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Title : Malpractice in export of non-basmati rice to Africa.
श्री शरद यादव (मधेपुरा) : अध्यक्षा जी, आप जानती हैं कि देश में किस प्रकार से अनाज की कमी है। बरसात के नहीं होने के कारण यह कमी और बढ़ गई है। पिछले लम्बे समय से, देशभर के अनेक अखबारों में चावल के घोटाले के बारे में खबरें आती रही हैं। 20 लाख टन चावल का घोटाला हुआ है। एक लाख नहीं, दो लाख नहीं, क्विंटल नहीं, बल्कि 20 लाख टन चावल का घोटाला हुआ है। दुनिया में जहां अफ्रीका और दक्षिण अफ्रीका के लोग हैं, उनकी भूख की समस्या को देखते हुए आपने एक एक्सपर्ट ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स बनाया। दुनिया के बाजार में चावल एक्सपोर्ट करने में हमारा दूसरा स्थान है। यदि हमारे देश से दुनिया के बाजार में चावल एक्सपोर्ट नहीं हो, तो दाम ज्यादा हो जाते हैं। जब भारत के बाजार में चावल के दाम कम थे, तब आपने अनुमति दी, बल्कि विशेष अनुमति दी। आपने डिप्लोमैटिक चैनल के माध्यम से दुनिया के देशों को यह संदेश देना चाहा कि जहां भुखमरी और गरीबी है, वहां चावल भेजा जाए। 20 लाख टन चावल के इस स्कैम को इस देश ने नहीं, बल्कि घाना की सरकार ने एक्सपोज किया।
महोदया, अमीरा फूड्स लिमिटेड और शिव नारायण हरि राम नाम की कंपनियां हैं, ये चावल खरीदती हैं। इन्होंने चावल खरीद कर इस मामले में लगभग 250 करोड़ रुपए का घोटाला किया। एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, बल्कि 250 करोड़ रुपए का घोटाला किया। इसके साथ ही मैं कहना चाहता हूं कि देश में पल्सेस की इतनी ज्यादा कमी है, क्योंकि हमारा उत्पादन कम होता है और इन्हें हम इम्पोर्ट करते हैं। इसके बाद यह घोटाला हुआ जो लगभग 250 करोड़ रुपए का है।
महोदया, जब पूरे देश में इस घोटाले पर सवाल खड़े हुए, तो सरकार ने प्रिलीमिनरी इन्क्वायरी सी.बी.आई. से कराई और सी.बी.आई. ने कहा कि इस मामले में 250 करोड़ रुपए की हेराफेरी हुई है। ये दिल्ली बेस्ड कंपनियां हैं। उनके घर पर रेड की गई और यह पाया गया कि दुबई में जो कंपनी है, उनके साथ मिलकर यह स्कैम किया गया है। चावल के मामले में, दाल के मामले में, स्कैम के बाद स्कैम हो रहे हैं। इसे हमारी जो इम्पोर्ट, एक्सपोर्ट और कॉमर्स मिनिस्ट्री है, उसे देखना चाहिए।
महोदया, मैं आपके माध्यम से इस मामले में सदन के नेता से निवेदन करूंगा कि यह कंपनी कोई बाहर की नहीं है, कहीं बहुत दूर की नहीं है, बल्कि बिलकुल पास की है और यह दिखता है कि इस मामले में घोटाला हुआ है और आपकी सरकार की सी.बी.आई. इन्क्वायरी कर रही है, लेकिन भारत सरकार में इस घोटाले को करने के बाद आज तक किसी भी आदमी को, जो पुराने मंत्री हैं, जो पुराने ब्यूरोक्रेट्स हैं, उन्हें एकाउंटेबल नहीं ठहराया और न इस बारे में आपने अभी तक कुछ किया है। यह दूसरा स्कैम है, जो 250 करोड़ रुपए का है। आपकी जो सी.बी.आई. है, उसने यह अनुमान लगाकर दिया है कि इस मामले में 250 करोड़ रुपए की हेराफेरी हुई है। देश में दाने-दाने को लोग मोहताज हैं। देश में लोग भूखों मर रहे हैं और दुनिया में आप अनाज भेज रहे हैं। दुनिया को जरूरत होती है, मैं नहीं कहता कि दुनिया में जो गरीबी है, भूख है, हम उसे नहीं मिटाएं।
महोदया, सवाल है कि वह चावल घाना को भेजना था। लैटर ऑफ क्रैडिट स्विटजरलैंड से था। आपने यह स्कैम उजागर नहीं किया, बल्कि घाना सरकार ने इसे एक्सपोज किया है। इसलिए मैं चाहूंगा कि इस गम्भीर मामले में आप तत्काल ध्यान दें और जो कलप्रिट हैं, जो इस स्कैम में पूरी तरह से, आकंठ डूबे हुए हैं, उन लोगों के ऊपर कारगर कार्रवाई करें, क्योंकि सरकार के जरिये ही कार्रवाई हो सकती है। मैं आपके माध्यम से सरकार से यही मांग करता हूं और कहना चाहता हूं कि आप इसमें बहुत विलम्ब कर रहे हैं।
इस पर कार्रवाई करने के लिए आपके पास सीधे हस्तक्षेप करने का मामला है, लेकिन आपने अभी तक हस्तक्षेप नहीं किया है। यह मामला उस सदन में उठ चुका है, बाहर भी उठ रहा है, लेकिन आपकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही है, आपका कोई रैस्पोंस नहीं आ रहा है।…( व्यवधान)
श्री ए.सम्पत (अटिंगल): अध्यक्ष महोदया, मैं भी श्री शरद यादव के साथ अपने आपको सम्बद्ध करता हूं।
श्री विलास मुत्तेमवार (नागपुर):माननीय अध्यक्ष महोदया, मैं आपका धन्यवाद करता हूं कि इस महत्वपूर्ण समस्या की तरफ आपने मुझे ध्यान आकर्षित करने की इजाजत दी है। मैं आपके माध्यम से बताना चाहता हूं कि यह जो घरेलू…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी): अध्यक्ष महोदया, यह इतना गम्भीर मामला है, इस पर हम भी बोलना चाहते हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : किस चीज़ का?
श्री मुलायम सिंह यादव : इस पर औरों की राय भी आनी चाहिए।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : अभीये बोल रहे हैं।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : ठीक है। वे खड़े हैं, उनको बोलने दीजिए।