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Lok Sabha Debates
Further Discussion On The Motion Regarding Expressing Anguish And … on 22 August, 2000

13.31 hrs.

Title: Further discussion on the motion regarding expressing anguish and deep sense of grief over the incidents of killing of innocent persons in Jammu and Kashmir and urging to appoint commission of inquiry.

गृह मंत्री (श्री लाल कृष्ण आडवाणी) : अध्यक्ष महोदय, कल प्रियरंजन दास मुंशी जी ने जो प्रस्ताव सदन में विचारार्थ रखा। वह है:

“That this House expresses its anguish and deep sense of grief over the incidents of killing of innocent persons including pilgrims of Amarnath Yatra in Jammu and Kashmir and urges upon the Government to appoint a Commission of Inquiry headed by a sitting Judge of a High Court to inquire into the matter with specific terms of reference to go into the aspect of security lapses, if any, and to report within three months from the date of its appointment.”

अब इस प्रस्ताव के तीन हिस्से हैं जिनमें से मैं समझता हूं कि दो हिस्सों के बारे में पूरा सदन एकमत है, किसी के विचारों में कोई भी अंतर नहीं है। पहला हिस्सा यह है कि जो घटनाएं इस अगस्त महीने के आरम्भ में जम्मू-कश्मीर में हुई, विशेषकर जिनमें अमरनाथ यात्री आहत हुए, हताहत हुए, उनके बारे में वेदना, व्यथा व्यक्त करना, उसके बारे में सारा सदन एकमत है। मैं मानता हूं कि इस बात की भी जांच होनी चहिए कि क्या इस घटना के होने में कहीं कोई सुरक्षा में कमी रही? यह एक कारण रहा, सरकार इसकी जांच करे। इस दूसरे पहलू के बारे में भी सारा सदन एकमत है। जितने लोग बोले हैं, उन सबने इस बात का जिक्र किया और एक उच्च स्तरीय समति गठित की गई है जिसके तीन सदस्य हैं तथा उनके जिम्मे किया गया है तथा जो तीन महीने की अवधि इस प्रस्ताव में रखी गई है, वही तीन महीने की अवधि वहां की सरकार ने भी निश्चित की है। Advisor (Security) to the Government of J&K, Lt. Gen. J.R. Mukherjee, Principal Secretary to the Home Department, Government of J&K, Shri C. Punsol and District Magistrate of Anantnag, Shri G.A. Peer. जहां पर यह पहलगांव का कैम्प था, श्री जी.ए.पीर, तीसरे सदस्य हैं। इनको कहा गया है कि आप तीन महीने के अंदर-अंदर इस बात की जांच करके बताएं।

Whether there has been any security lapse or dereliction of duty on the part of any Government functionary which made the militant act feasible or facilitated it in any manner.

In the event of suggesting security lapse, whether responsibility can be fixed and apportioned among the concerned Government functionaries and to make recommendations in this respect.

Whether the magnitude of casualty could have been contained after the initial burst of firing on the camp dwellers.

SHRI MANI SHANKAR AIYAR (MAYILADUTURAI): May I ask you a question?

SHRI L.K. ADVANI: No, please. I am not yielding.

इस समति के गठन के बाद इस सदन में जब चर्चा हुई तो माननीय प्रधान मंत्री जी ने स्वयं कहा

कि इस जांच के बाद अगर कोई बात ऐसी लगेगी, जिसके कारण सरकार को लगेगा कि अदालती जांच भी आवश्यक है, क्योंकि जैसा यहां पर लोगों ने कहा कि कभी-कभी इस प्रकार की एग्जिक्यूटिव जांच के सामने अगर कोई बड़े लोग अपराधी हों, मान लो कि मेरी सरकार का कोई दोष हो, राज्य सरकार में प्रमुख लोगों का कोई दोष हो, तो वह बात उसमें नहीं आएगी। इसलिए उस रिपोर्ट में ऐसा कोई भाव होगा कि जुडशियल एन्क्वायरी होना जरूरी है, तो प्रधान मंत्री जी ने संसद में कहा हुआ है कि हम उस समय उस पर जरूर विचार करेंगे, लेकिन आज जो स्थिति है, उस स्थिति में हमें आज किस बात पर विचार करना है? प्रियरंजनदास मुंशी जी ने सही कहा, जो साधारण सावधानी बरतनी चाहिए थी, वह बरती गई है या नहीं बरती गई है। आपने कहा कि कमीशन आफ एन्क्वायरी में हाई कोर्ट का सिटिंग जज होना चाहिए। जब मैं सदन में चर्चा सुन रहा था, इन दोनों विषयों पर पूरा सदन एकमत है, लेकिन हाई कोर्ट के जज द्वारा जुडशियल एन्क्वायरी होनी चाहिए, इसके बारे में प्रमुख दल भी प्रमुख दल से सहमत नहीं है। इस तरफ बैठे हुए अनेक लगे, उन्होंने कहा हम इस बात से सहमत नहीं है कि इसमें जुडशियल एन्क्वायरी होनी चाहिए। जांच होनी चाहिए और जांच में कोई दोषी निकले, तो उसको दंडित करना चाहिए। इस बात का किसी ने जिक्र नहीं किया कि सरकार की जो अपनी प्रतक्रिया जुडशियल एन्क्वायरी के खिलाफ हुई, तो उसका प्रमुख कारण था। मैं इस सदन के सामने बताना चाहूंगा कि करगिल युद्ध के बाद से लेकर प्राक्सी-वार तेज हो गई है। करगिल युद्ध में पराजित होने के बाद पाकिस्तान ने प्राक्सी-वार को तेज किया है। जब-जब घटनायें होती हैं, तो मैंने देखा है कि मलिट्री इन्स्टालेशन पर हमला करके दो आदमियों को मार जाते हैं या कोई बम विस्फोट होता है, जिसके कारण कुछ लोग मारे जाते हैं। ऐसी चीजों पर पाकिस्तान कुछ नहीं कहता है। लेकिन जब इस प्रकार के कोल्ड ब्लडेड मसैकर होते हैं, जब भी हुए हैं, जैसे छत्तीसिंह पुरा में हुआ, जिसमें पाकिस्तान द्वारा भेजे गए मलिटेंट थे, उन्होंने एके-४७ लेकर लोगों को मार दिया। जिस प्रकार से अभी हुआ। It was a blatant massacre by Pakistani militants. उसके बाद मैंने देखा है कि पाकिस्तान ने भी निन्दा की है। यह आश्यर्य की बात है। यह कोई साधारण बात नहीं है। …( व्यवधान)

कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज – उ.प्र.) : आप विश्वास कर रहे हैं ?

SARDAR BUTA SINGH (JALORE): Do you believe them?

श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मैं विश्वास नहीं कर रहा हूं।

महोदय, मैं आपको बताना चाहता हूं। पिछले दिनों २ अगस्त, ३ अगस्त, ४ अगस्त, ५ अगस्त के मैंने पाकिस्तान टीवी, पाकिस्तान रेडियो या पाकिस्तान रेडियो कहीं पर रिपोर्ट हुआ है, उसके एक्रुौप्ट्स देखे हैं। मैंने देखा है- On 2nd August, the Voice of America reported as:

“That the Pakistan Foreign Ministry spokesman, Shri Riaz Mohammad Khan, says, his country condemns the killings of civilians in Kashmir.”

Regarding the incidents on the 1st and 2nd August, he says:

“The possibility of involvement of the Indian forces in the attack cannot be ruled out.”

It is not only limited to this. The Pakistan Television News in English on 2nd August at 6.30 p.m. also said:

“The Indian troops and their agents in Occupied Kashmir have killed 86 people in different attacks.”

Kashmir Media Service reports that Indian armed agents raided Kandal village in Banihal area in Doda district killing 12 people. It is not that merely pilgrims were killed. वहां पर जो लोग मारे गए है, वे इंडियन ट्रूप्स में मारे गए हैं। The initial reports do not rule out the possibility of killings resulting from firing by the Indian forces. On 3rd August, the Pakistan Television News in Urdu at 2.30 p.m. said:

“Puppet Chief Minister – mind you – has organised this massacre in order to frustrate the offer of Hizbul Mujhadeen to hold talks with Indian authorities to bring about peace in the area. ”

 

I am not able to verify this. I would like to verify from the Zee T.V also. I doubt it because I know Mufti Mohammad Sayeed. मुफ्ती मोहम्मद जी के बारे में भी पाकिस्तान टी.वी. ने कहा। उन्होंने कहा कि यह फारूख अब्दुल्ला जी ने करवाया है। I do not believe he would have said it. But the Pakistan Television can go to this length! मैं और भी कई बातें बता सकता हूं, लेकिन मैं बताना नहीं चाहता। जब चार-पांच तारीख को चीफ मनिस्टर्स की कांफ्रेस हुई थी तब बहुत स्ट्रोंगली कश्मीर के चीफ मनिस्टर ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से एक कांस्टेंट प्रोपेगेंडा चला है कि जितने फस्र्ट और सैकिंड को मेस्सेकर हुए हैं, वे पाकिस्तानी मलिटेंट्स ने नहीं किए हैं, वे इंडियन ट्रुप्स से करवाए गए हैं और तब से लेकर सामान्यत: ज्यूडशियल इंकवायरी की बात कई बार कही जाती है, उसकी मांग की जाती है। हम भी पहले यह मांग करते रहे हैं। हमारी प्रतक्रिया वैसी नहीं होती, जैसी इस बार हुई। उसका कारण यह है- Here, we are facing a situation of a proxy war. किसी ने यह भी नहीं कहा कि यह कमी हो गई। मैं अगर डिटेल में जाऊं तो बता सकता हूं।…( व्यवधान)

SHRI ADHIR CHOWDHARY (BERHAMPORE, WEST BENGAL): That is why a judicial inquiry is required.… (Interruptions) Kashmir has got the highest concentration of the Army in the world. What is the death ratio between the militants and the security personnel?

SHRI L.K. ADVANI: I am not yielding because I am not making any allegation. I am merely saying that I agree with the spirit of the Resolution that has been adopted. मैं जो बात कह रहा हूं उसका भाव है कि यह बहुत बड़ा कांड हुआ है, इसके लिए वेदना ही नहीं है, बल्कि पूरे सदन की इच्छा है कि जांच होनी चाहिए कि कहीं कोई कमी तो नहीं रही। मैं आज पूरे तथ्य रखूं और यह प्रमाणित करने की कोशिश करूं कि कोई कमी नहीं रही, मैं ऐसा नहीं करूंगा। मुझे लगता है कि जो फेक्ट्स मेरे हाथ में हैं, वे ऐसे हैं, जिसके आधार पर कहा जा सकता है कि जितनी सामान्य सावधानी बरतनी चाहिए थी, उतनी की। हमारे देश के प्रधान मंत्री की अपने घर में हत्या हो गई तो क्या किसी ने सिक्युरिटी लेप्स की बात कही। मैं नहीं मानता हूं, होना नहीं चाहिए था, लेकिन हो गया और होने के बाद अगर उसके आधार पर सिक्युरिटी लेप्स हो गई, वहां जो लोग सिक्युरिटी पर थे उन्हें दंडित किया जाना चाहिए, अगर यह करेंगे तो क्या हम न्याय करेंगे। हम जिस प्रकार की प्रोक्सी वार लड़ रहे हैं और जिसके कारण कुल मिलाकर पिछले १०-१५ सालों में लोग इधर-उधर फैल गए हैं, हम कितने लोगों को फुलप्रुफ सिक्युरिटी दे पाए हैं, कितने लोग मारे गए हैं, मैं उनकी गिनती नहीं करवाता। हमें बहुत दुख

और अफसोस होता है लेकिन अगर किसी की मृत्यु हो जाए या इस प्रकार का नृशंस हत्याकांड हो जाए तो सिक्युरिटी लेप्स ही होगी, यह निष्कर्ष निकालने के लिए मैं तैयार नहीं हूं। हो सकता है कि सिक्युरिटी लेप्स हुई हो। जैसे आपने कहा कि आइडेंटिटी कार्ड दिए गए।…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Shri Chowdhary, please take your seat.

… (Interruptions)

SHRI L.K. ADVANI: I am not yielding.

MR. SPEAKER: Shri Chowdhary, this is too much. He is not yielding. Why are you interrupting him?

… (Interruptions)

SHRI MANI SHANKAR AIYAR : I think the hon. Minister referred to Shrimati Indira Gandhi’s death. The whole of the SPG was formed after that. What do you mean by saying : “We will not inquire into that?”… (Interruptions) We took a very specific decision.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Let him complete his reply. What is this? If any clarifications are there, after his reply you can seek and not now.

… (Interruptions)

SHRI MANI SHANKAR AIYAR : What he is saying is wrong.

श्री लालकृष्ण आडवाणी : मणिशंकर अय्यर जी स्पेसफिक केसेज़ का हवाला देते हुए कहते हैं कि नीतीश सेन गुप्ता की रिपोर्ट ने कहा था कि अमरनाथ यात्रा का रूट एलओसी के निकट नहीं होना चाहिए, फिर भी आपने कैम्प एलओसी के बिलकुल पास बनाया,…( व्यवधान)

श्री मणि शंकर अय्यर : उन्होंने कहा, मैंने नहीं कहा। इस सदन में ही नीतीश सेन गुप्ता ने आपसे दो सवाल किए थे, जो आर्मी डिप्लायमेंट पूरे रूट में होना चाहिए, वह हुआ या नहीं। दूसरा सुझाव था कि कैम्प एलओसी के निकट नहीं होना चाहिए। मैंने आपसे पूछा था कि यह सही है या नहीं।

…( व्यवधान)

श्री लालकृष्ण आडवाणी : मणिशंकर जी, आप नक्शा उठा कर देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि पूरा का पूरा रूट एलओसी से दूर है। पहलगाम का कैंप सौ किलोमीटर से ज्यादा दूर है।

निकट से निकट कोई स्थान है तो जम्मू है, आर.एस. पुरा भी निकट है। सारे का सारा अमरनाथ यात्रा का रूट उससे दूर है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर आज निष्कर्ष निकालते हैं कि सावधानी नहीं बरती गई। नीतीश सेन गुप्ता जी बैठे हैं। मेरे पास इनकी पूरी रिपोर्ट है। न टम्र्स ऑफ रैफ्रेंस और न रिकमंडेशन में यह लिखा है कि Security was not one of the terms of reference nor the 25 recommendations that he has made has anything to do with security. They are dealing with arrangements for the pilgrims because it was in the context of the natural calamities. It is in that context. It is with me. जितने सिक्योरिटी के रैफ्रेंस हैं They are in the context of the earlier Yatra. उन अर्लियर यात्रा में जितनी सिक्योरिटी की व्यवस्था थी, मेरे पास उसके पूरे प्रमाण हैं। वह इस बार पहले से ज्यादा थी। वहां आर्मी ज्यादा थी, पैरा मलिट्री फोर्सेज ज्यादा थी। इसके बावजूद यह हुआ। मैं यह कहा रहा हूं I am not going to draw any conclusions. I would not because the Committee is examining it. But all that I can say today is, कि यात्रा से पहले जितनी सावधानी प्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार को लेनी चाहिए, ली गई। उसके बाद किसी से गलती हुई तो उसकी पूरी जांच हो रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद जो आवश्यक होगा, हम कदम उठाएंगे।

दासमुंशी जी ने अपने भाषण के प्रारम्भ में कहा कि … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Nothing should go on record except the reply of the Minister.

(Interruptions) *

SHRI L.K. ADVANI: “If anything goes on in Jammu and Kashmir, I do not understand why is there a feeling among a section of the population to talk in a hushed tone or to talk less or to keep quiet.”

He was referring to, जब जम्मू-कश्मीर पर चर्चा होती है तो हम हश-हश करते हैं कि इसकी बात मत करो, उसकी बात मत करो। मैं सरकार की तरफ से कह सकता हूं कि यदि किसी विषय पर संसद और संसद के बाहर सबसे अधिक चर्चा हुई है तो जम्मू कश्मीर पर हुई है। इसी सत्र में मैं नहीं

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*Not Recorded.

जानता कि कितनी बार जम्मू-कश्मीर पर चर्चा हुई होगी? यदि कोई गिनती करें तो पिछले पांच हफ्तों में कोई शब्द इस सदन में सबसे अधिक बोला गया तो शायद जम्मू-कश्मीर ही होगा, मलिटैंसी होगा, दूसरा कोई नहीं होगा। फिर भी कोई कहे We are trying to suppress; we are trying to speak in a hushed tone; and we are trying to raise security issues in every matter. No. We are not. We have been frank. ऑटोनॉमी के इशू पर दो दिन चर्चा हुई। वहां जितनी भी कोई घटना घटी जिन का जवाब दे पाए, दिया। मैं इस बात को मानता हूं कि मैं मणि शंकर जी जितना अनुभव नहीं है। हम अभी-अभी आए हैं। वह इस बात को बार-बार कहते हैं। यद्यपि मुझे आश्चर्य होता है एक समझदार व्यक्ति एक साथ आरोप लगाते हैं तो कहते हैं कि You are immature; दूसरे वाक्य में कहेंगे you are Machiavellian. We cannot be both. दोनों चीजें मेल नहीं खाती हैं। मणि शंकर जी बहुत कुशल हैं, संसदीय पटु हैं। मैं उनके साथ काम कर चुका हूं। हम साथ-साथ कहीं गए थे। उनका भाषा पर जैसा अधिकार है, वह जितनी बढि़या अंग्रेजी बोलते हैं, मैं नहीं बोल सकता। …(व्य वधान) मैं ऐसा समझता हूं कि थोड़ी विनम्रता नुकसान नहीं पहुंचाएगी। मैं कोट नहीं कर रहा हूं। उन्होंने जो भाषा प्रधान मंत्री के लिए प्रयोग की वह सर्वथा आपत्तिजनक है। वह कम से कम उनकी संसदीय पटुता को चार चांद नहीं लगाती। मैं कोट नहीं कर रहा हूं। I have before me your speech, which I have read later on.

चाहे वह चीन की यात्रा हो या कहीं और की यात्रा हो लेकिन जम्मू कश्मीर के संदर्भ में १९४७ से लेकर आज तक के इतिहास की जब चर्चा करते हैं तो कहना पड़ेगा कि दशाब्दियों के दोषों का बोझ लेकर यह सरकार चल रही है जिसे हम केवल दो साल में ठीक नहीं कर सकते। हां, जो इश्यूज़ हमारे सामने है, वे लमिटेड हैं। इसलिये मैं जानता हूं कि लाहौर यात्रा करना उचित था या नहीं था। मैं समझता हूं कि लाहौर यात्रा के कारण इस देश की साख बनी है और हमारे प्रधानमंत्री श्री वाजपेयी जी के अलावा यह साख कोई और नहीं बना सकता था। उसके बाद दुनियाभर के देशों में, भारत-पाकिस्तान के संबंधों या भारत-पाकिस्तान के बीच में जो विवाद हैं,उसके संदर्भ में उनका रवैया बदल गया है। लाहौर यात्रा की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लाहौर यात्रा के बाद पाकिस्तान ने विश्वासघात करके कारगिल में जो किया, उस के लिये प्रधानमंत्री जी को कोई दोष नहीं दिया जा सकता है। चाहे कारगिल युद्ध हो या लाहौर यात्रा हो या किसी और ने कुछ कहा हो, हम सीज़ फायर करके बातचीत करने के लिये तैयार हैं, यह सरकार ने घोषित नीति के अनुसार कहा कि हम बात करेगे लेकिन यह सोचना कि हमने सैनिकों से कहा कि आप सावधानी छोड़ दें, यह सरासर गलत है।

एक बैठक २८ जुलाई को हुई थी जिसमें सभी लोगों ने भाग लिया था। The instructions in the field is like this. After the cease-fire offer was responded to by the Government on the 28th of July, then the Core Commander of the Core Group of USQ, Srinagar had a meeting at Srinagar on the 31st of July and in the second fortnight नतीजा यह हुआ कि दूसरे फोर्टनाइट में, जुलाई के महीने में, जब सीज़ फायर हुआ तो कुल मिलाकर ७९९ मलिटेंट्स मारे गये। सचमुच में जुलाई के महीने में हिज्ब से बात होने वाली थी जो नहीं हुई लेकिन कुल मिलाकर ७९९ मलिटेंट्स मारे गये। It has been the highest in any month in the last many years. उससे पूर्व के आंकड़े भी मैं दे सकता हूं लेकिन यह धारणा सरासर गलत है…( व्यवधान) .. हिज्ब की ऑफर के बाद हमने सावधानी छोड़ दी और उसके कारण यह घटना हुई, यह भी सरासर गलत है। हमारी तरफ से, सरकार की तरफ से, प्रदेश सरकार की तरफ से और जो यूनाइटेड कमांडर बना हुआ है, उसकी तरफ से यह निर्देश था । उसके बावजूद भी अगर यह घटना हुई तो प्रदेश सरकार ने उचित काम किया और एक हाई लैवल इंक्वायरी बैठा दी। वह इस बात की जांच कर रही है कि क्या हुआ और क्या नहीं हुआ? प्रधानमंत्री जी संसद में आश्वासन दे चुके हैं कि अगर रिपोर्ट आने के बाद आवश्यकता हुई तो हम अदालती जांच कराने में नहीं हिचकिचायेंगे। आज कहा गया कि इसकी कोई जरूरत नहीं है । मैं इसलिये श्री दासमुंशी जी से अनुरोध करूंगा कि वे अपना प्रस्ताव वापस ले लें।

श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल): अध्यक्ष महोदय, मेरा एक सवाल है।

अध्यक्ष महोदय : मुलायम सिंह जी, श्री दासमुंशी इस मोशन के इनशिएटर हैं।

श्री मुलायम सिंह यादव : आप मेरी मजबूरी जानते हैं।

अध्यक्ष महोदय : यह ठीक नहीं है।

श्री मुलायम सिंह यादव : अध्यक्ष महोदय, मैं ज्यादा लम्बा नहीं कहूंगा। इसमें दो बातों का जवाब नहीं दिया गया।

श्री लाल कृष्ण आडवाणी: मुलायम सिंह जी, मेरा कर्तव्य बनता है क्योंकि मैंने बीच में जिक्र किया था कि पाकिस्तान रेडियों ने कहा कि ज़ी टी.वी. पर श्री मुफ्ती मोहम्मद ने ऐसा कहा लेकिन मैंने अपने अधिकारियों से पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिये कहा। जब ज़ी टी.वी. से जानकारी ली गई तो मालूम हुआ कि श्री मुफ्ती मोहम्मद ने ऐसा कभी नहीं कहा। उन्होंने इतना ही कहा:

“There is definitely a design behind the killings at Pahalgam.”

This is all right. I can understand this. But they attributed it. कि फारूख साहब ने जानबूझकर करवाया, वह सरासर गलत था। यह प्रचार पाकिस्तान लगातार कर रहा था। इसलिये हमें लगता था कि इसकी ज्युडशियल इंक्वायरी कराने में हमें संदेह होता था कि पाकिस्तान ने करवाया है या हमारी ट्रुप्स ने करवाया है।

यह फारूख साहब ने जानबूझकर करवाया है, वह सरासर गलत था और पाकिस्तान लगातार यह प्रचार कर रहा था, इसलिए हमें लगता था कि इस स्थिति में जूडीशियल इंक्वायरी कराना, हमें भी संदेह होता है कि यह पाकिस्तान ने कराया है या हमारे ट्रूप्स ने किया है।

श्री मुलायम सिंह यादव : अध्यक्ष महोदय, मेरे दो प्रश्न थे, जिनका माननीय गृह मंत्री जी आपने कोई जिक्र नहीं किया। मेरा पहला प्रश्न था कि आतंकवादियो को कुचलने के लिए सरकार क्या-क्या कदम उठा रही हैं । जिसकी वजह से पहलगांव में तीर्थयात्रियों की हत्याएं हुई और अमरनाथ यात्रा बाधित हो गई। जिसकी वजह से पूरा देश चिंतित है और सारे हिंदुस्तान के मुसलमानों में दहशत है। क्या आपने हिंदुस्तान को मुसलमानों को विश्वास में लेने का प्रयास किया है और हिंदुस्तान में अगर आतंकवादियों को खत्म करना है तो मुसलमानों को व्सिश्थवास एवं साथ में लिये बिना हिंदुस्तान से कभी भी आतंकवादियों का खात्मा नहीं किया जा सकता है। हमें इन दोनों प्रश्न कें जवाब नहीं मिले हैं। इसलिए समाजवादी पार्टी आज इस सदन का बहिष्कार करती हैं।

१३.५६ बजे

( तत्पश्चात् श्री मुलायम सिंह यादव तथा कुछ अन्य माननीय सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।)

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): Mr. Speaker, Sir, I have heard the reply of the hon. Minister of Home Affairs with respect and rapt attention. The mover of the Motion, that is, myself and the entire Congress Party, had been accused of many charges yesterday by various sections of the ruling Alliance and marginally by some Members of the Opposition also.

I am not here to level charges and counter-charges. I have not heard Shri Advani’s reply. I have heard the reply of the Minister of Home Affairs of the constitutionally-elected Union Government. I have read history a little but not as much as the Union Minister of Home Affairs has read. In spite of aggressive campaign of mischief, distrust, mistrust and lies of Goebbels, Stalin was not shaken. But I find today that the campaign launched by the Pakistani terrorists has shaken the Home Minister of the Union of India and he would not respond to a challenge. I am very sorry to say this.

Several Members did say yesterday a few things. I will not go by names. What the Union Home Minister did say just now is totally in contradiction to his statement that he made the other day while replying to the debate on atrocities on the minorities. The Union Minister of Home Affairs did say just now that he cannot clean up the mishandling of the past, mismanagement of the past and follies of the past within two years. The Prime Minister and the Home Minister have been reiterating it for the last so many months. In Lahore, the Prime Minister said that the basis of talks with Pakistan was the Simla Agreement which was signed by Shrimati Gandhi. Was it a blunder? If so, say so. It is the same Home Minister and the Prime Minister who said in the House in the context of autonomy Resolution: “We cannot go back to pre-1953 situation. We cannot question and go back to the Indira Gandhi-Sheikh Abdullah Accord.” Was it a folly? If so, say so with confidence, guts, courage and conviction. It is the same Minister of Home Affairs who said two days back in the House that the partition of India on the basis of religion done by Pakistan might be wrong. But what Gandhi did, at that point of time was absolutely correct. Was it a folly? Why are you talking in two tunes within 48 hours? Therefore, I feel that as Shri L.K. Advani of the BJP, you are totally perfect but as Union Home Minister under the Constitution of India, you are confused and your inefficiency and incompetence have led the situation like this.

14.00 hrs.

Mr. Speaker Sir, you may accuse the Congress for anything. Well for the last fifty years, we might have done anything. If you talk of communal harmony, what could you do more than offering Mahatama Gandhi? If you talk about the integrity of the country and to continue to sing the song ‘Punjab Sindh Gujarat Maratha’, to sing the song, and to ring that bell ‘Punjab Sindh Gujarat Maratha’, what could you do but to offer Mrs. Gandhi? What could you do more to keep the unity of the nation, than to offer Rajiv Gandhi in Sriperumbadur? When you go to Shanti Vana, जब आप राजघाट पर जाते हैं तो गूंजता हुआ गान आपको सुनाया जाता है कि सारे भारत को एक बनाकर रखो। जब शक्ति स्थल पर जाते हैं तो सुनते हैं कि भारत के साथ पंजाब का रिश्ता बनाकर रखो। जब आप वीरभूमि जाते हैं तो सुनते हैं कि तमिलों से पूरे हिन्दुस्तान का रिश्ता हम बनाए रखें। वह राजीव गांधी की वीर भूमि है। क्या कर सकता हूं मैं? These are not the talks and emotions, these are realities of history. If you want to change it, you can change it, but do not try to confuse the country on the context of the given situation of Kashmir.

I would like to reiterate, Mr. Speaker Sir, on behalf of the Congress Party that to restore peace and to find solution in Kashmir, risking everything, we are second to none to stand by the Government and to support the Government. But it has to become transparent and spell out how they would like to handle it. It is their Government and not our Government. They should search the hearts of their own members of the BJP as to what they are talking about. I am not saying it.

Prof. Vijay Kumar Malhotra charged me yesterday that I brought the Motion under Rule 184 with a view to divide the Government and pull down the Government. No, we know our strength. When Shri Atal Bihari Vajpayee, the senior leader of this country, the respected Prime Minister and the most dignified and respected parliamentarian of this country brought the Adjournment Motion on Amarnath massacre on national calamity, was that aimed to pull down the Government? That Government also was not very strong Government. He also pointed out the callousness of the Government. He said, “What else can I do sitting in the Opposition, except to express the concern of the people?” What about a massacre of this magnitude?

Sir, we are a matured democracy of fifty years. Prime Minister after Prime Minister were changed by the people. Parliament took different dimensions year after year, yet the people of this country say ‘Long live Democracy, Long live India’. Now, we find a shelter, ‘we cannot do much, Pakistan TV is talking.’ Hon. Home Minister just now concede that apparently he feels that there was no security lapse. If he feels apparently that there was no security lapse, what gives him the trouble to accept the judicial enquiry?

Judicial Enquiry — when it was in terms of Shah Commission to bring Mrs. Gandhi into the dock, it was justified. That was the demand of the people. It was the Congress Government, which was never afraid of that. Pandit Nehru appointed a judicial enquiry into the allegations against Pratap Singh Kairon in Punjab. Grover Commission is welcome. विजय कुमार मल्होत्रा जी कहते हैं कि कमीशन से फायदा क्या होता है। सबसे बड़ा फायदा आपको हुआ मैं बता रहा हूं।

It is the same Government, in another kind of massacre limited to a family of Grahm Staines in Orissa, appointed a judicial enquiry in January after assuming the office. Who says, ‘the judicial enquiry takes long time?’ If the Government is strong, gives the time frame and cooperate with the Enquiry, it comes out with the report. Did Wadhwa Commission not come out with a report in three months? Is it not a fact? Let my friends from BJP say that Wadhwa Commission gave them strength to go to the people to tell them that they should not blame their party, they were not involved. Wadhwa Commission brought it so. Am I telling wrong? Before the Wadhwa Commission, the report of the National Commission on Minorities — the report is with me — accused their party and Dara Singh’s involvement in that case. Immediately, the Chairman of the Commission said, “I stop my work now because the Government of India has ordered an enquiry into the Manoharpur Tragedy by the Supreme Court Judge, Shri D.P. Wadhwa — Report is stopped.”

Shri D.P. Wadhwa came out and said, `The Government has to do this and that and I find that Dara Singh was not associated in the organisation.’ This truth helps him. But the truth that I want to bring for Kashmir, which will not blame CRPF constables, might expose the utter failure of the Home Ministry, total non-communication between PMO and HMO, between RMO and CMO. It would save the nation. It would save the morale of the people and strengthen the hands of no less than the Prime Minister. He is not realising what I am talking about. It was a lapse. I thought that the Home Minister, who talk often about the legacy of Sardar Patel in the House, would come and say, `Look, these are the lapses. I have booked so and so.’ He cannot say so because the pin will be there.

Mr. Speaker, Sir, the tragedy of the pilgrims cannot be compensated but at least the people could have known the truth. I am hearing the debate since yesterday and the entire Parliament, which passed the Commission of Inquiry Act in 1952, which responded to judicial inquiry in various capacities of the State Governments, and which is an architect of making this legislation, is now afraid to face its own legislation. For what? It is because Pakistan is campaigning. We are a matured democracy of 50 years of Republic. Suppose you do not go with my Motion, can you prevent the media from writing, can you prevent the electronic media from campaigning? We know about Pakistan’s design. We know about their gossips when something goes right or wrong. When Mrs. Gandhi was the Prime Minister, we know what Mrs. Bhutto used to say. When Shri Rajiv Gandhi was the Prime Minister, we know what Pakistan used to say. When there was a killing during `Dussehra’, their TV used to say, `Our people killed our people’.

Now, the Home Minister of India is giving only one logic. His entire argument today is that he has gathered that so and so have said in Pakistan Television. I, as a citizen of India, demand one thing from the Home Minister. If I am a member of the pilgrim family, I am not bothered about what Pakistan TV is telling, I am more concerned with what the Home Minister of India is explaining to me as a citizen, what was the security lapse.

You want to say, `The people of India, the pilgrims, who are a part of the people, the journey to Amarnath is a ritual of a Hindu religion, and the response of the Government will come in detail, but I cannot tell you the truth as to why the pilgrims had been killed. Gentlemen, please listen from the temple and the mosque, and Pakistan TV is saying that.’ Is it the answer from a matured democracy comparing Pakistan, whose democracy is controlled by the Army’s gun? Our democracy is controlled by the people’s desire. That is why, Shrimati Indira Gandhi, Nehru, Rajiv Gandhi, V.P. Singh, Morarji sat as the Prime Minister and Shri Atal Bihari Vajpayee is sitting as the Prime Minsiter today. You are saying, `We cannot do it simply because Pakistan TV is doing.’ Then, you yourself are insulting the security forces. You are giving a pre-judged message, `I know, you are involved, a part of you are involved. I cannot book you because Pakistan is campaigning.’ Here you say, `No security lapse’. If there is no security lapse, what is the fear in appointing a judicial commission? You yourself are confused, Mr. Home Minister. … (Interruptions)

Mr. Speaker, Sir, I have the great advantage of the presence of the hon. Prime Minister here today. Hizbul or no Hizbul, Hurriyat or no Hurriyat, is not the issue of the debate. None of my questions has been answered by Shri Advani today. I said that the date of Amarnath Yatra was known to the Government. In the surcharged atmosphere, the atmosphere is developing everyday. Releasing Hurriyat and disappointment of Shri Farooq Abdullah; dialogue process with Hurriyat and a message from Hizbul and anger of Lashkar-i-Toiba – did you plan the threat perception in a co-ordinated fashion with the Jammu and Kashmir Government, with the para-military forces, and with the Army? Now, you are talking that Lt. Gen. J. Mukherjee is the Convenor of the Committee, so and so including DMO of Anantnag.

In Anantnag, the massacre took place. The DM is involved to find out how the massacre took place.… (Interruptions) Does it enhance your credibility as the Union Home Minister? Does it give you the respect and the conviction of the people in such a serious matter? I wonder. How are you responding? You did not answer that question. I did ask you another question. Did you receive Intelligence report of the threat perception in the entire route in advance? Did you ensure that all the Langars are protected? You did not answer that. You did not answer this question also. What was your communication channel? It is because you replied in the House in the first day अभी तक मुझे पता नहीं है कि आर्मी वहां थी या नहीं। आपको अगर पता नहीं है तो क्या हमको पता रहेगा, गांव के लोगों को पता रहेगा। आपको जब पता ही नहीं है, आप खुद जब बे-पता हो गए हैं तो सदन के सामने आरोप लाने में हमारा क्या दोष है। मैंने तो रैज़िगनेशन की मांग नहीं की। If Congress should have demanded that unless Shri Advani resigns, we would not allow the House to continue, you could have said that Congress is trying to score political points. We did not do so. We know our responsibility, what difficult times we are facing and how the situation in Kashmir is developing.

We only wanted to know the truth. Let the truth come up after six months. It does not matter. Let the truth come after nine months. I said yesterday also. Let the truth be in camera. Let the future Government, future officials, future Home Ministers, future Prime Ministers or the present Prime Minister also get the truth as to what are all our basic lapses. You feel it is not necessary because it will demoralise the security forces. I say, no. The security forces will know that if anybody is to be demoralised in this judicial probe, Mr. Home Minister, it will demoralise you. You do not want to expose yourself, your incompetence, your inefficiency, your lack of perception, your lack of vision and your lack of dynamism to understand in a greater height the problem of Kashmir vis-à-vis Amarnath Yatra. That is why, you want to take the plea that the security forces will be demoralised. When a commander gets demoralised on seeing the Pakistan’s TV campaign, being the Home Minister, how can you add new morale to the security forces? I do not understand this.

Therefore, Mr. Speaker, Sir, our demand was not to score political points. But as per the established law of the land and the traditional convention of this country, a major incident like this should be looked into more objectively by a judicial probe. I can understand Graham Staines massacre and the massacre in Kashmir are two different matters. The only difference is, Orissa is not bordered with Pakistan whereas Jammu and Kashmir is bordered with Pakistan. You give the message to the country by your speech today that if something goes wrong even by the security forces, Kashmir police, by a constable of Kashmir police or even a woman lodges a complaint against him and if somebody demands a judicial inquiry, you will say, do not do it; Pakistan TV will campaign in a different way. We have such a weak democracy that we cannot absorb the shock of Pakistan’s campaign. What a sorry state of affairs? Today, in this Parliament, I feel pity for the Home Minister.

Therefore, Mr. Speaker, Sir, the entire Opposition had said that the lapses were there. The entire Opposition is unanimous about the incompetence, inefficiency of the Government. Yes, there are differences of perceptions. The CPI (M) has said that the judicial inquiry takes delay. This is his observation. But Shri Somnath Chatterjee you know better when we lost the power in West Bengal, you thought to find our mistakes through three Inquiry Commissions. You appointed the Chakraborty Commission, the Sharma Commission and the Basu Commission. Maybe, they did not bring the truth whether it was right or wrong.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR): It is a diversion.

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : It is not a diversion. Why are you saying it is a diversion? It is my right to reply to their views. But you may feel it may take a long time and it will delay. But I give you an example. It is not delayed. If the Government is determined to get the truth within a timeframe, it can get the truth. The example is Wadhwa Commission. Did it take time? If you feel Judicial Inquiry has no purpose, then let us wind up the Liberhan Commission which is appointed to unearth the truth behind the Babri Masjid demolition.

MR. SPEAKER: Your time is up.

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : I will take another two minutes. What is the point of Liberhan Commission? Let us wind up. Let us make a Resolution that no truth will come and it will be delayed. So, let us wind it up. Why are the Inquiry Commission’s reports not helping because sometimes the Government lacks confidence, courage and conviction to respond? You take Sri Krishna Commission’s Report. Yes, it is not the fault of the Sri Krishna Commission. They brought the truth. It is the fault of the Government of the day, be it my Party or your Party who lacks the courage and conviction to act according to the recommendation. We are weak. The people are not weak. We try to manoeuvre and manipulate ourselves and blame the Commission’s Report.

Therefore, I think the demand for a judicial inquiry or commission is a justified thing. We do not want to create a situation by dividing the mind and mood of the Opposition. But I think the entire Opposition is unanimous on one point, that the Government lacks perception.

Even if I have heard perfectly the speech of Shri Sudip Bandyopadhyay of the Trinamool Congress Party, the Government has to concede that something is wrong in security. . … (Interruptions)

Please do not shout. Try to respect the speeches. You may shout like this. What can I do? I cannot compete with your shouting.

I do not want to quote what Shri what Shri George Fernandes said. But it was reported in The Indian Express:

अगर यह जगह ठीक से मेनटेन होती, यह जगह खाली नहीं होती तो वे लोग नहीं आ सकते थे।

He pointed out a place. You discussed all those things. Shri Madan Lal Khurana had expressed his views outside.

Shri Vijay Malhotra is worried. He need not worry. We are not going to break them. In their own interest if they decide to resign from their party, then it is not our fault.

MR. SPEAKER: Shri Dasmunsi, you have already said it.

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : I request, Mr. Home Minister, therefore — Mr. Home Minister, not Advaniji — once again, `once again’ – please see that the lapses are dealt not politically, by Congress or CPI (M) or any party; lapses should be dealt by an objective inquiry, no less than a judicial inquiry.

I would have been grateful to the Prime Minister and the Home Minister if they had, without waiting for our Motion, come to the House and told us, “We are strong enough in the country in the matter of Kashmir, when the entire Parliament is united we do not mind to appoint a judicial inquiry; here is the inquiry.” It would have enhanced their credibility. They did not say that. Why? I will explain.

Therefore, I do not insist that we should demand a Division because I do not want to divide the ranks of the Opposition in response to the Motion. But I want action from the Government, till the time is over, Pray, respond to the Motion, bring the probe, judiciously, in the interest of not only today and for the future and govern the country in terms of the national governance policy that you have claimed. And, do not blame the Congress Party; do not play double standards.

MR. SPEAKER: Kumari Mayawati wanted to seek some clarifications. … (Interruptions)

श्री विजय गोयल (चांदनी चौक) : दिल्ली में तीन हजार सिख मरे हैं, उनका क्या हुआ?

MR. SPEAKER: Shri Khurana, please.

… (Interruptions)

श्री मदन लाल खुराना (दिल्ली सदर) : दिल्ली में तीन हजार लोग मरे हैं, उसमें आपने आज तक एक आदमी को भी सजा नहीं दिलवाई।…( व्यवधान) उसमें क्या हुआ, उसकी आपने जांच कराई? तीन हजार लोगों को दिल्ली में जिंदा जलवा दिया गया था और पुलिस को वापस बुला लिया गया था। बूटा सिंह जी, आप उस समय होम मनिस्टर थे।…( व्यवधान) उसमें एक भी आदमी को सजा नहीं दी गई, आप डेमोक्रेसी की बात करते हैं।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : खुराना जी, आप बैठ जाइये।

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Madam, please understand that this is not the stage to seek clarifications because you had already participated in the debate.

… (Interruptions)

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : She just wants to inquire about some points. It is an important matter. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: You had raised your points yesterday also.

कुमारी मायावती (अकबरपुर) : माननीय अध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से माननीय गृह मंत्री जी से केवल एक रिक्वैस्ट करना चाहती हूं, एक मिनट में।

MR. SPEAKER: Kumari Mayawati, please.

कुमारी मायावती : माननीय अध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से माननीय गृह मंत्री जी से केवल एक रिक्वैस्ट करना चाहती हूं कि हमारा देश धर्मनिरपेक्ष देश है और सभी धर्मों के मानने वाले लोग यहां रहते हैं, हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई, पारसी और बुद्धिस्ट। जम्मू-कश्मीर में भी इन सभी धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं। कश्मीर की समस्या का समाधान करने के लिए और आतंकवाद के खिलाफ सख्ती करने के लिए कदम उठायें। क्योंकि जम्मू-कश्मीर में प्रेसीडेंट रूल नहीं है, वहां पर लोकप्रिय सरकार है और जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री कोई हिन्दू नहीं है, मुस्लिम समाज का बेटा डा. फारूख अब्दुल्ला है। जब आप कश्मीर की समस्या का कोई हल निकालें,

आतंकवादियों के खिलाफ कोई एक्शन लें तो आप वहां के मुख्य मंत्री, डा. फारुक अब्दुल्ला को गुड फेथ में लेकर लें ताकि पूरे मुल्क में यह मैसेज जाए कि आपने मुस्लिमों को फेथ में लेकर डिसीजन लिया है।

MR. SPEAKER: I shall now put the motion moved by Shri Priya Ranjan Dasmunsi to the vote of the House.

The question is:

“That this House expresses its anguish and deep sense of grief over the incidents of killing of innocent persons including pilgrims of Amarnath Yatra in Jammu and Kashmir and urges upon the Government to appoint a Commission of Inquiry headed by a sitting Judge of a High Court to inquire into the matter with specific terms of reference to go into the aspect of security lapses, if any, and to report within three months from the date of its appointment. ”

The motion was negatived.

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