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Title : Need to assess the losses incurred by farmers due to drought and hailstorm in Uttar Pradesh with a view to make payment of insurance amount and compensation to the affected farmers in the State.
कुँवर मानवेन्द्र सिंह (मथुरा) : महोदय, यदि आपकी इजाज़त हो तो मैं यहां से अपनी बात कहना चाहता हूं।
उपाध्यक्ष महोदय : ठीक है। मैंने आपको पहले भी टाइम दिया था, लेकिन आप गलत समझ गए थे।
कुँवर मानवेन्द्र सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा सूखे के बावजूद बड़ी मेहनत से रबी की फसल बड़े अरमानों के साथ उगायी गई, लेकिन इस बार दुर्भाग्यवश शीत ऋतु में बर्फीली सर्दी और पाला पड़ने से, विशेषकर आलू, सरसों और चने की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। मथुरा और आगरा सहित उत्तर प्रदेश के लगभग २२ जिलों के सूखे व पाले की चपेट में आने से यहां के किसानों को भारी नुकसान हुआ है। इस बार वहां के किसानों ने कम पानी की फसल के रूप में सरसों की रिकार्ड बुवायी की थी, परन्तु प्रत्येक किसान पाला पड़ने से प्रभावित हुआ है, बाकी रही-सही कसर चेपा नामक कीट द्वारा फसल नष्ट कर दिए जाने से हो गई है, जिससे किसानों को उनकी लागत भी नहीं मिल सकेगी। इस क्षेत्र में आलू का उत्पादन काफी होता है। इस बार सर्दी का असर काफी हुआ है, जिससे आलू की फसल को काफी नुकसान हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों की हानि का जो मूल्यांकन कराया गया है, वह काफी कम है। मेरे जनपद में आलू और सरसों की ६० से ८० प्रतिशत फसल नष्ट हुई है, जबकि सरकारी आकलन में नष्ट फसल का प्रतिशत ३० से ६० दर्शाया गया है[c78] ।
अत: मेरा सरकार से अनुरोध है कि उत्तर प्रदेश में सूखे व पाले से नष्ट हुई किसानों की फसल का सही आकलन कराने हेतु उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश जारी करें तथा प्रभावित किसानों को शीघ्र ही बीमा राशि का भुगतान, मुआवजा दिलाने हेतु रचनात्मक कदम उठाने की कृपा करें जिससे प्रभावित किसानों के नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सके। धन्यवाद।