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Title : Discussion regarding control of Fluorosis.
श्री हंसराज जी.अहीर सभापति जी, मैं आपको धन्यवाद देते हुए कहना चाहता हूँ कि देश में फ्लुओरेसिस जैसी एक बीमारी, जो विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लाखों-करोड़ों लोगों को प्रभावित कर रही है। पीने के पानी में फ्लोराइड का अधिक परिमाण में होना ही इस बीमारी की मुख्य वजह है। देश के अनेक राज्यों में, अनेक जिलों में पीने के पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा पाए जाने के कारण लोगों को इस बीमारी से मुकाबला करना पड़ रहा है। मैं इस फ्लुराइडयुक्त पानी के बारे में सरकार से कुछ कहने जा रहा हूँ। मैं चाहता हूँ कि देश की आजादी के करीब ५८ वर्षों के बाद भी हम देश के गरीब, गांव में रहने वाले लोगों को स्वच्छ पेयजल नहीं दे सके हैं[R39] जिस वजह से हमारे देश के हजारों- लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों लोग इस फ्लुओरेसिस बीमारी का मुकाबला कर रहे हैं। इस बीमारी के होने पर ये लोग जोड़ों के दर्द जैसे कमर में दर्द, गर्दन में दर्द, पीठ में दर्द और घुटनों में दर्द से पीड़ित होते हैं। इतना ही नहीं, इस बीमारी से पेट की आंतरिक बीमारियां जैसे भूख न लगना, डायरिया हो जाना, नाक बहना, थकान अनुभव करना आदि भी हो जाती हैं। इस बीमारी की वजह से एनीमिया हो जाता है, हिमोग्लोबिन भी कम हो जाता है। एक मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार फ्लुओरेसिस बीमारी से गांव में रहने वाली गर्भवती औरतों को गर्भपात की आशंका भी रहती है और पुरुषों में नपुंसकता आ सकती है। इस तरह से फ्लोराइडयुक्त पानी के पीने से अगर नागरिकों को ऐसी बीमारियां होती हैं, तो सरकार द्वारा लोगों को शुद्ध जल मुहैया कराने के लिए कोई प्रभावी प्रयास नहीं हुआ है।
MR. CHAIRMAN : Hon. Member, you are not to make a speech. You can speak about the fluorosis disease. The main Question has been answered. This is Half-an-Hour discussion from it. Please conclude.
श्री हंसराज जी.अहीर : हमारे देश में २१ राज्यों में फ्लुओरेसिस बीमारी पाए जाने के प्रमाण मिले हैं और यह बीमारी अशुद्ध जल पीने की वजह से होती है। करीब-करीब २,१६,००० गांवों में लोगों की संख्या बढ़ने के प्रमाण मिले हैं, जो कि अशुद्ध जल पी रहे हैं और फ्लुओरेसिस बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। हमारे यहां एक गैर सरकारी संगठन द्वारा कराए गए सर्वे के अनुसार यह पाया गया कि देश में ७० प्रतिशत जल अशुद्ध है। संयुक्त राष्ट्र संघ के सर्वे के हिसाब से १२२ देशों में लोगों को घटिया पीने का पानी सप्लाई होता है,
जिसमें से हमारे देश का नम्बर १२०वां है। हमारे देश में विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र की जनता ऐसा जल पीकर इस बीमारी का मुकाबला कर रही है। मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि ऐसे गांवों में, जहां लोगों को अशुद्ध पानी पीना पड़ता है, स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए सरकार को योजना बनानी चाहिए, जिससे हम गरीबों को, गांवों में रहने वाले लोगों को पीने का शुद्ध जल उपलब्ध करा सकें।
श्री शैलेन्द्र कुमार माननीय सभापति महोदय, श्री हंसराज अहीर द्वारा फ्लुओरोसिस बीमारी के सम्बन्ध में दिनांक २५.११.२००५ को पूछे गए अतारांकित सवाल के जवाब में हम यहां आधे घंटे की चर्चा कर रहे हैं। मैं आपके माध्यम से मंत्री जी को कुछ सुझाव देना चाहूंगा और कुछ प्रश्न भी पूछना चाहूंगा। माननीय सदस्य ने अभी अपनी बात का जिक्र करते हुए कहा, तो यह बात सत्य है कि पानी और पेट का सीधा सम्बन्ध है। सभी रोगों की जड़ पानी है। बड़े दुर्भाग्य की बात है कि आजादी के ५७ वर्ष बीत जाने के बाद भी हम लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं दे पाए हैं।
MR. CHAIRMAN : Hon. Member, you speak about the fluorosis disease. You confine your point to the disease. That is the question before you.
श्री शैलेन्द्र कुमार : मंत्री जी ने इस सम्बन्ध में तमाम योजनाएं बनाई हैं जैसे स्वजल धारा योजना है, जो कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बनाई गई है। इस योजना के बारे में कहा गया है कि २००६-२००७ तक देश के सभी गांवों में लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करा दिया जाएगा[R40] ।
सभापति जी, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहूंगा कि आज कैल्शियम की कमी है, चाहे ग्रामीण इलाका हो या शहरी इलाका हो, वहां पर सिवरेज का पानी, पीने के पानी की लाइन में सीधे जा रहा है और पानी उससे प्रदूषित हो रहा है। उसके लिए क्या माननीय मंत्री जी स्पेशल बजट का प्रावधान करेंगे। आपके माध्यम से मैं शहरी विकास मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय, दोनों का ध्यान आकर्षित कराना चाहूंगा कि ऐसे पानी से वभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न हो रहे हैं। मेरी मांग है कि क्या आप इसके लिए बजट का कोई विशेष प्रावधान करेंगे। धन्यवाद।
MR. CHAIRMAN : Prof. Rasa Singh Rawat. You can ask questions only.
PROF. RASA SINGH RAWAT Sir, I will ask questions, but let me say something about the particular problem also. फ्लुओरेसिस नाम की बीमारी जिस पानी में फ्लोराइड मिला हुआ होता है, उससे होती है। अभी जैसे माननीय हंसराज जी और शैलेन्द्र सिंह जी कह रहे थे हमारे राजस्थान के लगभग ५० प्रतिशत जिलों में यह बीमारी उग्र है। इसके कारण वहां बच्चों के शादी-ब्याह भी रुकने लग गये हैं। लोग कहते हैं कि जहां पीने का पानी नहीं है वहां बच्चियों की शादी करके क्या करेंगे। किसी भी कल्याणकारी शासन का यह पहला कर्तव्य है कि वह शुद्ध पानी मुहैया कराए। ग्रामीण विकास मंत्री महोदय यहां बैठे हुए हैं, रहीम का दोहा उन्होंने पढ़ा होगा।
“ रहीमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून, पानी गये न उबरे, मोती, मानस चून ” ।
शुद्ध जल जनता को पीने के लिए मिले, जिससे कोई बीमारी किसी को न हो। वैसे तो यह प्रश्न आदिवासी क्षेत्रों के बारे में है और हमारे आदिवासी जिले चाहे वह डुंगरपुर हो, बांसवाड़ा हो, उदयपुर हो, सिरोही हो, इन आदिवासी जिलों के अंदर फ्लोराइडयुक्त पानी पीने के कारण फ्लुओरेसिस नामक बीमारी से काफी लोग रोगग्रसित हैं। मेरा क्षेत्र अजमेर है और अंडर-ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट है, साथ में ग्राउंड वाटर एक्सप्लोरेशन कार्यक्रम की और ग्राउंड वाटर मॉनटिरिंग जहां पर होती है, इन तीनों की रिपोर्ट है कि अजमेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, डुंगरपुर, गंगानगर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, झुनझुनू., जौधपुर, नागौर, पाली, सिरोही और सीकर इलाकों के अंदर फ्लोराइड युक्त पानी मिलता है जिसके कारण फ्लुओरेसिस जैसी बीमारी का सामना करना पड़ता है। सेंट्रल गवर्नमेंट पैसे तो दे रही है, इसमें संदेह नहीं है। एआरडब्ल्यूएसपी नाम की जो स्कीम है जल-आपूर्ति कार्यक्रम के अंतर्गत और साथ में राजीव गांधी पेय जल मिशन के माध्यम से इन फ्लोराइडयुक्त गांवों को शुद्ध पेय जल देने का प्रयास तो कर रही है लेकिन सेंट्रल गवर्नमेंट ७५ और २५ के अनुपात में अनुदान दे रही है। आज राज्यों के पास संसाधनों की कमी है और यह समस्या भयावह है। क्या सरकार एआरडब्ल्यूएसपी और राजीव गांधी पेय जल मिशन के अंतर्गत राजस्थान सरकार के जो प्रोजैक्ट्स फ्लोराइड युक्त पानी की समस्या से निजात पाने के लिए केन्द्र सरकार को भेजे गये हैं, उन प्रोजैक्ट्स को पूरा करने के लिए शत-प्रतिशत अनुदान देगी। इसका (बी) पार्ट यह है कि इन्होंने लोक प्रशासन संस्थान के द्वारा समीक्षा कराई थी कि फ्लोराइड पानी की समस्या कितनी दूर हुई है, उसका बड़ा आश्चर्यजनक परिणाम आया है। मैं कहना चाहता हूं कि ये प्रोजैक्ट्स कब पूरे होंगे और पिछले दो साल के अंदर, राजस्थान के राज्यों को फ्लोराइडयुक्त जल से मुक्ति पाने के लिए, केन्द्रीय सरकार द्वारा वभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कितनी राशि प्रदान की गयी है? केंद्रीय सरकार द्वारा वभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कितनी राशि प्रदान की गयी है और कितनी राशि अभी बकाया है?क्या जो प्रोजेक्ट लंबित हैं, उनको पूरा करने के लिए शत-प्रतिशत अनुदान केंद्रीय सरकार प्रदान करेगी?
MR. CHAIRMAN : Prof. Rasa Singh Rawat, no rule applies in your case.
श्री लक्ष्मण सिंह सभापति महोदय, मैं केवल एक प्रश्न माननीय मंत्री जी से करना चाहूंगा। फ्लुओरेसिस बीमारी का कारण प्रदूषित पेयजल होता है। अभी कई माननीय सदस्यों ने बताया कि जल स्तर निरंतर गिरता जा रहा है। जिन राज्यों में जल स्तर गिरा हुआ है, वहां जल प्रदूषित हो रहा है।फ्लुओरेसिस की बीमारी फैल रही है। मेरे अपने संसदीय क्षेत्र राजगढ़, मध्य प्रदेश में आज ४०० गांव प्रभावित हैं। स्वच्छ पेयजल प्रदान करने के लिए बहुत सारी एजेंसियां पैसा देती हैं, यूनाइटेड नेशंस देता है, के.एफ.डब्ल्यू. जर्मनी देता है, इस प्रकार से बहुत सारा पैसा आता है और आप के शासन में जमा होता है, लेकिन कई बार यह राशि अन्य कामों के उपयोग में ली जाती है। क्या आप उसे रोकने का प्रयास करेंगे?
दूसरी बात, आईडब्ल्यूडीपी स्कीम का जो पैसा है, वह सीधे जिलों को भेजते हैं, जिन जिलों में योजनाएं चल रही हैं।क्या उसी तरह प्रदूषित जल के लिए जो राशि दी है, उसको सीधे जिलों में भेजेंगे?जो जिले प्रदूषित पेयजल फ््लुओरेसिस से प्रभावित हैं, क्या आप वहां राशि को सीधे जिलों को भेजेंगे, जिससे फ्लुओरेसिस की रोकथाम की जा सके।
MR. CHAIRMAN: Shri Ram Kripal Yadav, but you can only ask one question from the hon. Minister.
श्री राम कृपाल यादव महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि पूरे देश के पैमाने पर, जैसा कि कई माननीय सदस्यों ने बताया कि उनके राज्यों में बड़ी संख्या में पानी में फ्लोराइड पाया जाता है, जिसकी वजह से लोग बीमारी से ग्रस्त हो रहे हैं। बिहार में भी लगभग ७०० से अधिक गांवों में फ्लोराइड और अर्सेनिक युक्त पानी पाया जा रहा है, जिसकी वजह से काफी संख्या में लोग बीमारी से ग्रसित हैं।जिस जिले से मैं आता हूं, पटना जिला, रोहतास जिला, भोजपुर जिला, गृह जिला, इत्यादि कई ऐसे जिले हैं जहां कई गांवों में अशुद्धि पायी जा रही है। महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि उन गांवों के लिए, उन जिलों के लिए जहां फ्लोराइड और अर्सेनिक युक्त पानी लोगों को मिल रहा है और लोग बड़ी संख्या में बीमार पड़ रहे हैं। क्या इस बीमारी से उन्हें मुक्त करने के लिए कोई विशेष योजना आपके पास है, ताकि शुद्ध जल लोगों को मिल सके और वहां पर लोग बड़े पैमाने पर रोगों से ग्रसित हो रहे हैं, उससे उन्हें बीमारी से छुटकारा मिल सके।
MR. CHAIRMAN: Shri Yadav, you can only ask one question from the hon. Minister.
SHRI RAM KRIPAL YADAV : Yes, Sir, I am only asking one question from the hon. Minister.
MR. CHAIRMAN: Shri Yadav, you have already asked the question.
श्री राम कृपाल यादव : मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि क्या आप उन जगहों को फ्लोराइड और अर्सेनिक से मुक्त करने के लिए कोई विशेष राशि आवंटित करेंगे, ताकि लोगों को सहायता मिल सके और सरकार का जो कमिटमेंट है कि हम लोगों को स्वच्छ जल देंगे, उसे पूरा कर सकें तथा स्वच्छ जल की व्यवस्था कर सकें।
MR. CHAIRMAN: Shri Ashok Argal, but you can only ask one question from the hon. Minister.
श्री अशोक अर्गल मेरे संसदीय क्षेत्र मध्य प्रदेश के मुरैना के अंदर कई ब्लाक ऐसे हैं, जहां प्रति वर्ष कुपोषण से बच्चे बीमार हो जाते हैं। उस बीमारी का मुख्य कारण गंदा पानी होता है। यहां पर माननीय मंत्री जी बैठे हुए हैं, मैं जानना चाहता हूं कि जो लोग गंदा पानी पी रहे हैं, उनको स्वच्छ पानी दिलाने के लिए क्या आप कोई जांच समति भेज रहे हैं? जौरा शहर ऐसा है, जहां अधिकांश व्यक्ति पेट की बीमारी से पीड़ित हैं। मैं कहना चाहता हूं कि वहां कम से एक मेडिकल टीम जांच के लिए भेजी जाए जिससे पता लग सके कि क्या वहां लोग पानी के कारण ही बीमार तो नहीं हैं? करहाल ब्लाक में यही समस्या है, पहाड़गढ़ ब्लाक में भी पानी की समस्या है। वहां प्रतिवर्ष बच्चे बीमार होते हैं और कम से कम दस या बीस बच्चे मर भी जाते हैं।मेरा मंत्री महोदय से अनुरोध है कि इस ओर विशेष ध्यान दें और इसकी जांच कराएं।
MR. CHAIRMAN: Kunwar Manvendra Singh, you can put your question to the hon. Minister.
कुँवर मानवेन्द्र सिंह माननीय उपाध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से एक प्रश्न पूछना चाहता हूं। मैं मथुरा संसदीय क्षेत्र से आता हूं, जो भगवान राधाकृष्ण की जन्मस्थली है[c41] ।वहां करोड़ों यात्री दर्शन करने के लिए आते हैं। आपका नाम भी राधाकृष्णन है जो भगवान के नाम से मिलता-जुलता है। मथुरा में अधिकतर गांवों में खारा पानी है। आज भी वहां औरतें २-३ किलोमीटर दूर से सिर पर पानी लेकर आती हैं। लोग ज्यादा पानी ले जाने के लिए बैलगाड़ियों या ट्रैक्टरों में पानी लाते हैं। जल निगम की जो योजना थी, वह ठप्प पड़ी है। प्रान्तीय सरकार कहती है कि कर्मचारियों को तनख्वाह देने के लिए पैसा नहीं है। मैं आग्रह करूंगा और जानना चाहूंगा कि आने वाले समय में केन्द्र सरकार की जो योजनाएं हैं, उनके अन्तर्गत क्या वह मथुरा में पेय जल की समस्या को सुधारने में मदद करेगी?
ग्रामीण विकास मंत्री (डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह) : सभापति महोदय, मैं आसन और माननीय सदस्य श्री हंसराज अहीर जी का आभार मानता हूं कि उन्होंने जन-हित का सवाल उठाया। गांवों में जो करोड़ों गरीब आम आदमी हैं, उनकी बुनियादी समस्या जो पीने के पानी की है, उन्होंने उस पर आधे घंटे की चर्चा के माध्यम से ध्यान आकृष्ट किया। ५-६ माननीय सदस्यों ने अपने-अपने राज्य और क्षेत्र का सवाल उठाया। रासा सिंह रावत जी ने यहां श्लोक भी सुनाए। उन्होंने कहा क ” जल ही जीवन है” देश और दुनिया भर में इसका प्रचार होता है। ” क्षति जल पावक गगन समीरा, पंच रचित अति धरा सरीरा”
पानी की तीन समस्याएं हैं – एक अवेलेबिल्टी ऑफ वाटर, दूसरी सस्टेनेबिल्टी ऑफ वाटर, तीसरी क्वालिटी ऑफ वाटर। इन तीनों समस्याओं के समाधान के लिए पहले की सरकारों ने भी ध्यान दिया लेकिन उतना ध्यान नहीं दिया जितना दिया जाना चाहिए था क्योंकि यह गांव की बुनियादी समस्या है। सरकार ने पहले नम्बर की समस्या को निर्धारित किया है। गांव के लोगों के लिए ४० लीटर पानी प्रति-व्यक्ति होना चाहिए। शहरी क्षेत्रों में जो पानी का प्रबन्ध और खर्चा है वह अलग है। देहात का आदमी ४० लीटर में पानी भी पीएगा, भोजन भी बनाएगा, कपड़े भी धोएगा, उसी में नहाएगा और पशु-पक्षी के लिए भी उपयोग करेगा। उसका सभी कुछ काम ४० लीटर पानी में होता है लेकिन शहर वाले बाथरूम में एक बार प्रवेश करके मूत्र करेंगे तो १० लीटर पानी लेंगे, फ्लश खींचेंगे। मतलब यह है कि इसमें कोई संतुलन नहीं है। गांवों के लोगों के लिए कितना पानी उपलब्ध है, उस पर कितना खर्चा होता है और शहर के लोगों के लिए कितना खर्चा होता है? ठंडा पानी, गर्म पानी, बोतल का पानी, इनकी शहरों में अलग व्यवस्था है। गांवों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। हमने इन सब बातों पर ध्यान दिया।
भारत निर्माण का कार्यक्रम समयबद्ध करके बनाया गया। लोग जहरीला पानी पीते रहे, ऐसी बात नहीं होनी चाहिए। भारत निर्माण कार्यक्रम पर एक लाख ७४ हजार करोड़ रुपए खर्चा होगा जिस में एक खंड पीने के पानी का है। ६ खंडों में एक प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना है, दूसरा घर बनाना, तीसरा पीने का पानी, चौथा बिजली, पांचवा इरिगेशन पोटैंशिएल्टी सृजित करना और आठवां टेलीफोन लगाना है। भारत निर्माण के जो ६ खंड हैं, उनमें से एक खंड सबसे महत्वपूर्ण पीने के पानी का है। रासा सिंह रावत जी कह रहे थे कि इस पर ध्यान देने की जरूरत है। पहले एक हजार करोड़ रुपए, फिर डेढ़ हजार करोड़ रुपए, उसके बाद २ हजार करोड़ रुपए का बजट लेकर आए थे। शुरू में पीने के पानी का २९०० करोड़ रुपए का बजट उपबंध था[R42] । पीने के पानी के लिए एक वर्ष में यानि वर्ष २००५-०६ में ४३ फीसदी बढ़ोत्तरी करके ४०५० करोड़ रुपए बजट का प्रबंध किया गया…( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Nothing will go on record except the speech of the hon. Minister.
(Interruptions)* …
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : क्या आपके पास जल के विषय में उत्तर सुनने का धैर्य है? मैं एक-एक माननीय सदस्य का नाम पुकार कर सभी की बात का जवाब दूंगा कि किसने क्या-क्या प्रश्न उठाया है और उसका क्या जवाब है। पीने के पानी की बहुत गहन समस्या है और माननीय सदस्यों ने रुचि दिखाई है इसीलिए मैं सदन को इसके बारे में अवगत कराना चाहता हूं। आप संक्षेप में सुन लीजिए और जानकारी हासिल कर लीजिए। पिछले चार वर्षों में अभी तक ४००० करोड़ रुपए बढ़ाए गए थे और हम चार वर्षों में २६००० करोड़ रुपए खर्च करेंगे यानि चार गुना ज्यादा खर्च करेंगे। इसका मतलब जहां पहले चार हजार करोड़ तक पहुंचे थे अब उस पर सालाना २६,००० करोड़ रुपए, जो पहले से अधिक है, खर्च किया जाएगा। हमारी द्ृष्टि बुनियादी समस्या पर है। अगले चार वर्षों में देश में कोई भी जहरीला पानी पीने को मजबूर नहीं होगा और न पानी की कमी रहेगी। इसके साथ न ही अवेलेबिल्टी की कमी रहेगी और इसमें सस्टेनेबिल्टी ऑफ वाटर भी किया जाएगा। भारत निर्माण की स्थिति से हमने माननीय सदस्यों को अवगत करा दिया है।
कुछ माननीय सदस्यों ने फ्लोराइड का सवाल उठाया है। देश भर में दो लाख सोलह हजार हैबिटेशन्स दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। हमारे पास राज्यवार आंकड़े मौजूद हैं, हम माननीय सदस्यों को इससे भी अवगत कराएंगे। इसमें सबसे जहरीला पदार्थ आर्सेनिक है। आर्सेनिक को गांव में लोग विष नाम से जानते हैं। इसे पीने से चर्म रोग, कैन्सर आदि बीमारियां हो जाती हैं और आदमी मर जाता है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव बंगाल में हैं, हम आपको आंकड़ा बता देते हैं। इसके बाद फ्लोराइड की बात आती है। माननीय सदस्य श्री हंसराज अहीर फ्लोराइड के बारे में सुनने के लिए बड़े बेचैन हैं। फ्लोराइड से अफैक्टिड पानी जब लोग पीते हैं तो हड्डी टेढ़ी हो जाती है। इन्होंने बिल्कुल ठीक जिक्र किया है कि जोड़ों का दर्द हो जाता है। फ्लोराइड का प्रभाव ३१३०६ हैबीटेशन्स में है। आर्सेनिक से ५०२९ गांव प्रभावित हैं। पश्चिम बंगाल में इसका प्रभाव ज्यादा है जो कि आठ जिलों में है। इसके बाद बिहार का स्थान आता है, वहां फ्लोराइड से प्रभावित ३५ गांव हैं। फ्लोराइड का प्रभाव आंध्रा प्रदेश में भी ज्यादा है जिससे ३०७२ हैबीटेशन्स प्रभावित हैं।
* Not Recorded.
उत्तर प्रदेश के बारे में एक माननीय सदस्य ने सवाल उठाया है। उत्तर प्रदेश में इससे १०४६ हैबीटेशन्स प्रभावित हैं। उत्तर प्रदेश में सैलनिटी से २९५ गांव, आयर्न से २१९८ गांव, मल्टीपल फैक्टर्स से १५२२ गांव प्रभावित हैं, कुल ५०६२ गांव प्रभावित हैं। मध्य प्रदेश का सवाल दो सदस्यों ने उठाया है। मध्य प्रदेश में फ्लोराइड से ३७७४, सैलनिटी से ६०४, आयर्न से ८५ और मल्टीपल फैक्टर्स से १५७ हैबीटेशन्स प्रभावित हैं, कुल ५३८१ गांव प्रभावित हैं। …( व्यवधान) कृपया करके आप सब सुन लें। अगर इसके बाद भी आप संतुष्ट नहीं होंगे तो फिर प्रश्न पूछें।
MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record.
(Interruptions)* …
MR. CHAIRMAN: Mr. Minister, have you completed the reply?
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : माननीय सदस्य पूछ रहे हैं इसलिए हम बता रहे हैं। राजस्थान में फ्लोराइड से ८०९२, सैलनिटी से ५४२८ और नाइट्रेट से ७८८२ हैबीटेशन्स अफैक्टिड हैं[MSOffice43] ।
18.00 hrs.
मल्टीपल १८६३९, कुल मिलाकर ४१०७२ हैबिटेशन राजस्थान में दूषित पानी पीने के लिये मजबूर हैं। हरियाणा में फ्लोराइड १४४ हैबिटैंट्स में सैलेनिटी ७२ और मल्टीपल १४५ है। इसी तरह कर्नाटक में ५००० हैबिटैंट्स में फ्लोराइड था। अब जो कुछ खर्चा हो रहा है,वह राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है लेकिन हम य़हां से आर्थिक और तकनीकी सहायता देते हैं। इसलिए १२वें वित्त आयोग का ध्यान इस ओर गया है। आंध्रा प्रदेश को फ्लोराइड के लिये ३२५ करोड़ रुपया, पश्चिम बंगाल को आर्सैनिक के लिये ६०० करोड़ रुपया, राजस्थान को१५० करोड़ रुपया और हरियाणा के १०० करोड़ रुपया दिया गया है। हमने ARWSP राजीव गांधी डिं्रकिंग वाटर मिशन में राज्य सरकार १५ परसेंट राशि खर्च कर सकती है। जहां तक क्वालिटी पानी की समस्या है, उसके लिये राजीव गांधी डिं्रकिंग वाटर मिशन में सब कमीशन प्रोग्राम है। खासकर क्वालिटी पानी की समस्या है, उसके लिये ज्यादा खर्च करेंगे। ARWSPमें पानी की उपलब्धता के लिये केन्द्र और राज्य सरकार का ५० प्रतिशत की राशि का अंश रहता था लेकिन पीने के पानी के लिये ७५ परसेंट केन्द्र सरकार और २५ परसेंट राज्य सरकार को खर्च करना होता है। इसलिये उसमें १५ परसेंट से ज्यादा खर्चा करना है। जब एन.डी.ए. सरकार आई तो इस स्कीम को बंद कर दिया गया था।
* Not Recorded.
MR. CHAIRMAN : Please conclude.
… (Interruptions)
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : फिर भी हम उसे चालू करना चाहते हैं। मैं सदन को वचन देना चाहता हूं कि चार वर्षों के अंदर जो दूषित पीने के पानी की समस्या है…( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record except what the hon. Minister says.
(Interruptions)* …
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : जो राज्य सरकारें प्रोजैक्ट चलाती हैं, उन्हें हम सहायता करेंगे और हम बिहार के लिये भी राशि देते हैं। मैं बताना चाहूंगा कि बिहार सरकार को जो पैसा गया है, वह उसने खर्च नहीं किया है, रिपोर्ट नहीं दी है। अगर खर्च करने के बाद भी पैसे की जरूरत है तो सहायता दी जायेगी। आम जनता को पीने के पानी की समस्या नहीं होने दी जायेगी। उत्तर प्रदेश के लिये हमने ५-६ दिन पहले ही राशि जारी की है।
सभापति जी, माननीय सदस्यों ने फ्लोराईड के बारे में पूछा, मैंने उसका समाधान कर दिया लेकिन ट्राइबल ऐरिया के लिये नहीं पूछा, इसलिये हम कुछ नहीं बता पाये हैं। हमने फ्लोराइड की समस्या से निपटने के लिये १३०० करोड़ रुपये दिये हैं। माननीय सदस्यों से अपेक्षा है क वे राज्य सरकारों को मुस्तैद करें। टैस्िंटग लैबोरैटरीज में पीने के पानी की जांच के लिये प्रखड स्तर पर तथा पंचायत स्तर पर मदद देना चाहते हैं। गरीबों के लिये शुद्ध पीने के पानी की कमी नहीं रहे, इसके लिये बजट बढ़ाया है और टाइम बाउंड प्रोग्राम के अंडर भारत निर्माण कराया है[RB44] । हम चाहते हैं कि आम गरीब लोगों को पीने के पानी की असुविधा नहीं हो। यह बात सही है कि आधी से ज्यादा बीमारियां अशुद्ध जल पीने कारण होती हैं। अशुद्ध जल से डायरिया, फ्लूरोसिस तथा अनेक दूसरी बीमारियां होती हैं। यदि पानी शुद्ध है तो आधी बीमारियां हमारे देश से वैसे ही खत्म हो जाएंगी। इसके अलावा गरीब आदमी इन बीमारियों के इलाज के लिए पैसा भी नहीं जुटा पाते हैं।
सभापति महोदय, अंत में मैं उन सभी माननीय सदस्यों का धन्यवाद करता हूं जिन्होंने इस विषय में रुचि ली और इस सवाल को उठाया। सभी सवालों के जवाब केवल भाषण करने से नहीं, बल्कि करनी से, बजट उपबंध करके, राज्य सरकार, पंचायती राज और केन्द्र सरकार, सभी के परस्पर सहयोग से इस पीने के पानी की समस्या को हल करने के लिए हम तत्पर हैं। अंत में मैं सभी माननीय सदस्यों का धन्यवाद करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं।
* Not Recorded.
MR. CHAIRMAN : If you cooperate, we shall take up Special Mentions. Otherwise, we may not be able to finish. Please take only two minutes.