी रेल मंत्री थे। लेकिन आज इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। आज तो रेलवे सॉफ्ट टार्गेट हो गई है। दुनिया के जितने भी आतंकवाद फैलाने वाले लोग हैं, उनके लिए अगर सॉफ्ट टार्गेट है तो वे सीधे स्टेशन पहुंच जाते हैं और आप जानते हैं कि मुम्बई में ताज पर अटैक की बहुत चर्चा हो रही है, लेकिन जितने लोग ताज के अन्दर नहीं मारे गये, उससे ज्यादा लोग रेलवे स्टेशन पर मारे गये और वहां पर जो सी.सी.टी.वी. कैमरा था और वहां पर जो रेलवे के सुरक्षाकर्मी थे, उनको मैं शाबासी देता हूं कि उन्होंने अच्छा काम किया, लेकिन इसको और चाक-चौबन्द करने की जरूरत है। इस नाते विपक्ष के नाते हमारा काम इनको याद दिलाना है, क्योंकि जब हम सत्ता में रहे और सत्ता में रहते हुए विपक्ष की बात को ध्यान से सुनना चाहिए और लालू जी बहुत ध्यान से इस बात को सुन रहे हैं, लेकिन पीछे से कुछ लोग अपनी बातें बीच में डाल रहे हैं, नहीं तो यह बहस अभी बहुत अच्छी चल रही है।

          यू.पी.ए. की सरकार ने अभी तक तमाम रेलवे स्टेशनों पर जो सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाने चाहिए, स्मार्ट वीडियो कैमरे लगाने चाहिए, जहां तक तमाम रेलवे स्टेशनों पर मैटल डिटैक्टर लगाने चाहिए, वह काम अभी तक नहीं किया। यहां तक कि जो रेलवे प्रोटैक्शन फोर्स है, उसमें भी अभी एक हजार पद रिक्त पड़े हैं। मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि आज कहीं पर रेल में क्राइम होता है तो जी.आर.पी. और आर.पी.एफ. का बहुत झगड़ा होता है। हर बार लोग कहते हैं कि जी.आर.पी. जिम्मेदार है, यह आर.पी.एफ. जिम्मेदार है। हम उम्मीद करते थे कि रेलवे के लिए प्रोटैक्शन फोर्स को पूरे अधिकार देकर उस पर काम करना चाहिए। [R39]  इसमें किसी की जिम्मेदारी फिक्स होनी चाहिए। रेलमंत्री जी ने अपने भाषण में कहा था कि इसको हम ध्यान में रखने वाले हैं।  मुझे अच्छी तरह याद है कि इस पर जो काम हुआ, रेल मंत्री जी, नागरिक उड्डयन मंत्री के प्रोग्राम में कश्मीर गए थे। मेरा सौभाग्य है कि जिस एयरपोर्ट का ये उद्घाटन करने गए थे, माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के हाथों से मैंने उस एयरपोर्ट का शिलान्यास किया था।  इस काम को आगे बढ़ाया।  एक तरफ हमारा पत्थर लगा हुआ है कि हमने उसका शिलान्यास कराया और दूसरी तरफ रेलमंत्री जी, नागरिक उड्डयन मंत्री जी के साथ उसका उद्घाटन करने गए थे।  रेलवे, सिविल एविएशन और सर्फेस ट्रंसपोर्ट में जो काम अभी शुरू करते हैं, उसका नतीजा तुंत नहीं आता है।  उसमें चार से पांच साल तक लग जाते हैं।  जब आप कश्मीर उद्घाटन करने के लिए गए, उस वक्त आपने यूपीए चेयरपर्सन का नाम लिया, लेकिन जिसने उसकी शुरूआत की थी, माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी, नीतीश कुमार जी उनका कहीं नाम नहीं लिया गया। वह काम हम लोगों ने शुरू किया था। 

          महोदय, हम आपसे कहना चाहते हैं कि दो गाड़ियों में जो टक्कर होती थी, उसके लिए एक सिस्टम बना है, जिसमें टक्कररोधी यंत्र लगता है।  मुझे अच्छी तरह याद है जब नीतिश कुमार जी रेलमंत्री थे, तो उन्होंने किशनगंज में टक्कररोधी उस वक्त लगाया था।  जब नीतीश कुमार जी जब टक्कररोधी यंत्र लगाने किशनगंज गए थे, तो उस वक्त मैं वहां के सांसद के तौर पर और माननीय तसलीम साहब वहां के विधायक के तौर पर उस कार्यक्रम मौजूद थे।  …( व्यवधान) विधायक भी थे।

कृषि मंत्रलाय में राज्य मंत्री तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री तस्लीमुद्दीन):  आपकी याददाश्त भाजपा में रहते-रहते कमजोर हो गयी है, अपनी याददाश्त मजबूत करिए।  …( व्यवधान)

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : मैंने यह कहा कि ये वहां के विधायक थे।  लालू यादव जी रेल मंत्री हैं, लेकिन छपरा के सांसद भी हैं। इनको छपरा का सांसद कह दीजिए तो ये गुस्सा जाएंगे, ऐसा तो नहीं है।  लेकिन आप विधायक और मंत्री थे, यह कहना है, तो याददाश्त कमजोर नहीं है। मैंने ह्यूमर में आपका नाम लिया, नहीं तो मैं आपका नाम भी नहीं लेता।  लेकिन मैंने ससम्मान नाम लिया। मैंने सम्मान के साथ आपका नाम लिया और आप उठे।  आपसे तो यही उम्मीद है कि उठेंगे, तो अच्छा बोलेंगे नहीं। आपके मुंह से अच्छी बात निकल नहीं सकती।  …( व्यवधान)

श्री तस्लीमुद्दीन: मेरा नाम लेने से उत्थान हो गया, नहीं तो जहन्नुम में जाएंगे।  …( व्यवधान)

सभापति महोदय : शाहनवाज जी आप आगे बढ़िए।

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : टक्कररोधी यंत्र वहां लगा, तो आज रेलवे एक्सीडेंट नहीं हो रहा है, आज गैसेल जैसी घटना नहीं हो रही, वह इसलिए नहीं हो रही है कि नीतीश कुमार जी ने अच्छा काम किया था।  उस काम का नतीजा उनको नहीं मिला, क्योंकि वह रेल मंत्री नहीं हैं।  उसका फायदा सबसे ज्यादा माननीय रेल मंत्री लालू प्रसाद जी को मिला। काम उन्होंने किया, फीता आप काटिए, नारियल आप फोड़िए, क्योंकि जो काम उन्होंने किया है, उस काम का क्रेडिट आप ले रहे हैं…( व्यवधान) और जो काम अभी आप करेंगे, उस काम का क्रेडिट जब हमारी सरकारी आएगी, उसे मिलेगा।  इसलिए जो काम आप शुरू करेंगे, उसका क्रेडिट आगे आने वाले को मिलता है।

          महोदय अब मैं रेलवे के किराये पर आता हूं।  रेलवे को लेकर बड़ी चर्चा हो रही है कि रेलवे का तो किराया ही नहीं बढ़ा, बल्कि किराया घटा दिया गया। इस बात की बड़ी चर्चा इस देश में हो रही है। शासन के दौरान यह किराया कैसे बढ़ा? आपने कहा कि एक रूपया कम कर दिया, दो प्रतिशत कम कर दिया, देश में डीजल का रेट 70 प्रतिशत से ज्यादा घट गया और अगर आपने 2 प्रतिशत कम कर दिया, …( व्यवधान) 

श्री सुरेन्द्र प्रकाश गोयल : तीन साल पहले क्या था डीजल का रेट …( व्यवधान)…*     

सभापति महोदय : रिकार्ड में नहीं जाएगा।   

…( व्यवधान)  *

          * Not recorded.     

 

 

 

 

 

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन :  महोदय, बहुत अनपार्लियामेंट्री बात ये कह रहे हैं। इनको मैं इतना खराब बोलूंगा कि ……..( व्यवधान)[p40]   

…( व्यवधान)

सभापति महोदय : तस्लीमुद्दीन जी, इन्हें डिस्टर्ब मत कीजिए।…( व्यवधान)

श्री संतोष गंगवार (बरेली): महोदय, यह बड़े दुर्भाग्य की बात है। मंत्री जी को इस ढंग से हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।…( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद :  बैठे-बैठे बोलने का नोटिस नहीं लिया जाता। आप आगे बोलिए।…( व्यवधान)

श्री संतोष गंगवार : मंत्री जी को बोलना नहीं चाहिए।…( व्यवधान) आप वैसे ही प्रभावित हैं, यह बोलकर और ज्यादा प्रभावित थोड़ी हो जाएंगे।…( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद  :  ठीक है, आप आगे बोलिए।…( व्यवधान)

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : एनडीए शासन के दौरान जो तत्काल कोटा था, तत्काल कोटे में यह होता है कि तुंत फैसीलिटी मिलती है। जैसे अगर आप एयरपोर्ट पर जाते हैं और तत्काल में सीट लेते हैं तो वह सस्ती मिलेगी और अगर पहले से रिजर्व करवाएंगे तो एक रेट पर टिकट दी जाती है। लेकिन रेलवे में उल्टा हो रहा है। आपने किराया नहीं बढ़ाया। पहले कुछ सीटें बढ़ती थीं और उसके लिए एक्सट्रा बोगी लगती थी। लेकिन लालू जी ने तत्काल कोटे को बढ़ाकर गाड़ी के 30 प्रतिशत कोटे को तत्काल में कर दिया। अगर किसी सिनेमा हाल में पांच सौ टिकट हों और उनमें से दो सौ टिकट ब्लैक कर दिए जाएं, तत्काल में दे दिए जाएं, डेढ़ सौ रुपये, दो सौ रुपये बढ़ाकर ब्लैक हो जाए, तो फिर कौन पकड़ेगा। आज रेलवे में काफी लम्बी वेटिंग चलती है, लेकिन यह अंकों की जादूगरी है कि आपने 30 प्रतिशत सीटें तत्काल में रख दीं और वह भी पांच दिन पहले। उसमें भी डेढ़ सौ रुपये से तीन सौ रुपये तक वसूले जा रहे हैं।  आप एक तरफ कह रहे हैं कि हम किराया नहीं बढ़ा रहे हैं और दूसरी तरफ करोड़ों रुपये जनता की जेब से निकाले जा रहे हैं।

          मैं कहना चाहता हूं कि आपने प्लेटफार्म टिकट के दाम बढ़ा दिए। पहले वह दो रुपये में मिलता था लेकिन अब पांच रुपये में मिल रहा है। तत्काल में ऐसा है कि यदि आपको आगरा जाना है तो आपको कोलकाता का टिकट लेना पड़ता है। यह जनता के ऊपर बहुत बड़ा जुल्म है। हम तो यह कहते हैं कि अगर आप जनता को रिलीफ देना चाहते हैं, आप जनता को रिलीफ देने के लिए मंत्री बने हैं, लेकिन आपकी वजह से जनता की जेब पर इतना बड़ा बोझ डाला जा रहा है। मैं कहना चाहता हूं कि ट्रेन की दूरी बढ़ाए बिना यानी ट्रेन की रफ्तार बढ़ाए बिना आपने उसे सुपरफास्ट कर दिया। आप दो रुपये कम कर रहे हैं लेकिन उसके बाद जनता से सुपरफास्ट का किराया वसूला जा रहा है।

          सभापति जी, मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि रेल में सुविधाओं की बहुत कमी हुई है और पैसेंजर ट्रेन सुपरफास्ट हो रही है।…( व्यवधान) रेलवे के अंदर कोई सुधार नहीं हुआ है। अगर आप देखें, गाड़ी के अंदर गंदे बैडिंग हैं। शौचालय साफ नहीं हैं। खाने का अच्छा इंतजाम नहीं है।…( व्यवधान)

सभापति महोदय :  कृपया डिस्टर्ब मत कीजिए।

…( व्यवधान)

सभापति महोदय :  आप बैठ जाइए।

                                      …( व्यवधान)

श्री सुरेन्द्र प्रकाश गोयल : सभापति महोदय, ये असत्य बोल रहे हैं।…( व्यवधान)

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : राजनाथ जी, चुनाव लड़ने गए हुए हैं, इसलिए ये घबराए हुए हैं।…( व्यवधान)

सभापति महोदय :  जब आपकी बोलने की बारी आएगी, तब आप जवाब दीजिएगा।

…( व्यवधान)

श्री सुरेन्द्र प्रकाश गोयल : सभापति महोदय,…( व्यवधान)

सभापति महोदय : आप बोलते जाइए। आपकी कोई बात रिकार्ड में दर्ज नहीं हो रही है।

                             …( व्यवधान)   *

सभापति महोदय : शाहनवाज़ जी, आप उधर ध्यान मत दीजिए, आप बोलिए।

                                      …( व्यवधान)[N41] 

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन :  महोदय, मैं आपमें से कहना चाहता हूं कि रेल मंत्री जी ने पहले कहा था कि हम रेलवे की बोगीज में अच्छी खादी की चादर देंगे, खादी की चादर तो दूर वहां फटी हुई चादर मिल रही हैं। हमारे साथी मेम्बर्स ऑफ पार्लियामेंट भी जब सफर करते हैं, सभी लोग इससे सहमत होंगे कि आज रेलवे में सुविधाएं बढ़ी नहीं हैं, सुविधाएं घटी हैं। इस दौर में जब सुविधाएं बढ़ाने का दौर है, आपने सुविधाओं पर कोई काम नहीं किया है। रेलवे बजट में कोई नई घोषणा नहीं की गयी है, रेलवे बजट में वही पुरानी

 

  * Not recorded.

 

घोषणाएं हैं। एक शायर ने कहा है कि बोलते लफ्जों को दोहराना बड़ी बात नहीं, गूंगे लफ्जों को जुबां दो तो करामात होगी। लेकिन आप तो वही बात दोहरा रहे हैं, यहां ट्रेन चला दी, इधर से रूट उधर कर दिया और बड़े हृदय की बात दिखाते हैं कि जब भी कोई एमपी जाता है कि मेरे रूट पर ट्रेन चाहिए, तो दे देते हैं, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं हुआ है।…( व्यवधान)

सभापति महोदय : गोयल जी, आप बार-बार क्यों उठ रहे हैं? आपकी कोई बात रिकॉर्ड में नहीं जा रही है। आप शांत रहिए।

…( व्यवधान) *

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : महोदय, आज बिहार में बड़ी चर्चा हो रही है, कई सांसद और मेरी पार्टी के जो सांसद हैं, उन्होंने भी कहा कि बिहार के लिए बजट में बड़ा काम हुआ है। भागलपुर के अंदर आपने राजधानी ट्रेन चलाने की बात कही है। अभी जो जमालपुर से हावडा के लिए लाइन जाती है, उस पर मालगाड़ी भी धीरे-धीरे चलती है। हमने आपसे अनुरोध किया था कि उस इलाके में जो रेल के पुल हैं, वे बहुत कमजोर हैं, पहले उनको बनाने की जरूरत है। आपने घोषणा की है, वह अच्छी है। मुझे मालूम है कि वह जल्दी नहीं चल पाएगी, हमारी सरकार को ही चलाना पड़ेगा।  हमने आपसे अनुरोध किया था, जब एनडीए की सरकार बनी थी, तब हमने किशनगंज में राजधानी रूकवा ली थी। मैंने रेल मंत्री जी से अनुरोध किया था कि नौगछिया में स्टापेज किया जाए। आप अभी इसे तुंत कर सकते थे, एक-दो मिनट का ही स्टॉपेज दे देते। वहां पर नौगछिया से भागलपुर के बीच पुल आपके जमाने में ही बना, अगर वहां पर स्टॉपेज दे देते तो वहां के लोगों को फायदा हो जाता। आपने डीआरएम कार्यालय की घोषणा हमारे अनुरोध पर कर दी है।…( व्यवधान) रेलवे ट्रैक पर बहुत काम करना चाहिए, लेकिन वह नहीं हुआ है। मैं अनुरोध करना चाहता हूं कि आपने बहुत बड़ा सपना दिखाया है।  अभी आप जापान गए थे।…( व्यवधान)

श्री तस्लीमुद्दीन  : अब तो ट्रेन भागलपुर तक बढ़ा दी है।…( व्यवधान)

सभापति महोदय : आप बार-बार क्यों बोलते हैं।

…( व्यवधान)

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन :   * इस तरह से डिस्टर्ब मत करो।…( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: It will not be recorded.

(Interruptions) …*

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : महोदय, माननीय सदस्य अनपार्लियामेंटरी वर्ड्स बोल रहे हैं।…( व्यवधान)

  * Not recorded.

सभापति महोदय : शाहनवाज हुसैन जी, अनपार्लियामेंटरी वर्ड्स को निकाल दिया जाएगा।

…( व्यवधान)

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : महोदय, माननीय सदस्य गलत बोल रहे हैं।  *

सभापति महोदय : शाहनवाज जी, वह बात रिकॉर्ड में नहीं जाएगी।

…( व्यवधान)

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : आप ठीक से बोलिए। *

सभापति महोदय : शाहनवाज हुसैन जी, आपत्तिजनक बात को रिकॉर्ड से निकाल दिया जाएगा।

…( व्यवधान)[r42] 

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : इन्हें एक बार मैंने चुनाव में पराजित किया था इसलिए इन्हें जलन हो रही है और ऐसी बात कह रहे हैं।…( व्यवधान) मैंने बहुत संयम बरता है।

सभापति महोदय : तस्लीमुद्दीन जी, आपके लिए यह शोभाजनक नहीं है कि आप बार-बार इन्हें टोकें। आप बार-बार इन्हें डिस्टर्ब करके सदन का समय बर्बाद कर रहे हैं।

श्री तस्लीमुद्दीन : मेरा नाम लिया गया इसलिए मैंने कहा।

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : मैंने अच्छे के लिए नाम लिया था, माननीय कहा था और कहा था कि यह वहां पर मौजूद थे।

सभापति महोदय: जो भी असंसदीय शब्द होगा, वह रिकार्ड से निकाल दिया जाएगा।

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : सभापति जी, मैं काफी समय से सांसद रहा हूं और यहां बोलता हूं। मेरे विपक्ष के सभी साथी जानते हैं कि मैं वाणी पर संयम रखता हूं, मैं उम्र का तकाजा रखता हूं और बोलते हुए डय़ू रिस्पेक्ट बोलता हूं, लेकिन मैंने कभी संयम नहीं खोया। मैंने रिस्पेक्ट के साथ बोलते हुए अपना भाषण शुरू किया था और कोई ऐसी बात नहीं कही थी कि माननीय मंत्री के प्रति कोई अवमानना हो। मैंने यह कहा था कि माननीय मंत्री भी वहां पर मौजूद थे। इसके अलावा मैंने कुछ नहीं कहा था। उसके बाद जो चर्चा हुई, जो बातें हुईं, आप मुझे क्षमा करें, मेरा इस तरह का स्वभाव नहीं है। मेरा यह रूप संसद ने पहले कभी नहीं देखा। लेकिन टिट फार टैट के कारण मुझे यह रूप अपनाना पड़ा।

सभापति महोदय: जो भी आपत्तिजनक शब्द होंगे, वे कार्यवाही से निकाल दिए जाएंगे। अब आप अपना भाषण आगे बढ़ाएं और उसे समाप्त करें।

         

  * Not recorded.

 

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : सभापति जी, मैं कह रहा था कि लालू जी जापान गए थे। उनके साथ कई सांसद भी थे। लालू जी ने कहा कि उन्होंने रेल मंत्रालय में आकर उसे मुनाफे में ले आए हैं। लेकिन जब प्रणव दा इस सदन में अपना अंतरिम बजट भाषण दे रहे थे, तो उन्होंने यह बात कही कि रेलवे को आज भी बजटरी सपोर्ट की जरूरत है। इसका मतलब यह है कि रेलवे मुनाफे में नहीं है। मेरे पास दैनिक भास्कर समाचार पत्र है, जिसके फ्रंट पेज पर 17 तारीख को प्रणव दा के दिए हुए भाषण में कही गई इस बात के बारे में उल्लेख किया गया है। समयाभाव के कारण मैं उसे नहीं पढ़ना चाहता, लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि रेल मंत्री जी ने जो 30,000 माल डिब्बों के निर्माण की बात कही है और 4620 सवारी डिब्बों के निर्माण की बात कही है, इन सारी चीजों के लिए रेलवे को छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के बाद और पैसे की जरूरत है। आज इनके पास पैसा सरप्लस नहीं है, इन्हें भारत सरकार से और पैसे की जरूरत है।

   17.44 hrs.                   (Mr. Deputy Speaker in the Chair)

          मैं यह कहना चाहता हूं कि रेल मंत्री जी सफर भारत का सुनाना था, लेकिन सफर जापान का सुना गए। इनके सपनों का भारत कैसा हो, यह बुलेट ट्रेन का सपना दिखा गए। रेल मंत्री जी ने बुलेट ट्रेन के बारे में जो बात कही, मैं कहना चाहता हूं कि आपने अपने रेल बजट में इसका जिक्र किया। आप हों या कल कोई दूसरा रेल मंत्री ही, जो भी हो, उसे एक साल के रेल बजट को अमलीजामा पहनाने में कम से कम पांच साल लगेंगे। आपने तो सिर्फ चार महीनों का ही अंतरिम रेल बजट पेश किया है। आपने बहुत लम्बे ख्वाब हमें दिखाए हैं। मैं जानता हूं कि ख्वाबों की ताबीर देश की जनता तय करेगी। जो इन्होंने एजेंडा सैट किया है, उसके बारे में देश की जनता तय करेगी कि वह इस पर अपनी मोहर लगाती है या नहीं। यह बात आने वाले लोक सभा चुनावों में तय होगी।

          मैं रेल मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि देश की जनता को आपसे बहुत सी उम्मीदें थीं, लेकिन जो आपने रेल बजट में ख्वाब दिखाए हैं, कुछ दिनों में कोड आफ कंडक्ट लागू हो जाएगा।  एक पार्टी के नेता के तौर पर मैंने अपनी बात लोक सभा में रखी और भागलपुर के सांसद के तौर पर मैंने आपका आभार भी व्यक्त किया है। मैं यह कहकर अपनी बात समाप्त करता हूं कि आपने जो बातें कही हैं, उन्हें अमलीजामा तुंत पहनाएं, तब देश की जनता आपका आभार मानेगी।

                                                                                                         

 

*श्री राम सिंह कस्वां (चुरू): माननीय रेल मंत्री महोदय द्वारा 2009-2010 के अंतिम रेल बजट में आम आदमी को राहत देने का प्रयास किया है।  यात्री किराए में राहत देने का काम किया है, लेकिन मालभाड़ा नहीं घटने से उद्योग जगत में निराशा फैली है।  मंत्री जी ने रेल सुरक्षा का कोई आश्वासन नहीं दिया है। इस बजट में ग्रामीण क्षेत्र में मानव सहित समपार बनाने का जिक्र तक नहीं किया है।  सादुलपुर से रेवाडी आमान परिवर्तन का कार्य पूर्ण हुए काफी समय हो गया है, लेकिन आज तक सादुलपुर से दिल्ली एक्सप्रेस गाड़ी नहीं चलायी गयी।  इस क्षेत्र की जनता, सामाजिक संगठन काफी समय से उक्त गाड़ी को चलाने की मांग करते आ रहे हैं, पिछले बजट में आमान परिवर्तन के पश्चात् सादुलपुर से दिल्ली गाड़ी चलाने का आश्वासन दिया था लेकिन इसमें आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी है तथा इस बजट में इस गाड़ी का जिक्र तक नहीं किया गया है। वर्तमान में सादुलपुर से रेवाड़ी व सादुलपुर से हिसार पैसेंजर गाड़ी ही चलती है, जो अपर्याप्त है।  इन गाड़ियों का समय भी आम जनता के हित में नहीं है।  इसके अतिरक्त लुधियाना-हिसार गाड़ी को सादुलपुर तक बढाने की मांग भी काफी समय से की जा रही है। अतः सादुलपुर-दिल्ली होते हुए हावडा व पटना को जोड़ने के लिए अविलम्ब एक्सप्रेस गाड़ियां चलायी जावे तथा सादुलपुर-हिसार-लुधियाना तक एक्सप्रेस गाड़ी चलायी जावे।

 

          सादुलपुर से बीकानेर व रतनगढ़ से डेगाना शेष बचे हुए मार्ग के आमान परिवर्तन का कार्य अविलम्ब चालू किया जावे। रतनगढ़-सरदारशहर रेल लाईन के आमान परिवर्तन की मांग काफी समय से की जा रही है, इसे भी अविलम्ब स्वीकृत कर चालू किया जावे।

* Speech was laid on the Table

 

          श्रीगंगानगर से जयपुर रेल लाइन के आमान परिवर्तन की घोषणा पिछले बजट में की गई थी, लेकिन इसमें अब तक न कोई कार्यवाही हुई है और न ही कोई काम चालू हुआ है। इस महत्वपूर्ण रेल लाईन का आमान परिवर्तन होना अत्यंत ही आवश्यक है।

          चुरू-तारानगर-नोहर, सरदारशहर-हनुमानगढ़ व सीकर-सालासर-नोखा नई रेल लाइन स्वीकृति की मांग काफी समय से की जा रही है, इस बजट में इसका जिक्र तक नहीं किया गया है।  यह जनहित में अत्यंत ही आवश्यक कार्य है।  उक्त लाईन डालने की स्वीकृति इसी वित्तीय वर्ष में की जाये।

          मानव सहित समपारों के अभाव में जनता को बेहद भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।  ग्रामीण जनता ने काफी बार धरना भी दिया है लेकिन कोई राहत नहीं मिली है।

          लोहारू-सादुलपुर-रतनगढ़ रेल लाईन पर रामपूरा-गुलगवा सड़क पर, बेवड-भोजाण रास्ते पर, कान्धरान-रडवा के रास्ते पर, डोकवा स्टेशन के पश्चिम साई में यहां भी यू.आर.बी. का निर्माण किया जा सकता है, हडियाल गांव (एन.एच.65) से टमकोर को जाने वाली डामर सड़क पर, मोलीसर गांव के पास, पायली हाल्ट स्टेशन के पास जहां सम्पूर्ण ग्राम का निकास है, यहां यू.आर.बी. का निर्माण भी किया जा सकता है।

          रतनगढ़-बीकानेर रेल लाईन पर सीतलनगर, बिग्गावास रामसरा, हेमासर, बेनीसर गांवों के पास, रतनगढ़ से डीडवाना रेल लाइन पर भी भोजासर गांव के पास, पडिहारा गांव के उत्तर साईड में जहां पहले मानव रहित रेलवे क्रासिंग को बंद कर दिया, बालसमंद से सांवराद के मध्य केटल क्रोसिंग सं.46 डी पर, सादुलपुर जंक्शन से हनुमानगढ़ रेल लाइन पर पहाडसर ग्राम के पास, चुबकिया ताल से ढिगारला के रास्ते पर, नरवासी-ख्याली रास्ते पर, सिंधमुख-भादरा सड़क पर ढाणी छोटी के पास, सादुलपुर-हिसार खंड पर एन.एच. 65 से लूटाना सदासुख जाने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क मार्ग पर, एन.एच.65 से लूटाना पूर्ण, लसेडी से मिठी रेडूवान के रास्ते पर, यहां भी यू.आर.बी. का निर्माण किया जा सकता है।

चुरू-सीकर रेल मार्ग पर :-  खासोली गांव के पास

इसके अतिरिक्तः-  गाडी सं. 2307/2308 हावडा-जोधपुर ट्रेन का डेगाना में स्टापेज 2 मिनट के स्थान पर 5 मिनट किया जावे एवं गाड़ी सं. 5631/5632 का डेगाना में स्टॉपेज किया जावे।

नये हाल्ट स्टेशनः-  रतनगढ़-सरदारशहर मार्ग पर आनन्दवासी हाल्ट स्टेशन, बिग्गा से श्रीडूंगरगढ़ स्टेशन के मध्य जैसलसर हाल्ट स्टेशन, श्रीडूंगरगढ से सूडसर के मध्यम बेनीसर हाल्ट स्टेशन स्वीकृत करना जनहित में अत्यंत आवश्यक है।

कम्प्यूटर आरक्षण केन्द्र ः-   लाडनू व श्रीडूंगरगढ़ स्टेशनों पर आज भी कम्प्यूटर आरक्षण की सुविधा नहीं है। ये दोनों ही महत्वपूर्ण क्षेत्र है।  अतः जनहित में उपरोक्त दोनों स्टेशनों पर पी.आर.एस. की सुविधा मुहैया करायी जावे।  लाडनू में कम्प्यूटर आरक्षण केन्द्र स्वीकृत होने के बावजूद आज तक चालू नहीं हुआ है। ये तुरन्त चालू किया जावे।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

*श्री हरिकेवल प्रसाद (सलेमपुर)  : महोदय, माननीय रेल मंत्री ने वर्ष 2009-10 के लिए जो अंतरिम रेल बजट प्रस्तुत किया है वह संप्रग सरकार की सेहत के लिए भले ही अच्छा हो लेकिन भारतीय रेलवे और रेल यात्रियों की सेहत के लिए कोई अच्छा संकेत नहीं है। मौजूदा बजट भी पिछले पांच रेल बजटों की लीक पर ही दौड़ा है जिसमें लोक लुभावन घोषणाओं और भविष्य के लिए कोरे वायदों के अलावा किसी बुनियादी बदलाव का संकल्प नहीं है। बजट में किराया घटाने और रेल गाड़ियों की संख्या बढ़ाने के अतिरिक्त किसी चीज पर जोर नहीं दिया गया है। इसमें यात्री सुविधाओं, बुनियादी ढांचा, सुरक्षा और संरक्षा पर बहुत कम ध्यान दिया गया है जो बजट प्रावधान में साफ झलकता है। माननीय रेल मंत्री हर साल के बजट भाषण में नयी रेल गाड़ियों की संख्या बढ़ाने में कोई कोताही नहीं करते लेकिन इस तथ्य को जानबूझ कर नजरअंदाज कर देते हैं कि इसी अनुपात में रेल लाइनों के दोहरीकरण, विद्युतीकरण, आमान परिवर्तन तथा नयी रेल लाइनों का तेजी से निर्माण भी आवश्यक है। रेल गाड़ियों की संख्या बढ़ाने तथा बुनियादी ढांचे और लंबित रेल परियोजनाओं की उपेक्षा का ही नतीजा है कि महत्वपूर्ण रेलगाड़ियां भी घंटों विलम्ब से चल रही हैं। सुरक्षा और संरक्षा की धज्जियां उड़ रही हैं। रेल मंत्री जी संसद में जिस समय रेल दुर्घटनाओं में कमी का दावा कर रहे थे उसके कुछ ही घंटों बाद उड़ीसा के जाजपुर स्टेशन के पास एक रेलगाड़ी पटरी से उतर गयी जिसमें दो दर्जन से अधिक यात्री मरे और सौ से अधिक घायल हुये। इसके आठ घंटे बाद बिहार के सुगौली स्टेशन पर एक इंजन और रेलगाड़ी में भिड़ंत हो गई जिसमें तीन दर्जन से अधिक यात्री गींर रूप से घायल हुये। इसके दूसरे ही दिन एक निर्माणाधीन रेल ओवर ब्रिज के गिरने से चार लोगों की मौत हो गयी। ऐसा लगता है कि मौजूदा अंतरिम रेल बजट तीन और तेरह के लफड़े में फंस गया है क्योंकि 13 फरवरी को रेल बजट पेश होने के बाद लगातार तीन दिनों तक रेल दुर्घटनायें हुई हैं। इसी तरह रेल यात्रियों की सुरक्षा का वायदा तो हर रेल बजट में किया जाता है लेकिन उस पर अमल नहीं होता। रेलगाड़ियों में दबंगों द्वारा कमजोर यात्रियों को चलती ट्रेन से बाहर फेंकन, लूटपाट, जहर खुरानी तथा बलात्कार की घटनायें बढ़ती जा रही हैं। इसे रोकने के लिए जिस रेलवे सुरक्षा बल का गठन किया गया है वही आज लुटेरा बना हुआ है क्योंकि अधिकांश घटनाओं में इनकी संलिप्तता पायी जाती है। अभी तक देश में जितनी आतंकी घटनायें हुई हैं उनमें अधिकांश रेलवे स्टेशनों पर हुई है लेकिन बार बार घोषणा किये जाने के बावजूद रेल यात्रियों की सुरक्षा का कोई स्थायी बंदोवस्त नहीं हो सका।

 

* Speech was laid on the Table.

          जहां तक अंतरिम रेल बजट में यात्री सुविधाओं की बात है वह नहीं के बराबर है। अपने पहले रेल बजट के समय से ही माननीय रेल मंत्री यात्री सुविधायें बढ़ाने का वायदा तो करते हैं लेकिन उस पर अमल नहीं कराते। वर्ष 2004-05 के बजट भाषण में उन्होंने ग्रामीण दस्तकारों को रोजगार देने के लिये रेलवे स्टेशनों तथा रेल गाड़ियों में प्लास्टिक के कप और गिलास की जगह कुल्हड़ का इस्तेमाल करने का वायदा किया था। इसी तरह चाय की जगह मट्ठा परोसने और गाड़ियों में खादी के पर्दे एवं चादरों के प्रयोग की घोषणा की थी। इतना ही नहीं गांव की सब्जयों को फ्रीजर डिब्बों में शहरों तक पहुंचाने का भी वायदा किया था परन्तु इसमें से एक पर  आज तक अमल नहीं किया गया। रेल मंत्री जी ने नयी खानपान नीति 2005 लागू करके 25 लाख छोटे वेंडरों को बेरोजगार बनाने का इंतजाम जरूर कर दिया है। उनमें विक्लांग, विधवा, अल्पसंख्यक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और भूतपूर्व सैनिकों की संख्या अधिक थी। खानपान सामग्री बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले इन छोटे छोटे वेंडरों की लाइसेंस फीस 40 से लेकर 95 गुना तक बढ़ा दिया गया है ताकि यह अपना धंधा छोड़कर भाग जाये और उस पर बड़ी कंपनियों और कॉरपोरेट घरानों का कब्जा हो जाये। आई0आर0सी0टी0सी0 द्वारा अधिक शुल्क वसूले जाने के कारण नये वेंडरों ने खाने पीने का सामान मंहगा कर दिया है और उनकी गुणवत्ता भी रद्दी होती जा रही है।

          महोदय, चालू अंतरिम रेल बजट में 43 नयी रेल गाड़ियों को चलाने, 14 के फेरे बढाने, 15 का मार्ग विस्तार करने एवं कुछ नयी रेल लाइनों के निर्माण की घोषणा की गई है। इस मामले में भी रेल मंत्री जी का वायदा आधा अधूरा ही पूरा हो पाता है। मिसाल के तौर पर मंत्री जी ने दो साल पहले पूर्वोत्तर रेलवे में गोरखपुर से छपरा के बीच नयी रेलगाड़ी चलाने की घोषणा की थी लेकिन समय सारिणी बन जाने के बाद भी आज तक रेलगाड़ी नहीं चली। इसी तरह अपने दूसरे बजट भाषण में उन्होंने इसी रेलवे में बरहज बाजार से दोहरीघाट होते हुए फैजाबाद तक नयी रेल लाईन का सर्वेक्षण कराने की घोषणा की। कई वर्षों में सर्वेक्षण कार्य पूरा तो हुआ लेकिन इस रेल लाइन का निर्माण कार्य इस आधार पर प्रारंभ नहीं किया जा रहा है कि यह लाइन अलामकर प्रकृति की है जबकि वास्तव में यह लाइन अनेक धार्मिक तीर्थस्थलों एवं पर्यटक स्थलों को जोड़ने वाली है। इसके विपरीत माननीय रेल मंत्री जी अपने गांव और ससुराल को जोड़ने वाली भटनी जंक्शन से हथुआ होकर थाने तक नयी रेल लाइन का निर्माण युद्ध स्तर पर करा रहे हैं जिसकी कोई उपयोगिता नहीं है। नयी घोषणा में उत्तर प्रदेश के साथ भेदभाव करते हुये बिहार को सौगातों से लाद दिया गयाहै। जहां बिहार में एक दर्जन से नई रेल गाडिया चलाने की घोषणा की गयी है वहीं दो नये मंडल बनाने तथा दो रेल कारखाने लगाने की भी घोषणा की गयी है।

          माननीय रेलवे मंत्री ने रेलवे में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त या कम करने के बारे में कोई चर्चा अपने बजट भाषण में नहीं की है। भारतीय रेलवे में आये दिन रेल टिकट के कालाबाजारी की घटना सामने आती है। रेलवे भर्ती बोर्डो की परीक्षा में पर्चा लीक होने की बात आम हो गयी है। पूर्वोन्तर रेलवे में गतवर्ष नियम विरूद्ध दो हजार चतुर्थ क्षेणी के कर्मचारियों की सीधी भर्ती भारी धन राशि लेकर की गयी जिसका प्रमाण सहित लिखित शिकायत मैने रेलवे बोर्ड तथा प्रधान मंत्री जी से की परन्तु अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुयी। गत वर्ष ही गोरखपुर में एक बड़ा सेक्स स्कैंड उजागर हुआ जिसमें कइ रेल कर्मचारी ओर अधिकारी जेल गये और इसमें एक बहुत बड़े रेल अधिकारी का भी नाम आया लेकिन राजनीतिक दवाब डालकर मामले को रफा दफा कर दिया गया। पूर्वोन्तर रेलवे के निर्माण विभाग में भी सी.बी.आई द्वारा भ्रष्टाचार के बड़े मामले पकड़े गये लेकिन दोषियों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाई नहीं की गयी।

          मैं माननीय रेल मंत्री से मांग करता हू कि वह अपने घोषणा और वायदे के अनुरूप तथा जनहित में बरहज बाजर से दोहरी धार होते हुये फैजाबाद तक नयी रेल लाइन का निर्माण कार्य प्रारम्भ करवाये, वाराणसी-भटनी रेल खंड के सलेमपुर जंकशन तथा विल्थरा टोड स्टेशनों पर प्रस्तावित ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य प्रारम्भ कराया जाए । पूर्वोत्तर रेलवे के भटनी तथा भाटपार रानी स्टेशनों पर कम्प्यूटरीकृत आरक्षण की व्यवस्था की जाए, भाटपार रानी रेलवे स्टेशन का सुन्दरीकरण कराया जाए । छपरा से गोरखपुर के बीच प्रस्तावित इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन चलाइ जाए, नयी दिल्ली से लखनऊ, गोरखपुर होते हुये बरौनी तक राजधानी ट्रेल चलाई जाए कैफियत एक्सप्रस जो दिल्ली से आजमगढ़ के बीच चलती है उसे मंझ तक चलाया जाए । देवरिया सदर स्टेशन पर बिहार सम्पर्क क्रींति और गरीब रथ का ठहराव सुनिश्चित की जाये, सलेमपुर जंकशन पर दुर्ग एक्सप्रेस कार रोड में लिच्दवी एक्सप्रेस भारपार रानी में जनसेवा एवं कि डिहरापुर में इंटरसिटी रेल गाड़ी का ठहराव सुनिश्चित किया जाए प्रकार वाराणसी मैडल के भटनी और बरहज बाजार के बीच चलने वाली रेलवे गाड़ी का ठहराव पूर्व की भीति देवरहा बाबा हाल्ट तथा सिसई गुलाबराय हाल्ट पर सुनिश्चित किया जाए। सलेमपुर जंकशन पर रेल भूमि की पटरी पर दुकान करने वालों को रेलवे भूमि आवंटित कराने हेतु प्रभावी कदम उठाया जाए। इन शब्दों के साथ मैं अंतरिम रेल बजट प्रस्ताव का समर्थन करता हूँ।

 

 

* श्री महावीर भगोरा (सलूम्बर) :मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री जी का ध्यान राजस्थान के उदयपुर ग्रामीण आदिवासी (जनजाति) बाहुल्य क्षेत्र एवं उदयपुर संभाग की अनदेखी किए जाने की ओर दिलाना चाहता हूं। यह पूरा क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य होने के कारण काफी पिछड़ा हुआ है एवं आवागमन के साधनों से वंचित है।  मैं माननीय रेल मंत्री से निम्नलिखित अनुरोध करता हःं-

उदयपुर से अहमदाबाद मीटर गेज लाईन 270 कि.मी. को ब्रोडगेज में परिवर्तित     किया जावे।

उदयपुर से इंदौर वाया रतलाम नई रेल चलायी जावे।

डूंगरपुर से खैरवाडा या ऋषभदेव रोड से झाडोल, कोटडा होते हुए आबूरोड तक नई रेल लाईन बिछायी जावे एवं नई रेल की स्वीकृति दी जाए।

बडी सादडी से प्रतापगढ़, बांसवाडा दोहोद वाया कुशलगढ नई रेल लाईन एवं रेल स्वीकृत की जाए।

खैरवाडा से डूंगरपुर, सागवाडा, रतलाम वाया बांसवाडा नई रेल लाईन बिछाई      जाकर नई रेल प्रारंभ कराई जाए।

अजमेर से रतलाम वाया चित्तौड़ 400 कि.मी., चित्तौड़ से कोटा 200 कि.मी., उदयपुर से चित्तौड़ 120 कि.मी., मावली से बडी सादडी 80 कि.मी., मावली से           मारवाड़ 200 कि.मी. रेल खंड का आमान परिवर्तन कराया जाए।

इंदौर से उदयपुर एक्सप्रेस रेल को भोपाल बढ़ाया जावे।

मेवाड एक्सप्रेस उदयपुर से दिल्ली को हरिद्वार तक बढ़ाया जाए।

उदयपुर से बांद्रा एक्सप्रेस को प्रतिदिन चलाया जाए।

 

* Speech was laid on the Table.

          मैं रेल मंत्री जी से अनुरोध करता हूं कि मेरे संसदीय क्षेत्र उदयपुर के ग्रामीण आदिवासी जनजाति बाहुल्य की उक्त मांगों की ओर विशेष ध्यान देवें जिससे कि इस क्षेत्र का सर्वांगीण विकास हो सके।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ओ।श्री नवीन जिन्दल (कुरुक्षेत्र)ः  मैं आपका आभारी हूं कि पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष फिर मुझे रेल बजट पर बोलने का मौका दिया है। मैं रेल बजट (2009-10) का पुरजोर समर्थन करता हूं व माननीय रेलमंत्री जी को बधाई देता हूं कि उन्होंने पिछले वर्षों की तरह ही इस वर्ष भी एक ऐतिहासिक रेल बजट प्रस्तुत किया है और इस बजट में प्रत्येक रेल यात्री को किराए में छूट दी है।

 

          अब मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र की कुछ ऐसी समस्याओं की ओर आकर्षित करना चाहूंगा, जो मैं पिछले लगभग पांच वर्षों से निरंतर उनके ध्यान में लाता रहा हूं।

 

कुरुक्षेत्र को  Modern Station बनाने के बारे में

          कुरुक्षेत्र एक ऐतिहासिक व धार्मिक नगरी है, जहां पर न केवल भारत से ही अपितु तमाम विश्व के कोने-कोने से लोग यहां अपने पितरों का पिंडदान कराने व सूर्यग्रहण पर स्नान करने के लिए आते हैं। हालांकि कुरुक्षेत्र को Modern Station बनाने की घोषणा रेलमंत्री जी ने की थी, मगर इस ओर अभी तक कुछ भी कार्य नहीं हुआ है।  अतः इस स्टेशन पर तुंत ऐसे कार्य, जिससे लोगों को लगे कि यहां पर कुछ बदलाव आया है, किए जाएं।

 

 

 

लिफ्ट और एस्केलेटर की व्यवस्था

          क्योंकि बड़े स्टेशनों पर लिफ्ट और एस्केलेटर की व्यवस्था न होने से बुजुर्ग, महिलाओं, बीमार व विकलांग तथा बच्चों को बड़ी कठिनाई होती है, अतः रेलवे का कुछ स्टेशनों पर लिफ्ट व एस्केलेटर लगाने का निर्णय सराहनीय है।  मेरा अनुरोध है कि क्योंकि कुरुक्षेत्र को एक आधुनिक स्टेशन बनाने का निर्णय किया है, अतः वहां भी लिफ्ट अथवा एस्केलेटर लगाया जाए ताकि सूर्यग्रहण व अन्य धार्मिक उत्सवों पर देश के कोने-कोने से आने वाले लोगों को, विशेषतौर पर बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों व अपंग व्यक्तियों को इसका लाभ मिल सके।

 

          कुरुक्षेत्र के सैक्टर-13 में एक टिकट खिड़की चालू की गई थी मगर वह अक्सर बंद ही पड़ी रहती है। अभी कुछ समय पहले जब उत्तरी रेलवे महाप्रबंधक कुरुक्षेत्र गए थे तो वहां के निवासियों ने उनसे इस बारे में शिकायत भी की थी। अतः मेरा अनुरोध है कि ये टिकट काउंटर गाड़ियों के प्रस्थान के अनुसार खुला रखा जाए।

 

कैथल और दिल्ली के बीच वाया कुरुक्षेत्र रेल सेवा

          यह मामला मैं पिछले लगभग पांच वर्षों से उठाता रहा हूं, अभी कुछ समय पहले जब उत्तरी रेलवे महाप्रबंधक वहां पर गए थे तो सभी सामाजिक संस्थाओं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों व विद्यार्थी समूहों ने इस रूट पर गाड़ी चलाने का अनुरोध किया था।  इस वर्ष 2009-10 में जहां रेलमंत्री जी ने 43 नई गाडियां चलाने का आश्वासन सदन को दिया है वहीं पर अगर इस ट्रेन को भी चलाया जाता तो कुरुक्षेत्र, कैथल व आस-पास के लोगों को अति प्रसन्नता होती। मेरा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि वे अपने उत्तर में इस गाड़ी को भी चलाने का आश्वासन दें।

ROB/RUB का निर्माण

          राज्य सरकारों की लागत से 50ः50 भागीदारी के आधार पर ROB एवं RUB का निर्माण कार्य होता है।  इस विषय में मैं माननीय रेलमंत्री जी का ध्यान मेरी लोकसभा क्षेत्र में प्रस्तावित तीन ROB की ओर आकर्षित करना चाहूंगाः

 

1.       ROB at Level Crossing No. 32-B near Anaj Mandi, Kaithal के      आस-पास की सड़कें बनाने का काम 8 जनवरी, 2008 को Allot कर दिया था। इस ROB का काम फरवरी, 2009 के अंत तक पूरा होना था, परन्तु यह    अभी पूरा नहीं हुआ है। अतः इसे जल्द से जल्द बनवाया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।

2.       ROB at Level Crossing No. 98 B 2 on old Radaur-Yamuna            Nagar Road का रिवाईज्ड प्रोफाइल स्कैच मंजूर हो चुका है।  अत: इसे जल्द         से जल्द इस ROB पर काम शुरू किया जाए।

3.       ROB at Level Crossing No. 98 AC crossing Shahabad-Thol                    Road in Kurukshetra District का काम इसलिए रुका हुआ है कि रेलवे          को अभी यह निर्णय लेना है कि क्या यह ROB तीन की बजाए दो पिल्लर पर    बनाया जा सकता है तथा क्या यह ROB रेलवे की जगह पर बनाया जा       सकता है।  ये मामला उत्तरी रेलवे के Chief Engineer (Bridges) के पास     पिछले दो वर्षो से पेंडिंग पड़ा है। अतः इन दोनों बिन्दुओं पर जल्द से जल्द           निर्णय जाए।

 

 

नई रेलवे लाईनों का निर्माण

          वर्ष 2007-08 में 155 किलोमीटर नई लाईन का निर्माण पूरा हुआ, तथा वर्ष 2008-09 में 350 किलोमीटर नई लाईन बिछाने का प्रस्ताव किया गया था।  इस संदर्भ में मैंने माननीय रेलमंत्री जी से यमुनानगर-पटियाला रेलवे लाईन बनाने का अनुरोध किया था, जिसका इंजीनियरिंग-कम-ट्रेफिक सर्वे दिसम्बर, 2005 में पूरा कर लिया गया था। मेरी जानकारी के अनुसार इस रेलवे लाईन की कुल लम्बाई जगाधरी से कुरुक्षेत्र 58.61 किलोमीटर और पिहोवा रोड से दाऊनकलां 82.80 किलोमीटर बनती है, मगर इसके रेट ऑफ रिटर्न (-) 10.11 प्रतिशत बताया गया है।  इस विषय पर मेरा यह मानना है कि यद्यपि अभी रेट ऑफ रिटर्न नकारात्मक दिखाया गया है मगर रेलवे लाईन के बन जाने के बाद निश्चय ही इस क्षेत्र में अनेक उद्योग आएंगे, जिससे इस लाईन का रेट ऑफ रिटर्न जरूर सकारात्मक हो जाएगा। अगर अभी रेलवे इस पूरी लाईन को बनाने के पक्ष में नहीं है, तो कम से कम जगाधरी कुरुक्षेत्र लाईन बना दी जाये इससे रोहतक व जींद साईड से यूपी आने-जाने वाले माल यातायात में आसानी होगी। 

  Diversion of Railway Line at Kurukshetra

          रेल परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में काफी लम्बा समय लगता है।  अतः महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं के लिए त्वरित आधार पर भूमि अधिग्रहण सुनिश्चित करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ऐक्ट की तर्ज पर अधिनियम 1989 में अध्यादेश द्वारा संशोधन किया गया है। इस विषय में मेरा कहना है कि कुरुक्षेत्र-नरवाना रेलवे लाईन कुरुक्षेत्र में घनी आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरती है, तथा इस लाईन के दोनों ओर रहने वाले लोगों को बहुत दिक्कत पेश आती है। इस लाईन पर इस आबादी वाले क्षेत्र में तीन रेलवे लेवल क्रासिंग हैं, जो घंटों बंद रहते हैं, इससे इन लेवल क्रासिंग दोनों ओर ट्रेफिक जाम लगा रहता है।  सूर्य ग्रहण व अन्य उत्सवों पर तो हालत और भी बदतर हो जाती है। अतः इस रेलवे लाईन को कुरुक्षेत्र शहर के बाहर से निकाला जाए। यह कहना अतिशियोक्ति नहीं होगी कि जो खर्च इस नई रेलवे लाईन पर आएगा उससे अधिक पैसा पुरानी जमीन का व्यवसायिक प्रयोग कर रेलवे कमा सकता है। 

 

कुरुक्षेत्र-नरवाना खंड का विद्युतीकरण

          मैं माननीय रेलमंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि 2006-07 में कुरुक्षेत्र-नरवाना लाईन का विद्युतीकरण 17.09 करोड़ रुपए की लागत से करने का प्रस्ताव था, मगर किन्हीं कारणों से इस पर कार्य शुरू नहीं हो सका।  मेरा अनुरोध है कि इस लाईन का विद्युतीकरण वर्ष 2009-10 में अवश्य किया जाए। 

 

डिस्चार्ज फ्री ग्रीन टायलेट्स

          रेलवे स्टेशनों पर विशेषतौर पर सुबह के समय मैला गिरने के कारण यात्रियों का वहां पर चलना फिरना दूभर हो जाता है।  इस समस्या के निदान के लिए रेलवे 4000 करोड़ रुपए की लागत पर सभी 36 हजार कोचों में 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक डिस्चार्ज फ्री ग्रीन टायलेट्स की व्यवस्था कर रही है। मेरा माननीय रेलमंत्री जी से अनुरोध है कि इस व्यवस्था की और जल्दी लागू करने का प्रयत्न किया जाए। 

 

          कुछ राजधानी व शताबदी गाड़ियों में ऑन बोर्ड सफाई की व्यवस्था का कार्य कुछेक प्रोफेशनल एजेंसियों के द्वारा शुरू करवाया गया है अतः मेरा अनुरोध है कि इस व्यवस्था को सभी रेल गाड़ियों में लागू करवाया जाए। 

 

रेलवे क्रासिंग

          भारतीय रेलवे में 34800 रेलवे क्रासिंग में से अभी भी लगभग 18,000 लेवल क्रासिंग   Unmanned हैं और इस कारण से रेल दुर्घटनाओं में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। अतः मेरा माननीय रेलमंत्री से अनुरोध है कि इन सभी Unmanned लेवल क्रासिंग को यथाशीघ्र Manned क्रासिंग में तबदील किया जाए और ऐसा करना अब अधिक आसान हो जाएगा, क्योंकि उन लाइसैंसधारी कुलियों को इन Unmanned क्रासिंग पर नियुक्त किया जा सकेगा, जिन्हें गैंगमैन एवं चतुर्थवर्ग के अन्य पदों पर नौकरी देने का निर्णय किया है। मेरा यह अनुरोध है कि धीरपुर-अधोनी रोड, जिला कुरुक्षेत्र पर जो Unmanned रेलवे क्रासिंग है, उसे शीघ्रतिशीघ्र Manned रेलवे क्रासिंग में तबदील किया जाए। 

 

          इसके साथ-साथ मेरा रेलमंत्री जी से अनुरोध है कि विदेशों की तरह सभी Manned लेवल क्रासिंग को ऑटोमैटिक किया जाए, ताकि इन क्रासिंग को पार करने के लिए लोगों को बेवजह असुविधा न हो, क्योंकि देखने में आया है कि ये Manned क्रासिंग्स कॉफी लम्ब समय तक बंद रहते है।

 

कुछ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे

          कुरुक्षेत्र, कैथल और जगाधरी रेलवे स्टेशनों पर भी आधुनिक डिजाईन के वाटर बूथ व आधुनिक जलपान कक्षों का निर्माण किया जाए।

 

          कुरुक्षेत्र, यमुनानगर व कैथल रेलवे स्टेशनों पर सैनेटरी व्यवस्था बहुत बुरी हालत में है। कुरुक्षत्र और यमुनानगर में बैंचों की हालत भी खास्ता है।  अतः इसे सुधारा जाए व इन स्टेशनों का नवीनीकरण भी किया जाए। 

 

          दैनिक यात्रियों की मांग को ध्यान में रखते हुए कुरुक्षेत्र से EMU Trains चंडीगढ़ के लिए सुबह 6 बजे ओर शाम को चंडीगढ़ से कुरुक्षेत्र के लिए शाम 6 बजे चलाई जाए। इसी प्रकार एक EMU Train दिल्ली के लिए शाम 5.30 बजे चलाई जाए। 

          क्योंकि कुरुक्षेत्र को Modern Station घोषित किया हुआ है, तथा यहां पर लाखों की संख्या में पर्यटक आते रहते हैं, अतः यहॉ से गुजरने वाली सभी गाड़ियों का ठहराव इस स्टेशन पर दिया जाए ।

          अंत में मैं यूपीए अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी व डा. मनमोहन सिंह जी का भी धन्यवाद करना चाहूंगा, जिनके कुशल मार्ग निर्देशन में ये रेलवे बजट लाया गया है।  मैं एक बार फिर इस रेलवे बजट का समर्थन करता हूं। 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

*SHRI RUPCHAND PAL (HOOGHLY): Sir, while broadly supporting the Interim Railway Budget presented on 13 February, 2009, I would like to submit that the following issues need to be properly and adequately addressed at the  earliest by the Railway authorities.

          Many of them are very burning issues pending for several years.  The concerned people expect and hope that this present Government will pay attention to the said burning problems affecting thousands of daily commuters and other people and solve the problems at the earliest.

          I am citing below some of the burning issue affecting the people:

Urgent need to have a satisfactory solution to the long-pending problem of water logging at Bandel Railway Station in the Howrah Division of Eastern Railway – a) at the Bazarpara point and B) at the Platform area ( a comprehensive suggestion has already been made by myself to Railway Authorities).

Need to increase the number of Suburban Trains in the Howrah and Bandel; Howrah-Burdwan, Sealdah- Naihati; Sealdah-Krishnanagar; Sealdah-Bandel; Sealdah-Bongaon in the Eastern Railway; Sheoraphuly-Tarakeshwar; Bandel-Katwa and similarly in the suburban sections of the South-Eastern Railway.

Urgent need to increase the number of rakes in the Suburban Trains from 9 to 12 coaches.

          Need to ensure punctuality in the Suburban Service as also other services

          Need to urgently take up the project of construction of freight corridor up to Kolkata Port and to Haldia Port in the Eastern Freight Corridor.

                    Urgent need for completion of the doubling of Railway lines in – a) Bandel-Katwa Section and b) Seoraphuly-Tarkeshwar Section.

          To continue Nalikul Railway in the Sheoraphuly-Tarakeshwar section of Howarh Division as a regular station and not to convert it into a halting station.

* Speech was laid on the Table

          To undertake the construction of road from Chandanpur Railway Station to Durgapur Express Way Crossing Railway line at Chandanpur in Howerah-Burdwan chord line (as per request of the Railways, the MP Hoodly has provided Rs. 15,23,00/- (Rupees Fifteen lakhs and twenty-three thousand only) as per the estimate made by the DRM, Howrah Office but subsequently not pursued by the Railways and the money was returned back to Collector, Hoodly.  The scheme is to be taken up afresh by the Railways.

                    Urgent need to increase the passenger amenities including provision of drinking water, effective public address system, clean waiting hall for the passengers, particularly for the aged, disabled persons, women and children and availability of  telephone facilities at Railway Platform.

          Widening of the sub-way at Bhadreshwar Railway Station in the Howrah-Bandel line. Meanwhile in Howarh Division of Eastern Railway as per estimate of the Railwayas two MPs – MP from Hoogly and MP from Srirampur have contributed from MPLADS for construction of this sub-way.

          Urgent need for a Rehabilitation plan for the oustees and perons evicted resulting from Railway Development work.  The Railways need to provide suitable land for construction of their dwelling places and vending outlets.

Urgent need to use vacant Railway lands for cultivation of biodiesel (lile Jatropha etc.)

Urgent need to improve Railway management in different areas instead of taking privatization route which will be ultimately harmful for the people of the country.

Need for connecting Nalikul in the Sheoraphuly-Tarakeshwar Section of Howrah Division with the Howrah-Burwan Railway chord line so  that the Tarakeshwar branch line can be connected to Sealdah.

Urgent need to make available Railway land to Haripal Panchayat Samiti for construction of a public stand in the interest of the Railway passengers.

To provide Railway land for Singur in the Sheoraphuly-Tarakeshwar railway line for construction of an approach road by Singur Panchayat Samiti in the interest of the Railway passengers.

Urgent need to provide suitable Railway land at Bandel and at Chinsurah Railway areas to the evictged hawkers/vendors who have formed cooperatives to continue their livelihood sources as promised by the Railway Ministry.  The prayer of the cooperatives like ‘Pragati Cooperative’ and ‘Sarat Chandra Cooperative’ as also ‘Chinsurah Hawkers Cooperatives’ pending with the Railways for quite some time.

Urgent need to provide workmen at newly constructed Tiucket Counters at Hooglyghat Railway Station in Bandel-Naihati Branch line of Eastern Railway.

Need to declare presentation and repair of the existing Hoogly Jubilee Bridge on the Ganges between Garifa (24 Parganas North) and Hooglyghat (Hoogly) where a new Railway Bridge is under construction just adjacent to the old existing one.

To name the new Railway Bridge between Hooghlyghat and Garifa after the name of great philanthropist and educationist Haji Mohmmand Mohia as the Bridge is near the famous Hoodly Imambara and the sacred tomb of Haji Mohmmad Mohia.

 

 

 

 

 

*SHRIMATI MINATI SEN (JALPAIGURI):  Thank you Sir! I stand to express my support to the budget as a matter of routine. It would have been a pleasure on my part if I could express a whole hearted support to the budget as a parting gift to Lalu ji.  But I am really sorry.

 

In his opening speech, Lalu Ji has said ( I quote) “I can proudly say that Indian  railways scaled a new pinnacle every year and now stand at the zenith of  success from where, without imposing any burden on the common man” (Unquote).  Is it a fact that during last five years, no burden on the commonman has been imposed?

 

Lalu ji! During last 5 years, how many trains have been renamed as “Express Train” and thus imposing Rupees 20/- extra on each ticket?  Before 5 years what were the number of Tatkal Berths and how much was the charges to reserve a Berth in Tatkal Quota?  In your time, the upper quota has been fixed at 30 per cent of all reserved seats, Tatkal charges have gone up from Rupees 50/- to Rupes 250/- and even if any passenger book his ticket for a midway station or board the train from a midway station, he or she is to pay for the train’s entire run.

 

Lalu ji! On the other day you have hiked the freight charges for rice, foodgrains, pulse and fertilizers with effect from 1st February, 2009.  As such, prices of all essential commodities have not gone down to the deserving stage.  Still the people are to believe that Railways have not imposed any burden on the common man.!

Hon’ble Minister for Railways has claimed that Railways have earned a profit of Seventy thousand crores.  It sounds good.  But the question remains how the money is being invested.  Can the Ministry of Railway deny that there are 245 pending schemes and extension of Railway network during the last five years is very negligible?

* Speech was laid on the Table

 

In  your speech, you have said (I quote) “ While private companies resort to anti-people measure like increase in prices, retrenchment of employees and lockouts, Railways have kept the human aspect as the central focus and achieved an extraordinary feat without putting any extra burden on the common man or the employees” (unquote).

 

Lalu ji! It is nice to know that you have not forgotten that private companies resort to anti-people measures like increase in prices, retrenchment of employees and lockouts.  But, will you –please tell us, how many services of the Railways have been outsourced to Private companies during your tenure?  Right from ticketing  to cleaning to catering and even maintenance of lines and bridges have been outsourced to private companies.  In your reply to question number 224 dated 14.03.2008, raised in Rajya Sabha, you have admitted that between 2001-02 to 2005-06 number of ‘C’ category employees have came down to 8,86,454 from 8,92,890 and  number of ‘D’ category employees have come down to 5,14,250 from 6,07,493. You have also admitted that during 2001-02 to 2005-06, Railway has surrendered 1,12,664 posts.  As a result of the outsourcing, Coromondal Express met a serious accident on the very day the Railway Interim Budget has been placed. Howrah-Tarakeswar local just some how manage to avoid another accident on 15th February for alertness of the Driver, who detected missing fish-plate in time.  Contrary to the claim of Minister of railways, 10,000 posts of Railway Police Force have also been surrendered.  Thus, by way of outsourcing, lowering down the number of employees and surrendering the posts, the Railway is avoiding its statutory responsibilities like payment of wages and allowances, Provident Fund, Gratuity, Pension etc.  This is no doubt tricky.  But is there any difference between your Ministry and any Corporate House in the matter of employees relations, who cares for Profit on any cost?

 

In every year’s budget, you have declared a number of new trains, new lines and so on.  In this years’ budget too, you have said that 2187/2188 Jabalpur-Mumbai Garib Rath express will be extended up to Allahabad. Perhaps you have forgotten to mention that Mumbai-Jabalpur-Mumbai Garib Rath does not exist.  However, having realizing this, the Railways quickly posted a note on 13th February saying the train will be flagged off from Jabalpur on February 20th ; Regular runs of the train are likely to being from February 21 from Chhatrapati Sivaji Terminus.  The train will be extended up to Allhabad only once the new timetable comes into force.

 

Hon’ble Minister for Railways has declared that Railway is going to introduce Bullet Train. But is it not a fact that  even after 60 years of independence, the average speed of trans in India is 36 k.m.s?  In one hand, the Ministry of Railway is claiming credit for introduction of Internet booking of tickets.  But what are the present states of affairs in the matters of Passengers’ amenities.

 

Let me put an example.  This is from North Bengal. The Delhi bound train from Radhikapur has started before a month.  But passengers are still waiting for the waiting room, rest room, lavatory and even drinking water.

 

I hope that in your reply to this debate, you will provide us a comprehensive report showing year wise details of the new trains and lines declared and completed during these five years of your tenure.

 

Earlier, number of wagon manufacturing P.S.Us was referred to BIFR.  Railway had decided to take over the Mokama and Maziffarpur units of Bharat Wagon Limited.  But still the Railways ideas of placement of orders for wagons on private companies have not been abandoned.  Chittaranjan Locomotive and Benaras Rail Factory are not getting sufficient borders. Hon’ble Minister for Railways has declared that Railway is going to introduce Dedicated Freight Corridors. It is a welcoming announcement. But the demand of wagon will definitely go up as soon as the dedicated freight corridors will be operational.

 

It is a fact that for years we were demanding taking over of wagon manufacturing units of Burn standard and Braithwaite.  But only the Burn Standard is being taken over.

 

Sir,! We demand that the Braithwaite wagon producing unit be also taken over by Railways.  In these days of Global Meltdown, taking over of the wagon manufacturing P.S.Us and placement of sufficient orders on them will act as stimulus financial package.

 

Sir! During the N.D.A. period Railways took a decision to form State Based Railway Zones. We objected to that proposal. Railway is a symbol of unity of the country.  As such no planning should be made on the regional basis.  But unfortunately, Hon’ble Minster for Railways has declared creation of Bhagalpur Division carving the existing small Malda Division.  This means, expenditure of Railways will increase to the extent of 100 crores more.  I do not find any justification for such expenditure.

 

I expect that in his reply, honourable Lalu ji will reply to the question I raised.

 

Before concluding the speech, I would request Hon’ble Minister for Railways to consider:-

          Resumption of Train Service from Haldibari to Sealdah through Bangladesh,

          Development of Jalpaiguri Station,

          Completion of New Moinaguri-Jogikhopa Rail Line,

          Introduction of Passenger Train between Jalpaiguri Town and Alipurduar.

          Introduction of another pair of passenger Train between Alipurduar and Siliguri via Mal.

          Daily services of Kanchankanya and Uttarbanga Express,

          Speedy completion of New Jalpaiguri to New Coochbehar Railway line,

          Construction new terminal on Jalpaiguri side at New Jalpaiguri station.

          Construction of Fly-Over at Jalpaiguri no 3 goomti and Alipurduar Assam Level Crossing gate,

          Computerized Ticket Counter at Falakata and Dhupguri Station,

          Extra vendor coach in Long distance trains,

          Controlled Rail Speed through the Jungle area to save the lives of the animals.

MR. DEPUTY-SPEAKER: Hon. Members, I have with me a list of 61 Members who would like to speak in this debate.  My request to the hon. Members that those Members,  who would like to lay their written speeches, can do so and that will form part of the proceedings. 

          सैकिंड रिक्वैस्ट यह है कि माननीय सदस्य अपनी स्पीच को 5 से 10 मिनट के बीच में खत्म कर दें और जो माननीय सदस्य अपनी लिखित स्पीच टेबल पर रखना चाहते हैं वे रख सकते हैं. and that will form part of the proceedings.

          Now. Dr. Col. (Retd.) Dhani Ram Shandil. 

 

DR. COL. (RETD.) DHANI RAM SHANDIL (SHIMLA): Mr. Deputy-Speaker, Sir, I rise to speak in support of the Railway Budget presented by Shri Lalu Prasad Yadav, our hon. Railway Minister on 13th February, 2009 in this august House.

          Sir, I have listened very carefully to the speech of our hon. Member and our former Civil Aviation Minister, Shri Shaahnawaz Hussain ji.  I feel that he was very appreciative.  But I feel that when something good happens on a national front, we must appreciate it.  The work done by our hon. Railway Minister is really appreciated.  I would like to place on record my deep appreciation for the praiseworthy achievement of 14 lakh Railway Employees under the able leadership of Shri Lalu Prasad Yadav and his Ministers Shri Narainbhai Rathwa ji and Shri R. Velu ji. 

          Under the able leadership of Dr. Manmohan Singh ji, hon. Prime Minister, and dynamic guidance of Shrimati Sonia Gandhi ji, UPA Chairperson, this is the sixth Railway Budget in the row, where there has not been a single rupee increase in the fare.  On the contrary, the hon. Railway Minister has given Rs. 90,000 cash surplus to the national exchequer which is very praiseworthy, and I feel that it will go down in golden letters of the Railway history. 

          Sir, by managing freight business, keeping his farsighted and innovative approach, as his guiding principle, he has been able to achieve astonishing results, and he has turned Indian Railways into a Unique Mega Enterprise, a profit-making organization, in these tough days of recession, and not only the country but the whole world is proud of this achievement.

          Sir, while this Budget is pro-poor and for the Aam Admi,  this Budget also caters to all sections of the society.  Introduction of fully air-conditioned ‘Garib Raths’ and free passenger upgrade facility which has been given are pro-poor. 

          It can be said that overall the Budget presented is a welcome Budget.  I am grateful to the hon. Railway Minister that he has listened to our continuous request from Himachal Pradesh, and the Railway authorities have decided to undertake the survey of the strategically important Himachal’s Pathankot-Joginder Nagar-Mandi-Manali-Keylong-Leh Railway Project. A sum of Rs. 81 lakh has been sanctioned for its reconnaissance, engineering-cum-traffic surveys for construction of new broad gauge rail lines from Bilaspur to Leh via Kullu and Manali, and Joginder Nagar to Mandi.  

          Similarly, a sum of Rs. 23 lakh has also been sanctioned for updating the survey of gauge conversion of 189 kilometres Pathankot-Joginder nagar railway line.

          Sir, with the implementation of the project, the Union Government would be saving adequately over the transportation cost of men and material to our national borders, besides saving the environment and ecology of that area. Sir, I had served in Leh, and I know that if this railway line is given, then I would say that it would be an achievement not only by Shri Lalu Prasad Yadav ji but by the nation as such, and our Armed Forces will be proud of this railway line.

          In addition, I would also like to mention that this time Kalka-Shimla railway line has been declared as a world heritage site by UNESCO, and I feel that it will also receive the hon. Minister’s attention for its upkeep and care.[H43] 

[S44] 

          Sir, I wish to emphasise that there is a need to pay more focussed attention towards rail connectivity in the northern part of our country, keeping in view its geo-strategic location, as also to exploit its hydro-electric and tourism potential and to meet horticulture and agriculture market needs of its population. Now, I would like to give a few suggestions regarding issues concerning my constituency.

          महोदय, मैं लालू प्रसाद जी से विनम्र निवेदन करना चाहूंगा कि जब वे पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती राबड़ी देवी के साथ स्वयं शिमला आए थे, तब मैंने आपको दो दिन खुद कंडक्ट किया था। माननीय उपाध्यक्ष महोदय भी जानते हैं कि यह धार्मिक स्थान है। मैं स्वयं भी वहां जाता हूं। मेरा अनुरोध है कि जिस प्रकार से आपने उस समय अपने सभी आफिसर्स को कहा था कि यहां का अच्छा सर्वे करो। सर्वे हुआ भी था, परन्तु मैं चाहता हूं कि एक बार डेफिनेट सर्वे और हो। जिस प्रकार आपने नांदेड साहब को और पंजाब में आनंदपुर साहब को जोड़ा है, उसी तर्ज पर अगर आप पॉवटा साहब को जोड़ देंगे, तो न केवल वहां के वासी आपके ऋणी होंगे, बल्कि पूरा हिमाचल आपका ऋणी रहेगा। जब अंत में आप बोलें, तो मेरी आपसी प्रार्थना है कि कम से कम यहां का डेफिनेट सर्वे करने के लिए जरूर कह दें। प्रधानमंत्री जी ने भी स्वयं यह कहा है और मैं उपाध्यक्ष महोदय से भी प्रार्थना करूंगा कि आप भी कहें। यहां हर साल 20 लाख से ज्यादा तीर्थयात्री तीर्थयात्रा को जाते हैं। यहां से हेमकुंड साहब को जाते हैं या केदारनाथ को जाते हैं या बदरीनाथ को जाते हैं, यह बहुत श्रे­ठ स्थल है।

          It is a very real cultural-religious tourism centre. I appeal to you, Sir, to please order the survey of this important line either from Jagadhari side, because there is already a railway line existing between Jagadhari and Ambala, or from Dehradun side, depending on technical considerations.

          Secondly, this region is an industrial hub. If you improve Shivalik Range and take it to Dawla Ghat, where Ambuja Cement’s factory is also there, it would be better. It was previously agreed to, but I think it got held up somewhere. If you could kindly get these two surveys done, I shall be grateful.

          Finally, I would request the hon. Railway Minister to order implementation of already planned or approved rail projects. I would even suggest that for speedy implementation, a ‘Rail Board’ may be constituted to have a constant eye on such projects, in the public interest. It will be very kind of you.

          With these words, I once again support this Interim Railway Budget, which is innovative, pro-poor and forward-looking. Thank you.

                                                                                                         

 

SHRI B. MAHTAB (CUTTACK): I stand here to deliberate on Int erim Railway Budget Demands for Grants on Accounts for 2009-10.  Railways which are the most preferred mode of transport for the masses in India, running 9 thousand trains, reaching 8 thousand stations and handling approximately 1.4 crore passengers per day has a number of commitments in its “Citizen’s Charter on Passenger Services on Indian Railways” to provide safe and dependable train services to the passengers and ensure adequate passenger amenities in train and railway stations.  This includes provision of clean and hygienic surroundings both at railway stations and in trains.  But, I am sorry to mention that Indian Railways are the most dirtiest rail services ever found in this world.  Once “Operation Cleanliness” was launched and a Task Force was constituted to address the issues but nothing much has happened.  Inadequacy of standards, action plan and norms on cleanliness, absence of an unified department responsible for cleanliness and involvement of multiple departments, insufficient expenditure on cleanliness and inadequacy of policy on waste management has contributed to this dismal state.  Even today, in this 21st century, cleanliness is largely viewed as a secondary activity, subservient to other activities such as maintenance.  Why can’t a coach be certified fit for next journey as a being done by maintenance for cleanliness activities also.  Once this is done responsibility can also be fixed.  Similarly maintenance of cleanliness in the  circulating area outside the station building and no platforms, in the course, waiting rooms, retiring rooms, toilets, tracks adjacent to platforms, foot over bridge and  drains and severs, inside the station premises is urgent as well as necessary. But everywhere it is found wanting. It is because there is no systematic mechanism in place to monitor it.  Deficiencies in waste collection and disposal, inadequacies in the provision of infrastructure, passenger amenities, inadequate training, all have compounded to make the situation even worse.  Multiple departments are involved in cleanliness activities leading to

 

* Speech was laid on the Table

lack of coordination among them.  There is no accountability, there is no

responsibility. Failure to prevent unauthorized persons from entering station premises have compounded the problem.  Railways have no mechanism to assess or control the level of expenditure on maintenance of cleanliness in stations and in trains nor there is any policy on waste management. Railways have neither developed any standards as benchmarks nor formulated any norms at zonal level for ensuring cleanliness and sanitation in railway stations, trains and tracks. Why can’t you rope in reputed NGOs for the job of cleanliness and sanitation on Indian Railways?  The system and practices followed in Delhi Metro have been appreciated by passengers in Delhi.  Can’t you incorporate some of these tried and tested methods?  As there is no resource crunch with respect to maintaining and monitoring of cleanliness and sanitation, do you expect increase in allocation or need to prioritize the expenses on Railway sanitation?  The Ministry had earlier proposed to take up five stations per division and turn them into model stations.  What is the progress?

 

Earlier I had raised the issue of installing CCTV cameras in big stations.  How many stations have been equipped with CCTV cameras? What is the current status?  Are they effective in promoting sanitation on the railway premises?  Do you have any effective mechanism in place for regulation of crowd in railway stations?

 

          Now I come to the second aspect.  It relates to safety.  We have been repeatedly  told that the Railways share of the total transport share has come down from 53 per cent in the 4th Five Year Plan to 37 per cent in the 9th Five Year plan.  In 2004-05, Railways’ carried around 600 million tonne of freight comprising 64 percent of the total revenues earned by the Railways.  This proves that freight operations needs to be strengthened  for profitability of Railways.  A sound, safe and efficient modern infrastructure is required for smooth passenger as well as freight operations.  This can only be done by upgrading the existing infrastructure which may improve the passenger and freight operations.  The other is providing facilities which are specifically aimed at creating infrastructure for improved freight operations.  Proper upkeep, renewal of rails, strengthening of bridges fall in the first category whereas acquisition of more wagons and locos, acquiring new rolling stock suitable for hauling heavier loads etc. fall in the second category.  Dedicated freight corridors and their feeder routes are also required to be strengthened and improved.

 

When the expenditure under major plan heads is an investment aimed at creating infrastructure for improved freight and passenger services, I fail to understand why it does not commensurate with the level of Railway earnings.  Why the amount provided through various funds created by Indian Railways for infrastructure  development has not been utilized in full over the past years?  In this scenarios, how does the Railways plan to provide a sound, safe and efficient modern infrastructure for smooth freight operations?

          Increase in the axle load is an area of concern. This increase was permitted with the objective to carry more tones per wagon thereby reduce the unit cost of operations by saving on locomotives and additional wagons.  These were to be done duly ensuring safety in train operations.  Prior to November, 2004 wagons were allowed to be loaded up to (carrying capacity) CC+2 tonne where the permissible axle load was taken as 20.32 tonne.  From November onwards, the loading was permitted upto CC+4+2 tonne.  In March and May, 2005 you permitted running of these wagons loaded upto CC+8+2 tonne on 16 identified iron-ore routes.  The extra loading was to be restricted to the maximum axle load of 22.82 tonnes.  This was done without any study by any specialized agency on the technical feasibility. You say that this decision was taken on the basis of field experience. But are you aware about the cost implication involved in running the freight trains with increased load. Have you made any study on the effect of costs and earnings?  There has been substantial growth in loading no doubt but have you reviewed the adverse impact on track, rolling stock and bridges? We are told all BG routes of Indian Railways have been notified as CC+6 routes.  Iron-ore routes have been strengthened.  But how many distressed routes you have?  As on 1.4.2007, 75 number of distressed bridges were reported by your zonal Railways out of which 55 were targeted to be rebuilt during 2007-08 and balance bridges were to be taken up subsequently.  What is the progress?  This is gross callousness.

          It has also been found that wagons were loaded to the extent of 24.49 tonne per axle as against the permitted axle load of 22.82 tonne.  This has occurred in rail fractures and weld fractures on Central and South Eastern Railway.  What steps you have taken?  Have you fixed any responsibility?   Have you taken the erring staff into task?  There is not a single instance?  Yet you say you would take care of safety.  Have you made assessment of the extra expenditure required for the repair and maintenance of rolling stock and also the impact of extra time required for such repairs?   As per instructions issued by Railway Board in March and May, 2005, the enhanced loading on specified routes was to be permitted subject to fulfillment of certain conditions.  One was installations of adequate number Wheel Impact Load Detectors called WILD on the Zonal railways.  Why Installation of WILD been delayed?  All this clearly shows that adequate steps have not been taken to provide safe and dependable train services. 

          Just within 8 hours after the Railway Minister read out his Interim Budget speech Coromondol Superfast Express met with an accident near Jajpur Road of Orissa which claimed 9 lives and left scores injured. Train accidents and safety measures were not in the Minister’s mind when he presented the Rail Budget.  What is more alarming is that due to lack of communication between the railway control room at Khurdha Road station and the Jajpur Road station master, coupled with poor maintenance of railway track, Coromandol Express derailed.  Khurdha Control Room had asked the Jajpur station Master to alert the train driver to reduce its speed because a semi-automatic track-changing junction was not in a position to take the entire load of the train, which was running at a high speed of more than 100 km/hour.  I am informed that the Station Master was also asked to keep the signal on red till the train reduced its speed to cross the junction.  But the linesman was not properly informed about the instructions. As a result, the signal was kept green and the track was also aligned, which was not supposed to be done for a train coming at a high speed.  How could this happen?  If this is not human error, what else is? 

          Third aspect is the high interest rates have begun taking a toll on key infrastructure projects.  The Government accepted that there will be a massive 50 per cent increase in the financial estimate for modernization of new stations which are to be built of high world standard.  Bhubaneswar station was identified along with New Delhi and Bangalore. But what is the progress?  Modernization programme is mired in controversy. Nobody knows when these projects will be completed. Fourthly, the unmanned level crossings are known to have taken a heavy toll almost every year.  Isn’t the Government aware that technology has been developed under which gates can be closed automatically when a train approaches.  The pedestrians can be warned through an audio system.  If the gate is not closed then train will be stopped.  Has any attempt been made by the Government to procure the technology to operate a selected gates as a part of the pilot project?   I would suggest, identify certain unmanned gates where such trial can be launched.  Accidents have decreased from 72 in 2006-07 to 65 in 2007-08 no doubt but it is still a cause of worry when out of 34 thousand 152 level crossings in the country only 16 thousand 775 are manned.  Since most of the unmanned level crossing accidents are caused due to negligence of road users, public awareness is necessary no doubt but attempt should be made to go in for faceless gates at the earliest through new technology.

          The interim railway budget for 2009-10 is cleverly packaged to tom-tom the scoreboards of the Railway Minister but as the economy grinds to a slowdown noticeable from October, 2008 which impacted the loading and freight earnings in October and November, the Minister’s claim that “the situation has shown some improvement”  appears to be an adroit gambit that might not pay off. His announcement of new lines, introduction of new trains, extension of trains and increase in frequency of extant trains been done keeping the ensuring election in view but the cut in passenger fares upto 2 percent will drain the system of massive Rs. 700 crore in a full year if implemented from the next financial year.

          I would expect an answer from the Railway Minister whether, Railway have subsumed the safety surcharge in the passenger tariff for par-funding the Dedicated Freight Corridor and other infrastructure projects? Why does not the Railways review this safety surcharge and replace it with development charge?   As it is, passenger fares were cross-subsidised by the freight rate with the later being patterned after a dynamic model of pricing.  The loss borne by the Railways in running suburban services, every year is around Rs. 900 crore which gets sucked up in the black hole of freight earning revenue.

          How much the Railways spend on its employees?  With an existing employee scroll of 14 lakh and 11 lakh pensioners, I am told the total wage bill of staff in 2007-08, excluding pensionary benefits totaled Rs. 18,565 crore or 45 per cent of ordinary working expenses. Fuel cost account for close to 30 per cent and other materials and services another 25 percent.  With costs and expenses preempting so dominantly, what is the system left with for maintenance of rolling stocks, modernization or track renewals to keep the wheel of the system running without bump or blip is an open secret.  At the end of the day the system continues to be dogged by lack of functional autonomy at zonal level or broad level.

          Although the Minister has consistently maintained that he has filled railway coffer “without putting any extra burden on the common man”, the cumulative impact of the rise-by whatever name, reclassification, rationalization, busy season and superfast surcharge, tatkal etc.-has been an average increase of about 30% in freight rates alone, from 75.5 paise+Kmin 2004-05 to 97.9p/+km in 2008-09.  Iron-ore for export attracts the highest increase of 223% from 81.7 to 264 paise/+km; foodgrain is 54%, from 47.4 to 72.9p/+km; so also fertilizers 43% cement 17%, coal 13% and inputs for steel manufacture 11%. 

          Indian Railways need for resources is enormous. Today some 20% of the projected plan outlay is expected to come through PPP.   Railways management structure and organization has endured over 150 years. The organization needs far fewer tiers of management than the traditional command and control model. In 2005, China among other reforms streamlined the traditional 4 tiered “railway department”, railway office, railway branch, railway station into 3-tiered by removing the railway branch.  Our Railway needs to like-wise streamline its structure and professionalise its cadres. 

          Now I came to an off repeated project of my constituency that is construction of second bridge over river KATHAJODI in Cuttack which comes under East Coast Railways.  I am informed that Indonesian company which was doing the job has fled and now there is some engineering problem for which the bridge construction is delayed.  It was supposed to be completed by this year end but now more than one year is required.  Can the Minister assure us, the exact date and time by which the second bridge over river KATHAJODI will be made available for operation?

          The second opening of Cuttack Railway station is inoperational because there is no direct connectivity to the main road. How could this happen?  I urge upon the Railways to provide adequate funds to acquire the land for the approach road at the earliest so that the investment that is made for the second opening to Cuttack railway stations is operational.

          Before I conclude, I must mention about the recent freight hike.  At a time when the economy is in deep crisis, the Rail Minister decides to hike the freight charges for carrying essential commodities like food grains, pluses and fertilizers by a whopping 8.3 percent.  This simply defies understanding.  There are no pressing economic reasons for the hike.  Today, Railways have a substantial corpus in their kitty.  As of end-December 2008, freight revenues grew nearly 14 percent to over Rs. 39,000 crore.   This at a time when the economy as a whole has only grown at around 7 percent or so.  What’s more, the cost of diesel, a key input, has been reduced three times in the last few months.  Logically, the Railways should have cut rates.  This would have not only provided a booster short to the economy, but would have helped the Railways move towards its stated objectives of increasing its share of freight traffic to 60 percents well as gradually reduce the quantum of cross-subsidy burden on freight.  The timing of the move, just a few months ahead of the peak pre-monsoon season, is bound to make matter worse.

          But logic and Rail Minister do not appear to be well acquainted.  Does the Minister wants to demit office with a surplus?   But that surplus might include avoidable pain.

 

 

 

 

ओ।श्री किशन सिंह सांगवान (सोनीपत)ः  महोदय, वर्ष 2009-10 का रेल बजट माननीय रेल मंत्री जी ने पेश किया, उस पर यह चर्चा चल रही है। मुझे बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि यू.पी.ए सरकार के रेल बजटों में हरियाणा प्रदेश पूरी तरह से उपेक्षित हुआ है। माननीय रेल मंत्री बैठे हैं, मैं लालू जी को चैलेंज करता हूं कि पूरी बजट स्पीच में हरियाणा का एक भी अगर कहीं नाम किसी प्रोजैक्ट में हो तो मैं अपने शब्द वापिस ले लूंगा। हरियाणा में कोई नई रेल गाड़ी नहीं, कोई नया रेलवे स्टेशन नहीं, कोई इलैक्ट्रीफिकेशन नहीं, कोई डबलिंग प्रोजेक्ट नहीं, कोई नया मॉडल स्टेशन नहीं, पूरी स्पीच में हरियाणा की किसी प्रोजैक्ट में कोई हिस्सेदारी नहीं है।  कैसे हरियाणा के लोग इसे बर्दाश्त करेंगे और यह उपेक्षा पूरे पांच साल चली है, कोई इस बार ही नहीं।

 

          दिल्ली देश की राजधानी है। हरियाणा दिल्ली के तीन तरफ बसता है।  दिल्ली की आबादी लगातार बढ़ रही है और नैशनल कैपिटल रीजन इसीलिए बनाया गया था कि दिल्ली पर जो जनसंख्या का दबाव बढ़ रहा है, उसको कम करने के लिए दिल्ली के आस-पास के इलाकों में सुविधाएं दी जाएं ताकि दिल्ली पर ज्यादा दबाव न पड़े।  दिल्ली में आने वाली लगभग 80 प्रतिशत रेलगाड़ियां हरियाणा की धरती से गुजरती हैं और हरियाणा की जनता को कोई सुविधाएं नहीं हैं।  जितनी पीछे से मेल या एक्सप्रेस गाड़ियां आती हैं, उनका स्टोपिज भी नहीं है और नई पैसेंजर गाड़ियां भी आप कोई नहीं चला रहे हैं।

          महोदय, रेल मंत्री सदन में बैठे हुए हैं।  वे बताएं कि लोड़ में कितना परसेंटेज रोड़ ट्रंसपोर्ट की वजह से घटा है।  पहले देश का माल 70 प्रतिशत रेलगाड़ियों से ढोया जाता था। रोड़ ट्रंसपोर्ट से केवल 30 प्रतिशत माल ढोया जाता था, लेकिन आज स्थिति पलट गई है।  आज रोड़ ट्रंसपोर्ट के जरिये ज्यादा लोड ढोया जा रहा है। उसके मुकाबले में रेलवे का परसेंटेज कम हुआ है। लेकिन इन आंकड़ों का जनता को पता नहीं है। 

 

          सुरक्षा की दृष्टि से इस बजट में कोई व्यवस्था नहीं की गई है।  एक समय आएगा जब इस देश की जनता सारी स्थिति से अवगत हो जाएगी। यह रेल बजट है, हम इसका समर्थन कैसे करें? इस बजट में हरियाणा प्रदेश की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। रेलवे का काफी बड़ा स्टाफ है, उसमें लाखों कर्मचारी हैं जो स्टाफ वैलफेयर प्लान बनाया गया था, उसका क्या हुआ, इस बारे में मंत्री जी से जानना चाहते हैं। हमने रेल कर्मचारियों के लिए क्या किया, उसका आज तक कोई जिक्र नहीं है। 

 

          मैं अपने क्षेत्र की दो चार बातें बताना चाहता हूँ आज आम जनता में रेल के बारे में मान्यता है, आम जनता में यह फीलिंग है- “लालू की रेल बिल्कुल है फेल, न चलती है समय पर चलती है लेट। ”  लोगों में यह धारणा बन गई है और ये वाहवाही लूट रहें हैं।

          हमारे प्रदेश से काफी बातें जुड़ी हुई हैं जिन्हें में थोड़े समय में आपके सामने रखना चाहता हूँ। हम कोई नई बात नहीं उठा रहे हैं।  मेरी थर्ड टर्म है। मैं हर रेल बजट में इन्हीं बातों को रखता हूँ लेकिन हमारी बात सुनी नहीं जाती। मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूँ कि दिल्ली-पानीपत सेक्शन पर सोनीपत, गन्नौर एवं पानीपत स्टेशनों पर 04.10.2007 को पार्लियामैंट रेलवे स्टैंडिंग कमेटी के 16 सांसद व उनके साथ पूरा रेल विभाग उसमें मुख्यतः जी.एम. नार्दन रेलवे, डी.आर.एम. दिल्ली डिविजन और अन्य संबंधित अधिकारी निरीक्षण हेतु आए थे।  जो घोषणाएं की गईं थी, उनमें से ज्यादातर घोषणाएं पूरी नहीं की गई। 

 

          मैं आपके माध्यम से अपने क्षेत्र की कुछ समस्याओं को पूरा करने की मांग करता हूँ कि एक ई.एन.एस. गाड़ी जो दिल्ली से चलकर सोनीपत जाती है, उसे पानीपत तक एक्सटैंड किया जाए, गन्नौर रेलवे स्टेशन पर सुबह 10.20 बजे से 3.00 बजे तक कोई सवारी गाड़ी नहीं चलती, इस समय के दौरान एक सवारी गाड़ी चलाई जाए, सोनीपत रेलवे स्टेशन पर शान-ए-पंजाब 2497/2498 गाड़ी एवं दिल्ली-पठानकोट एक्सप्रेस 4047 अप गाड़ी का ठहराव किया जाए, गन्नौर रेलवे स्टेशन पर जम्मू मेल 4034 डाउन व 4673/4674, 4649/4650 अप व डाउन शहीद एक्सप्रेस गाड़ी का ठहराव किया जाए, नरेला स्टेशन पर हिमालयन क्वीन 4095/4096 अप व डाउन तथा 4673/4674, 4649/4650 अप व डाउन शहीद एक्सप्रेस गाड़ी का ठहराव किया जाए, गन्नौर रेलवे स्टेशन पर रिजर्वेशन कांउन्टर खोला जाए व बुकिंग स्टॉफ बढ़ाया जाए। सभी सवारी गाड़ियों में डिब्बों की संख्या 16 से 20 की जाए, रोहतक-पानीपत सैक्सन पर जयपुर चण्डीगढ़ एक्सप्रेस गाड़ी का गोहान स्टेशन पर ठहराव किया जाए। जींद-सफीदों-पानीपत सैक्सन पर केवल दो ही गाड़िया चलती हैं। इस सेक्शन पर गाड़ियों की संख्या बढ़ाई जाए। इसके अतिरिक्त दिल्ली-रोहतक सैक्सन पर सांपला स्टेशन पर 2555/2556 गोरखधाम एक्सप्रेस तथा नांगलोई स्टेशन पर 4723/24 कालिन्दी एक्सप्रेस व 4035/36 धोलाधार एक्सप्रेस का ठहराव किया जाए, इस रूट पर चलने वाली सभी सवारी गाड़ियों में चार-चार डिब्बे बढ़ाए जाएं, मसूरी एक्सप्रेस का नांगलोई, बहादुरगढ़, सांपला स्टेशनों पर ठहराव करते हुए, इस गाड़ी को रोहतक, जींद /रोहतक-भिवानी तक एक्सटैंड किया जाए। 

          मैं रोड़ ओवर ब्रिज की मांग करता हूं।  जींद-गोहाना रोड़ पर गोहाना में इतना ज्यादा ट्रैफिक है कि एक-एक घण्टा रूकना पड़ता है।  मैं वहां के लिए रोड़ ओवर ब्रिज की मांग करता हूँ।  जींद , सोनीपत, गन्नौर स्टेशनों को मॉडल स्टेशनों की सूची में शामिल किया जाए, दिल्ली-रोहतक-गोहाना-पानीपत रूट पर इन्टरसिटी ट्रेन चलाई जाये।  ये सारी बातें पुरानी हैं मैं कोई नई बात नहीं उठा रहा हूँ।  लेकिन बहुत अफसोस है कि इन पर कोई अमल नहीं हो रहा है। इसलिए मैं माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध करता हूँ कि इन सहानुभूतिपूर्ण विचार करके हरियाणा की जनता के लिए बजट में कुछ न कुछ प्रावधान करें।

 

          इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ। आपने मुझे समय दिया, इसके लिए मैं आपका आभार प्रकट करता हूँ। 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

*श्री भुवनेश्वर प्रसाद मेहता (हज़ारीबाग): माननीय मंत्री जी ने जो रेल बजट पेश किया है एवं इसके पहले भी जो लगातार 2004-05 से जबसे इन्होंने रेल मंत्रालय का भार संभाला है, बजट पेश किया। इन्होंने यात्री किराये में वृद्धि नहीं किया बल्कि घटाया है। मैं इसके लिए माननीय मंत्री जी को बधाई देता हूँ। मैं इसलिए भी बधाई देता हूँ कि इन्होंने रेल मंत्रालय को 90 हजार करोड़ का मुनाफा विगत पांच वर्षों में किया। रेल मंत्रालय एवं माननीय मंत्री जी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इन्होंने रेलवे कुली को गैंग मैन में बहाल कर दिया।

          महोदय, सबसे बड़ी विडम्बना है कि माननीय मंत्री जी का शुरू से ही झारखंड राज्य के साथ भेदभाव रहा है। मैं शुरू से ही हजारीबाग एवं झारखंड की रेल समस्याओं को उठाता रहा हूँ एवं झारखंड के सभी सांसदों को लेकर स्मार-पत्र भी दिया। रेलवे बजट के आय का बहुत बड़ा हिस्सा झारखंड राज्य से प्राप्त होता है। कोडरमा से हजारीबाग एवं हजारीबाग से बड़काकाना रेल लाईन के कार्य में विगत एक साल से तेजी आयी है पर उसमें और तीव्र गति लानी है ताकि वर्ष 2009 तक यह कार्य पूरा हो सके एवं हजारीबाग की जनता की चिर-प्रतीक्षित मांग पूरी हो सके।

          हजारीबाग उत्तरी छोटानागपुर का प्रमण्डल भी है एवं दुर्भाग्य है कि अभी तक रेल लाईन से नहीं जुड़ पाया।  रामगढ़ जो नव सृजित जिला है वहां से रांची राजधानी सप्ताह में एक दिन एव कोडरमा होकर सप्ताह में दो दिन दिल्ली जाती है। इसके अलावा एक माह पूर्व रेल मंत्रालय ने गरीब रथ भी रांची से दिल्ली होकर चलाया है यह भी सप्ताह में 2 दिन बड़काकाना जंक्शन होकर जाती है।  दुखद है कि न तो रांची राजधानी का ठहराव बड़काकाना जंक्शन पर है और न गरीब रथ का। मैं माननीय रेल मंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूँ कि संबंधित क्षेत्र में लगभग 50

* Speech was laid on the Table

हजार कोयला मजदूर हैं।  रामगढ़ में सिख रेजीमेंट का छावनी परिषद है। बी.टी.पी.एस. ग्लास फैक्ट्री, जिन्दल सहित छोटे-बड़े दर्जनों उद्योग हैं।  यहां पर दोनों ट्रेनों का ठहराव न होना एवं सीटों का आरक्षण न होना हजारीबाग एवं रामगढ़ की जनता के साथ घोर अन्याय है।

 

          अतः मैं माननीय मंत्री जी से मांग करता हूँ कि रांची राजधानी सप्ताह में चार दिन कोडरमा होकर एवं तीन दिन बड़काकाना जंक्शन होकर चलाया जाए एवं बड़काकाना जंक्शन में भी सीटों का आरक्षण दिया जाए।  साथ-साथ गरीब रथ का भी परिचालन सप्ताह में तीन दिन बड़काकाना जंक्शन होकर एवं तीन दिन कोडरमा होकर चलाया जाए और बड़काकाना जंक्शन में आरक्षण एवं ठहराव की सुविधा दी जाए।

 

          रामगढ़ जिले के चैनपुर एवं रांची रोड के बीच ग्राम-दिघवार में रेलवे हॉल्ट बनाने की मांग 1998 से वहां की जनता कर रही है। अभी 29 जनवरी, 09 को 10 हजार से अधिक लोगों ने रेलवे लाईन को पांच घंटे तक जाम किया और ए.डी.आर.एम. एवं जिला प्रशासन के इस आश्वासन के बाद कि इस संबंध में उचित कार्रवाई की जायेगी, मेरी उपस्थिति में वार्ता के बाद जाम हटाया गया। इस संबंध में डी.आर.एम. धनबाद, रेलवे संघर्ष समिति, दिघवार हॉल्ट का मेरी उपस्थिति में बड़काकाना जंक्शन के ए.डी.आर.एम. के कार्यालय में 10 फरवरी, 2009 को वार्ता भी हुई और डी.आर.एम. ने कहा कि दिघवार हॉल्ट के लिए हमने अपने स्तर पर महाप्रबंधक, हाजीपुर को भेज दिया।  जल्द ही यह मामला रेलवे बोर्ड में भी भिजवाने के लिए प्रयास करेंगे।  माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूँ कि यह किसानों का इलाका है एवं यहां बड़े पैमाने पर सब्जी का उत्पादन होता है। यातायात की सुविधा नहीं रहने के चलते किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता है एवं उन्हें हर वर्ष करोड़ों की क्षति होती है। अतः मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूँ कि दिघवार में रेलवे हॉल्ट अतिशीघ्र बनवाने का कष्ट करें। 

          बड़काकाना जंक्शन एवं खिलारी के बीच में राय स्टेशन अवस्थित है।  इस स्टेशन से रेलवे बोर्ड को आमदनी में देश में आठवां स्थान है।  लेकिन दुख की बात है कि यहां एकाध पैसेंजर ट्रेन को छोड़कर किसी भी एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव नहीं है।  इस सवाल को मैं लगातार पांच वर्षों से संसद में उठाता रहा हूँ एवं स्मार-पत्र भी दिया है।  पर अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है।  अतः आग्रह है कि बड़काकाना जंक्शन होकर जानेवाली सभी एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव राय स्टेशन में किया जाए। 

 

          रांची रोड में एवं बड़काकाना जंक्शन के बीच मनवा फुलसराय एवं जहां से रेलवे लाईन गयी है मनवा फुलसराय सहित अन्य ग्रामीणों के 50 हजार से अधिक लोगों का आना-जाना रेलवे क्रासिंग से है। वहां पर एक रेलवे फाटक का निर्माण अत्यंत जरूरी है।  इसे तत्काल किया जाए।

 

          रांची रोड स्टेशन के उपर से एन.एच.-33 रोड जाती है।  रांची रोड रामगढ़ से रोज हजारों गाड़ियों का आना-जाना है।  इस पुल का निर्माण सैंकड़ों वर्ष पूर्व हुआ है जो जर्जर अवस्था में है। इस पुल के एक तरफ रांची रोड स्टेशन है एवं दूसरी ओर भारत पेट्रोलियम का भंडार मात्र पुल से 50 गज की दूरी पर है।  इस संबंध में कभी भी दुर्घटना की आशंका लगी हुई है। इस संबंध में भी मैंने माननीय मंत्री जी आपको पत्र लिखा है।  पर इस पर भी अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है।  इस पर भी तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। 

 

          आसनसोल से बड़काकाना जंक्शन वाया चन्द्रपुरा, बोकारो थर्मल गोमिया एक ई.एम.यू. ट्रेन चलाने के लिए लगातार आंदोलन चलाये जा रहे हैं  एवं रेलवे विभाग ने इसकी स्वीकृति भी दे दी थी और समाचार-पत्रों में टाईम-टेबुल भी प्रकाशित हो गया था, पर न जाने किन कारणों से इस रेल का परिचालन नहीं हुआ। अतः जनहित में आसनसोल से बड़काकाना जंक्शन तक ई.एम.यू ट्रेन चलायी जाए। 

 

          माननीय मंत्री जी से अनुरोध करता हूँ कि उपरोक्त समस्याओं का समाधान करते हुए निम्नलिखित बिन्दुओं पर विचार किया जायः-

·       रांची राजधानी को प्रतिदिन किया जाय एवं इसके खान-पान में सुधार किया    जाए एवं पुराने कोच को बदल कर नया कोच दिया जाए।

·       सियालदह राजधानी का ठहराव कोडरमा में किया जाए।

·       महाबोधी ट्रेन का विस्तार कर गया से धनबाद तक किया जाए।

·       रांची रोड एवं गोमिया के बीच अवस्थित चैनपुर स्टेशन में जहां एक तरफ टाटा का एवं दूसरी और सी.सी.एल का रेलवे साईडिंग है जहां प्रतिदिन दर्जनों रैक लोडिंग होती है कभी-कभी घंटों चैनपुर रेलवे क्रॉसिंग जाम होने के चलते आवागमन बाधित रहता है वहां तत्काल आम जनता की सुविधा हेतु चैनपुर रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर ओवरब्रिज का निर्माण किया जाए।

 

·       झारखंड राज्य का धनबाद मंडल हाजीपुर जोन में और रांची एवं चक्रधरपुर दक्षिण-पूर्व रेलवे कोलकाता में है। अतः हमारी मांग है कि इन तीनों मंडलों को मिलाकर एक अलग जोन गठित किया जाए, जिसका मुख्यालय रांची किया जाए। साथ ही बोकारो स्टेशन को भी आद्रा मंडल से हटाकर रांची मंडल में किया जाए।

·       बोकारो-रांची-दुर्ग होते हुए रायपुर तक ट्रेन सेवा चालू की जाय। हावड़ा-भोपाल ट्रेन का ठहराव बोकारो थर्मल स्टेशन में किया जाए।

·       धनबाद से सूरत तक नया मेल ट्रेन चालू किया जाए।

 

 

*श्रीमती कल्पना रमेश नरहिरे (उस्मानाबाद)  :  मानननीय मंत्री जी ने जो अंतरिम रेल बजट सदन में रखा है उस पर मैं कुछ मांगे कर रही हूँ।  आशा करती हूँ कि माननीय मंत्री जी इन मांगों को गम्भीरतापूर्वक विचार कर इन्हें पूरा करने की कृपा करेंगे।

·       नई गाड़ी हैदराबाद से दिल्ली जिसका ठहराव उस्मानाबाद, कुर्दुवाडी, लाटूर में भी हो।

·       उस्मानाबाद मुम्बई गाड़ी में डिब्बों की संख्या बढ़ायी जाए। 

·       उस्मानाबाद पूना के बीच नई रेलगाड़ी।

·       तुलजापुर रेलवे लाइन सर्वे करके अतिशीघ्र काम शुरू किया जाए जिससे वहां आने वाले दर्शनार्थियों को कठिनाई का सामना न करना पड़े।

·       मराठावाडा क्षेत्र को इस बजट में कुछ भी पैसा नहीं दिया गया है जबकि यहां पर रेलवे को बढ़ावा देकर यहां नई गाड़ियां चलाई जाएं व सभी संकरी पटरी को बड़ा किया जाए। पीने का पानी, शेड, शौचालय, कैंटीन, क्लॉकरूम की व्यवस्था उस्मानाबाद रेलवे स्टेशन पर नहीं है।  क्षेत्रीय मुख्य प्रबंधक या वाणिज्य प्रबंधक, इनमें सारी व्यवस्था उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।

·       उस्मानाबाद रिर्जवेशन काउंटर 4 घंटे सुबह एवं 4 घंटे शाम को खुलता है इसको पूरे दिन खोले रखा जाए अर्थात 12 घंटे खुला रखने की व्यवस्था की जाय। 

 

 

 

 

 

 

 

 

*Speech was laid on the Table.

 

 

 

 

 

SHRI P. KARUNAKARAN (KASARGOD): Sir, our Railway Minister, Shri Lalu Prasad, has introduced Interim Railway Budget for the year 2009-2010 in this House. Indian Railways are the biggest public undertaking in our country having about 14 lakh workers. It is seen in the Budget that passenger as well as freight earnings have increased substantially. The freight loading has increased by 9 per cent while passenger traffic has increased by 19 per cent. … (Interruptions) It is seen that within the span of five years, Railways have earned profit of Rs. 90,000 crore. … (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Devendra Prasad Yadav, you are a responsible hon. Member.

… (Interruptions)

SHRI P. KARUNAKARAN : Within these five years, it is seen that there is a profit of Rs. 90,000 crore. It is really a good progress that we can see under the leadership of Shri Lalu Prasad and his team. I really appreciate this because though it is a public undertaking, it is running with profits. Generally, there is a criticism that public undertakings cannot be governed along with earning profits. So, as far as this aspect is concerned, Railways is an exception.

Indian Railways is the symbol of national integration[S45] .

Every day, lakhs and lakhs of people travel in the Railways irrespective of religion, caste or creed. Therefore, it shows the unity, safety and integration of the Railways itself. Hence, this aspect has to be borne in mind when we speak about the Railway Budget.

          We were really very happy the last time around when we participated in the discussion on the Railway Budget, but this time around I do not know why many of the projects or many of the suggestions given by the Government of Kerala or given by the MPs from Kerala are not included in it. I think that the Ministry of Railways should take note of this issue. I do understand that this is an Interim Budget and that it has got its own limitations, but there may be dissatisfaction among the people in the States also when they see that there are large numbers of trains, new lines, etc., for some States and on the other hand no such facilities extended to some other States. Therefore, there should be a balanced approach towards all the States when we think about the Railways. Railways are a prerequisite for the development of each sector in each State, and that has to be taken into account when we speak about the Railway proposals. It is sad to see — when we go into the details of the Railway Budget of 2009-2010 — that such a balanced approach is not seen in this Budget. Therefore, this aspect should be taken into account by the Minister of Railways, and it should be given due importance.

          It is a fact that many of the long-route trains are lacking sufficient number of coaches and other facilities. It is said by all that the coaches sent to Kerala are old and outdated. This issue has already been pointed out by MPs from Kerala in this House. I believe that new coaches are an essential part of the trains that run on long-distance routes.

          It is true that the number of accidents have reduced compared to last year, that is, from 194 to 117. Of course, the Railways have taken a number of steps including more police force to give protection to the passengers. At the same time, it is surprising to note that a major incident took place on 25 January 2009 at Nagpur in which the passengers of the Kerala Express were looted. But more surprising is the fact that the Railway authorities say that they are unaware of this incident. Many of the passengers who travel on long-distance routes, especially, the passengers from Kerala have to travel a long distance, and they have become victims of this, especially, women. Therefore, more attention has to be given with regard to protection of passengers in these trains.

          The service of Railways has to be considered not only for commercial purpose, but it should have a social-obligation angle also. The prime motto of the Railways should be to give better facilities to the passengers. Therefore, the Government of Kerala and the MPs from Kerala have given a large number of suggestions. Shri Lalu and Shri Velu know about it very well as we met them a number of times for the same.

          I would like to mention some of the most important issues. A large number of Keralites are residing and working in different parts of the country. There is no mention of a long distance train in this Budget as far as Kerala is concerned. As we go through the pages of the Budget speech we find that there are 14 surveys; three gauge conversions; eight doubling works; 43 new trains; extension of 15 trains; and frequency of 14 trains has been increased. But we do not see mention of the State of Kerala anywhere. I do not know as to what has happened there.[r46]  

18.00 hrs.

You say that this is just an Interim Budget and at the same time there are trains, lines, and doubling work sanctioned in other States. … (Interruptions) We have given representations to the Government. As far as the number of trains, number of new lines, doubling of lines is concerned, Kerala is neglected. I would request that there should be at least one train from Delhi to Trivandrum because thousands and thousands of Keralites are residing here.

          Frequency of Sampark Kranti and Rajdhani Express has to be increased. Otherwise, there will be no satisfaction among the people of Kerala. A large number of people from Kerala, especially from Malabar area are working in Bangalore. Currently the means of travel for them are Kannur-Yashwantpur Express and the Kochuveli-Bangalore Express. Our demand is that frequency of these two trains be increased to at least two or three days. There is no train provided for the passengers of the State alone. There are two trains – Tirunelveni-Trivandrum-Mumbai, and Tiruchirapalli-Bilaspur. But there is no train for the State alone.

          The traffic density in Kerala is very high, everybody knows it. It is even higher than that in many of the bigger States. So, you have to sanction some more trains and some more facilities. You can extend the existing trains, or increase the frequency of some trains, or introduce new trains. You have not done any such thing.

उपाध्यक्ष महोदय : करुणाकरन जी, आप एक मिनट रुकिये। जैसा मैंने पहले कहा है कि मेरे पास 60 से ज्यादा मैम्बर्स हैं, जो बोलना चाहते हैं। अब छः बज गये हैं, हाउस की क्या राय है?

श्री रामजीलाल सुमन (फ़िरोज़ाबाद)  : सर, एक घंटे समय बढ़ा दिया जाए।

उपाध्यक्ष महोदय : चार घंटे का समय अलाट किया गया है और अभी एक घंटा एग्जास्ट हुआ है।

श्री संतोष गंगवार : सर, चार घंटे अलॉट हुए हैं, लेकिन यह होना चाहिए कि जब तक सब बोलना चाहें, तब तक सब बोलेंगे।

उपाध्यक्ष महोदय : यह पॉसिबल नहीं है। क्या आप ठहरेंगे?

श्री संतोष गंगवार : जी हां।

अनेक माननीय सदस्य: ठीक है, दो घंटे बढ़ा दीजिए।

सभापति महोदय : चलो दो घंटे का समय बढ़ा देते हैं। हमने बीच में फैसला कर लिया, चार घंटे की जगह दो घंटे समय बढ़ा दिया। ऐसी सभी की राय है। इसलिए मेरी भी यह राय है कि अगर आप सजैशंस ही दें, अपनी रिक्वायरमैंट ही दें तो बहुत अच्छा रहेगा। बजाय इसके कि आप स्पीचेज लम्बी करें। 

THE MINISTER OF HEAVY INDUSTRIES AND PUBLIC ENTERPRISES (SHRI SONTOSH MOHAN DEV): Before the Parliamentary Affairs Minister left, he told me that there was an understanding to extend the sitting up to 8 o’clock.

MR. DEPUTY-SPEAKER: Extension by two hours makes it 8 o’clock.

SHRI P. KARUNAKARAN : Traffic density is very high in Kerala compared to many other bigger States. This point has to be taken into consideration. It may come as news to the Ministry of Railways that there is no train between 9 a.m. and 3 p.m. between Calicut to Mangalore. These two are metropolitan cities. We have given representations many times. Our request is that an inter-city express should be introduced between Calicut and Mangalore. Otherwise, there is no facility at all for the passengers to travel.

          Veluji may remember that when he came to Kasargod to inaugurate extension of train to Mangalore, assessing the need of more trains he himself had announced that the Calicut-Kannur passenger train whould be extended to Mangalore. But that has not materialsed. The Minister made a promise to the public. I think this is the last chance for him, if he has to keep his promise.

          Trivandrum-Ernakulam Janmashatabdi Express can be extended to Shoranur. There is no difficulty for Railways in doing this. That train remains there for eight to nine hours.  At present, EMUs are operated at Palakkad and Coimbatore. Considering the huge population that travels in that train, suburban trains may be operated connecting major cities. In the beginning it can be operated from Ernakulam to Shoranur and from Ernakulam to Alleppey. This also can be considered by the Government.[KMR47] 

          In the last Budget, we remember that there were heated discussions  with regard to Salem.  We, Kerala MPs, have taken a conscious and patient stand on this.  The Government has decided that  a coach factory should be established in Palakkad in Kanjigod. But no action has been taken and nothing is provided in the Budget.  I would request the Government to provide a token provision in the Budget itself.

          There is a fabrication unit in the Joint Venture in Cherthala in Alleppey but no work has been started in spite of the promise given by the Government.  These two things should be taken up without any delay.

          The Government of Kerala has already requested for a Dedicated High Speed Corridor – this has already been taken up during the discussion on 2007 Railway Budget. We have a number of Dedicated Corridors – from Delhi to Mumbai and many other destinations. India’s major international transhipment terminal is coming up at Vishizham. So, Cochin is going to become a major city.  Considering this, I would request the Government to sanction a Dedicated Freight Corridor connecting Trivandrum and other cities, which is also essential. In this regard, the Government has also made a proposal.

          There is no survey included in this Budget. We have given a number of suggestions – surveys of Kalloangod-Thrissure, Edapelly-Guruvaur, Sabarimal-Chegannur should be taken up. In the earlier Budget, new survey of lines were announced such as Guruvayoor, Thanur, Thalassery, Mysore, Nilambur, Nangengode, Angamali, Azhutha, Angadipuram, Calicut and Kanjangad, Panathur but sufficient funds were not allotted and speedy action is not seen there.  So, I would request that at least announcement made regarding earlier surveys has to be given due important. 

There are 19   model stations in Kerala.  We appreciate the Government for the same.  But at the same time, construction work of many of the railway stations is not completed.  They have to be taken with serious importance. 

MR. DEPUTY-SPEAKER: There are seven speakers of your own party.  Please conclude now.

SHRI P. KARUNAKARAN :Doubling and electrification are the most important aspects.  In the last Budget also, the Government has stated that Shornor-Mangalore line would be taken up for electrification. But no work has been started.  Just like that, electrification in other parts is also not in a progressive way.

          With regard to doubling, in Shornor-Mangalore portion, a 16 or 17 kms. remain to be doubled.  Cochin to Kottayam also electrification remain to be done. … (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER:  You are speaking on behalf of all Members of your party!

SHRI P. KARUNAKARAN : Sir, the Sixth Pay Commission has given  better salaries to many of the Central Government employees.  At the same time, the pay scale of Station Masters is very very low.  So, that anomaly has to be attended to seriously. 

          The people of Kerala always admire especially the presentation and initiative taken by Lalu ji, particularly when it became a profitable one.  But in this Budget, we are really sorry.  At least some of the proposals would be given to satisfy the people of Kerala, irrespective of different political parties and MPs. I would request the Government to consider some of these proposals.

 

 

 

*PROF. BASUDEB BARMAN (MATHURAPUR):  Sir, I would like to request the Hon’ble Railway Minister, through you, to include the following projects in the interest of the general public in the District South 245 Pargans, West Bengal, which are long pending, at the earliest.

Construction of a new rail line from Jaynagar to Raidighi;

Construction of new rail lines from Canning to Jamtala and Jaynagar to Dhamakhali;

Construction of a new rail line from Park Circus to Dhamakhali;

Doubling of Baruipur-Diamond Harbour Section;

Doubling of Baruipur-Namkhana Section;

Installing of a Halt Station at Madhavnagar Road between Nischindapur and Kashinagar stations in the Lakshmikantapur-Namkhana Section;

For the whole of India, introduction of environment-friendly coach toilet system, as proposed by the Hon’ble Railway Minister in his Budget Speech of 2004-05, without any further delay.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

* Speech was laid on the Table.

 

 

 

*श्री काशीराम राणा (सूरत): महोदय, रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद जी ने रेल बजट 2008- 09 लोक सभा में पेश किया है। मैं इस बारे में अपना विचार रखने के लिए खड़ा हुआ हूं। मैं इस बजट को अच्छी तरह से समझने के बाद रेल मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि आपने अंतरिम बजट परंपरा को तोड़ा है। लोकसभा चुनाव में यूपीए की हार को देखते हुए अपने मतदाताओं को लुभाने के लिए यह परंपरा तोड़कर संसदीय लोकतंत्र की अवमानना की है। लेकिन मतदाता समझदार हैं, वे आपका खेल अच्छी तरह से समझते हैं इसलिए चुनाव में इसका लाभ नहीं मिलेगा।

          महोदय, यह बजट चुनाव को ध्यान में रखते हुए बनाया है। लेकिन जब चुनाव में एनडीए की सरकार आएगी तो बजट में अच्छा परिवर्तन होगा। रेल बजट से बिहार को ज्यादा फायदा दिया गया है। पिछले पांच साल के रेल बजट में बिहार ही बिहार छाया हुआ है लेकिन रेल मंत्री होने के नाते आपकी जिम्मेदारी है कि पूरे भारत में समतोल विकास हो। जहां रोजगार की भारी संभावनओं की वजह से बिहार, यूपी, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा जैसे राज्यों से लाखों की तादाद में लोग गए हैं ऐसे ही गुजरात, महाराष्ट्र में बसे लोगों को आने-जाने के लिए रेल सुविधा देनी चाहिए लेकिन रेल मंत्री जी ने कभी भी सूरत से इन राज्यों में जाने के लिए पूरी रेल सुविधा नहीं दी, यह बड़ी शर्मनाक बात है। उन्होंने सिर्फ गुजरात-सूरत के साथ ही अन्याय नहीं किया बल्कि यहां बसे परप्रांतिय लोगों के साथ अन्याय किया है। उचित रेल सुविधा न देकर श्री लालू प्रसाद गुजरात जैसे विकासशील राज्य को अनके समय के बिहार जैसा राज्य बनाना चाहते हैं।

          महोदय, रेल भाड़ा में कटौती करने की रेल मंत्री की घोषणा की सराहना करता हूं लेकिन रेल सुविधा के बारे में राज्यों से पक्षपात किया है, यह माफ करना मुश्किल है। रेल मंत्री ने 43 नई ट्रेनों की घोषणा की है लेकिन गुजरात को सिर्फ दो ट्रेनें दी हैं। पिछले बजट में रेल मंत्री जी ने गांधीनगर-दिल्ली-अमृतसर गरीब रथ की घोषणा की थी फिर भी बजट में इसका कोई प्रावधान नहीं है। इतना ही नहीं, पिछले रेल बजट में घोषित की गई कई ट्रेनें अभी भी शुरू नहीं हुई। मैंने सूरत की परप्रांत के लोगों की आबादी और औद्योगिकीकरण को देखते हुए सूरत से पटना, सूरत से छपैया, सूरत से दिल्ली और वाराणसी की नई ट्रेनें, सूरत से भुवनेश्वर और सूरत से सिकंदराबाद ट्रेनों की मांग की थी लेकिन रेल मंत्री ने आश्वासन के सिवा कुछ नहीं दिया है। इसी तरह सूरत से मुंबई और सूरत से मेहसाण-पालनपुर के लिए सुबह की ट्रेन, सूरत से रायगढ़, त्रिवेन्द्रम की ट्रेन की मांग की थी लेकिन प्लेटफार्म का बहाना बनाकर स्वीकार नहीं किया

 

* Speech was laid on the Table.

गया। सूरत को ए1 मॉडल स्टेशन बनान की रेलमंत्री की घोषणा की है लेकिन इसका काम बहुत स्लो है। इसे जल्द पूरा किया जाए तो प्लेटफार्म की संख्या बढ़ सकती है और नई ट्रेनें चल सकती हैं। इतना ही नहीं उधना को सेटेलाइट स्टेशन बनाया जाए तो अच्छी रेल सुविधा मिल सकती है। रेल मंत्रालय के लिए यह शर्मनाक बात है कि बहुत समय से सब सुविधाजनक लोको शेड, यार्ड सूरत के आसपास स्टेशनों पर बनाया जाए तो पूरी रेल सुविधाएं सूरत को मिल सकती हैं। लेकिन पक्षपात नीति अपनाने वाले श्री लालू प्रसाद नहीं चाहते कि सूरत-गुजरात पूर्ण विकसित बने। फिर भी मैं विनती करता हूं कि लाखों लोगों की सुविधा के लिए श्री लालू प्रसाद जी कुछ करेंगे।

          महोदय, आखिर में मैं मेरे संसदीय क्षेत्र की जरूरत को आपके सामने रखना अपना कर्तव्य मानता हूं – नवसारी जैसे बड़े शहर के लिए जरूरी शताब्दी, कर्णावती एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज जल्दी दिया जाए। त्रिवेन्द्रम-निजामुद्दीन राजधानी और सूरत में दिल्ली जाने वाले पैसेन्जरों की सुविधा के लिए संपर्क क्रंति का स्टापेज दिया जाए। सूरत के ए1 मॉडल स्टेशन बनाने का काम जल्द पूरा किया जाए। सूरत स्टेशन के प्लेटफार्म न. 3 पर श्री दादा भगवान संस्था द्वारा मांगी हुई जगह किताबघर के लिए दी जाए। गरीबरथ ट्रेन में विक्लांगों के लिए कोई कन्सेशन नहीं है, वह दिया जाए और इस ट्रेन में पन्ट्रीकार नहीं है, उसे शुरू किया जाए। मनमाड़-मदुराई एक्सप्रेस (6733-6734) को ओरबा और रामेश्वर तक विस्तृत करने की घोषणा की गई थी उसका तुंत अमल हो। जामनगर-सूरत और सूरत-बांद्रा ट्रेनों को जोड़ने से जो परेशानी पैसेन्जरों को झेलनी पड़ती है, यह दोनों ट्रेनों को पूर्व के अनुसार चलाया जाए।

          मुझे उम्मीद है कि रेल मंत्री जी इन मांगों को जल्द ही अमलीकृत कर पैसेन्जरों को यथोचित सुविधा मुहैया कराएंगे। आपने मुझे बोलने का समय दिया इसके लिए मैं आपका बहुत धन्यवाद करता हूं।

 

 

 

 

श्री रामजीलाल सुमन (फ़िरोज़ाबाद) : उपाध्यक्ष महोदय, रेल मंत्रालय ने अच्छा काम किया है, लेकिन अभी कुछ और भी करना शेष है। माननीय लालू जी ने वर्ष 2009-10 का जो रेल बजट पेश किया है, उसमें कुल आय 93 हजार एक सौ उनसठ करोड़ रूपये बताई है और व्यय का अनुमान 86 हजार छः सौ करोड़ रूपये का है। वर्ष 2009-10 में रेलवे की वार्षिक योजना 37 हजार नौ सौ पांच करोड़ रूपए की है और बजटीय सहायता नौ हजार छः सौ करोड़ रूपए की है। महोदय, इसका मतलब यह हुआ कि रेलवे को अतिरिक्त साधन जुटाने पड़ेंगे और उन अतिरिक्त साधनों के मार्फत ही रेलवे बेहतर काम कर पाएगा।

          उपाध्यक्ष महोदय,यह कहा गया है कि गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी बजट में भाड़े में वृद्धि की कोई घोषणा नहीं की गयी है। मुझे यह जानकारी है कि वर्ष 2005-06 से वर्ष 2007-08 तक बराबर ढुलाई का प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन माल भाड़ा भी बढ़ा है। वर्ष 2005-06 में 10.91 परसेंट, वर्ष 2006-07 में 9.3 परसेंट और वर्ष 2007-08 में 8.9 परसेंट माल भाड़ा बढ़ा है।

          उपाध्यक्ष महोदय, मैं एक उदाहरण और देना चाहूंगा कि वर्तमान बजट भाषण के पेज न. 4 पर, पैरा 12 में यह लिखा है कि वर्ष 2008-09 में सितम्बर माह तक माल लदान में 9 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है और आमदनी 19 प्रतिशत हुई है। इसका मतलब यह हुआ है कि ढुलाई कम होने के बावजूद भी आमदनी ज्यादा हुई है। तो इसका सीधा मतलब यह है कि कहीं न कहीं रेल भाड़े में वृद्धि हुई है।

          उपाध्यक्ष महोदय,मैं विनम्रतापूर्वक माननीय लालू जी से दो-चार बातें कहना चाहता हूँ। लालू जी, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रेलवे जो काम अपने हाथ में लेती है उसका एक समयबद्ध कार्यक्रम हमारे पास होना चाहिए। बहुत से कामों की घोषणाएं कर दी जाती हैं, लेकिन लक्ष्य प्राप्ति का समय क्या निश्चित होगा, उस पर जितनी गंभीरता से विचार होना चाहिए, वह नहीं होता है। कश्मीर घाटी में कटरा से बनिहाल तक 90 किलोमीटर की रेल परियोजना 25 जुलाई को स्थगित कर दी गयी और इस परियोजना पर 750 करोड़ रूपये व्यय हुए। परियोजना की मूल लागत तीन हजार करोड़ रूपये थी जो विलंब के कारण बढ़कर तेरह हजार करोड़ रूपए हो गयी है। इसके स्थगित किये जाने का यह कारण बताया गया है कि हिमालय क्षेत्र का भौगोलिक सर्वेक्षण किये बिना ही परियोजना शुरू कर दी गयी थी।

          उपाध्यक्ष महोदय, यह बहुत गंभीर मामला है। इतनी बड़ी परियोजना है और सात सौ पचास करोड़ रूपए की दौलत कम नहीं होती है। इसमें गंभीरता नहीं बरती गयी और हिमालय क्षेत्र का निरीक्षण न होने के कारण उस योजना को स्थगित कर दिया गया और हम चाहेंगे कि रेल मंत्री जी स्वयं इस मामले को देखें और उस पर कार्यवाही करें।

          उपाध्यक्ष महोदय, पूरे देश में सरकार की विभिन्न प्रकार की 552 परियोजनाएं हैं और उनमें से रेलवे की 138 परियोजनाएं लंबित हैं। रेलवे की जो 138 परियोजनाएं लंबित हैं, उनकी लागत 37 हजार आठ सौ करोड़ रूपये थी, जो अब बढ़कर 72 हजार सात सौ करोड़ रूपये हो गयी है। विलंब के कारण लागत भी बढ़ती है। महोदय, मैं यह कहना चाहूंगा कि मेरा पुराना संसदीय क्षेत्र फिरोजाबाद था। वहाँ पर वर्ष 1998 में माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने आगरा के भाउई से लेकर इटावा तक वाया बटेश्वर,  एक रेलवे लाइन की मंजूरी दी थी। इसके लिए दो सौ चौदह करोड़ रूपया स्वीकृत हुआ था। महोदय, अब तक ग्यारह साल में 99 करोड़ रूपया अवमुक्त हुआ है। लालू जी मैनें आगरा से बटेश्वर तक की जिस योजना के बारे में बात की, उसमें वर्ष 1998 से लेकर अब तक 99 करोड़ रूपया अवमुक्त हुआ है। मेरी आपसे यह प्रार्थना है कि आप इसको दिखवा लें और मैं चाहता हूँ कि आप इस योजना को जल्दी पूरा करवा दीजिए।

          उपाध्यक्ष महोदय, हम यह चाहते हैं कि वर्ष 2007 के बजट में हथुआ से फुलेरिया, यानी लालू जी के गांव से लेकर लालू जी की पत्नी के गांव तक 17.5 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग की घोषणा की थी,  

रेल मंत्री (श्री लालू प्रसाद)  :  वह कंप्लीट है।

श्री रामजीलाल सुमन :  मैं यही कह रहा हूँ कि वह तैयार हो गयी है। अपनी पत्नी श्रीमती राबड़ी देवी के स्थान को अपने स्थान से जोड़ने के लिए आप जितनी तत्परता से काम कर रहे हैं अगर उतनी तत्परता से आप पूरे देश में काम करें तो निश्चित रूप से इससे अच्छा कोई विभाग नहीं होगा। मेरा आपसे आग्रह है कि जितनी तत्परता से इस स्थान को जोड़ने का काम आपने किया है, मेहरबानी करके पूरे देश में यही कीजिए, तब जाकर रेलवे के बारे में लोगों की अच्छी राय बनेगी।[r48]   

          उपाध्यक्ष महोदय, कल की घटना का जिक्र मैं यहां पर करना चाहूंगा। यह अखबारों में छपा है। कल आगरा कैंट में नेफ्था भरी मालगाड़ी में आग लग गई। गनीमत यह रही कि बगल में खड़ी ट्रेन के स्टाफ और स्टॉल वेंडरों ने तत्परता दिखाते हुए अग्निशमन यंत्रों से उस पर काबू कर लिया। यह बहुत गंभीर मामला है। वहां मौजूद एक कर्मचारी ने बताया कि लाइन पर कूड़ा बीनने वाले कुछ लड़के खाली बोतल में मालगाड़ी से रिसने वाले तेल को भर रहे थे। यह समाचार आगरा के समाचार पत्रों में प्रमुखता से छपा है। इस मामले की जांच होनी चाहिए और इसमें जो भी दोषी पाए जाएं, उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि वहां चोरियां होती हैं तो रेलवे के लोग उससे अपने को कैसे अलग कर सकते हैं? इसलिए पूरे तथ्यों की जानकारी होने के बाद कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों उसकी ओर आपको ध्यान देना चाहिए, संज्ञान लेना चाहिए और कार्रवाई करनी चाहिए।

          उपाध्यक्ष महोदय, मैं दो-तीन बातों की ओर भी आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा। पहली बात, ट्रेनों के प्लेटफार्म बदलने की सूचना यात्रियों को तत्काल दी जाती है, जिसके कारण असहाय, वृद्धों और विकलांगों को बहुत दिक्कत होती है। इसलिए मेरा आग्रह है कि प्लेटफार्म बदलने की सूचना यदि एक घंटे पहले यात्रियों को मिल जाए तो उन्हें सुविधा होगी। 

          दूसरी बात, उत्तर-मध्य रेलवे के एत्मादपुर रेलवे स्टेशन पर, कुबेरपुर स्टेशन की तरफ, प्लेटफार्म से सटा हुआ रेलवे फाटक है। यहां मालगाड़ियां चार से छः घंटे तक खड़ी रहती हैं। जिससे रेलवे लाइन के दूसरी तरफ के 50 से अधिक गांवों की आबादी को, जिनमें टूंढ़ला, फिरोजाबाद, एत्मादपुर और आगरा आते हैं, उन्हें उस फाटक से आने के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ता है अथवा टूंढला के लिए एक लम्बा चक्कर लगाकर हाइवे से जाना पड़ता है। इसके कारण दुर्घटनाएं होती हैं। मेरा निवेदन है कि इसे कुबेरपुर की तरफ गारापुर गांव पर बनाकर समस्या दूर की जा सकती है। एत्मादपुर, जलेसर और कुबेरपुर स्टेशनों में टिकट विंडों साइड पर प्लेटफार्म नहीं है, जिससे जनहानियां होती रहती हैं। ग्राम रनपई, तहसील एत्मादपुर के मध्य दूसरी लाइन की तरफ, यमुना की तरफ बसा है, जिस पर फाटक न होने से कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। वहां फाटक बनाए जाने की आवश्यकता है। आगरा कैन्ट स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने की घोषणा रेल मंत्री बहुत पहले कर चुके हैं, लेकिन अभी तक वहां कोई काम शुरू नहीं हुआ है। आगरा कैन्ट राजा की मण्डी पर भी टिकट काउंटर बनाया जाए। राजा रामपुर गांव, जनपद ऐटा में रेलवे का हाल्ट था, जिससे बच्चों और मजदूरों को आने-जाने में सुविधा होती थी। लेकिन उस हाल्ट को बंद कर दिया गया है। जिससे लोगों को बहुत परेशानी होती है, उसे जल्दी शुरू किया जाए ।

          अंत में मैं कहना चाहता हूं कि रेलवे को एक टाइमबाउण्ड कार्यक्रम बनाकर काम करना चाहिए क्योंकि तमाम परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं, जिसके कारण उनकी लागत बढ़ती है और लोगों को भी असुविधा हो रही है। आप हवा में काम कर रहे हैं, यदि जमीन पर काम करेंगे तो ज्यादा अच्छा होगा।

उपाध्यक्ष महोदय : श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव – उपस्थित नहीं।

श्री रमेश दूबे (मिर्जापुर): उपाध्यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले रेल मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं क्योंकि पिछले बजट में मैंने उनसे एक-दो मांगे की थीं जो पूरी हो चुकी हैं।

          महोदय, मैं भाषण करने की बजाय अपने प्वाइंट्स आपके सामने रखना चाहता हूं। मिर्जापुर रेलवे स्टेशन इलाहाबाद और मुगलसराय के बीच में प्रमुख स्टेशन है, जहां मां विंध्यवासिनी का मंदिर है। वहां हजारों लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। लेकिन इस स्टेशन पर राजधानी अथवा सम्पर्क क्रान्ति जैसी ट्रेनें नहीं रूकती हैं। मेरा निवेदन है कि वहां इस तरह की महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव किया जाए।

          महोदय, मैं रेल मंत्री जी का पुनः धन्यवाद देना चाहता हूं क्योंकि उन्होंने मुम्बई से वाराणसी के लिए सुपरफास्ट ट्रेन की घोषणा की है। मैं कहना चाहता हूं कि उसे राजधानी की तर्ज पर चलाया जाए ताकि लोग शाम को मुम्बई से चलकर सुबह बनारस और इलाहाबाद तक पहुंच सकें। इससे पूर्वी उत्तर प्रदेश के व्यापारी अपना काम निबटाकर वापस मुम्बई जा सकें[r49] गे।

इससे यहां व्यापार बढ़ेगा। शिवगंगा एक्सप्रेस वाराणसी से सीधे इलाहाबाद रूकती है। इसके लिए कई बार निवेदन किया गया कि इसे माधव सिंह रेलवे स्टेशन पर रोकना चाहिए। वहां से जौनपुर, मिर्जापुर तथा अन्य जिलों में जाने के लिए सीधा रास्ता है।

          महोदय, अंत में मैं यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि 139 नम्बर पर जो जानकारी देने की सुविधा माननीय मंत्री जी ने की है, वहां कभी-कभी ट्रेन आधा घंटा लेट होती है और जब हम उनसे पूछते हैं तो वे कहते हैं कि ट्रेन आ गई। इस तरह से कई बार हुआ है। उस समय 139 नम्बर पर उनके जो अधिकारी होते हैं, उनसे मैंने कई बार शिकायत भी की। यह बहुत अच्छी बात है कि जो माननीय मंत्री जी ने अपग्रेड करके सैकिंड क्लास के लोगों को स्लीपर या एसी सैकिंड, एसी थर्ड में करने की बात की। उसमें एक ही असुविधा होती है कि प्लेटफार्म पर पूरी जानकारी नहीं हो पाती है। अगर पैसेंजर किसी जगह पर बैठ गया तो फिर सारा सामान लेकर स्लीपर क्लास से एसी फर्स्ट, एसी सैकिंड या एसी थर्ड में जाना उसके लिए मुश्किल होता है। इसके लिए भी व्यवस्था करनी चाहिए।

          महोदय, मैं खान-पान की व्यवस्था के बारे में कहना चाहता हूं। हम लोग अक्सर शिवगंगा में आते हैं। हम जब उनसे पूछते हैं कि खाने के लिए क्या है तो वे कहते हैं कि आलू-मटर की सब्जी है। कम से कम इस पर भी ध्यान देना चाहिए कि किसी तरह से अच्छे खान-पान की व्यवस्था हो।

          महोदय, नार्दन-ईस्टर्न रेलवे पर कटका रेलवे स्टेशन के पास 23सी नम्बर का एक क्रासिंग है, जहां रेलवे ने गिट्टी डम्प करने का स्थान बनाया है।  जब वहां मालगाड़ी आकर खड़ी होती है तो वह तीन-तीन, चार-चार घंटे तक खड़ी रहती है और उस समय रेलवे क्रासिंग बंद रहता है। इसलिए वहां से लोगों को आने-जाने में बड़ी असुविधा होती है। खास कर उस रास्ते से डेड बॉडीज़ यमुनाजी के किनारे जाती है, उस समय और भी दिक्कत होती है। मैंने कई बार रेलवे प्रशासन से निवेदन किया कि आप इसे आगे-पीछे फाटक करके चालू करें, जहां रास्ता है, ताकि लोगों को यह असुविधा न हो।

          महोदय, अंत में मैं निवेदन करना चाहूंगा कि बिहार भी हमारा प्रदेश है। माननीय मंत्री जी ने बिहार के लिए जो कार्य किया है, प्रगति की है, उसका एक थोड़ा-सा अंश पूर्वी उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर, राबर्ट्सगंज या दूसरे जो जिले हैं, चन्दौली आदि जो पिछड़े जिले हैं, उन पर आपकी दृष्टि हो जाएगी तो मैं समझता हूं कि बहुत अच्छी बात होगी।

          इन्हीं शब्दों के साथ मैं फिर से मंत्री जी का अभिनंदन करता हूं।

 

 

 

                                                                                               

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

*श्री भँवर सिंह डांगावास (नागौर) : चौदहवीं लोक सभा जब से प्रारम्भ हुई तब से प्रत्येक सत्र में मेरे क्षेत्र की रेल लाइन (पुष्कर से मेड़ता सिटी) के निर्माण की स्वीकृति के लिए सदन में व अलग से पत्र लिखकर स्वीकृति प्रदान करने हेतु आग्रह कर रहा हूं।

 

          इस सदन में श्रीमान मुझे आश्वासन दिया था कि ये काम आपका हो जायेगा । इस संबंध में रेल भवन में आपके कार्यालय में भी उपस्थित हुआ । तब आपने पदाधिकारियों को बुलाकर कहा था इसकी संभावना मालूम करो । ये काम करना है ।

 

          आपके आदेशानुसार मैं आपके अधिकारियों से इस संबंध में मिला और उनसे भी आग्रह किया । उन्होंने मेरे सामने चेष्टा की थी । इस कार्य संबंधी संभावनाओं का पता लगाया ।

          फिर बजट वर्ष 2008-09 में मैंने आपसे पुनः आग्रह किया तो फिर आपने आश्वासन दिया कि आपका काम हो जायेगा । श्रीमान ये अधूरा काम है क्योंकि ये रेल लाइन अजमेर से मेड़ता सिटी बननी थी जिसमें से आपने पहले अजमेर से पुष्कर तक स्वीकृति दे काम करने का आदेश दे दिया । जो लाइन बिछायी जा रही है शेष भाग पुष्कर से मेड़ता सिटी लाईन शेष है । जिसकी स्वीकृति देनी थी ।

 

          मेरी प्रार्थना है कि आप वर्ष 2008-09 की पूरक मांगों में इसको शामिल कर इसका आदेश दें ।

 

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·       Speech was laid on the Table.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

*श्री घुरन राम (पलामू):  महोदय, सादर आग्रह करना है कि मेरे संसदीय क्षेत्र पलामू में बरबाडीह से डेहरी आन सोन तक सवारी गाड़ी एक बार ही चलती है, जो कि गाड़ी सं0 630 डाउन एवं 737 अप बरवाडीह एवं डिहरी आन सोन स्टेशन पर दिन भर खड़ी रहती है।

          अतः आपसे अनुरोध था कि उक्त ट्रेन का एक बार फेरा बढ़ाने की कृपा की जाये जिससे आम जनता को लाभ होगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

* Speech was laid on the Table.

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (मधेपुरा)  : उपाध्यक्ष महोदय, मैं रेल बजट के पक्ष में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। माननीय लालू प्रसाद जी किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं। लालू प्रसाद जी के बारे में जो भी विपक्ष एवं पक्ष के लोग, जिस भी तरह की बात आज तक करते रहे हैं, मैं समझता हूं कि निश्चित रूप से यह व्यक्ति आज नहीं, उस समय से, जब कर्पूरी ठाकुर जी जननायक हुआ करते थे, चौधरी चरण सिंह साहब, उस काल से लेकर आज तक, अपने आप में एक इतिहास थे और इन्होंने इतिहास ही बनाने का काम किया, चाहे सोशल इंजीनियरिंग में इतिहास किया हो, सामाजिक न्याय को ताकत देने का इतिहास बनाया हो, कमजोरों और गरीबों को सम्मान देकर राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन के क्षितिज पर लाने का काम किया हो। बिहार के 80 प्रतिशत लोग जो राजनीतिक और सामाजिक धारा से काफी दूर थे, उन्हें मुख्य धारा में लाकर नम्बर वन की धारा में लाने का काम किया हो, वह इतिहास लालू प्रसाद जी के नाम से ही है, किसी अन्य के नाम से नहीं है।

         उपाध्यक्ष महोदय, आज जो लोग भी बिहार की कुर्सी पर विराजमान हैं, उन्हें इनका शुक्रगुज़ार होना चाहिए। यदि आज उस इतिहास को ये न तोड़े होते, जिस इतिहास पर सिर्फ 60 प्रतिशत लोग अपना इतिहास बना कर बैठे थे तो आज वे लोग इस कुर्सी पर बैठने के काबिल कभी नहीं होते, जिन्होंने लालू यादव को इस देश में तोड़ने का काम किया। [S50] 

इसलिए मैं लालू प्रसाद यादव जी के बारे में कुछ कहूं, तो यह ठीक नहीं है।

          उपाध्यक्ष महोदय, मैं रेल बजट पर आता हूं।

श्री खारबेल स्वाईं (बालासोर)  : नहीं-नहीं और भी कुछ बोलिए।

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : देखिए, मैं एक बात बताता हूं। आप भी जानते होंगे, मैं खुश करने की बात नहीं करता हूं। मैं आपके साथ भी रहा हूं।

उपाध्यक्ष महोदय : प्लीज एड्रैस दि चेयर।

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव  : जब मैं आपके साथ था, तब भी मैं खुश करने की बात नहीं कहता था और आज भी नहीं कहता, लेकिन जब भी कोई इनकी बात होती थी, तब मैं कहता था। मैंने सामाजिक न्याय, सोश्यो इंजीनियरिंग और गरीबों की बात कही है। मैं कल भी कहता था, आज भी कहूंगा और यदि मैं न भी कहूं, तो भी इतिहास इन्हीं से जुड़ा रहेगा, यह मैं आपको बताना चाहता हूं। मैं भी उसी इतिहास का एक हिस्सा हूं।

          उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से कहना चाह रहा था कि रेलवे बजट के बारे में तो कुछ कहना ही नहीं है, चाहे अहमदाबाद के आई.टी.आई. के विद्यार्थी हों या साउथ में रहने वाले विद्यार्थी हों, आज वे लालू प्रसाद यादव जी से, उनके रेलवे मंत्रालय के कारण जानना चाहते हैं कि आखिर कौन सा ऐसा विचार और सोच उन्होंने रेलवे को दी, किस चीज को किया, किस प्रकार से मैनेज किया कि आज भारत के क्षितिज पर आजादी के बाद यू.पी.ए. की सरकार में रेलवे मंत्रालय ने अपना अलग इतिहास हिन्दुस्तान में लिखकर कायम किया।

          महोदय, सब लोग इन्हें मैनेजमेट गुरू बोल रहे हैं। यदि इससे कोई बड़े गुरू होते, तो मैं इन्हें उस उपाधि से विभूषित कर सकता था। मैनेजमेंट गुरू के बारे में तो सब बोल रहे हैं। पूरी दुनियां बोल रही है। जापान भी बोल रहा है और भी अनेक कंट्रीज बोल रही हैं। इसलिए मैं पहले ही कह चुका हूं कि लालू प्रसाद जी के बारे में कुछ भी बोलना मेरे लिए शोभा नहीं देता। रेल मंत्रालय में 90 हजार करोड़ का फायदा हो, यह सब जगजाहिर है। मैं इस सबकी पुनरावृत्ति नहीं करना चाहता। कोरीडोर का मामला हो या कोई और मामला हो, पहले भी सरकार बनी, लेकिन इतना बड़ा इतिहास नहीं रचा गया। डैडीकेटेड कोरीडोर की जिन दो लाइनों को लाने का काम इन्होंने किया, मुम्बई से लेकर दिल्ली और लुधियाना से लेकर कोलकता तक, यह इतिहास है, जिसे आज तक किसी और ने नहीं रचा।

          महोदय, मंत्री जी ने गरीब रथ रेल चलाकर भी एक इतिहास रचा है। मैं टी.वी. इंटरव्यू सुन रहा था जिसमें एक बहुत साधारण आदमी, जिसके बदन पर कपड़े तो थे, लेकिन वे फटे हुए थे, वह गरीब रथ में सीट पर सफर करते हुए कह रहा था कि मैं तो सपने में भी नहीं सोचता था कि कुशन वाली सीट पर बैठकर सफर करूंगा। अब कुशन की बात तो छोड़िए, मैं तो ए.सी. में सफर कर रहा हूं, यह मेरे लिए सपना था और इस सपने को लालू प्रसाद यादव जी ने साकार किया है। इस देश में लालू प्रसाद यादव जी की यह सबसे बड़ी उपलब्धि है। सारी चीजों की उपलब्धि इनकी हो सकती है, लेकिन इन्होंने सामाजिक न्याय का जो इतिहास शुरू किया था, गरीबों के लिए जो इन्होंने गरीब रथ चलाकर, समाज, देश, गांव और गरीब को जोड़ा, यह कभी सम्भव नहीं था। व्यक्ति जाता है, अपनी सारी ऊर्जा, अपने सारे विचार और प्रकाश देकर समाज को जाता है। लालू प्रसाद यादव जी ने निश्चित रूप से यह बहुत बड़ा काम किया है।  

          महोदय, हमारे विपक्ष के साथी, श्री शाहनवाज हुसेन साहब थोड़ी देर पहले बोल रहे थे। शाहनवाज जी मेरे अनुज की तरह रहे हैं। मैं उन्हें जानता हूं। पता नहीं किस कारण उन्होंने आज आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया, लेकिन मैं कहूंगा कि क्षमा, माफी और गलती स्वीकार करने में आदमी बड़ा होता है, छोटा नहीं।

[r51] 

 

इससे आदमी छोटा नहीं होता। बड़े-बड़े ही होते हैं। मेरे भी इन सब लोगों से वैचारिक मतभेद रहे हैं, मनभेद रहे हैं, आप भी जानते हैं, लेकिन निश्चित रूप से जिन शब्दों का प्रयोग आपने किया, वह आपत्तिजनक है। वह मेरे हृदय को छुआ, मुझे अच्छा नहीं लगा। मैं निश्चित रूप से आपसे कहूंगा, मैं उस पर नहीं जाना चाहता, लेकिन मुझे ठेस पहुंची, यह मैं आपसे कहूंगा।

          ठीक है, आप विपक्ष में हैं, आप उन बातों को बोलिये, लेकिन आप भी जानते हैं कि आप भी इस सदन के बाहर लालू प्रसाद यादव की बड़ाई करेंगे कि लालू प्रसाद यादव जी ने जो किया, वह काबिले तारीफ है। उसको आप अपने दिल से निकाल नहीं सकते हैं, दल की मर्यादा में रहकर आप चाहे जो बोल लें, लेकिन जब दल का बैरियर खत्म होगा तो आपको लालू प्रसाद यादव की तारीफ के पुल बांधने पड़ेंगे। …( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : कृपया बजट पर बोलिये।

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : मैं दूसरी बात आपसे कहूंगा, तस्लीमुद्दीन साहब हमारे लिए पिता की तरह हैं, बुजुर्ग हैं। इनके लिए भी बुजुर्ग हैं, उन्होंने भी आज तक तस्लीमुद्दीन जी को सम्मान ही दिया है, लेकिन आज क्या हुआ, मैं नहीं जानता। निश्चित रूप से आगे भी वे सम्मान देकर ही आगे बढ़ेंगे, क्योंकि वे सीनियरमोस्ट हैं। हम लोग बच्चे थे, तब तस्लीमुद्दीन साहब का नाम सुना करते थे। शाहनवाज़ साहब भी जानते हैं, ऐसी बात नहीं है और आज भी उस इलाके में इनकी अलग अपनी व्यक्तिगत पहचान है, इसमें मुझे कुछ नहीं कहना।

          जहां तक रेल मंत्रालय का सवाल है, बिहार के बारे में कुछ बातें कहने के पहले मैं लालू प्रसाद जी को सबसे पहले धन्यवाद देता हूं कि ललित नारायण मिश्र जी के बाद बिहार ने बहुत से मंत्री रेलवे में बनाने का काम किया। चाहे केदार पांडे जी हों, चाहे जगजीवन राम साहब हों, चाहे जार्ज फर्नाण्डीज़ जी हों, राम विलास पासवान जी हों, नीतीश जी हों, सभी लोगों ने बिहार में मंत्री रहकर काम करने की कोशिश की। वह पिछड़ा इलाका नेपाल और बंगलादेश के बोर्डर पर है, लेकिन वह काम कभी पूरा नहीं हो पाया था, लेकिन वर्तमान में जो मेरा इलाका है, वह नेपाल स्थित इलाका है, बंगलादेश बगल में है, वहां कोसी, कमला, महानन्दा, बलान कई नदियों से हम लोगों का इलाका घिरा हुआ है। समझ लीजिए कि पूरा का पूरा बिहार, उत्तर बिहार के 5-6 जिलों को छोड़कर सारे के सारे जिले 6 महीने बाढ़ के पानी से जलमग्न रहते हैं।

          जब रोड टूट जाती है, पुल टूट जाते हैं तो लोगों का एकमात्र सहारा रेल बचती है। कल भी मैंने कहा था कि किस तरह वहां महाप्रलय आई नहीं, लाई गई और किस कदर वहां जब पूरी की पूरी सरकार की मशीनरी फेल हो गई, सारी की सारी चीजें फेल हो गईं तो मात्र एक रास्ता रेल मंत्रालय था। रेल मंत्रालय ने जिस तरीके से कोसी की त्रासदी को संभालने का काम किया, शायद यदि रेल मंत्रालय ने नहीं संभाला होता तो न जाने कितने लोग भूखे मरते, कितने लोग पानी के बगैर मरते, कितने लोग दवाई के बगैर मरते, यह कहा नहीं जा सकता। अभी भी पांच से दस हजार के बीच में लोगों के मरने की संख्या है। यह रेलवे की सबसे बड़ी उपलब्धि है। मैं कहना चाहता हूं कि लालू प्रसाद यादव जी ने देश के साथ-साथ बिहार को भी देखने का काम किया है।[R52] 

          जम्मू-कश्मीर, कन्याकुमारी, असम से आगे मणिपुर, त्रिपुरा जिस तरह से देश के चारों तरफ इन्होंने काम किया। पंजाब भी इससे अछूता नहीं है। सबसे पहले पंजाब में ही इन्होंने फैक्ट्री देने का काम किया। उसे मजबूत और डेवलप करने का काम किया।  बिहार जो पिछड़ा था, राम विलास पासवान जी, जो यूपीए गठबंधन के हैं, उन्होंने भी जिन कामों को किया, जिनको वह पूरा नहीं कर सके, उससे कई करोड़ गुना ज्यादा लालू प्रसाद यादव जी ने बिहार में इस तरह विकास के जाल बिछाए कि शायद आने वाले पांच साल के बाद कुछ बाकी नहीं रह जाएगा।  पहली बार यदि किसी ने इंसाफ देने का काम किया है, पहली बार किसी ने यदि बिहार को निश्चित रूप से ……( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : आपकी कोई डिमांड भी है।

…( व्यवधान)

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : जाति-धर्म …( व्यवधान) भारत की ही तो हमने बात कही, …( व्यवधान) उड़ीसा में जब हुआ था, तो ये नहीं थे। …( व्यवधान)   *

MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions) …*

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव  : आप एक मिनट मेरी बात सुन लीजिए। मैं आपको एक बात बता देना चाहता हूं।  …( व्यवधान)   *

उपाध्यक्ष महोदय : मैंने वह एक्सपंज कर दिया है, वह रिकार्ड नहीं हुआ है। 

…( व्यवधान)   *

MR. DEPUTY-SPEAKER: Whosoever speaks without my permission will not go in the record.

* Not recorded.

 

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : महोदय, लालू यादव जी ने उड़ीसा के लिए बहुत कुछ किया। यदि नहीं किया, तो अपने मित्रों के साथ उनकी बातों का समर्थन करते हुए लालू यादव जी से आग्रह करूंगा कि उड़ीसा भी सबसे पिछड़ा इलाका है, जो बच गया है, उसको आप देने का काम करें।  यह मेरा लालू यादव जी से आग्रह है, लेकिन टीका-टिप्पणी से कोई मतलब नहीं है। …( व्यवधान) मैंने कहा कि बिहार के साथ इंसाफ किया गया। …( व्यवधान)   *

MR. DEPUTY-SPEAKER: Whosoever speaks without my permission will not go in the record.

(Interruptions) …*

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (मधेपुरा)  : भारत में कभी इंसाफ नहीं मिलता था  ….( व्यवधान)   *

MR. DEPUTY-SPEAKER: Only the speech of Shri Rajiv Ranjan Yadav alias Pappu will go in the record.

… (Interruptions)

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव   : कभी किसी ने इंसाफ नहीं किया, जो लालू यादव जी ने किया, यह मैंने कहा।  मैंने यह नहीं कहा। …( व्यवधान)   *

उपाध्यक्ष महोदय : यह रिकार्ड में नहीं जाएगा।

…( व्यवधान)  *

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please conclude now.

… (Interruptions)

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव  : उपाध्यक्ष जी, यह हमारे मित्र हैं।  मेरे मित्र …( व्यवधान)

 MR. DEPUTY-SPEAKER: Please conclude now.

… (Interruptions)

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव  : मैं माननीय मंत्री महोदय से आग्रह करूंगा कि उनकी भावना की आप जरूर कद्र करिए।

उपाध्यक्ष महोदय : आप कंक्ल्यूड करिए।

…( व्यवधान)

 

  * Not recorded.

श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर)  : महोदय, जब आपकी बिना अनुमति से कोई माननीय सदस्य सदन में बोलते हैं, तो क्या वह प्रोसीडिंग में जाता है?

उपाध्यक्ष महोदय : नहीं, वह रिकार्ड में नहीं जाता है।  वह रिकार्ड नहीं हो रहा है।

…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: I have already said that whosoever speaks without my permission will not go in the record.

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव   : उपाध्यक्ष महोदय, इनकी जानकारी के लिए मैं दो बात बता देता हूं।  केरल में कारखाना लालू जी ने दिया या नहीं, उत्तर प्रदेश को कारखाना दिया या नहीं …( व्यवधान) आप इन बातों को जानिए। …( व्यवधान)  *  बंगाल की भावनाओं की कद्र लालू जी ने की या नहीं, जम्मू-कश्मीर जो आजादी के बाद से सबसे उपेक्षित इलाका था, जहां 80 प्रतिशत कमजोर अल्पसंख्यक लोग रहते थे, उनके साथ न्याय करने का काम लालू जी ने किया या नहीं, मणिपुर, नागालैंड को लालू जी ने जोड़ा या नहीं।  नार्थ-ईस्ट जैसी जगह को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ने का काम किया। …( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : आपने बहुत समय ले लिया, अब कंक्ल्यूड करिए। [p53]     

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : मेरा लालू जी से कुछ आग्रह है, उसे मैं पढ़कर ही बताना चाहता हूं।…( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : आप रिटन में दे दीजिए, that will be much better.

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : मैं लालू जी से कहना चाहूंगा कि समस्तीपुर, हाजीपुर और कटिहार, ये तीन डिवीजनल ऑफिस हैं। हाजीपुर बड़ा ऑफिस है, समस्तीपुर और कटिहार डिवीजनल ऑफिस हैं। इनके बीच कई स्टेशन ऐसे हैं और लम्बी दूरी होने के कारण, मेरा आग्रह है, क्योंकि वह नेपाल का अंतिम छोर है, यदि सहरसा में एक डिवीजन की व्यवस्था करेंगे तो निश्चित रूप से गरीब और पिछड़े लोगों के इलाके में बहुत बड़ा मैसेज जाएगा। मैंने पहले ही कहा कि मैं कुछ कहूं, यह ठीक नहीं है, लेकिन मेरी डिमांड है कि यदि ये कर सकते हैं तो निश्चित रूप से सहरसा में एक डिवीजन की व्यवस्था की जाए।…( व्यवधान) सहरसा-अमृतसर गरीब रथ को दो दिन से बढ़ाकर कम से कम चार दिन किया जाए। सहरसा-नई दिल्ली जो नई ट्रेन चलाने की घोषणा आपने की है, कृपया उसे सप्ताह में तीन दिन चलाने की व्यवस्था की जाए। सीमांचल एक्सप्रैस 2488/2487 को आपने पांच दिन से बढ़ाकर छ: दिन किया है, यह उत्साहवर्धक काम है,

 

  * Not  recorded.

 लेकिन जोगबनी से दिल्ली के लिए मात्र एक ट्रेन होने के कारण यात्रियों का दबाव काफी है। मेरा आग्रह है कि जोगबनी से नई दिल्ली एक गरीब रथ चलाई जाए। आपने सहरसा से गरीब रथ ट्रेन दी है, लेकिन उस इलाके से गरीब रथ नहीं है। जोगबनी नेपाल बार्डर से शुरुआत होती है और नेपाल का दूसरा शहर विराटनगर है। यदि जोगबनी से कटिहार, पूर्णिया होते हुए एक गरीब रथ आप चला देंगे तो निश्चित रूप से उस इलाके के लिए एक बड़ा भारी तोहफा होगा। जोगबनी से पटना के लिए प्रतिदिन पूर्णिया, कटिहार होते हुए एक ट्रेन चलाने का मेरा आग्रह है। कटिहार-दानापुर जो इंटरसिटी ट्रेन चल रही है, उसकी मेल ट्रेन जोगबनी से दिया जाए। आपने बिहारीगंज से नौगछिया वाया उदा किशुनगंज, पुटैनी, चौसा के लिए रेल लाइन के सर्वेक्षण की घोषणा की, यह सबसे अच्छी पहल है। लेकिन मेरा आग्रह है कि यदि नौगछिया के साथ गंगा पर ब्रिज बनाकर उसे भागलपुर से जोड़ दिया जाए तो निश्चित रूप से एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। आपने बिहारीगंज से फारविसगंज वाया मुरलीगंज, कुमारखंड, छातापुर नई रेल लाइन का सर्वे हाल में किया।…( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : उन्होंने समर्थन कर दिया है।

…( व्यवधान)

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : मैं आग्रह करूंगा कि बिहारीगंज, फारविसगंज वाया मुरलीगंज, खुरदा, कुमारखंड, जदिया, छातापुर होते हुए इसे किया जाए।

          मंत्री जी, आपको याद होगा, आपने रेनु जी की डिमांड पूरी कर दी । यह उस इलाके के लिए बहुत बड़ा इतिहास है। मेरे इसमें दो-तीन सुझाव हैं।…( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय :  आप रिटन में दे दीजिए।

…( व्यवधान)

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : मैं आखिरी बात कहना चाहता हूं। मंडन मिश्र धरती जहां चाणक्य और चंद्रगुप्त ने ज्ञान लिया, मंडन मिश्र जी के बारे में कुछ कहने की बात नहीं है। मैं आग्रह करूंगा कि सहरसा स्टेशन का नाम मंडन मिश्र किया जाए। सुपौल स्टेशन, आप जानते हैं कि वह वीर लोरिक की कर्म भूमि है। यदि आप सुपौल स्टेशन का नाम लोरिक स्टेशन कर दें तो अच्छा होगा। मधेपुरा स्टेशन का नाम यदि. वी.पी. मंडल जी, पूर्व मुख्य मंत्री और जिनके नाम से मंडल कमीशन के बारे में देश, दुनिया जानती है, यदि मंडल जी के नाम से मधेपुरा स्टेशन कर दिया जाए तो अच्छा होगा। मधेपुरा से पूर्णिया जाने में कीर्ति आनन्द नगर एक जगह है। वहीं भोला पासवान शास्त्री जी का घर है, जो तीन बार मुख्य मंत्री रह चुके हैं। मेरा आग्रह है कि यदि कृत्यानंद नगर स्टेशन को भोला पासवान शास्त्री के नाम से कर दिया जाए तो यह बड़ा भारी काम होगा। आपको याद होगा कि रानीपतरा में सर्वोदय आश्रम है। मेरा आग्रह है कि रानीपतरा का नाम विनोवा भावे जी के नाम से कर दिया जाए। वे इतिहास पुरुष, युग पुरुष हैं।…( व्यवधान) मेरे तीन-चार आखिरी प्वाइंट्स बच गए हैं। [N54] 

          महोदय, अंत में मैं सीमांचल एक्सप्रेस के बारे में कहना चाहता हूं।  आप हाल ही में जब वहां गए थे तो बेल्लोरी में एक हॉल्ट के लिए आपसे मांग की गयी थी। मेरा आग्रह है कि उस हॉल्ट को बनाने की घोषणा आप करें। बरौनी-कटिहार रेलखंड पर भरतखंड हॉल्ट स्टेशन को तीन लाइन वाली क्रॉसिंग स्टेशन बनाने के लिए आपने रेलवे बजट, 2008-2009 में प्रावधान किया था। वहां स्थिति यह है कि उसे क्रॉसिंग स्टेशन का दर्जा दिया जा रहा है, लेकिन तीन लाइन नहीं बनाई गयी है, जबकि आपने उसका प्रावधान किया है। बनमनखी से किशनगंज वाया जलालगढ़, अररिया नई रेल लाइन बननी चाहिए। पुर्णिया जंक्शन से बारसोई, डगरूवा-वायसी होते हुए और बनमनखी से नरपतगंज वाया रानीगंज, भरगामा तक रेल लाइन से जोड़ने की कृपा करें। ललितग्राम से कुरसाकांटा वाया बथनाहा रेल लाइन बिछाने की व्यवस्था करने का आपसे आग्रह है। कटिहार से मनिहारी आपने बड़ी रेलवे लाइन से जोड़ दिया है और मनिहारी से शाहगंज पर अगर पुल बनाकर रेल लाइन से जोड़ दें तो उत्तर बिहार राज्य और झारखण्ड के बीच दूरी मात्र 25 किलोमीटर बच जाएगी। इसलिए मेरा आग्रह है कि अगर इसे जोड़ने का काम करेंगे तो उस इलाके की जनता को बहुत सुविधा होगी।

          लालू प्रसाद यादव जी और यूपीए की चेयरपर्सन मैडम सोनिया जी के नेतृत्व में देश में जो विकास और प्रगति हुई है, समाज के सबसे गरीब, कमजोर और देश के अल्पसंख्यक का सम्मान और विश्वास बढ़ा है, उसके लिए मैं बिहार और देश के सभी लोगों की ओर से लालू प्रसाद यादव जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं। इसके साथ ही मैं शाहनवाज जी से आग्रह करूंगा कि वह प्लीज अपनी बात को वापस लें।

 

                                                                            

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन (भागलपुर): महोदय, माननीय सदस्य ने बहुत से अपशब्द बोले हैं। पप्पू जी ने बार-बार मेरा नाम लिया है। मै कहना चाहता हूं कि जब लालू जी रेल बजट पढ़ रहे थे, उस समय का रिकॉर्ड निकलवाया जाए, उस समय बहुत से अपशब्द और गालियां दी गयी थीं। उस समय मैंने एतराज नहीं किया था। आज भी अगर कोई अनपार्लियामेंटरी बात हुई हो तो दोनों ही लोगों की बातों को निकाल दिया जाए, यह बात तो पहले ही मैंने बोल दी है। पप्पू जी मामले को बार-बार उठा रहे हैं। एक भी अल्पसंख्यक के नाम पर स्टेशन का नाम करने की बात आपको याद नहीं आई।…( व्यवधान) कम से कम आप एक स्टेशन का नाम शाहनवाज जी के नाम पर रखने की बात कहते जो आजाद हिंद फौज के जनरल थे। …( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing should go on record.

(Interruptions) …*

रेल मंत्री (श्री लालू प्रसाद)  :  महोदय, माननीय सदस्यों ने जो बातें कही हैं, मैं यह बताना चाहूंगा कि अपने देश के जितने भी महान नेता हैं, चाहे वे दक्षिण के हों, उत्तर के हों, पूरब या पश्चिम के हों, किसी भी नेता के नाम पर, महान नेताओं के नाम पर, यहां तक कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के नाम पर भी होम डिपार्टमेंट का, पंडित जवाहर लाल नेहरू जी का आदेश रिकॉर्डेड है, नामकरण नहीं किया जा सकता है। देश के सभी महान नेता पूज्यनीय और आदरणीय हैं। हम चाहकर भी मोतिहारी स्टेशन का नाम महात्मा गांधी के नाम पर नहीं कर पाए, बड़ी मुश्किल से उसका नाम हम बापू धाम कर सके। इस तरह का आदेश है। इसलिए रेलवे डिपार्टमेंट अपने मन से ऐसा नहीं करता है। सारे देश में एक से एक महान विभूतियां हुई हैं।[R55] 

          यह स्थिति है शाहनवाज जी, आपके प्रति कोई डैरोगेटरी शब्दों का इस्तेमाल तस्लीमुद्दीन साहब ने नहीं किया था। उन्होंने सिर्फ यही कहा था कि सुपरफास्ट ट्रेन का प्रावधान हो गया है, आप भी उसमें सफर करें। लेकिन आप इससे तिलमिला गए और गलत शब्दों का इस्तेमाल कर दिया। हम आपका आदर करते हैं। आपको कम से कम अपने शब्दों को वापस लेना चाहिए।

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : मैने कोई असंसदीय शब्द अपने भाषण में कहा हो तो उसे डिलीट कर दिया जाए, लेकिन उन्होंने जो बिना माइक के बात कही…( व्यवधान)

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : हो गया।

 

* Not recorded.

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : पप्पू जी आप बैठिए। आपने बहुत लम्बा भाषण दिया और मैं बोल रहा हूं तो कह रहे हैं कि हो गया। मेरी भी बात सुनें।

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : हम तो बात खत्म करने की कह रहे हैं।…( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय: कृपया शांत रहें।

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : उन्होंने मेरा नाम लिया, लेकिन उनके लिए कुछ नहीं कहा। लालू जी ने मेरा नाम लिया और आपने चार बार मेरा नाम लिया।

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : अच्छे के लिए लिया था।

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : अब मुझे तो बोलने दें। इस तरह से लोगों को मत डराएं। हमें बोलने तो दें, ऐसा न कीजिए। मैंने जब अपना भाषण समाप्त किया था तो मैने कहा था कि मेरा स्वभाव ऐसा नहीं है कि मैं इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करूं। यह बात मैंने पहले कह दी थी। पप्पू यादव जी को तो मैं बधाई देने उनकी सीट पर गया था कि उनकी आज बेल हो गई है।

श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : धन्यवाद।

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : मैंने तो आपको बधाई दी थी। जब मैं कह रहा था तो अगर मेरी बात में कोई असंसदीय शब्द हो तो वह कार्यवाही से निकाल दें और यदि उन्होंने कोई असंसदीय बात कही है तो वह भी कार्यवाही से निकाल दें। बात यहीं खत्म हो जाती है।

*SHRI S. MALLIKARJUNIAH (TUMKUR): Sir, doubling of the Yeshwantpur-Tumkur railway line was announced by Shri Jaffar Sharif ji during the year 1991.  It is unfortunate that the same is yet to be completed. Despite repeated requests made by both myself and the Government of Karnataka Railways has not paid attention to it. Since good number of school and college going students are commutting, all the trains including express trains should have a stoppage at Nittor station at least for 2 minutes. And it would be more useful to the people of Kadaba, which is a very attractive and famous place in the surrounding area. Similarly in the Ramapura railway station all the trains should be given stoppage for atleast two minutes. Necessary instructions should be given to concerned authority. 

          Near Upparahalli in Tumkur a R.O.B. should be constructed for the convenience of 50 thousand people living in this part of the city. Both the old and new lay outs of the city are very much crowded.  As far as the ambitious Bangalore Metro Rail Project is concerned the process of work is very slow due to lack of funds. This year only 215.70 rupees have been allocated for Namma Metro Project.  It is impossible to complete this big project with  this very meagre amount. Hence more founds should be released to speed up of this project. 

 Everyday hundreds of piligrims visiting Benaras via Chennai, there is no direct train from Mysore to Benaras. Therefore a new train should be introduced between Mysore and Benaras. So that piligrims would be benefited by this train.

There is a need for continuous up-gradation of infrastructure, technology and equipment. These are not difficult to the Railways as its finances have improved.  There are still thousand of unmanned crossings & signal systems are not functioning.  The accident rate in the Indian Railways is considered to be more than that of many other railways in the world.

 

*English translation of the Speech originally delivered in Kannada.

 

Therefore the railways need to do much more to ensure the safety and security of passengers.  There are also frequent reports of crimes on trains which pose a threat to the life and belongings of passengers.  Making trains crime free is as important as making them accident free.

Another thing I would like to draw the attention of the Hon’ble Railway Minister is that the Railways should pay more attention to cleanliness, hygine and provide drinking water in both trains and stations.

I hope the Hon’ble Railway Minister would consider all these genuine demands and take necessary steps immediately.

 

 

 

*DR. SUJAN CHAKRABORTY (JADAVPUR):

Expedite the construction of ROB at Baruipur within Sealdah Division of Eastern Railway;

          Expedite the work of the Underpass at Jadavpur Railway Gate which is a very long pending demand within the Sealdah Division of Eastern Railway;

          There is a huge growth of commuters in the Southern section of Sealdah Division, so there is a need for the better frequency.  The Hon’ble Minister has already agreed four Recks, which has yet not been done;

          12 Boggy Train is to be arranged to run at Canning, Kakhikhantapur and Diamond Harbour Section which was supposed to be completed by 2008;

          Survey for third line between Baruipur and Garia has been done. Do the sanction and arrange for the work;

          New Rail Line to be constructed between Jainagar to Raidighi, Jainagar to Jamtala and Piyali to Sonakhali.  This will enhance the traffic movement and quality of the life in Sunderbans areas. Priority must be given to this;

          Metro Railway extension work from Toligunge to New Garia was supposed to be completed by 2008, but this is yet not completed, so expedite the work; and

          I do propose for the extension of Metro rail from Garia to Baruipur which is highly developing as the new district headquarter of South 24 Paraganas.

 

* Speech was laid on the Table

 

 *श्री अनिरूद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव (गोपालगंज) ः 13 फरवरी, 2009 को माननीय रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद जी ने भारतीय रेल के वर्ष 2008-09 के लिए संशोधित अनुमान और वर्ष 2009-10 के लिए मात्र चार महीनों के अनुमानित आय और खर्चा का विवरण सदन के समक्ष प्रस्तुत करते हुए जरूरी लेखानुदान की मांग की स्वीकृति का अनुरोध किया है। मैं तहे दिल से अपनी सहमति देते हुए, माननीय रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद जी को बधाई देता हूं।  बधाई इस बात के लिए है कि आम आदमी पर बिना कोई बोझ डालते हुए पांच साल के अपने कार्यकाल में रेल को, भारतीय रेल के इतिहास को तीव्र प्रगति देना ही नहीं पांच वर्ष पहले नुकसान में चल रही रेल व्यवस्था को 90 हजार करोड़ रुपए का लाभांश कैश सर्प्लस अर्जित करके, आज देश में बुलेट ट्रेन भारतीय रेल मार्ग पर चलाने की घोषणा करने के लिए भी है।

          महोदय, माननीय रेल मंत्री जी उपरोक्त इंटीरिम बजट प्रस्तुत करते समय रेल गाड़ियों का सुगम संचालन सुनिश्चित करने हेतु 14 नई लाईन, आमान परिवर्तन में 3 स्टेशन, दोहरीकरण में 8 और 43 नई ट्रेनों की घोषणा और 14 ट्रेनों का गंतव्य स्थान का भी विस्तार किया है।

          इस संबंध में आपके माध्यम से मेरे संसदीय निर्वाचन क्षेत्र गोपालगंज तथा नजदीकी अन्य कुछ चरित्रात्मक प्रदेशों पर माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं।  माननीय रेल मंत्री जी ने थावे को एक नई रेलवे डिविजन बनाने का मेरा और मेरी क्षेत्रीय जनता की मांग स्वीकार कर इस नई डिविजनल कार्यालय स्थापना की घोषणा की है।  साथ ही साथ थावे से बेतिया को जोड़ने के लिए गंडक नदी पर एक नया पुल बनने जा रहा है।     

          माननीय रेल मंत्री जी से मेरा और मेरी क्षेत्र के जनता की मांग है कि उपरोक्त मार्ग अर्थात थावे से बेतिया को जोड़ने के मार्ग को रेल नई परियोजनायों में भी शामिल करें।

          जैसे कि आप जानते हैं कि थावे एक धार्मिक क्षेत्र है जहां माता का प्राचीन मंदिर है जिसके महत्व के बारे में समस्त बिहार तथा आसपास के राज्यों में जनता जानती है, माता के दर्शन करने दूर-सुदूर प्रांतों से पर्यटक आते हैं। इतना ही नहीं यह क्षेत्र पूज्य बापू जी की कर्मभूमि भी है जहां से भारत आजाद करने के लिए जो स्वतंत्रता संग्राम को पूर्ण समर्थन मिला था, लेकिन दुर्भाग्यवश यहां के कुछ ऐसे ग्राम और उनमें रहने वाली जनता जिन्होंने रेलगाड़ी का नाम तो सुना है परन्तु देखा नहीं है।  इन विषयों को मद्देनज़र रखते हुए मान्यवर रेल मंत्री जी से आपके माध्यम से उपरोक्त परियोजना की मांग स्वीकार करें जिससे बिहार राज्य पर्यटकों से राजस्व, थावे-बेतिया के बीच की दूरी कम होकर यात्रियों के आवागमन में सुविधा होगी तथा भारतीय रेल की भी आय में बढ़ोत्तरी होगी।

 

*Speech was laid on the Table.

*DR. ARVIND SHARMA (KARNAL):      Due to your will power and Efficient Management you have given a big relief to AAM AADMI  by reducing the passengers fare to all the classes.

          I specially thank you for your co-operation and blessing to the people of Karnal-my Constituency for meeting their various demands  time to time. Considering your benign helping hand people of Karnal hope still that you will meet their following small demands, which are annexed along with this letter.  I sincerely hope you will accord priority to these as usual.

Construction of a “Foot over Bridge” at Karnal Railway Station.

          This Bridge is essential considering the difficulties experienced by commuters.  Further, I am to request that the Bridge so requested should be constructed in a manner so that it has direct exit outside Platform to avoid crowding on the platforms. Also, in view of difficulties experienced by commuters for securing reservation tickets one additional computerized counter be put in working to obviate the difficulties.

          Also, people of Ram Nagar area have asked for a Privately Managed Railway Reservation Counter as their request was forwarded by me earlier, the same be considered on priority basis I need of large demands of tickets for various stations.

.         Since, Railway has already declared Karnal Station as Modern Railway Station, Trains like “Pooja Express”  be halted at the Station on popular demand of pilgrims to “Vaishnu Devi”.

 

 

* Speech was laid on the Table

DEMANDS RAISED BY COMMON PEOPLE & DAILY COMMUTERS FOR GHARUNDA RAILWAY STATION

          Regarding the position of parallel road at Gharonda Station near the railway quarters to the Grain Market, Gharaunda Distt., Karnal. (PERMANENTLY)

          As I already explained in written earlier to your good self that there is traffic jam on civil road leading from L-xing No. 63 to Gharunda town to avoid congestion on civil road on behalf of public I had recommended to Railway Authorities to release the land near the Railway Quarters of this station for developing a alternate road earlier but the same had not examined (permanently) up till now by the Railways.

          Stoppage of Jhelum Express at Gharunda Railway Station.

                   There was a regular stoppage of Jhelum Express from last so many years at Gharunda Railway Station, Distt. Karnal but unfortunately, this stoppage is cancelled by two times by Railway only for making inconvenience to the daily passengers/commuters and public of this locality as thousands of daily passengers having their Railway Passes of One, Two or Three Months respectively and paid advanced already to the Railway authorities.

DEMANDS RAISED BY COMMON PEOPLE & DAILY COMMUTERS FOR TARAORI RAILAY STATION, DISTT. KARNAL.

 

 

            Stoppage of Ekta Express and Ucchar Express (Up & Down).

 

There is heavy demand raised by daily passengers and general public to stop the both of the above said Trains at Taraori Railway Station to reach their destination faster.

DEMANDS RAISED BY COMMON PEOPLE & DAILY COMMUTERS FOR NILOKHERI RAILWAY STATION, DISTT-KARNAL

          Stoppage of Ekta Express and Ucchar Express (Up & Down).

 

The above said trains stoppage is also raised highly the residents of Nilokheri, Distt. Karnal as they feel inconvenience due to lack of stoppage of passenger trains at both of the above Railway Stations which falls in my constituency.

DEMANDS RAISED BY COMMON PEOPLE & DAILY COMMUTERS FOR SAMALKHA RAILWAY STATION, DISTT-KARNAL.

 

          Stoppage of Jhelum Express and New Delhi – Bhatinda Express at Samalkha Railway Station.

 

I had already raised this issue previously for the well fare of the Daily Passengers and General Public for the above said stoppages in public interest to solve the inconvenience faced by Railway users.

          Extension of Passenger Train-3DPM from Sonipat to Panipat.

The above said train’s last root is up till sonipat and it is heavily demanded by the Daily passengers  of both sides (Delhi to Panipat, vice-versa) for the extension of the above said train from Sonipat Railway Station to Panipat in public interest and it is also favourable for Railways to get maximum revenue as it solves the problem of Daily Passengers also.

 

          Approval of New Railway Line from Panipat Railway Station to Haridwar via Kerana, Shamli and Mujjafarnagar as the survey had already been conducted by the Railway Authority.

          Approval of New Railway Line from Panipat to Assandh as there is a heavy demand of the people of that Area covering approximately 80-85 Villages for introducing a new Railway Track in public interest and it will be beneficial for District’s Panipat, Karnal, Jind & Rohtak (Haryana).

DEMANDS RAISED BY COMMON PEOPLE & DAILY COMMUTERS OF DISTT. PANIPAT (HARYANA).

          Providing of Level Corssing (Regular Phatak) at Lord Gaushala, Village Shahpur Distt. Panipat

 

          Providing of Level Crossing (Regular Phatak) at Village-Naultha Distt. Panipat

         

          The above said demand is raised for a long time by the general public of this area as non-availability of this phataks cause many major accidents daily. I had already submitted the proposals to the Railway Authorities regarding the  construction of these regular Phatak’s/Pakka Phatak’s  at the same points (above said).  The state Government had already granted its approval for  Construction the Roads (from Naultha linking Dahar & Badhod)  to join Villages, but the work is still pending as the allotment is not approval by Railways for above said Phatak’s. 

          It is a realistic budget in the welfare of the people belonging to all strata of Indian Society and Honorable Railway Minister deserves all the appreciation and thank from General Public.

          Therefore, I request your good self to kindly consider all the demands raised by the common people and commuters of karnal Lok – Sabha constituency in Public Interest. I shall be highly thankful to you.

 

 श्री के0सी0 सिंह ” बाबा  ” (नैनीताल) : महोदय, अन्तरिम रेल बजट 2009-10 पर चर्चा के लिए मुझे समय दिया धन्यवाद , यूपीए अध्यक्षा माननीया सोनिया गांधी एवं माननीय प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह के गतिशील एवं कुशल नेतृत्व के लिए मैं अभिवादन करने के साथ धन्यवाद देना चाहता हूं । माननीय रेल मंत्री महोदय का भी आभार प्रकट करना चाहता हूं । जिन्होंने आज मन्दी के समय श्री भारतीय रेल को मुनाफे की ओर अग्रसर रखा है । वित्तीय कायाकल्प के सपने को साकार करने के लिए पूरे रेल विभाग ने टीम वर्क किया है ।

 

          महोदय, उत्तराखंड  एक पर्यटक विशेष प्रदेश होने के साथ एक नया प्रदेश भी है । मैं विगत वर्षों से लगातार उत्तराखंड में रेल सेवा विस्तार के लिए सरकार से अनुरोध कर रहा हूं । जिसमें कई मांगों को माननीय मंत्री महोदय ने अपनी स्वीकृति दी है ।  मान्यवर, उत्तराखंड के जनमानस के कतिपय अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों का रेल बजट में समावेश नहीं हो पाया है । उत्तराखंड एक पर्यटक विशेष प्रदेश होने के कारण प्रदेश में रेलवे यातायात की समुचित व्यवस्था करने की अत्यधिक आवश्यकता है ।

·       काशीपुर शहर में रेलवे गोदाम से राष्ट्रीय राजमार्ग बाजपुर रेलवे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज का निर्माण करना नितांत आवश्यक है, क्योंकि यहां पर एक-एक घन्टे तक जाम लगा रहता है और दुर्घटना की संभावना बनी रहती है ।  मेरा मंत्री महोदय से अनुरोध है कि प्रदेश में इस तरह के व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों में पड़ने वाले रेलवे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज का निर्माण करने की आवश्यकता है

·       दिल्ली से रामनगर तक सम्पर्क-क्रान्ति में दिल्ली से काठगोदाम की तर्ज पर दिल्ली से रामनगर तक ए0सी0 चेयर कार कोच लगाने की आवश्यकता है ।

·       कार्बेट एक्सप्रेस रेलगाड़ी में हाईपावर इन्जन लगाने की आवश्यकता है ।

·       काठगोदाम से जम्मू तवी तक चलने वाले गरीब रथ रेलगाड़ी में रामनगर से दो-तीन बोगियां जोड़ने की अत्यधिक आवश्यकता है । क्योंकि काशीपुर, बाजपुर और गदरपुर में पंजाबी मूल (समुदाय) के हजारों लोग यहां पर निवास करते हैं ।

·       रानीखेत एक्सप्रेस में रामनगर तक एव़् द्द्य्, ठ्ठदड्ड ख्र्दड्ड श्रेणियों की व्यवस्था करने के साथ रेल के प्रत्येक कोच का उन्नयन किया जाए ।

 

*Speech was laid on the Table

·       उत्तराखंड में काशीपुर-जसपुर-धामपुर-रेल लाइन का निर्माण किए जाने की अत्यधिक आवश्यकता है जिससे प्रदेश में भावर तराई बैल्ट एक कोने से दूसरे कोने तक जुड़ सकती है, टनकपुर से देहरादून सीधे सम्पर्क रेल लाईन निर्माण से उत्तराखंड के एक मैदानी छोर से दूसरे छोर को जोड़ने हेतु भविष्य में किच्छा सितारगंज खटीमा रेल मार्ग बन जाने के पश्चात् काशीपुर से नजीबाबाद हेतु नई रेल लाइन का निर्माण होने से पर्यटकों के साथ-साथ यहां के निवासियों को सुविधा प्राप्त होगी,

·       दिल्ली देहरादून मार्ग को मुजफ्फर नगर से लकसर तक सीधे रेल लाइन से जोड़ने की आवश्यकता है ।

·       लकसर से देहरादून वाया हरिद्वार रेल लाइन के दोहरीकरण की आवश्यकता है ।

·       नई दिल्ली से देहरादून हेतु एक सीधी द्रुतगामी नॉन स्टॉप रेलगाड़ी चलाए जाने की आवश्यकता है ।

·       देहरादून से काठगोदाम के लिए दैनिक रेल चलाए जाने की आवश्यकता है ।

·       टनकपुर , काठगोदाम एवं रामनगर वाया कोटद्वार तक दैनिक रेल चलाए जाने की आवश्यकता है ।

·       काठगोदाम से दिल्ली हेतु चलाई जा रही वर्तमान सम्पर्क क्रान्ति एक्सप्रेस में तीन बोगियां लालकुंआ पर जोड़ने की आवश्यकता है ।

·       महुआखेड़ा गंज पर सभी रेलों को रूकने की व्यवस्था की आवश्यकता है ।

·       उत्तराखंड सम्पर्क-क्रान्ति एक्सप्रेस हल्द्वानी पहुंचने से पहले हल्दी स्थान पर नहीं रूकती है जो कि वास्तव में प्रख्यात गोविन्द वल्लभपन्त कृषि विश्वविद्यालय  का स्टॉपेज है तथा उत्तराखंड का एक नव निर्मित विशाल औद्योगिक स्थल भी है, यहां पर सभी रेलगाड़ियों के रूकने की व्यवस्था नितान्त आवश्यक है,

·       मान्यवर, आपने टनकरपुर से बागेश्वर तक नई रेल लाइन के सर्वे के आदेश दिए थे । खेद है कि अभी तक सर्वे का कार्य प्रारम्भ नहीं हुआ आपसे अनुरोध है कि टनकरपुर से बागेश्वर तक रेल लाइन का सर्वे का निर्माण कार्य शीघ्रातिशीघ्र शुरू किया जाए । इस रेल लाइन के निर्माण से प्रसिद्ध तीर्थ स्थान पूर्णागिरी जाने वाले तीर्थयात्रियों को भी लाभ मिलेगा ।

·       ऋषिकेश से देहरादून हेतु नए रेल मार्ग का निर्माण की आवश्यकता, ऋषिकेश से देवप्रयाग / बद्रीनाथ तथा रामनगर से चौखुटिया के लिए रेल मार्ग के निर्माण की आवश्यकता, बेरली-टनकपुर मीटरगेज को ब्राडगेज लाईन में बदलने की आवश्यकता है, टनकपुर से प्रसिद्ध तीर्थ स्थान पूर्ण गिरी तक नई रेल लाईन के निर्माण की आवश्यकता है ।

·       तिरूअन्तपुरम (केरल) एवं देहरादून के मध्य रेल सेवा आवश्यक है,

 

·       उत्तराखंड के प्रत्येक रेलवे स्टेशन का कम्प्यूटरीकरण एवं सौन्दर्यीकरण करने की आवश्यकता है।

·       रामनगर-बाजनगर-गदरपुर रूद्रपुर-किच्छा-सितारगंज-खटीमा टनकपुर तक नई रेल लाईन के        निर्माण की आवश्यकता है ।

·       काशीपुर रेलवे स्टेशन क्षेत्र के अन्तर्गत बाजपुर रोड रेलवे क्रासिंग से शुगर फैक्ट्री रोड तक रेलवे स्टेशन क्षेत्र में नाला निर्माण की आवश्यकता है ।

 

          महोदय, उत्तराखंड राज्य में वहां की जनसंख्या  से कई गुना पर्यटक, तीर्थ यात्री, प्रकृति प्रेमी, हिमालय प्रेमी, वन्य जन्तु प्रेमी, चलचित्र निर्माता अनेक यात्री बारहमास भारतवर्ष तथा विदेशों से आते हैं, इसलिए आपसे अनुरोध करूंगा कि जनमानस के हित को दृष्टिगत रखते हुए मेरे द्वारा तथा पूर्व में प्रदेश सरकार द्वारा प्रेषित किए गए प्रस्तावों को वर्ष 2009-10 के रेल बजट में समाहित करने का कष्ट करेंगे ।

 

*श्री जय प्रकाश (हिसार): महोदय, हिसार से सदलपुर रेलवे लाइन पर 19 कि0मी0 खम्बा नं0 5 ओर 6 के बीच चीडोद गांव से चौधरीवास गांव वाले रास्ते पर रेलवे फाटक बनाया जाये। आधा पैसा हरियाणा सरकार या सांसद निधि से देने को तैयार हूं।

          जींद से बठीडा रेलवे लाईन पर बडोदा गांव में हाल्ट बनाया जाये। जिसके बारे में आपने कहा था, मगर अभी तक नहीं बनाया गया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

* Speech was laid on the Table.

 *SHRI K.C. PALLANI SHAMY (KARUR): At a time when global recession and economic melt down is staring at us our Railway Minister has created a record not merely by not increasing the passenger fare or the freight charges but by reducing the passenger fare by 2%. I would like to congratulate both Shri. Lalu and Shri.Velu for this achievement. This is an interim budget but still we find a road map for the days to come and the ensuing  Railway Budget. While welcoming and extending my support  on behalf of Dravida Munnetra Kazhagam I would like to put forth my views and certain demands on behalf of the people of Tamilnadu particularly our Leader and the Chief Minister of Tamilnadu Dr. Kalaignar Karunanidhi and the people of my Karur constituency.

This budget apportions Rs. 37,905 crores for Annual plan while showing the revenue surplus as Rs. 19,320 crores in the form of cash reserve. This is an achievement. During his tenure Shri. Lalu has shown Rs. 90,000 crores as surplus. In this budget he has made certain welcome announcements. Laying of dedicated freight corridor for the east has commenced. The western corridor works are to commence this month. At this point I would like to lay stress on the need to commence immediately a dedicated freight corridor linking  the south with the north. This must go upto Tuticorin which is in the farthest south and emerging as one of the biggest ports in the country. I would like to remind you that our leader Dr. Kalaignar Karunanidhi emphasized this in the National Development Council.

In order to ensure country’s balanced economic growth dedicated freight corridor for the movement of Rail Cargo would help. Hence it is necessary to link

 

 

 

 

 

* English translation of the Speech originally delivered in Tamil.

 

the southern parts of the country upto Tuticorin. In the similar pattern of raising funds and managing the affairs of metro rail system, dedicated freight corridor for the south may include all the state government of the south, the government at the centre and the railways. I request the Ministry of Railways to take up this project which has been stressed upon by the far sighted elder statesman and the Chief Minister of Tamilnadu Dr. Kalaignar Karunanidhi.

 

Pre-feasibility study for laying railway line for the high speed Bullet trains have been taken up in many parts of the country.  While referring to it Hon. Railway Minister has referred to Bullet train linking Delhi and Patna. I urge upon the Minister to announce Bullet train project linking the Capital cities of all the four southern states. As a pilot project, laying of a railway line for the Bullet train between Kanyakumari and Chennai may be taken up. Later on Bengaluru and Hyderabad can be linked. I want the Railway Minister to give his nod and take up this project.

Freight charges have not been increased as announced and remains as restructured. Every State government especially Tamilnadu must get concessional Freight charges or rebate for moving rice and grains for public distribution system and nutritious noon-meal scheme. This would help encourage the State governments to carry on welfare measures aimed at the public.

43 new trains have been  announced. Four of them pertains to Tamilnadu. A daily passenger train between Erode and Shencottah has been announced. I would request you to see that this is not an extension of Tiruchi-Erode passenger train. Let this new train may be an additional train. A new train between Karur and Chennai may be operated as Karur Express or Karikalan Express. A new train between Karur and Nagoor via Tiruvarur linking the Kongu region with the Thanjai region may be introduced as Aaroor Cholan Express. The long pending work of linking Nagapatinam with Velankanni by way of laying a Railway line between these two places must be completed by the Railways at the earliest. I welcome your extending upto Nagoor the daily express train between Ernakulam and Tiruchirappalli. You may take efforts to complete the process of linking the three famous pilgrim centres Nagoor, Velankanni and Sikkal (near Nagapattinam). A daily Express train between Tiruchirappalli and Madurai and the new link Express between Coimbatore and Tuticorin are to be welcomed. At this juncture I would like to request you to consider to make the bi-weekly super fast train between Tirunelveli and Mumbai via Thiruvananthapuram as a daily train. This would greatly benefit the people from all the three states while promoting tourism and business travel apart from pilgrimages.

Preparation of quality food with unique culinary skill is part of our culture. Hence distribution of food wanting in quality is against our civilized cultural background. I welcome the announcement of Shri. Lalu to end this uncivilized way of serving insipid food. Rail passengers are neither dallying nor partying but they are travelling as paying guests and must be fed quality food. Hence quality must be increased and price must be reduced. The service tax on food items served in the trains must go. I wish the Railway Minister intensifies his efforts in this regard to take up with the Finance Ministry.

Our Railway Minister who has presented this budget showing record profits while achieving targets must speed up the pending projects announced and taken up in the northern districts of Tamilnadu.

When we see certain ongoing projects going on for long and much long beyond measure, we can only remind ourselves of a saying that there will always be some civil work or the other going on in Avudaiyar koil but never ever will it be seen completed. Similarly laying of railway line between Karur and Salem is going on and on for more than fifteen or twenty years. Salem division was carved out. But the process of establishing the Head Quarters transferring adequate railway staff from Palghat has not been completed as yet.

 

‘Like a donkey dwindling into an ant’, is a proxym. Similarly the railways that made profits during the British regime had gone through problem days with deficit budgets. But today the basis for a strong foundation has been laid. According to our Minister, Railways that remained as a huge gigantic elephant has now become a fast moving Cheetah.

Like the fast paced Cheetah the slow moving railways have emerged as a fast flying ones in this era. Such railways must not be a cause for bringing down the pace of the movement of the road traffic and the road transport. I would like to point out that a Road over Bridge as part of Highways was opened in Lalapet in my Karur constituency. Lorry transport, pilgrim and tourism movement and other long distance bus service have all benefitted from the construction of this ROB.  The kind gesture the Union Surface Transport Minister provided for the necessary funds. After opening the ROB, the Level Crossing No.48 has been closed affecting people living in the neighborhood. People from 40 villages and about 2 lakhs of people who have been using the Level Crossing No.48 everyday are greatly affected by the closure. The Railways may consider closing down Level Crossing No.49 in the vicinity and the railway employees working there may be asked to work in LC No.48 which can be opened again.  Even after doing this railways would have still saved the money spent on three of the six railway men posted at both the Level Crossings. I would like to point out that this is a financial saving for the railways which has not spent any money on Lalapet ROB project for which the fund was mobilized by us. Hence the Railways must consider favourably the demands of the local people there.

          On behalf of DMK, extending our support to the Railway Budget, let me conclude.                                                                                                                                                                                                              

 

 

 

*SHRI RAVICHANDRAN SIPPIPARAI (SIVAKASI): On behalf of MDMK and our leader Shri Vaiko raise to speak. First of all, this is neither a full Budget nor a half-Budget but simply a vote Budget. It is a populist Budget. It is a visionless budget and the mission is to get votes.

          The Railway Minister did not tinker with freight rates in the interim-Budget having raised them on food grains, pulses and fertilizers on February 1. Hon’ble  Railway Minister has announced 25 surveys for 14 New lines, three for gauge conversion and eight for doubling wheel factory in Chhapra and diesel and electric locomotive factories in Madhpura, but he neglected Tamil Nadu. The Minister has himself promised, for a Railway Factory at Pollachi while we were meeting him over Palakaddu divisional issue headed by our leader Shri Vaiko. But I don’t see nothing in this regard in the interim Budget. While proclaiming, the Railways generated Rs.90,000 crore in the last 5 years. It is disappointing to note no effort has been made to transfer the benefit to downtrodden. It is nothing but jugglery of words. This Railway Budget has no proposal for new lines or electrification in Tamil Nadu. Railway Board has recently cleared 5 new lines for Tamil Nadu last year. The Planning Commission has suggested that the Tamil Nadu Government says the Railway Ministery should bear the total cost. In this tug of war between Tamil Nadu Government and Planning Commission, people in backward area of Tamil Nadu are denied railway facilities. The following five lines should be taken up urgently by the Railways with the Government of Karnataka, Jharkhand and some other States are also willing to share the cost but unfortunately the

 

 

 

* Speech was laid on the Table.

Government of Tamil Nadu has refused to share the cost. So it is very painful.

          Dindigal       –        Gudlor

          Ariyalur        –        Tanjore

          Needamangalam-   Pattukottai

          Dharamapuri          –        Moorapur

          Jolarpet        –        Thiruvanmamalai

All the projects should be taken up by the Railway Minister urgently. Doubling of railway line between Vilupuram and work of Dindigal should be expedited. The doubling of railway line between Madurai and Kanyakumarai and Tuticorin should be taken up.

          The Gauge conversion work between Virudunagar and Manamadurai viz- mnuppukottai should be completed in a time bound manner and it should be completed before 2009 December.

          The new Railway line between Madurai-Tuticorin viz. Aruppukuttai and Villathikulam must be considered. It should facilitate goods traffic from Tuticron Port.

          I have been demanding for a stoppage of Nellai Express train at Sattur Railway Station since last 3 years. Nothing happened in this regard. I urge the Minister kindly to provide the stoppage for Nellai Express at Sattur Railway Station. The Nellai Express train running between Chennai-Thirunelveli is the last train that starts from Chennai. This stoppage will help Sattur, Sivakasi bound passengers.

          South-North Freight Corridor should be proposed immediately.

          I have been demanding for road over bridge. Railway in Sivakasi at Sattchiappuram Rail Crossing. There is a long pending demand for road over bridge at Virudnagar, Ramamoorthy Road Railway level Crossing. It should be taken up immediately. The BOB work should be completed within a year.

          There is a long pending demand from various Associations of the following new train services.

          1.       Chengottai    –                  Coimbatore            –        Daily

          2.       Chengottai                       Bangalore              –        Daily

          3.       Chengottai                       Maylaputurai          –        Daily

          4.       Chengottai                       New Delhi              –        Weekly

                                                                                                train.

          5.       Chengottai    –                  Howrah

6.       Chengottai    –                  Mumbai

         

7.       Kanyakumari          –                  Varanasi     –        Weekly via  Madurai

 

8.       Kanyakumari          –                  Hyderabad   –        Tri Weekly via

                                                                                      Madurai

 

9.       Tuticorin       –                  Mangalore    –        Daily

 

          These trains should be introduced as early as possible. Thirutthangal Railway Station should be upgraded and provided more passenger amenities. In Kovilpatti subway should be provided under ROB at Lakshmi Mills level crossing. All existing railway gates should remain in between Kovilpatti and safety of women passengers at Virtudnagar Station should be taken care of. Facilities for the disabled also found no mention in the Budget Speech. Even many A grade stations don’t have elevators, lifts and enough toilets. On the one side you are reducing railway fares which is an eye wash. On the other side passengers pay more to get Tatkal Tickets. Number of tickets available in non-tatkal (regular) categories reduced. Cushioned seats in all general class bogies promised but not delivered. As contractors take control of platforms, cheaper eatables go missing and the quality of food offered on trains deteriorated. Earthen cups and Khadi blankets disappear from coaches.

          Even after 90,000 crores of surplus, coming down of diesel prices, the Railways have done nothing new to Tamil Nadu. All the ongoing Railway projects work are very slow. It is a visionless Budget  and the mission to get votes. This Budget is prepared keeping an eye on the coming Lok Sabha polls.

          With these words I conclude my speech.

 

                                                                                     

 
         

*SHRI PRASANNA ACHARYA (SAMBALPUR):  I oppose this Railway Budget placed before the House by the Railway Minister Shri Lalu Prasadji on 13th of this month. This Railway Budget is parochial budget.  This does not reflect the wishes, aspirations and requirement of the nation as a whole so far as development of Railways are concerned.  I do not understand how leaders demanding national stature often behave like regional or local leaders while discharging their responsibilities on behalf of the nation. People say, this Railway Budget on eve of election is not a budget of the Indian Railways but only of the Bihar Railways. Most of the States particularly the long neglected under-developed States like Orissa have been overlooked in this Railway Budget which is unpardonable.  I would request the Railway Minister to look at the nation as a true Indian and not as a Bihari, Gujarati or Bengali.

          If the Railway Minister claims to have earned enormous profit, why doesn’t he spend at least a little portion of it for the development of expansion of Rail infrastructure in poorer State like Orissa which are contributing sizeable revenue to the Railway in the shape of freight.

          Sir, without going detail into it, I would request the Hon’ble Railway Minister to look at the following proposals in my area under East Coast Railway zone.

i)        Construction of New Rail Line from Bargarh to Nawapad via Padampur, Paikmal:

 

This being an underdeveloped area, the proposed line would help accelerate the pace of development.  Transportation of coal from Orissa to Western India through this route will be cheaper and would earn a lot of revenue for the Railways. The  upcoming Steel plants in Orissa shall use this line as the shortest route to market their finished

 

* Speech was laid on the Table

products in western part of the country.  Survey has already been done and the R.O.R. is 18% which is quite satisfactory and fulfils the norms of the Railways for construction of new line. Initial budgetary provision for this rail line may kindly be made. 

ii)       A new train either from Bolangir to Allahabad or Sambalpur to Allahabad may be introduced to facilitate travelling of large number of passengers from Western Orissa to Allahabad for performing shradha ceremonies and other rituals.

iii)      The Howrah-Sambalpur Ispat Express may be extended up to Titlagarh which would provide a direct link to Kolkata for the people of Sonepur, Bolangir, Bargarh and Boudh districts.  As the halting time of this train at Sambalpur is more than fourteen hours, its extension to Titlagarh should not create any problem for the Railways.

iv)      The Nizamuddin-Visakhapatnam Express should be directed from Sambalpur to Visakhapatnam enroute Bargarh, Bolangir, Titlagarh so that passengers of the districts in Western Orissa will get a direct communication to the National Capital.  It is not going to affect the interest of the commuters of Cuttack, Bhubaneswar as there are other trains from Sambalpur to Bhubaneswar and Bhubaneswar to Visakhapatnam.

v)       The industrial scenario is fast changing as large number of steel plants in the Jharsuguda and Sambalpur Distts. have come up. Inadequate train services is a serious impediment for people of that area.  I, therefore, suggest for introduction of a new Intercity Express between Jharsuguda and Bhubaneswar. 

vi)      The operating ratio of East Coast Railway since its formation has been one of the best in the Indian Railways.  However, expansion of jurisdiction of East Cost Railways is a necessity for better coordination and facilitation of bulk customers.

                   Ministry of Railways is requested either to extend the jurisdiction of Sambalpur division to include (a) Jharsuguda-Barsuan-Kiriburu (b) Rourkela-Nuagaon (c) Jharsuguda-Himgiri or to create a new division with the headquarters at Jharsuguda with jurisdiction as mentioned above under the East Cost Railway.  Likewise, the jurisdiction of the East Cost Railway may be extended to include Banspani to Padapahar section and Bhadrak-Laxmannath Road section in Khurda Road Division.

vii)     Attabira and Barpali are two important places in the district of Bargarh.  It is agriculturally rich and industrially upcoming area. I would request the Hon’ble Railway Minister to pass instruction for stoppage of all Express Trains enroute Attabira and Barpali.

I hope, the Hon’ble Railway Minister will put an ear to my suggestions and implement it as it does not involve any financial burden on the Railways.

श्री आनंद परांजपे : उपाध्यक्ष महोदय, मैं मराठी भाषा में बोलना चाहता हूं।

उपाध्यक्ष महोदय : क्या आपने मराठी में बोलने के लिए नोटिस दिया है।

श्री आनंद परांजपे : जी नहीं। मैं मराठी में सिर्फ दो लाइन बोलूंगा और बाद में अंग्रेजी भाषा में बोलूंगा।

उपाध्यक्ष महोदय : आप मराठी में जो बोलेंगे, वह रिकार्ड में नहीं जाएगा, क्योंकि अभी ट्रंसलेशन नहीं हो पाएगा।

श्री आनंद परांजपे (ठाणे): उपाध्यक्ष महोदय, मैं हिंदुस्तान के सबसे बड़े लोकसभा संसदीय क्षेत्र ठाणे से चुन कर आया हूं। शिव सेना का सांसद होने के नाते, मुम्बई और ठाणे जिला के लाखों यात्री, जो लोकल ट्रेन से यात्रा करते हैं, उनकी समस्याएं मैं सदन में रखने जा रहा हूं। 14वीं लोकसभा में मेरा यह पहला सम्भाषण है और मुझे विश्वास है कि सारे सम्मानीय सदस्य और माननीय मंत्री जी मेरे विचार ध्यानपूर्वक सुनेंगे।

          माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं माननीय रेल मंत्री जी का अभिनंदन करता हूं कि इस साल के रेल बजट में भी उन्होंने दो प्रतिशत की रेल भाड़े में कटौती की है। पिछले चार सालों में प्रथम श्रेणी ए.सी. में 28 परसेंट और द्वितीय श्रेणी ए.सी. में तकरीबन 20 परसेंट कटौती रेल भाड़े में की है। आम आदमी की बात करते हुए मैं इस सोच में पड़ जाता हूं कि आम आदमी जो विराट से चर्च गेट और कसारा विरार कर्जट से सीएसटी, लोकल ट्रेन में सफर करता है, उन लोगों को माननीय मंत्री जी कैसे भूल गए। तकरीबन 65 लाख लोग रोज मुम्बई में इस लोकल ट्रेन से यात्रा करते हैं।

Sir, I demand that there should be a minimum of five per cent rate cut in suburban season ticket and card ticket in the Railway Budget for the year 2009-10. 

          I also appreciate that nearly 43 new trains have been introduced in this Railway Budget.  Mumbai has been connected with all parts of the country including Rajasthan, Uttar Pradesh, Tamil Nadu and Kerala.  But I would have appreciated if the hon. Railway Minister would have introduced new trains connecting Mumbai with major cities in Maharashtra like Nagpur, Pune, Aurangabad, Kolhapur and Sholapur.   

          Sir, I come from Thane Lok Sabha Parliamentary Constituency.  Thane is the oldest station. The first train from Boribunder to Thane was started in 1853.  As the elected representative from Thane, I would request the hon. Railway Minister to kindly consider the demand to declare Thane as a heritage station. [H56] 

Give it a museum where  the heritage station of Thana  will be indicated.

          Even though Thana is ‘A’ class metro station and it generates revenue of nearly Rs. 80 crore per year, yet it lacks the basic facilities like the FOBs. The FOBs are missing. Time and again, we have been requesting the hon. Minister for third FOB but the proposal is still pending with the Railway Board. मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करता हूं कि रेलवे थर्ड एफओबी को जल्द से जल्द मंजूरी दी जाए। इसी तरह से थाना स्टेशन, जहां प्लेटफार्मों की लंबाई बढ़ाने का काम बहुत धीमी गति से चल रहा है उसे भी गति मिले। मेरे संसदीय क्षेत्र में कल्याण, जहां सबसे बड़ा जंक्शन है, वहां के स्टेशन की दशा बहुत खराब है। मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से निवेदन करता हूं कि एफओबी और प्लेटफार्म बढ़ाने के कई प्रस्ताव रेल बोर्ड मंजूरी के लिए पेंडिंग हैं, उन्हें इस बजट में मंजूरी दी जाए। In the last three years, the freight charges have been increased by around 40 per cent. In this global slowdown,  I demand that the freight charges  should also be considered  and brought down by five per cent, which will definitely boost the steel industry, cement industry and other heavy industries. आपने देखा होगा कि 15 दिन पहले बोरोवली में अचानक रेलवे पैसेंजरों का आंदोलन हुआ। मुंबई में सैंट्रल रेलवे और वैस्टर्न रेलवे इस बजट में काफी उम्मीदें लेकर बैठे थे कि मुंबई रेल विकास कारपोरेशन (एमआरवी) की स्थापना 1999 में की गई थी ताकि नए रैक्स मुंबई को मिल सकें। सैंट्रल रेलवे के पास 167 रैक्स हैं और 1410 सैंट्रल रेलवे ट्रिप्स करती है। बोरोवली जैसी स्थिति किसी भी दिन थाना, कल्याण में हो सकती है, जन आक्रोश या आंदोलन हो सकता है। मैं मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि सैंट्रल रेलवे को जल्द से जल्द और ज्यादा से ज्यादा रैक्स दिए जाएं। कुर्ला और कल्याण के बीच फिफ्थ और सिक्स्थ ट्रैक का काम एमआरवीसी के माध्यम से एनयूटीपी फेस-2 में शुरू है, इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए क्योंकि जब तक फिफ्थ और सिक्स्थ ट्रैक नहीं होगा तब तक मुंबई में लोकल ट्रेनों की संख्या नहीं बढ़ सकती। मीराभेंडर एक ऐसी महानगर पालिका है, जिसकी आबादी 10 से 12 लाख है। फास्ट ट्रेनों के लिए बोरोवली के बाद विरार के बीच थर्ड और फोर्थ ट्रैक शुरू कर दिया लेकिन लोकल ट्रेन आज भी थर्ड और फोर्थ ट्रैक के लिए चालू नहीं है। अगर बोरोवली और विरार के बीच थर्ड और फोर्थ ट्रैक में लोकल ट्रेन शुरू नहीं होती हैं यह मसला ऐसे ही रहेगा।    

          मेरे लोकसभा संसदीय क्षेत्र में दिवा पनवेल रेलवे लाईन वर्ष 1965 में शुरू हुई थी।  मंत्री जी के बजट भाषण में पटना  – मुगलसराय और पटना – गया नए डीएमयू दिए हैं। मैं मंत्री जी से निवेदन करता हूं कि दिवा पनवेल 1965 में शुरू हुई थी, तब भी पांच ट्रिप्स दीवा पनवेल के बीच में थे, इसे बढ़ाया जाए। पिछले  20 साल से वहां के लोग आंदोलन कर रहे हैं, वहां तीन नए रेलवे स्टेशन उस रूट पर बनाए जाएं- उसरघर, बामिवली , नारीवली, इस विषय में मंत्री जी जल्द से जल्दी कोई निर्णय लें। मंत्री जी ने भाषण में 14 नए रूटों की फिजीबिलिटी सर्वे के लिए घोषणा की है, पिछले कई सालों से कल्याण और नगर मालशेज घाट द्वारा एक रूट का सर्वेक्षण हो चुका है लेकिन उस रूट के बारे में कुछ नहीं हुआ है। मेरे चुने जाने के बाद थाना स्टेशन के लिए कई बार निवेदन किया गया और हम दूर देश में जाने वाली गाड़ियों के स्टॉपेज के लिए लगातार फॉलोअप कर रहे हैं। कुछ ट्रेन तो जरूर रुकीं लेकिन बजट में कुछ नई ट्रेनें इंट्रोडय़ूज की हैं जैसे मुंबई-वाराणसी, मुंबई-गोरखपुर, मुंबई-मछलीपट्टम, मुंबई-तिरुवेली और इन ट्रेनों को भी थाना पर स्टॉपेज दिया जाए। इसके अलावा लोकमान्य तिलक से कानपुर जाने वाली उद्योगनगरी, लोकमान्य तिलक से वाराणसी चलने वाली सुपरफास्ट ट्रेन, मुंबई सीएसटी से भुवनेश्वर चलने वाली कोणार्क एक्सप्रेस और मुंबई सीएसटी से चलने वाली कन्याकुमारी चलने वाली एक्सप्रेस हैं।[r57] 

          ठाणे शहर की आबादी लगभग 18 लाख है। यह एक जिले के बराबर है। मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं कि मंत्री जी सहानुभूतिपूर्वक इन सारी मांगों पर विचार करें और मुम्बई लोकल ट्रेन से जो आम आदमी सफर करते हैं, उन्हें इस रेल बजट से कुछ दिलासा दें। मंत्री जी ने अपने भाषण की शुरूआत एक कविता से की थी – ‘शुक्रिया कर मैं शुरू करता हूं अपनी आज बात, साथ लेकर मैं चला हूं देश, दुनिया और समाज’। जहां वह इस देश को साथ लेकर चलने की बात करते हैं, मैं उनसे यही उम्मीद रखता हूं कि महाराष्ट्र, मुम्बई और लोकल ट्रेन में चलने वाले आम आदमी को भी वह साथ में लेकर चलें और इस रेल बजट के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा मुम्बई के आम आदमी को दिलासा देने की कोशिश करें।

          उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं।

 

* SHRI A.K.S. VIJAYAN (NAGAPATTINAM): On behalf of our party Dravida Munnetra Kazhagim (DMK), I would like to welcome and extend my support to the Railway Budget presented by our Minister of Railways Shri Lalu Prasad Yadav, whose achievement is commendable.  I would like to record my deep appreciation and would also like to put forth some of my demands pertaining to Tamilnadu and my constituency in particular.

          In all the 60 years of Independence, we feel proud that a turn around has taken place taking the Railways to new heights under the able stewardship of Shri Lalu Prasad.  He has proved a point that it is will that matters and even men from humble beginnings can make history. 

We are happy to note that in your new announcement pertaining to Tamilnadu, you have taken note of the demands that were put forth by the Chief Minister of Tamilnadu Dr. Kalaignar Karunanidhi, some trains have been extended.  For instance, Ernakulam – Tiruchirapalli Express has been extended upto Nagore.  I heartily thank the Railway Minister for this gesture and would like to request him to kindly consider running the train between Mysore and Nagore that remain as an announcement for quite long.  After gauge conversion now there is a need to operate a train from Nagore to Chennai in the new broad gauge line.  It has been announced that a new train is to be operated between Tiruvaroor and Nagore.  It has also been announced that Hon’ble Minister of State for Railways will be inaugurating it on 27th of this month, i.e. 27.02.2009.  I would like to point out that this translates into action an announcement made in this regard in 1999 by the then Railway Minister Ms. Mamta Banerjee and this has been pending from 1993 ever after the gauge conversion work was taken up.  At this juncture, I would like to point out that this project was left in the lurgh in between.  Even the sleepers and railing bars meant for laying railway line between Tanzore and

 

* English translation of the speech originally laid on the Table  in Tamil.

 

Nagore were taken away, the project was rejuvenated again and it has seen the light of the day now.  On this occasion, I would like to thank whole the successive Railway Ministers and especially, the Chief Minister of Tamilnadu Dr. Kalaignar Karunanidhi.  I would like to record the fond memory of the former President of India, Shri K.R. Narayanan, who took special interest when it was represented to him by the people of my Nagapattnam constituency and recommend this project for implementation. 

Laying of Manamadurai – Tiruvaroor – Thiruthuraipoondi – Muthupet – Karaikudi BG line has been pending for long and the request of the people of my constituency may kindly be attended to. Survey work for laying BG line between Thiruthuraipoondi and Agasthiyanpalli has been completed and this project is pending for want of fund allocation.  I request the Railway Minister to expedite the same. Similar is the case with the laying of a new line linking Needamangalam-Mannargudi-Pattukkottai even after completing the feasibility study and survey long back. There is also a need to introduce a new train between Coimbatore and Nagore as this is an important pilgrim centre very popular in the South, especially in Kerala and Karnataka drawing pilgrims towards that part of Tamilnadu.  Let me conclude, impressing upon you to allocate more funds for the laying of BG line linking Nagapattinam with Thiruthuraipoondi via Thirukkuvalai.

 

 

 

 

 

*SHRI E.G. SUGAVANAM (KRISHNAGIRI): At the outset, I would like to thank and congratulate the Hon’ble Railway Minister for presenting the growth oriented and people friendly Interim Budget (2009-2010). Under the able and dynamic leadership of Dr. Manmohan Singhji, HOn’ble Prime Minister, our Railways have reached an all time growth and witnessed landmark achievement in revenue collection, development and traffic. Our Government has not increased the passenger fares continuously and maintains the freight rates optimum.  In fact, time and again, passenger fares have been reduced despite there is a steep hike in the prices of petrol, diesel, steel, cement, input costs and other administrative expenses in the past and this year fares are reduced to the extent of 2%. With the bold initiatives and able administration of Shri Laluji, our Railways has made a profit of 90,000 crore and laid 1,100 kms. of new rail lines.  The freight corridor work in Delhi-Mumbai is a welcome step and the UPA Government is taking steps for lying more such freight corridors.

          Several measure have been taken to improve the railway network in the country. The introduction of new Garib Raths will help lower middle class and poor people have the taste of AC coaches.  The increase in frequencies and extension of various trains will promote the traffic growth of railways.

          Sir, large number of coaches in the trains are often in a bad condition, filthy and unhygienic.  They are also not cleared properly.  In many of the coaches even fans and lights are also not working. Adequate steps should be taken to maintain neat and clean of the coaches. Quite often bed sheets and pillow covers provided in trains are also in dirty conditions.  Railways should take steps to provide neat and clean bed sheets and pillow covers.

 

 

 

* Speech was laid on the Table

 

          Sir, in Rajdhani and Satabdi Express Trains, the Public Address System is not functioning frequently.  Many times, no announcements are made.  Apart from the proposed extension of public address system in mail/express trains, the Railways must ensure that the system should function effectively in Rajdhani and Satabdi trains.

                   Sir, frequent late running of trains is another important factor causing concern for the railway passengers.  Adequate attention is not given for curbing late running of trains. I demand from the Railway Minister that punctuality along with safety should be given top priority and necessary facilities should be given to the passengers in case of late running of trains.

          As a whole, all the Railway Budgets presented during the tenure of UPA Government is welcomed by all of the society. However, I am sorry to state that the following certain areas are left with and needs to be address:-

i)        There was a long pending demand for lying of a new railway line between Jolarpettai and Hosur Via Tirupathur, Kandili, Barugur, Orappam, Krishnagiri and Sulagiri.  In this connection, I would like to state that there was a railway line exists between Tirupattur to Krishnagiri (42 kms.) prior to Independence i. e. before 1942.  It was most advantageous and easy for transportation to that region. Later it was abandoned and the reasons were unknown.  The remains of the line still exists.  Krishnagiri, Tirupattur and Barugur are big commercial centres in Tamilnadu.  If this line is commissioned, it will fetch huge revenue to the Railways by way of transportation of commercial goods and perishable items.  It will also benefit businessmen, building workers, agriculturists, mango product units, students and large number of people in this region.  Moreover, the residents of para-military personnel in this area are also suffering without adequate train facilities.  Several times I have raised the matter to the Hon’ble Minister on the floor of the House and also outside and the Minister has assured for early action.  Despite there is no action is taken in this regard.  This project is a long pending demand of Krishnagiri district and people expect that this project to be completed at the earliest.  Therefore, I demand that this project should be taken up without any delay; 

ii)       Hosur is fast becoming an IT major.  An Information Technology Park is going to be set up at Hosur shortly.  With the result, huge railway traffic is expected at Hosur in the near future. Hence, Hosur railway station should be renovated and modernized.  More train services should be operated between Hosur and Bangalore particularly this line should be electrified as early as possible to facilitate faster movement of traffic;

iii)      There are increasing complaints that good and hygienic good is not served in railways.  Though the railways have increased the prices of food items several times, quality is not maintained and over the period of time, it has reduced quantity also.  Moreover, there are much difference in rates of food items from one place to another in railways.  Further, the long distance passengers are facing lot of difficulties because they do not get good quality food items both in running trains or at railway stations.  Hence, I urge upon the HOn’ble Railway Minister that there should be frequent and regular check on the quality of food items served in railways;

iv)      The introduction of more Garib Rath Trains is welcomed by all sections of the society and the trains tickets are booked much in advance and are running packed.  As there is huge traffic between Chennai and Delhi and more and more people are willing to travel by Garib Rath trains, I demand from the Railway Minister that the frequency of the above train may be increased from weekly to at least thrice a week.

v)       In Garib Rath Trains particularly H. Nizamuddin-Chennai, there is no facility of Pantry Car.  The passengers particularly women, children and old aged people are facing lot of difficulties for getting food, water, tea/coffee, etc. for their lengthy journey.  Moreover, the above train always running several hours late behind schedule and reaches the destinations at odd hours.  Hence, I urge upon the Hon’ble Railway Minister to immediately provide Pantry Car facility in the Garib Rath Trains;

vi)      Early linking of Chennai Egmore and Central railway stations which is a long pending demand of the people of Tamil Nadu and it should be taken up on priority;

vii)     Early completion of Velachery-St. Thomas Mount MRTS line.

          With these words, I thank you, Sir, for giving me an opportunity to participate in the Railway Budget and I support it.

 

SHRI BRAHMANANDA PANDA (JAGATSINGHPUR): Hon. Deputy-Speaker, Sir, I would like to seek your permission to speak from here.

MR. DEPUTY-SPEAKER: You are allowed.

SHRI BRAHMANANDA PANDA : Hon. Deputy-Speaker, I owe my gratitude to you for giving me an opportunity to speak on the Interim Railway Budget

          As you know, railway has become the lifeline of the country’s economic prosperity. We are proud by proclaiming that the Indian Railways has generated Rs.90,000 crore in the last five years and has made a big turnaround. It is really disappointing to note that no sincere effort has been made to transfer the benefit of achievement to the weaker sections of the society. In this context, I would like to start my speech with a poem, and I have requested the translator to translate my poem. (Translated in English)

Glory to the Railway Minister Lalu ji,

 you’ve hoodwinked the people of Orissa.

You showed them (in your Budget) your lantern

you will soon face the election.

The people of Orissa are

Blowing the conch to

Loosen your wheel and axle

Congress is amputating its own limbs

Driving towards destruction

In place of development

May UPA have the

Good sense to pay attention

To the progress of Railway in Orissa.

          As you know, Orissa is a State with vast natural resources. There are beautiful temples like Konark which has its importance in the sculptural map of the world. It is one of the wonders of the world. As you know, we have the famous Puri Temple which preaches the theme of peace, brotherhood and tranquility for centuries together. Dasia, a Scheduled Caste, is a great devotee of Lord Jagannath. Salabega, a Muslim, is a great devotee of Lord Jagannath. It is a real theme of national integration, real theme of socialism and secularism for which our learned friends are fighting for years together. The real theme of preaching is from the land of Orissa. But it is really shocking that even after 60 years of Independence, the railway is discriminating Orissa constantly. They have shown not only utter negligence towards the State of Orissa in the present Interim Railway Budget but also, your honour will find that they have committed gross injustice.[m58] 

          There is a saying that all tracks lead to Bihar. It has come out in some newspapers. Out of 43 new trains, 10 trains go to Bihar State. All the other facilities relating to upgrading of rail infrastructure have been provided to Bihar. We have no objection to this but we desire that the nation should prosper equitably. We want that all parts of the country should have equal share of economic growth and parity should be maintained; otherwise it will lead to disparity and loss of faith in Government machinery. National integration will be at stake. All these things should be kept in mind. Whenever a welfare measure of any sort is taken up.

India itself is a very beautiful country. For centuries together, we feel proud of our culture and civilisation. Irrespective of caste, creed and religion, people from different parts of the world have assembled here because the real sweetness of India’s social life is so beautiful. That is why, I appeal to the hon. Railway Minister that he should give special priority so far as development of railway infrastructure in Orissa is concerned.

          Further, a criticism has also come out in a Delhi newspaper that a lion’s share has been cornered by the hon. Railway Minister for his own Bihar of State. Let all these facilities go to them, but a backward State like Orissa, which is dominated by dalits, tribals and the Scheduled Castes, should also get its due share. My learned friends were crying for Kandhamal district. Even after 60 years of Independence, people have not seen railway track in Kandhamal. It has become a dream for them. So, the connectivity facilities should be provided to the backward areas of the State so that the social and cultural exchanges will be established and we can go together with the Indian society and culture.

          As you know, Sir, under the dynamic leadership of Shri Naveen Patnaik, industrial revolution has been started in Orissa. Orissa is having vast resources of iron-ore, coal, manganese and bauxite. We are having a beautiful lake, ‘Chilka’. I have also recited that poem here on many occasions. The learned poet and one of the founders of the Congress Party.  Gopabandhu while travelling in a train,  recited the following couplet (Translated in English) in Oriya:

O train stop for a moment

Let me enjoy the splendour of

a portrait called CHILKA.

 

          So, we feel proud that India has its own culture and its own civilisation. The Railway Minister hails from the State adjoining my State. While I was the President of Ravenshaw College Student Union, I had invited Shri Jai Prakash to address centenary celebrations of Ravenshaw College, the premier college of the State. That is why, in view of the cultural, social and religious relationship with the State of Bihar, naturally our expectations from the hon. Minister are more. So, we expect that the hon. Railway Minister will definitely give special priority so far as Orissa is concerned.

          In this context, I would like to draw the attention of the hon. Deputy-Speaker to the long-standing ongoing projects which are there in Orissa. Several memorandums had been submitted to the hon. Railway Minister as also to the Prime Minister by all-party Members under the leadership of the ex-Speaker.  It is really astonishing that till today, no sincere effort has been made and no sincere attention has been given by the Railway Minister so far as those genuine demands of Orissa are concerned. Haridaspur-Paradip railway project has been going on for about one and a half decades. We do not know when that project is going to be completed. That is the connectivity facility which will help the prosperity of Paradip Port.[S59] 

My constituency includes Paradip port, which is a major port of India and it also includes the Konark temple, which is one of the wonders of the world. In such circumstances, I would appeal to the hon. Railway Minister that there should be special … (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Hon. Member, please conclude your speech.

SHRI BRAHMANANDA PANDA : Sir, I will conclude within a couple of minutes. The projects concerning Haridaspur-Paradip and Khurda Road-Balangir — which will connect Phulbani and other areas — are also long standing demands of the State of Orissa. No special allocation was made by the Railway Department for all these projects because of which the projects are lingering on for years together. We always make an appeal, and the hon. Chief Minister has also submitted a memorandum to the Ministry of Railways demanding Rs. 1,520 crore for the State of Orissa. These demands are genuine, and it cannot be done unless the Railway Minister pays special attention to it.

          As far as Orissa’s progress and prosperity is concerned, Orissa is going ahead with investment with different industries like POSCO, ESSAR, and Arcelor-Mittal, and also for different ports like Dhamra, Gopalpur, etc. But Orissa cannot prosper and so as India unless Railway connectivity is developed there.

          My learned friend and the hon. Railway Minister is also aware that the Paradip port has contributed a sizeable income to the Indian economy. It is also known that the East-Coast Railways is a Zone contributing sizeable profit to the Railway Department. But it is found that no timely recruitment is being done. As a result of this there is no uniformity in the recruitment policy. We find at the time of publishing of the results that the people of a particular State are dominating in the East-Coast Railways. Hence, a group of young men met me a few days back to mention that the Railways is discriminating with Orissa, and they would be forced to follow the footprints of Mr. Raj Thakre as there is no hope for them. It is not a good sign for a healthy country like ours. We should not allow frustration to build up the minds of young people. The young men should also get employment opportunities so far as Railway is concerned as the Railway Department is a major Department and contributes a lot for the economic prosperity of India.

          A few days back, that is, on the day the Railway Budget was presented in this august House, a tragic accident took place at Jajpur Road in which there was not only loss of life, but more than 100 people sustained injuries. The Railway tracks are not maintained properly, and the safety and security is at stake. Cleanliness also has become a dream for the Railways. I was personally traveling from Cuttack to Tatanagar by train, and I had an opportunity to go inside one of its toilets. There I found that it is difficult for a civilized man to enter inside the toilets. Therefore, I would like to state that these things should not be mere eyewash, and personal attention should be given for all those inconveniences that are found in the Railways.

          I would like to extend my hearty thanks to the Chair for giving me an opportunity to speak on this issue. Thank you very much.

                                                                                               

MR. DEPUTY-SPEAKER: The next speaker is Shri Prabodh Panda. I would request you to please be brief while making your speech.

 

SHRI PRABODH PANDA (MIDNAPORE): Thank you, hon. Deputy-Speaker, Sir. As such, I rise not to oppose the Interim Railway Budget, but while saying so I would like to place my reservations on some aspects.[r60] 

          Sir, as far as I can recall, the maiden budget presented by Laluji in this august House came up with the proposal of introduction of Kullads. This last budget presented by him comes up with the idea of bullet train. He started with the idea of Kullad and reached the idea of bullet train. He has narrated a rosy picture of the Indian Railways.

          Let me refer to the report of the Comptroller and Auditor General of India on Indian Railways. At the very outset, I refer to the C&AG report in the context of safety of rolling stock, bridges and tracks. C&AG has pulled up Indian Railways for permitting freight trains to run with higher axle loads endangering the safety. And that led to increasing cases of spring failure, coupler failure, and wagon body damages. The C&AG report that was presented in the Parliament had charged the Indian Railways with ignoring the conditions laid down to ensure safety. The C&AG had warned that permitting load increase would have an adverse impact on tracks, bridges and rolling stock and asked the Railways to take immediate action. It regrets that the Railway Board has ignored this caution given by the C&AG. The recent accident that occurred on the 13th February, the very day when Lalu Prasadji presented this interim budget, is a result of ignoring the report of the C&AG. 

          Not only that. The hon. Minister may be aware of this incident. I think he has got the report. I have received the report from my Constituency Kharagpur that today, while we are discussing the Railway Budget, derailment of a goods train occurred at Kharagpur. I do not know what is happening there. The claim that the number of consequential accidents has came down has been exposed by all these accidents. It is mainly due to the Indian Railways ignoring the report of the C&AG.

          I now come to the aspect of earning profits. The Railway Minister has given a rosy picture of profits earned by Indian Railways. But I think the C&AG punctures the much-touted claim of profits earned by Indian Railways. The major finding of the report is a loss of Rs.801.67 crore by the Indian Railways in just nine months due to price fixation in container traffic. That huge loss occurred due to irrational price fixation allowing rates below the fixed level. This is what the report of the C&AG says. I do not know how the Minister himself would respond to that.

          I now wish to touch upon the passenger fares. Yes, technically fares have not gone up for five years. But several invisible costs have been added. Indian Railways has collected thousands of crores of rupees from passengers by levying a wide range of taxes in the name of supplementary charges, without parliamentary approval and after the passage of the Railway Budget, ignoring the Parliament.[KMR61] 

          So, this is my charge. Given the traffic borrowings by Railways, which generated huge profits by OAF – add on charges, the biggest is the extra cost paid by the passengers for Tatkal reservations. This is very taxing on the passengers. In  the name of changing classifications,  what is going on?   Express trains have been designated as Super Fast trains.  For that, the passengers have to pay more fares but having the same facilities and no extra facilities have been provided to the passengers in the Super Fast trains. This is the trick. Let me refer to what Vivekananda said – no good things can be done with tricks.  But this is the tricks of the Railway Ministry. 

          I am coming now to the catering policy. Catering policy is mainly for the interest of the corporate sector and the billionaires and millionaires and not for the ordinary people, not for the poor people, not for the unemployed youths. All sorts of catering policy has been changed.  It is already said, that the organisation must be same but there is a pragmatic shift in the strategy and thinking.  Yes, there is a thinking of privatisation; the thinking of outsourcing.  It is going on –  privatisation, outsourcing and all sort of things are continuing. All these are being pursued – for whose interest?  Let me cite one example in this context.

Let me say that pragmatic steps have already been taken.  There is a Rail Yatri Niwas located within the New Delhi Railway Station complex itself.  It is now run by the Ginger hotel, a Tata enterprises.  Earlier, it was exclusively for the use of railway travellers who can book at nominal charges between Rs.50 and Rs.250 per day. Now, it has been leased out to Tata  Enterprises.  Since its take over, room tariff has come to Rs.1,199 per day.  Not only that, I will come to other things.

It is said that many facilities are given to the passengers. What about the local passengers?  What about the sub-urban passengers?  No facilities have been given to them.  No EMU coaches have been introduced.  I am particularly talking about West Bengal and Kharagpur.  I demand that from Kharagpur to Balasore, new EMU coaches should be introduced, where electrification work has been completed.

I must draw the attention of the hon. Railway Minister in this context that sudden and abrupt harsh decision of phased closure of in-house printing press of Kharagpur causes mass resentment in the locality. It is to be noted that since its inception in the year 1967, the said press has been running smoothly and catering to the entire needs of the South Eastern Railway, East Coast Railway and South Eastern Railway.  It has been improved in terms of quantity and quality.  It is quite amazing that this kind of  decision is coming while the  Union Government, the Ministry of Urban Development, in particular, is taking effective measures to modernize the government presses.  I would request the Minister to keep it pending. It would invite another complication there and it will generate resentment massively with the people of Kharagpur. 

There are other problems.  Thousands and thousands of people are staying decades together in the railway lands.  They are the citizens. They are related to the Railways. Railways should think about them. In  Kharagpur, large railway lands are there.  Any new railway industry can be set up there. So, I would request the Minister that this should be considered. [R62] 

          My last point is about doubling. The Minister also knows about the fact that from Kharagpur to Midnapore, doubling of the line is required. The survey work was already completed; more than 56 passenger trains including Rajdhani Express and other Superfast trains are running there. Only 7-8 km. of doubling is left. I hope that that he will treat it as an urgent one and incorporate this also in this Budget itself.

          With these words, I conclude my speech.

श्री कीरेन रिजीजू (अरुणाचल पश्चिम): उपाध्यक्ष महोदय, मैं ज्यादा लम्बा नहीं बोलूंगा, क्योंकि लालू जी का यह आखिरी बजट है। मैं उन्हें धन्यवाद ज्ञापित करना चाहता हूं। हमारा प्रदेश पूर्वोत्तर बहुत दूरदराज का क्षेत्र है। जब-जब मैंने रिजर्वेशन के बारे में मंत्री जी से कहा, उन्होंने इसमें अच्छी तरह सहयोग किया और हमारे लोगों को बहुत सुविधा मिली। इसलिए मैं विशेषरूप से रेलवे मंत्रालय को धन्यवाद देना चाहूंगा क्योंकि रिजर्वेशन के मामले में मुझे प्रॉब्लम नहीं हुई।

          महोदय, अब मैं अपना दुख प्रकट करना चाहूंगा। दुख इस बात का है कि लालू जी कभी हमारे पूर्वोत्तर क्षेत्र और खासकर मेरे प्रदेश में नहीं गए। आप राष्ट्रीय नेता हैं। आप बहुत पॉपुलर भी हैं। इसलिए आपको एक बार वहां जाना चाहिए था। अगर आप जाएंगे, तो वहां जितने पेंडिंग प्रौजैक्ट्स हैं, उनकी समीक्षा करेंगे और उनके जल्दी से जल्दी कम्पलीशन होने में मदद मिलेगी। आपके वहां नहीं जाने के कारण काफी काम रुका हुआ है।

          महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी के ध्यान में एक-दो मुख्य बातें लाना चाहता हूं। बोगीबिल प्रोजैक्ट, जिसे राष्ट्रीय प्रोजैक्ट के रूप में लेकर कार्य करने की घोषणा हुई थी, उसका कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। मैं आपको सीधे-सीधे ब्लेम नहीं करना चाहता हूं। आपने तो घोषणा की है, लेकिन अभी भी बोगीबिल ब्रिज की जो हालत है, जिस स्पीड से वह काम चल रहा है, वह आपके शेडय़ूल से कम से कम डेढ़ साल पीछे चल रहा है। हमने अधिकारियों से बात की है और रिपोर्ट भी ली है। उसका काम बहुत स्लो चल रहा है। अगली बार आप रेल मंत्री बनें, न बनें, लेकिन अभी आप अधिकारियों को यहां बुलाकर एक ऑर्डर कर के समीक्षा लीजिए।

          महोदय, इसके अलावा एक और बहुत इम्पौर्टेंट प्रोजैक्ट है। हमारे संतोष मोहनदेव जी यहां बैठे हुए हैं। उन्हीं की कांस्टीटय़ूंसी से यह रिलेटेड है। वहां से यहां काफी लोग आए और उन्होंने धरना दिया। जन्तर-मन्तर पर जाकर मैंने भी अपनी बात कही। श्री देवेगौड़ा जी के समय में घोषणा हुई। जब श्री राम विलास पासवान जी रेल मंत्री थे, तब फाउंडेशन स्टोन भी ले किया। बरागवैली का जो ब्रॉडगेज का प्रोजैक्ट है, वह इतना स्लो क्यों चल रहा है, यह मेरी समझ में नहीं आ रहा है। यह बहुत पुराना प्रोजैक्ट है। अंग्रेजों के समय से वहां रेलवे कनैक्टेड है, लेकिन आजाद हिन्दुस्तान में उस प्रोजैक्ट को, उस एरिया को कोई महत्व नहीं दिया गया है। चूंकि संतोष मोहनदेव जी यहां बैठे हैं, मैं उनसे भी रिक्वैस्ट करना चाहूंगा कि आप अपने कैबीनेट कुलीग से कहकर उसे जल्दी से जल्दी टेकअप कराएं। यदि इसे टेकअप कर लिया गया होता, तो वहां से इतने युवाओं को यहां आकर धरना नहीं देना पड़ता। इसलिए मैं ऑन रिकॉर्ड आपसे कहना चाहता हूं कि इसे जल्दी से जल्दी टेकअप किया जाए।

          महोदय, कलैक्शन बहुत ज्यादा किया गया है, यह सबने बोला है। लालू प्रसाद जी बहुत किस्मत वाले मंत्री हैं। जब से वे रेल मंत्री बने हैं, तब से रैवेन्यू बहुत जनरेट हुआ है, क्योंकि हमारे देश की इकनौमी की ग्रोथ रेट में लगभग पांच वर्ष से लगातार प्रति वर्ष नौ प्रतिशत से अधिक बढ़ोत्तरी हुई है। इससे जाहिर है कि हमारा रैवेन्यू तो बढ़ेगा ही। उस रैवेन्यू से वहां इफ्रास्ट्रक्चर ले करने में क्या मदद मिली है, यह देखना चाहिए।

          महोदय, वहां एक जगह है, जिसका नाम माननीय रेल मंत्री जी को पता है कि नहीं, मुझे नहीं मालूम, वह मोकोम सिलैक्ट लास्ट रेलवे स्टेशन है। अंग्रेजों ने जहां तक रेलवे लाइन बिछाई। आजादी के बाद वहां से एक इंच भी रेलवे लाइन आगे नहीं बढ़ी है। यह बहुत दुख की बात है। इसके बारे में भी चिन्ता करनी चाहिए। देश के मध्य भाग में रेलवे के बहुत काम बहुत तेजी से चल रहे हैं, इनका मैं जिक्र नहीं करना चाहता हूं, लेकिन पूर्वोत्तर के इलाके में रेलवे का काम बहुत धीमी गति से चल रहा है। इसलिए हमारा प्रदेश और पूर्वोत्तर क्षेत्र, रेलवे के लिए काला पानी के समान है। इसलिए लालू प्रसाद जी मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि आपके जो डेढ़ महीने अभी बाकी बचे हैं, उनमें आपको वहां का एक दौरा जरूर करना चाहिए।

          महोदय, रिजर्वेशन का मैंने जिक्र किया, लेकिन उसका हमें जितना कोटा दिया है, उसे बढ़ाने के लिए तो मैंने पिछली बार भी कहा था। [r63]  कोटे को बढ़ाने के लिए मैंने पिछली बार भी कहा था कि अरुणाचल प्रदेश में बिहार के ही कितने हजार लोग काम करते हैं, हमें वहां बार-बार कम्पलेंट मिलती हैं कि हम रिजर्वेशन कराने के लिए जाते हैं, लेकिन सीटें बहुत कम हैं, कोटा बहुत कम है, जिसके चलते लोगों को बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है। वे वहां रोजगार के लिए जाते हैं। राज ठाकरे जी के प्रदेश में जो हालत होती है, हमारे यहां वैसा नहीं है। बिहारी भाई लोग वहां सुख और शान्ति से नौकरी कर रहे हैं, उनको आने और जाने की तभी सुविधा मिलेगी, जब आप रिजर्वेशन के कोटे को बढ़ाएंगे।

          सिक्योरिटी के लिए बार-बार यह देखने में आया है कि पूर्वोत्तर से लोग रेलवे में जाते हैं, वहां सिक्योरिटी के बन्दोबस्त में कमजोरियां हैं। चार दिन पहले मुझे खबर मिली कि जलपाईगुड़ी में अरुणाचल प्रदेश की एक टीम जा रही थी तो आपके टी.टी.ई. ने आकर वहां काफी दिक्कत पैदा कर दी। जब टी.टी.ई. ही लोगों को तंग करने लगेंगे तो गुंडागर्दी की रेलवे में कैसे रोकथाम होगी। ये सब चीजें बहुत महत्वपूर्ण हैं। रेलवे में पैसेंजर्स को पूरी सिक्योरिटी मिलनी चाहिए।

          हिन्दुस्तान के हर रेलवे स्टेशन पर सफाई का अभाव है, वहां बहुत गंध मारती है।…( व्यवधान)मैंने तो आपको कहा कि मैं पांच मिनट में खत्म करूंगा। मेरे दो मिनट बाकी हैं।

          सफाई के लिए आपको जरूर ध्यान देना चाहिए।…( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : आपकी पार्टी के 28 मैम्बर बोलने वाले हैं।

श्री कीरेन रिजीजू : इसीलिए मैं बहुत कम बोल रहा हूं। अब हमारे दो ही मैम्बर बोलने वाले हैं। रिक्रूटमेंट के मामले में मैं हिसाब रेल मंत्री जी को दिखा सकता हूं कि हमारे प्रदेश से कितने लोग रेलवे में नौकरी कर रहे हैं। रिक्रूटमेंट की बात बाकी पार्टी के सदस्यों ने भी कही है कि लोकली रिक्रूटमेंट जब होता है तो नाम तो लोकली होता है, लेकिन लोकल आदमी को उसमें मौका नहीं मिलता है। इसलिए हमारे प्रदेश से भी लोगों को रेलवे में नौकरी करने का आप मौका दीजिए, ताकि हम भी उसमें अपना हिस्सा मान सकें कि भारतीय रेल हमारी भी है।

          इफ्रास्ट्रक्चर के मामले में मैंने पहले भी कहा है कि वहां इतना पुराना रेलवे ट्रैक है, उसको अभी तक भी क्यों नहीं बढ़ावा मिल रहा है। इफ्रास्ट्रक्चर के लिए आपने कितना प्रावधान रखा है, यह मैं जानना चाहता हूं। इफ्रास्ट्रक्चर अगर नहीं होगा तो हमारे भालुकपोंग से आपने एक रेलवे लाइन बिछाई, जार्ज फर्नाण्डीज साहब ने इसका इनोगरेशन किया था, उसके बाद अभी उसका उपयोग कितना हो रहा है, इसकी समीक्षा होनी चाहिए। रेलवे के मानचित्र में हमें जोड़ते हुए इन सारी चीजों का ध्यान रखना चाहिए।

          आखिर में मैं यह कहना चाहता हूं कि जब आप रेल बजट पेश करेंगे तो पूर्वोत्तर के लिए स्पेशल पैकेज का आपको हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। पूर्वोत्तर के लोग खुश नहीं हैं। आज देश के बाकी लोग रेल मंत्री की सराहना कर रहे हैं, लेकिन मैं सराहना नहीं कर सकता, उसके लिए मैं रेल मंत्री से माफी चाहता हूं कि मैं आपकी तारीफ नहीं कर सकता, क्योंकि, हमारे लिए प्रावधान ही रेल बजट में कोई खास नहीं है, इसलिए मैं अपना दुख व्यक्त करते हुए, नाराजगी व्यक्त करते हुए रेल मंत्री जी ने जो बजट पेश किया, उसके लिए उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूं। आप सप्लीमेंटरी बजट जरूर लाइयेगा और हमारे प्रदेश के लिए भी आप कुछ प्रावधान रखियेगा।

          बहुत-बहुत धन्यवाद।

                                                                                     

उपाध्यक्ष महोदय : इन्होंने सिक्योरिटी की बात कही है। यहां से शाम को 6 बजे लुधियाना के लिए एक शताब्दी एक्सप्रैस चलती है, उसमें मैंने खुद सफर किया है। उसमें सिक्योरिटी की जब मैंने कम्पलेंट की तो अम्बाला में जाकर सिक्योरिटी मिली, मुझे वहां आकर इन्फोर्म किया। इसलिए मैं कहूंगा कि सिक्योरिटी जरूर होनी चाहिए। दूसरे वह ट्रेन जहां 10 बजे पहुंचनी चाहिए, वह दो बजे पहुंचती है। उसमें सिक्योरिटी बिल्कुल होती ही नहीं है, हालांकि उसमें व्यापारी लोग जाते हैं। इस बात का आप जरा ख्याल करिये।[R64] 

 

 

* श्री प्रकाश वी. जाधव (रामटेक) : महाराष्ट्र के नागपुर जिले में स्थित रामटेक स्थान में विश्व प्रसिद्ध राम मन्दिर और 25वां राष्ट्रीय टाइगर सफारी है तथा यह स्थान पुरातत्व विभाग एवं पर्यटन के क्षेत्र में काफी विकसित है ।  अनेक जगहों से लोगों का यहां आवागमन होता है लेकिन रामटेक रेलवे स्टेशन जो बहुत ही छोटा है और जहां सौन्दर्य की काफी कमी है, इसके विकास एवं सौन्दर्यकरण के लिए मैं पूर्व में पत्र व्यवहार कर चुका हूं।  मेरा आपसे अनुरोध है कि रामटेक रेलवे स्टेशन का विकास और उसका सौन्दर्यकरण किया जाए।

          नरखेड-अमरावती विदर्भ के इस क्षेत्र में दुनिया का प्रसिद्ध संतरा उत्पादित होता है।  इस क्षेत्र से संतरे को रेलवे से जोड़ना आवश्यक है जिससे उत्पादित संतरा बड़ा मार्केट विकसित कर लेगा। काफी वर्षों से इस रेलवे लाइन का काम रूक-रूककर धीमी गति से चला रहा है।  कुछ दिनों पहले इस लाइन का काम जोरों से शुरू करने की घोषणा की गयी। इसलिए और गंभीरता से योजना कार्यान्वित करना व लागत मंजूर करना आवश्यक है।

          भिवापुर-नागभी-नागपुर और विदर्भ की काफी जगह पर पुरानी नैरोगेज (छोटी लाइन) रेलवे लाइन है जो ब्राडगेज होना आवश्यक है। भिवापुर क्षेत्र की मिरची दुनिया भर में प्रसिद्ध है। उसे विकसित कर प्रसिद्ध मिरची अनेक राज्यों तक पहुंचाने के लिए ब्राडगेज(बड़ी लाइन) की आवश्यकता है।  इस विषय में मैंने पत्र दिया है।  कृपया इसका निर्णय और अर्थव्यवस्था करने की प्रार्थना है।

          अतः आपसे मेरा अनुरोध है कि उपयुक्त कार्यों को पूरा करें , जिससे क्षेत्रीय जनता एवं अतिथियों, व्यापारियों व उद्यमियों को उचित सुविधा प्राप्त हो सकती है।

          हिन्दुस्तान के भौगोलिक क्षेत्र का अभ्यास करते हुए आपके ध्यान में यह जरूर आयेगा कि (नागपुर) रामटेक जो कि मेरा लोक सभा क्षेत्र है, हिन्दुस्तान के बिल्कुल सेन्टर में स्थित है। देश के चारों ओर जाने वाली रेलगाड़ियां जैसे – नागपुर-छिंदवाडा, नागपुर-नई दिल्ली, नागपुर-अमरावती, नागपुर-मुम्बई, नागपुर-गोरिया मेरे लोक सभा क्षेत्र से रोज गुजरती है।

          आपको यह जानकार बहुत दुख होगा कि जिन रेल लाइनों पर कई बार कम से कम साठ से सत्तर पुरुष, बच्चे या बहनों की रेल से कटकर मौत हुई है, ऐसी हत्याओं के लिए सिर्फ  “रेल लाइन क्रासिंग ” पर किसी पहरेदार या रेल कर्मचारी का नियुक्त न होना तथा गेट का न होना जिम्मेदार है।  इस प्रकार , असमय एवं अचानक होने वाली हत्याओं को आप आसानी से रोक सकते हैं।

* Speech was laid on the Table

 

          मेरी आपसे विनती है कि  नागपुर क्षेत्र के कम से कम 25-30 जगह रेल पटरी क्रासिंग की आप अपने सक्षम अधिकारियों के माध्यम से सर्वे करवाएं तथा जल्द से जल्द बिना फाटक वाले क्रासिंगों पर निर्णय लेकर मेरे लोक सभा क्षेत्र की सभी “बिना फाटक वाले रेल क्रासिंगों ”  पर तुरन्त गेट तथा सिगनल लगवाने की व्यवस्था करने का आदेश निर्गमित करें।  सभी जगह ऐसी व्यवस्था होने से अनमोल मानव जानें बच सकती हैं तथा रेलगाड़ियों की आवाजाही बिना रुकावट चल सकती है।

          महाराष्ट्र के रेलवे में कार्यरत 18 हजार रेल कुलियों को गैंगमैन के पद पर समाविष्ट किया गया है। गैंगमैन पद का काम काफी संख्या के कुलियों को रास नहीं आ रहा है। अतः उन्हें पुनः कुलियों के काम पर समाविष्ट करने की योजना बनाकर उनकी रोजी-रोटी संरक्षित की जाए।

 

          मेरा पूरा विश्वास है कि आप उक्त महत्वपूर्ण समस्याओं का हल निकालने में सहयोग देंगे।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

SHRIMATI JHANSI LAKSHMI BOTCHA (BOBBILI): Mr  Deputy Speaker, Chairman, Sir, I rise to support the Interim Railway Budget 2009-10 presented by the hon. Railway Minister, Shri Lalu Prasad Yadavji.

In the last five years the Indian Railways progressed spectacularly without imposing any burden on the common man. The Railway Minister has reduced the passenger tariff across all classes which include suburban, long distance trains, unreserved, sleeper class, first class AC, 2nd AC, 3rd AC. The Indian Railways have earned more than cash surplus of Rs.90,000 crore in five years. This task was achieved by the Indian Railways when all over the world all the companies including the Fortune-500 companies are affected by the world recession and financial crisis. I heartily congratulate the Railway Minister for this achievement because Laluji did this with a humane face without retrenching even one employee. On the other hand, he has provided employment in the Railways at different levels.

The annual freight loading increased from an average of three per cent in 90s to 8 per cent in 2008 through significant improvement in productivity of railway assets and efficient working by railway employees. I congratulate each and every official and non-official of the Indian Railways for their achievement. They have worked as a team to bring about the financial turn around of the Indian railways in the last five years. The number of railway accidents and causalities also reduced drastically. On this occasion, I earnestly urge the Railway authorities to be more vigilant so as to bring down the accident rates to zero per cent.

The Indian Railways drastically improved the customers’ service, effectively utilized the latest technologies like web band ATMs to further serve the general public and ease their difficulties.

The Garib Raths that have fully air-conditioned coaches have brought lakhs of poor people to enjoy the comfort of traveling in air conditioned coaches for the first time in their lives.

I congratulate the Railway Minister for bringing Agartala, the capital of the North Eastern State of Tripura and Kashmir Valley on the map of the Indian Railways. The people of these areas will definitely remember Laluji and the UPA Government for providing railway access to them. All this was made possible because the Railways have deployed their investible surplus of Rs.70,000 crore earned between 2004-05 to 2008-09 to increase their productivity. Now, the Indian Railways will invest Rs.2,30,000 crore under the Eleventh Five Year Plan which is three times more than the Tenth Five Year Plan with an objective of increasing the transport capacity of the railways and to reduce the unit cost of operation.

The Indian Railways with better redesigning of their rolling stock can carry a load of 4100 tonnes per wagon compared to the earlier load of 2,300 tonnes. The capacity of the freight trains comprising of open wagons with new design will also be 22 per cent more than before.

Similarly, the capacity of the passenger trains will also increase. Freight and passenger earnings grew at 14 and 15 per cent respectively. Total tariff earnings also increased by 15 per cent to reach Rs.71, 645 crore.

I congratulate the Railway Minister for implementing the Six Pay Commission’s recommendations with a relative ease, benefiting about 14 lakh railway employees and 11 lakh pensioners, without defaulting on payment of dividend to the Central Government.

I congratulate the Railway Minister for taking up the feasibility study to run Bullet Trains in various regions of the country which includes the railway line of Hyderabad-Vijaywada-Chennai in my State of Andhra Pradesh.  [R65] 

I sincerely believe that bullet trains will become a reality in our country in the next two to five years.  I request the Railway Minister to include Hyderabad-Vijayawada-Vizag line also in the feasibility study for introducing bullet train.

          I welcome the Railway Minister’s decision to set up a new railway division at Bagalpur and Thawe on administrative grounds. I humbly request the hon. Minister to set up a Waltair Railway Division also on administrative grounds.  Already a number of MPs have represented to you on this matter.  This will greatly improve the customers’ service and ease the operations and simultaneously fulfil the long pending dream of the people of Andhra Pradesh.

          I congratulate the Railway Minister for introducing new trains which includes Seconderabad-Manuguru Superfast daily and Nizamuddin-Bangalore via Kacheguda Rajdhani Express thrice a week.   I thank the Railway Minister for making the Hyderabad-Visakhapatnam Garib Rath Express from four days to daily and Nizamuddin-Durg Chhattisgarh Sampark Kranti from two days to three days a week.

I request the Railway  Minister to sanction one RoB at Peddamanapuram  in my Bobbili parliamentary constituency.  This will ease the hardship of the people and save a lot of time.  I request the Railway Minister to halt the Visakha Express at Segadam, Coromandal Express at Vizianagaram and Prashanti Express at Chipurupalli and the Howrah-Tirupati bi-weekly at Vizianagaram for the benefit of pilgrims.

Before I conclude, I want to say that Laluji has brought in a new vision to the Indian Railways and I sincerely hope that the UPA Government will come back to power and Laluji will adorn the Railway Ministry again to take the Railways to new heights and carve a niche for the Indian Railways globally.

                                                                            

SHRIMATI C.S. SUJATHA (MAVELIKARA):  Sir, at the outset, I thank you for allowing me to participate in this discussion. 

          We have been continuously requesting the Railway Ministry and drawing their attention to the lack of adequate railway development in the State of Kerala.  It is rather unfortunate that the hon. Minister, Laluji this time has completely ignored the State of Kerala.   … (Interruptions)The State lags far behind other States and regions in respect of railway development.  The State has been continuously demanding formation of a railway zone with Headquarters in Kerala to find a viable solution to the problems of the State in its railway development.  But this demand still remains unfulfilled.  I request you again to have a positive approach to the demand.

          Secondly,  there is no railway related industry in the State at present.  Though the hon. Minister promised of establishing a freight wagon production unit as a joint venture with Autokast Limited in the previous budget, no further steps have been taken in this regard.  I request the Minister to commence the procedures to make the proposal a reality without further delay. 

Many ROBs in Kerala need special attention for its early completion. Several of them remain incomplete. Mavelikkara is a busy junction.  There is no Railway Over Bridge near the railway station at present causing innumerable difficulties for the people as also at Krishnapuram near Kayamkulam. Immediate steps may be taken to build over bridges at the above points.

          Regarding line doubling in Kayamkulam-Mavelikkara sector, work has been completed.  Hence the commissioning of the same should be done without any delay and more funds should be allocated to the doubling work to the northern part of Mavelikkara.

Kayamkulam is a junction and an important station in Southern Kerala which has been declared to be upgraded as the world class railway station. However, the amenities at present at the station are quite inadequ[U66] ate. 

There is no information centre and many of the trains plying on this route do not have stops at the station.  I would request the hon. Minister to provide all amenities in the station and to provide stoppage to all trains at the station, particularly the Kochuveli-Bangalore Express.  I also demand a stop for the Sabari Express at Mavelikkara Station.

          All the railway stations in the region have no sufficient roofing facility to cover the entire length of the station causing inconvenience to the passengers.  This has to be rectified.  The Chengannur railway station is enroute the famous pilgrim centre, Sabarimala, where over three crores of pilgrims visit each year.  But the facilities in this station are insufficient to meet the requirements of these pilgrims.  Hence, facilities in the station should be enhanced to meet the requirements. The Thiruvalla station also lacks basic amenities.

          There is a need for the increase of the rail lines in the State.  A new line connecting Chengannur-Panthalam-Kottarakkara-Thiruvananthapuram should be included in the present Budget for survey and also the present survey between Chengannur and Sabarimala has to be completed without delay. … (Interruptions)

          Shri Lalu Prasad ji, it is an important point. It is often found that the safety of the passengers travelling in the long distance trains is at stake.  There are many instances of robberies and attacks on these passengers.  Recently the passengers of an entire bogie of Kerala Express were robbed by miscreants and the railway authorities could not extend any help to the victims. Hon. Deputy-Speaker also mentioned the same problem. To stop recurring such incidents, the Ministry of Railways should take adequate safety measures to protect the passengers in these trains.

          Another point is, at Cheriyanad railway station there is a plot of railway land of about 39 acres lying unused.  Cheriyanad is on the way to the famous pilgrim centre “Sabarimala Temple’ where each year about three crore devotees visit.  … (Interruptions)

The land at Cheriyanad can be used to construct a IRCTC Hotel or a Rail Neer factory.  Stoppage for the trains Malabar Express and Venad Express at the Cheriyanad station is the long-standing demand of the people of this area, I hope the Minister would consider the request.

          Our leader has already mentioned all the other points.

THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF FINANCE AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF PARLIAMENTARY AFFAIRS                (SHRI PAWAN KUMAR BANSAL): Mr. Deputy-Speaker, Sir, you may extend the time of the House to enable more Members to participate.

MR. DEPUTY-SPEAKER: By how much time?

SHRI PAWAN KUMAR BANSAL: We will ask for one hour at a time.

MR. DEPUTY-SPEAKER: The time of the House is extended by an hour.

 

 

 

 

 

 

 

ााळ रेवती रमन सिंह (इलाहाबाद)  :  उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपका धन्यवाद अदा करना चाहता हूं कि आपने मुझे रेल बजट पर बोलने का मौका दिया। इस अंतरिम बजट को मिलाकर लालू जी का यह पांचवा बजट है। मैं लगातार लालू जी की प्रशंसा करता रहा हूं। मैंने इनसे कहा था कि  आप बुलैट ट्रेन चलाइये। मैं अमेरिका, यूरोप की बात नहीं कर रहा हूं। साउथ ईस्ट एशिया में कोरिया, चीन, जापान आदि सब बुलैट ट्रेन चला रहे हैं। मैं इनको बधाई दूंगा कि जब वे जापान गये, तो इन्होंने हमारी बात की सार्थकता  को समझा और यहां बुलैट ट्रेन चलाने का ऐलान किया।

  19.59 hrs.                (Shri Devendra Prasad Yadav in the Chair)

लेकिन मैं एक बात  के लिए इनको बधाई दूंगा कि पांच साल तक यह इस विभाग के मंत्री रहे। इन्होंने बहुत से काम ऐसे किये जिन्हें इनसे पहले किसी मंत्री ने नहीं किया। लेकिन मुझे एक बात का  अफसोस है कि लालू जी से मेरे बड़े निकट के संबंध हैं जो कि आज से नहीं जनता पार्टी और जनता दल के समय से हैं। लालू जी ने इलाहाबाद के लिए कुछ नहीं किया।[MSOffice67] 

20.00 hrs.

मैंने मांग की थी कि इलाहाबाद से दिल्ली के लिए एक शताब्दी ट्रेन चलाई जाए। इलाहाबाद बहुत महत्वूपर्ण जगह है, लेकिन लालू जी ने शताब्दी ट्रेन नहीं चलाई। मैंने इलाहाबाद में हवाई जहाज चलवा दिए जो कि असंभव काम था। वह हवाई जहाज कुछ कैपेसिटी के साथ चल रही है। यह जो इंटेरिम बजट आया है, इसमें भी कई जगहों को इन्होंने नई ट्रेन्स दी हैं, लेकिन इलाहाबाद को एक भी ट्रेन नहीं दी गयी है। मैं चाहूंगा कि मान्यवर कृपया आज यह घोषणा कर दें कि इलाहाबाद से शताब्दी ट्रेन चलाई जाएगी और छपरा से इलाहाबाद के बीच एक एक्सप्रेस ट्रेन चलाई जाए। छपरा और बिहार के बहुत से लोग इलाहाबाद में रहते हैं। इलाहाबाद से एक ट्रेन बंगलौर के लिए चला दी जाए, भले ही हफ्ते में दो ही दिन चलाएं। इलाहाबाद से तमाम स्टूडेंट्स पढ़ने के लिए बंगलौर जाते हैं और इलाहाबाद के बहुत से लोग बंगलौर में काम करते हैं। इसी के साथ मैं एक सुझाव देना चाहता हूं कि चीन ने ल्हासा से लेकर बॉर्डर तक फास्ट ट्रेन चला दी है और दो से चार घंटे में चीन की फौज हमारे बॉर्डर तक आ जाती है। लेकिन आपकी नॉर्थ-ईस्ट ट्रेन दिल्ली से असम पहुंचने में 48 घंटे का समय लेती है। इसलिए मैं चाहूंगा कि यहां से असम के लिए आप ऐसी ट्रेन चलाएं जो दस-बारह घंटों में यहां से असम पहुंच सके।  इसके लिए अगर ट्रैक ठीक कराने की जरूरत हो तो उसे कराएं। इसी तरह से एक आरओबी के लिए मैं पिछले पांच साल से कहता आ रहा हूं।  मैं चाहता हूं कि आप उस पर काम शुरू करवा दीजिए। आप वहां आना नहीं चाहते हैं, मैंने कहा कि आप वहां आइए, अक्षयवट के दर्शन कर लीजिए। पहली तारीख से अधिसूचना जारी होगी, उसके पहले ही वहां काम शुरू करवा दीजिए। वहां पर काम अभी भी शुरू हो सकता है। जैसे आपने मेरा इतना काम करवा दिया है, इतना और कर दीजिए, वहां पर काम शुरू करवा दीजिए।

          मैं आपको हार्दिक बधाई देते हुए आपके बजट का समर्थन करता हूं।

 

 

श्री संतोष गंगवार (बरेली): सभापति महोदय, माननीय रेलमंत्री जी बहुत अच्छे हैं, खूब प्रेम से बात सुनते हैं, यह अलग बात है कि उस पर काम होता है या नहीं। जब हम रेल पर आते हैं और कहते हैं कि रेल में बिहार का स्थान अलग है, तो शायद माननीय मंत्री जी को खराब लगता होगा। यह ठीक भी है, लेकिन जब कोई नई परियोजना चालू होगी, तो बजट मे भागलपुर, छपरा, मधेपुरा का नाम पहले आता है। हम किसी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अगर ये नाम पहले आएंगे तो फिर ऐसा सोचना स्वाभाविक है। मैं यह जानना चाहूंगा कि बड़ौदा, अहमदाबाद, कोचीन, त्रिवेंद्रम, कलकत्ता आदि का जिक्र कम क्यों आता है। अब रेल मंत्रालय में सब प्रकार का काम होता है। बुलेट ट्रेन शुरू हो रही है। सबसे पहले वह पटना से शुरू होगी, उसके बाद अन्य स्थानों से शुरू होगी। अमृतसर, अहमदाबाद, चेन्नई, बैंगलोर के दूसरी रूट कर दिए। शायद आपके सर्किट में कलकत्ता और त्रिवेंद्रम इसलिए नहीं हैं क्योंकि अब पश्चिम बंगाल के लोग आपके साथ नहीं हैं। मेरा आग्रह है कि अपने क्षेत्र का ध्यान रखें, लेकिन राजनीति से ऊपर उठकर फैसला करें। कुछ काम ऐसे होते हैं जो जिनसे वाहवाही मिलती है और कुछ काम ऐसे होते हैं जो नींव के पत्थर होते हैं, जिनकी ओर आम आदमी कम ध्यान देता है, पर आलोचना और चर्चा करता है। मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान सुरक्षित चालन, अनमैन्ड रेल क्रॉसिंग, रेल की साफ-सफाई और इससे मिली-जुली सुविधाओं की ओर दिलाना चाहूंगा।[r68] 

          कुछ ट्रेंस को छोड़ दें, लेकिन अधिकांश ट्रेंस में साफ-सफाई की बहुत बड़ी समस्या है। रेल मंत्री जी से मेरा आग्रह है कि इस ओर आप ध्यान दें। अगर इस दिशा में आप सही ढंग से काम करेंगे तो इसका लाभ यात्रियों को भी मिलेगा और आपको भी मिलेगा। यह बात सही है कि आपकी प्रशंसा सब तरफ हो रही है, हम भी करते हैं। मुझे याद है कि नवम्बर 2008 में रेलवे को चार प्रतिशत की ब्याज दर पर 500 करोड़ रुपए का कर्ज मिला था। किसी निजी कम्पनी को भी इतनी कम दर पर कर्ज नहीं मिल सकता। यह भी ठीक बात है कि आपको सरकार का भी संरक्षण प्राप्त है और उसके तहत सारे काम हो रहे हैं।

          वैसे तो यह अंतरिम रेल बजट है, अंतरिम रेल बजट में सामान्यतः नई रेलगाड़ियों और अन्य बातों के बारे में घोषणा नहीं की जाती है, लेकिन आपने कुछ नई रेलगाड़ियों और अन्य बातों का अपने रेल बजट में उल्लेख किया है। मैं एक बात आपके संज्ञान में लाना चाहता हूं कि आपने आईआरसीटीसी को काम देकर हजारों वैंडर्स के लिए समस्या पैदा कर दी है। हजारों की तादाद में वैंडर्स जो गरीब थे, पिछड़े और अनुसूचित जाति के थे, उनकी सेवाएं समाप्त हो रही हैं और आईआरसीटीसी के माध्यम से जो लोग काम कर रहे हैं, मैं उनके बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा। मेरा आपसे आग्रह है कि आप इस ओर ध्यान दें और जो पहले से वैंडर्स की व्यवस्था थी, उसे कायम रखा जाए। यह हमारी समझ में आ रहा है कि अब न तो रेलवे में खादी दिखाई देती है, न कुल्हड़ नजर आता है और न ही स्टेशंस पर छाछ देखने को मिलती है, लेकिन मैं इसके बारे में चर्चा नहीं करना चाहूंगा। आपने रेलवे स्टेशंस पर मैकडोनाल्ड के सेंटर खोल दिए हैं। इस देश का 70 प्रतिशत आदमी जो गांव में रहता है, वह कहां से मैकडोनाल्ड की चीजों को खरीद कर खा पाएगा। मेरा आपसे आग्रह है कि अगर आम आदमी की एप्रोच के तहत काम होता, तो आपको वाहवाही मिलेगी। लेकिन दिक्कत यह है कि ऐसा नहीं हो रहा है। जैसा अभी हमारे साथी कह रहे थे कि उत्तर भारत के कई क्षेत्रों की उपेक्षा की गई है।

          मैं बरेली संसदीय क्षेत्र से आता हूं। बरेली से आगरा का सम्पर्क खत्म हो गया है। वहां आमान परिवर्तन के कारण बरेली से आगरा और मथुरा का रास्ता बंद हो गया है और उस पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। दिल्ली से मुरादाबाद रेल लाइन के दोहरीकरण और पुल के निर्माण का काम भी अभी तक पूरा नहीं हुआ है। उसमें अभी और समय लगेगा, जबकि यह काम दो साल पहले पूरा हो जाना चाहिए था। इस कारण इस दिशा में ट्रेंस की संख्या कम हो रही है।

          समयाभाव के कारण में ज्यादा बात नहीं करूंगा। मैं यह भी जानता हूं कि यह अंतरिम रेल बजट है। मेरा आपसे यही आग्रह है कि आप इस ओर ध्यान दें और आम आदमी के हित का ध्यान रखें। मैं कुछ बातें संक्षेप में अपने क्षेत्र की कहना चाहूंगा। बरेली उत्तर भारत का महत्वपूर्ण स्थान है। वहां पर रेलवे का पूर्वोत्तर मंडल का कार्यालय भी है। यहां पर डिब्बे सुधार, ट्रेन निर्माण और छोटी लाइन का काम होता था, जो कि अब बंद है। सन् 1984 में जब इस बात का सर्वे हो रहा था कि कोच फैक्टरी कहां बनाई जाए, तो उस समय सबसे उपयुक्त स्थान आधारभूत संरचनाओं के कारण बरेली को माना गया था। लेकिन राजनैतिक फैसले के कारण बरेली को नहीं चुना गया। बरेली में बहुत बड़ी रेलवे की सम्पत्ति है, वहां इंफ्रास्ट्रक्चर भी है। अगर आप इस पर ध्यान देंगे तो बरेली के लोग आपके आभारी रहेंगे।

श्री लालू प्रसाद : जब आप सरकार में थे, तो उस समय क्यों नहीं किया?

श्री संतोष गंगवार : हमने उस समय आमान परिवर्तन किया था। आगे का काम उसके बाद शुरू होता है। हमारे यहां डिब्बे सुधार और स्लीपर का प्लांट भी था। बरेली अभी तक दक्षिण भारत से जुड़ा हुआ नहीं है। लश्कर एक्सप्रेस 2161-2162 आगरा-मुम्बई को बरेली तक बढ़ाया जाए। इसी तरह 2461-2462 मण्डोर एक्सप्रेस को भी बरेली तक बढ़ाया जाए। बरेली से दक्षिण भारत के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है। आगरा-लखनऊ-चेन्नई एक्सप्रेस को बरेली तक बढ़ाया जाए। त्रिवेणी एक्सप्रेस जो बरेली से शक्तिनगर तक चलती है, उसके एसी थ्री टियर के कोच काफी खराब हालत में हैं। उन्हें बदलने की बात भी आई थी, लेकिन वे अभी तक बदले नहीं गए हैं। इसलिए इस पर तत्काल ध्यान दिया जाए।

          मेरा आपसे आग्रह है कि 4313-4314 दादर-बरेली एक्सप्रेस ट्रेन को प्रतिदिन चलाया जाए। इसी तरह रेलगाड़ी संख्या 2435-2436 नई दिल्ली-डिब्रूगढ़ राजधानी ट्रेन जो दो दिन चलती है, उसे कम से कम छः दिन किया जाए। दिल्ली-मुरादाबाद रेल लाइन के दोहरीकरण का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। एक इंटरसिटी एक्सप्रेस बरेली-लखनऊ चलाई जाए। पुष्कर एक्सप्रेस का विस्तार करके बरेली तक किया जाए। मैं चाहूंगा कि बरेली से आगरा तत्काल इंटरसिटी एक्सप्रेस चलाई जाए, जिसके बारे में रेल मंत्रालय विचार भी कर रहा है, तो उचित होगा।

          मैं इन्हीं शब्दों के साथ सभापति जी आपका आभार व्यक्त करता हूं कि मुझे इस अंतरिम रेल बजट पर बोलने का मौका दिया। मैं यह कहकर अपनी बात समाप्त करता हूं कि रेल मंत्री जी अपनी सीमा में जिन कार्यों को कर सकते हैं, उन्हें जरूर करें।

                                                                                                         

 

*SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN (CHIRAYINKIL):        Sir,while appreciating the efforts of the Railway Minister to convert the big public undertaking into a profit concern, I have to point out some grievances which still remain unresolved. Hon’ble Minister when he was on a visit to Kerala promised to provide stops for all  Trains at Varkala, the Headquarters of Sri Narayana Guru, the greatest social reformer of South India. He also promised to give an additional name Sivagiri to the existing Varkala Railway Station.  He had also promised to grant a new Train as Shiva Giri Express.  These promises have not fulfilled by Railway Authorities till date.  He had also promised to re-open the closed Railway Gate in the heart of Varkala town. This demand also is not sanctioned. There is a long standing Demand for new Trains in Kerala. We have submitted the list before Hon’ble Minister after the presentation of the Budget.

          I hope the Hon’ble Minister will sanction them while replying the debate.  There is a general complaint that the Kerala State is neglected by the Railway Minister. I hope the Hon’ble Minister will take step towards the establishment of a Railway Zone including Konkan area in the immediate future.

          The facilities provided in the train including Pantry Car is far below the standard.  The toilets are also not maintained properly causing foul smell when entry is effected.

          I therefore, request the Hon’ble Minister to remedy all these public grievances without delay.

 

 

 

 

 

 

* Speech was laid on the Table.

*SHRI SUNIL KHAN (DURGAPUR): Sir, I would like to express my views on the discussion relating to Railway Interim Budget for the year 2009-10. Though this vote-on-account budget promises to reduce passenger fares but there is not mention to provide jobs to the porters as you have stated in the previous budget for the year 2008-09. There is no mention for providing licences to the railway hawkers to protect them from the harassment of Railway Protection Force.

I thank you for enlisting Bourn standard in Railways but it is painful that you have not included another wagon industry i.e. Braith Waite.

The number of railway tracks and trains are increasing.  Though in comparison with the other countries, it is very less. But inspite of that I could not understand why permanent employees are decreasing day by day. You are helping private owners to participate not only as a safai-karamchari but also in other spheres of railway work as a result of which employees are decreasing.  There is no basic wage even. They have to work more than 12 hours.  There is no retrenchment benefit even they are bound to do the work with risk of their life.  What happened on 14 January 09 at the platform of Durgapur Railway Station in Eastern Railway, west Bengal that late Naresh Maheto (35) was asked for painting the shed of No. 3 platform without any support and he had to board on shed for painting by the order of the Contractor. There was no control over high tension line as a result Naresh Maheto contacted with high tension line and he felt down from the shed as dead body.  I do not know whether his wife will get compensation or not?

In case of passenger amenities there is shortfall in every station even in train.  Food supplied specially in Sealdah Rajdhani is not upto the mark.  I think food inspector should be asked to check up all foods.

 

 

* Speech was laid on the Table.

I would like to remind you that I have been discussing since 1996 till today for the linkage of Damoder River Railway from Beliator to Durgapur via Barjora which is hardly 20 K.M and if it is connected from Beliatore to Durgapur, it will be the gateway of South India to North East i.e. Darjeeling, Assam and Tripura and it will be the shortest route and profitable one. I would further request you to please give the order for survey.  The Honourable Minister should know that Barjora has already set up 40 industries and also some industries coming up especially steel industries which require iron-ore to those industries which will have to be brought from collieries which are going to be opened shortly.

Further I would like to remind you that one and half year back while laying the foundation stone of R.O.B in Durgapur. The Honourable Minister of Railways had announced before eight to ten thousand people about the introduction of a train liking from Durgapur to Howrah and I have been demanding since 1996 that one fast passenger should be introduced from Durgapur to Howrah but there is no mention in this budget and what happened was passenger ticket came down alarmingly. S.B.T.C and other private buses run from Durgapur to Kolkata.

So, I again request you to please introduce one train which would increase your revenue. Why the minister has not declared Durgapur as model station?  Why it is late to launch an escalator with the help of SAIL.

In Eastern Railway in Burdwan division there should be a station in Kondaipur between mankar and Paraj where some village people will be able to board the trains.

Again in Eastern Railway in Bardwan division there is halt at Chanditale between Galsi and Khana junction but there is no ticket counter as a result, passengers are getting down but there is no scope for boarding.  Chanditala is a pilgrim place.  So, I would request you to please provide ticket counter so that the passenger can purchase ticket from the counter.  For students and tourist of Santiniketan some express trains should be provided halt at Panagarh Station.

 

Another train touching Durgapur Howrrah Bareilly via Nagpur should be immediately introduced.

Three years back the Ranigaj-Bankura via Durgapur (M.T.P.S) survey work was to be completed.  If that is done the allocation of fund should be provided to lay the railway line.

For development of North East, railway connectivity is required for Meghalaya, Nagaland, Mizoram. Therefore to boost trade relations with China, Myanmmar, Thailand and Bangladesh through railway network siliguri can be developed as the gateway.

 

चौधरी लाल सिंह (उधमपुर): सभापति जी, रेलवे का जो बजट पेश हुआ है, मैं उसके समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। माननीय लालू जी और उनकी टीम ने जो काम लोगों की भलाई के लिए किये हैं, तारीख उन्हें हमेशा याद रखेगी। मैं किसी की बिना बात बढाई नहीं करता, जब तक कि किसी में कोई काबलियत न हो, वह कोई अचीवमेंट करके न दिखाए। हमने देखा कि पांच रेल बजट जो सामने आये, उनसे समाज और देश को बहुत फायदा हुआ है, कोई इस बात को माने या न माने, उसकी इच्छा है। कई लोगों को बहुत परेशानी होती है, लेकिन जो काम हुए हैं उन्हें कहते हुए कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए। मैं माननीय लालू जी और उनकी पूरी टीम का, उन्होंने जो काम हमारी स्टेट में किये हैं, उसके लिए शुक्रिया अदा करुंगा। हमारे स्टेट में मिलिटेंसी जोरो पर थी, हमारा स्टेट डेन ऑफ मिलिटेंसी था। वहां रेलवे की एक लाइन भी नहीं थी। सांगलदान,माहोर, बक्कर, काजीकुंड, खड़ी और उखड़ा तक के एरिया का बहुत बुरा हाल था। इन एरियाज में सड़क नाम की कोई चीज नहीं थी, कोई ट्रेन वहां नहीं चलती थी। जब रेल का प्रोजैक्ट आया तो रेलवे ने रेल चलाने के साथ-साथ वहां एक लम्बी-चौड़ी सड़क बनाई, जो पूरे एरिया को कनैक्टिविटी देगी। मैं माननीय लालू जी से मिला और कहा कि पिछले दिनों उस रास्ते को बंद किया गया, काम रोका गया। माननीय लालू जी ने एक टीम बनाई। वहां एक साजिश सी हो रही थी और अगर हम इनसे नहीं मिलते तो वहां जो 700-800 करोड़ रुपया खर्च किया गया, वह बर्बाद हो रहा था। लोग वहां कहने लगे कि पहाड़ खराब हो गये, तबाही हो गयी। इस तरह से वहां लोगों का एक्सप्लॉएटेशन शुरू हो गया था। लेकिन माननीय लालू जी के आशीर्वाद से एक एक्सपर्ट कमेटी बनी है। मैं चाहता हूं कि अगले दस दिनों में वहां काम भी शुरू किया जाए, एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट भी ली जाए और जिन लोगों ने वहां इसकी खिलाफत की है, उनकी क्लॉस भी ली जाए कि ऐसा क्यों किया गया?

          मैं यह भी रिक्वैस्ट करना चाहता हूं कि हमारे कुछ मसले हैं। आप जानते हैं कि हमारा डिवीजन 1926 में पंजाब के फिरोजपुर में बना और वह हमारे पंजाब का गौरव है। आप दिल्ली से पंजाब आये तो वहां दो डिवीजन्स हैं, अम्बाला भी है और फिरोजपुर भी है लेकिन दूरी केवल 400-500 किलोमीटर है। हमारा 800 किलोमीटर से ज्यादा एरिया है, अगर इस एरिया को लखनपुर से ले कर फिरोजपुर से जोड़े तो 900 किलोमीटर का डिस्टेंस बनता है। मैं बड़ी दिनों से मांग कर रहा हूं कि जम्मू में डिवीजन बनाकर ऑफिस बनाएंगे तो बड़ी मेहरबानी होगी। कुछ ट्रेनें आपकी रात को रोकी जाती हैं और हमारा एरिया जो उधमपुर का है, वहां आपने आवागमन शुरु किया था और वहां से आगे जाने में कोई प्रॉब्लम नहीं है। मेरी रिक्वैस्ट है कि तीन-चार ट्रेनें जैसे मालदा एक्सप्रेस है, हेमकुंड है, गोरखपुर है, हिमगिरी है और हिमसागर है, अगर इन्हें आगे बढ़ाएंगे तो कोई प्रॉब्लम नहीं आयेगी। [r69] 

हमारा कश्मीर का एरिया, डोडा का एरिया, जिससे कनेक्टिविटी रहती है, मेरी सब्मिशन है कि इसे आप जोड़ें। आपने ऊधमपुर डीएमयू पांच दिन चलाई है, आप उसे पूरे सात दिन चलाएं। हम चाहते हैं कि वुडशेड उधमपुर में नहीं है, जिससे हमारी चीजें बरबाद होती हैं, उसे बनाया जाए। दो ट्रेनें आपने जो चलाई हैं, उनमें टिकटें नहीं मिलती हैं, जैसे फर्स्ट ए.सी. नहीं है, सैकेंड ए.सी. सिर्फ दो है, थ्री टायर चार हैं और स्लीपर छह है। मेरी सब्मिशन है कि जो 2446 गाड़ी संख्या है, इसमें दो फर्स्ट एसी कर दीजिए, 4034 गाड़ी में भी दो फर्स्ट एसी कर दीजिए और सैकेंड एसी की चार तथा दूसरे दर्जे की आठ सीटें कर दें। इस तरह से 8 और 12 तथा 12 और 20 स्लीपर कर दें।

सभापति महोदय : लाल सिंह जी, आप अपनी बात समाप्त कीजिए। अन्य माननीय सदस्य भी बोलने के लिए इंतजार कर रहे हैं।

चौधरी लाल सिंह : सभापति महोदय, मैं अपनी बात समाप्त करने जा रहा हूं। मेरी रेल मंत्री जी से एक और प्रार्थना है कि आपका जो रिक्रूटमेंट बोर्ड है, पहले हमारे यहां की भर्ती इलाहाबाद से होती थी, अब आपने जम्मू-कश्मीर में भी बनाया है। इसकी प्रोपर यूटिलाइजेशन कुछ नहीं है। आप इसका काम कराएं, उस इलाके को इग्नोर मत होने दें। मेरी मंत्री जी से सब्मिशन है कि जमाना बदला है और आपने बदला है, आपने कम्प्यूटराइज्ड टिकटिंग का काम शुरू किया, लेकिन हमारे कई स्टेशंस हैं, जो इस प्लान में रखे गए हैं, यदि वहां कम्प्यूटराइज्ड टिकटिंग का काम शुरू हो जाए, जो छोटे स्टेशंस हैं, जहां टिकट नहीं मिलती, जैसे कठुआ, बुद्दी, छांगरोलिया, चकदयाला, हीरानगर, खडवाल, सांभा, बियपुर, बड़ीगुहाना। एक कंक्रीट स्लीपर आपने कठुआ में माना भी है। शताब्दी ट्रेन जम्मू में नहीं आती है। मेरी सब्मिशन है कि शताब्दी ट्रेन जम्मू तक आनी चाहिए। भीमकुंड और जम्मू मेल को गगोल में स्टापेज दीजिए।

            महोदय, शेष भाषण मैं सभा पटल पर रख रहा हूं। 

  *The state of J & K is economically as well as industrially backward state.  There are very few industries running in this state, which are quite insufficient to provide employment to the educated youth of the state. Recently the Central Government’s efforts for development of Railway network in the state are vital and railway network has been extended from Jammu to Baramulla (Kashmir) as well as Air survey has been conducted for Jammu to Rajouri and Punch District of J & K.  The network if railway in the state is spreading in the area of 500 kms. From Lakhanpur to Baramulla and there are at least 3000 employees working in the different location of their posting in the state under the kind control of DRM office established in Firozepur in 1926.  The Firozepur Division is very far away from J & K and is looking after the area as well as employees of three states i.e., Punjab, Himachal and J & K. There are at least one DRM office is to be established to Central Location for the overall development of area. Firozepur lies in the corner of Punjab.

The FZR division is located in the corner of Punjab state and is not in position to look after huge area from Firozepur to Baramulla (Kashmir) and FZR to Jogindernagar (HP) controlling the area at least 3000 kms.

It has been observed that J & K state is deprived of under noted railway facilities provide to the people of other states as well as compare to J&K state.

In view of the above explained position, the Firozepur Division can not cater the requirement of such as big section consisting of thousand K.M.

 

 

* …….* This part of the Speech was laid on the Table.

 

Punjab States:

 

SN

Railway Wing

Location

Established

(1926) strength

1

Divisional Railway

Manager office

(Administrative/Controlling

office)

 

Firozepur

“Ordinary

class

3000

 

2

Diesel Shed (for maintenance and overhauling of Railways engine)

Ludhiana B Class

1000

 

3

Railway workshop (for manufacturing of Rly. wheel and brake pad etc.)

“B” class

 

4

Bridge work (for manufacturing of steel girder bridges

Jalandhar Cantt. “B” class

1500

 

5

Diesel Modernisation workshop (for manufacturing of spare parts of Rly. engine, overhauling and maintenance)

Patila “C” class

4000

 

6

Rail coach factory Kapurthala (manufacturing of railway coaches)

Kapurthala “C” class

7500

 

7

Almost all the Pubjab state linked with Railway line network

Haryana State:

 

SN

Railway Wing

Location

Established (1988) strength

1

Divisional Railway Manager office

(Administrative/Controlling office)

 

Ambala Cantt “C” class

8000

 

2

Railway workshop (for repair and overhauling of goods train etc.

Jagadhari “C” class

4000

 

3

Railway electrification office (for running of Railway engine with electric wire throughout the railway track)

Ambala “C” class

1500

 

J&K Staff (Jammu “B-2” class & Srinagar “B-1” class)

1.         No Railway industries: At Jammu Region

2.         No Division office: at Jammu region

3.         No production unit at Jammu Tawi

4.         No Railway workshop at Jammu region

5.         No traffic accounts office at Jammu region

6.         No Railway coach factor at Jammu region.

 

 

Divisional Railway Manager office: (Administrative/Controlling office located in various states in the jurisdiction of Railways:-

 

SN

State

Place of DRM office

Difference in Km from Division to Division

1

Punjab

Firozepur

Firozepur to Ambala= 234 Kms.

2

Haryana

Ambala

Ambala to Delhi=198 Kms. Ambala to Moradabad=174 Kms.

3

Uttar Pradesh

Lucknow Allahabad Moradabad

Moradabad to Lucknow=326 Kms. Moradabad to Ambala=174

4

Delhi

Delhi

Delhi to Ambala=198 Kms.

5

Rajasthan

Jaipur Bikaner Jodhpur Ajmer Kota

Note: 5 Nos. of DRM office has been provided in Rajasthan

 

 

As per above chart, it is clearly indicated that one or more than one Division Railway Manager offices have been provided in the above states but Jammu &Kashmir state is totally ignored.  As the distance from Firozepur to Baramulla is more than 820 Kms.

 

Demands of various establishment for operation of Railway Network in J&K for the development of state:-

 

Division Railway Manager office in Jammu Tawi:-

 

 

At present the whole network of railway for three states i.e. Punjab, Himachal & J&K comes under the Division Railway Manager, Firozepur Cantt (Punjab).  This Division office was created during the British rule i.e. before independence in 1926. At that time the Railway network was very limited i.e. upto Pathankot in Punjab, part of HImachal and J&K was not connected with the Rail link. Now the whole scenario has changed due to opening of Jammu-Udhampur and Qazigund-Baramulla section of Udhampur-Sringar-Baramulla Rail link Project.  The distance from Jammu to Baramulla is approximately 500 Kms. Where as from Jammu to New delhi distance is 600 Kms. and in between there are three DRM offices i.e., FZR, UMB and Delhi Division.  Moreover, it would not possible for Firozepur Division to manage the operation in Kashmir region being Geographically at long distance and hence New Division with part of Punjab i.e. areas near the Jammu border, Himachal and whole of Jammu and Kashmir which would be centrally located between Firozepur to Baramulla and the region between Kathau to Udhampur is most warranted and appropriate area for opening of DRM office. This will help in better management of Railway affairs and would create new employment opportunities for the local poor people of the region.

 

Extension of trains from Jammu to Udhampur:-

 

Udhampur Railway station is most important station from the point of view of defence as well as tourist.  This station was commissioned on 13th April, 2005 by Hon’ble Prime Minister of India & Sh. Lalu Prasad Ji Hon’ble Railway Minister. Most of the tourist coming to Mata Vaishno Devi Ji, Shivkhori, Patnitop, sudhmahadev, Mansar & all the tourists attractions of Srinagar prefer to commence their further journey from Udhampur station because from Udhampur all these Pilgrims places and tourists places are nearer as compared to Jammu Tawi.   Moreover, at Udhampur Northern Command of Indain Army  is headquarted and Airforce station is also very closer to Railway station.  but it is unfortunate that only two trains i.e. Uttar Sampark Karanti (2446) and Jammu Mail (4034)  operates from Udhampur wheras there is huge inflow of tourist, pilgrims & Army personnels and they are deprived of better Railway network at Udhampur. If few trains which are halted at Jammu Tawi extended upto Udhampur this will not only facilitate the passengers coming to various pilgrim places of the region as mentioned above, tourist * army personnel as well as local population also. This will also increase the revenue of Railways as these pilgrims & tourist have to board buses to reach their respective destinations.  Moreover, more employment opportunities to the local youth of Udhampur.

 

Therefore, it is demanded that more trains be extended upto Udhampur and preferably the following trains as essentially to be extended:-

 

Train No.

From to

Extension

2909 (Malwa Express)

Indore-Jammu Tawi

Upto Udhampur

4609 (Hamkunt Express

Haridwar to Jammu Tawi

Upto Udhampur

2587 (Gorakhpur Express)

Gorakhpur  to Jammu Tawi

Upto Udhampur

2331 (Himachal Express

Howrah to Jammu Tawi

Upto Udhampur

6317 (Himsagar Express

Thrivanthpuram to Jammu Tawi

Upto Udhampur

 

With the introduction of these trains upto Udhampur pilgrims, tourist & defence personnel coming from all over India would reach the above destination easily and people who pay homage to Haridwar for immersion of ashes of their dear ones at holy Ganges and take holy dip during Kumbh and Amawasya etc. will also facilitate.

 

Goods Shed at Udhampur:-

 

In Udhampur yard the provision was made for the Goods shed and all the track laid alongwith the commissioning of Udhampur yard.  The goods yard platform also constructed but no shed is constructed till date due to which it is not possible to lead goods at Udhampur.  The investment made for this purpose is lying wasted since inception of Udhampur Railway station.

Head office Requisition Quota (HOR quota):-

 

At present following trains are having HOR quota at Udhampur with the details as under:-

 

Train No. Ist AC

2nd AC 3 Tier AC Sleeper

2446

Nill

2

4

6

4034

Nill

2

4

6

There is no  first quota from  Udhampur in any of above train, but due to Northern Command Hd. Qrs. Airforce and other VIP movement it is experienced that in number of times the problem is being faced.  Therefore, the following quota may please be granted from Udhampur to meet the day to day requirement.

 

Train No.

Ist AC

2nd AC

Tier AC

Sleeper

2446

2

4

8

12

4034

2

8

12

20

 

Continued Passenger Train facility:-

 

Presently two rakes of DMU are catering the daily  commuters from Jammu to Udhampur after the commission of Jammu-Udhampur rail Link in year 2005.  These trains are operating in five days and in Saturday and Sunday this service is partly utilized where as there is heavy inflow of traffic on this route due to daily commuting by students, Government employees, business community, people of nearby region, pilgrims of Vaishno Devi and tourist of nearby tourist places. Hence these commuters face great hardship due to non-operation of full week service.  It is therefore requested that facility of DMU being extended for full seven days instead of present five days so as to enable the commuters daily on this route.

 

Proper utilization of Railway Recruitment Board Jammu Srinagar:-

 

Railway recruitment board was incepted in J&K taking into consideration the employment for local deserving candidates of Northern region i.e. J&J, HP and Punjab as previously these aspirant for Railway posts are to visit RRB Allahabad for recruitment.  In past decade the aspirants of this region were ignored and they were deprived of this facility by Railway recruitment board Jammu whereas the basic purpose of this board was to  recruit the people of this region.  It is therefore, demanded that due care of candidates of this region be taken.

 

Continuation of work on existing alignment of Railway track from Katra-Loale section of Udhampur-Srinagar-Baramulla Rail Link Projects:-

 

It has been proposed to change the alignment of the Katra-Loale.  However, on the existing alignment lot of money has been spent on the service road, bridges & tunnels.  Huge public money has already been spent for this purpose which is in crores of rupees. Therefore, for the work on the existing alignments may be continued and the proposal of changing the alignment may be ignored.  The  total amount spent for execution of work on existing alignment is Rs. 800-1000 crores. Therefore, the proposal for changing the alignment may be cancelled and work shall be continue on the existing alignment.  Moreover, due to change of alignment and stoppage of work the resentment/unrest like situation have has existed in the area along the alignment as local population have been deprived of employment and number of petty contractors have invested huge amount for construction purpose and this has resulted in idling like situation. Due to increase in employment opportunities the youth of the area are coming in the main stream and terrorism has come to sharp decline.  Moreover, the new proposed alignment does not cover any local population as out of approximately 70 Kms. Railway track almost 64 Kms. is cover by tunnels.

 

Installation of computerised ticketing system.

 

Pathanlot Jammu section of Indian Railway was commissioned in year 1974, but in spite of this station between Pathankot-Jammu are not connected with computerized unreserved ticketing system.  This creates inconvenience to the local public to get unreserved  tickets to short distance journey.  Presently following stations are without computerised ticketing system:-

 

1.       Kathua

2.       Budhi

3.       Chan Arorian

4.       Chak Dayala

5.       Hiranagar

6.       Chagwal

7.       Samba

8.       Vijaypur

9.       Bari Barahmna

 

It is therefore, requested that the computerised ticketing system may be installed at the above stations.

 

Installation of Concrete Sleeper Plant at Kathua.

 

For promotion of industrial development Hon’ble Railway Minister in the presence of Hon’ble Prime Minister at the time of opening of Udhampur-Jammu Rail Link Project on April 13, 2005 had announced that at Sleeper Plant will be established at Kathua which will generate employment opportunities to unemployed youth of this region.  But till date nothing has been done so far in this connection. It is therefore requested to establish a Concrete Sleeper Plant at Kathua to fulfil the promises made to the people of this region.

 

Installation of Wheel & Axle Plant or any of Railway Production Unit at Kathua.

 

For promotion of employment opportunities to local youth of this region a wheel & axle plant or any of Railway production unit on this line of what has been installed in Punjab and Haryana may be established to fulfill the aspiration of unemployed population this part of Punjab, Himachal and J&K as Kathua is centrally located and ideal location for commissioning of above plants/production unit.

(1) Shatabadi for Jammu

(2) Himkund and Jammu Mail for Gagwal

 

Thank you very much hon. Minister on behalf of the people of this region for fulfilling the demands of the people and cooperation extended by your good self.  I wish that in future also aspiration of the people of the state would be fulfilled under your dynamic leadership.  The people of this region are remain ever grateful for fulfilling the following demands which were presented by me on behalf of the people of this region:-

 

1.       The train No. 2446 (Uttar Sampark Kranti) which was running three days in a week have been regularized for the whole week by your good self.

2.       Another Train No. 4034 Jammu Mail has been extended upto Udhampur by your goodself.

3.       On your efforts Kathua-Basohli Rail Link survey has been started in this region.

4.       Due to cooperation given by your goodself all the trains mail-superfast/rajdhani are halting at Kathua.

5.       As promised by your goodself that one member of each family whose land have been acquired by Railway for Jammu-Udhampur Rail Link Project.  The process for the above promises made for giving employment in Railway is being fulfilled.  The people of this region are very happy as some of the land losers have given employment in Railway.

6.       You have also fulfilled the promise made for establishing a Ballast depot at Manwal Railway station which has generated employment to the local people of this region.

         

          I am again thankful to your goodself for fulfilling the above demands made by me on behalf of the people of this region.*

 

*श्री हंसराज गं. अहीर (चन्द्रपुर) :  महोदय, रेल मंत्री द्वारा पेश किये गये बजट पर मुझे बोलने का अवसर दिया, इसका मैं आभार व्यक्त करता हूं। रेलवे यह विकास की वाहिनी है, रेलवे के द्वारा विकास को गति मिलती है। इसलिए रेलवे का कार्य समन्यायी तथा सार्वजनिक होने की आवश्यकता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षो से हर रेलवे बजट में बिहार को ही प्राथमिकता दी जा रही है। यह स्वस्थ परंपरा नहीं है, देश के संसाधनों का समान रूप से वितरण करना अपना संवैधानिक दायित्व बनता है। भेदभाव यह असंतोष का कारण बनता जा रहा है। महोदय, मैं आपके माध्यम से यह कहना चाहता हूं कि रेलवे को महाराष्ट्र, मुंबई से सर्वाधिक राजस्व प्राप्त होता है लेकिन रेल सुविधा को देखें तो यह उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। महाराष्ट्र में विदर्भ के जनजातीय तथा दुर्गम क्षेत्र अविकसित और पिछड़े रहे हैं। इन क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए रेल पटरी बिछाने की आवश्यकता पर मैं बल देना चाहता हूं। रेल मंत्री जी कहते हैं कि हम समाज के पिछड़े, दुर्बल व्यक्ती को न्याय देंगे पर ऐसा होता नहीं दिखता। उनके कथनी और करनी में अंतर दिखाई देता है। इसलिए उन्होंने इन जनजातीय, दुर्गम क्षेत्र की उपेक्षा की है। इन क्षेत्रों में भी अन्याय होने से जनता में रोष तथा असंतोष फैला है।

          रेल बजट 2008-09 में इस क्षेत्र के बल्लारशाह-आलापल्ली-सूरजागड रेलवे पटरी बिछाने के लिए सर्वेक्षण को मंजूरी दी गई। हमें आशा थी कि, इसका निर्माण सुनिश्चित करने के लिए इस बजट में वित्तीय सहायता के साथ निर्माण की घोषणा होगी लेकिन रेल मंत्री ने इस जनजातीय क्षेत्र की जनता को निराश किया। इसी तरह वडसा-आरमोरी-गडघिरोली रेल पटरी बिछाने के लिए 2004 में सर्वेक्षण होने के बाद इसके निर्माण के लिए लगातार मांग हो रही लेकिन पहले 77 करोड़ की यह परियोजना अब 150 करोड़ रूपये की हो गई है। रेल मंत्री इसके निर्माण में राज्य सरकार से 50 प्रतिशत सहयोग भी चाहते हैं। एक तरफ रेल भारी मुनाफे में है, की घोषणा करने वाले रेल मंत्री जनजातीय तथा दुर्गम क्षेत्र की रेल परियोजना के लिए राज्य सरकार से आर्थिक सहयोग की दरकार करते हैं। यह दोहरी मानसिकता के कारण हमारे यहां पर रेल का विस्तार नहीं हो रहा। राज्य सरकारें छठे वेतन आयोग के सिफारिशों के बोझ तले दबी हुई है। उनसे आर्थिक व्यय की अपेक्षा करना ही व्यर्थ है। मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री से अपील करता हूं कि इस रेल परियोजना को पूरा करने के लिए रेल विभाग स्वयं 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता दे। इसी तरह चन्द्रपुर जिले के मुख्यालय शहर में प्रस्तावित बाबूपेठ ओवर ब्रिज के निर्माण में विलंब हो रहा है। स्थानीय निगम

 

* Speech was laid on the Table.

तथा राज्य सरकार की उपेक्षा तथा वित्तीय सहायता की अपेक्षा से आर.ओ.वी का कार्य रूका हुआ है। बाबूपेठ की जनता जो कि करीब 60 हजार से अधिक है उनको इसके कारण सुविधा वंचित होना पड़ा है, को देखते इसका निर्माण रेल विभाग स्वयं करे। राज्य सरकार से सहयोग  की अपेक्षा न रखे।

          महोदय, मेरे निर्वाचन क्षेत्र के घुग्गुस जो कि औद्योगिक शहर है, से बल्लारशाह-झुग्गुस तथा अन्य औद्योगिक शहर गडचांहुर को आपस में पैसेंजर ट्रेन से जोड़ा जाना चाहिये। चन्द्रपुर शहर में चांदाफोर्ट यह आमान परिवर्तित नया स्टेशन है, इसे चंद्रपुर रेल स्टेशन से जोड़ने का कार्य तत्काल होना चाहिये। रेल मंत्री बजट संशोधन में इसके लिए वित्तीय सहायता के साथ इसके निर्माण की घोषणा करे।

          माणिकगड रेल स्टेशन तथा मूल रेल स्टेशन पर संगणकीय टिकट प्रणाली  (पी आर एस)  व (वी टी एस) सुविधा उपलब्ध कराये तथा भांदक रेल स्टेशन पर प्रस्तावित आर.ओ.बी का विस्तार कर इसे शहर के लोगों तथा किसान भाईयों के आवाजाही हेतु रास्ता बनाये। राजूरा शहर में रेल स्टेशन बनाना प्रस्तावित है। इस रेल स्टेशन के लिए प्रस्तावित स्थान का स्थानीय जनता तथा व्यापारियों द्वारा विरोध किया जा रहा है। इस विरोध का संज्ञान लेकर इसका अन्यत्र स्थानांतरण कराने के लिए तत्काल कारवाई होनी चाहिये। चंद्रपुर शहर औद्योगिकरण के कारण पहले ही प्रदूषण झेल रहा है। शहर के मध्यवर्ती स्थित रेल स्टेशन पर मालधक्के से (गुड्स यार्ड) कोयला, लौह अयस्क तथा सीमेंट के लदान, उतराई से हो रहे  प्रदूषण को देखते इसका करीब के ताडाली रेल स्टेशन पर स्थानांतरण करना चाहिये। इसके लिए मैं लगातार अनुरोध करता रहा हूं। बजट में संशोधन के माध्यम से मंत्री जी इसकी घोषणा करे। आमान परिवर्तित चांदाफोर्ट रेल स्टेशन का आधुनिकीकरण कर इस लाईन पर चलने वाले चैन्नई-कोरबा गाड़ी को प्रतिदिन चलाने तथा इसका कोलफाना तक विस्तार करे। चांदाफोर्ट पर दक्षिण से हावडा की ओर जाने वाली गाडियों का स्टापेज और इस मार्ग से अधिक गाड़ियां दे। बल्लारशाह यह प्रमुख रेल स्टेशन होने के कारण यहां गाड़ियों के बढ़ते आवागमन को देखते यहां पीट लाईन का निर्माण तेज गति से किया जाना चाहिये तथा बल्लारशाह-गोंदिया नई ट्रेन शुरू करे और तेलंगना एक्सप्रेस का बल्लारशाह तक विस्तार करे1 मेरे क्षेत्र के वरोरा, भांदक, गाजरी तथा वणी रेल स्टेशनों का आधुनिकीकरण कर वहां यात्री सुविधा बढाने के लिए विशेष निर्देश जारी करे और स्थानीय जनता के अनुरोध तथा मांग को देखते यहां पर ठहराव दें।

          महोदय, मैंने अपने निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित मांगों को आपके माध्यम से मंत्री जी के सामने रखा। मैं आशा करता हूं कि रेल मंत्री इसका लोक महत्व ध्यान में रखकर मेरे जनजातीय तथा दुर्गम क्षेत्र के लिए आवश्यक सुविधा के लिए मंजूरी तथा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के अनुरोध के साथ ही उनीसिकलसेल नाम बीमारी के मरीजों को रेल प्रवास में सहूलीयत देने की मांग के साथ मैं अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं।                                            

HRI K. FRANCIS GEORGE (IDUKKI): Sir, the hon. Railway Minister has presented an Interim Budget claiming a very impressive performance and has declared certain cuts in fares and declared other benefits falling short of probably what could have been done considering the Rs.90,000 crore surplus that has been generated by the Railways.

          Several issues have been mentioned earlier by my colleagues from Kerala and I would also like to invite the attention of the hon. Minister to one of the problems which was just mentioned by Shrimati Sujatha here.  In Kerala, the worst, most dilapidated and worn out coaches are plying.   The Members of Parliament are getting hell from the media and from the general public saying that only in Kerala these kinds of worst coaches are being put by the Railways.  I do not know why we are being treated like this.

          In fact, if you compare, on an average probably the Railways is getting more income from Kerala than from any of the other States.  It has been pointed out that all Kerala bound trains have become very unsafe.  Just now, it has been mentioned by Shrimati Sujatha that an entire coach was looted and no action has been taken by the Railway authorities so far.

Sir, we have been demanding for a wagon repair overhauling workshop at Nemom. The problem is that there are about 1,600 coaches attached to the Thiruvananthapuram Central Railway Station and these coaches are to be taken for overhauling once a year mainly to Chennai.  On an average about 130 coaches are taken for overhauling every month. As the capacity in these places is not sufficient, there is considerable delay in completion of the work.  So it will be highly economical and convenient to the State as well as to the Railways to set up a workshop at Nemom.  This is a very critical thing.  I would urge the hon. Minister to consider this at the earliest.

          I very much welcome the suggestion of introducing bullet trains, introducing high-speed corridors both for freight and passenger traffic.  The hon. Minister mentioned about the Chennai-Bangalore-Coimbatore-Ernakulam High Speed Corridor.  In fact, the State had requested for a high-speed Corridor from Mumbai to Kanyakumari which will connect the four States, all the Southern States.  That would have been more beneficial for the Western Corridor and also for Kerala State.  Kerala is a small State with high density of population.  It is very difficult to have more road development there. So, on the coastal belt, where the railway lines are already there, there are excess lands, we can have a Mumbai-Kanyakumari High speed Corridor without much of land acquisition.

          I had written to the hon. Railway Minister, and hon. Velu ji had replied saying that due to very high difference in the axle load of high speed passenger trains and goods trains, operationally and commercially it is not advisable to operate them in the same corridor.  We agree. 

As regards the High Speed Rail Corridor looking at the likely potential, the Ministry of Railways have in the Southern part of the country selected two Corridors, namely, Chennai-Bangalore-Coimbatore-Ernakulam, and Hyderabad-Dornakal-Vijayawada-Chennai for pre-feasibility studies to start with.  I would request that the Mumbai-Kanyakumari Corridor also be taken for feasibility study. 

There are other long-standing issues like the Peninsular Railway Zone, doubling and electrification.  As far as doubling is concerned, the doubling works are to be completed on the Ernakulam-Kottayam-Kayamkulam, and the Ernakulam-Alleppey-Kayamkulam sections.  The Thiruvananthapuram-Kanyakumari doubling has to be finished and also the Shoranur-Mangalore doubling has to be completed.  These doubling works are very critical as far as the railway development of Kerala is concerned. These have to be completed on a war footing. 

Also, as far as electrification is concerned, the electrification work in the Thiruvananthapuram-Kanyakumari sector and the Shoranur-Mangalore sector also have to be completed, then only the full potential, the full benefit can be reaped. 

Also, the setting up of the coach factory at Palakkad and the wagon factory at Alleppey, these have been promised and declared in the last Budget but nothing much has progressed so far.  So, I would request the hon. Minister to consider these factors to set up these projects.  In fact the coach factory has been promised in lieu of the loss that Kerala had to face on account of the bifurcation of the Palakkad Division.  So I would request the hon. Minister to keep the promises that have been made to Kerala and also to consider these factors.

There is one more request.  My constituency, the Idukki district of Kerala is the hilly part of Kerala which has not so far been touched in the Railway map.  So I had requested that the Angamali-Sabri line, which is yet to take of – there are some problems as far as land acquisition for this project is concerned in the Kottayam district – the first phase starting from Angamali to Thodupuzha can be started, finished and commissioned.  It can be connected to Ernakulam so that suburban trains can be started in these lines and Railways will start earning income even before the completion of the entire project.

For the high ranges part of the Idukki district of Kerala I had proposed in the earlier discussions connected with the Railway Budget that if the Dindigul-Theni line is extended to lower camp near to Kumaly, the high ranges of Kerala can also be connected with the Railways.  In fact, hon. Velu jihad taken the initiative, and I am told that the project is pending before the Planning Commission.   I would urge Lalu ji and Velu ji to take steps for providing funds for early completion of this particular project.

*SHRI M. SHIVANNA (CHAMARAJANAGAR) : -Hon’ble Chairman sir, thank you for giving me an opportunity to participate in the discussion on Railway Budget.  Sir, I congratulate Shri Lalu Prasad Yadav ji, who presented the Sixth Consecutive Railway Budget in the Parliament.  Hon’ble Railway Minister presented a popular Budget without burdening both, passengers and Indian Railways.  But I am sorry to say that this Budget has not rendered justice to all the states.  I wish to quote a proverb that means whatever you may achieve, your achievement will carry no importance if it is not equitable to all the states.

          Karnataka has been getting a raw deal when it comes to sanctioning of new railway lines and starting new train services. Karnataka has been neglected by the Railway Minister. Karnataka stands first in Software industry.  The Silicon city, Bangalore is  attracting people from all over the world.  Bangalore is known as I.T. hub. Every day thousands of people are visiting Bangalore and Mysore.  Tourists are going to Mysore to see palaces of tourist importance like, Krishna Raj Sagar, Brindavan, Tippu palace and Chamundi Hills etc. But there is no adequate train facility in between Bangalore and Mysore. Doubling and electrification work has also not been completed.  It takes 3 hours to travel 145 km from Mysore to Bangalore.

          Karnataka has been contributing more revenue to the Indian Railways.  On the contrary, Railways has not contributed more train services to Karnataka. Shri Lalu Prasad ji has given more priority to his own state Bihar, and also to Chennai (Tamil Nadu). I am not opposing him.  If I were the Railway Minister, I too would  have done the same, but he should have taken into consideration  the long-pending demands of the people of my state.  I would only say he failed to pay equal attention to all the states.

 

* English translation of the speech originally delivered in Kannada.        

MR. CHAIRMAN :Please be brief. You have only two minutes.

SHRI M. SHIVANNA : I have taken only two minutes

MR. CHAIRMAN : You have already taken three minutes. You have two minutes more.  You can speak only for two more minutes.

SHRI M. SHIVANNA : As far as my constituency is concerned, I invited the Hon’ble Minister Shri Lalu Prasad Yadav to my  parliamentary constituency, Chamarajanagar to inaugurate Broad gauge line between Mysore and Chamarajanagar but he could not participate in that inaugural function. But, Hon’ble Minister R.Velu ji had come and inaugurated the broad gauge line.  I am very grateful to him.  We have been demanding a railway line between Chamarajanagar-Mettupalyam for the last 75 years.  It has not been given adequate funds. Only one crore rupees have been allocated for conducting joint survey but it would not be completed by this meagre allocation.       

          We have been demanding another railway line from Bangalore to Chamarajanagar via Kanakapura, which has not been mentioned in the Railway Budget this year. 

MR. CHAIRMAN : Mr. Shivanna, there are more than 40 speakers still there to participate.  Please cooperate. You may lay the rest of your speech on the Table of the House, and it will be treated as read.

SHRI M. SHIVANNA : Okay, Sir.  I am laying the remaining part of my speech on the Table of the House.

* Sir, for many years Karnataka had been requesting the Railways to sanction 10 yew railway projects.  The state had also offered to share 50% of the cost for these projects.  But in the Budget not a single new railway project has been sanctioned.  As a mark of protest against this step-motherly treatment, people

 

*…* English translation of this part of the Speech was originally laid on the Table in Kannada.

 

of Karnataka and a few Pro-Kannada organizations are resorting to Railroko and Road roko demonstrations.

          Of the 3 new trains proposed to be introduced by the Railways, only one train Mysore-Yeshwantpur Express will benefit the people of Karnataka.  The other two trains will not benefit  Karnataka. We wanted Mumbai-Karwar super-fast train to go up to Mangalore so that more people would be benefited.  

          As far as the ambitious NAMMA METRO in Bangalore is concerned, the work is progressing at a snail’s pace due to lack of funds. This year only a meagre amount of Rs.215.70 crore have been allocated for this project.  Therefore atleast Rs. 1,000 crore should be allocated for this project.

          I would like to request the Hon’ble Railway Minister to pay attention to immediate completion of some of the very important railway projects.  Those are :-

(i)                           Tirupati-Mysore train services should be extended upto Chamarajanagar.

(ii)                         All the trains running to Mysore should be extended upto Chamarajanagar.

(iii)                       A new train had been introduced between Mysore and Nanjangud.  This should be extended upto Chamarajanagar.

(iv)                        Electrification and doubling of the Chennai-Bangalore Railway line. Railway line between Chennai and Jolarpet has only been electrified and doubled, but similar work has not been taken up between Jolarpet and Bangalore. People of Karnataka would not tolerate such step-motherly attitude of Railways.

(v)                          A single train has been operating between Mangalore and Bangalore.  More number of piligrims are commutting in this train to visit pilgrimage and religious places like Dharmasthala, Kukke Subramanya, Udupi and Sri Kolluru Mukambike temple.  The existing single train service is not adequate to meet the requirements of the people.  Therefore, one more train should be introduced in the Mangalore-Bangalore sector.

(vi)                        Rajadhani Express between Bangalore and New Delhi is operated for only 4 days in a week.  It should be made a daily train.

(vii)                        Every day, hundreds of piligrims visit Benaras via Chennai as there is no direct train service from Mysore to Benaras.  A new train should be introduced on this route.

(viii)                    Kushal nagar- Hole Narsipur-Kodagu railway line has been ignored.

(ix)                        Mysore-Telachery-Nanjangud-Neelambur Railway line has been approved only for survey but funds have not been allotted.

(x)                          The Government of Karnataka demanded the construction of 30 over-bridges and under-bridges, but not a single one has been sanctioned.

 

I earnestly request the Hon’ble Railway Minister to pay special attention to the genuine demands of the people and take positive steps to fulfill the dreams of our people.

     With these words, I conclude my speech. *

 

 

 

 

         

श्री तापिर गाव (अरुणाचल पूर्व):  सभापति महोदय, पिछले पांच साल से लालू जी ने जब भी रेल बजट पेश किया है, मैंने उसकी बहस मे भाग लिया है। यह लालू जी का आखिरी रेल बजट है…( व्यवधान)इस वर्ष का आखिरी बजट है,  इलैक्शन के बाद क्या होगा, वह दूसरी बात है?  मैं इस साल के रेल बजट में भाग लेते हुये उन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि जब भी मैंने रेल बजट पर भाषण किया, मैंने बहुत से मुद्दे उठाये थे कि पूर्वोत्तर राज्यों को रेलवे लाइन से जोड़ा जाये। मेरे पास लालू जी का एक लैटर भी है कि मैंने किन किन नेशनल प्रोजैक्ट्स के लिये इनीशिएटिव लिया और बहुत कोशिश की है। मैं उस पर कोई लम्बा भाषण नहीं करना चाहता, केवल कुछ बिन्दुओं की तरफ उनका ध्यान दिलाना चाहूंगा।

          सभापति जी, रांगिया से मुरकांगसेलेक को ब्रॉड गेज बनाने के लिये मंत्री जी का पत्र 2006 में मुझे मिला है लेकिन आज तक उसका एक किलोमीटर हिस्सा भी नहीं बढ़ा है। वहां पांच नेशनल प्रोजैकट्स  हैं। बोगीबील ब्रिज के बारे में उन्हें खुद पता है। पानी के अंदर जो मेन पिलर उतारना चाहिये था, वह काम  भी नहीं हुआ है और नेशनल प्रोजैक्ट्स के आधार पर   उनके काम के लिये फंड्स रिलीज़ करने चाहिये थे, लेकिन अभी तक नहीं किये गये हैं। मैंने इस सदन में कई बार कहा है कि बिना रेल लाईन के किसी प्रदेश का डेवलेपमेंट नहीं हो सकता है। इसलिये मैंने हर रेल बजट पेश करने के दौरान मंत्री जी से दरख्वास्त की थी कि अरुणाचल प्रदेश को रेल लाइन से जोड़ना चाहिये। रेल लाइन से नहीं जोड़ने से प्रदेश को इकोनोमिक परेशानियां हो रही हैं, वह दुनिया को मालूम हैं। मैंने यह अर्ज़ की थी कि अगर अरुणाचल प्रदेश को आप रेल लाइन से नहीं जोड़ेंगे तो जैसे 1962 का वॉर हुआ, उस हालत में अगर  चीन या पड़ोसी देशों के साथ कुछ हुआ तो उससे न केवल अरुणाचल को नुकसान होगा बल्कि पूरे देश का नुकसान होगा। इसलिये मैंने लालू जी को यह प्रस्ताव दिया था कि  मुकांगसेलेक से लेकर मारगरिता-नामपोंग तक 2006 के रेल बजट में जो इनवैस्टीगेशन और सर्वे इनकलूड किया था मगर  आज 2009 तक इस काम में कोई प्रोग्रेस नहीं है। मैंने यह भी अर्ज किया था कि रुपई से परशुराम कुंड तक रेल लाईन बनायी जाये। यह ऐसा स्थान है जहां लाखों हिन्दुओं का 14 जनवरी को फैस्टिवल में आना होता है। लाखों लोग देश -विदेश से वहां आते हैं। माननीय रेल मंत्री जी ने भी कहा था कि वह भी परसुराम कुंड पर आयेंगे। आपने 2007 में सर्वे और इनवैस्टीगेशन के लिये बोला था लेकिन आपने 2009 के रेल बजट में इसका उल्लेख नहीं किया। यह सारे हिन्दुस्तान का एक पवित्र स्थान है। मैंने आपसे रिक्वैस्ट किया था कि – लुक ईस्ट पौलिसी – गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने इसके लिये इनीशिएटिव लिया है।  इस पौलिसी से पूर्वोत्तर राज्यों को पड़ोसी देशों के  साथ यदि ट्रेड और कॉमर्स का रिलेशन्स रखना है तो ट्रंसपोर्ट एंड सर्फेस मिनिस्ट्री ने स्टीलवैल रोड के लिये  कहा था।  1942 में जब सैंकड वर्ल्डवॉर हुआ, तब ब्रिटिश गवर्नमेंट ने किया था – स्टीलवैल रोड और म्यांमार और चाइना का कुनामिंग टाउन वाया सदिया तक उसकी कनेक्टिविटी है।[s70] 

सरफेस एंड ट्रंसपोर्ट मिनिस्ट्री इसे अभी ब्रॉड वे में बना रहा है इसलिए मैनें रेल मंत्री जी से यह दरख्वास्त की थी कि मार्गेरिता से नॉमपेन्ह तक रेलवे कनेक्टिविटी दी जाए।

सभापति महोदय : प्लीज, आप समाप्त कीजिए।

श्री तापिर गाव :  सभापति महोदय, लालू जी ने रेल तो नहीं दिया, आप थोड़ा समय बढ़ा दीजिए, समय मत काटिए।

सभापति महोदय : माननीय मंत्री जी ने आपसे लिखकर मांगा है, आप मंत्री जी को लिखकर दे दीजिए।

श्री तापिर गाव :  सभापति महोदय, मैं समाप्त कर देता हूँ। मैनें यह रिक्वेस्ट की थी कि दौलत टू सदिया टू रोइंग, ये ऐसे स्थान हैं जहाँ more than 3000 to 4000 mega hydro powerका हमारे प्रधानमंत्री जी ने शिलान्यास किया है। लोहित नदी में जब तक यह ब्रिज और रेलवे लाइन नहीं होगी तब तक वह 22,000 megawatts hydro power projects कैसे कामयाब होगा? अरूणाचल प्रदेश में ऐसे पोटेंशियलिटीज हैं। इसलिए मैं रेलवे मिनिस्ट्री से यही दरख्वास्त करता हूँ कि अरूणाचल प्रदेश को रेलवे में इकोनॉमिकल वायबिलिटी से मत देखिए, उसकी महत्ता नेशनल सिक्योरिटी के आधार पर भी देखिये। महोदय, अरूणाचल प्रदेश एक बहुत महत्वपूर्ण प्रदेश बनने वाला है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सभापति महोदय : आपको तमिल में बोलना था तो आपको नोटिस देना चाहिए था। इसके लिए ट्रंसलेटर अरेंज करना पड़ता है। You can speak in English.

SHRI J.M. AARON RASHID (PERIYAKULAM): I will speak in English.    

          There is a weekly one day train from Bilaspur to Trivandrum via Tirunelveli. Then, from Sengottai to Erode, you have given a daily train. You have given everyday the Tiruchirapalli to Madurai Express also. You have given train from Mumbai to Trivandrum via Tirunelveli. I am very happy for this.

MR. CHAIRMAN (SHRI DEVENDRA PRASAD YADAV): You can lay the rest of the speech on the Table of the House.

SHRI J.M. AARON RASHID : Sir, What is this? I will speak in English. I will speak about my constituency. I belong to a constituency, namely Theni, which is a hilly terrain area. More cardamom planters and agricultural production are there.… (Interruptions) I have requested the hon. Minister for a railway booking centre for the cargos because the booking centre is not there. They have to take their cargo to Madurai RS to Coimbatore. They have to travel 300 kilometres. So, I request that a booking centre should be given at Bodi for cardamom planters. सर, कन्याकुमारी टू चेन्नई, नई दिल्ली तक जाने के लिए बुलेट ट्रेन भी शुरू करिए। चेन्नई टू नागौर, तेलांगना के लिए गरीब रथ चालू करें। [r71]  

          It is a pilgrim area where Hindu temple is there; a Muslim dargah is there in Vellore and a Christian church is there in Velanganni.  This train should go in the morning and come back in the evening to Chennai. In the same way, there should be a bullet train from Chennai to Rameswaram. Rajdhani train is running at a speed of 125 kilometres. Between Delhi and Agra, the train is running at a speed of 150 kilometres. Similarly, they should run a train between Chennai and Rameswaram where a very big Hindu shrine is there. The train should everyday go in the morning and come back in the evening, like the train goes from Delhi to Ajmer. People will go there and pray for two to three hours and thereafter, they can come back in the evening to Chennai and then, go back to Delhi or any other place. They want a bullet train. … (Interruptions) My native place is Ramnad. So, I would request that a train should be started. … (Interruptions)

          There is a bye-pass in Theni. In Theni, there is a railway crossing on the main road. Since the train is plying on that track in the morning, people cannot move to either side thereof. As a result, there is a traffic jam running into two to three kilometres. I would request the hon. Railway Minister, who is very generous, to construct a bridge over this crossing.

          A project has been sanctioned between Madurai-Bodi, but the work has not yet started. It should be started at the earliest. Sir, already another scheme has been sanctioned there. The State Government has not given the money. The Railways are having Rs. 90,000 crore of surplus funds. So, I would request the hon. Minister to put all the funds for the project.

MR. CHAIRMAN : Shri Aaron Rashid, please take your seat.

SHRI J.M. AARON RASHID: Sir, Dindigul-Vathalagundu-Periyakulam-Kambam-Chinnamannur-Gudalur line should go up to the base hill of Ayyappa Temple. The passengers will be able to go with ease to Ayyappa Temple. Lakhs and lakhs of devotees are coming from all over India to this place and they will be able to use this.

MR. CHAIRMAN: Please take your seat. 

SHRI J.M. AARON RASHID : Sir, there is a need for a daily EMU train in the morning from Jolarpet to Chennai. A train is also required from Bodi to Madurai via Chennai. There are many people going from my constituency to Tirupati. So, this Bodi-Madurai-Tirupati train is required. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: You can lay rest of the speech on the Table of the House.

… (Interruptions)

SHRI J.M. AARON RASHID : An EMU train is required on this route. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Please sit down now. 

SHRI J.M. AARON RASHID : Sir, what is this? You have given time to everybody and you are not giving time to me. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: No. You have already taken seven minutes. You were to speak for five minutes.

SHRI J.M. AARON RASHID : Sir, I am concluding in one minute.

          There is a need to improve Dindigul-Kumuli, Ariyalur-Thanjavur, Tirunelvelli-Jolarpet and Morappur-Dharmapuri lines.  A project has been sanctioned for Needamangalam-Pattukkottai project costing Rs. 1,500 crore, but the work has not yet started. I would request the Railway Minister to put funds from the Railways’ side itself so that the work should be completed. … (Interruptions)

          There is a long-pending demand of Central-Egmore link costing Rs. 98 crore. Sir, it is important for you people also. Persons going to Vellore from Chennai have to come first to Egmore so that they can go there. There is a Chennai-Egmore central link. It is only a Rs. 98 crore project. It is pending for long. It could also be implemented.

          My request is that on Dindigul-Karur line in Salem Division, you have done a lot of work. I would request that electrification work of 227 kilometres should be done early. My constituency has hilly area and people travel by train and not by bus because fare is very high for travel by bus. So, poor people prefer to travel by train only. I would request that a train should be given immediately on Bodi-Madurai-Tirupati route via Chennai. It should either be a bullet train or DEMU.

MR. CHAIRMAN: Please sit down now.

SHRI J.M. AARON RASHID : Sir, can I lay my speech on the Table?

MR. CHAIRMAN: Yes, you can lay rest of the speech on the Table of the House.

SHRI J.M. AARON RASHID : Sir, I appreciate that. … (Interruptions) The Railways have progressed very well under the able control of Shri Lalu Prasad. In the five years of leadership of Shrimati Sonia Gandhi as Chairperson of UPA and her good help and guidance, we were able to progress like anything.

                                                                                                         

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record. Now, I am calling the next Member to speak.

(Interruptions) … *

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

* Not recorded.

*SHRI P.S. GADHAVI (KUTCH): As usual in this Railway Budget Hon’ble Railway Minister has ignored the longstanding demands of people of Gujarat.

          Sir, it  is the longstanding demand of people of Gujarat for Shifting the Headquarter of Western Railway from Mumbai to Ahmedabad because the Western Railway is having its longest railway track in Gujarat but Hon’ble Railway Minister has not made any mention of this demand in this speech.

          Sir, there was a longstanding demand of having third track between Ahmedabad-Mumbai, as traffic on this route has increased many fold, but no mention about this in the speech of Hon’ble Railway Minister.

          Sir, As Hon’ble Railway Minister knows fully well that the Gandhidham Railway Station is highest earning railway station in Western Railway Zone and moreover rapid industrial development of Kandla major port complex even then the demand of having additional train facilities for this area has also been ignored in this budget.

          Hon’ble Railway Minister has not considered our many demands of this area which are narrated in brief as under.

          (a) One additional express train from Mumbai to Bhuj, as Western Railway runs about 275 superfast extra trains on this route even then the demand of introduction of this new train has not been considered.

          (b) Demand of new direct trains joining Vishakhapatanam major port and Chennai major port with Kandla port has not been considered by Hon’ble Railway Minister in spite of our longstanding and repeated demands for this.

          ( c) It is our longstanding demand of having extension of Howrah-Ahmedabad and Puri-Ahmedabad express trains to Bhuj at least for two to three days in a week has not been considered.

 

 

* Speech was laid on the Table

Sir, even though the Hon’ble Minister declared in his last railway budget speech of introduction of new railway train between Kamakhaya (Guwahati) to Bhuj-Gaandhidham has not yet started and we do not know when the same will start.  I request the Hon’ble Railway Minister to kindly assure us when the same will start.

 

Sir, it is known to everyone that Gujarat State is producing more than 75% of the Salt in our country and particularly my constituency is producing more than 70% of the salt production of Gujarat State and it is the longstanding demand of salt producers of Gujarat to have rational fare on the transportation of salt for which many memorandums and representations was submitted to Railway authorities but Hon’ble Railway Minister has not considered all this demands and he has not made even any mention of this in his speech.

 

          Sir, it is also known that the salt is very cheap commodity and it is very essential for human consumption.  Therefore, the highest freight on this commodity will certainly cause higher rates of salt to general public.  I, therefore, request Hon’ble Railway Minister to kindly consider request of salt manufacturers for reduction in railway freight for the transportation of salt by railway.

 

          Sir, it is a concern for all those who are traveling by rail that there should be a good standard of sanitation and cleanliness in railway but our experience while we travel in railway is just otherwise. Sir, it is known to everyone that the standard sanitation and cleanliness in railway and railway platform is deteriorating particularly in remote areas of our country.  On this count there are many complaints have been filed by large number of passengers as well as by Hon’ble M. Ps, but no heed has been given to this very important issue.  I, therefore, request the Hon’ble Railway Minister to pay special attention on this issue and please see that the standard of sanitation and cleanliness is improved.

 

          Sir, you must be aware that even though the railway is having policy to providing employment-self employment to disabled persons by providing them vending stalls and stalls for STD booths etc. and the same were given to the various disabled persons on many Western railway stations but very recently such disabled persons are being forcible removed by railway authorities without any valid reasons etc. Sir, on this count one social organization of disabled persons from Mumbai has given one memorandum to Hon’ble Railway Minister stating therein about various problems faced by all types of disabled persons for their unemployment/employment and self-employment. In this memorandum they have given reference to the equal opportunities rights and full participation Act 1995 for the development of the disables for the railway policy No. 98TG/10/PCO/P/TATA New Delhi 20/01/1998.  I, therefore, request Hon’ble Railway Minister to consider the problems faced by such disabled persons who are being forcible removed from the railway stations for which I have also addressed one letter to Hon’ble Railway Minister dated 16th February, 2009 which may please considered sympathetically and on humanitarian ground.

 

          Sir, it is pity that M.o.S. Railway Shri Naranbhai Rathwa has stated in one of the public function at Ahmedabad on 14th February, 2009 that the State Government is responsible for injustice to Gujarat in Railway budget (as per the news paper report).  Sir, I wonder how State government can be hold responsible for the injustice to the Gujarat State for their demands for railway.  It is only and only railway authorities are responsible for doing justice or injustice to any particular State or area.

 

          Sir, even though tall claims by Hon’ble Railway Minister for the betterment of railway management, Sir it is a fact that operation ratio of railway has declined to 12% points and earnings of railway started falling from Sept. 2008 and whatever the new trains announced in the present railway budget out of these 43 new trains are mostly in the East.

 

          In this railway budget we don’t find any mention about security even though the security and safety should be considered top of all.

 

          Sir, in this railway budget we do not find mention of any new mega project.

 

          Sir, in this railway budget Hon’ble Railway Minister has not made any mention of fulfillment of his previous promises because as promised double decker passenger trains has not seen the light of the day.

 

          Sir, we don’t know what has happened to Earthen cups (Kullhar) and Khadi blankets as the same was promised by Hon’ble Railway Minister.

 

          Sir, it is a pathetic condition for the railway passengers to pay more for getting Tatkal tickets and also number of seats available in non-tatkal regular categories reduced and similarly though cushion seats in all general class bogies promised but not delivered.

 

          Sir, Hon’ble Railway Minister has himself admitted that quality of food offered on trains deteriorated.

 

*SHRI P. RAJENDRAN (QUILON): I thank you for giving this opportunity to express my views on Railway Budget 2009-10. I hereby place my protest on record against the attitude of Ministry of Railways towards the States like Kerala. I do plead through you Sir, the request included in the memorandum submitted by Government of Kerala and the MPs from Kerala may be considered for implementation, and may be announced when the Hon’ble Minister replies.

          The demands include, increasing the frequencies of Rajdhani Express and Sampark Kranti Express trains to Kerala more trains to Bangalore, Mumbai, Chennai and Kolkata viz Vizag as desired by Keralities in Visakhapatnam, completion of doubling, electrifying and gauge conversion work in Kerala and better amenities and safety measures in trains to Kerala and improvement of Railway stations. I do remind my earlier request to have a stop at Kollam for Rajdhani Express.

          Congratulating the Hon’ble Minister for the gains, I will request him to consider the needs of Kerala urgently.

         

 

 

 

 

 

 

 

* Speech was laid on the Table.

 

श्री सीता राम यादव (सीतामढ़ी)  : माननीय सभापति महोदय, आज मैं सदन में माननीय रेल मंत्री, श्री लालू प्रसाद जी द्वारा प्रस्तुत रेल बजट 2009-10 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। रेल मंत्री जी के पांचवे ऐतिहासिक रेल बजट पर बोलने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने लगातार पिछले पांच वर्षों में रेलवे का जो कायाकल्प किया है और साथ ही साथ किराए भी प्रतिवर्ष कम करते गए हैं, यह एक सराहनीय कार्य है। वैसे तो रेल बहुत बड़ा महकमा है और शायद यह भारत सरकार का सबसे बड़ा मंत्रालय है, जिसमें लगभग 14 लाख कर्मचारी कार्य करते हैं और इतने ही अवकाश प्राप्त कर्मचारी हैं। वैसे कोई भी कार्य बिना कर्मचारियों के सहयोग से आगे नहीं चल सकता है, किन्तु हमारे मंत्री जी की सूझबूझ, उदार नीति और विज़न की बदौलत आज रेल मंत्रालय देश में ही नहीं अपितु दुनिया में शिखर पर है। जो विभाग पांच वर्ष पूर्व कंगाल हो गया था, उसने इन पांच वर्षों में लगभग 90,000 करोड़ रुपए का सरप्लस देने का काम किया।

          महोदय, हमारे शाहनवाज़ हुसैन साहब कह रहे थे कि नीतीश कुमार जी के बनाए मार्ग पर लालू प्रसाद जी आज इतने बढ़ गए हैं। मैं उनसे बताना चाहता हूं कि जिस समय नीतीश कुमार जी रेल मंत्री थे तो वे प्रत्येक वर्ष रेल किराया बढ़ाया करते थे। उसके बावजूद भी राकेश मोहन कमेटी ने रिपोर्ट दी कि रेलवे को प्राइवेट को सौंपा जाए। रेल मंत्री, माननीय लालू प्रसाद जी ने बराबर रेल में प्रतिवर्ष भाड़ा घटाने का काम किया और दुनियाभर की योजनाएं चलाने का काम किया। उसके बावजूद भी 90 हजार रुपए की आमदनी रेल मंत्रालय को दी। यह उनकी सूझबूझ है। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि जिस समय नीतीश कुमार थे, मैं सीतामढ़ी से आता हूं, उन्हें शायद मालूम होगा कि जगत-जननी माँ जानकी जी का सीतामढ़ी में अवतरण हुआ था। यह वह धरती है, जहां देश ही नहीं, अपितु विदेश के लोग अक्सर पर्यटन के लिए आते हैं। 56 वर्षों में किसी रेल मंत्री ने उस तरफ ध्यान ही नहीं दिया। 56 वर्षों में एक भी योजना सीतामढ़ी में नहीं चलाई गई। जब लालू जी मंत्री बने तो उनकी नज़र सीतामढ़ी पर गई। जो नेपाल बार्डर पर है, वहां एक ही नहीं, चार-चार रेल लाईनों की स्वीकृति दी और सीतामढ़ी से दरभंगा आमान परिवर्तन देश में ही नहीं, अपितु दुनिया में छ: महीने में कराने का काम किया। आज सीतामढ़ी के लोग देश के विभिन्न कोनों में जाते हैं। यह काम सिर्फ लालू जी ने किया।

          महोदय, इतना ही नहीं, आज वहां गरीब रथ भी चल रहा है। कई ट्रेनें सीतामढ़ी से चलती हैं, जहां से सीतामढ़ी के लोग जाते हैं। नीतीश कुमार जी हों या अन्य कोई भी मंत्री रहे हों, किसी ने भी हमें इन 56 वर्षों में एक भी योजना देने का काम नहीं किया, सिर्फ लालू जी ने यह काम किया। आज रेलवे लाईन सीतामढ़ी से सोनबरसा, जयनगर, निर्मली तक जा रही है। नेपाल के बार्डर के किनारे सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी इसे बनाया गया है और सीतामढ़ी से मोतीहारी, मुजफ्फरपुर आदि सब जगहों पर ट्रेनें देने का काम सिर्फ लालू जी ने किया, किसी अन्य ने नहीं किया। इसलिए सीतामढ़ी की तरफ से और उत्तर-बिहार के तमाम लोगों की ओर से हम लालू जी को हजारों-लाखों बार बधाई देते हैं। सीतामढ़ी के लोग पूरे देश में जाकर मजबूती से काम करते हैं। देश के विभिन्न कोनों में इसी तरह रेलवे का काम लालू जी ने किया है। सिर्फ सीतामढ़ी में ही नहीं, शाहनवाज़ हुसैन साहब भागलपुर के बारे में बोल रहे थे। लालू जी ने भागलपुर में कितनी ट्रेनें दीं, कई योजनाएं चलाई, उसकी चर्चा हुसैन जी ने नहीं की। पूरे देश को सभी जगहों से जोड़ने का काम सिर्फ लालू जी ने किया, किसी अन्य मंत्री ने नहीं किया। रेलवे एक ऐसा महकमा है, जो उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम, गरीब को पहुंचाने का काम सिर्फ रेल विभाग करता है, कोई अन्य विभाग नहीं। लालू जी का गरीबों की तरफ ध्यान है और वे समझते हैं कि गरीबों के लिए रेल ही एक ऐसा सफर है, इसलिए उन्होंने रेल को आगे बढ़ाने का काम किया। आज गरीब से गरीब आदमी उत्तर से दक्षिण कम भाड़े में पहुंच जाता है और अपनी रोजी-रोटी कमा कर अपने घर आता है। इतना ही नहीं, लालू जी ने पचासों-लाखों गरीब परिवार के लोगों को नौकरी देने का काम भी किया, किसी अन्य ने यह काम नहीं किया।   

          महोदय, हमारे एक साथी बता रहे थे, इसके बावजूद भी वे बजट में पैसा मांग रहे हैं। रेलवे इतना बड़ा विभाग है, जितने भी विभाग हैं, उन सबमें रेलवे सबसे महत्वपूर्ण विभाग है।[S72] 

अगर बजट में प्रॉवीजन नहीं किया गया है, तो जो करोड़ों आदमी रेलवे में सफर करते हैं। आम जनता की सुविधा और रेल के विकास के लिए अपनी आमदनी के अलावा बजट में पैसे का प्रॉवीजन तो करना ही चाहिए। इसलिए लालू प्रसाद जी ने जो अंतरिम रेल बजट प्रस्तुत किया है, उसका समर्थन करते हुए मैं कहना चाहता हूं कि इससे अच्छा अंतरिम रेल बजट कोई और नहीं हो सकता।

          महोदय, अभी हमारे एक साथी कह रहे थे कि रेल में दुर्घटनाएं बढ़ी हैं। मैं कहना चाहता हूं कि दुर्घटनाएं बढ़ी नहीं हैं। लालू प्रसाद जी के टाइम में दुर्घटनाएं कम हुई हैं। लालू प्रसाद जी के कार्यकाल में गरीब लोगों को राहत मिलने का काम हुआ है। इसके बावजूद भी हम उनसे मांग करना चाहते हैं कि सीतामढ़ी, बिहार प्रान्त या उत्तर बिहार को रेलवे में उसका वाजिब हिस्सा मिलने का काम कभी नहीं हुआ। बहुत से साथी कहते हैं कि बिहार को बहुत दिया गया है। मैं बताना चाहता हूं कि बिहार को उसके हिस्से के अनुपात के हिसाब से बहुत कम दिया गया है। पहले जब नीतीश कुमार जी रेल मंत्री थे, तब उन्होंने बिहार को उसका हिस्सा नहीं दिया, लेकिन जब से लालू प्रसाद जी रेल मंत्री बने हैं, तब से बिहार को उसका हिस्सा मिलने का काम शुरू हुआ है।

सभापति महोदय : सीताराम यादव जी, अब आप कनक्लूड कीजिए।

श्री सीता राम यादव  : सर हम कनक्लूड कर रहे हैं। हम मंत्री जी से मांग करना चाहते हैं कि सीतामढ़ी से नरकटिया जो छोटी लाइन है, जिस पर काम चल रहा है, वह एक साल में पूरा होना है। मेरा निवेदन है कि उसे युद्धस्तर पर किया जाए, ताकि उत्तर बिहार के लोग सीधे दरभंगा होते हुए दिल्ली तक पहुंच सकें। दूसरा काम सीतामढ़ी स्टेशन से पूर्व तथा पश्चिम आर.ओ.बी. की स्वीकृति दी जाए। जनकपुर रोड स्टेशन से सटे पूर्व एवं पश्चिम में आर.ओ.बी. पुल बनाया जाए। बागपट्टा में भी एक आर.ओ.बी. की स्वीकृति दी जाए। सीतामढ़ी से मुम्बई और चेन्नै के लिए नई एक्सप्रैस रेलगाड़ियां चलाई जाएं। जनकपुर रोड  से सुरसद तथा जनकपुर रोड  से चोरौत के लिए नई रेलवे लाइन की स्वीकृति दी जाए। पश्चिम चम्पारण जिले के अन्तर्गत बाल्मीकिनगर रोड रेलवे स्टेशन से हरनाटांड होते हुए गौनाहा स्टेशन तक रेल लाइन निर्माण हेतु सर्वे का काम कराया जाए। सीतामढ़ी मुजफ्फरपुर के बीच झपहा से मीनापुर तनियानी चौक, शिवहर, पिपराही, पूरनैया ससोला होते हुए ढेग स्टेशन तक नए सर्वे के काम की स्वीकृति दी जाए। दानापुर मंडलके बाढ़ स्टेशन के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में दो आर.ओ.बी. की स्वीकृति दी जाए। आरा से छपरा नई रेलवे लाइन का सर्वे कराया जाए। इसके अलावा घोघरडीहा से घोघेपुर नई रेलवे लाइन का सर्वे कार्य पूर्ण हो चुका है। नई रेलवे लाइन बिछाने की स्वीकृति हेतु अग्रेतर कार्रवाई की जाए। जय नगर से बिजलपुरा से वर्दीवास तक का सर्वे हो गया है। जय नगर-जनकपुर-बिजलपुरा-40 किलोमीटर आमान परिवर्तन स्वीकृत किया जाए। बिजलपुरा से वर्दीवास-30 किलोमीटर रेलवे लाइन स्वीकृत की जाए। नौहर से चूरू वाया तारानगर-80 किलोमीटर सर्वे कार्य के लिए स्वीकृति प्रदान की जाए। कोसीकलां से नन्दगांव और बरसाना तक का सर्वे कार्य स्वीकृत है। नई रेलवे लाइन हेतु आदेश दिए जाएं। सीतामढ़ी-भीट्ठामोर सुरसन-जयनगर-लखनियां-लौकहा-लौकही-188 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाई जाए।

          महोदय, मेरी उपर्युक्त मांगों के अलावा मंत्री महोदय को सब मालूम है कि कहां-कहां किस-किस प्रकार की जरूरत है। वह काम मंत्री महोदय अपने स्तर से कराएं। मंत्री जी जनता की सुविधा को देखते हुए कार्य करते हैं। इसलिए मैं माननीय मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत अंतरिम रेल बजट का समर्थन करता हूं और उन्हें धन्यवाद देता हूं।

                                                                                               

श्री हितेन बर्मन (कूचबिहार) : सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि गुवाहाटी से न्यू दिल्ली, गुवाहाटी से बेंगलौर और चेन्नै जो ट्रेन है, इस पर एक ही लाइन है, जो न्यू बोंगाईगांव से न्यू जलपाईगुड़ी है। यह लाइन अभी तक डबल लाइन नहीं हुई है। इस कारण गुवाहाटी से बोंगाईगांव रेल टाइम पर चल रही है। दिल्ली से बेंगलौर से न्यू जलपाईगुड़ी तक जो रेल चल रही है, वह ठीक टाइम पर चलती है, लेकिन मैन जलपाईगुड़ी से बोगाईगांव तक की रेल लाइन डबल नहीं होने के कारण लेट चल रही है। इस डबल लाइन का काम जल्दी से जल्दी समाप्त करना चाहिए। यह मेरी डिमांड है। [r73]  

          Mainagun-Jogikopa railway line is the main railway line but the work on this is going very slow.  I urge the Railway Minister to speed up the work and complete this line before the end of 2009.

          In my constituency, Dinhata sub-division is the biggest sub-division, where more than two lakh people depend on Alipore to Babulhat railway line but only two passenger trains are now servicing there.  I urge the hon. Minister to extend Uttar Ganga Express to new Cooch Behar and  to Bamanhat.  One of the Inter-City Express trains, Siliguri to Alipore, should be  extended up to Bamanhat. This is my submission to the Minister.

          In the district of Cooch Behar, a new railway survey has been completed –Haldighati to Chandrabandar – but the work has  not yet been started. Hence, I urge the Minister to sanction required amount to start the work. Cooch Behar Railway Station is a heritage station, but the Railway  Department has not taken initiative and sanctioned money for its development. I urge the hon. Minister to develop this heritage station, Cooch Behar.

Bamanhat station is located in one of the main remote areas.  It is the last station near the Bangladesh border. Now, I would like to place some demands for the betterment of the railway services in the stations – development of platform shed, fencing, booking counter facility, station link road, reservation facilities on trains.  I urge the Minister  to develop the Babulhat railway station immediately.

 

SHRIMATI P. SATHEEDEVI (BADAGARA): Sir, already three of our hon. Members from Kerala have spoken here.  I have already expressed the  way in which the State of Kerala is miserably neglected by the Railway Ministry in the Interim Budget.  We are very proud to hear from our hon. Minister  that the Indian Railways is running profitably and now the cash surplus is Rs.90,000 crore. Whenever a major public sector undertaking is running profitably, the benefit should reach each State where much contribution is there to the revenue of the Railways by way of transport charges and freight charges.  Kerala is contributing much to the revenue of the Indian Railways but the way in which the State of Kerala is neglected, we are very sorry to say that.  The attention of the Ministry should be drawn to the developmental works in Kerala for which we have been requesting for the past several years.  

          The geographical sprawl of Kerala is quite  different from the neighbouring State. Therefore, the demand for a separate zone is the need of the hour.  This budget is silent about this. Hence, I would  request the hon. Minister  to consider this long pending demand from the State of Kerala  and to set up a separate fund for the development of our State.

          Whenever we requested for the development of railway facilities in our State, the reply from the Minister is that since the doubling work is not over, it is not possible to allot new trains. [s74] 

21.00 hrs. [p75] 

Only a small portion of the line for doubling is remaining to be constructed, that is between Kannur to Valapattanam. In Kozhikode also, only a small portion is to be completed. Hence, in this Interim Budget itself, fund should be allotted to complete the doubling work so that the long pending demand for more trains is met.

          Another issue is electrification from Shornur to Mangalapuram. It is also pending. This demand for electrification is to be fulfilled. It is miserable to note that while providing 43 new trains, the State of Kerala is neglected. The long pending demand for an Inter-City Express between Mangalore and Kozhikode is a very genuine demand which will benefit the commuters of Malabar area.

          The State of Kerala is requesting for increasing the frequency of the Rajdhani Express from Delhi to Trivandrum at least to four days a week. There is only one train which is connecting Kannur to Yeshwanthpur. Considering the increase in the number of passengers, this train may be extended to Bangalore. Already, Shri Shivanna, our hon. Member spoke about the importance of Mysore. There is no railway connectivity from Tellichery, the Malabar area to Mysore. So, it is a long pending demand, which has been recognized by the Ministry at the presentation of the last Railway Budget. The survey work is already completed. It is before the Railway Board now. So, the Ministry should pay much attention to construct that work, which is there in the survey.

          The passengers all over the country are facing so many difficulties, threatening the safety of the passengers. Hence, sufficient steps have to be taken for securing safety of passengers by providing more RPF with sufficient infrastructure facilities. In the Railway Station of Vadagara, already RPF is there, but they are not capable of reaching the Railway Station, since there is no transport facility for them. They have to come from Calicut to Vadagara. So, sufficient infrastructure facility should be provided for the RPF and the security of the passengers should be taken care of. The grievance of the State of Kerala, in this aspect has to be considered properly.

MR. CHAIRMAN : You can lay the rest of your speech.

SHRIMATI  P. SATHEEDEVI : I request that all these demands may be considered.

          Sir, I lay the rest of the my speech on the Table of the House.

*: The interim Railway Budget presented by the Railway Minister has really neglected the State of Kerala.  It has not reflected the country’s federal structure.  The State of Kerala is contributing much to the revenue of Indian Railways by way of passenger fare and freightage charges.  Sir, the Minister is always saying that the Indian Railways is becoming more profitable day by day.  Now it is said that Rs. 90000 crores cash surplus is there.  Sir, the benefit of the major profitable public sector undertaking should be distributed in such a way to assist the developmental work in those state which is contributing much to that profit.  But it is miserably to note that that consideration is not given to the State of Kerala.

          Sir, it is the long pending demand from the State for the formation of a peninsular railway zone with headquarters in Kerala. According to Railways, zones are not carved out on regional considerations but on the basis of workload accessibility, geographical sprawls etc. Sir, it is a well-known fact that the needs and geographical sprawl of Kerala state are quite different from the neighbouring states.  Therefore, the demand for a separate zone is the need of the hour. This budget also is silent about this. Hence, I request the Minister to consider this and do take steps to implement the same.

          For the development of the Railways the doubling work of Railway lines should be completed.  The doubling work between Kannur to Valapattanam and a small portion at Kozhikode has to be completed.  Sufficient funds should be allotted to the said work.  The electrification of lines is yet another issue that the railway is facing in Kerala.  The major section left out in electrification is in between Shornur and Mangalore.  Hence, necessary financial support may be granted for the completion of electrification.

Alapuzha is yet another issue that should be taken up.

 

*….* This part of the speech was laid on the Table

          It is very miserable to note that while providing 43 new trains Kerala is neglected.   The long pending demand for an inter-city express between Mangalore-Kozhikode is a very genuine demand to benefit the commuters of Malabar area. The demand for new trains from TVM to Mumbai and TVM-New Delhi via Konkan and TVM Bangalore via Managlore and Coimbatore is another long pending demand.

          The State of Kerala is requesting for increasing the frequency of the Rajdhani Express to 4 days in a week.  There is only one train which is connecting Kannur to Yeswanthapur.  Considering the increase in the number of passengers especially students and workingwomen to the city of Bangaluru this train may be extended to the city of Bangalore by making it a daily train.   The commuters from Kerala to Chennai is increasing day by day and it has become very difficult to get seats in the exiting trains and the frequency of the Train No. 2685-Chennai Mangalore super fast may be increased and it also may be made a daily train.

          Sir, the passengers all over the country are facing so many problems threat ending their safety.  Hence, sufficient steps has to be taken for securing the safety of the passengers by providing more R.P.F. with sufficient infrastructure facilities. 

          The Ministry had announced the survey for a new line in Between Mysore and Tellichery.   The survey report is before the Railway Board.  Hence, the said report may be considered favourably and steps should be taken to start the work of the said railway line and fulfill the long dream of the people of Kerala.* 

MR. CHAIRMAN: The allotted time is already over. But I have a list of 15 more hon. Members to speak on this. If the House agrees, the time of the House may be extended by one hour.

          If the House agrees, we can do it; I am just taking the sense of the House.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: If the hon. Members take only 2-3 minutes, then we can finish it today, and tomorrow the hon. Minister can reply.

रेल मंत्री (श्री लालू प्रसाद) :  मेरा आग्रह है कि आप लिखित रूप में दे दीजिए, तो ज्यादा आथेंटिक है, वह रिकार्ड में भी रहेगा, आपका प्वाइंट भी कवर हो जाएगा।   

सभापति महोदय : माननीय सदस्य, माननीय रेल मंत्री जी ने भी आप लोगों से अनुरोध किया है और मैं आसन से यह रिक्वैस्ट करता हूं कि यदि आप दो-दो मिनट लेंगे, तो जल्दी हो जाएगा और जो रेस्ट आफ स्पीच है, उसे टेबल पर ले कर दीजिए। जो माननीय सदस्य ले करना चाहते हैं, वह अपनी पूरी स्पीच ले कर सकते हैं। [p76]        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

श्री राकेश सिंह (जबलपुर) :  सभापति महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि अभी माननीय लालू यादव जी ने जो अंतरिम बजट पेश किया है, उससे एक बात साबित हो जाती है कि एक बार अगर वाह-वाही लूटने का रोग किसी को लग जाए, तो देश हित भी नगण्य हो जाता है और समाज हित भी नगण्य हो जाता है और ऐसी स्थिति देश के लिए कभी भी ठीक नहीं होती। ऐसी ही स्थिति का सामना आज रेल विभाग को करना पड़ रहा है। पिछले लगभग पचास वर्षों में भारतीय रेल मानक संस्थान ने माल गाड़ियों में लदान के लिए एक निर्धारित क्षमता तय की हुई है। उनमें लगभग पचास सालों में इस स्थिति में हमारे पास जो पटरियां और वैगन उपलब्ध हैं, उन्हें नुकसान न पहुंचे, उसे ध्यान में रखते हुए लगभग 58 टन क्षमता तक उसे लाकर रखा। लेकिन दुर्भाग्य से आज हमें जिस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है कि रेलवे को लाभ में दिखाया जा सके, इसके लिए जहां इंजीनियरों को 58 टन तक लाने में वर्षों लग गए, वहां बिना किसी तकनीकी सुधार के मात्र चार वर्षों में माननीय लालू जी ने उसकी 68 टन तक की क्षमता बढ़ाकर रख दी। इससे आने वाले समय में हमारे सामने बड़ी खतरनाक स्थितियां आने वाली हैं। मैं कहना चाहता हूं कि अधिक लदान के कारण जिस तरह की स्थितियां पैदा हो रही हैं, उससे वैगनों को नुकसान हो रहा है और पटरियों को भी नुकसान हो रहा है। वैगनें एक ओर झुककर चल रही हैं, उनके एक्सेल टूट रहे हैं, वे क्रैक होकर गिर रहे हैं।…( व्यवधान)

सभापति महोदय :  आप सुझाव दे दीजिए।

…( व्यवधान)

श्री राकेश सिंह :  दूसरी ओर पटरियों के ऐलाइनमैंट भी गड़बड़ हो रहे हैं, पटरियां फैल गई हैं, उनमें जगह-जगह क्रैक हो रहे हैं। मैं रेल मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि आज आपके जितने भी पीडब्ल्यूआई और गैंगमैन हैं, वे सारे इन क्रैक्स को वैल्डिंग करने में लगे हुए हैं, उनके रूटीन मेनटेनैंस के काम भी नहीं हो पा रहे हैं। इसलिए यह जो स्थिति है, यह आने वाले समय में देश के रेल तंत्र को प्रगतिशील रेल तंत्र न बनाकर पतनशील रेल तंत्र की ओर लेकर जा रही है। मैं माननीय रेल मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि पिछले दिनों हबीबगंज में जो डीरेलमैंट हुआ था, आपकी जानकारी में होगा कि वह केवल इसीलिए हुआ क्योंकि वहां की पटरियों में क्षमता से अधिक लोड लगातार हो रहा था।…( व्यवधान)

वहां का पूरा यार्ड नष्ट हो गया, पूरी लाइनें नष्ट हो गईं, सारे सिगनल तहस-नहस हो गए और मेरी जानकारी के मुताबिक वहां लगभग पांच दिनों तक पूरा ट्रैफिक बाधित रहा, हजारों यात्रियों ने अपने टिकट कैंसिल करवा दिए। अगर पूरे नुकसान को जोड़ा जाए, तो रेलवे को लगभग पचास से सौ करोड़ रुपये का नुकसान उससे हुआ है।…( व्यवधान)

सभापति महोदय : आप अपनी बाकी स्पीच ले कर दीजिए।

श्री राकेश सिंह   : सभापति महोदय, यह बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है।…( व्यवधान)

सभापति महोदय : हमने सदन से राय ली है।

…( व्यवधान)

सभापति महोदय : सबको दो मिनट बोलने का समय दिया जाएगा और बाकी की स्पीच ले कर सकते हैं।

…( व्यवधान)

श्री राकेश सिंह  : मैं थोड़ी सी बात बोलकर बाकी की स्पीच लिखित में दे दूंगा।…( व्यवधान)

सभापति महोदय :  दो मिनट बोलने के लिए सदन की सहमति है।

                                      …( व्यवधान)

श्री राकेश सिंह  : सभापति महोदय, एक किलोमीटर रेल लाइन को बिछाने में लगभग 13 करोड़ रुपये का खर्च आता है। एक वैगन 4 से 6 करोड़ रुपये का आता है। एक बोगी 25 से 30 लाख रुपये की आती है। पिछले एक साल में अधिक माल लदान क्षमता के कारण कितने अधिक वैगनों का नुकसान हुआ है, इसकी जानकारी रेल मंत्रालय…( व्यवधान)

सभापति महोदय : यदि आपके क्षेत्र की कोई डिमांड है तो उसे रख दीजिए।

                                                …( व्यवधान)

श्री राकेश सिंह :  माननीय महोदय, क्या यह कोई विषय ही नहीं हुआ? मैं आपके सामने इतना महत्वपूर्ण विषय बताना चाहता हूं, इतनी महत्वपूर्ण जानकारी देना चाहता हूं। जितना समय बाकी वक्ताओं ने लिया है, कम से कम उतना समय तो मुझे दीजिए।…( व्यवधान)

सभापति महोदय : आपकी पार्टी के और भी माननीय सदस्य बोलना चाहते हैं।

श्री राकेश सिंह :  ठीक है, मैं अपना लिखित भाषण दे दूंगा, लेकिन दो मिनट में अंतिम बात कहना चाहता हूं। रेल मंत्री जी, आपको ध्यान होगा कि आप जबलपुर आए थे। पूरे जबलपुर और महाकौशल की जनता ने आपका स्वागत किया था। आपने जबलपुर आने के बाद लोगों की जो कठिनाइयां देखी थीं, जो ब्रॉडगेज परियोजना जबलपुर से बालाघाट के बीच की है, आपने मंच से घोषणा की थी कि इस परियोजना को दो साल के भीतर पूरा कर देंगे। एक साल पूरा हो गया और हमें आने वाले पांच सालों में भी वह परियोजना पूरी होती दिखाई नहीं दे रही है। दूसरी बात आपके सामने जबलपुर से मुम्बई की ट्रेन की रखी थी। आपने वहां आश्वस्त किया था कि रेल बजट में इसकी घोषणा कर देंगे।[N77] 

  हम आपको धन्यवाद देना चाहते हैं कि रेल बजट में आपने जबलपुर-मुम्बई के लिए गरीब रथ की घोषणा भी की। वह 20 तारीख से चालू होने वाली थी, लेकिन वह चालू नहीं हुई और उससे पहले ही आपने उस ट्रेन को जबलपुर के  स्थान पर इलाहाबाद तक कर दिया।   आम तौर पर कोई रेल मंत्री जब कहीं घोषणाएं  करते हैं, तो उनका सम्मान भी करते हैं और उन घोषणाओं को पूरा भी करते हैं। हमारी आपसे प्रार्थना है, आने वाले समय में हो सकता है कि आप उस ट्रेन को इलाहाबाद से पटना तक कर दें। हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है। आप हमें जबलपुर के लिए कोई और ट्रेन दे दें, लेकिन जबलपुर पश्चिम मध्य रेल जोन का मुख्यालय है। वहां से मुम्बई के लिए हमने एक सीधी ट्रेन की मांग की थी। वह ट्रेन भी आपने हमसे छीन ली। जबलपुर की जनता, महाकौशल की जनता इसका कारण जानना चाहती है कि आखिर ऐसी परिस्थिति का  निर्माण क्यों हुआ?  …( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद  :   हम किसी की कोई ट्रेन नहीं छीनते।

श्री राकेश सिंह   : आपने हमारी ट्रेन छीन ली। …( व्यवधान)

सभापति महोदय:   आपका जो शेष भाषण है, उसे आप ले कर दीजिए।

श्री राकेश सिंह   :   लालू जी, मेरा आपसे आग्रह है कि जो आपकी घोषणा थी, उसे आप पूर्ववत् रखें। ट्रेन जबलपुर से ही होकर मुम्बई के लिए जाये। …( व्यवधान)

सभापति महोदय : आप अपना शेष भाषण ले कर दीजिए।

…( व्यवधान)

श्री राकेश सिंह  :   माननीय महोदय, मैं अपनी बात समाप्त कर रहा हूं। वैसे तो हमारी बहुत सारी मांगें थीं। जबलपुर से कोलकाता, जबलपुर से छपरा-सीवान होते हुए पटना, जबलपुर से देहरादून, जबलपुर से अमृतसर के लिए ट्रेन की मांग थी, लेकिन उनमें से कोई भी मांग अब मैं आपके सामने नहीं कर रहा हूं, क्योंकि ऐसा लगता है कि देश की जनता को बहुत अधिक निराशा हुई है। मेरे क्षेत्र की जनता को भी आपसे बहुत अधिक निराशा हुई है। वैसे भी आप अब कोई नयी घोषणा नहीं कर सकते। सरकार

भी जाने वाली है और हमें यह विश्वास है कि आने वाले समय में शायद आप लोग यहां नहीं रहेंगे। …( व्यवधान) लेकिन आपने जो पूर्व में घोषणाएं की थीं, यदि उन पर ही आप अमल कर देंगे, तो कम से कम मेरे क्षेत्र की जनता आपकी आभारी होगी।

          माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

            महोदय, शेष भाषण मैं अपना सभा पटल पर रखा दूगां।                                                        

  *  अभी जो अंतरिम बजट लालू जी ने प्रस्तुत किया है उससे यह साबित हो गया है कि झूठी वाहवाही लूटने का रोग जब किसी को लग जाता है तो उसके सामने समाज हित और देश हित नगण्य हो जाता है और व्यक्तिगत हित सर्वोपरि हो जाता है और ऐसा व्यक्ति जब देश के किसी महत्वपूर्ण पद पर बैठा हो तो ऐसी स्थिति देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होती है।

          यही स्थिति आज देश के रेल विभाग की हो रही है। गौरवशाली रेल विभाग को ग्रहण लगता जा रहा है। यदि अभी भी हम नहीं जाग तो देश में रेल का भविष्य अंधकारमय हो जायेगा।

          माननीय महोदय, मालगाड़ियों में लदान की एक निर्धारित क्षमता होती है। वर्षों तक रेल डिजाईन मानक संस्थान, लखनऊ ने प्रयास कर बॉक्स-एन वैगन की क्षमता को 58 टन तक की क्षमता के लायक बनाया ताकि रेल पटरियों व वैगनों को नुकसान न हो । जहां यह करने में भारतीय रेल को 50 वर्ष लग गए वहीं बिना किसी तकनीकी सुधार के रेलमंत्री लालू यादव जी ने पिछले 4 वर्षों में वैगनों में 68 टन माल लदान करने के तानाशाही फरमान जारी कर दिए ताकि बिना किराया बढ़े रेल को लाभ में दिखाया जा सके। लेकिन महोदय लालू जी ने इस बात पर पर्दा डालने का प्रयास किया कि क्षमता से अधिक माल लदान करने पर भारतीय रेल को किन दुष्परिणामों का सामना करना पड़ेगा।  जिन अधिकारियों ने इसके खिलाफ आवाज उठाने का प्रयास किया उन्हें धमकाकर चुप कर दिया गया।

          माननीय महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन को बताना चाहता हूं कि क्षमता से अधिक माल ढोने के कारण खतरनाक स्थितियां निर्मित हो रही हैं।  एक ओर जहां वैगन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं एक तरफ झुककर चल रहे हैं ।  अधिक एक्सल लोड के कारण वैगनों के एक्सल कमजोर व क्रेक होकर गिर रहे हैं।  वहीं दूसरी ओर पटरियों पर भी बहुत बुरा असर पड़ रहा है। पटरियों की वहन क्षमता भी तय है किन्तु अधिक भार के कारण पटरियां फैल रही है और  जगह-जगह से कमजोर होती जा रही हैं। फ्रैक्चर बढ़ते जा रहे हैं। आज सारे के सारे पी.डब्ल्यू.आई. और गैंगमैन पटरियों के फ्रैक्चर की वेल्डिंग करने में लगे हैं लेकिन पटरियों का एलाइनमेंट बिगड़ता जा रहा है। इन सबसे बार-बार डिटेलमेंट की स्थितियां बन रही हैं।

          माननीय महोदय , मैं रेलमंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि क्या पिछले दिनों भोपाल के हबीबगंज में हुए डिटेलमेंट ने रेलवे को करोड़ों रुपए का नुकसान नहीं पहुंचाया है जिसमें 45 घंटे से ज्यादा समय तक यातायात बंद रहा था।  सारी गाड़ियां मार्ग बदलकर निकाली गयी। हजारों यात्रियों ने यात्रा रद्द की। हबीबगंज का पूरा रेल इफ्रास्ट्रक्चर तहस-नहस हो गया। पांचों लाइनें खत्म हो गई सारे क्रास ओवर तहस-नहस हो गए। सारे सिगनल नष्ट हो गए।   यदि इस डिटेलमेंट के कारण रेलवे के सभी नुकसान को जोड़

 

*….* This part of the speech was laid on the Table

लिया जाए तो लगभग 50 से 100 करोड़ रुपए का नुकसान रेलवे को हुआ है।  यह तो एक उदाहरण मात्र है। महोदय, वास्तव में एक किलोमीटर लाईन बिछाने पर लगभग 13 करोड़ रुपए खर्च आता है।  एक बोगी 25 से 30 लाख रुपए की होती है। देश में अधिक लदान के कारण जो बोगियां खराब हुई है या लाईनें क्षतिग्रस्त हुई हें वे सब जोड़ने पर रेलवे की आंतरिक स्थिति सामने आ जाएगी।  एक इंजन 4 से 6 करोड़ रुपए का आता है। पिछले एक साल में अधिक लदान के कारण 103 इंजन खराब हुए हैं इन सब पर विचार करने पर यह सामने आता है कि भारतीय रेल किस दिशा में जा रही है।

 

          माननीय महोदय , देश में रेल के लगभग सभी पुलों पर अधिक क्षमता की ढुलाई के कारण विपरीत असर पड़ रहा है। पुल कमजोर होते जा रहे हैं और यदि यह सही नहीं है तो रेल मंत्री जी बतायें कि क्यों 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली गाड़ियां पुलों पर 30 से 45 किलोमीटर की रफ्तार से चल रही हैं।

 

          माननीय महोदय, वाहवाही लूटने के चक्कर में देश को बुलेट ट्रेन का सपना दिखा रहे हैं जिनकी गति 300 किलोमीटर प्रति घंटा या अधिक है।  लालू जी देश को बताएं कि आज भी देश में बड़ी संख्या में बिना फाटक की रेल क्रासिंग है, पुल हैं, सुंग हैं और खराब होती पटरियां हैं। इन पर लालू जी आपकी बुलेट ट्रेन कैसे चलेगी। यह चल सकती थी यदि लालू जी ने एनडीए सरकार के समय पर नीतिश जी की योजनाओं पर ध्यान दिया होता। उस समय योजना बनायी गयी थी,  पूरे देश में तीसरी लाईन बिछाने की जिसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

 

          लालू जी ने एक और मजाक देश की जनता के साथ किया है।  सवारी गाड़ियों में 9 बर्थ बढ़ाकर जिन गाड़ियों में ये बर्थ बढ़ाई गई है उनके यात्री इस बर्थ को लालू बर्थ कहते हैं और आतंकित रहते हैं कि उन्हें इस बर्थ में यात्रा न करनी पड़े। मैं चुनौती देना चाहता हूं  लालू जी को कि वे इस बर्थ में यात्रा करके दिखायें और फिर बतायें कि रेल की यात्रा को आपने कितना सुविधाजनक बनाया है।

          महोदय, देश में अभी तक यही परम्परा है कि यदि कोई मंत्री कहीं कोई घोषणा करता है तो उसे झुठलाता नहीं है, किंतु लालू जी तो अपनी ही घोषणाओं को झुठला रहे हैं।

 

          पिछले वर्ष लालू जी जबलपुर आए थे। जबलपुर वासियों की मांग पर घोषणा करके आए थे कि जबलपुर गोंदिया ब्रॉडगेज को दो वर्षों में पूरा कर दिया जाएगा किंतु देश की अत्यंत महत्वपूर्ण यह योजना आगामी 5 वर्षों में भी पूरी होती दिखायी नहीं देती।

          पिछले समय में जबलपुर में बड़े आंदोलन हुए थे।  जबलपुर से मुम्बई सीधी ट्रेन के लिए पिछले बजट में लालू जी ने इसकी घोषणा भी कर दी थी।  अभी 20 फरवरी को इसका शुभारंभ होना था परन्तु अभी यह ट्रेन चल भी नही पायी और इस अंतरिम बजट में इस गरीब रथ को जबलपुर के स्थान पर इलाहाबाद से चलाने की घोषणा हो गयी। शायद कुछ दिनों बाद इसे इलाहाबाद के स्थान पर पटना से शुरू कर दिया जायेगा।  क्या रेल मंत्री जी कारण बता सकते हैं कि ऐसा क्यों किया गया?  क्यों जबलपुर सहित पूरे महाकोशल की जनता की भावनाओं से खिलवाड़ किया गया।

 

          महोदय, परम्परा यह है कि प्रत्येक रेल बजट पर चर्चा के समय सांसद अपनी मांगें सदन में रखते हैं।  पिछले वर्षों से लगातर मैं अपनी मांगें रखता आ रहा हूं , किंतु इस बार यहीं कहूंगा कि यू.पी.ए. सरकार और लालू यादव जी आपसे अब देश की जनता को कोई उम्मीद नहीं बची है। अब जनता आपके जाने का इंतजार कर रही है।

          अब कोई नई घोषणाएं तो आप कर नहीं सकते, किंतु यदि जबलपुर के संबंध में अपनी पूर्व की घोषणाओं पर ही आप अमल कर दें तो मेरे क्षेत्र की जनता आपकी आभारी रहेगी।  *

श्री लालू प्रसाद  :   महोदय, हर बात का जवाब उत्तर में नहीं दिया जा सकता। लेकिन राकेश जी को जानकारी रखनी चाहिए और केवल अंदाजे पर नहीं बोलना चाहिए कि करोड़ों रुपये वैगन का दाम यानी चार करोड़ रुपये वैगन का दाम है। वैगन का दाम अधिकतम 20 लाख रुपये होता है।

श्री राकेश सिंह  :   मैंने वैगन का दाम 25 से 30 लाख रुपये बोला है। …( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद  :   आप अपनी बात फिर करैक्ट करिए। मैं जहां भी गाड़ी घोषित करता हूं वहां मैं किसी पार्टी के साथ भेदभाव नहीं करता। आप पहले यह करैक्ट कर लीजिए। आपको  ऐलर्ट रहना चाहिए। जब हम लोगों को चुनाव में जाना है तब आपको याद पड़ रहा है कि हम यह कर रहे हैं। …( व्यवधान) हम कोई गाड़ी नहीं छीनते हैं। …( व्यवधान)

श्री राकेश सिंह :   आपने हमारी गाड़ी छीन ली है। …( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद  :   यह गलत बात है। आप कब तक हमारे ऊपर इल्जाम लगायेंगे कि हम गाड़ी छीन लेते हैं। जो घोषित गाड़ी होगी, उस घोषणा के एक साल के अंदर उस गाड़ी को चलाना है। अगर घोषणा होगी, तो वह गाड़ी चलेगी। इलाहाबाद जाने वाली अलग गाड़ी है। हम  इस बात को दिखायेंगे। …( व्यवधान)

सभापति महोदय :  माननीय मंत्री जी ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है इसलिए अब कोई बहस का मुद्दा ही नहीं है।

MR. CHAIRMAN : Nothing, except the speech of Chowdhury Vijendra Singh, will go on record.

(Interruptions) …*

 

 

 

 

 

 

 

 

            * Not recorded.

चौधरी विजेन्द्र सिंह (अलीगढ़)  :  सभापति महोदय, मैं आपके आदेश का अच्छे सा अनुपालन करते हुए  आपको धन्यवाद  देना चाहता हूं कि आपने रेल बजट की लेखानुदान पर मुझे बोलने  का मौका दिया है। माननीय लालू जी की तारीफ जितनी करें, उतनी ही कम है। इस सदन में ही नहीं, देश और दुनिया में आज इस बात की चर्चा है कि पांच साल तक लगातार रेल बजट पेश करते हुए आज तक रेल के किराये- भाड़े में वृद्धि नहीं हुई। लोग इससे आश्चर्यचकित हुए कि लालू जी किस तरीके का रेल बजट बनाकर तैयार करते हैं। इसमें वाकई ही रिसर्च करनी होगी। यहां तो छोड़िये, ऑक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी में भी माननीय लालू जी पर रिसर्च की जा रही है। मैं लालू जी को धन्यवाद देना चाहता हूं। मैं अपने क्षेत्र की मांग सिर्फ दो मिनट में कहकर अपनी बात समाप्त करता हूं। माननीय लालू जी 22.10.2008 को मेरे बहुत निवेदन करने के बाद अलीगढ़ गये थे।

          सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से लालू जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि 22.10.2008 को लालू जी ने एक बहुत ही ऐतिहासिक विजिट हमारे अलीगढ़ में की थी। अलीगढ़ एक ऐतिहासिक स्थल है और उसका एक महत्व है। देश और दुनिया में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय  के माध्यम से जाना जाता है। बहुत से राष्ट्रों के लड़के वहां पढ़ते हैं। बिहार के दसों-हजारों लड़के हमारे यहां पर छात्र हैं। हमने जनहित में कुछ मांगें पब्लिक मीटिंग में की थी। माननीय लालू जी ने उस पर घोषणा भी की थी।[MSOffice78] 

          मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि अलीगढ़ हिन्दू-मुस्लिम तवज्जो और तालीम का शहर है। यह दिल्ली से मात्र 130 किलोमीटर दूर है। अलीगढ़ पर यात्रियों के भार को कम करने के लिए आप बहुत सारी योजनाओं से ट्रैफिक को चेंज करने की कोशिश कर रहे हैं। हमने आपसे मांग की थी कि कासगंज से खोजिया रेल लाइन का सर्वे कार्य आपने प्रारंभ करा दिया है। हमारी उम्मीद थी कि इस रेल बजट में उसको समाहित किया जाएगा। आज न सही लेकिन निकट भविष्य में हमारी सर्वे के मुताबिक इस रेल लाइन को जनहित में बजट में शामिल करने का कष्ट करें। कुछ ट्रनों का स्टॉपेज अलीगढ़ करने के बारे में हमने मांग की थी। संपर्क क्रंति एक्सप्रेस का स्टॉपेज वहां करने की आपने घोषणा की थी। राजधानी एक्सप्रेस के लिए आपने इन्कार किया था, लेकिन जब वहां की जनता ने यह कहा कि जब चार राजधानी ट्रेन्स कंटीन्युअस वहां से निकलती हैं तो लास्ट वाली राजधानी ट्रेन जो पटना से आती है, वहां के लिए बहुत डिमाण्ड हो रही थी। आपने उसके लिए घोषणा भी की थी, पेपरों में भी यह बात आई थी। हमारी मांगें तो केवल वही हैं, जिनमें कोई ज्यादा बजट पर भार नहीं आए। अलीगढ़ से बरेली रेल लाइन है, देश की आजादी के इतने साल बाद भी उस लाइन पर एकमात्र ट्रेन चलती है। पूरे देश में आज तक ट्रेन्स की संख्या बढ़ाई गयी लेकिन इस लाइन पर केवल ट्रेन, वह भी पैसेंजर ट्रेन है। उसका हमने सोनामई में स्टॉपेज की मांग की थी। हमें आशा है कि आप इसे कराने की कृपा करेंगे। दिल्ली अलीगढ़ लाइन पर चुअलपुर पैसेंजर का एक हॉल्ट बनाने की डिमाण्ड की गयी थी। हमारे जनपद के जनप्रतिनिधियों ने जब यह मांग की थी, तो आपने कहा भी था कि ये तमाम जायज मांगें हैं, इनको हम हर संभव पूरा करेंगे। आपने जो कहा था, उसको हम याद दिला रहा हूं।  आपके बारे में यह कहा जाता है कि आप जो कहते हैं, वह करते हैं। आप मुझे प्यार करते हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है। अलीगढ़ एक एतिहासिक स्थल है।

सभापति महोदय : ठीक है, अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए।

चौधरी विजेन्द्र सिंह : आपका विभाग बहुत ही महत्वपूर्ण विभाग है। रेल विभाग ने एक कीर्तिमान स्थापित किया है। 90 हजार करोड़ रूपए का लाभ देकर रेल विभाग को आपने वाकई सिद्ध कर दिया है कि इससे ज्यादा प्राफिट में कोई विभाग नहीं है। आपने आरओबी बनवाया है, मैं आपको धन्यवाद दे रहा हूं, आपकी तारीफ कर रहा हूं। आपने बहुत कुछ दिया है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि आपने माइनॉरिटी के लोगों के सामने वहां पर कहा था। अलीगढ़ माइनॉरिटी के मामले में देश और दुनिया के सामने तालीम और तवज्जो का सभागार है, रिसर्च सेन्टर है। अजमेर शरीफ हिन्दू और मुसलमान, दोनों का धार्मिक स्थल है। सिजदा करने के लिए हजारों लोग वहां जाते हैं। वहां के लिए एक ट्रेन चलाने के लिए आने वायदा किया था और यह घोषणा की थी कि उस एतिहासिक स्थल के लिए हम जरूर ऐसा करेंगे।

सभापति महोदय : ठीक है, आप अपनी बात कंक्लूड कीजिए। आपके लिए समय समाप्त हो गया है।

चौधरी विजेन्द्र सिंह   : मेरी बहुत जायज डिमाण्ड्स हैं, आप इन ध्यान दीजिए। विक्रमशिला ट्रेन के लिए हमने स्टॉपेज के लिए निवेदन किया है। विक्रमशिला, लिच्छवी, पटना राजधानी एक्सप्रेस, सम्पर्क क्रंति एक्सप्रेस गाड़ियों का वहां स्टॉपेज किया जाए।

सभापति महोदय : आप अपनी स्पीच सदन के पटल पर रख दीजिए।

चौधरी विजेन्द्र सिंह  : इसी के साथ मैं आपको हार्दिक बधाई और धन्यवाद देता हूं। मैं सोनिया जी और मनमोहन सिंह जी को बधाई देना चाहता हूं कि आपने पांच साल में विकास के बहुत से कार्य किए हैं और उम्मीद करता हूं कि आने वाले समय में आपकी यह मेहनत निश्चित रूप से आपको दोबारा सत्ता में लाएगी। …( व्यवधान)

 

SHRI C.K. CHANDRAPPAN (TRICHUR):  Sir, we are very happy that the Railways, as one of the biggest enterprises of the country, has made a huge profit of Rs. 90,000 crores. The congratulations go to the hon. Minister.  But at the same time, I am not repeating what other Members from Kerala have said. 

         Kerala is deeply hurt because of the kind of neglect that we have faced.  We do not deserve that.   So, I request the hon. Minister to kindly look into the memoranda that we have given.  Shri Vayalar Ravi, Shri Karunakaran and Shri Kurien, irrespective of parties, have signed it.  That is the voice of Kerala and that is the sense of feeling that we are deeply hurt.   I thought that I will take this opportunity to tell the Minister to[U79]  consider the feelings of Kerala.

          Now, I would like to mention one or two small things apart from this.  Since the Indian Railways have made huge profits, this is probably the time for the IRCTC to make some investments for the biggest pilgrim centres.  Some of the biggest pilgrim centres in the country are in Kerala, like Sabarimala and Guruvayoor.  I would like to request the Minister to consider having two IRCTC projects in these two areas.  Land is available and other facilities will be provided.

          The survey for Trichur-Kollangode line has been completed.  The present estimate that is with the Government is not true because it is based on the old realities that this line will not be profitable.  Since two big container ports are coming up and other industrial developments are taking place in Kerala, I think, this railway line will be profitable.  This will act as a bypass between Ernakulam and Kozhikode connecting Pollachi and Palakkad line.  Shri Velu will understand that. That will be a new rail line and that would be a link between Kerala and the southern part of Tamil Nadu.  So, I hope that line will be allowed as a new line. 

          When the Railways are making huge profits, passenger amenities should be improved more.  Many of our colleagues made a mention about the lack of security in the Railways.  So, security should be taken as an important aspect of good railway management and it should be provided for.  Then, food, especially in the long-distance trains should be clean, better in quality and should be cheaper in terms of price. … (Interruptions)

          In Kerala, a large number of RoBs are under construction.  But most of them are incomplete.  I would request the Railway Minister to make a time-bound programme so that all these RoBs are completed.  … (Interruptions)

          My last point is this.  In Trichur, which is my constituency, second entry has been inaugurated.  But the facilities that have been offered still remain either incomplete or not yet started.  So, I thought this opportunity will be taken to say that something should be done expeditiously so that the second entry will be a boon for the people there.  Thank you.                            

SHRI ABU AYES MONDAL (KATWA): Mr. Chairman, Sir, I support the Interim Railway Budget presented by the hon. Minister.  Supporting the Budget with grave concern, I would like to draw the kind attention of the hon. Minister to the fact that in the Budget there is no mention of the extension scheme of the doubling from Jirat to Katwa of Bandel-Katwal rail line which is almost a century old single one.

          In the last Railway Budget for 2008-09 the hon. Minister in his reply to a long debate and discussion in this august House told the House that the doubling scheme from Jirat to Katwa would be included in the Budget but unfortunately it was not included.  Furthermore, it is a matter of great sadness that this is absent in the present Interim Budget also.

          In order to protect the Samudragarh and Kalinagar railway stations on this railway, works for arrest of erosion of the banks of mighty Ganga river are going on.  More money needs to be allotted for total control of the erosion.   

          On the same railway line, computerised system for issuing passenger tickets at Ambika-Kalna station has been sanctioned almost a year ago, but it is not yet installed.[MSOffice80] 

          The gauge conversion works of Burdwan-Katwa railway line are yet to start.  The Government of West Bengal has already allotted a sum of Rs. 10 crore for starting of the work.  In an inaugural function at Katwa railway station, the hon. Minister on 30.6.2007 had announced that the project would be completed within two years, but the work is not yet started.

          Lastly, the proposed new train, viz., Puri-Katwa Express needs to be extended to Nabadwip Dham Station to serve the people better and for the pilgrims in particular.

          Sir, with these few words, I conclude my speech.

 

 

 

श्री निखिल कुमार चौधरी (कटिहार) :     सभापति महोदय, मैं आपको और अपनी पार्टी को अंतरिम रेल बजट पर, जो 2009-10 के लिए माननीय रेल मंत्री जी ने प्रस्तुत किया है, उस पर बोलने के लिए आपको बधाई देता हूं। मैं माननीय रेल मंत्री जी को तीन बार बधाई देता हूं। एक तो जो इन्होंने काम किये हैं, उनके लिए और जो इतने दिनों से मांग कर रहे हैं, उसके लिए और चुनाव से पहले कर दीजिए, उसके लिए बधाई देता हूं। …( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद :  हमने जो मांग की थी उसका क्या हुआ?

श्री निखिल कुमार चौधरी :  वह तो कंफिडेंशियल है। आपका और हमारा कंफिडेंशियल खुलना नहीं चाहिए। माननीय रेल मंत्री जी, आपने जो अंतरिम रेल बजट पेश किया, उसमें जहां जिसके लिए कुछ दिया है, उसकी सराहना होनी चाहिए और मैं उसकी सराहना करता हूं। आपने पांच दिन के लिए जो राजधानी 24-24 और 24-23 चलती थी, उसको 6 दिन के लिए कर दिया। लेकिन यह जानकर दुख हुआ कि जो स्पेशल राजधानी जो बृहस्पतिवार और रविवार, दो दिन चलती थी, उसको विदड्रा कर लिया। विदड्रा करने के लिए कष्ट है, उसको कांटिन्यू कीजिए, यह हमारी मांग है। एक दिन बढ़ाया है, उसके लिए धन्यवाद है। 

          दूसरे, आपने सीमांचल एक्सप्रेस को जुगवनी से नई दिल्ली के लिए चालू किया, वह सप्ताह में एक दिन चलती थी, उसे आपने पांच दिन किया है, उसके लिए बधाई। आपने रांची से वाया मालदा जो न्यू बुगाईगांव तक चलती थी, उसे आपने बढ़ाकर गुवाहटी तक कर दिया। हमने आपसे कहा था कि आपका कोई खर्चा नहीं है, कोई परेशानी नहीं है, शार्टेस्ट रूट है, बिहार के 15 स्टेशनों से होकर वह गाड़ी गुजरती है, कहीं उसका ठहराव नहीं है बारसोई एक बड़ा स्टेशन है, मैंने आपसे कहा था कि मालदा-कुमेदपुर होते हुए आप इसे कटिहार के रास्ते ले जाएं, तो कटिहार और अरहरिया के लोगों को एक ट्रेन मिल जाएगी। रांची के लिए कोई ट्रेन उधर के लोगों के लिए नहीं है। इसलिए केवल उसका रास्ता बदल दीजिए, वह ट्रेन जब उधर रुकती नहीं है तो आप उसे इस ओर होकर के ले जा सकते हैं। नई ट्रैक कटिहार से बारसोई तक बन गयी है।

          मेरा आग्रह है कि जिन ट्रेनों का आपने विस्तार कर दिया, कैपिटल एक्सप्रेस का विस्तार न्यूजलपाईगुड़ी तक हुआ था उसे आपने कामख्या-गुवाहटी तक कर दिया। स्थिति यह है कि पैसेंजर्स बढ़ गये हैं और बॉगी न बढ़े, तो बड़ा कष्ट का कारण है। हम आपसे मांग करते हैं कि उसमें थर्ड एसी का कोच बढ़ाया जाए और एक जनरल कोच उसमें बढ़ाया जाए। साथ ही हाटेबाजारे नीतीश जी के जमाने में बरौनी जाती थी, उसे आप सहरसा ले गये, एक अच्छा काम किया है। हाटेबाजारे कटिहार होकर जाती है, कोलकाता के लिए एक ट्रेन है। हाटेबाजारे को सहरसा तक तो बढ़ा दिया, लेकिन शयनयान का जनरल कोच को घटा दिया। मेरा आग्रह है कि 2 शयनयान तत्काल उसमें चुनाव से पहले जोड़े जाएं और एक थर्ड एसी भी आप उसमें जोड़ दीजिए।[r81]  

सभापति महोदय : आपके पास एक मिनट का समय और है, आपकी कोई और मांग है तो जल्दी बोलिए।

श्री निखिल कुमार चौधरी :  सभापति महोदय, मैं अपने क्षेत्र के लोगों को कह कर आया हूं और अपनी पत्नी को भी कह कर आया हूं। वह सात बजे से मुझे फोन कर रही थी कि आपका भाषण आया नहीं है। अब जरा पत्नी भी सुन ले और क्षेत्र के लोग भी सुन लें।

श्री लालू प्रसाद  :  आपकी धर्मपत्नी अगर अब टीवी देख रही होंगी, तो उन्हें पता चल जाएगा कि क्या सच्चाई है। वह आपको खोज रही होंगी कि इतनी देर तक आप कहां थे। आपने उन्हें कहा होगा कि रेल बजट पर चर्चा में हिस्सा लेना है। आप पर आपकी पत्नी शक क्यों कर रही हैं?

श्री निखिल कुमार चौधरी :  महोदय, उनकी प्रेरणा से ही मैं यहां बोल रहा हूं। मेरा कहना था कि आपकी कई गाड़ियां बरौनी में खड़ी रहती हैं। वैशाली एक्सप्रेस खड़ी रहती है, नई दिल्ली-लखनऊ एक्सप्रेस खड़ी रहती है और 16-16 घंटे खड़ी रहती हैं। कटिहार में करोड़ों रुपयों की लागत से पीट लाइन बनी हुई है, उसका शत-प्रतिशत लाभ मिलना चाहिए। उसका केवल 30 प्रतिशत उपयोग हो रहा है। मेरी मांग है कि उस ट्रेन को अगर आप कटिहार तक बढ़ा देंगे, तो कटिहार का बहुत लाभ होगा। कई ट्रेनें हैं, जो बंगाल से चलती हैं, लेकिन बिहार में रुकती ही नहीं हैं। उन ट्रेनों के ठहराव की मैंने मांग की है। एक मांग के बारे में मुझे लगता है कि चुनाव से पहले मंत्री जी करेंगे भी नहीं और कई लोगों ने तथा पप्पू यादव जी ने भी कहा कि आपने बड़ी लाइन का प्रस्ताव कटिहार से तेजनारायणपुर बलवाभटी तक दिया है। उस बारे में मैं कहना चाहता हूं कि मनिहारी से साहिबगंज तक कर दें, तो बहुत अच्छा होगा।

            महोदय,शेष भाषण मैं सभापटल पर रखता हूं।

         

  * मैं 2009-2010 के रेल बजट पर अपने विचार व्यक्त करता हूं।  महोदय, मैं निखिल कुमार चौधरी भाजपा सांसद कटिहार, लोक सभा क्षेत्र से आता हूं।  रेल बजट माननीय रेल मंत्री के द्वारा दिनांक 13.2.2009 को लोक सभा में प्रस्तुत किया गया।  माननीय रेलमंत्री के द्वारा लगातार पांचवीं बार लोक सभा में बजट प्रस्तुत करने के लिए मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं।  मुझे इस बात की खुशी है कि माननीय रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद यादव जी को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ है। पांच वर्षो में देश में रेल के चौमुखी विकास का दावा किया गया है।  खजाने के लाभ को 20 हजार करोड़ से इस बार 25 हजार करोड़ तक ले जाना वाकई देश के लिए खुशखबरी है। आपके माध्यम से माननीय रेलमंत्री से मेरा आग्रह है कि बजट में नई ट्रेन जहां बिहार को तेरह की संख्या में दी गयी है दूसरी तरफ कई ट्रेनों का विस्तार भी किया गया, सहरसा से गरीब रथ ट्रेन को चलाया जा रहा है अपितु कटिहार डिविजन से गरीब रथ ट्रेन को नही चलाया गया जो खेद का विषय है। व्यावसायिक एवं वाणिज्यिक दृष्टिकोण से कटिहार रेल मंडल का अपने आप में एक अलग स्थान है।  आपने नई गाड़ी के रूप में राधिकापुर से दिल्ली के लिए एक ट्रेन दी है, लेकिन ट्रेन के वाया का जिक्र नहीं किया गया है।  मैं आग्रह करता हूं कि राधिकापुर से नई दिलली के लिए जो नई ट्रेन दी गयी है उसको वाया कटिहार सोनैली, सालमारी होकर चलाया जाए साथ ही साथ सालमारी एवं सोनैली में इसका ठहराव दिया जाए। जिसका जिक्र मैंने वर्षों पूर्व रायगंज में माननीय मंत्री सूचना एवं प्रसारण विभाग , श्री प्रियरंजन दासमुंशी जी द्वारा उद्घाटन के समय किया था।  महोदय, कटिहार रेल मंडल

सामरिक दृष्टिकोण से और पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण रेल मंडल है।  बजट में कटिहार मंडल को सचमुच में अहमियत मिलनी चाहिए। महोदय, मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि वर्षो से कटिहार रेल मंडल के साथ पक्षपातपूर्ण निर्णय अनवरत लिया जा रहा है। कटिहार से खुलने वाली हाटे-बाजारे एक्सप्रेस को सहरसा तक विस्तारित किया गया एवं बाद में दो शयनयान डिब्बों को कम कर दिया गया जो कदापि उचित नहीं है।  यात्रियों को बर्थ नहीं मिल पा रहा है ऊपर से शयनयान के डिब्बों को कम किया जा रहा है। मेरा आग्रह है कि उक्त गाड़ी में कटिहार के लिए दो शयनयान कोच एवं एक वातानुकूलित थ्री टायर कोच जोड़ा जाए । कैपिटल एक्सप्रेस का कामाख्या तक विस्तार किया गया। इसमें भी शयनयान की संख्या वातानुकूलित कोचों की संख्या को नहीं बढ़ाया गया। महानंदा एक्सप्रेस को अलीपुरद्वार तक किया गया।  किंतु इसमें भी शयनयान और वातानुकूलित कोचो की संख्या को नही बढ़ाया गया।  माननीय रेल मंत्री जी को मैंने लगभग दो वर्ष पूर्व उक्त ट्रेन में शयनयान और वातानुकूलित कोचों

 

*…..* This part of the speech was laid on the Table

की संख्या बढ़ाने हेतु पत्र प्रेषित किया था किंतु उक्त विषयों में समुचित कार्यवाही नहीं की गयी।  महोदय, मैं कटिहार रेल मंडल के और कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को आपके माध्यम से रखना चाहता हूं। अलीपुरद्वार – रांची एक्सप्रेस (5761-5762) जो वाया मालदह होकर चलती है। यदि उक्त गाड़ी को बारसोई से  कटिहार लाया जाए एवं पुनः कटिहार से कुमैदपुर के रास्ते मालदह ले जाया जाये तो काफी कम समय एवं बहुत ही कम व्यय के साथ कटिहार-पूर्णियां-अररिया के यात्रियों को झारखंड के लिए एक गाड़ी मिल जायेगी एवं रेल के राजस्व में वृद्धि होगी जो राष्ट्रहित एवं जन कल्याणकारी होगा। ज्ञातव्य हो कि कटिहार से झारखंड जाने के लिए एक भी ट्रेन नहीं है। महोदय, कुछ ऐसी ट्रेनें हैं जिनका ठहराव ऐसे स्टेशनो पर नहीं है जहां से राजस्व की प्राप्ति तो होगी ही एवं यात्रियों को गंतव्य तक जाने में सहूलियत भी होगी। कंचनचंघा एक्सप्रेस 5657/5658 का ठहराव आजमनगर में किया जाना चाहिए। न्यू जलपाईगुडी से सियालदह सुपर फास्ट एक्सप्रेस 2503-04 का बिहार राज्य में कहीं ठहराव नहीं है इसलिए आग्रह है कि बारसोई और आजमनगर में इसको ठहराव दिया जाए !  इसके अलावा 5933-34, 5635-33, 5651-52, 5653-54, 5635-36, 2515-16, 2508-09 का ठहराव बारसोई रेलवे जंक्शन पर किया जाए।   महोदय, मैं आपको एक वर्ष पूर्व के बजट का स्मरण दिलाना चाहता हूं जिसमें जोगबनी-कलकत्ता एक्सप्रेस को नई गाड़ी के रूप में लिया गया था। मेरा आग्रह है कि उक्त गाड़ी को तत्काल कलकत्ता से कटिहार के बीच चलाया जाए।   महोदय, मैं कटिहार के उन यात्रियों के बारे में बताना चाहता हूं जो कि नेत्र रोग, हृदय रोग आदि के इलाज हेतु दक्षिण भारत क्षेत्र की यात्रा करते हैं। वर्तमान समय में मुजफ्फरपुर-यशवंतपुर एक्सप्रेस जो साप्ताहिक ट्रेन है कटिहार जंक्शन होकर गुजरती है।  कटिहार से शयनयान सीटों की संख्या इतनी कम रहती है कि मरीजों को स्थान नहीं मिल पाता है। मेरा आग्रह है कि मुजफ्फरपुर-यशवंतपुर एक्सप्रेस में शयनयान सीटों की संख्या में वृद्धि की जाए साथ ही इसके फेरे को भी बढ़ाकर सप्ताह में तीन दिन किया जाए।

 

           महोदय,  बरौनी जंक्शन में कुछ महत्वपूर्ण गाड़ियां अनावश्यक रूप से घंटों दर घंटों खड़ी रहती है जो राष्ट्र हित एवं रेल हित में नहीं है।  वैशाली एक्सप्रेस बरौनी जंक्शन में 16 घंटे 15 मिनट खड़ी रह जाती है।  बरौनी-लखनऊ एक्सप्रेस 5203-04 बरौनी में 12 घंटे खड़ी रहती है। बरौनी-जम्मूतवी एक्सप्रेस 5097-98 बरौनी में 23 घंटे 15 मिनट खड़ी रहती है।  क्यों नहीं उक्त गाड़ियों का विस्तार कटिहार जंक्शन तक किया जाए।  कटिहार जंक्शन के विषय में एक और बात उद्धृत करना चाहता हूं कि कटिहार में रेल लाइन का मात्र 30 प्रतिशत ही उपयोग हो पाता है।  यदि इन गाड़ियों का विस्तार कटिहार तक किया जाए तो रेल लाइन का सौ फीसदी उपयोग हो जाएगा जिससे रेल अपने औचित्य को जहां पूर्ण करेगा वहीं दूसरी तरफ कटिहार से अन्य गंतव्य स्थानों में जाने में यात्रियों को सुविधा होगी।  यह रेलहित, राष्ट्रहित एवं जनहित में होगा। कटिहार-मनिहारी-बलुआघट्टी तक के मीटर गेज लाइन को ब्रॉड गेज लाइन में परिवर्तन करने का प्रस्ताव है एवं इस लाइन का विस्तार वाया अमदाबाद भोलका रोड तक किया जाए। तत्कालीन रेल मंत्री श्री राम विलास पासवान के समय में इसके लिए सर्वे भी कराया गया था।

 

          मनिहारी एवं साहेबगंज के बीच सड़क सह रेलपुल की मांग बिहार एवं झारखंड की जनता पुराने समय से करती आ रही है। इस रेल पुल के निर्माण से झारखंड का बिहार एवं पूर्वोत्तर राज्यों से सीधा सम्बन्ध हो जाएगा।

 

·       कटिहार से जयनगर वाया दरभंगा एक्सप्रेस गाड़ी जो पूर्व में चलती थी इसका परिचालन पुनः प्रारंभ किया जाए।

·       दालकोला-तेलता के बीच हजियार हाल्ट का निर्माण होना चाहिए।

·       सोनेली-झौआ के बीच विशनपुर हॉल्ट पर सभी यात्री ट्रेन का ठहराव दिया जाए।

·       ट्रेन ठहराव 4083/84 महानन्दा एक्सप्रेस एवं 5610/5609 अवध-आसाम ट्रेन का ठहराव तेलता एवं सुधानी में दिया जाए।

·       राधिकापुर-सियालदह एक्सप्रेस 3145/3146 का ठहराव आजमनगर रोड स्टेशन पर दिया जाए।

·       कटिहार में गौशाला रेलवे गेट एवं संतोषी चौक रेलगेट पर ओवरब्रिज का निर्माण कराया जाए।

 

·       नई डी.एम.यू. ट्रेन का परिचालन पटना एवं कटिहार के सुबह 6 बजे करना जनहित में लाभप्रद होगा। कटिहार में रेलवे की 111 एकड़ जमीन खाली पड़ी हुई है। उक्त जमीन में रेलवे कर्मचारियों के लिए आवासीय भवन बनाने का प्रस्ताव है जबकि आवासीय भवन बड़े पैमाने पर कटिहार में उपलब्ध है।  रेल मंत्री से आग्रह है कि इस भूमि पर डीजल रेल इंजन के रख-रखाव एवं मरम्मती हेतु वर्कशाप लगाया जाये या रेलवे स्लीपर का भी कारखाना लगाना उचित होगा। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

श्री लालू प्रसाद : सभापति जी, भगवान ने इनके मुं से बुलवा दिया कि ये दोबारा हमसे फिर मांग करेंगे, इसका मतलब यूपीए की सरकार फिर सत्तारूढ़ होगी।  

श्रीमती तेजस्विनी गौडा (कनकपुरा)  : महोदय, मैं यहां से बोलने के लिए आपकी अनुमति चाहती हूं।

          Sir, while complimenting the UPA Government under the leadership of Dr. Manmohan Singh, our hon. Prime Minister with the able guidance of Shrimati Sonia Gandhi, our UPA Chairperson, I also compliment Shri Lalu Prasad, who is the eminent and the most successful Railway Minister of India, who is one of the national leaders, UPA Partner and also the leader of the RJD for his tremendous achievements and progress where India and the Railway, Railway and profit and Railway and progress are synonymous and these are the unbelievable words.

          यह सब कुछ हुआ है, इसे जादू नहीं कहते हैं, यह रिएलिटी है, इसलिए मैं भारत के गांव के लोगों की तरफ से लालू प्रसाद जी को रेल की प्रगति के लिए धन्यवाद देना चाहती हूं।         The people from the Harvard University invited one of the prominent leaders like Shri Lalu Prasad to give the lecture to know how to assess the economic stability. When the whole world is trembling with the economic recession, a person from the village background, a person from the poor background has been invited to give the lecture to know how to address economic stability. He raised the tricolour abroad. He has been invited to the MIT to give lecture. That shows how the Indian economy, how the Indian leaders can lead the globe today. I compliment him for his hard work and  success. भारतीय रेल की प्रगति के पीछे सिर्फ लालू जी का दिमाग ही नहीं है, बल्कि इनका दिल भी है। दिल के साथ-साथ गरीब लोगों के लिए प्यार है। इसी कारण रेलवे की प्रगति हुई है। इस प्रगति के कारण और गरीब लोगों को जो फायदा हुआ है, उसके कारण मुझे उम्मीद है कि लाखों-करोड़ों लोगों की सेवा करने के लिए हम फिर सत्ता में आएंगे।

          बिहार के बारे में बहुत सी बातें कही जाती हैं। मैं साउथ इंडियन हूं और कर्नाटक से बिलाँग करती हूं। मेरे और बिहार के बीच में एक रिश्ता है, जहां महावीर जी ने श्रवणबेल गोला में धर्म नीति और सौहार्द की बात कही थी। 10 वर्ष पहले मैं राजनीति में नहीं थी, मैं मीडिया में थी। मुझे लालू जी का इंटरव्यू लेने का मौका मिला। मैंने उनसे पूछा कि बिहार इतना सुंदर राज्य है, ऐतिहासिक राज्य है।[I82] 

 

बिहार में बौद्ध धर्म फैला हुआ है।  आप सौहार्द की बात कहते हैं, यह ऐतिहासिक युद्धभूमि है, न्याय भूमि है, धर्म भूमि है फिर भी बिहार क्यों पीछे है? तब लालू जी ने उत्तर दिया था कि बिहार पीछे इसलिए है क्योंकि लोग जब सत्ता में आए तब उन्होंने बिहार को टार्गेट किया। एक तरफ राजनीति और दूसरी तरफ भगवान ने प्राकृतिक आपदा दी हैं जैसे गंगा और कोसी में वर्षा के कारण बाढ़ आती है, के कारण बिहार पीछे रह गया मैं लालू जी को धन्यवाद देना चाहती हूं कि एक इंडियन होने के नाते बिहार को जो न्याय मिलना चाहिए था, वह दिया ताकि असमानता दूर हो सके। गरीब-अमीर, शहर और गांव के बीच की असमानता खत्म होनी चाहिए। इसलिए जो न्याय मिल रहा है वह सही है, मैं इसका समर्थन करती हूं। Indian Railways have generated cash surplus of Rs. 90,000 crore from the same organisation which was forced to pay dividend in 2001-02. इन्होंने कहा इंडिया शाइनिंग, हमने कहा फील गुड फैक्टर और कुछ लोगों को मौका मिला। लेकिन आपने क्यों नहीं प्रगति जिस तरह से लालू प्रसाद जी कर रहे हैं? During the tenure of Laluji, ambitious programmes like dedicated freight corridors have been sanctioned. The Eastern Dedicated Freight Corridor goes from Dankuni to Ludhiana via Kolkata and the Western Dedicated Freight Corridor goes from Dadri to Mumbai via Delhi. क्या इस देश में जो सुविधा है वह अमीर लोगों के लिए है? ऐसा नहीं होना चाहिए। जिसके पास पैसे नहीं है उनको भी यह सुविधा मिलनी चाहिए इसलिए लालू जी ने इंट्रोडय़ूज किया और आज हम नुकसान होने के बाद भी केयर नहीं करते हैं क्योंकि वे भी इंडियन हैं। लालू जी ने 14 गरीब रथ दिए, In just Rs. 585, the people can travel in Garib Raths.  24 रेलवे स्टेशनों का मॉडर्नाइजेशन हो रहा है। हमें पहली बार मौका मिला और  जैसा हमने यूएस और मैक्सिको में देखा उसी तरह लालू जी ने इस दिशा में कदम उठाया। इसके लिए मैं धन्यवाद देती हूं। मेरे भाई लाल सिंह जी, उधमपुर, कश्मीर के बारे में बहुत बात करते हैं, हर बात पर कहते हैं हम पांच साल से लड़ाई कर रहे हैं। New railway lines have been constructed between Udhampur and Jammu and from Anantnag to Baramulla. These lines will strengthen the unity and integrity of the nation. मैं राजनीति शास्त्र की छात्रा रह चुकी हूं और मुझे पता है जब तक कॉम्युनिकेशन नहीं होता, जब तक सुविधा नहीं मिलती तब तक मजबूती नहीं आती। Now passengers from any part of the country can dial the number 139 and get any information that they want regarding the Railways. In days of price rise, nobody can dare to reduce the fare which our Government has done. This shows that in spite of helping the poor, we can run this nation very efficiently.  हम हमेशा गरीबों के साथ रहें।

          महोदय, मैं कर्नाटक के बारे में डिमांड्स को सदन के पटल पर रखती हूं। लालू जी, कर्नाटक के लोग आपको बहुत प्यार करते हैं। आपने मुझे बोलने का मौका दिया इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देती हूं।

          शेष भाषण मैं सभा पटल पर रख  रही हूं।

 

 

*(A)                                          SURVEYS

  New Lines:  No new lines mentioned in this Budget for Karnataka

Gauge Conversion:  No Gauge Conversion mentioned in this Budget for Karnataka.

Doubling:  Hospet-Swamihalli

 

(B)                                  PASSENGER SERVICES New Trains

 

1.       Mumbai-Karwar Superfast (Tri-Weekly)

2.       Nizamuddin-Bangalore via Kacheguda Rajdhani Express (Tri-Weekly)

3.       Mysore-Yesvanthpur Express (Daily)

Extension of Trains:

1.       Jodhpur-Bangalore Express to Coimbatore

 

Increase in Frequency:

1.       No increase frequency of trains in Karanataka.

  FREATURES OF RAIL BUDGET 2008

  NEW TRAINS

(A)     Mechallipatnam-Bangalore (Tri-Weekly)

(B)     Yesvantpur-Jodhpur Express (Weekly)

(C)     Mysore-Nanjanagud Town Passenger (Daily) (after gauge conversion)

     
*…..* This part of the speech was laid on the Table
EXTENSION OF TRAINS

 

(A)     2877/2678 Bangalore-Coimbatore Express to Ernakulam

(B)     2691/2692 Chennai-Bangalore Express to Sri Sathyasai Prashanti Nilayam

(C)     571/572 Bangalore-Salem Passenger to Nagore (after gauge conversion)

(D)     356/357 Dharwad-Gadag Passenger to Bijapur

  INCREASE IN FREQUENCY

(A)     6513/6514 Bagalkot-Yasvantpur Basava Express from Tri Weekly to daily

(B)     2431/2432 Nizamuddin-Trivendrum (via Mangalore (Trice in week) NEW LINES

(A)     Harapanhalli-Hariher

  GAUGE CONVERSION

 

(A)     Anandpuram-Talguppa of Shomoga-Talguppa

  DOUBLING

 

(A)     Cuddapah-Bangalore

 

SOUTH WESTERN RAILWAY

 

NEW LINES (Construction)

 

Kottur-Harihar via Harpanahalli (65 KM)                   124.12         76.58 30.00 17.54

Kadur-Chickmagalur-Sakleshpur(93 KM)                  274.29         66.04 10.00 198.25

Hassan-Bangalore via Shravanabelgola (166KM)      412.91         241.83         55.00 119.09

Hubli-Ankola (167KM)                                   997.62         75.79 10.00 911.79

Bangalore-Sathyamangalam (260 KM)            901.62         .29     1.00   899.33

Rayadurg-Tumkur via Kalayandurg (213 KM)  857.31         1        15.00 842.30

 

GAUGE CONVERSION

 

Solapur (Hotli) Gadag (300 KM)                     329.51         281.21         5.00   43.30

Mysore-Chamarajanagar with extension to

Mettupalayam (148 KM)                                 608.58         129.21         20.00 459.36

Arisikere-Hassan-Mangalore (236 KM)           252.45         235.77         NIL     16.58

Kolar-Chikbalapur (96.5 KM)                         99.42 20.00 70.00 9.42

Bangalore-Hubli-Shimonga-Talagoppa            679.43         530.83         82.00 66.50

 

DOUBLING

 

Arisikere-Birur-( Patch doubling (44.28 KM)   98.21 1.0     50.00 47.21

Ramanagaram-Mysore (Electrification of

Kengeri-Mysore)    (91.5 KM)                        313.18         5.15   50.00 258.03

Whitefield-Bangarpet-Koppam (81.21 KM)      225.05         145.52         5.09   74.66

Bangalore city-Kengeri-Patch doubling                    24.40 22.34 5.00   2.01

Kengeri-Ramanagaram (32.43 KM)                116.75         40.91 5.00   70.84

Yashwanthpur-Tumkar (64 KM)                      109.56         100.53         8.00   1.03

Bangalore-Whitefield-Bangalore city

K. R. Puram (20.08 KM)                                85.00 11.00 1.00   84.99

Dharwad-Kumbaraganvi (26.68 KM)               96.76 20.07 50.00 26.69

Hubli-Hebsur (17.17KM)                                 600.00         20.01 40.00 539.99

Kunkkunady-Mangalore                                 70.00 2.00   2.00   66.00

 

 

श्री रवि प्रकाश वर्मा (खीरी): महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे रेल बजट 2009-10 के संबंध में बोलने का मौका दिया। मैं दो-तीन बातें कहना चाहता हूं। मैं माननीय रेल मंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूं क्योंकि जब मेरे संसदीय क्षेत्र में लखीमपुर खीरी में शारदा नदी में बाढ़ के कारण रेल पटरी कट कर गिर गई थी और हमने चिट्ठी लिखी तब तत्कालीन मरम्मत करा दी गई। इसके साथ जो 18 ट्रेनें रुकी हुई थीं वे चालू हो गई हैं जिससे लोगों का आराम मिला है। इसके लिए मैं आपको आभार व्यक्त करता हूं और क्षेत्र की जनता की तरफ से बधाई देता हूं।

          महोदय, मेरे संसदीय क्षेत्र की जनता का निवेदन है कि लखनऊ से सीतापुर, लखीमपुर, पीलीभीत, बरेली, नार्थ-ईस्ट रेलवे एनईआर के रेल खंड को ब्रॉड गेज करने की आवश्यकता है। माननीय मंत्री जी ने वर्ष 2007 में एक बार सदन में आश्वासन भी दिया था। जनता बहुत डिमांड कर रही है। हम आपसे निवेदन करते हैं कि इसे ब्रॉड गेज किया जाए क्योंकि इसके कारण इस इलाके का आर्थिक विकास रुका हुआ है। यहां दो दर्जन से ज्यादा चीनी मिले हैं। यहां स्टील अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटिड ने बहुत बड़ा स्टील प्लांट बनाने का मन बना लिया है और इसकी फाउंडेशन रख दी गई है। [r83]  वह हर तरीके से इकोनोमिक लाइन है और बहुत बड़ा तीर्थयात्री केन्द्र भी वहां है। कृपा करके इसे कराने की मेहरबानी करें।

          हमारे यहां दुधवा नेशनल पार्क है, लखनऊ से दुधवा के लिए डीएमयू की बहुत मांग की जा रही है, ताकि सभी तरफ से जो पर्यटक वहां आते हैं, वे वहां आसानी से पहुंच सकें। लखीमपुर को आपने मॉडल स्टेशन बनाया है, उसके लिए हम आपका आभार व्यक्त करना चाहते हैं। लेकिन हमारी आपसे विनती है कि मेरे जनपद के लखीमपुर, गोला और पलिया बहुत महत्वपूर्ण स्टेशन हैं। यदि इन पर रेलयात्री निवास का निर्माण करा देंगे तो जनता को बहुत सुविधा हो जायेगी। लखीमपुर जो मुख्यालय है, उसमें चारों तरफ से बाई पास बन रहा है। वहां एक रेलवे क्रासिंग 122सी को दुरुस्त किये जाने की जरूरत है, जिससे कि वहां ट्रैफिक सुविधाजनक रूप से चल सके।

          मैं एक बार पुनः आपका आभार व्यक्त करते हुए यह प्रार्थना करना चाहता हूं कि हमारे यहां एनईआर का जो ब्रॉड गेज है, इसे शीघ्र कराने की मेहरबानी करें।

 

श्रीमती सुस्मिता बाउरी (विष्णुपुर) : सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देना चाहती हूं। वर्ष 2009-2010 के इंटेरिम रेलवे बजट पर मैं बोलना चाहती हूं। मैं रेल मंत्री जी का अभिनंदन करना चाहती हूं कि उन्होंने इस बार भी रेल का किराया नहीं बढ़ाया, बल्कि कुछ-कुछ सैक्टर में कम किया, इसके लिए मैं उन्हें अभिनंदन देना चाहती हूं।

          महोदय, भारतवर्ष में हम सभी लोग जानते हैं कि अभी भी बहुत सारी जगहें रेलों से नहीं जुड़ी हैं। उन्हें रेलों से जोड़ना चाहिए। यह पहली मांग मैं लालू जी के सामने रखती हूं।

          अब मैं अपने क्षेत्र की एक-दो बातें आपके सामने रखना चाहती हूं कि हमारे यहां एक पीरडोबा स्टेशन है, जहां से बहुत सारे लोग यात्रा करते हैं। वहां से स्टूडैन्ट्स लोग ज्यादा जाते हैं, क्योंकि उसके पास ही मेदिनीपुर यूनिवर्सिटी है। वहां से बहुत सारे स्टूडैन्ट्स जाते हैं। वहां के लोगों की बहुत दिनों से मांग है कि पीरडोबा स्टेशन में रुपोशी बांगला या पुरुलिया एक्सप्रैस में एक कम से कम एक ट्रेन का ठहराव होना चाहिए। इसके अलावा जो भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रैस को आपने चार दिन किया है, इसका बांकुड़ा रेलवे स्टेशन पर स्टापेज होना चाहिए। इसके अलावा जो पटना-कोचीन ट्रेन है, उसे दो दिन रखा गया है, यदि उसे चार दिन कर दिया जाए तो बहुत अच्छा होगा। चूंकि वहां से बहुत सारे पेशन्ट्स जाते हैं। इसके अलावा जो अंगुली प्रोजैक्ट चल रही है, बिदिया प्रोजैक्ट चल रही है, जो टूटीपुल टू छापना रेलवे और मोशाग्राम का जो काम चल रहा है और जो टूटीपुल की लाइन है, इन प्रोजैक्ट्स के लिए आप ज्यादा से ज्यादा फंड दीजिए, क्योंकि वहां के लोग बहुत बेचैन है, वहां बहुत सारे लोगों ने अभी तक रेल नहीं देखी है। लगभग 1 करोड़ 35 लाख लोग रेलवे में ट्रैवल करते हैं। मैं समझती हूं कि उन लोगों के लिए सुविधा होनी चाहिए। इसी तरह की बातें अन्य माननीय सदस्यों ने भी यहां रखी हैं। मैं आपका ज्यादा समय नहीं लूंगी। मैंने आपके सामने जो प्वाइंट्स रखें है, मैं उम्मीद करती हूं कि आप उन पर गौर करेंगे। इसी के मैं अपना वक्तव्य समाप्त करती हूं।

 

श्री डी.बी. पाटिल (नांदेड़)  : सभापति महोदय, आपने मुझे इंटेरिम रेल बजट पर बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान अपनी कुछ मांगों की तरफ आकर्षित करना चाहता हूं। सच तो यह है कि महाराष्ट्र के लिए माननीय रेल मंत्री जी ने कुछ नहीं दिया। मुझे ऐसा लगता है कि लालूजी का गुस्सा राज ठाकरे पर निकाला और उसकी वजह से हमारे महाराष्ट्र को कुछ पैसा नहीं मिला। लेकिन लालूजी आपकी जितनी भी तारीफ की जाए, कम है। कई बार मैं आपसे मिला भी हूं। मैं लोक सभा के नांदेड़ क्षेत्र से चुनकर आया हूं। कई सालों से हमारी दो-तीन मांगें चली आ रही हैं। मैं आपका ज्यादा समय नहीं लूंगा। हमारा नांदेड़ रेल डिवीजन साउथ सैन्ट्रल रेलवे है, जिसे हमने सैन्ट्रल रेलवे से जोड़ना है। इसके बारे में कई एजिटेशंस हुए हैं, कई बार रास्ता रोको आंदोलन हुए हैं। इसके अलावा आपने जो कपूर कमीशन बैठाया था, उसकी रिपोर्ट भी फेवर में है। इसलिए आपसे विनती है कि महाराष्ट्र की लाखों, करोड़ों जनता इसकी प्रतीक्षा में हैं। हमारे नांदेड़ क्षेत्र में गुरुता गद्दी का इतना बड़ा कार्यक्रम हुआ, जिसमें माननीय पंत प्रधान जी, यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधीजी, महामहिम राष्ट्रपति जी और आप भी आये थे। एक बड़ी आस लेकर अपने निर्वाचन क्षेत्र की तरफ से मैं आपसे विनती करता हूं कि यदि सैन्ट्रल रेलवे से इसे जोड़ दें तो हमें बहुत ज्यादा खुशी होगी[BS84] । 

बोधन-देगलूर-उदगीर एक छोटे से हिस्से को रेल लाइन सैंक्शन करने के लिये हम लोग 30 सालों से पीछे पड़े हुये हैं लेकिन आज तक इस खंड का सर्वेक्षण नहीं हुआ है। हमने एम.पी. मीटिंग में इस बात को उठाया। मेरा आपसे अनुरोध है कि अगर आप महाराष्ट्र के लिये और खासकर नान्देड़ के लिये यह कार्य करेंगे तो सिक्ख समुदाय कभी नहीं भूलेगा।

          नान्देड़-देगलूर-बीदर को 170 किलोमीटर की नई रेल लाइन से जोड़ना है। यदि यह लाईन जुड़ती है तो बंगलौर-दिल्ली के लिये कॉरिडोर हो सकता है। इसका भी सर्वेक्षण होना चाहिये। यह एक बड़ी परियोजना है, जिस पर बड़ी ताकत लगाने वाले हैं।

          सभापति जी, मेरी आपके माध्यम से मंत्री जी से मांग है कि मेरी इन तीन मांगों को पूरा किया जाये। मुझे उम्मीद है कि माननीय मंत्री जी अपने उत्तर में कुछ न कुछ नान्देड़ के लोगों के लिये कहेंगे ।

            *महोदय, शेष भाषण मैं सभा पटल पर रख रहा हूं।

*आदरणीय महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान इन मांगों की ओर  आकर्षित करना चाहता हूं ।

          इस रेल बजट में महाराष्ट्र को कुछ नहीं मिला है

                   मेरा निर्वाचन क्षेत्र नांदेड जो कि एक पवित्र शहर है सिख धर्म के दसवें गुरू श्री गुरू गोविंदसिंह जी महाराज का  समाधि स्थल है और 2008 में यहां गुरूता गद्दी कार्यक्रम हुआ है ।

                  

                   रेल की बात करें तो आपके सहयोग से नांदेड रेलवे स्टेशन एक आधुनिक स्टेशन के रूप में उभरा है ।

                   परन्तु इस बजट में नांदेड को अनदेखा किया गया है हमारी निम्नलिखित मांगे मन्जूर करें ताकि सिख समाज को सुविधा हो और नांदेड शहर एक पर्यटन स्थल के रूप में उभरे और इन मांगों को पूरा होने से पूरे मराठवाडा के विकास में रेलवे का योगदान होगा ।

·       कपूर कमीशन के सुझावों को तत्काल लागू करें और कपूर कमीशन के सुझावों के अनुसार नांदेड रेलवे डिविजन को साउथ सेंट्रल रेलवे से निकालकर सेंट्रल रेलवे में जोड़ा जाए ।

·       नांदेड देंगनूर बिदर एवं बोधन देगलूर उदगीर रेल मार्ग की मांग बहुत पुरानी है और इस मार्ग के लिए बहुत बार धरना आन्दोलन हुए एवं सदन में तारांकित प्रश्न उपस्थित हो चुके हैं साथ में मेरे इस बारे में अनेक निवेदन आपके पास प्रेषित हुए हैं इस मांग के लिए नागरिक बहुत ही आक्रामक है और दिल्ली से दक्षिण भारत को जोड़ने में यह मार्ग बहुत ही महत्वपूर्ण है । यह रेल मार्ग दिल्ली बंगलोर कॉरीडोर बनने की क्षमता रखता है ।

साथ में

·       काचीगुडा से अजमेर के लिए नांदेड मार्ग से नई रेल चालू करें

·       नांदेड से अहमदाबाद के लिए नई रेल हफ्ते में एक बार चालू करें

·       नांदेड नागपुर रात्रि के लिए रेल चालू करें

·       विशाखापट्टनम निझामाबाद रेल नांदेड तक विस्तारित करें

·       नांदेड पूणे एक्सप्रेस रेल जो हफ्ते में दो बार है उसे नियमित  चालू करें

·       नांदेड नागपुर के बीच एक पेंसेजर रेल चालू करें

·       नांदेड पटणा रेल नियमित करें  जो हफ्ते में एक बार है   *

* ….* This part of the Speech was laid on the Table.

SHRI S.K. KHARVENTHAN (PALANI): Mr. Chairman, Sir, I am thankful to you for giving me this opportunity to participate in the discussion on Interim Railway Budget for the financial year 2009-10.

          On behalf of the Congress Party and on  behalf of my leader Madam Sonia ji, I am congratulating our hon. Railway Ministers Shri Lalu, Shri Velu and Shri Rathwa for the presentation of populist Interim Railway Budget.

          During 2001, the Indian Railways did not have funds for replacement of aged assets and had to defer payment of Rs. 2800 crore dividend.  Today it has accumulated reserves of Rs. 90,000 crore and has just paid a dividend of Rs. 4700 crore.  Even ‘Fortune 500 Companies’ are finding it difficult to raise debt from the international markets but the Indian Railway Finance Corporation raised a $ 100 million loan at 4 per cent interest  from the international market.  Now, throughout the world, most of the countries including USA are facing financial crisis and a number of private companies are sending out their employees and deferring payment of salaries to them.

          In the present situation, Indian Railways successfully implemented the Sixth Pay Commission Report by allocating Rs. 13,500 crore.  Through that, 14 lakh employees and 11 lakh pensioners are benefited.  For the last four years, the Indian Railways invested Rs. 70,000 crore and planned to invest Rs. 2.3 lakh crore in the Eleventh Five Year Plan.  The hon. Railway Minister announced 45 new trains; frequency was increased in 14 trains; and 14 trains are extended.  But out of 43 new trains, two trains are given to Tamil Nadu. Freight lifting improved from 602 million tones in 2004-05 to 850 million tones in 2008-09.  During 2004-05, the passengers were 5377 millions and they raised to 7056 millions.  Indian Railways have taken effective steps to reduce the accidents.  During 2002-03 the number of accidents was 351; during 2003-04 it was 323; during 2004-05 the accidents reduced to 234.  During 2005-06 it was 234; and during 2006-07 it was reduced to 195; and during 2007-08, it was 194;

MR. CHAIRMAN : Mr. Kharventhan, rest of your speech you can lay on the Table of the House.

SHRI S.K. KHARVENTHAN: Sir, I am just concluding.

During 2007-08, it was 138; and during 2008-09 it is 117.  It is a great achievement of hon. Lalu ji.  I would like to congratulate Lalu ji and his Team.

          I am laying the rest of my speech on the Table of the House. Thank you, Sir.

MR. CHAIRMAN: You can lay it.

SHRI S.K. KHARVENTHAN : Sir, I lay the rest of my speech on the table of the House.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

*  Sir, I am thanking  for giving me this opportunity to participate in the discussion of Interim Railway Budget for the financial year 2009-2010.  On behalf of Congress Party and on behalf of my Leader Madam Soniaji, I am congratulating our Hon’ble Railway Minister Shri Lalu Prasad, Shri Velu and Shri Rathwa for the presentation of Populist Interim Railway Budget.

          During 2001, the Indian Railways did not have funds for replacement of aged assets and had to defer payment of Rs. 2800 crores dividend. Today, it had accumulated reserves of Rs. 90,000 crores and has just paid a dividend of Rs. 4,700 crores.  Even ‘Fortunate 500 Companies” are finding it difficult to raise debt from the international markets but the Indian Railway finance Corporation raised a $ 100 million loan at 4% from the international market. Now throughout the world most of the countries including USA are facing financial crisis and number of private companies are sending out their employees and defer the payment of salaries to them.

          In the present situation, Indian Railways successfully implemented the Sixth Pay Commission Report by allocating Rs. 13,500 crores and through that 14 lakhs employees and 11 lakhs pensioners are benefited.  For the last 4 years, Indian Railways invested Rs. 70,000 crores and   planned to invest Rs. 2.3 lack crores in 11th five year plan.  Hon’ble Railway Minister announced 45 new trains, frequency was increased in 14 trains and 14 trains are extended but out of 43 new trains 2 trains are given to Tami Nadu. Freight lifting improved from 602 million tons in 2004-05 to 850 million tons in 2008-09.  During 2004-05 the passengers were 5,377 million and it raised to 7,056 million.  Indian Railways have taken effective steps to reduce the accidents.  During 2002-03 it was 351, 2003-04 it was 323, 2004-05 the accidents reduced to 234 and in 2005-06, it was 234 and during 2006-07 it was reduced to 195 and in 2007-08 it was 194 and during 2007-08 it was 138 and 2008-09 it is 117, it is a great achievement of Hon’ble Laluji, I am congratulating him and his team. 

In this juncture, I want to thank Railway Minister Hon. Laluji and Hon. Veluji for sanctioning new railway line connecting Erode-Palani via Dharapuram.  During Railway Budget discussion for the Financial Year 2004-05 I raised the issue of sanctioned above new railway line.  During 2005-06 budget it was announced and allocated fund for initial new survey. Southern Railway completed its survey and submitted its report on 30.11.2006, it was a favourable report.  Number of times I had raised the issue in Parliament for the approval of the report and sanction the scheme, but unfortunately railway board and planning commission rejected the report as it was not a viable project.  I take up the issue to public by taking Padayatra from Erode to Palani with thousands of public during 4th February 2008 to 10 February 2008. Then finally the above project was sanctioned through Railway Budget for the financial year 2008-09.  Rs. 78 lakh also allotted for Final Location Survey and Survey is going on.  I urge upon the Railway Ministry to complete the project at the earliest without further delay. 

          In the same manner, I raised the issue of Gauge Conversion between Dindigul to Coimbatore Meter Gauge line.  Now the work is going. I am requesting Hon’ble Railway Minister to allocate necessary funds and complete the work as early as possible.

          In my Palani Parliamentary constituency, Oddanchatram is an important town. Gandhi Nagar ward Nos. 5,6, 7 are situating south of Dindigul-Coimbatore Railway line.  Nearly 5000 people are living in that area.  Number  of educational institutions are available in that area.  NH-209 situates north of railway line.  Public are reaching Gandhi Nagar from NH-209 by crossing railway line only.  Hence, the public are requesting Southern Railway to form Railway Under Bridge. It is a long pending request.  Hence, I request the Railway Minister to sanction a RUB to Gandhi Nagar in Oddanchatram.

          After UPA Government assumed office at the Centre, our Hon’ble Railway Minister has announced five important new railway lines to be formed at Tamilnadu.  Those are: –

                                                                                      Estimated Cost

i)        Dindigul-Kumuli (134 kms.)                  –                  504.90 cr.

ii)       Ariyalur-Thanjavur (50 kms.)                –                  279.41 cr.

iii)      Needamangalam0Pattukottai (55 kms.)-          275.54 cr.

iv)      Dharmapuri-Morappur (36 kms.) –                  146.42 cr.

v)       Thiruvannamalai-Jolarpettai (83 kms.)   –                  356.77 cr.

          The total estimated cost of the above five lines is 1500 cr.  Based on Preliminary Inspection Report, Railway Board has accorded the approval for all the five projects but the Planning Commission has directed to include the State and the Centre Joint Venture at 50:50.

          As per Planning Commission, Tamilnadu Government has to pay Rs. 750 crore. But Tamilnadu government has refused to pay for it since only Railway Board will even all incomes and no way extend any benefit to the State government when those lines are commissioned. Those all five lines are connecting rural habitations in backward areas.  Dindigul-Kumili is connecting the two States-Tamilnadu and Kerala. Large number of devotees are going to Sabarimala through this route only.  In the same manner, Thiruvannamali is one of the famour Siva temples in Southern India.  Large numbers of devotees are reaching Thiruvannamalai throughout the year.  Hence, this route will also fetch more revenue to the Railways.

          Hence, I urge upon the Ministry of Railways that without waiting for the Tamilnadu’s 50% share, it has to allocate 1500 crore and implement these projects on a priority basis.

          One of the long pending project is Villupuram-Dindigul doubling.  This work was announced during 2008-09 Budget but even Preliminary work has not started.  This is one of the heart line in Tamilnadu.  This work has to be started at the earliest.  Another line-Mayiladuthurai-Villupuram ongoing gage conversion is pending for completion for a large number of years.  This has to be completed immediately. electrification of Thirucy-Madurai work started, it is going very slow and it has to be speeded up.  Madurai-Kanniyakumari, Madurai-Tuticorin Electrification of lines were announced but the work have not yet started. 

          I humbly request the Hon’ble Minister to take up these works immediately and complete without further delay. 

          With these words, I concluding my speech and supporting the Interim Railway Budget 2009-2010.*

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

श्री निहाल चन्द (श्रीगंगानगर)  :   सभापति जी, जैसा सभी लोग बता रहे हैं कि माननीय रेल मंत्री जी ने  यात्री भाड़े, माल भाड़े में कोई बढ़ोतरी न करके रेल की आमदनी बढ़ाने का काम किया है। मैं फिर भी बताना चाहता हूं कि उन्होंने रेल किरायों में तो 2 प्रतिशत की कमी की है लेकिन ऐसी 210 ट्रेनों  को जो मेल-एक्सप्रेस हैं, उन्हें सुपरफास्ट बनाकर उनमें प्रति व्यक्ति 15 रुपये प्रति टिकट पर बढ़ाये हैं, उसका इस बजट में जिक्र नहीं किया गया है। इस प्रकार यह बढ़ोतरी पहले कर दी गई और बाद में रेल किरायों में 2 प्रतिशत की कमी की गई है।[s85] 

सभापति महोदय, इसमें कमी करना बड़ी बात नहीं है, लेकिन प्रति व्यक्ति, प्रति टिकट के पीछे जो बढ़ोत्तरी की है, वह बहुत बड़ी बात है। इसके अलावा ज्यादा कुछ लम्बी-चौड़ी बात न करके, मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि एनडीए सरकार ने श्री गंगानगर से लेकर स्वरूपसर तक मीटरगेज लाइन को ब्रॉडगेज किया था और उसके लिए 115 करोड़ रूपया स्वीकृत किया था। 70 करोड़ रूपए एनडीए सरकार के समय जारी हुए थे और बाकी 45 करोड़ रूपया अभी तक जारी नहीं हुआ है। यह सीमावर्ती लाइन है और यह लाइन सेना व किसानों की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। मैं माननीय रेल मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि अगर आप बाकी का 45 करोड़ रूपया जारी कर दें, तो सीमा पर सिर्फ एक लाइन मीटरगेज बची है, वह भी ब्रॉडगेज हो जाएगी। इसके अलावा पिछले बजट में माननीय रेल मंत्री जी ने श्री गंगानगर से लेकर जयपुर तक के मीटरगेज के टुकड़े को आपने बजट में रखा था। अगर उसकी स्वीकृति मिल जाए तो यह सीमा पर सबसे बड़ा काम होगा। श्री गंगानगर, राजस्थान में सबसे पिछड़ा हुआ इलाका है और यह बिल्कुल सीमा पर है। मैं माननीय रेल मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि इसको प्राथमिकता के आधार पर कम्प्लीट कराया जाए क्योंकि श्री गंगानगर का नाम इस बजट में कहीं भी नहीं है। इसके अलावा श्री गंगानगर से लेकर जयपुर तक की मीटरगेज लाइन को भी कम्प्लीट कराया जाए। श्री गंगानगर से अमृतसर वाया भठिंडा को सीधे रेल सेवा से जोड़ा जाए।

          सभापति महोदय, लालकिला एक्सप्रेस नई दिल्ली तक है, उसको श्री गंगानगर तक बढ़ाया जाए। मैं माननीय रेल मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि हनुमानगढ़ जंक्शन सबसे पुराना जंक्शन है, वहाँ पर लोको शैड को वर्ष 1994 में आपने बंद कर दिया था। वहाँ पर डीजल शैड स्थापित किया जाए। महोदय, हनुमानगढ़, रावतसर, पल्लू सरदार शहरों का सर्वे वर्ष 1999 में हुआ था और उस रेल लाइन को भी बजट में रखा जाए। गंगा, यमुना, सरस्वती एक्सप्रेस जो नई दिल्ली तक है, उसको श्री गंगानगर तक बढ़ाया जाए। 

          सभापति महोदय, श्री गंगानगर कृषि प्रधान क्षेत्र है और किसानों की उपज का सही मूल्य उन्हें नहीं मिल रहा है क्योंकि यह रेल सेवा से नहीं जुड़ा हुआ है। मैं माननीय रेल मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि वहाँ पर मात्र एक ट्रेन दाराबा एक्सप्रेस श्री गंगानगर से दिल्ली के लिए चलती है और उसमें भी थर्ड एसी चल रहा है। महोदय, उसमें एक कोच ओर लगाया जाए और इंटरसिटी श्री गंगानगर में…

सभापति महोदय : हमने एलाऊ कर दिया है। आप अपना लिखित भाषण टेबल पर रख दीजिए। यह सब बातें आपके रिकॉर्ड में आ जाएंगी।

श्री निहाल चन्द   : सभापति महोदय, मैं एक मिनट में समाप्त कर रहा हूँ। महोदय, तत्कालीन रेल मंत्री जी ने श्री गंगानगर को मॉडल स्टेशन घोषित किया था।

सभापति महोदय : निहाल चंद जी आप समय का ध्यान रखिए। आप रेस्ट ऑफ द स्पीच को ले कर दीजिए। आप सदन के पटल पर स्पीच को ले कर दीजिए। आप स्पीच को टेबल पर रख सकते हैं।

   

 

  *आपने रेल बजट पर अपने विचार व्यक्त करने का मौका दिया उसके लिए आपको धन्यवाद ।  महोदय, रेल मंत्री ने ऐसा बजट रखा है जैसे पूरे देश के रेल मंत्री नहीं बिहार के रेल मंत्री हों । बजट में नई ट्रेनें एवं फैरों में वृद्धि की है, रेल का समूचा पैसा बिहार को दिया है ।

          महोदय, 2006-07 से 2007-08 में यात्री आमदनी में 26073 करोड़ का मुनाफा यानी 15.2औ की वृद्धि (इनकम) हुई ।

          माल भाड़ा में 5,352.28 करोड़ यानी 13.03औ की इनकम में वृद्धि हुई ।

          महोदय, बजट में तो यात्री किराया में 2औ की कमी की परंतु दिसम्बर, 08 में 210 ट्रेन मेल या एक्सप्रेस को सुपरफास्ट कर प्रति व्यक्ति  प्रति टिकट 15 रूपया ज्यादा किराये में बढ़ोतरी कर रेलवे वसूल कर रहा है । जिससे 114 करोड़ का मुनाफा अलग से हो रहा है । बजट में रेल दोहरीकरण एवं रेल फेरों में तो वृद्धि की परन्तु उत्तर रेलवे जोन में ट्रेन नहीं मिली न ही राजस्थान को कुछ भी मिला । इसके अलावा बजट में यात्रियों की सुविधा एवं उनके  भोजन, बुनियादी ढांचा एवं सुरक्षा के बारे में  जिक्र तक नहीं किया इसको भी प्रमुखता से लिया जाना चाहिए ।

           महोदय, एनडीए की सरकार में रेल लाइनों का दोहरीकरण किया था । वर्तमान केन्द्र  सरकार उसको पूरा नहीं कर रही है । श्रीगंगानगर – स्वरूपसर मीटरगेज को     ब्रॉडगेज किया था तथा उसको 70 करोड़ रू0 जारी होने के बाद , शेष 45 करोड़ रूपया  जारी कर इस रेल कार्य को पूरा किया जाना था । केन्द्र सरकार अब तक नहीं कर पायी । अतः इस कार्य को तुरन्त एवं जल्दी पूरा करायें । यह लाइन सीमावर्ती लाईन है। सुरक्षा एवं सेना की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है ।

          महोदय, राजस्थान को इस रेल बजट से कुछ नहीं मिला । मेरे लोक सभा क्षेत्र श्रीगंगानगर का नाम बजट में कहीं पर छपा भी नहीं । महोदय, मेरा क्षेत्र सीमा पर है । नागरिकों की सुविधा के लिए जिला मुख्यालय पर आवरब्रिज स्वीकृत होना चाहिए जो नहीं हुआ ।

मैं अपने क्षेत्र के लिए रेल मंत्री जी से कुछ मांग कर रहा हूं जिसे

·       श्रीगंगानगर से जयपुर मीटरगेज लाइन जो बजट 2007-2008 में शामिल किया था उसको स्वीकृति देकर कार्य चालू करवाया जाये ।

·       श्रीगंगानगर से अमृतसर वाया भटिंडा को सीधा रेल सेवा से जोड़ा जाये ।

·       लालकिला एक्सप्रेस को श्रीगंगानगर तक बढ़ाया जाये ।

·       नई दिल्ली से श्रीगंगानगर को एक और ट्रेन दी जाये ।

* ….* This part of the Speech was laid on the Table.

·       हनुमानगढ़ लोको शेड स्टेशन था । 1994 में जिसको बंद कर दिया गया । हनुमानगढ़ मध्य एवं बड़ा स्टेशन है । यहां पर डीजल शेड स्थापित किया जाये ।

·       हनुमानगढ़ , रावतसर, पल्लू सरदार शहर का सर्वे 1999 में हो चुका है । इस लाइन को स्वीकृति प्रदान की जाये ।

·       गंगा, यमुना, सरस्वती एक्सप्रेस  जो नई दिल्ली तक है इसको गंगानगर तक बढ़ाया जाये ।

·       हनुमानगढ़ को सीधी रेल सेवा से दिल्ली तक जोड़ा जावे या अनूपगढ़ से सीधी लाइन हनुमानगढ़ भटिंडा दिल्ली तक जोड़ दी जाये । किसान एवसप्रेस भटिंडा तक को हनुमानगढ़ तक बढ़ाया जाये ।

          महोदय, सीमावर्ती क्षेत्रों का बजट में ध्यान रखकर समस्या का समाधान किया जावे । हमारा इलाका कृषि पर निर्भर है । रेल का आवागमन होने पर किसान की जिन्सों का मूल्य भी बढ़ेगा किसान एवं प्रत्येक नागरिक लाभान्वित होगा। महोदय, श्रीगंगानगर ” ए ” क्लास माडल रेलवे स्टेशन है । सुविधाओं से वंचित है । माछल स्टेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जावे । स्टेशन पर कोई एक भी स्टाल नहीं है । आदर्श स्टेशन घोषित होने के बारे में रेलवे स्टेशन पर (रेल बोर्ड) नहीं लगा । जबकि तत्कालीन रेल मंत्री ने स्वयं श्रीगंगानगर में जाकर घोषणा भी की थी । कृपया रेल सेवा बोर्ड की स्थापना भी तुरन्त होनी चाहिए ।

          महोदय, देश की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर बसा श्रीगंगानगर रेल की दृष्टि से बहुत पिछड़ा हुआ इलाका है । सेना की दृष्टि एवं किसान कृषि जिला एवं सुपर विद्युत प्लांट सूरतगढ़ को देखते हुए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है । महोदय, रेल की प्रत्येक अनुशंसा दर्ज कर सुविधा दिलाने का कष्ट करें ।  *

 

 

 

श्री सुभाष महरिया (सीकर):  सभापति महोदय, माननीय लालू प्रसाद यादव जी को रेल बजट के तहत राजस्थान की तरफ और राजस्थान में भी शेखावटी की तरफ जो ध्यान देना चाहिए था, वह नहीं दिया गया।  मैं तो यह सोच रहा था कि राजस्थान वीरों की धरती है और हमारे रेल मंत्री जी भी वीर हैं। वीर रेल मंत्री जी, वीरों की धरती को थोड़ा सा भूल गये हैं। इसलिए अब रेल बजट में मैं अपनी ओर से निवेदन करना चाहूंगा कि इसका ख्याल करें। पूरे देश में सबसे ज्यादा सैनिक राजस्थान के धार्मिक पर्यटन स्थलों के लिए, हमारा शेखावटी का अंचल पाकिस्तान के ओशालासदी बाबा के नाम से पहचाना जाता है। वहाँ पर ब्रॉडगेज की लाइन जयपुर से सीकर और सीकर से लोहारू, जयपुर से सीकर और सीकर से चोरू हनुमानगढ़ तक की जो लाइन है उसके लिए सर्वे का काम पूरा हो चुका है। दो साल पहले सर्वे का काम शुरू हुआ था, लेकिन अभी तक उस सर्वे के काम को आगे नहीं बढ़ाया जा सका है। अभी गत वर्ष अमान परिवर्तन के लिए जो घोषणा हुई थी, उस अमान परिवर्तन के ऊपर रेवाड़ी, फुलेरा वाया रिंगस जो रेल चालू होनी चाहिए थी, वह इंतजार कर रही है और आपको समय नहीं है। आप समय दीजिए, हम स्वागत के लिए तैयार हैं ताकि वह रेल चालू हो सके।

          सभापति महोदय, इसके साथ ही फ्रेड कॉरीडोर की जो घोषणा हुई, उसमें दादरी से लेकर रेवाड़ी और रेवाड़ी से फुलेरा, अहमदाबाद, मुंबई तक के लिए हमारा इलाका राजस्थान माइंस और मिनरल्स के लिए उसमें रहेगा। फ्रेड कॉरीडोर के लिए जो यह पश्चिमी पैच है इसका काम जल्दी शुरू होना चाहिए।[r86]   

इस काम को दो साल पहले शुरू हो जाना चाहिए था, लेकन वह आज तक अधूरा पड़ा है। इस फ्रैट कोरिडोर के बनने से रेलवे भी आबाद हो जाएगा। मेरा निवेदन है कि आप इस ओर विशेष ध्यान दें।

                                                                                       

 

 

 

 

 

 

 

 

श्रीमती रूपाताई डी. पाटील (लातूर)  :  सभापति महोदय, मैं अंतरिम रेल बजट पर भाषण करने के लिए खड़ी हूं। आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देती हूं। रेल मंत्री द्वारा हमारे यहां के लिए किसी नई परियोजना की घोषणा नहीं की गई है। इसके मैं खेद व्यक्त करती हूं। ब्राडगैज का काम हमारे यहां चालीस साल में नहीं हुआ था, वह आपके कार्यकाल में हो गया, मैं इसके लिए रेल मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहती हूं। जब से आपने इस ब्राडगैज लाइन का उद्घाटन किया है, तब से यह लाइन मुनाफे में जा रही है। इसलिए मैं आपसे मांग करती हूं कि यहां की ट्रेनों में एकस्ट्रा डिब्बे लगाए जाएं।

          इसके अलावा लातूर से तिरूपति तक ट्रेन की मांग करती हूं। हमारे यहां से लोग दुर्गापुर दर्शन करने के लिए जाते हैं, मेरी मांग है कि वहां के लिए भी एक ट्रेन चलाई जाए। हमारे यहां के मुस्लिम भाई अजमेर शरीफ जाते हैं, वहां के लिए भी ट्रेन चलाई जाए। मेरी मांग है कि लातूर से जयपुर के लिए ट्रेन की भी मांग करती हूं। आपने सभी राज्यों के लिए बहुत कुछ किया है, लेकिन आप महाराष्ट्र से क्यों ख़फ़ा हैं, इसका मुझे पता नहीं है। आपको ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि आप पूरे देश के लिए रेल मंत्री हैं। महाराष्ट्र रेलवे को सबसे ज्यादा रेवेन्यू देता है। इसलिए आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। आप अभी भी काफी कुछ कर सकते हैं, इसलिए मैं आपसे निवेदन करती हूं कि महाराष्ट्र और लातूर के लिए आप ज्यादा से ज्यादा कीजिए। मैं कोई भाषण नहीं कर रही हूं, अपनी मांगे रख रही हूं। आपने जो कुछ किया है, मैं उसके लिए धन्यवाद देती हूं। मुझे यहां चुनकर भेजने वाले लोगों ने मुझसे कहा कि लालू जी के मंत्री रहते हुए ही लातूर एक्सप्रेस शुरू हुई है। उन्हें आशा है कि आगे भी नई गाड़ियां शुरू होंगी। परई-लातूर-नीलांगार-वाड़ी का एक सर्वे हुआ था। यह कम खर्चीला मार्ग है। इस पर भी आपको ध्यान देना होगा। महाराष्ट्र में डिब्बे बनाने का एक कारखाना है, जिसके लिए मैंने सौ करोड़ रूपये की मांग की थी। आपके सौ करोड़ रूपये दे देने से हमारे यहां के लोगों की बेरोजगारी दूर होगी। आप नई जगह कारखाना न खोलें और महाराष्ट्र से दुर्भावना न रखते हुए, वहीं इसे जारी रखेंगे तो हम आपके आभारी होंगे। आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देती हूं।

*  महोदय, रेल मंत्री द्वारा पेश किये रेल बजट (अंतरिम) पर भाषण देने का मौका मिला, इसलिए मैं धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहती हूं कि रेल मंत्री द्वारा हमेशा की तरह घोषणाओं का पिटारा खोला है। महज घोषणाओं के आधार पर लोकप्रिय होने की धुन उन पर सवार हो रही है।

 

*.,…*This part of the Speech was laid on the Table.

          रेल मंत्री द्वारा हमारे यहां के लिए कोई नई परियोजना की घोषणा नहीं की गई, इसका मुझे खेद है। मेरे निर्वाचन क्षेत्र से गुजरने वाली लातूर एक्सप्रेस से स्थानीय लोग बड़ी संख्या में यात्रा करते हैं। यह ट्रेन राज्य की राजधानी मुंबई जाती है, इसलिए इसमें भारी भीड़ को देखते हुए इसके डिबबों की संख्या बढ़ाने तथा लातूर में इसका यात्री कोटा भी बढ़ाने की आवश्यकता है। रेलवे के राजस्व में इजाफा करने वाली इस ट्रेन के डिब्बे बढ़ाने की घोषणा मंत्री जी अपने जवाब में करें। इसी तरह लातूर यह जिला मुख्यालय का रेल स्टेशन होने के बावजूद वहां यात्री सुविधा का अभाव है। लातूर के शैक्षिक तथा अन्य महत्व को देखते इस रेल स्टेशन को मॉडल रेल स्टेशन का दर्जा देकर यहां पर संगणकीय टिकट आरक्षण प्रणाली (पी आर एस) तथा अन्य यात्री सुविधा का अत्याधुनिकीकरण सहायता की भी घोषणा करें।

          लातूर यह दक्षिणी राज्य कर्नाटक से लगा हुआ है। यहां के लोग तिरूपति आने-जाने लेकिन उन्हें सीधे जाने-आने की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण तकलीफ उठानी पड़ती है। इसलिए लातूर से तिरूपति के लिए एक नई ट्रेन शुरू करने की घोषणा करें। इसी तरह मराठवाड़ा तथा महाराष्ट्र के लोग तुलजापुर के भवानी का दर्शन करने बड़ी संख्या में जाते हैं। लातूर से भाविकों के लिए ट्रेन की कोई सुविधा नहीं होने से उनको हो रही परेशानी का संज्ञान लेकर लातूर-तुलजापुर नई ट्रेन तत्काल शुरू करने की भी आवश्यकता है। हमारे यहां पर परली-लातूर-निलंगा-उमरगा-वाडी-गुलबर्गा अंतर्राज्यीय रेल मार्ग निर्माण के लिए कुछ वर्षो पहले सर्वेक्षण किया गया था। लेकिन इसके आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय आवश्यकता को देखते इसके निर्माण की आज बहुत आवश्यकता है। मैं रेल मंत्री से अनुरोध करती हूं कि इसके वास्तविक निर्माण के लिए पूर्ण सर्वेक्षण कराकर प्रत्यक्ष निर्माण के लिए वित्तीय आबंटन किया जाये।

          महाराष्ट्र में रेल के डिब्बे निर्माण संयंत्र चिंकहिल में स्थित है। ब्रिटिश काल से यह इकाई शुरू है। नैरोगेज से ब्रॉडगेज परिवर्तन की साक्षी इस इकाई को आज बंद करने का षडयंत्र रचा जा रहा है। हमने इसे कायम शुरू रखने के लिए इसके अत्याधुनिकीकरण के लिए रेल मंत्रालय से 100 करोड रूपये आबंटित करने की मांग की थी। लेकिन दुर्भाग्य से रेल मंत्रालय ने इसे माना नहीं, मैं आपसे पुनः आग्रह करती हूं कि इस रेल मरम्मत इकाई को शुरू करने के लिए तत्काल वित्तीय सहायता जारी करें।

          लातूर यह दक्षिण रेलवे में आता है। इसके काम को लेकर हमें सुदूर हैदराबाद मंडल कार्यालय में जाना पङता है। यह समय की हानी का कार्य है। अगर यह मध्य रेल मंडल से जोड़ गया तो प्रादेशिक संलग्नता के साथ सभी दृष्टि से सुविधाजनक होगा। मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से मांग करती हूं कि लातूर क्षेत्र को दक्षिण रेल मंडल से मध्य रेल मंडल में शामिल करने के लिए कार्रवाई करें।

          रेल मंत्री द्वारा हरदम रेल के मुनाफ की चर्चा की जाती है। अगर रेल मुनाफ में हे तो यात्री सुविधा के लिए अनुरोध के बाद भी खर्च क्यों नहीं किया जा रहा है। आज भी पैसेंजर ट्रेनों के यात्री के साथ अन्य यात्री नारकीय वातावरण में यात्रा करने के लिए मजबूर हैं। उन्हें बुनियादी यात्री सुविधा उपलब्ध कराने में रेल मंत्री क्यों नहीं कार्रवाई करते, यह सवाल है। रेल में यात्रा करते समय लंबी दूरी के यात्रियों को हरदम परेशानी का सामना करना पड़ता है। रात में सोते समय अगर गंतव्य स्थान पर उतरना है तो तकलीफ होती है। लालू जी द्वारा ट्रेनों में डिसप्ले बोर्ड लगाकर गंतव्य स्थान, स्टेशनों की जानकारी देने की सुविधा उपलब्ध कराने का वायदा किया गया था, लेकिन खेद से कहना पड़ रहा है कि उनकी अन्य घोषणाओं की तरह यह भी आज तक पूरी नहीं हुई है। यात्री सुविधा की दृष्टि से यह आवश्यक है। अतः देर से सही रेल मंत्री इसका क्रियान्वयन सुनिश्चित करायें। लातूर से जयपुर, अजमेर ट्रेन करायें।   *

 

 

 

श्री महेश कनोडीया (पाटन): सभापति महोदय, आपने रेल बजट पर बोलने का अवसर दिया, उसके लिए मैं धन्यवाद देता हूं। मैं रेल मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत अंतरिम रेल बजट का विरोध करने के लिए खड़ा हुआ हूं। रेल मंत्री जी यात्रियों को सुविधा देने की बात तो करते हैं, लेकिन भारी सब्सिडी की वजह से सस्ते पैकेज वाली ट्रेनें नहीं चलाई गईं। इस चुनावी वर्ष में कुछ स्थानों से देशाटन के लिए ट्रेनें चलाई जा रही हैं। अभी हाल में एक ट्रेन मुम्बई से दक्षिण भारत के लिए चलाई गई है। इसलिए मेरा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि इसी तरह की एक ट्रेन मेरे संसदीय क्षेत्र पाटन से भी चलाई जाए ताकि इसका लाभ मेरे क्षेत्र के लोगों को भी मिल जाए।

          महोदय, मेरे कहने पर आपने पाटन-मेहसाणा नई ब्राडगैज लाइन शुरू की, इसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। वहां गाड़ियां भी चलाईं[r87] ।

 22.00 hrs.

वहां पहले चार-चार गाड़ियां चलती थीं, अब वहां एक ही गाड़ी चल रही है। वहां ये सब ट्रेनें चलनी चाहिए। मेरे गुजरात, पाटन, मेहसाणा, अहमदाबाद में ट्रेनें चलाई जाएं।

          महोदय, अंत में मैं एक शेर सुनाऊंगा – “लालू जी आपने बजट में बातें बुलंद कर दीं, पाटन में बनाया ब्रोडगेज़ गाड़ियां बंद कर दीं।” आप वहां गाड़ियां चलाएंगे, ऐसी हम उम्मीद करते हैं। बहुत-बहुत धन्यवाद।

           *माननीय  महोदय, आपने रेलवे बजट पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए धन्यवाद। मैं रेल मंत्री द्वारा प्रस्तुत अंतरिम बजट का विरोध करने खड़ा हुआ हूं। माननीय रेल मंत्री जी यात्रियों को सुविधा देने की बातें तो करते हैं लेकिन भारी सब्सिडी की वजह से साल भर सस्ते पैकेज वाली गाड़ियां नहीं चलाई। इस चुनावी व­ाऩ में वाहवाही लूटने के लिए कुछ कुछ स्थानों से देशांटन के लिए ट्रेनें चलाई जा रही हैं। अभी हाल ही में ऐसी एक ट्रेन दक्षिण भारत के भ्रमण के लिए मुंबई से चलाई गई है। इसलिए मेरा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि देशांटन के लिए वैसी ही एक ट्रेन मेरे संसदीय क्षेत्र पाटन से भी चलाई जाये ताकि इसका लाभ मेरे क्षेत्र के लोगों को भी मिल सके। इसके अतिरिक्त मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि जिस प्रकार मेरे कहने पर पाटन-मेहसाना नई ब्रॉडगेज लाइन शुरू की है और पाटन-

 

* ….* This part of the Speech was laid on the Table.

मेहसाना के बीच एक ट्रेन चालू हुई है लेकिन पाटन-अहमदाबाद के बीच दिन में चार बार ट्रेन चालू थी तो इस ब्रॉडगेज लाइन पर भी दिन में चार बार अहमदाबाद-पाटन के बीच ट्रेनें चलाई जायें।

          महोदय, अंत में मैं एक शायरी गा कर सुनाऊंगा।

          लालू जी आपने बजट में बातें बुलंद कर दी

          पाटन में बनाया ब्रॉडगेज और गाड़ियां बंद कर दी,

          महोदय, रेल मंत्री जी यहां गाड़ियां चलायें, ऐसी उम्मीद करता हूं   *

                                                                                                                  

सभापति महोदय: मोहन रावले जी, आपको दो मिनट बोलने का समय दिया जाता है। आप लास्ट वक्ता होंगे। हाउस का सेंस हो तो सदन का दो-तीन मिनट का समय और बढ़ाया जाए। आप लोगों की सहमति हो जाए तो मोहन रावले जो को बोलने के लिए हम दो-तीन मिनट का समय वे देते हैं।

सभी माननीय सदस्य: ठीक है।

श्री मोहन रावले (मुम्बई दक्षिण-मध्य): सभापति महोदय, मैं मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि मुंबई शहर से, देशभर में जो एक करोड़ पच्चीस लाख लोग उपनगरीय रेलवे से यात्रा करते हैं, उनमें से 70 लाख लोग मुंबई से यात्रा करते हैं। सर, आपने मुंबई के लिए क्या दिया? फेज़-वन में 4,500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया था और फेज़-टू में 5,300 करोड़ की योजना बनाई थी, उसका पैसा कहां है? यह पैसा देने के लिए मैं सरकार से मांग करता हूं। हमारे यहां ये 300 गाड़ियां फेज़-वन की वजह से चल सकती थीं, जो नहीं चल रही हैं।

          सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से प्रार्थना करना चाहता हूं कि वेस्टर्न रेलवे, सेंट्रल रेलवे, हार्बर रेल लाईन आदि सभी प्लेटफार्मों पर बहुत गंदगी होती है। इतनी गंदी गाड़ियां होती हैं, वहां आप नई गाड़ियां दीजिए। 12 डिब्बे की जो गाड़ी होती है, वहां प्लेटफार्म पर शेड की सुविधा भी नहीं है, वहां एक्सेटेंडेड प्लेटफार्म, शेड की सुविधा के लिए मैं आपसे प्रार्थना करता हूं। हमारे क्षेत्र से तेलगू के जो भाई हैं, सिकंदराबाद से मुंबई, छत्रपति शिवाजी टर्मिनल और नांदेड़ के बीच चलने वाली तपोवन एक्सप्रेस को निज़ामाबाद तक बढ़ाया जाए ताकि करीमनगर और निज़ामाबाद जिले के लोगों को आगे जाने की सुविधा मिल सकें। आपने कोंकण रेलवे में जमीन ली। आपने जिनकी जमीन ली, उनके परिवार के लोगों को सर्विस देना अनिवार्य था। जिन्हें अभी तक सर्विस नहीं मिली, उन्हें सर्विस मिलनी चाहिए। कोंकण रेलवे में 800-900 एप्लीकेशंस पड़ी हुई हैं।

          महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से प्रार्थना करता हूं कि जो छत्रपति शिवाजी टर्मिनल में …( व्यवधान) सर, मुझे दो-तीन मिनट और बोलने का समय दिया जाए।…( व्यवधान)

श्री राम कृपाल यादव   : सभापति महोदय, मेरा प्वाइंट ऑफ आर्डर है।

सभापति महोदय: आपका क्या प्वाइंट ऑफ आर्डर है?

श्री राम कृपाल यादव   : सभापति महोदय, मेरा प्वाइंट ऑफ आर्डर यह है, आपने कहा था कि एक घंटा सदन चलेगा। आपने हाउस में सब की सहमति ली थी और अब दस बज गए हैं।…( व्यवधान)

सभापति महोदय:  आपने ध्यान नहीं दिया। माननीय राम कृपाल यादव जी, आप पुराने सदस्य हैं। मैंने हाउस का सेंस ले लिया है, जब तक रावले जी की स्पीच होगी तब तक के लिए सेंस ली जा चुकी है। आप आसन की तरफ भी ध्यान रखिए। माननीय सदस्यों का हम पूरा ध्यान रखते हैं, यह न्याय का तराजू है। यहां किस समय क्या रूलिंग होगा, इस पर माननीय सदस्यों को ध्यान रखना चाहिए।

श्री मोहन रावले : सभापति महोदय, छत्रपति शिवाजी टर्मिनल में 26 नवम्बर को जो हमला हुआ, उसमें बहुत से लोग मारे गए। पुलिस के लिए 25 लाख रुपए सरकार ने दिए, यह आपने अच्छा काम किया। मेरी मंत्री जी से प्रार्थना है कि जो भी लोग छत्रपति शिवाजी टर्मिनल में 26 नवम्बर को हमले में मारे गए, उनके परिवार में से एक व्यक्ति को आप रेलवे में नौकरी दीजिए। आपको उन्हें कम से कम दस लाख रुपए देने चाहिए। …( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद :  आप आतंकवादी घटना की चर्चा कर रहे हैं।

श्री मोहन रावले : जी हां सर।

श्री लालू प्रसाद  :  जितने भी टेरेरिस्ट घटना में हमारे रेलवे स्टेशन के केम्पस में लोग मारे गए।…( व्यवधान)[S88] 

सर, 26 जनवरी, 2008 को मुम्बई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर हमला हुआ, उसमें जो लोग मारे गए, उन सबको भी मुआवजा मिलना चाहिए। …( व्यवधान)यदि आप आतंकवादियों के हमले में मारे गए लोगों की चर्चा कर रहे हैं, तो मैं आपको बताना चाहता हूं कि टैररिस्ट घटना में जितने भी हमारे रेलवे के लोग कैम्पस में और अन्य जगहों पर मारे गए, उन सबको 10 लाख रुपए देने की घो­ाणा संभवतः हमने की थी और एक जॉब देने की बात कही थी। इसकी हमने पहले ही घो­ाणा की हुई है। अब तो आप खुश हैं?

श्री मोहन रावले : थैंक यू, थैंक यू सर। जी हां, मैं खुश हूं।

सभापति महोदय : अब आप अपना भा­ाण समाप्त कीजिए। आपका समय समाप्त हो गया है।

श्री मोहन रावले : सर, रेलवे में खो-खो की टीम सिर्फ लालू प्रसाद यादव जी की वजह से अस्तित्व में आई। इसके लिए मैं उन्हें बधाई देता हूं, लेकिन इसे आप कोंकण रेलवे में भी खो-खो की टीम बनाइए। महिला और पुरु­ााो की अलग-अलग टीम बनाइए। जैसे वैस्टर्न रेलवे और सेंट्रल रेलवे में कबड्डी की टीम है, वैसे ही कोंकण रेलवे में भी कबड्डी की टीम बनाइए।

          सर, मेरी मांग है कि जब रिक्रूटमेंट होती है, तो लोकल एम्पलॉयमेंट एक्सचेंज से कैंडीडेट्स को कॉल करना चाहिए। यह बात आपके रेलवे के पैनल में लिखी हुई है। महाराष्ट्र में मराठी लोगों को वरीयता मिलनी चाहिए।

श्री लालू प्रसाद: सभापति महोदय, जो भी माननीय सदस्य कहना चाहते हैं, उसे लिखित में देने का अनुरोध किया जाए।

सभापति महोदय : माननीय रावले जी, आप जो भी बात कहना चाहते हैं, उसे माननीय मंत्री जी को लिखित में भेज दीजिए। चूंकि आपका समय समाप्त हो चुका है इसलिए अब आप अपना भाषण समाप्त कीजिए। यदि कुछ बातें अभी भी बोलने के लिए रह गई हैं, तो कृपया अपने भा­षण का शेष हिस्सा टेबल पर ले कर दीजिए। वह आपके भाषण का पार्ट समझा जाएगा।

श्री मोहन रावले  सर, मुम्बई के लोगों की जो इस समय सुरक्षा है, उसमें वहां के लोगों का विश्वास नहीं है। …( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद: सभापति महोदय, माननीय सदस्य मोहन रावले जी ने अभी तक रेल बजट का न सपोर्ट किया है और न विरोध। इसलिए मैं चाहता हूं कि माननीय सदस्य पहले इसे सपोर्ट करें।

श्री मोहन रावले : मंत्री जी, मुम्बई को पैसा दीजिए, तब मैं इस बजट को सपोर्ट करूंगा। आप मुम्बई की फेज-वन रेल हेतु 4500 करोड़ रुपए और फेज-टू हेतु 4300 करोड़ रुपए दीजिए। छत्रपति शिवाजी टर्मिनस स्थित पुलिस को 9 एम.एम. राइफलें देनी चाहिए, बुलैट प्रूफ जैकेट्स देनी चाहिए और बुलैटप्रूफ कार भी देनी चाहिए। मेरे पास और भी बहुत सी बातें कहने के लिए हैं।

सभापति महोदय : रावले जी, आप अपना भा­ाण समाप्त कीजिए। अब आपकी कोई भी बात रिकॉर्ड पर नहीं जाएगी।

श्री मोहन रावले: सभापति महोदय, मैं आपकी अनुमति चाहता हूं। मुझे एक मिनट और अपनी बात कहने के लिए दे दीजिए।

सभापति महोदय : नहीं। अब आपका समय समाप्त हो गया है। कृपया बैठिए। जो कुछ भी आप कहना चाहते हैं, उसे आप टेबल पर रख दीजिए।

…( व्यवधान)

*श्री मोहन रावले : अध्यक्ष महोदय, मेरे निर्वाचन क्षेत्र में आंध्र प्रदेश से आये तेलुगु भाषाई लोग भारी संख्या में रहते हैं। तेलुगु भाषाई लोगों के कई संगठनों जैसे कि गोपाल नगर रिहवाशी संघ, तेलुगु मुन्नुरू कायु सेवा संघम आदि ने मुझे अभ्यावेदन किये हैं कि उन्हें अपने सगे संबंधियों से मिलने वापस अपने शहरों में जाने के लिये बहुत कम रेल सेवाएं उपलब्ध हैं।

 

*…* This part of the Speech was laid on the Table.

          इस समय उन्हें केवल तीन रेल गाड़ियों की सुविधा उपलब्ध है। पहली ट्रेन अजन्ता एक्सप्रेस हे जो सिकन्दराबाद-मनमाड़ के बीच चलती है, दूसरी तपोवन एक्सप्रेस है जो मुम्बई सी एस टी से नांदेड़ तक है और तीसरी देवागिरी रेलवे एक्सप्रेस है जो मुम्बई छत्रपति शवाजी टर्मिनल से सिकन्दराबाद के बीच चलती है।

          इन तीन गाड़ियों में से केवल एक गाड़ी अर्थात देवागिरी एक्सप्रेस मुम्बई छत्रपति शिवाजी टर्मिनल से निजामाबाद जाती है जिसके फलस्वरूप करीमनगर और निजामाबाद के लोगों को अपने घरों में जाने के लिये भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा स्टेट रोड ट्रंसपोर्ट सर्विसेज भी बहुत कम हैं तथा मंहगी है।

          इन हालात में उन्होंने निवेदन किया है कि सिकन्दरा बाद से मुम्बई सी एस टी (छत्रपति शिवाजी टर्मिनल)  के बीच चलने वाली अजन्ता एक्सप्रेस और मुम्बई छत्रपति शिवाजी टर्मिनल और नांदेड़ के बीच चलने वाली तपोवन एक्सप्रेस ट्रेन को निजामाबाद तक बढ़ाया है ताकि करीमनगर और निजामाबाद जिलों के लोगों को आने जाने की सुविधा मिल सके।

          रेलवे की जगह पर झुग्गी झोंपड़ियां बसी हुई हैं और महाराष्ट्र सरकार ने कानून बनाया है कि यदि ये झुग्गियां 1995 से पहले बनी हैं तो उन्हें तोड़ा नहीं जाना चाहिये। इसके बारे में रेलवे अधिकारियों और पुलिस के साथ काफी बहस होती है। यदि उन्हें वहां से हटाया जाता है तो महाराष्ट्र सरकार द्वारा उन्हें मुफ्त घर प्रदान करने चाहिये और इस समस्या का समाधान ऐमीकेबली किया जाना चाहिये।

          वेस्टर्न रेलवे, सैन्ट्रल रेलवे और हार्वर रेलवे पर चलने वाली गाड़ियां विशेषकर हार्बर रेलवे पर चलने वाली गाड़ियों के डिब्बे बहुत पुराने तथा जर्जर हालत में हैं। उनके अंदर सफाई नाम की कोई चीज नहीं है। स्टेशनों पर गंदगी फैली रहती है। पानी की व्यवस्था ठीक नहीं है। टायलेट बहुत गंदे होते हैं। रेलवे को इस ओर विशेष तौर पर ध्यान देना चाहिये और वहां बेहतर रेल सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिये।

          छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर 26.11.08 को जो हमला हुआ था, उसमें बहुत यात्री मारे गये थे। मैं आपसे विनती करता हूं कि उनको रेल मंत्रालय की ओर से कम से कम 10 लाख रूपये मुआवजा दिया जाना चाहिये और उनके परिवार में से एक व्यक्ति को उसकी काबलियत के मुताबिक रेलवे में नौकरी दी जानी चाहिये।

          श्री शशांक शिन्दे जो पुलिस ऑफीसर था, उसकी फायरिंग से दोनों आतंकवादी टाइम्स ऑफ इंडिया की तरफ चले गये नहीं तो बहुत बड़ा नरसंहार होता। शशांक शिन्दे इस हादसे में शहीद हुए। उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किये जाने की सिफारिश रेल मंत्रालय द्वारा की जानी चाहिये।

          महाराष्ट्र में हर स्टेशन पर घोषणा पहले मराठी में ही होनी चाहिये बाद में हिन्दी और अंग्रेजी में हो। प्लेटफार्मो पर भीख मांगने वालों तथा अन्य फेरी वालों को हटाया जाना चाहिये। मुम्बई में प्रतिदिन 25 लोग रेल हादसों में घायल होते हैं। समय पर ट्रीटमेंट न मिलने पर उनमें से कुछ की मृत्यु हो जाती है। अतः घायलों के उचित ट्रीटमेंट के लिए हर स्टेशन पर डाक्टर तथा एम्बुलेंस की व्यवस्था होनी चाहिये।

          स्टेशनों पर अपंग लोगों को स्टाल दिये जाने चाहिये तथा उनके डिब्बे भी बड़े होनी चाहिये। पूरे प्लेटफार्म पर शेड की व्यवस्था की जानी चाहिये।

          स्टेशनों पर टिकट लेने की लम्बी लम्बी कतारें होती हैं। अतः लोगों की सुविधा के लिये टिकट खिड़की की संख्या बढ़ाई जानी चाहिये। महिलाओं तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिये अलग से खिड़की होनी चाहिये।

          हार्बर लाइन पर विशेषकर कॉटन ग्रीन स्टेशन पर प्लेटफार्म और लेकल के बीच गैप है जिसके कारण दुर्घटनाएं हो जाती हैं। अतः वहां पर प्लेटफार्म को ऊंचा किया जाना चाहिये।

          हार्बर लाइन पर 12 डिब्बों वाली गाड़ियो चलाई जानी चाहिये। महिला डिब्बों में पुलिस तैनात की जानी चाहिये।

          डाकयार्ड स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज बनाया जाना चाहिये। हार्बर लाइन में पनवेल तक हर स्टेशन पर अप और डाउन दोनों ओर फुट ओवर ब्रिज होनी चाहिये।

          मझगांव, ताडवाडी, वाडीबन्दर, शिवदास, चापसी मार्ग को जोड़ने वाला प्रवासी मार्ग सेंडहास्ट रोड स्टेशन पर हैकोक स्टेशन के बीच फुट ओवर ब्रिज बनाया जाना चाहिये।

          बहुत से रेलवे स्टेशनों पर कूपन वेलिडिटी मशीनें बंद रहती हैं जिससे कूपन पंच करने में परेशानी होती है। अतः इस ओर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिये और उन मशीनों को चालू हालत में रखा जाना चाहिये।

          मुम्बई में 26.11.2008 को आतंकवादियों ने रेलवे और रेलवे स्टेशन पर जो हमला किया उससे लोगों में काफी घबराहट फैली हुई है। लोगों में असुरक्षा की भावना है। लोगों की सुरक्षा के लिए तथा रेलवे सम्पत्ति की सुरक्षा के लिए क्या उपाय किये गये हैं, इस बारे में भी बजट में कोई उल्लेख नहीं है।

          कोंकण रेल लाइन को दोहरा किये जाने की आवश्यकता है। मुम्बई में उपनगरीय लाइनों पर डबल डेकर गाड़ियां चलाई जानी चाहिये।

          कोंकण रेलवे में खो-खो खेल के लिए पुरूष और महिला टीमें बनाई जानी चाहिये और वेस्टर्न और सेंट्रल रेलवे में भी खो-खो खेल पुरूषों और महिला की टीमें बनाई जानी चाहिये। कोंकण रेलवे में पुरूषों और महिलाओं की कबड्डी खेल की टीमें बनाई जानी चाहिये।

          कोंकण रेलवे के लिए जो जमीन ली गई तो जो भूमिपुत्रों को प्रत्येक घर से एक व्यक्ति को रेलवे में रोजगार देने का वायदा किया था। अभी भी अनेकों परिवार हैं जिनके किसी भी व्यक्ति को रेलवे में रोजगार नहीं मिला। कोंकरण में रहने वाले और मुम्बई, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी, सिन्धु दुर्ग इनके लिए भी कोई एक्सप्रेस गाड़ी नहीं है। अतः इन क्षेत्रों के लिए एक्सप्रेस गाड़ियां चलाई जायें।

          जब यह हमला हुआ था तो स्टेशन पर सी सी टीवी कैमरा चल नहीं रहे थे। इसके लिए सर्विलैंस सिस्टम होना चाहिये। इनके पास 9 एम एम के राईफल्स, बुलेट प्रूफ जैकेट, बुलेट प्रूफ कार दी जानी चाहिये। रेलवे पुलिस को विशेष तौर पर छत्तीसगढ़ और इन्दौर में जैसे आर्मी और बी एस एफ वालों को ट्रेनिंग दी जाती है वैसी ट्रेनिंग दी जानी चाहिये।

          उपनगरीय रेलों के भाड़े में कोई कटौती नहीं की गई है जिसके कारण उपनगरीय गाड़ियों से यात्रा करने वाले लोगों  में भारी असंतोष है। अतः इन उपनगरीय गाड़ियों के भाड़े में भी उचित कटौती की जानी चाहिये।

          यदि रेलवे 90,000 करोड़ रूपये के लाभ में चल रही है तो हमें एम यू टी पी फेज 1 और 2 के लिए पूरा पैसा दिया जाना चाहिये। यदि रेलवे 90,000 करोड़ के फायदे में चल रही है और लोगों को अच्छी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है तो इस फायदे का क्या मतलब है।

 

 

I would like to draw your attention to some genuine and real facts as follows: –

1.       In the matter of recruitment to the various posts in Government offices and public sector under taking etc due and prime consideration is not being accorded to the provisions contained under constitution of India Laws passed by Parliament/State Assembly.  As such, element of Arbitrariness and favoritism is prevailed which, in term result in the present situation to recruitment in Railways.

2.       Some of the provision/Laws on the subject are reproduced here in under: Article: 344 (3). In making their recommendations under clause (2) the commission shall have due regarded to the industrial, cultural and scientific advancement of India and the just claims and the interest of persons belonging to the non-Hindi speaking areas in regard to the public services.

3.       On the basis of above provision Notification No. 2/8/60/0L dated 27th April, 1960 was issued by the President of India. Para 7 (b) there of is reproduced below:

          “7 (b) in the opinion of the committee the staff structure of the administrative agencies and departments of the central government should be reviewed and decentralized on a regional basis and the recruitment methods and qualifications may have to be revised suitably.”

                   It is seen that above provisions have not been implemented over a period of more than 45 years and thus led to present violence. 

4.       Extract from INDIAN RAILWAY ESTABLISHMENT MANUAL Volume-I (Revised Edition-1989) on perusal of pages 6,7,38,166,194 it would be seen that Notification of vacancies in Railways is required to be notified to local employment exchange.  In the context para  (iv) on page 194 is mentioned below:-

          “….and issued to Employment Exchanges within the recruitment unit and to the recognized Association of Scheduled Castes and Scheduled Tribes so that adequate publicity is given with a view of attracting the maximum number of local residents”  This directive is also not being compelled with thus arbitrariness and favoritism is introduced.

          An over-all review on the provisions detained under above there Para’s need to be considered on highest priority basses.   

5.       REPORT OF THE NATIONAL COMMISSION ON LABOUR: –

          Under para 7.39 (Son’s of the Soil):  it is on record that Rege, Committee referred to this question in relation to the observation made in the Bihar Labour Enquiry Committee that the “son’s of the soil” should be given their rightful share.  It is thus established that “son’s soil” concept was insisted upon by state of Bihar and as such they cannot shift to the other stand now being followed:  It is held by Hon. Supreme Court in (1996 (6) SCALE 676) that “it should be mandatory for the requisitioning authority/establishment to intimate the employment exchange” in the context D.O.P.T.O. dated May, 18th 1998 is relevant.  It is added that despite such a specific directive the vacancies are not notified to Mumbai employment exchange.

          The various directives in regard to printing in languages of money order and other similar forms made for use by public. Display of Notice in Regional language also” (Indian Railway Commercial Manual Volume-I) Exhibition of time tables fare lists etc in Regional languages i.e. Marathi are not being followed scrupulously by Government offices in General and Railways in particular. In this connection a brief data is mentioned below:-

Exams taken by Railway Recruitment Board Mumbai

          ASSISTANT STATION MASTER: – Employment Notice No. 2/98

          Written exams taken on 06.06.1999 and 12.11.1999, out of 364 Passed=343 NON MARATHI and 21 MARATHI

          TRAFFIC APPRENTIC: – Employment Notice No. 2/99,

          Written exams on 24.9.2000 and 21.11.2000: 40 Non-Marathi

          GUARD GOODS: Employment Notice NO. 2/2001

          Written exams on 30.3.2001: 99 Passed, 96 Non-Marathi: only 3 Marathi

          ASSISTANT DRIVER: Employment Notice No. 1/2001

          Written Exams & Saico Exam: 24.03.2002 and 26.03.2002

          375 Passed: 366 Non Marathi and only 9 Marathi.

          APPRENTICE CHEMICAL ASSISTANT: Written Exam. 2001. 2 Vacancies: All 2 will be Non Marathi.

          E.C.R.C.: Enquiry cum Reservation Clerk: Panel 11-10-2000

          39 Passed: 32 Non Marathi only 7 Marathi.

          ELECTRIC STATION MASTER (E.S.M.) GRADE-II

          Panel 29.10.2000.

          47 Passed: 30 Non Marathi, Only 9 Marathi.

           ELECTRIC STATION MASTER (E.S.M.)

          105 Passed: 90 Non Marathi, only 15 Marathi.

          E.S.M. Grade-II Dated: 30.1.2000.

          74 Passed: 63 Non Marathi, only 11 Marathi.

          STAFF NURSE: Sushi-I Dated 16.12.1998.

          65 Passed: 55 Non. Marathi, only 10 Marathi.

          STAFF NURSE: Sushi-II Dated 7.03.2001.

          27 Passed: 21 Non. Marathi, only 6 Marathi.

          STAFF NURSE: Sushi-III Dated 25.08.2002.

          29 Passed: 25 Non Marathi, only 4 Marathi.                                     

          R.R.B. NOTIFICATION 1016. MUMBAI

          Assistant Loco Pilot: – Employment No. 1505

          Dated 16 February, 2007 No. of Seats: -1016

          The facts of the matter appears as under 55000 appeared in exam from Mumbai R.R.B. passed out 76 only 15 are Maharastrian. Recruitment to Mumbai circle of Central Railway was conducted at Allahabad Railway Recruitment Board instead of Mumbai. Balance posts were filled up from Railway Recruitment Board Allahabad. Railway transferred 1016 to Maharashtra above fact reflected scant respect to the lawful procedure and strong Malafide intention about Maharashtrian. Does it mean that Marathi people those passing all other competitive exams in good numbers are not capable of passing the examination of Railways?  It clearly shows partisans approach by the Railway Ministry and extremely politically motivated thinking instead of maintaining healthy democracy and unity of the country. This must be immediately stopped and rectified.

          Assistant Loco Pilot: – Employment No. 1/2007.

          Total Seats 578 (Result declared in May 2008) Out of this 345 Mumbai Division, 77 Bhusawal, 56, Nagpur, 87, Solapur, 22 Pune among this only 15-20 are Marathi.

          From what has been stated in above it is established that the appointments are being made without consideration of Constitutional provisions law’s made by Parliament and thus appointments of 90/95% of Bihar amount to term as “Illegal/Irregular” in the light of Judgment by Hon. Supreme Court in Umadevi (3) (2006) 4. SSC-I and lead to declare these appointments as “Viod ab-anitio”, and hence these appointments made in Rly.  And Mumbai Income Tax Dept. State Bank of India are liable for Cancellation, in states of Orissa, Karanataka, Punjab and Goa there is wide speared of resentment against Biharies for their appointment in Railway in the states. 

With the formation of linguistic states it is incumbent upon Government to ensure that in each state the regional language is placed at the highest place, in Bengal there is Bengali, in Tamil Nadu there is Tamil, in Punjab there is Punjabi, in Bihar there is Bihari, in Gujarat there is Gujarati and in Maharashtra there is Marathi, so Marathi and Marathi people in Maharashtra must find highest place in all walks of life.  If you sincerely feel that true meaning is to the accorded to national spirit, the implementation of above constitutional provisions is most urgent.

 

It is also added that such matters have been brought to your notice through many letters since 2005 as well as attention of concerned secretary in the D.O.P.T/Cabinet Secretary was also drawn, it is mentioned that if due consideration and prompt action could have been taken earlier the present situation could have been avoided.

Hence, I request to your goodself as you are highly qualified and genius, kindly look into all the facts sympathetically and take appropriate action at the earliest. *

 

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record.

(Interruptions) …*

MR. CHAIRMAN: You can lay rest of the speech on the Table of the House. I am not allowing you any more.

(Interruptions) …*

MR. CHAIRMAN: Hon. Members, discussion on this Interim Railway Budget is over. Hon. Railway Minister will reply to the debate tomorrow.

          The House stands adjourned to meet tomorrow, the 19th February, 2009, at 11.00 a.m.

  22.07 hrs. The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock

on[r89]  Thursday, February 19, 2009/Magha 30, 1930 (Saka)       

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

* Not recorded.


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