Title: Need to accord clearnace to irrigation projects of Bastar region in the State of Chhattisgarh.
(कांकेर): माननीय सभापति जी, वन पर्यावरण तथा वन मंत्रालय द्वारा पर्यावरण अनुमति प्राप्त नहीं मिलने के कारण बस्तर संभाग छत्तीसगढ़ की वभिन्न परियोजना आज भी अधूरी रह गई है। इसके साथ ही १९८० से पूर्व बसे वन भूमि वाले ग्रामवासियों एवं विशेष पिछड़ी जाति के आदिवासियों को शासन से मिलने वाली अन्य सुविधा एवं मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
मेरे संसदीय क्षेत्र सिहावा नगरी विधान सभा जिला धमतरी में सोन्दूर बांध है जिसकी सिंचाई क्षमता १५००० हेक्टेयर है परन्तु बारिश के दिनों में ७०० हेक्टेयर में तथा गर्मी में २५० हेक्टेयर में सिंचाई हो पाती है। ७ टी.एम.सी. पानी रखने की क्षमता वाले बांध में मात्र ३.५० टी.एम.सी. ही पानी रखा जाता है। पानी रखाव क्षेत्र में झाड़ है जिसकी वन पर्यावरण को स्वीकृति नहीं मिल पायी है एवं परियोजना भी अधूरी है।
इसी तरह दुधावा पूर्व सर्वे के अनुसार एक केनाल शेष है। कांकेर जिला के ही पीवी १३३, पीवी ३६ अधूरी, कोटली बोनेली वि.ख. भानुप्रताप पुर प्रस्तावित बांध की औपचारिकता पूर्ण है। रेलवे लाइन दिल्ली राजहरा से राजघाट भी पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिलने से खटाई में है।
सम्पूर्ण वनवासी क्षेत्र की उक्त परियोजना के पूर्ण होने से ही आदिवासियों का विकास संभव है। बोधघाट परियोजना में भी लगभग ३५ करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद पर्यावरण स्वीकृति के अभाव में अपूर्ण है।
मेरा केन्द्र सरकार से निवेदन है कि इऩ परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति दी जाए।