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Issue Regarding Strike By Advocates In Kanpur. on 30 April, 2010

Lok Sabha Debates
Issue Regarding Strike By Advocates In Kanpur. on 30 April, 2010


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Title: Issue regarding strike by Advocates in Kanpur.

श्री राजाराम पाल (अकबरपुर):अध्यक्ष महोदया, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे एक अत्यन्त महत्वपूर्ण विषय पर बोलने का अवसर दिया।

          महोदया, आज पूरे देश में न्यायलयों में लंबित मुकद्मों के बारे में सरकार चिंतित है। इसीलिए सरकार चाहती है कि तहसील, ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर पर न्यायालय स्थापित करके त्वरित न्याय दिलाया जाए। प्रत्येक न्यायालय में यह भी लिखा रहता है कि वादकारी का हित, सर्वोच्च हित। लेकिन जस्टिस लेट, जस्टिस डिनाईड भी होता है।

          महोदया, आपके माध्यम से मैं सरकार के ध्यान में लाना चाहता हूं कि कानपुर में प्रतिदिन 15 हजार मामले प्रतिदिन निस्तारित होते हैं। कानपूर में 07.04.2010 को पुलिस द्वारा निहत्थे वकीलों पर लाठीचार्ज करने के कारण वकील हड़ताल पर चले गए हैं। मामला यहीं समाप्त नहीं हुआ, 8 और 9 तारीख को पुलिस द्वारा सैंकड़ों घायल वकीलों को बुरी तरह पीटते हुए उनके चैंबरों को तोड़ा गया। बार एसोसिएशन की लायब्रेरी में घुसकर पुलिस ने तांडव किया, जिसके कारण लायब्रेरी भी क्षतिग्रस्त हुई है। वहां के वकील हड़ताल पर हैं। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने उन अधिवक्ताओं के समर्थन में एक दिवसीय हड़ताल की है।

          महोदया, अभी तीन-चार दिन पहले जिला जज की हठधर्मिता के चलते और उत्तर प्रदेश शासन के चलते कानपुर कोर्ट के मुकद्मे इटावा ट्रंसफर कर दिए गए हैं। कानपुर से इटावा ढाई सौ किलोमीटर दूर है। इसके कारण जेल में बंद लोगों की जमानत नहीं हो पा रही है। इटावा के वकीलों ने भी कानपुर के वकीलों के समर्थन में हड़ताल का आह्वान किया है। ऐसी स्थिति में वादकारियों का अहित होरहा है ।

          अध्यक्ष महोदया, मैं आपके माध्यम से कानून मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि जो कानपुर के अधिवक्ताओं की मांग है कि डिस्ट्रिक्ट जज को वहां से स्थानांतरित कर दिया जाए और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही हो। मैं चाहता हूं कि वादकारियों के हित में कानून मंत्री जी हस्तक्षेप करें ताकि हड़ताल समाप्त हो और वादकारियों का हित हो सके। दोषी लोगों के खिलाफ कार्यवाही करते हुए वकीलों के चेम्बर्स को तोड़ने से जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कराने के लिए आप सरकार को निर्देश दें, ऐसी मैं मांग करता हूं।

          अध्यक्ष महोदया, इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।