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Title : Need to check the spread of Naxalism through socio-economic upliftment of Tribals in the country.
श्री यशवंत लागुरी (क्योंझर): आदिवासी क्षेत्र में विकास के नाम पर विभिन्न परियोजनाएं तथा कल-कारखानों की स्थापना के कारण विस्थापित आदिवासी समाज को असीम पीड़ा झेलनी पड़ रही है। अपनी आंख के सामने अपने को उजड़ता देख और बाहरी लोगों द्वारा उनकी जमीन पर अट्टालिकाएं खड़ी देखकर वह व्यथित हैं। सदियों से शोषित, उपेक्षित अत्याचार एवं अन्याय से पीड़ित आदिवासी समाज अपने अस्तित्व तथा स्वाभिमान की रक्षा के लिए आंदोलित हो रही है। भारत के सबसे गरीब सभी जिले प्रायः आदिवासी क्षेत्र में पड़ते हैं। भीषण गरीबी बेरोजगारी, असहनीय शोषण और अत्याचार से उपजे असंतोष के कारण आदिवासी युवक नक्सलवाद की गिरफ्त में आ जाते हैं1
सदन के माध्यम से सरकार से अनुरोध है कि आदिवासियों के साथ हो रहे अन्याय, शोषण एवं अत्याचार के स्वरूप की पहचान कर उनका समुचित निराकरण करने का उपाय करें और आदिवासियों के विश्वास को पुनः बहाल करने के साथ-साथ इनका सामाजिक तथा आर्थिक स्तर ऊंचा उठाने हेतु विकास तथा कल्याणकारी योजनाओं को शीघ्र लागू करें।