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Lok Sabha Debates
Drought Situation In Various Parts Of The Country. on 6 August, 2010


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Title: Drought situation in various parts of the country.

श्री शैलेन्द्र कुमार (कौशाम्बी):  महोदय, आपने मुझे अति अविलंबनीय लोक महत्व के प्रश्न पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं। आज पूरे भारतवर्ष में वर्षा लगातार नहीं हो रही है। वर्षा कहीं-कहीं हो रही है और कहीं-कहीं नहीं हो रही है। पूरे भारतवर्ष में सूखे की स्थिति है। मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान उत्तर प्रदेश की तरफ आकर्षित करना चाहूंगा। उत्तर प्रदेश की स्थिति बहुत खराब है। देश के ज्यादातर पिछड़े राज्य ही सूखे की चपेट में हैं।

          उत्तर प्रदेश में अभी तीन-चार दिन पहले वहां की सरकार ने केवल दस जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। जिसमें मेरा निर्वाचन क्षेत्र कौशाम्बी भी है। एक भेदभाव पिछली बार भी था और इस बार भी है कि मंत्रिमंडल में जो वरिष्ठ लोग हैं, उन्होंने अपने जिले को तो सूखाग्रस्त घोषित करवा लिया है, लेकिन बहुत से ऐसे जिले हैं जो आज भी सूखे की चपेट में हैं।…( व्यवधान) मैं आपके माध्यम से मांग करना चाहूंगा कि एक केन्द्रीय दल उत्तर प्रदेश के जिलों में भेजा जाए और सर्वे कराया जाए। सही मायने में जो जिले सूखे से पीड़ित हैं, उन्हें सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। पिछले साल ऐसे तमाम जिलों को छोड़ दिया गया था, जो कि हमारे बड़े नेताओं से संबंधित थे, राजधानी के आसपास के ले लिए गए। इसमें भेदभाव नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह किसान से संबंधित है। किसान को जब तक वर्षा नहीं मिलेगी, तब तक उसकी खेती नहीं होगी। पूरे उत्तर प्रदेश में धान की रूपायी हुई है, लेकिन वह पीला पड़ गया है। जब तक धान के कल्ले पर, धान की पत्तियों पर बारिश नहीं पड़ती है, तब तक धान अच्छी तरीके से नहीं उगता है। अभी हमारे माननीय सदस्य कह रहे थे कि बादल फटने से लेह-लद्दाख में जानमाल की हानि हुई है। मैं मांग करूंगा कि ऐसी जगह पर केन्द्रीय टीम भेजकर राहत कार्य करवाया जाए और जो भी पैसा केन्द्र दे, वह प्रभावित जिलों तक सीधा पहुंचे। सूखाग्रस्त जिला घोषित हो जाता है, लेकिन जो बेजुबान जानवर हैं, उनके लिए चारे और टीकाकरण की व्यवस्था होनी चाहिए, क्योंकि ऐसे समय में महामारी फैलती है। जिन सीमान्त और लघु कृषकों की फसल चौपट होती है, उन्हें फसल बीमा योजना के तहत सुविधाएं दी जाएं। स्थानीय जनप्रतिनिधि, जिनमें संसद सदस्य हों अथवा विधान सभा के सदस्य हों, कोई भी राहत सामग्री जब भेजी जाए तो कम से कम उनसे विचार विमर्श करके, जिले की मीटिंग करके राहत पहुंचायी जाए। इन्हीं बातों का निवेदन करके मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।


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