14.08 hrs (लोक सभा १४०८ बजे भोजनावकाश के उपरान्त पुन: समवेत् हुई।)
. (Shri Devendra Prasad Yadav in the Chair)
Title: Further discussion on the Constitution Scheduled Castes Orders (Amendment) Bill 2001 moved by Dr. Satyanarayan Jaitya on 18th July, 2002 (Not concluded).
MR. CHAIRMAN : The House will now take up item no. 9.
(अम्बाला) :सभापति जी, जैसा मैं कल कह रहा था कि पांच अक्टूबर, १९७९ को भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी किया कि हरियाणा प्रदेश में रमदासिया जाति को रविदासी या समदासी के समक्ष समझा जाये और इसे १९५० की जातियों की जो शैडयूल्ड लिस्ट है, उसमें लिस्ट दो में से निकालकर लिस्ट तीन में डाल दिया जाये। लेकिन साथ में गृह मंत्रालय ने यह भी शर्त लगा दी कि यह जो प्रस्ताव पेश किया गया है, यह भारत की किसी भी कोर्ट में तब तक चेलेंज किया जा सकता है, जब तक यह पार्लियामेंट में पास न हो। १९७९ से लेकर आज तक इतना समय बीत गया, इस बीच में कितने ही अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को रोजगार से सम्बन्धित और विकास की योजनाओं से सम्बन्ध कितनी कठिनाइयां आई होंगी। कितने लोगों को वंचित होना पड़ेगा, इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं। मैं प्रधान मंत्री जी को और जटिया जी को बधाई देना चाहूंगा कि इन्होंने अपने कार्यकाल में न केवल सरकारी स्तर पर एक कांफ्रेंस दलितों की समस्याओं को हल करने के लिए की, बल्कि १५ मई, २००२ को अनुसूचित जाति एवम् जनजाति फोरम के अंतर्गत एक बहुत बड़ा सेमिनार संसदीय सौध में आयोजित किया। उस सेमिनार में भारत समस्त अनुसूचित जाति एवम् जनजाति के लोगों की समस्याओं पर विचार किया गया। आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने इन वर्गों के लिए अपने द्ृष्टिकोण को क्रिस्टल क्लियर शब्दों में बताया। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में अस्पृश्यता जारी रहेगी, तब तक आरक्षण भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आज जो नौकरियों में आरक्षण का मामला है, यह केवल आर्थिक विकास के साथ नहीं जुड़ा है, बल्कि इन जातियों का हक बनता है, जिनको हजारों साल से पीड़ित और शोषित किया गया। यह उनके दर्शन को दर्शाता है।
आज उसी का परिणाम है कि १९८० की जनगणना के अनुसार १९९१ में जहां राष्ट्रीय स्तर पर जनरल केटेगरी में शिक्षा का प्रसार ५२.२ प्रतिशत था, वहां अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों का ३७ प्रतिशत और ४१ प्रतिशत था। इसमें महिलाओं की स्थिति और भी खराब थी। १९८० की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जाति की केवल दस प्रतिशत लड़कियां ही पढ़ी लिखी थीं। बाद में यह बढ़कर २३.७० प्रतिशत हुईं। आज दसवीं पंचवर्षीय योजना में अनुसूचित जाति के बच्चों के लिए शिक्षा के लिए ३९० करोड़ रुपए प्रति वर्ष का प्रावधान किया गया है। इसी तरह से भारत सरकार ने राज्य सरकारों को छूट दी है कि सारे देश के अंदर १२५ बड़े-बड़े हॉस्टल बनाए जाएं, जिनमें केन्द्र और राज्यों का योगदान पचास-पचास प्रतिशत का होगा। लेकिन राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति को देखते हुए मैं केन्द्र सरकार से मांग करना चाहता हूं कि इसमें केन्द्र द्वारा ५० प्रतिशत की जगह ९० प्रतिशत का योगदान होना चाहिए और यह सेंटर द्वारा प्रायोजित हो। इससे देश के वभिन्न हिस्सों में दलित छात्रों के लिए हॉस्टल बनें, जिनमें वे अच्छी शिक्षा ग्रहण कर सकें। इसी तरह से एक प्रावधान यह भी किया गया है कि जो भी अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के मेधावी छात्र देश और विदेश में जहां भी शिक्षा प्राप्त करना चाहें, कर सकते हैं और भारत सरकार उसका खर्चा वहन करने के लिए तैयार है।
बाबा साहेब अम्बेडकर के १११वें जन्म दिवस पर भारत सरकार ने अपने इस संकल्प को १४ अप्रेल, २००२ को दोहराया कि सरकार अनुसूचित जाति और जनजाति से सम्बन्धित ऐसे दस छात्रों को ६०,००० रुपए, ५०,००० रुपए और ४०,००० रुपए प्रति वर्ष प्रोत्साहन राशि के रूप में देगी, जो मेधावी होंगे। इसमें यह भी कहा गया कि अगर इन तीन केटेगरी में कोई महिला या छात्र नहीं आता तो उसके लिए अलग से ४०,००० रुपए का प्रावधान किया जाएगा। इसी तरह से सफाई कर्मचारी आयोग ने, अनुसूचित जाति विकास निगम ने नई-नई योजनाएं बनाकर हमारे देश के दलित समुदाय के आर्थिक और सामाजिक हितों की रक्षा करने की ओर पूरा ध्यान दिया है।
लेकिन इसके साथ-साथ मैं मंत्री महोदय से यह अनुरोध करना चाहूंगा कि भारत सरकार ने देश की इस महान संसद में अनुसूचित जाति और जनजाति के हितों की रक्षा के लिए एक के बाद एक तीन संविधान संशोधन पास किए। वह भी पास हो गया, लेकिन उसका इम्पलीमेंटेशन नहीं हो रहा है। मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि क्या इस संसद ने जो निर्णय लिए हैं, उनके मुताबिक देश के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को लाभ मिलने लगा है और नौकरियों में बैकलॉग पूरा किया जाने लगा है?बाबा भीमराव अम्बेडकर जी ने सपना देखा था कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग केवल मात्र झाड़ू लगाने के लिए पैदा नहीं हुए हैं, वे भी पढ़-लिख करIAS और IPSव इंजीनियरिंग क्षेत्रों में जायें और देश की टॉप से टॉप सेवाओं में जायें। मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि आपके मंत्रालय ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के कल्याण के प्रति जागरुक होकर ध्यान दिया है? देश की आजादी को आज ५५ साल हो गए हैं, इतने वर्षों के बाद भी अनुसूचित जाति वर्ग के ऊपर जो अत्याचार हो रहे हैं, उनके साथ जो भेदभाव किया जा रहा है, उसके बारे में सरकार की क्लीयर इन्स्ट्रक्शन के बाद भी कानून में जो प्रावधान किए गए हैं, सविल राइट प्रोटैक्शन या अन्य जो कानून हैं, उनके मुताबिक इम्पलीमेंटेशन हो रहा है। मैं यह जानना चाहता हूं कि स्पेशल कोर्ट के माध्यम से कितने लोगों को सजायें दी गई है? माननीय मंत्री जी इन चीजों की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है ।
महोदय, इन वर्गों के कल्याण के लिए भारत सरकार ने १२,५०० करोड़ रुपए खाद्यान्न के मामले में PDS सिस्टम में तथा इन वर्गों के आर्थिक उत्थान के लिए निश्चित किए हैं। इस पीडीएस सिस्टम के तहत ८० प्रतिशत अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को लाभ दिया जा रहा है। लेकिन आज भी देखने को मिलेगा कि कुछ राज्यों जैसे पंजाब और हरियाणा, जहां से मैं आता हूं, में फूड सरप्लस है और बिहार के अन्दर पलामू व उड़ीसा में कालाहांडी और पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग भूखों मर रहे हैं। उनके लिए शिक्षा के साधन भी उपलब्ध नहीं हैं। स्कूल जाने की बात वे क्या करें, उनको खाने तक के लिए भी नहीं मिलता है। आज बड़े-बड़े घराने के लोग अपने बच्चों पर एक-एक लाख रुपया महीना खर्च करते हैं और अपने बच्चों को विदेशों में पढ़ाने के लिए भेज रहे हैं, कन्वैन्ट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं और दूसरी तरफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोग जिन स्कूलों में जाते हैं, वहां अध्यापक नहीं है, अध्यापक हैं, तो टाट नहीं है । टाट हैं, तो चार्ट नहीं है। पांचवीं तक के बच्चों के एक ही अध्यापक पढ़ाता है। प्रारम्भिक कक्षा में अ,आ,इ,ई ४५ मिनट तक पढ़ाता है और फिर दूसरी कक्षा में जाकर २+२ पढ़ाता है। ऐसी स्थिति में ये बच्चे, कन्वैन्ट स्कूल के बच्चों से कैसे कम्पीट कर सकते हैं। इसके अलावा उनके सामने आज भी भोजन की समस्या बनी हुई है। इसलिए मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि उन्होंने जो राशि इस क्षेत्र में निश्चित की है, उसको बढ़ाया जाना चाहिए। देश में यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि आपके आदेशों का कहां तक पालन किया जा रहा है। इसके साथ ही राज्यों को सख्त आदेश दिया जाए कि इन वर्गों के लिए भारत सरकार जो भी स्कीम्स बनाती हैं, उनको इम्पलीमेंट करने के लिए राज्य सरकारें दिलचस्पी दिखायें ।
आज जरूरत है इन वर्गों के एजुकेशनल, सोशल एंड इकोनोमिक एम्पावरमेंट की। स्पेशल कम्पोनेंट असीस्टेंट के अंतर्गत इनके लिए जो भी पैसा निर्धारित किया, वह पैसा कहीं लेप्स न हो और ये अपने अधिकारों से वंचित न रह जाएं। इसी तरह देश के अंदर सात लाख के लगभग स्कवेंजर्स आज भी कूड़ा उठाने का काम कर रहे हैं। यह एक-दूसरे की डिग्निटी के खिलाफ एक ऐसा हीनियस क्राइम है, जो समाज के माथे पर कलंक है। आज मंत्रालय के सामने चुनौती है कि इस कलंक को हमें हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त करना होगा।
महोदय, मैं मंत्री जी की प्रशंसा करना चाहूंगा, १९९१ से लेकर आज तक भारत सरकार ने वभिन्न प्रदेशों के, इस मद के अंतर्गत ६७१ करोड़ १९ लाख रुपए खर्च किए हैं, लेकिन यह राशि और ज्यादा बढ़ाई जानी चाहिए। आज भी सात लाख लोग स्कवेंजर्स के रूप में काम कर रहे हैं, उन्हें राहत प्रदान की जानी चाहिए। सेनीटेशन के जो मामले वर्षों से लम्बित पड़े हैं, इस तरफ भी ध्यान दिया जाना चाहिए। इसी तरह नेशनल फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कार्पोरेशंस के कार्य का भी विस्तार किया जाना चाहिए। मैं वर्तमान सरकार को बधाई देना चाहूंगा,…( व्यवधान)
सभापति महोदय : कटारिया जी, जो विषय है, आप उसी पर ही प्रकाश डालिए।
श्री रतन लाल कटारिया: महोदय, यह उसी से ही संबंधित है। इसी में से सब कुछ निकलेगा, जब सूची में समावेश किया जाएगा, जिन बातों को मैं बोल रहा हूं तभी तो मंत्रालय उन पर ध्यान देगा। विषय बहुत छोटा था, लेकिन उसमें से तभी कुछ निकलेगा जब सरकार के ध्यान में महत्वपूर्ण बातें लाई जाएंगी। मैं मंत्री जी को बताना चाहूंगा कि यह नेशनल फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कार्पोरेशन बनी है, हम चाहेंगे कि आप इसका जम कर इन वर्गों के उत्थान के लिए उपयोग कीजिए। अभी यक यह होता आया है कि कांग्रेस के ज़माने में प्रधान मंत्री हाथी पर बैठ कर आते थे और कहते थे कि हम गरीबी दूर करेंगे। इन वर्गों के लिए जब कोई लोन की बात आती थी तो कहते थे कि २००० रुपए सुअर और मुर्गी पालने के लिए ले लो। दो-दो हजार रुपए एससी एवं एसटी को कर्जा देने की बात करते थे। इनके जो बड़े-बड़े सत्तासीन लोग थे वे ५००-५०० करोड़ रुपए, हजारों-करोड़ रुपए लोन लेकर सुपर मिल लगाया करते थे। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : कटारिया जी, जो विषय है, उसी पर आप अपनी बात रखिए।
श्री पवन कुमार बंसल (चंडीगढ़) : अगर किसी ने इनके लिए कुछ किया है तो वह कांग्रेस ने ही किया है।…( व्यवधान)इन्होंने आज तक क्या किया है।…( व्यवधान)इन्होंने कानून बना दिए, लेकिन उनका पालन नहीं किया।…( व्यवधान)
सभापति महोदय : बंसल जी, आप अपना स्थान ग्रहण कीजिए।
SHRI A.C. JOS (TRICHUR): Sir, is he speaking on the Bill, or is he making an election speech? It seems he is making an election speech. He should speak on the Bill.
MR. CHAIRMAN: Please take your seat.
श्री रतन लाल कटारिया: बंसल जी मेरे दोस्त हैं और मेरे पड़ौस के सांसद भी हैं। इन्हें उत्तेजित नहीं होना चाहिए। मैं वे आंकड़े बोल रहा हूं कि जिस कांग्रेस पार्टी और राजीव गांधी जी के ज़माने में ४१५ एमपी होते थे, जिन्होंने एससी, एसटी का वोट लेकर ५० वर्ष तक देश के ऊपर राज किया, आज वे मार्जिनलाइज़ होकर, घटते-घटते ११२-११४ पर आ गए हैं। आज अनेकों काम हम इन वर्गों के लिए कर रहे हैं। यही कारण है कि आज हम दो से २०० तक पहुंच गए हैं और बढ़ते-बढ़ते हम उस टारगेट को प्राप्त करेंगे, जो किसी ज़माने में आपने ४१५ का प्राप्त किया था। यह आंकड़े बता रहे हैं कि हम इन वर्गों के कल्याण के लिए क्या कर रहे हैं और क्या संदेश जा रहा है? यह मैं नहीं कह रहा हूं।
अंत में मैं इस बिल का पूरा-पूरा समर्थन करता हूं और आदरणीय प्रधान मंत्री जी को यह बिल लाने के लिए बधाई देना चाहूंगा। मैं परम पिता से प्रार्थना करना चाहूंगा कि उनकी उम्र लम्बी हो ताकि वह एक के बाद एक इन वर्गों के कल्याण के लिए कदम उठाएं।
(TRIPURA EAST): Mr. Chairman, Sir, this Bill seeks to include eight communities of Scheduled Castes, exclude 24 communities of Scheduled Castes and modify 49 other communities in the List.
In total, it involves 81 communities. The States involved are 18. This number of States may be more.
Sir, after the drafting of the Bill, the Cabinet Committee on the Scheduled Castes, Scheduled Tribes and Minorities gave the green signal on 15th June, 1999. It was done three years back. At that time Bihar and Madhya Pradesh were not bifurcated. Now, Bihar has been bifurcated into Bihar and Jharkhand and Madhya Pradesh has been bifurcated into Madhya Pradesh and Chhatisgarh. This way, if we add Jharkhand and Chhatisgarh, the number of States may be 20 instead of 18.
Sir, I support the intention of this Bill. In entry 33, there is a proposal for inclusion of Dhuli, Sabdaka and Badyakarcommunities. Similarly, in entry 34, there is a proposal for inclusion of Natta and Nat communities. This is a proposal from the State of Tripura.
Sir, I cannot say that this Bill is a comprehensive one. There may be some more communities which deserve inclusion in the List. So, I cannot say that this Bill is anomaly-free or all the anomalies in the List, which was notified in the year 1950, are removed.
Sir, there are certain communities in West Bengal, viz.,Deswuali and Majhi which are mostly inhibited in three districts of West Bengal, namely, Purulia, Bankura and Midnapore. As per my information there was a proposal to include them in this List. Looking at their economic status and social background, they also deserve to be included in this List. But this proposal is not there in the Bill.
This way if we go throughout the country, there may be some more communities which deserve to be enlisted in this Bill. But they are not there.
Sir, there is a proposal for exclusion of 24 communities. I do not know what is the number of population of these 24 communities. It is not clearly stated in the Statement of Objects and Reasons attached to the Bill. In the Financial Memorandum it is stated that it is not possible to estimate the likely additional expenditure to be incurred on this account at this stage. So, they are unable to estimate the likely additional expenditure that may be there. It is very unfortunate. The Government should come with a comprehensive Bill giving the exact population of these 24 communities, which are going to be excluded from the List. I would like to know the reasons for their exclusion. The Scheduled Caste people belonging to these 24 communities are upgraded and they are now to be treated as general people. Their status is being uplifted. It is all right if this is the case. This is as per the provisions of articles 341 and 342 of our Constitution. I would like to quote article 341 with regard to the Scheduled Castes. It says:
As per this provision, even the Scheduled Caste and the Scheduled Tribe communities recognised by a State are not being recognised so in other places. As a result they are being confined to one place. For example, I belong to a tribal community of the State of Tripura. If I choose to settle in Delhi, my sons and daughters are not recognised as tribal people. I think this is not the intention of our Constitution. It is not the intention of our Constitution that the Scheduled Caste people should be confined to a particular area like the jail. This is not the correct position. My request is that a particular community having defined as either Scheduled Caste or Scheduled Tribe should be recognised so throughout the country. They can go and settle anywhere otherwise they develop a complex.
In the past 52 years, various Governments have implemented a number of developmental schemes for the upliftment of economic, social and educational life of these people. Huge amount of money is being allotted under this head in various Five Year Plans. Though the quantum of money allotted for the purpose is not meagre yet we find that instead of uplifting, the status of the Scheduled Caste and Scheduled Tribe people is coming down