MR. CHAIRMAN: Now, we will take up Item No. 12. Shri Vijay Kumar Malhotra to move the following. Time available is ten hours.
१६.४२ hrs.
Title: Discussion on the motion of Thanks on the President’s Address moved by Dr. Vijay Kumar Malhotra and seconded by Dr. S. Venugopal.
(दक्षिण दिल्ली): सभापति जी, मैं प्रस्ताव करता हूं :–
” कि राष्ट्रपति की सेवा में निम्नलखित शब्दों में एक समावेदन प्रस्तुत किया जाए :–
“कि इस सत्र में समवेत लोक सभा के सदस्य राष्ट्रपति के उस अभिभाषण के लिए जो, उन्होंने १९ फरवरी, २००१ को एक साथ समवेत संसद की दोनों सभाओं के समक्ष देने की कृपा की है, उनके अत्यन्त आभारी हैं। ”
MR. CHAIRMAN: Dr. S. Venugopal to second the Motion.
१६.४३ hrs. (अध्यक्ष महोदय पीठासीन हुए)
PROF. UMMAREDDY VENKATESWARLU (TENALI): Shri Vijay Kumar Malhotra, you can speak now.… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): It is not the normal tradition that ruling Party should move it and its partner to second it. The Seconder is absent. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Are you seconding it?
… (Interruptions)
SHRI SUSHIL KUMAR SHINDE (SOLAPUR): I am ready to second it. … (Interruptions) I have to speak on behalf of my Party. … (Interruptions) I have no hesitation in seconding Shri Malhotra. … (Interruptions)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): घोर लापरवाही है सरकार की, कि राष्ट्रपति जी को धन्यवाद देना है और मोशन को सेकेन्ड करने वाला सदस्य नहीं है।…( व्यवधान )
अध्यक्ष महोदय : रघुवंश जी, अब आपको क्या हो गया है?
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Vijay Kumar Malhotra, since you are the Mover, you can speak now. The Seconder comes later.
PROF. UMMAREDDY VENKATESHWARLU : Normally, the seconder has to move.
MR. SPEAKER: It is not taken up immediately. Shri Malhotra has to speak now.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Dr. Venugopal has come.
… (Interruptions)
DR. S. VENUGOPAL (ADILABAD): Sir, I second the Motion.
MR. SPEAKER: First, Shri Malhotra has to speak, then only you can second it.
डा. विजय कुमार मल्होत्रा: अध्यक्ष जी, श्री वाजपेयी जी की सरकार को लगभग पौने तीन वर्ष हुए हैं। इन वर्षों में अनेक दैवी और भौतिक आपदाएं देश पर आई हैं। वाजपेयी जी ने अणु विस्फोट करने के बाद विश्व के पहले छ: देशों में भारत को स्थान दिलाया, परन्तु उस समय हमारे देश पर बहुत से देशों ने सैंक्शन्स लगा दीं। जैसी सैंक्शन्स हमारे देश पर लगाई गईं वैसी सैंक्शन्स जिन देशों पर लगीं, वे देश बर्बाद हो गए। उन देशों की आर्थिक स्थिति बिलकुल नष्ट-भ्रष्ट हो गई। इन सारी सैंक्शन्स के बाद भारत की जो उपलब्धियां रहीं उनका उल्लेख राष्ट्रपति महोदय ने अपने भाषण में किया है।
अध्यक्ष जी, हम पर कारगिल का युद्ध थोपा गया। हमने उस पर विजय प्राप्त की, लेकिन विजय की बहुत बड़ी कीमत देनी पड़ी। उड़ीसा का सुपर साइक्लोन आया। उसके बाद गुजरात में एक विनाशकारी भूकम्प आया। इन सारी आपदाओं के बावजूद राष्ट्रपति जी ने उन उपलब्धियों का उल्लेख किया है जो वाजपेयी जी की सरकार में इस देश ने प्राप्त कीं। संसार का महानतम् महापर्व कुम्भ अभी संपन्न हुआ। जहां ८-१० करोड़ लोग, एक मास तक, एक नदी के किनारे, एक नगर में इकट्ठे हुए और उसमें एक भी ऐसी घटना नहीं हुई, कोई वारदात नहीं हुई, कोई हत्या नहीं हुई, कोई चोरी, डकैती, कोई अपराध नहीं हुआ। इस महापर्व के अवसर पर कुम्भ में पहली बार ऐसा हुआ है कि कोई विवाद अखाड़ों में या शंकराचार्यों में पहले स्नान करने के ऊपर नहीं हुआ। किसी भी प्रकार की कोई अप्रिय घटना नहीं नहीं हुई। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार बधाई की पात्र है और हमारे लिए यह गौरव की बात है।
अध्यक्ष महोदय, हमारी विदेशी मुद्रा का भंडार २ जनवरी, २००१ को ३८.५ बलियन डालर, यानी करीब ३,८५० करोड़ डालर अर्थात् १७७००० करोड़ रुपए था। इस देश में ऐसे हालात भी रहे हैं जब हमें अपना सोना गिरवी रखना पड़ा था और ऐसी भी स्थिति रही है कि इस देश में एक सप्ताह से अधिक के लिए भी फारेन एक्सचेंज नहीं था। ऐसी आपदाओं के बावजूद इस देश में इतना फारेन एक्सचेंज जमा है। यह सरकार की सफलता का प्रतीक है। पेट्रोलियम पदार्थों के आयात का बिल ८०००० करोड रूपये होने के बावजूद हमारे पास रिकार्ड विदेशी मुद्रा का भंडार है। हमारे पास कृषि उपज का बफरस्टाक ४० मलियन टन से अधिक है। इससे पूर्व इतना बफरस्टाक कभी भी नहीं रहा, यह स्थिति भी अपने आप में एक रिकार्ड स्थिति है । पिछले साल खाद्यान्न की २०९ मलियन टन की रिकार्ड पैदावार हुई। हमारा देश दुनिया में सबसे अधिक दूध पैदा करने वाला और चावल, गेहूं और सब्जी पैदा करने ला दुनिया का दूसरा देश बन गया है ।
अध्यक्ष महोदय, कच्चे तेल के बढ़ते बिल को देखते हुए, कच्चा तेल प्राप्त करने की दिशा में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते हुए हमारी सरकार ने २५ और क्षेत्रों में पेट्रोल की खोज का कार्य प्रारंभ किया है जिससे कच्चे तेल के आयात बिल पर काबू पाया जा सकेगा।
अध्यक्ष महोदय, ५४ वर्ष की स्वतंत्रता के बाद भी हमारे देश में ५० करोड़ से ज्यादा लोग निरक्षर हैं और ५ करोड़ से ज्यादा बच्चे स्कूलों में नहीं जाते तथा छोटे-छोटे बच्चे कारखानों में काम करते हैं और अकाल मृत्यु को प्राप्त होते हैं। उनके लिए पूर्ण साक्षरता की योजना प्रारंभ की गई है और तीन वर्ष में पूरे देश को साक्षर बनाने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा। इसके लिए इसी वर्ष से योजनाएं प्रारंभ कर दी गई हैं। न्यायालयों और कचहरियों में मुकदमों की संख्या को कम करने के लिए १७३४ ट्रेक कोर्टस की स्थापना की जाएंगी जिससे न्यायालयों में लंबित मुकदमों का शीघ्र निपटारा हो सके।
अध्यक्ष महोदय, किसानों की बहुत बात कही जाती है, लेकिन पिछले वर्षों में किसानों के लिए कुछ नहीं किया गया। हमारी सरकार आने के बाद किसानों के कल्याण की अनेक योजनाएं प्रारंभ की गई है । एक करोड़ से ज्यादा किसानों को क्रेडिट कार्ड दिए गए हैं। इसके साथ ही उनको पासबुक दी गई है। अब किसानों को किसी पटवारी या महाजन के पास जाकर ऋण लेने के लिए गिड़गिड़ाने की आवश्यकता नहीं है। अब उसे किसी साहूकार या पटवारी का मोहताज नहीं होना पड़ेगा। वह सीधा रूरल बैंक में जाकर अपने क्रेडिट कार्ड और पासबुक को दिखा कर ऋण प्राप्त कर सकता है और उसका मनचाहा उपयोग कर सकता है। इसके साथ-साथ उसे इंश्योरेंस से भी जोड़ा गया है। यदि उसकी मृत्यु हो जाए तो ५० हजार रुपए और यदि घायल हो जाए तो २५ हजार रुपए मिलेंगे और इसके लिए उसे कोई प्रीमियम देने की आवश्यकता नहीं है। किसानों को क्रेडिट कार्ड के साथ इंश्योरेंस से जोड़ना, एक ऐसी उपलब्धि है जो पिछले ५३ वर्षों में किसी सरकार ने नहीं दी।
अध्यक्ष महोदय, यहां बहुत शोर मचाया गया कि विदेशों से बहुत आयात हो रहा है और चिन्ता प्रकट की गई। सदन में किसी न किसी बहाने से इस पर हमेशा कहा गया कि विदेशों से आयात सस्ता होगा, तो किसानों की हालत खराब हो जाएगी, उनका क्या होगा, लेकिन वस्तुस्थिति किसी ने नहीं बताई। मैं आपके माध्यम से देश की जनता को बताना चाहता हूं कि कांग्रेस की सरकार और युनाइटेड फ्रंट की सरकारों के समय में आयात शुल्क क्या था और आज हमारी सरकार के समय में आयात शुल्क क्या है। मैं बताना चाहता हूं कि गेहूं पर पहले निल आयात शुल्क था उसको ५० प्रतिशत किया गया है। चावल पर निल था, जिसको ७० से ८० प्रतिशत तक किया गया है। ज्वार,बाजरा और मक्का पर जीरो आयात शुल्क था जिसको ५० प्रतिशत किया गया है। बच्चों के आहार पर १६ प्रतिशत आयात शुल्क था जिसको बढ़ाकर ३८.५ प्रतिशत किया गया है। दूध के पाउडर पर जीरो था, उसको साठ प्रतिशत किया गया है। चीनी पर २७ प्रतिशत था जिसको बढ़ाकर ६० प्रतिशत किया गया है। मुर्गे के मीट और अन्य प्रकार के मांस के ऊपर १०० फीसदी और ७० फीसदी आयात शुल्क लगाने की व्यवस्था बजट में की गई है। चाय, काफी, नारियल पर ३५ प्रतिशत से बढ़ाकर ७० प्रतिशत आयात शुल्क कर दिया गया है। इससे ऐसा लगता है कि कोई आयात संभव नहीं होगा और हमारे देश के किसानों के हितों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचेगा।
अध्यक्ष महोदय, मुझे बहुत आश्चर्य हुआ जब कांग्रेस की अध्यक्षा ने किसानों की तथाकथित बड़ी भारी रैली की जो कि एक फ्लाप रैली थी जिसमें किसानों की बजाय मजदूरों को लाया गया। उसमें कहा गया कि देश में दूध बाहर से इम्पोर्ट किया जा रहा है, अनाज बाहर से लाया जा रहा है। यह सरकार किसानों द्वारा पैदा की जाने वाली चीजों को बाहर से आने को रोक नहीं रही है। मैं बताना चाहता हूं कि कांग्रेस के टाइम में जिन चीजों पर जीरो आयात शुल्क था उसको हमारी सरकार आने के बाद ७५, ८० और १०० फीसदी तक कर दिया है। पाउडर के रूप में दूध पिछले एक-डेढ़ साल में बिलकुल आयात नहीं किया गया, परन्तु दुनिया में भ्रम फैलाया जा रहा है और गलत आंकड़े पेश किए जा रहे हैं। वर्तमान सरकार किसानों को इतनी सुविधाएं दे रही है, उसके बारे में क्यों जनता को नहीं बताते। क्यों कांग्रेस के जमाने में किसानों को क्रेडिट कार्ड और इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं प्रदान नहीं की गईं, क्यों आपने आयात शुल्क नहीं बढ़ाया या लगाया, क्यों पासबुक नहीं दी गई, क्यों इंश्योरेंस नहीं किया गया, इस तरह की बातें क्यों कही जाती हैं ?
अध्यक्ष महोदय, सभी ग्रामों को सड़क से जोड़ने के लिए प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू कर दी गई है। इसके लिए इस साल २५०० करोड़ रुपए रखे गए हैं। देश के हर गांव को तीन साल के अंदर सड़क से जोड़ दिया जाएगा। हर गांव में पीने के पानी की योजना प्रारंभ की गई है। प्रधान मंत्री जी ने देश के उत्तर को दक्षिण से और पूर्व को पश्चिम से जोड़ने के लिए एक चतुर्भुज सड़क बनाने के लिए ९००० किलोमीटर की सड़क बनाने की एक योजना शुरू की है। विकसित देशों के समान अपने देश में भी सड़कों का स्तर उनके समान करने का प्रयास किया जा रहा है और इस हेतु कार्य शुरू कर दिया गया है और इस वर्ष १५०० किलोमीटर सड़क बन रही है। बाकी के लिए टेंडर हो रहे हैं, योजनाएं बन रही हैं और तीन वर्ष के अंदर ये सारी सड़कें मुकम्मल कर ली जाएंगीं।