Judgements

Made A Statement Regarding Government Business For The Week … on 4 December, 1998

Lok Sabha Debates
Made A Statement Regarding Government Business For The Week … on 4 December, 1998


Title: Made a statement regarding Government Business for the week commencing the 7th December,1998 and submission made by members.

1204 hours संसदीय कार्य मंत्री तथा पर्यटन मंत्री (श्री मदन लाल खुराना): अध्यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से मैं यह सूचित करता हूं कि सोमवार, ७ दिसम्बर, १९९८ से प्रारम्भ होने वाले सप्ताह के दौरान इस सदन में निम्नलखित सरकारी कार्य लिया जायेगा:- १. वर्ष १९८९-९१ के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के तत्कालीन त्

+ɪÉÖEiÉ Eòä 30´ÉäÆ |ÉÊiÉ´ÉnùäxÉ {É®ú SÉSÉÉÇ* २. केन्द्रीय सतर्कता आयोग अध्यादेश, १९९८ और केन्द्रीय सतर्कता आयोग त्

(ºÉƶÉÉävÉxÉ) +vªÉÉnùä¶É, 1998 EòÉ ÊxÉ®úxÉÖ¨ÉÉänùxÉ SÉɽþxÉä ´ÉɱÉä ºÉÉÆÊ´ÉÊvÉEò ºÉÆEò±{É {É®ú SÉSÉÉÇ +Éè®ú EòäxpùÒªÉ ºÉiÉEòÇiÉÉ +ɪÉÉäMÉ Ê´ÉvÉäªÉEò, 1998 {É®ú Ê´ÉSÉÉ®ú +Éè®ú {ÉÉÊ®úiÉ Eò®úxÉÉ* ३. राज्य सभा द्वारा पारित किए गए रूप में दिल्ली विकास प्राधिकरण त्

(+xÉÖ¶ÉɺÉxÉÉi¨ÉEò ¶ÉÊEiɪÉÉäÆ EòÉ Ê´ÉÊvɨÉÉxªÉEò®úhÉ) Ê´ÉvÉäªÉEò, 1998 {É®ú Ê´ÉSÉÉ®ú +Éè®ú {ÉÉÊ®úiÉ Eò®úxÉÉ* ४. निम्नलखित विधेयकों पर विचार और पारित करना:- (१) उच्च मूल्य बैंक नोट (विमुद्रीकरण) संशोधन विधेयक, १९९८ (२) रेल दावा अधिकरण (संशोधन) विधेयक, १९९८ (३) विस्फोटक पदार्थ (संशोधन) विधेयक, १९९८ (४) उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश (सेवा शर्तें) संशोधन विधेयक, १९९८ (५) काफी (संशोधन) विधेयक, १९९८ ५. वर्ष १९९८-९९ के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगें (सामान्य) पर चर्चा और त्

¨ÉiÉnùÉxÉ* ६. बीमा वनियामक प्राधिकरण विधेयक, १९९८ पर विचार और पारित करना।

MR. SPEAKER: Now, we will take up Submissions by the Members.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: After the Submissions, please.

… (Interruptions) श्री अजीत जोगी (रायगढ़): आपने कहा था कि डा. मुरली मनोहर जोशी जी स्टेटमैंट देंगे।

… (´ªÉ´ÉvÉÉxÉ)

MR. SPEAKER: The Minister is going to make the statement.

… (Interruptions)

> श्री शैलेन्द्र कुमार (चैल) : अध्यक्ष महोदय, उत्तर प्रदेश के नव स्ृाजित जिले कोशाम्बी, फतेहपुर, इलाहाबाद नैशनल हाईवे पर दिन-प्रतदिन बढ़ते हुए ट्रेफिक के कारण अकसर जाम लगा रहता है, फलस्वरूप आए दिन बहुत सी गंभीर दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। कई स्थानीय लोग भी दुर्घटनाग्रस्त होकर मारे गए हैं। ऐसी स्िथति में अकसर वहां तनाव बना रहता है। जनहित में भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं को मद्देनजर रखते हुए वहां पर एक बाईपास का बनाया जाना नितान्त आवश्यक है। संभवत: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस बाईपास के निर्माणार्थ कोई प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास विचाराधीन लम्िबत है परन्तु अभी तक इस पर कोई कारगर कार्यवाही नहीं हो पाई है। विषय की गंभीरता को देखते हुए मैं चाहूंगा कि इसे आगामी सप्ताह की सूची में समाहित किया जाए।

—>

> श्री चन्द्रशेखर साहू (महासुमन्द): अध्यक्ष महोदय, आगामी सप्ताह हेतु कार्यसूची में निम्नलखित प्रस्ताव शामिल करने हेतु अनुरोध करता हूं:- १. भारतीय संघ में छत्तीसगढ़ के १६ नए जिलों को मिलाकर नए राज्य संबंधी त्

Ê´ÉvÉäªÉEò ¶ÉÒQÉ |ɺiÉÖiÉ ÊEòB VÉÉBÆ* २. छत्तीसगढ़ (म.प्र.) के अकाल प्रभावित क्षेत्र के संबंध में विशेषकर त्

nùä´É¦ÉÉäMÉ, ¨ÉèxÉ{ÉÖ®ú, ¤ÉÉMɤÉɽþ®úÉ, ¨É½þɺÉÖ¨Éxnù, ¤ÉºÉ´ÉÉ, Ê{ÉlÉÉè®úÉ Ê´ÉEòɺÉJÉÆb÷ EòÉä b÷Ò.{ÉÒ.B.{ÉÒ. Eòä iɽþiÉ ¶ÉÉÊ¨É±É ÊEòB VÉÉxÉä Eòä ºÉÆ¤ÉÆvÉ ¨ÉäÆ *

> श्री रामनारायण मीणा (कोटा) : अध्यक्ष महोदय, कृपया निम्नांकित विषयों को अगले सप्ताह की कार्य सूची में सममलित किया जाए – १. ट्रेन नं.२०१९ एवं २०२० देहरादून एकसप्रैस का जनहित में काप्रेण स्टेशन त्

{É®ú `ö½þ®úÉ´É ÊEòªÉÉ VÉÉB* २. ऐतिहासिक स्थल चित्तौड़गढ़ से प्रमुख शहर बूंदी, कोटा, बारां, बीना होकर त्

¦ÉÉä{ÉÉ±É iÉEò BEò pùÖiÉMÉɨÉÒ ]ÅäxÉ SɱÉÉ Eò®ú +É¨É VÉxÉiÉÉ EòÒ ¨ÉÉÆMÉ EòÒ {ÉÚÊiÉÇ EòÒ VÉÉB*

—>

*m0>5> श्री जगत वीर सिंह द्रोण (कानपुर): अध्यक्ष महोदय, कृपया अगले सप्ताह की कार्यसूची में निम्नलखित विषय सम्िमलित करने की अनुमति प्रदान करें – १. उत्तर प्रदेश के सबसे अधिक जनसंख्या वाले तथा उत्तर भारत के प्रमुख त्

+ÉètÉäÊMÉEò xÉMÉ®ú EòÉxÉ{ÉÖ®ú Eòä +ÉètÉèÊMÉEò º´É°ü{É EòÉä ¤ÉSÉÉxÉä ½þäiÉÖ Eòäxpù ºÉ®úEòÉ®ú uÉ®úÉ ¨ÉڱɦÉÚiÉ føÉÆSÉÉ ºlÉÉÊ{ÉiÉ Eò®úxÉä ½þäiÉÖ iÉlÉÉ +ÉÊlÉÇEò ºÉ½þɪÉiÉÉ |ÉnùÉxÉ Eò®úxÉä ½þäiÉÖ ªÉÉäVÉxÉÉ iÉèªÉÉ®ú Eò®úxÉÉ* २. उत्तर भारत के प्रमुख औद्योगिक नगर कानपुर में पेयजल, सीवर व्यवस्था, जल त्

ÊxÉEòɺÉÒ, Ê´ÉtÖiÉ ´ªÉ´ÉºlÉÉ iÉlÉÉ ºÉc÷EòÉäÆ Eòä ÊxɨÉÉÇhÉ ½þäiÉÖ |Énùä¶É ºÉ®úEòÉ®ú Eòä {ÉÉºÉ ºÉƺÉÉvÉxÉ Eòä +¦ÉÉ´É ¨ÉäÆ Eòäxpù ºÉ®úEòÉ®ú uÉ®úÉ Ê´É¶´É ¤ÉèÆEò +lÉ´ÉÉ ÊEòºÉÒ +xªÉ »ÉÉäiÉ ºÉä ºÉÆºÉÉvÉxÉ ={ɱɤvÉ Eò®úÉEò®ú 40 ±ÉÉJÉ EòÒ VÉxÉºÉÆJªÉÉ ´ÉɱÉä

*m0>6> प्रो. अजित कुमार मेहता (समस्तीपुर) : अध्यक्ष महोदय, मैं आज संसदीय कार्य मंत्री को अगले सप्ताह की कार्यसूची में सम्िमलित करने के लिए निम्नलखित सुझाव देने की अनुमति चाहता हूं – १. समस्तीपुर जिला (बिहार) के दक्षिणी छोर पर गंगा के कटाव को नियंत्रित त्

करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा बिहार राज्य को आवश्यक तकनीकी सलाह एवं पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने पर विचार। २. बिहार राज्य के समस्तीपुर जिले में हलसिंह सराय रेलवे स्टेशन के निकट त्

रेलवे की अतरिकत भूमि पर रेलवे अथवा अन्य उपयुकत एजैंसी द्वारा मैर्केट परिसर का निर्माण कर दुकानदारों को आवंटित करने पर विचार।ऊ

।०>7

ऊच्ङक्ष् एॠच्छ क़्कए ॠक्ॠङक्ष्ॠ (एॠग़्ख़्छङॠ): क्ष् द्ृद्वथ्ड्ड थ्त्ड्ढ द्यद्ृ ठ्ठड्ढ द्यण्ड्ढ ढद्ृथ्थ्द्ृत्दढ़ द्मद्वडत्द्मद्मत्द्ृदद्म ढद्ृद्ध द्यण्ड्ढ दड्ढन्द्य ड्ढड्ढद्म”द्म डद्वद्मत्दड्ढद्मद्म:

थ्. द्ृ ड्डत्द्मड़द्वद्मद्म द्यण्ड्ढ त्द्मद्मद्वड्ढ द्ृढ द्ृड्ढद डड्ढत्दढ़ द्मद्ृथ्ड्ड द्ृढढ ढद्ृद्ध ङद्म.५०००/- त्द

ॠदड्डण्द्धठ्ठ घ्द्धद्दड्डड्ढद्मण्.

२. क्ष्ड्ढड्डत्ठ्ठद्यड्ढ द्मद्यड्ढद्रद्म द्यद्ृ डड्ढ द्यठ्ठड्ढद द्यद्ृ डद्धत्दढ़ ॠद्मठ्ठदद्मद्ृथ्-क़्द्वद्धढ़ठ्ठद्रद्वद्ध द्वदड्डड्ढद्ध थ्द्ृड़ठ्ठथ्

ड़ठ्ठथ्थ् ड्डत्ठ्ठथ्थ्त्दढ़ ढठ्ठड़त्थ्त्द्यत्ड्ढद्म त्दद्मद्यड्ढठ्ठड्ड द्ृढ च्क़्.

—ऊ

।०>8

ऊच्ङक्ष् क्र.ग्. एॠग़्ॠज़्ॠॠ (घ्ग़्ग़्ॠग़्क्ष्): क्ष् द्धड्ढद्दद्वड्ढद्मद्य द्यण्ठ्ठद्य द्यण्ड्ढ ढद्ृथ्थ्द्ृत्दढ़ ठ्ठ डड्ढ त्दड़थ्द्वड्डड्ढड्ड त्द दड्ढन्द्य ड्ढड्ढ”द्म डद्वद्मत्दड्ढद्मद्म:-

“कन्द्यड्ढदद्मत्ध्ड्ढ द्मड्ढठ्ठद्धड़ण्ड्ढद्म द्ृढ ण्द्ृद्वद्मड्ढद्म ठ्ठदड्ड ठ्ठद्धद्धड्ढद्मद्यद्म द्ृढ त्ददद्ृड़ड्ढदद्य ग्द्वद्मथ्त्द्म ठ्ठद्धड्ढ ढ़द्ृत्दढ़ द्ृद त्द ड्डत्ढढड्ढद्धड्ढदद्य द्रठ्ठद्धद्यद्म द्ृढ द्यण्ड्ढ ड़द्ृद्वदद्यद्ध ठ्ठदड्ड द्यण्ड्ढद्धड्ढ त्द्म ठ्ठद ठ्ठद्यद्यड्ढद्रद्य ठ्ठद्य त्दद्यत्त्ड्डठ्ठद्यत्द्ृद द्ृढ द्यण्ड्ढ ग्द्वद्मथ्त् त्दद्ृद्धत्द्य. ण्ड्ढद्धड्ढ त्द्म ठ्ठ दड्ढड्ढड्ड ढद्ृद्ध ढ़द्ृध्ड्ढद्धदड्ढदद्य द्मद्यठ्ठद्यड्ढड्ढदद्य ठ्ठदड्ड ठ्ठड़द्यत्द्ृद द्यद्ृ द्मठ्ठध्ड्ढ द्यण्ड्ढ ग्द्वद्मथ्त् त्दद्ृद्धत्द्य ढद्धद्ृ ण्ठ्ठद्धठ्ठद्मद्मड्ढदद्य.”ऊ

।०>9

ऊच्ङक्ष् एक्ष्ङ च्क्ष्ग़्क्र ग्ॠॠ (घ्छङछक्ष्ॠ): क्ष् द्धड्ढद्दद्वड्ढद्मद्य द्यण्ठ्ठद्य द्यण्ड्ढ ढद्ृथ्थ्द्ृत्दढ़ ठ्ठ डड्ढ त्दड़थ्द्वड्डड्ढड्ड त्द दड्ढन्द्य ड्ढड्ढ”द्म डद्वद्मत्दड्ढद्मद्म:-

(थ्) ङड्ढढ़ठ्ठद्धड्डत्दढ़ ठ्ठद्रद्रद्धद्ृध्ठ्ठथ् द्ृढ ध्ठ्ठद्धत्द्ृद्वद्म द्रद्धद्ृड्ढड़द्यद्म ढद्ृद्ध द्यण्ड्ढ थ्ठ्ठद्मद्य द्यण्द्धड्ढड्ढ ड्ढठ्ठद्धद्म

ड द्यण्ड्ढ क़द्ृद्धड्ढत्ढ़द क्ष्दध्ड्ढद्मद्यड्ढदद्य घ्द्धद्ृद्ृद्यत्द्ृद एद्ृठ्ठद्धड्ड.

(२) ङड्ढद्दद्वड्ढद्मद्य द्यद्ृ द्धड्ढड़द्ृदद्मत्ड्डड्ढद्ध द्यण्ड्ढ ड़थ्द्ृद्मद्वद्धड्ढ द्ृढ ड्ढत्ढ़ण्द्य घ्च्छद्म द्मद्रड्ढड़त्ठ्ठथ्थ् ण्ठ्ठध्त्दढ़

द्वदत्द्यद्म त्द ज़्ड्ढद्मद्य एड्ढदढ़ठ्ठथ्.

—-

१२१२ ण्द्ृद्वद्धद्म

ककक्क्ष्ग़्च् क्ग्ग्क्ष्ककच्

(त्) ग्ठ्ठद्धत्दड्ढ घ्द्धद्ृड्डद्वड़द्यद्म कन्द्रद्ृद्धद्य क़्ड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढदद्य ॠद्वद्यण्द्ृद्धत्द्य

क ग्क्ष्ग़्क्ष्च्कङ क़ क्ग्ग्कङक्क (च्ङक्ष् ङॠग्ॠख़्ङक्ष्च्ग़्ॠ कक्रक़्क): क्ष् डड्ढढ़ द्यद्ृ द्ृध्ड्ढ:

“ण्ठ्ठद्य त्द द्रद्वद्धद्मद्वठ्ठदड़ड्ढ द्ृढ च्ड्ढड़द्यत्द्ृद ४(३)(ड़) द्ृढ द्यण्ड्ढ ग्ठ्ठद्धत्दड्ढ घ्द्धद्ृड्डद्वड़द्यद्म कन्द्रद्ृद्धद्य क़्ड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढदद्य ॠद्वद्यण्द्ृद्धत्द्य ॠड़द्य, थ्९७२ ठ्ठदड्ड ङद्वथ्ड्ढ ४(थ्) द्ृढ ग्ठ्ठद्धत्दड्ढ घ्द्धद्ृड्डद्वड़द्यद्म कन्द्रद्ृद्धद्य क़्ड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढदद्य ॠद्वद्यण्द्ृद्धत्द्य ङद्वथ्ड्ढद्म, थ्९७२, द्यण्ड्ढ ड्ढडड्ढद्धद्म द्ृढ द्यण्ड्ढ द्ृद्वद्मड्ढ ड्डद्ृ द्रद्धद्ृड़ड्ढड्ढड्ड द्यद्ृ ड्ढथ्ड्ढड़द्य, त्द द्मद्वड़ण् ठ्ठददड्ढद्ध ठ्ठद्म द्यण्ड्ढ च्द्रड्ढठ्ठड्ढद्ध ठ्ठ ड्डत्द्धड्ढड़द्य, द्यद्ृ ड्ढडड्ढद्धद्म ढद्धद्ृ ठ्ठद्ृदढ़ द्यण्ड्ढद्मड्ढथ्ध्ड्ढद्म द्यद्ृ द्मड्ढद्धध्ड्ढ ठ्ठद्म ड्ढडड्ढद्धद्म द्ृढ द्यण्ड्ढ ग्ठ्ठद्धत्दड्ढ घ्द्धद्ृड्डद्वड़द्यद्म कन्द्रद्ृद्धद्य क़्ड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढदद्य ॠद्वद्यण्द्ृद्धत्द्य, द्मद्वडड्ढड़द्य द्यद्ृ द्ृद्यण्ड्ढद्ध द्रद्धद्ृध्त्द्मत्द्ृदद्म द्ृढ द्यण्ड्ढ द्मठ्ठत्ड्ड ॠड़द्य.”

ग्ङ. च्घ्कॠख़्कङ: ण्ड्ढ द्दद्वड्ढद्मद्यत्द्ृद त्द्म :

“ण्ठ्ठद्य त्द द्रद्वद्धद्मद्वठ्ठदड़ड्ढ द्ृढ च्ड्ढड़द्यत्द्ृद ४(३)(ड़) द्ृढ द्यण्ड्ढ ग्ठ्ठद्धत्दड्ढ घ्द्धद्ृड्डद्वड़द्यद्म कन्द्रद्ृद्धद्य क़्ड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढदद्य ॠद्वद्यण्द्ृद्धत्द्य ॠड़द्य, थ्९७२ ठ्ठदड्ड ङद्वथ्ड्ढ ४(थ्) द्ृढ ग्ठ्ठद्धत्दड्ढ घ्द्धद्ृड्डद्वड़द्यद्म कन्द्रद्ृद्धद्य क़्ड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढदद्य ॠद्वद्यण्द्ृद्धत्द्य ङद्वथ्ड्ढद्म, थ्९७२, द्यण्ड्ढ ड्ढडड्ढद्धद्म द्ृढ द्यण्त्द्म द्ृद्वद्मड्ढ ड्डद्ृ द्रद्धद्ृड़ड्ढड्ढड्ड द्यद्ृ ड्ढथ्ड्ढड़द्य, त्द द्मद्वड़ण् ठ्ठददड्ढद्ध ठ्ठद्म द्यण्ड्ढ च्द्रड्ढठ्ठड्ढद्ध ठ्ठ ड्डत्द्धड्ढड़द्य, द्यद्ृ ड्ढडड्ढद्धद्म ढद्धद्ृ ठ्ठद्ृदढ़ द्यण्ड्ढद्मड्ढथ्ध्ड्ढद्म द्यद्ृ द्मड्ढद्धध्ड्ढ ठ्ठद्म ड्ढडड्ढद्धद्म द्ृढ द्यण्ड्ढ ग्ठ्ठद्धत्दड्ढ घ्द्धद्ृड्डद्वड़द्यद्म कन्द्रद्ृद्धद्य क़्ड्ढध्ड्ढथ्द्ृद्रड्ढदद्य ॠद्वद्यण्द्ृद्धत्द्य, द्मद्वडड्ढड़द्य द्यद्ृ द्ृद्यण्ड्ढद्ध द्रद्धद्ृध्त्द्मत्द्ृदद्म द्ृढ द्यण्ड्ढ द्मठ्ठत्ड्ड ॠड़द्य.”

ण्ड्ढ द्ृद्यत्द्ृद ठ्ठद्म ठ्ठड्डद्ृद्रद्यड्ढड्ड.

—-

(त्त्) क्ड्ढदद्यद्धठ्ठथ् क्द्ृद्ृद्धड्डत्दठ्ठद्यत्द्ृद क्द्ृत्द्यद्यड्ढड्ढ ढद्ृद्ध कद्दद्वठ्ठथ् द्रद्रद्ृद्धद्यद्वदत्द्यत्ड्ढद्म

ढद्ृद्ध क़्त्द्मठ्ठडथ्ड्ढड्ड घ्ड्ढद्धद्मद्ृदद्म

क ग्क्ष्ग़्क्ष्च्कङ क़ च्ॠक क़ क ग्क्ष्ग़्क्ष्च्ङ क़ च्क्क्ष्ॠ ख्छच्क्ष्क्क ॠग़्क़् कग्घ्ज़्कङग्कग़् (च्ङक्ष्ग्ॠक्ष् ग्ॠग़्कख़्ॠ क्रॠग़्क़्क्ष्): क्ष् डड्ढढ़ द्यद्ृ द्ृध्ड्ढ :

“ण्ठ्ठद्य त्द द्रद्वद्धद्मद्वठ्ठदड़ड्ढ द्ृढ च्ड्ढड़द्यत्द्ृद ३(२)(ण्) द्ृढ द्यण्ड्ढ घ्ड्ढद्धद्मद्ृदद्म त्द्यण् क़्त्द्मठ्ठडत्थ्त्द्यत्ड्ढद्म (कद्दद्वठ्ठथ् द्रद्रद्ृद्धद्यद्वदत्द्यत्ड्ढद्म) घ्द्धद्ृद्यड्ढड़द्यत्द्ृद द्ृढ ङत्ढ़ण्द्यद्म ठ्ठदड्ड क़द्वथ्थ् घ्ठ्ठद्धद्यत्ड़त्द्रठ्ठद्यत्द्ृद) ॠड़द्य, १९९५, द्यण्ड्ढ ड्ढडड्ढद्धद्म द्ृढ द्यण्त्द्म द्ृद्वद्मड्ढ ड्डद्ृ द्रद्धद्ृड़ड्ढड्ढड्ड द्यद्ृ ड्ढथ्ड्ढड़द्य त्द द्मद्वड़ण् ठ्ठददड्ढद्ध ठ्ठद्म द्यण्ड्ढ च्द्रड्ढठ्ठड्ढद्ध ठ्ठ ड्डत्द्धड्ढड़द्य, द्यद्ृ ग्ड्ढडड्ढद्धद्म ढद्धद्ृ ठ्ठद्ृदढ़ द्यण्ड्ढद्मड्ढथ्ध्ड्ढद्म द्यद्ृ द्मड्ढद्धध्ड्ढ ठ्ठद्म ग्ड्ढडड्ढद्धद्म द्ृद द्यण्ड्ढ क्ड्ढदद्यद्धठ्ठथ् क्द्ृद्ृद्धड्डत्दठ्ठद्यत्द्ृद क्द्ृत्द्यद्यड्ढड्ढ ढद्ृद्ध द्यण्ड्ढ द्रड्ढद्धत्द्ृड्ड द्यत्थ्थ् द्यण्ड्ढ ड़ड्ढठ्ठद्मड्ढ द्यद्ृ डड्ढ द्यण्ड्ढ ग्ड्ढडड्ढद्धद्म द्ृढ द्यण्ड्ढ द्ृद्वद्मड्ढ द्मद्वडड्ढड़द्य द्यद्ृ द्ृद्यण्ड्ढद्ध द्रद्धद्ृध्त्द्मत्द्ृदद्म द्ृढ द्यण्ड्ढ ॠड़द्य ठ्ठदड्ड द्यण्ड्ढ ङद्वथ्ड्ढद्म ठ्ठड्डड्ढ द्यण्ड्ढद्धड्ढद्वदड्डड्ढद्ध.”

ग्ङ. च्घ्कॠख़्कङ: ण्ड्ढ द्दद्वड्ढद्मद्यत्द्ृद त्द्म :

“ण्ठ्ठद्य त्द द्रद्वद्धद्मद्वठ्ठदड़ड्ढ द्ृढ च्ड्ढड़द्यत्द्ृद ३(२)(ण्) द्ृढ द्यण्ड्ढ घ्ड्ढद्धद्मद्ृदद्म त्द्यण् क़्त्द्मठ्ठडत्थ्त्द्यत्ड्ढद्म (कद्दद्वठ्ठथ् द्रद्रद्ृद्धद्यद्वदत्द्यत्ड्ढद्म) घ्द्धद्ृद्यड्ढड़द्यत्द्ृद द्ृढ ङत्ढ़ण्द्यद्म ठ्ठदड्ड क़द्वथ्थ् घ्ठ्ठद्धद्यत्ड़त्द्रठ्ठद्यत्द्ृद) ॠड़द्य, १९९५, द्यण्ड्ढ ड्ढडड्ढद्धद्म द्ृढ द्यण्त्द्म द्ृद्वद्मड्ढ ड्डद्ृ द्रद्धद्ृड़ड्ढड्ढड्ड द्यद्ृ ड्ढथ्ड्ढड़द्य त्द द्मद्वड़ण् ठ्ठददड्ढद्ध ठ्ठद्म द्यण्ड्ढ च्द्रड्ढठ्ठड्ढद्ध ठ्ठ ड्डत्द्धड्ढड़द्य, द्यद्ृ ग्ड्ढडड्ढद्धद्म ढद्धद्ृ ठ्ठद्ृदढ़ द्यण्ड्ढद्मड्ढथ्ध्ड्ढद्म द्यद्ृ द्मड्ढद्धध्ड्ढ ठ्ठद्म ग्ड्ढडड्ढद्धद्म द्ृद द्यण्ड्ढ क्ड्ढदद्यद्धठ्ठथ् क्द्ृद्ृद्धड्डत्दठ्ठद्यत्द्ृद क्द्ृत्द्यद्यड्ढड्ढ ढद्ृद्ध द्यण्ड्ढ द्रड्ढद्धत्द्ृड्ड द्यत्थ्थ् द्यण्ड्ढ ड़ड्ढठ्ठद्मड्ढ द्यद्ृ डड्ढ द्यण्ड्ढ ग्ड्ढडड्ढद्धद्म द्ृढ द्यण्ड्ढ द्ृद्वद्मड्ढ द्मद्वडड्ढड़द्य द्यद्ृ द्ृद्यण्ड्ढद्ध द्रद्धद्ृध्त्द्मत्द्ृदद्म द्ृढ द्यण्ड्ढ ॠड़द्य ठ्ठदड्ड द्यण्ड्ढ ङद्वथ्ड्ढद्म ठ्ठड्डड्ढ द्यण्ड्ढद्धड्ढद्वदड्डड्ढद्ध.”

ण्ड्ढ द्ृद्यत्द्ृद ठ्ठद्म ठ्ठड्डद्ृद्रद्यड्ढड्ड.

—-